रविवार, 4 जून 2023

बासु चटर्जी

बासु चटर्जी

🎂10 जनवरी 1927
04 जून 2020
हिन्दी फ़िल्मों के एक निर्देशक और पटकथा लेखक थे।
बासु चटर्जी का जन्म अजमेर, राजस्थान, भारत में हुआ था।
1970 और 1980 के दशक के दौरान, वह मध्यम सिनेमा नाम से जाने जाने वाले सिनेमाकाल से जुड़े हुए थे, जहाँ वे हृषिकेश मुखर्जी और बासु भट्टाचार्य जैसे फिल्म निर्माता थे, जिनकी उन्होंने तीसरी कसम (1966) में सहायता भी की थी। उनकी फिल्मों की तरह, चटर्जी की फिल्में भी मध्यवर्गीय परिवारों की हल्की-फुल्की कहानियों के साथ अक्सर शहरी पृष्ठभूमि में होती हैं, जिसमें फ़िल्म की पटकथा वैवाहिक और प्रेम संबंधों पर केंद्रित रहती थी,एक रुका हुआ फैसला (1986) और कमला की मौत (1989) जैसे अपवादों के साथ, जहां पटकथा सामाजिक और नैतिक मुद्दों में केन्द्रित थी। उन्हें उनकी फ़िल्मों उस पार, छोटी सी बात (1975), चितचोर (1976), रजनीगंधा (1974), पिया का घर (1972), खट्टा मीठा, चक्रव्यूह (1978 फ़िल्म), बातों बातों में (1979), प्रियतमा (1977), मन पसंद, हमारी बहू अलका, शौकीन (1982),और चमेली की शादी के लिए जाना जाता है।चमेली की शादी उनकी अंतिम व्यावसायिक रूप से सफल फिल्म थी।

उन्होंने बांग्लादेशी फिल्म एक कप चा के लिए पटकथा लिखी, जिसका निर्देशन नई इम्तियाज नेमुल ने किया था।

04 जून 2020 को बिमारी के कारण उनका निधन हो गया।

पुरुस्कार

2007: आइफा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
1992: परिवार कल्याण पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार - दुर्गा
1991: फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पटकथा पुरस्कार - कमला की मौत
1980: सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स पुरस्कार - जीना यहाँ
1978: फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार - स्वामी
1977: फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पटकथा पुरस्कार - चितचोर नामांकित
1976: फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पटकथा पुरस्कार - छोटी सी बात
1975: सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स पुरस्कार - रजनीगंधा
1972: फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पटकथा पुरस्कार - सारा आकाश

बतौर निर्देशक

वर्ष फ़िल्म टिप्पणी
2006 प्रतीक्षा
1997 गुदगुदी
1994 त्रियाचरित्र
1989 कमला की मौत
1987 ज़ेवर
1986 भीम भवानी
1986 किरायदार
1986 चमेली की शादी
1986 शीशा
1984 लाखों की बात
1983 पसन्द अपनी अपनी
1982 हमारी बहू अलका
1981 शौकीन
1980 अपने पराये
1980 मन पसन्द
1979 जीना यहाँ
1979 मंज़िल
1979 दो लड़्के दो कड़्के
1979 रत्नदीप
1979 बातों बातों में
1979 प्रेम विवाह
1978 तुम्हारे लिये
1978 खट्टा मीठा
1978 दिल्लगी
1977 सफेद झूठ
1977 प्रियतमा
1977 स्वामी
1976 चितचोर
1975 छोटी सी बात


