मंगलवार, 30 मई 2023

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फिल्मों में नोकरी तलाश ते है तो यहां भी देखे


भारत कई प्रतिभाशाली कलाकारों का घर है, खासकर जब मनोरंजन उद्योग की बात आती है। मनोरंजन उद्योग में हर प्रतिभा, जैसे स्पॉट बॉय, निर्देशक, लेखक, पटकथा लेखक, संगीत निर्देशक, गीतकार, अभिनेता, मॉडल, और इसी तरह पहचान और समान अवसरों की हकदार है। IFH ऐप वही प्रदान करता है जहां उद्योग से कोई भी हमारे पोर्टल पर मुफ्त में पंजीकरण कर सकता है और अपनी प्रतिभा को काम पर रखने के लिए भारत भर के निर्माताओं, निर्देशकों और कास्टिंग एजेंसियों के लिए दरवाजा खोलकर उद्योग के लिए दृश्यमान हो सकता है।



सोमवार, 29 मई 2023

आलिया भट्ट


*आलिया भट्ट एक भारत में जन्मी ब्रिटिश अभिनेत्री और गायिका हैं, जो हिंदी फिल्मो में काम करती हैं। उनका जन्म ( डेट ऑफ बर्थ) 15 मार्च 1993 को मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत में हुआ। उन्होंने 2012 में हिंदी फिल्म “स्टुडेंट ऑफ़ द ईयर”  से अनपे करियर की शुरुआत की थी। बाद में उन्होंने कई सफल फिल्मे जैसे “हाईवे, 2 स्टेट्स, उड़ता पंजाब, बद्रीनाथ की दुल्हनिया और स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2″ आदि फिल्मो में काम किया।*


*व्यक्तिगत जीवन जानकारी*

भट्ट परिवार में जन्मी, आलिया भट्ट फिल्म निर्माता महेश भट्ट और अभिनेत्री सोनी राजदान की बेटी हैं।*

आलिया भट्ट की फिल्म देखे

पूरा नाम आलिया भट्ट |

जन्म दिनांक 15 मार्च 1993

आयु Age 28 साल 2021 के अनुसार

जन्म स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत

मूल निवासी मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत

मातृ भाषा हिंदी

धर्म मुस्लिम

राष्ट्रीयता भारतीय

पेशा कमाई का जरिया अभिनय, विज्ञापन और मॉडलिंग

स्कूल जमनाबाई नरसी स्कूल, मुंबई

कॉलेज

शैक्षणिक योग्यता 12वी

वेतन प्रति फिल्म 10 करोड़

वैवाहिक स्थिति अविवाहित

 फिल्म 2012- हिंदी फिल्म “स्टुडेंट ऑफ़ द ईयर”


आलिया की त्सवीरें


आलिया भट्ट हाइट, वजन और शारीरिक माप

त्वचा का रंग गोरा Fair

आंखों का रंग गहरा भूरा 

बालों का रंग काला 

फिगर 32-26-34

ऊंचाई 5.3 Ft

वजन 52 kg


आलिया भट्ट की सफलता की कहानी

आलिया भट्ट ने अपनी फिल्मी करियर की शुरुआती 6 वर्ष की उम्र में साल 1999 की थ्रिलर फिल्म संघर्ष में एक बाल कलाकार के रूप में किया था, उसके बाद वह साल 2012 में करण जौहर की टीन ड्रामा फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर में अपनी करियर की पहली प्रमुख भूमिका वाली फिल्म में काम की।


उनकी पहली फिल्म Student of the Year ने 109 करोड़ की कमाई की और आलिया भट्ट के अभिनय को भी दर्शको ने खूब पसंद किया।


आलिया भट्ट हिंदी सिनेमा की एक सफल अभिनेत्री है। उन्होंने कई सफल फिल्मो में कामकिया है जैसे “2 स्टेट्स, डियर ज़िन्दगी, हम्प्टी शर्मा की दुल्हनियां, बद्रीनाथ की दुल्हनिया, हाईवे और उड़ता पंजाब” आदि।


Watasapp

 

 

