सोमवार, 4 सितंबर 2023

जाग मोहन सुर सागर

🎂06 सितंबर 1918
⚰️04 सितंबर 2003
भारतीय गायक एवं संगीतकार जगमोहन सुरसागर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
पद्म श्री पुरुस्कार से सम्मानित
उनका ट्रेक
  1. "उल्फ़त की सज़ा दो"
  2. "दीवाना तुम्हारा"
  3. "मुझे खामोश"
  4. "प्रेम की रुत चल"
  5. "दिल देके दर्द लिया"
  6. "ये ना बताऊंगा मैं"
  7. "आंखों में छुपलो"
  8. "ये मन के तुम"
  9. "जल रहे हैं"
  10. "निरस में आस प्रभु"
  11. "मेरी आँखें बानी"
  12. "प्यारी तुम कितनी"
  13. "मत कर साज सिंगार"
  14. "तुम मेरे सामने"
  15. "सपनों में मुझको"
  16. "मुझे ना सपनों से"
  17. "ओ वर्षा के पहले बादल"
  18. 'चाँद है मेहमान'
  19. 'ये चांद नहीं'
  20. 'एक बार मुस्कुरा दो'
  21. 21. उस रंग को पायल में
जगमोहन सुरसागर गायक थे उनका जन्म 6 सितंबर 1918 में पश्चिम बंगाल में हुआ था 
जगमोहन सुरसागर 40 और 50 के दौर में काफ़ी सक्रिय रहे ,
लता मंगेशकर और जगमोहन सुरसागर -1955 में आई फ़िल्म 'सरदार' के लिए पहली और आखिरी बार संगीत भी दिया और इसी फ़िल्म में लता मंगेशकर ने जगमोहन सुरसागर के लिए पहली और आखिरी बार गाया ' प्यार की ये तल्खियाँ '

जगमोहन सुरसागर और सपन जगमोहन जोड़ी के 'जगमोहन ' दोनों अलग अलग व्यक्ति है , जगमोहन सुरसागर ने कमलदास गुप्ता के संगीत निर्देशन में अपने दौर में काफ़ी गीत गाये ! गायक होने के साथ -साथ संगीतकार के तौर भी जगमोहन सुरसागर जाने जाते हैं ! इन्होने मधुराज और फय्याज़ हाशमी के लिखे कई गैर -फ़िल्मी गीत गाये ! कुछ एक फिल्मों में पार्श्वगायक के तौर पर काम किया -जिसमे मेघदूत(1945-'ओ वर्षा के पहले बादल ') शामिल है !

सन 1955 में आई फ़िल्म 'सरदार' के लिए पहली और आखिरी बार संगीत भी दिया ! सरदार में बीना राय, अशोक कुमार और निगार सुल्ताना मुख्य भूमिकाओं में नज़र आये थे !
इसी फ़िल्म में लता मंगेशकर ने जगमोहन सुरसागर के लिए पहली और आखिरी बार गाया ' प्यार की ये तल्खियाँ ' ! जगमोहन एक रूढ़िवादी ज़मीदार परिवार से संबंध रखते थे , जहाँ गाना बजाना सही नहीं समझा जाता था, इसी बीच जगमोहन का ध्यान शास्त्रीय संगीत की तरफ भी आकर्षित हुआ और उन्होंने एक अच्छे गुरु की खोज करना शुरू कर दिया , जो कि पोंडेचेरी के दिलीप कुमार रॉय पर आकर खत्म हुई ! जिनसे द्रुपद , ठुमरी ,टप्पा सीखा !

HMV के लिए टैगोर के लिखे गीतों को गाकर जगमोहन बंगाल के घर घर में मशहूर हो गए और वहीँ 1945 में जगनमोयमित्रा 'सुरसागर ' के तौर पर जाने जाने लगे ! और फ़िल्म 'मेघदूत' के गीतों ने उन दिनों रेडियो पर काफ़ी धूम मचा दी थी !

कुछ गीत -

1. उल्फ़त की सज़ा दो - फय्याज़ हाश्मी

2. दीवाना तुम्हारा -फय्याज़ हाशमी
3.मुझे ख़ामोश रहने दो - राजेन्द्र कृष्ण (संगीत जगमोहन )
4. प्रेम की रुत चली गयी -फय्याज़ हाश्मी
5.दिल देकर दर्द लिया
6.यह ना बता सकूंगा मैं
7.आँखों में छुपा लो
8.ये माना तुमके तुम से -रमेश पन्त -(संगीत -जगमोहन )
9.जल रहे हैं अरमान -फय्याज़ हाश्मी
10.नीरस मैं आस प्रभु
11.मेरी ऑंखें बनी दीवानी
12.प्यारी तुम कितनी
13.मत कर साज़ सिंगार
14. तुम मेरे सामने
15.सपनो में मुझको
16 मुझे ना सपनों से बहलाओ
17.ओ वर्षा के पहले बादल -फय्याज़ हाश्मी
18.चाँद है मेहमान ,गीत : मधुराज ,(संगीत -जगमोहन )
19. ये चाँद नहीं
20. एक बार मुस्कुरा दो
21. उस रंग को पायल में

4 सितंबर 2003 में जुहू मुम्बई में उनका निधन हो गया

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