1974 रजनीगंधा
1974 उस पार
1972 पिया का घर 



सुलभा देशपांडे

अभिनेत्री सुलभा देशपांडे के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

🎂 जन्म-21 फरवरी 1937; 
⚰️मृत्यु- 4 जून, 2016

भारतीय अभिनेत्री थीं। विजय तेंदुलकर जैसे प्रख्यात नाट्य लेखकों द्वारा लिखे नाटकों में अभियन करने वाली सुलभा देशपांडे ने कई मराठी और हिन्दी फिल्मों तथा टीवी सीरियलों में काम किया था। उन्होंने मराठी और हिंदी रंगमंच के अलावा मराठी और हिंदी की कई फिल्मों में काम किया। इनमें 'तमन्ना', 'विरासत', 'याराना', 'खून भरी मांग' और 'इंग्लिश विंग्लिश' जैसी कई सफल फिल्मों के नाम शामिल हैं।
सुलभा देशपांडे का जन्म 21 फरवरी सन 1937 में मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ था।
हिन्दी सिनेमा में उन्होंने 'भूमिका' (1977), अरविन्द देसाई की 'अजीब दास्तान' (1978)', 'गमन' (1978) में यादगार भूमिकाएं निभाई।
हाल के दिनों में वे गौरी शिन्दे निर्देशित फिल्म 'इंग्लिश विंग्लिश' में नजर आई थीं।
विजय तेंदुलकर, विजया मेहता और सत्यदेव दुबे के साथ प्रतिष्ठित मराठी थिएटर ग्रुप 'रंगायन' से भी सुलभा देशपांडे जुड़ी रहीं।
उन्होंने अपने पति अरविन्द देशपांडे के साथ 1971 में थिएटर ग्रुप 'आविष्कार' का गठन किया था। उनके पति का 1987 में देहांत हो चुका था।
थिएटर ग्रुप 'आविष्कार' ख़ास तौर से छोटे बच्चों के लिए संगीतमय नाटक बनाने और उन्हें सिखाने का काम करतीं थीं।
उन्हें वर्ष 1987 में हिंदी-मराठी थियेटर में अभिनय के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

फ़िल्म अभिनेत्री निर्मात्री,निर्देशिका नीना गुप्ता

फ़िल्म अभिनेत्री निर्मात्री,निर्देशिका नीना गुप्ता के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

नीना गुप्ता हिंदी सिनेमा जगत  की एक सफल अभिनेत्री, टीवी कलाकार और फिल्म निर्देशक और निर्माता है।
नीना गुप्ता का जन्म 4 जून 1959 दिल्ली में हुआ था। उनके पिता का नाम आर एन गुप्ता है। नीना गुप्ता ने अपनी आरम्भिक पढ़ाई सनावर लौरेंस स्कूल में शिक्षा ग्रहण की।  

नीना गुप्ता  वेस्ट इण्डीज के प्रसिद्द क्रिकेट खिलाडी विवियन रिचर्ड्स से सम्बन्ध थे, जिससे उन्हें एक बेटी भी है, जिसका नाम है मसाबा गुप्ता। वर्तमान में मसाबा गुप्ता जानी-मानी फैशन डिजायनर है। एक लम्बे अन्तराल के बाद नीना ने वर्ष2008 मे पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक मेहरा से शादी कर ली।

नीना गुप्ता को टीवी की दुनिया में  सबसे बड़ा ब्रेक वर्ष 1985 में टीवी शो "खानदान" से मिला था, जिसके बाद उन्होंने यात्रा(1986) गुलजार मिर्जा साहिब ग़ालिब(1987), टीवी मिनी सीरिज आदि की।  इसके अलावा उन्होंने दर्द (1994 डीडी मेट्रो), गुमराह (1 995 डीडी मेट्रो), सांस (स्टार प्लस), सात फेरे:सलोनी का सफार (2005),चिट्ठी(2003), मेरी बिवी का जवाब नहीं (2004), और कितनी मोहब्बत है (2009) में काम किया।  इसकेअलावा वह जस्सी जैसा कोई नहीं में भी नजर आयीं, इस शो में उनके किरदार को लोगो द्वारा काफी पसंद किया गया था। 