रविवार, 28 मई 2023

पुरानी यादें

लक्ष्मी कांत प्यारे लाल
*प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा जी का नाम, बिना लक्ष्मीकान्त जी के नाम के अधूरा है। लक्ष्मीकान्त जी का निधन तो 25 मई 1998 के दिन 60 बरस की उम्र में हो गया था लेकिन प्यारेलाल जी आज भी हमारे साथ बदस्तूर हैं व हर संभव कोशिश से अपना जीवन संगीत में लीन रखते हैं। ज़रा काल के पहिये को पीछे घुमाया जाए तो याद आता है कि प्यारेलाल जी के पिता, ट्रंपेट बजाते थे और उन्हीं की बदौलत प्यारेलाल जी ने म्यूजिक सीखने की शुरुआत की थी। प्यारेलल जी संगीत के प्रति इतने दीवाने थे कि जब उन्होंने वॉइलिन सीखना शुरु किया तो 8 साल की उम्र से ही दिन में 12-12 घंटे प्रैक्टिस करने लगे। उनके भाई गिटार बजाते और प्यारेलाल जी वॉइलिन।*

*लेकिन सन 1952 में जब वो 12 साल के हुए, तो उनके घर आर्थिक संकट मंडराने लगा। इसका उपाये निकालने के लिए प्यारेलल जी ने पढ़ाई से बिल्कुल किनारा कर लिया और स्टूडियो-स्टूडियो जाकर वॉइलिन बजाने लगे। उस वक़्त उनके गुरु एक गोवानी संगीतकार एंथनी गोनज़ालवेज थे। वह बॉम्बे ऑर्केस्ट्रा, कूमी वालिया, मेहील मेहता और उनके बेटे ज़ुबिन मेहता आदि के लिए ऑर्केस्ट्रा में वॉइलिन बजाया करते थे। हालांकि उन दिनों प्यारेलाल जी को इन ऑर्केस्ट्राज़ में बजाने की एवज में कोई बहुत अच्छी धनराशि नहीं मिलती थी, लेकिन गुजर-बसर करने के साथ साथ सुरील कला केंद्र में संगीत सीखने के लिए जाने लायक रुपए कमा लेते थे। ये म्यूजिक अकैडमी मंगेश्कर फैमिली द्वारा चलाई जाती थी।*

*यहीं पर एक रोज़ उनकी मुलाकात लक्ष्मीकान्त जी से हुई, मुलाकात क्या हुई, यूं समझिए एक 12 साल के और एक 16 साल के (लक्ष्मीकान्त जी) लड़के के बीच नियति की ओर से तय की गई दोस्ती हो गई। लक्ष्मीकान्त जी के पिता गुजर चुके थे तो उनकी आर्थिक स्थिति भी बहुत कमज़ोर थी। इस मुफ़लिसी ने उन दोनों को और पक्का दोस्त बना दिया। साथ ही जब लता मंगेश्कर जी को पता चल कि ये दोनों माली रूप से मजबूत नहीं हैं, तो उन्होंने बॉलीवुड के नामी संगीतकारों को अपने ऑर्केस्ट्रा के लिए इन दोनों का नाम भेजना शुरु कर दिया। इन नामी संगीतकारों में नौशाद साहब, सचिन दा, सी राम चंद्रा, कल्याणजी आनंदजी आदि मौजूद थे। लेकिन यहाँ से रोज तो काम मिलता नहीं था, सो ये दोनों स्टूडियो दर स्टूडियो ऑर्केस्ट्रा में बजाने के लिए स्ट्रगल करते ही रहते थे। कोई 13 – 14 साल की उम्र होगी जब प्यारेलाल जी का सब्र जवाब दे गया। वह बोले “लक्ष्मीकान्त जी, मैं अब और यहाँ धक्के नहीं खा सकता। यहाँ तो शो करने के कितने-कितने दिन बाद तक पेमेंट ही नहीं मिलती है। ऐसे कैसे काम चलेगा, मैं सोचता हूँ कि ज़ुबिन मेहता की तरह मैं भी विएना चला जाऊँ और किसी वेस्टर्न ऑर्केस्ट्रा में जा के वॉइलिन बजाऊँ, कम से कम सुकून से रोटी तो मिलेगी” लक्ष्मीकान्त जी जानते थे कि वेस्टर्न म्यूजिक में प्यारेलाल की पकड़ भी बहुत अच्छी है और उस जैसा वॉइलिन भी शायद ही पूरे बॉम्बे शहर में कोई बजा सकता हो। लेकिन फिर भी उन्होंने बड़े भाई की तरह हक़ से मना कर दिया कि नहीं, प्यारेलाल तुम कहीं नहीं जाओगे, तुम हम मिलकर यहीं कुछ कर गुज़रेंगे”*

