महज 11 साल की उम्र में फिल्म के गायन किया
सुधा मल्होत्रा एक नामी प्लेबैक सिंगर हैं, जिन्होंने कई फिल्मी गानों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। सुधा का जन्म 30 नवंबर, 1936 को दिल्ली में हुआ था। उन्होंने बेहद कम समय में शोहरत का स्वाद चख लिया था। कॅरियर के शुरुआती दौर में सुधा ने रेडियो लाहौर में बतौर बाल कलाकार काम किया था। यही नहीं महज 6 साल की उम्र में सुधा ने स्टेज परफॉर्मेंस दी थी। अपनी काबिलीयत के दम पर सुधा ने हिंदी सिनेमा में एंट्री की। उन्होंने महज 11 साल की उम्र में फिल्म ‘आरजू’ के लिए ‘मिला दे नैन’ गाना गाया था।
साहिर लुधियानवी की प्रेमिका रही सुधा
सुधा मल्होत्रा को उनकी सुरीली और मधुर आवाज के लिए तो जाना ही गया इसके अलावा उनका नाम मशहूर शायर साहिर लुधियानवी के साथ भी जुड़ा। साहित्य की दुनिया में साहिर का नाम बेहद अदब से लिया जाता रहा है। साहिर जितने बड़े कलमगार थे, उतने ही बड़े आशिक भी। साहिर और अमृता प्रीतम ने भले ही अपने प्यार को नाम ना दिया हो मगर इस रिश्ते में दोनों मन की गहराई से एक थे।
जब साहिर और अमृता प्रीतम की दूरी की वजह बनी
साहिर लुधियानी का मिजाज शायराना होने के साथ ही आशिकाना भी था। बेशक उनका दिल अमृता के लिए धड़कता था, मगर जब उनकी मुलाकात सुधा से हुई तो सुधा पर अपना दिल हार बैठे। साहिर भले ही अमृता के साथ थे मगर सुधा के साथ भी उनका रिश्ता बराबर था। साहिर और सुधा के बीच बढ़ती नजदीकियां अमृता और साहिर के बीच की दूरियां बनती गई।
यही नहीं अमृता प्रीतम और साहिर के रिश्ते के अंत की वजह भी सुधा मल्होत्रा ही बताई जाती है। हालांकि, लिंकअप्स की खबरों के बीच सुधा ने साहिर के बजाय गिरधर मोटवानी संग वर्ष 1960 में शादी कर ली।
प्रसिद्ध नाम सुधा मल्होत्रा
जन्म 30 नवम्बर, 1936
जन्म भूमि दिल्ली
पति/पत्नी गिरधर मोटवानी
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र पार्श्वगायिका
मुख्य फ़िल्में 'आरज़ू', 'दिल्ली दूर नहीं', 'बरसात की रात', 'घर घर में दीवाली', 'काला बाज़ार', 'भाई बहन', 'कभी कभी', 'प्रेम रोग'।
पुरस्कार-उपाधि पद्मश्री
नागरिकता भारतीय
प्रमुख गीत 'मिला दे नैन', 'ना मैं धन चाहूं ना रतन चाहूं', 'ना तो कारवां की तलाश है', 'ये प्यार था या कुछ और था'।
अन्य जानकारी सुधा ने आख़िरी बार राजकपूर की फ़िल्म 'प्रेम रोग' में गाना गाया था, जिसके बोल थे 'ये प्यार था या कुछ और था'।
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