नीना ने अपने हिंदी फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1982 में फिल्म 'ये नजदीकियां' से की थी, इसके बाद वह कई अन्य हिंदी फिल्मों में नजर आयीं , जिनमे साथ-साथ ,जाने भी दो यारों, मंडी, त्रिकाल आदि शामिल हैं। इसके अलावा वह हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध गाने "चोली के पीछे क्या है"  के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने टेलीफिल्म्स लाजवंती और बाज़ार सीताराम (1993) निर्मित की हैं, जिसमे उन्हेंबेस्ट फर्स्ट गैर फीचर फिल्म के लिए 1993 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
नीना गुप्ता ने कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में काम किया है, जिनमे से गांधी(1982) हैं, इसमें उन्होंने महात्मा गांधी की भतीजी का किरदार निभाया था, इसके अलावा वह मर्चेंट आइवरी फिल्म द डीसीवर (1988), मिर्जा गालिब (1989) इन कस्टडी (1993), और कॉटन मैरी (1999) भी शामिल है।

एक गुमनाम कम जाने पहचाने गायक, अभिनेता कृष्णा गोयल

🎂जन्म 29 सितंबर 1927
⚰️4 जून, 2010
एक गुमनाम कम जाने पहचाने गायक, अभिनेता कृष्णा गोयल के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

आज एक अनजाने गुमनाम से गायक अभिनेता के बारे में जानकारी शेयर करना चाहता हूँ जिनके बारे में बहुत ज़्यादा जानकारी उपलब्ध नही है न ही उनकी कोई फ़ोटो उपलब्ध है उस गायक अभिनेता का नाम है कृष्णा गोयल

गायक कृष्ण गोयल का जन्म 29 सितंबर 1927 को हुआ था, और उन्होंने 4 जून, 2010 को इस दुनिया को छोड़ दिया। छह साल की उम्र में, उन्होंने जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह जी के दरबार में गाना शुरू किया, और राजकुमार करण सिंह के दोस्त थे  
बाद के वर्षों के दौरान, वह जगजीत सिंह के संगीत कार्यक्रमों में उनके साथ भी जाते थे।

कृष्ण गोयल ने बहुत कम गाने गाए हैं, और उनमें से ज्यादातर का पता लगाना काफी मुश्किल है।

उन्होंने 1945 में कृष्ण सुदामा,1948 में रईस,1950 में दहेज़,1951 में काले बादल,1952 में लंका दहन,1953 में धुआं,1956 में पासिंग शो, मालिक,खुल खुल जा सिम सिम,1957 में नाग पद्मिनी जैसी कुल 11 फिल्मों में  लगभग 20 गाने गाये

इंसान जो रोता है गीत


इंसान जो रोटा है तो रोटा ही रहेगा
भगवान तो आकाश
पे सोता ही रहेगा भगवान तो आकाश पे सोता ही रहेगा सोता
ही रहेगा इंसान
जो रोटा है तो रोटा ही रहेगा
भगवान तो आकाश पे सोता ही रहेगा
सोता ही रहेगा

छोटे भी बड़े भी सभी भगवान के बेटे
छोटे भी बड़े भी सब भगवान के बेटे
फिर किसान बनाए हैं ये लकादिर के हेते
फिर किसान बनाए हैं ये लकादिर के हेते
सेजो पे कहीं
सेजो पे कहीं फूल कहीं पांव में कांटे
भगवान ने किस रीत से इसान है बंटे
इसान है बंटे

दुनिया में ये अन्य तो रोटा ही रहेगा
दुनिया में ये अन्य तो
रोटा ही रहेगा भगवान तो आकाश पे सोता ही रहेगा सोता ही रहेगा इंसान जो रोटा है तो रोता ही रहेगा भगवान तो आकाश
पे सोता ही रहेगा सोता ही रहेगा।