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*और कोई शख्स होता या आज का ज़माना होता, तो यही लगता कि लक्ष्मीकान्त जी प्यारेलाल की तरक्की से जल रहे हैं इसलिए मना कर रहे हैं पर न तब ऐसी कुंठायें हुआ करती थीं, और न प्यारेलालजी ऐसे शख्स हैं जो बुरा सोचकर रुकते। उन्होंने लक्ष्मीकान्त जी की बात पर भरोसा किया और यहीं रुक गए।*

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*प्यारेलाल जी के स्वभाव की बात उठी है तो मैं ये बात जोड़ता चलूँ कि वो सिर्फ नाम के ही प्यारेलाल नहीं है, मन से भी बहुत प्यारेलाल हैं। उन्होंने कभी मुहम्मद रफी को नाम लेकर नहीं बुलाया, वह हमेशा उन्हें साहब कहकर संबोधित करते हैं। किसी भी सीनियर, समकालीन, या उनके बाद के आए संगीतकारों के प्रति उनकी तरफ से कोई नकारात्मक बात नहीं सुनने को मिली। समकालीन की बात करूँ तो एक वक़्त लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल के अलावा कोई संगीतकार हिट था तो वो पंचम दा यानी आर-डी बर्मन थे, मतलब के तगड़े प्रतिद्वंदी थे पर उसके बावजूद इन दोनों में बैर तो दूर, दोस्ताना माहौल था और पंचम दा फिल्म दोस्ती में इन्हीं के इकरार पर माउथ ऑर्गन भी बजा चुके थे।*

*बहरहाल, बात प्यारेलाल जी के विदेश जाने की हो रही थी जिसे लक्ष्मीकान्त जी ने सिरे से नकार दिया था। धीरे धीरे इन दोनों को बॉलीवुड से ही काम मिलने लगा। सन 1954 किदार शर्मा जी ने जोगन फिल्म बनाई, जिसमें बुलो-सी-रानी का संगीत था, यहाँ पहली बार 14 साल की उम्र में प्यारेलाल जी ने किसी फिल्म के लिए वॉइलिन बजाया।*

*फिर इन दोनों ने कल्याणजी आनंदजी को असिस्ट करना शुरु कर दिया। कोई 7 साल बाद, बाबूभाई मिस्त्री की एक फिल्म पारसमणि (1963) में इन्हें बतौर संगीतकार काम करने का मौका मिला। मज़ा देखिए, बाबूभाई मिस्त्री का हाथ पकड़कर ही इनके गुरु कल्याणजी आनंदजी भी इंडस्ट्री में आए थे।*

*क्योंकि लक्ष्मीकान्त जी बड़े भी थे और भारतीय संगीत को बहुत अच्छे से समझते भी थे, इसलिए ये तय हुआ कि लक्ष्मीकान्त जी कम्पोज़ करेंगे और प्यारेलाल जी म्यूजिक अरैन्ज करेंगे।*
*इनकी पहली रिलीज़ फिल्म ‘पारसमणि’ के गाने इतने बम्पर हिट हुए कि साथ साथ फिल्म भी सुपरहिट करवा गए। हमेशा की तरह इनके लिए लता मंगेश्कर जी ने पहली फिल्म होते हुए भी गाने से न नुकूर करने की बजाए प्रोत्साहित किया और कम बजट होते हुए भी 6 में से 5 गाने गाए। इन गानों में ‘हँसता हुआ नूरानी चेहरा, काली जुलफ़े रंग सुनहरा’ आपने ज़रूर सुना होगा और आप यकीनन पसंद करते होंगे। साथ ही पहली फिल्म का शगुन करते हुए मोहम्मद रफी साहब ने पहला गाना ‘वो जब याद आए, बहुत याद आए’ के लिए कोई फीस न ली और कह दिया कि इस गाने की फीस आप किसी ज़रूरतमंद को देना। प्यारेलाल जी सौम्यता से बताते हैं कि ये लताजी और साबजी (रफी) का आशीर्वाद था उनके लिए।*

*और यकीनन ये एक ऐसा आशीर्वाद साबित हुआ कि एल-पी के नाम से महशूर होने वाले इस म्यूजिक डूओ ने फिर पीछे मुड़कर देखना तो दूर, तुरंत ही कामयाबी के झंडे गाड़ने शुरु कर दिए। अगले ही साल एक और कमाल हुआ। 1964 में फिर एक लो बजट फिल्म संत ज्ञानेश्वर तैयार होने लगी और लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल को नए होने के चलते फिल्म में काम दिया गया। फिल्म के प्रोड्यूसर मशहूर ट्रेड अनिलिस्ट कोमल नाहटा के पिता रामराज नाहटा थे।*

*फिल्म पहले तीन दिन में ही फ्लॉप डिक्लेयर होने को थी कि चौथे दिन रामराज जी के पास उनका असिस्टेंट दौड़ता हुआ आया और बोला “भाईसाहब, गजब हो गया, फिल्म तो सुपर हिट है ये” रामराज जी ने टोका भी “क्यों बेवकूफ बना रहे हो भाई” तो उसने उसी उत्साह में बताया “अरे नहीं, जैसे ही गाना ‘ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो’ गाना बजता है वैसे ही पब्लिक पागलों की तरह स्क्रीन पर रेजगारी फेंकने लगती है। मैंने आजतक काभी किसी भी सीन, किसी भी गाने के लिए इतनी रेजगारी लुटती नहीं देखी।“ कमाल की बात ये भी है कि यही गीत बिनाका गीत माला में दो साल तक टॉप थ्री में बना रहा था।*

*इसी साल नई स्टार कास्ट के साथ फिल्म ‘दोस्ती’ न सिर्फ इनके गानों की वजह से सुपर-डुपर हिट हुई, बल्कि करिअर के दूसरे ही साल लक्ष्मीकान्त प्यारेलालजी को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। मोहम्मद रफी के गाए गाने ‘राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताये रे’ बहुत पसंद किया गया। अब क्योंकि यह दोनों ही* *शंकर-जयकिशन जी का संगीत बहुत पसंद करते थे, इसलिए इनका म्यूजिक स्टाइल भी कुछ लोगों को वैसा ही लगता था। लेकिन समय की करवट देखिए, कुछ सालों बाद शंकर-जयकिशन ने अपनी संगीत शैली में संगीत में फेरबदल कर ली कि लोग ये न कहें कि उनका संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल की कॉम्पोज़िशन से मिलता है। इसके बाद, फिल्म मिलन में मुकेश का गाना ‘सावन का महिना, पवन करे शोर’ हो या शागिर्द में लता जी का गाना ‘दिल विल प्यार व्ययर मैं क्या जानू रे’ हो, इनका हर गाना रेडियो पर नॉन-स्टॉप बजता मिलता था।*

*फिल्म दो रास्ते, इंतकाम, बॉबी, रोटी कपड़ा और मकान, अमर अकबर एंथनी’ आदि सन 70 की हर बड़ी फिल्म में संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल जी का संगीत धूम मचा रहा था।*
*इनके गानों की फेरहिस्त यहाँ लगाकर उसका गुणगान करना तो सूरज को दीया दिखाना है, पर अमर अकबर एंथनी की बात आई है तो इतना ज़रूर बताना चाहूँगा कि कि उस वक़्त के चार लिजेंड, टॉप फॉर को एक ही गाने में लाना, ये सिर्फ प्यारेलालजी और लक्ष्मीकान्त जी के बस का काम था। हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या  करें, इस गाने में मुकेश, रफी साहब, किशोर कुमार और लता मंगेश्कर भी हैं। ये पहला और आखिरी गाना है जिसमें ये चारों साथ हैं। साथ ही, आपको इस फिल्म का, अमिताभ बच्चन पर फिल्माया वो कॉमेडी सॉन्ग तो याद ही होगा ‘माई नेम इज एंथनी गोनज़ालवेज, मैं दुनिया में अकेला हूँ’। यह गाना प्यारेलाल जी की तरफ से उनके उन्हीं गोवानी उस्ताद एंथनी के लिए समर्पित था। इनके संगीत की ऊँचाइयों की क्या बात करूँ, अस्सी के दशक में तो इन्होंने सत्तर से ज़्यादा कहर ढाया था।*

*फिल्म कर्ज़, एक दूजे के लिए, प्रेम रोग, नाम, नगीना, मिस्टर इंडिया, तेज़ाब, चालबाज़, राम लखन, आदि एक से बढ़कर एक म्यूज़िकल हिट दी। नब्बे में भी सौदागर, खुदा गवाह यहां देखे  खुदा गवाह, खलनायक, दीवाना मस्ताना, आदि सब टॉप क्लास म्यूजिक से सजी ब्लॉकबस्टर फिल्में थीं।*