एसपी बाला सुब्रामणीय

जन्म : 4 जून 1946, कोंटमपेट
निधन : 25 सितंबर 2020, एमजीएम हेल्थकेयर, चेन्नई

बच्चे : एसपी चरण , पल्लवी बालासुब्रह्मण्यम

माता-पिता : एसपी सांबमूर्ति , शकुंतलम्मा

श्रीपति पंडिताराधुला बालासुब्रह्मण्यम (जन्म 4 जून 1946) को ज्यादातर एस.
पी।
बी।
या बालू एक भारतीय पार्श्व गायक, संगीत निर्देशक, अभिनेता, डबिंग कलाकार और फिल्म निर्माता हैं जो मुख्य रूप से तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी और मलयालम में काम करते हैं।
उन्होंने 16 भारतीय भाषाओं में 40,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए हैं।
उन्होंने चार अलग-अलग भाषाओं में अपने काम के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्वगायक के लिए छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त किए हैं; कन्नड़, तेलुगु, तमि ऊल और हिंदी; पच्चीस आंध्र प्रदेश राज्य नंदी पुरस्कार तेलुगु सिनेमा की दिशा में उनके काम के लिए, कर्नाटक और तमिलनाडु के कई अन्य राज्य पुरस्कार।
इसके अलावा, उन्होंने बॉलीवुड फिल्मफेयर पुरस्कार, और छह फिल्मफेयर पुरस्कार दक्षिण में प्राप्त किए। उन्हें सबसे अधिक फिल्मी गीत गाने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
2012 में, उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए राज्य एनटीआर राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
2016 में, उन्हें रजत मयूर पदक से युक्त भारतीय फिल्म व्यक्तित्व से सम्मानित किया गया था।
वह भारत सरकार से पद्म श्री (2001) और पद्म भूषण (2011) जैसे नागरिक पुरस्कारों के प्राप्तकर्ता हैं।

एसपी बालासुब्रह्मण्यम का जन्म नेल्लोर में हुआ था , जो वर्तमान में आंध्र प्रदेश में एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार में हुआ था।  उनके पिता, एसपी सांबमूर्ति, एक हरिकथा कलाकार थे, जिन्होंने नाटकों में अभिनय भी किया था। उनकी मां सकुंतलम्मा थीं, जिनकी मृत्यु 4 फरवरी 2019 को हुई थी। उनके दो भाई और पांच बहनें थीं, जिनमें गायिका एसपी शैलजा भी शामिल थीं । उनके बेटे एसपी चरण भी एक लोकप्रिय दक्षिण भारतीय गायक, अभिनेता और निर्माता हैं। 

बालासुब्रह्मण्यम ने कम उम्र में ही संगीत में रुचि विकसित की, संगीत संकेतन का अध्ययन किया और संगीत सीखा। उन्होंने इंजीनियर बनने के इरादे से जेएनटीयू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग अनंतपुर में दाखिला लिया । वह अक्सर कहा करते थे कि, उस समय उनका एकमात्र सपना अपने पिता की महत्वाकांक्षा को पूरा करना और इंजीनियर बनना और सरकारी नौकरी करना था। 

बालासुब्रमण्यम ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान संगीत जारी रखा और गायन प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीते। टाइफाइड के कारण उन्होंने अपनी पढ़ाई जल्दी छोड़ दी और इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, चेन्नई के एक सहयोगी सदस्य के रूप में शामिल हो गए ।  1964 में, उन्होंने मद्रास स्थित तेलुगु सांस्कृतिक संगठन द्वारा आयोजित शौकिया गायकों के लिए एक संगीत प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीता।

वह अनिरुत्त (हारमोनियम पर), इलैयाराजा (गिटार पर और बाद में हारमोनियम पर), बस्कर (टक्कर पर) और गंगई अमरन (गिटार पर) से बने एक हल्के संगीत मंडली के नेता थे। [38] उन्हें एक गायन प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ गायक के रूप में चुना गया था, जिसे एसपी कोदंडपाणि और घंटासला ने जज किया था । अवसरों की तलाश में अक्सर आने वाले संगीतकार, उनका पहला ऑडिशन गीत "निलवे एननिदम नेरुंगधे" था। इसे अनुभवी पार्श्व गायक पीबी श्रीनिवास द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जो उन्हें तेलुगु , तमिल , हिंदी में बहुभाषी छंद लिखते और देते थे ।कन्नड़ , मलयालम , संस्कृत , अंग्रेजी और उर्दू ।
पार्श्वगायक एस पी बालासुब्रमण्यम के जन्मदिन पर हार्दिक श्रधांजलि