*फिर धीरे-धीरे लक्ष्मीकान्त जी की सेहत गिरने लगी और प्यारेलाल जी का मन भी संगीत के बदलते तौर से विरक्त होने लगा। लक्ष्मीकान्त जी की डेथ के बाद भी उन्होंने कुछ समय काम किया और एल्बम पर लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल ही लिखा, लेकिन वो बात न रही। पर प्यारेलाल जी सन 1998 से लेकर आज 2021 तक भी संगीत से जुड़े हुए हैं और आज भी म्यूजिक अरेंज में उनका कोई जवाब नहीं है। उनकी सौम्यता का हाल तो क्या बताऊँ साहब, उनके यहाँ 50 साल पहले जो वादक काम करने आते थे, उनकी चौथी पीढ़ियाँ तक अभी भी उनके पास ही आती हैं। वह लता जी से हमेशा टच में रहते थे। मुकेश जी की वह तारीफ करते नहीं थकते। रफी साहब के बारे में तो फख्र से कहते हैं कि रफी साहब कल भी थे, आज भी हैं, हमेशा रहेंगे। सुबह 5 बजे से उनके गाने सुनने शुरु करता हूँ और शाम सात बजे तक सुनता हूँ। सारा दिन साहबजी की संगत में बीत जाता है। ऐसे ही प्यारे, हम सब के दुलारे, संगीत के लिए चौबीस घंटे समर्पित प्यारेलाल जी को हम ने भी*

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*NRI वॉट्सएप की ओर से उनके 80वें जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं प्रेषित  की हैं और आशा करते हैं कि वह स्वस्थ रहें और सदा संगीत से जुड़े रहें।*
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*म्यूजिक कंपोजर लक्ष्मीकांत जी का सफ़रयूजिक कंपोजर लक्ष्मीकांत जी का सफ़र*

*प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा जी का नाम, बिना लक्ष्मीकान्त जी के नाम के अधूरा है। लक्ष्मीकान्त जी का निधन तो 25 मई 1998 के दिन 60 बरस की उम्र में हो गया था लेकिन प्यारेलाल जी आज भी हमारे साथ बदस्तूर हैं व हर संभव कोशिश से अपना जीवन संगीत में लीन रखते हैं। ज़रा काल के पहिये को पीछे घुमाया जाए तो याद आता है कि प्यारेलाल जी के पिता, ट्रंपेट बजाते थे और उन्हीं की बदौलत प्यारेलाल जी ने म्यूजिक सीखने की शुरुआत की थी। प्यारेलल जी संगीत के प्रति इतने दीवाने थे कि जब उन्होंने वॉइलिन सीखना शुरु किया तो 8 साल की उम्र से ही दिन में 12-12 घंटे प्रैक्टिस करने लगे। उनके भाई गिटार बताते और प्यारेलाल जी वॉइलिन।*