श्रीपति पण्डितराध्युल बालासुब्रमण्यम भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्वगायकों में से एक थे। पार्श्वगायक होने के साथ-साथ वह एक अभिनेता, संगीत निर्देशक, गायक और फ़िल्म निर्माता भी थे। एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने छह बार सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' और आन्ध्र प्रदेश सरकार द्वारा 25 बार तेलुगू सिनेमा में 'नन्दी पुरस्कार' जीता। जब अभिनेता सलमान ख़ान नए-नए फ़िल्मों में आए थे तो कई सालों तक एस.पी. बालासुब्रण्यम को सलमान ख़ान की आवाज़ समझा जाता था। फ़िल्म 'मैंने प्यार किया' के गाने हों या 'साजन' या फिर 'हम आपके हैं कौन'- इन सब फ़िल्मों में सलमान ख़ान को एस.पी. बालासुब्रमण्यम ने ही आवाज़ दी थी।

परिचय

एस. पी. बालासुब्रमण्यम को 'एसपीबी' या 'बालु' के नाम से भी जाना और पहचाना जाता है। उनका जन्म 4 जून सन 1946 को मद्रास के नेल्लोर (अब चित्तूर ज़िला, आंध्र प्रदेश) में हुआ था। सलमान ख़ान के साथ ही साथ उन्हें साउथ के सुपर स्टार कमल हासन की भी आवाज़ माना जाता था। एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने इंजीनियंरिंग की पढ़ाई की। इसी दौरान उन्होंने संगीत की शिक्षा भी ली। एसपी ने 15 दिसंबर, 1966 को तेलुगु फिल्म 'श्री श्री मर्यादा रमन्ना' से गाने की शुरुआत की थी। उनकी पत्नी का नाम सावित्री है। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटी पल्लवी और दूसरा बेटा चरण। उनका बेटा चरण भी प्लेबैक सिंगर और फिल्म प्रोड्यूसर है।

एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने 'एक दूजे के लिए', 'मैंने प्यार किया', 'पत्थर के फूल', 'हम आपके हैं कौन' और 'रोजा' जैसी पॉपुलर फिल्मों के गाने गाए। करीब 15 साल तक हिंदी फिल्मों से दूर रहने के बाद 2013 में उन्होंने शाहरुख ख़ान की फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' में गाना गाया था।

वॉइस ओवर आर्टिस्ट

वह बेहतरीन गायक, संगीतकार और प्रोड्यूसर होने के साथ ही साथ अच्छे वॉइस ओवर आर्टिस्ट भी थे। उन्होंने कमल हासन, रजनीकांत, सलमान ख़ान, शाहरुख ख़ान, अनिल कपूर, गिरीश कर्नाड और अर्जुन सरजा जैसे अभिनेताओं के लिए वॉइस ओवर किया। इतना ही नहीं फिल्म 'दशावतारम्' के तेलुगु वर्जन के लिए उन्होंने कमल हासन के सात किरदारों की आवाज़ का वॉइस ओवर भी किया। इसमें बूढ़ी औरत वाले किरदार की आवाज़ भी शामिल है।

पुरस्कार व सम्मान

एस. पी. बालासुब्रमण्यम को भारत सरकार ने 2001 में पद्मश्री और 2011 में पद्म भूषण से नवाजा था। पिछले 5 दशक में करीब 16 भाषाओं में 40 हजार से ज्यादा गाने वे गा चुके थे। येसुदास के बाद एस. पी. बालासुब्रमण्यम बेस्ट मेल सिंगर का नेशनल अवॉर्ड पाने वाले दूसरे सिंगर थे। येसुदास ने अपने कॅरियर के दौरान 8 नेशनल अवॉर्ड जीते थे, जबकि एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने 6 नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए।

मृत्यु

कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाने के कारण एस. पी. बालासुब्रमण्यम की मृत्यु 25 सितंबर, 2020 को चेन्नई में हुई। कोरोना संक्रमण की पुष्टि के बाद उन्हें 5 अगस्त, 2020 को एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली और ईसीएमओ (एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सिडेशन सपोर्ट) पर रखा गया था।

अशोक सराफ

अशोक सराफ
जन्म
4 जून 1947 (आयु 75)
मुंबई 
1969 - वर्तमान
जीवनसाथी
निवेदिता जोशी-सराफ

बच्चे
1
1980 के दशक की शुरुआत से, सराफ को मराठी फिल्मों में प्रमुख नायक के रूप में कास्ट किया जाने लगा। अशोक सराफ, लक्ष्मीकांत बेर्डे , सचिन पिलगाँवकर और महेश कोठारे के संयोजन ने 1985 से मराठी सिनेमा में "कॉमेडी फिल्मों की लहर" पैदा की जो एक दशक से अधिक समय तक चली। मुख्य नायक के रूप में उनकी सफल मराठी फिल्मों में एक दावा भूतचा , धूम धड़ाका , गम्मत जमात , आशी ही बनवा बनवी और वज़ीर शामिल हैं । सराफ ने ये छोटी बड़ी बातें और हम पांच (आनंद माथुर के रूप में) जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में भी अभिनय किया है ।

बॉलीवुड में , उन्हें राकेश रोशन की 1995 की एक्शन थ्रिलर करण अर्जुन में कॉमिक "मुंशीजी" के लिए , यस बॉस में शाहरुख खान के दोस्त के रूप में और अजय देवगन के सहयोगी के रूप में सिंघम में हेड कांस्टेबल के रूप में याद किया जाता है। मराठी फिल्म उद्योग में, उन्हें "मामा" (मामा) के नाम से जाना जाता है।



बॉलीवुड में , उन्हें राकेश रोशन की 1995 की एक्शन थ्रिलर करण अर्जुन में कॉमिक "मुंशीजी" के लिए , यस बॉस में शाहरुख खान के दोस्त के रूप में और अजय देवगन के सहयोगी के रूप में सिंघम में हेड कांस्टेबल के रूप में याद किया जाता है। मराठी फिल्म उद्योग में, उन्हें "मामा" (मामा) के नाम से जाना जाता है। 

अशोक सराफ ने मराठी सिनेमा के एक और कॉमेडियन लक्ष्मीकांत बेर्डे के साथ जोड़ी बनाने में सफलता हासिल की , जिन्होंने कई हिंदी फिल्मों में भी अभिनय किया है। सराफ, सचिन पिलगाँवकर और लक्ष्मीकांत बेर्डे के साथ , उन्होंने एक साथ कई मराठी फ़िल्मों में अभिनय किया और अधिकांश फ़िल्में सुपर-हिट रहीं। लक्ष्मीकांत और अशोक दोनों अभिनेता-निर्देशक सचिन पिलगाँवकर और अभिनेता-निर्माता-निर्देशक महेश कोठारे के अच्छे दोस्त माने जाते थे । उन्होंने मराठी सिनेमा के दो सुपरस्टार सचिन पिलगाँवकर और लक्ष्मीकांत बेर्डे के साथ मुख्य भूमिका में आशी ही बनवा बनवी (1988) में बड़ी सफलता का स्वाद चखा । फिल्म एक भगोड़ा हिट थी। 

हिंदी फिल्म कैरियर

सराफ ने बॉलीवुड में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। जिन भूमिकाओं को याद किया जाता है उनमें सिंघम , प्यार किया तो डरना क्या , गुप्त , कोयला , यस बॉस , जोरू का गुलाम और करण अर्जुन शामिल हैं । गोविंदा, जॉनी लीवर और कादर खान जैसे दमदार कॉमेडी अभिनेताओं के खिलाफ फिल्मों में उनके अभिनय की तारीफ हुई।

हिंदी टेलीविजन धारावाहिक

सराफ ने ये छोटी बड़ी बातें और हम पांच (आनंद माथुर के रूप में) जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में भी अभिनय किया है , जिसने बड़ी सफलता का स्वाद चखा। [14] अशोक सराफ का कॉमेडी शो डोन्ट वरी हो जाएगा जो उस समय सहारा टीवी पर प्रसारित होता था 1990 के दशक में बहुत लोकप्रिय था। उस समय इस शो को देखने के लिए दर्शक काफी उत्साहित रहते थे।



बीना राय

बीना राय
*🎂13 जुलाई 1931*

*⚰️6 दिसंबर 2009*

*जिन्हें कभी-कभी बीना राय के रूप में जाना जाता है , एक भारतीय अभिनेत्री थीं, जो मुख्य रूप से हिंदी सिनेमा के काले और सफेद युग की थीं । वह अनारकली (1953), घूँघट (1960) और ताजमहल (1963) जैसी क्लासिक फिल्मों में अपनी भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं , और घूँघट में अपने प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता ।*

*कृष्णा सरीन के रूप में पैदा हुई बीना राय, 1931 में लाहौर , पंजाब, ब्रिटिश भारत की रहने वाली थीं। उनके परिवार को सांप्रदायिक उन्माद के दौरान लाहौर से उखाड़ फेंका गया था और उत्तर प्रदेश में बसाया गया था। वह लाहौर में स्कूल गई और फिर लखनऊ , उत्तर प्रदेश , भारत में आईटी कॉलेज में पढ़ी। बीना राय कानपुर में रहीं जब तक कि वह अभिनय के लिए बाहर नहीं निकलीं। उसे अपने माता-पिता को उसे फिल्मों में अभिनय करने की अनुमति देने के लिए राजी करना पड़ा, उसने दावा किया कि वह अपने माता-पिता को फिल्मों में शामिल होने के लिए मना करने के लिए भूख हड़ताल पर चली गई, और वे आखिरकार मान गए।*


बीना राय 1950 में लखनऊ के इसाबेला थोबर्न कॉलेज में कला के प्रथम वर्ष की छात्रा थीं , जब उन्हें एक प्रतिभा प्रतियोगिता के लिए एक विज्ञापन मिला, तो उन्होंने आवेदन किया और प्रायोजकों से एक कॉल प्राप्त की। हालाँकि वह कॉलेज ड्रामाटिक्स में सक्रिय थी, लेकिन एक फ़िल्मी करियर कभी भी उसकी दृष्टि के क्षेत्र में नहीं था। फिर भी, वह प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बंबई गई, जहां उसने 25,000 रुपये पुरस्कार राशि के साथ जीता, किशोर साहू की काली घाट (1951) में एक प्रमुख भूमिका, जो उनकी फिल्म की शुरुआत थी, और इसमें किशोर साहू भी मुख्य भूमिका में थे। भूमिका।

बीना राय का जन्म 13 जुलाई 1931 को हुआ था, उन्होंने अपनी पहली फिल्म का अनुबंध 13 जुलाई 1950 को साइन किया था, जिसका नाम काली घटा था , उनकी पहली फिल्म 13 जुलाई 1951 को रिलीज़ हुई थी, इस खुशी के दिन उनकी प्रेमनाथ से सगाई हुई थी । 2 सितंबर 1952 को उन्होंने अभिनेता प्रेमनाथ से शादी की , जिनकी बहन कृष्णा की शादी अभिनेता-निर्देशक राज कपूर से हुई थी और वह कपूर परिवार का हिस्सा थीं । उन्होंने कुछ फिल्मों में एक साथ काम किया था, पहली फिल्म जिसमें उन्हें राय के साथ जोड़ा गया था औरत (1953) थी, जो सैमसन और डेलिलाह (1949) की दुखद बाइबिल कहानी का बॉलीवुड संस्करण थी। फिल्म हिट नहीं हुई, लेकिन बीना राय और प्रेमनाथ कीएक दूसरे के प्यार में पड़ गए। उन्होंने शादी कर ली और जल्द ही पीएन फिल्म्स के नाम से जानी जाने वाली अपनी खुद की प्रोडक्शन यूनिट स्थापित कर ली। पीएन फिल्म्स की उनकी पहली फिल्म शगुफा (1953) थी और उन्हें इससे काफी उम्मीदें थीं, लेकिन दर्शकों ने इसे खारिज कर दिया। न तो बीना राय का योगिनी आकर्षण और न ही प्रेमनाथ का एक डॉक्टर की भूमिका का संवेदनशील चित्रण शगुफा को फ्लॉप होने से बचा सका। और शगुफ़ा के बाद आने वाली फ़िल्मों में प्रिज़नर ऑफ़ गोलकुंडा , समंदर और वतन जैसे ही थिएटर स्क्रीन पर आए, लगभग गायब हो गए। यूं तो प्रेमनाथ-बीना राय की जोड़ी कभी भी पर्दे पर नहीं उतर पाई।


हालांकि, प्रमुख व्यक्ति प्रदीप कुमार के साथ उनकी फिल्में उनके सबसे यादगार प्रदर्शन हैं, जहां उन्होंने अनारकली (1953), ताज महल और घूंघट में शीर्षक भूमिका निभाई , जिसके लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता ।

1970 के दशक में, उनके बेटे प्रेम कृष्ण एक अभिनेता बने और उनकी एक बड़ी हिट थी; दुल्हन वही जो पिया मन भये (1977), लेकिन गति को बनाए नहीं रख सके, इसलिए उन्होंने सिनेविस्टास बैनर के साथ निर्माता बन गए, जिसने कथासागर , गुल गुलशन गुलफाम और जूनून जैसी टीवी श्रृंखला का निर्माण किया । उन्होंने अपनी बेटी आकांक्षा मल्होत्रा ​​​​को 2002 में अपने होम प्रोडक्शन में एक अभिनेत्री के रूप में लॉन्च किया, यह दावा करते हुए कि वह उन्हें उनकी माँ बीना राय की बहुत याद दिलाती हैं।

बीना राय ने कई साल पहले फिल्मों में अभिनय करना बंद कर दिया था, उनका दावा था कि एक निश्चित उम्र के बाद महिलाओं को अच्छे रोल नहीं मिलते हैं। वह अपने पति प्रेमनाथ के बारे में भी प्यार से बात करती हैं, जिनकी मृत्यु 3 नवंबर 1992 को हुई थी। 2002 में, उनके बेटे कैलाश (मोंटी) ने अपने पिता को उनकी 10वीं पुण्यतिथि और 86वीं जयंती के अवसर पर एक श्रद्धांजलि एल्बम जारी किया, जिसका शीर्षक अमर था । प्रेमनाथ , सारेगामा द्वारा जारी किया गया । उनके पोते, सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​ने डॉक्टरों पर सफल टीवी श्रृंखला का निर्देशन किया; संजीवनी (2004).

6 दिसंबर 2009 को दिल का दौरा पड़ने से बीना राय का निधन हो गया। उनके परिवार में उनके दो बेटे प्रेम किशन और कैलाश (मोंटी) और पोते सिद्धार्थ और आकांशा हैं। फिल्म और टेलीविजन निर्माण में जाने से पहले प्रेम किशन का फिल्म अभिनेता के रूप में एक अल्पकालिक करियर था; सिनेविस्टास लिमिटेड । उनके पोते, सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​​​एक फिल्म निर्देशक हैं, जिन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस की वी आर फैमिली (2010) से अपनी शुरुआत की।


फिल्मे
1951: काली घाट
1952: सपना
1953: अनारकली [10]
1953: औरत
1953: गौहर
1953: शगुफ़ा
1953: शोले
1954: मीनार
1954: गोलकुंडा के कैदी
1955: इंसानियत
1955: मध भरे नैन
1955: मरीन ड्राइव
1955: सरदार
1956: चंद्रकांत
1956: दुर्गेश नंदिनी
1956: हमारा वतन
1957: बंदी
1957: चंगेज खान
1957: हिल स्टेशन
1957: मेरा सलाम
1957: समंदर
1957: तलाश
1960: घूँघट
1962: वल्लाह क्या बात है
1963: ताजमहल
1966: दादी माँ
1967: राम राज्य
1968: अपना घर अपनी कहानी

अमरीकी ट्रंप

ट्रंप चले थे ईरान हराने , खुद अभी बने पप्पू  राहुल बने थे शेर ट्रंप के बल , खुद मुंह के बल गिरे।  दोनों हो रह बेइज्जत दुनिया हुई...