लेकिन सन 1952 में जब वो 12 साल के हुए, तो उनके घर आर्थिक संकट मंडराने लगा। इसका उपाये निकालने के लिए प्यारेलल जी ने पढ़ाई से बिल्कुल किनारा कर लिया और स्टूडियो-स्टूडियो जाकर वॉइलिन बजाने लगे। उस वक़्त उनके गुरु एक गोवानी संगीतकार एंथनी गोनज़ालवेज थे। वह बॉम्बे ऑर्केस्ट्रा, कूमी वालिया, मेहील मेहता और उनके बेटे ज़ुबिन मेहता आदि के लिए ऑर्केस्ट्रा में वॉइलिन बजाया करते थे। हालांकि उन दिनों प्यारेलाल जी को इन ऑर्केस्ट्राज़ में बजाने की एवज में कोई बहुत अच्छी धनराशि नहीं मिलती थी, लेकिन गुजर-बसर करने के साथ साथ सुरील कला केंद्र में संगीत सीखने के लिए जाने लायक रुपए कमा लेते थे। ये म्यूजिक अकैडमी मंगेश्कर फैमिली द्वारा चलाई जाती थी।यहीं पर एक रोज़ उनकी मुलाकात लक्ष्मीकान्त जी से हुई, मुलाकात क्या हुई, यूं समझिए एक 12 साल के और एक 16 साल के (लक्ष्मीकान्त जी) लड़के के बीच नियति की ओर से तय की गई दोस्ती हो गई। लक्ष्मीकान्त जी के पिता गुजर चुके थे तो उनकी आर्थिक स्थिति भी बहुत कमज़ोर थी। इस मुफ़लिसी ने उन दोनों को और पक्का दोस्त बना दिया। साथ ही जब लता मंगेश्कर जी को पता चल कि ये दोनों माली रूप से मजबूत नहीं हैं, तो उन्होंने बॉलीवुड के नामी संगीतकारों को अपने ऑर्केस्ट्रा के लिए इन दोनों का नाम भेजना शुरु कर दिया। इन नामी संगीतकारों में नौशाद साहब, सचिन दा, सी राम चंद्रा, कल्याणजी आनंदजी आदि मौजूद थे। लेकिन यहाँ से रोज तो काम मिलता नहीं था, सो ये दोनों स्टूडियो दर स्टूडियो ऑर्केस्ट्रा में बजाने के लिए स्ट्रगल करते ही रहते थे। कोई 13 – 14 साल की उम्र होगी जब प्यारेलाल जी का सब्र जवाब दे गया। वह बोले “लक्ष्मीकान्त जी, मैं अब और यहाँ धक्के नहीं खा सकता। यहाँ तो शो करने के कितने-कितने दिन बाद तक पेमेंट ही नहीं मिलती है। ऐसे कैसे काम चलेगा, मैं सोचता हूँ कि ज़ुबिन मेहता की तरह मैं भी विएना चला जाऊँ और किसी वेस्टर्न ऑर्केस्ट्रा में जा के वॉइलिन बजाऊँ, कम से कम सुकून से रोटी तो मिलेगी” लक्ष्मीकान्त जी जानते थे कि वेस्टर्न म्यूजिक में प्यारेलाल की पकड़ भी बहुत अच्छी है और उस जैसा वॉइलिन भी शायद ही पूरे बॉम्बे शहर में कोई बजा सकता हो। लेकिन फिर भी उन्होंने बड़े भाई की तरह हक़ से मना कर दिया कि नहीं, प्यारेलाल तुम कहीं नहीं जाओगे, तुम हम मिलकर यहीं कुछ कर गुज़रेंगे”और कोई शख्स होता या आज का ज़माना होता, तो यही लगता कि लक्ष्मीकान्त जी प्यारेलाल की तरक्की से जल रहे हैं इसलिए मना कर रहे हैं पर न तब ऐसी कुंठायें हुआ करती थीं, और न प्यारेलालजी ऐसे शख्स हैं जो बुरा सोचकर रुकते। उन्होंने लक्ष्मीकान्त जी की बात पर भरोसा किया और यहीं रुक गए।प्यारेलाल जी के स्वभाव की बात उठी है तो मैं ये बात जोड़ता चलूँ कि वो सिर्फ नाम के ही प्यारेलाल नहीं है, मन से भी बहुत प्यारेलाल हैं। उन्होंने कभी मुहम्मद रफी को नाम लेकर नहीं बुलाया, वह हमेशा उन्हें साहब कहकर संबोधित करते हैं। किसी भी सीनियर, समकालीन, या उनके बाद के आए संगीतकारों के प्रति उनकी तरफ से कोई नकारात्मक बात नहीं सुनने को मिली। समकालीन की बात करूँ तो एक वक़्त लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल के अलावा कोई संगीतकार हिट था तो वो पंचम दा यानी आर-डी बर्मन थे, मतलब के तगड़े प्रतिद्वंदी थे पर उसके बावजूद इन दोनों में बैर तो दूर, दोस्ताना माहौल था और पंचम दा फिल्म दोस्ती में इन्हीं के इसरार पर माउथ ऑर्गन भी बजा चुके थे।बहरहाल, बात प्यारेलाल जी के विदेश जाने की हो रही थी जिसे लक्ष्मीकान्त जी ने सिरे से नकार दिया था। धीरे धीरे इन दोनों को बॉलीवुड से ही काम मिलने लगा। सन 1954 किदार शर्मा जी ने जोगन फिल्म बनाई, जिसमें बुलो-सी-रानी का संगीत था, यहाँ पहली बार 14 साल की उम्र में प्यारेलाल जी ने किसी फिल्म के लिए वॉइलिन बजाया।फिर इन दोनों ने कल्याणजी आनंदजी को असिस्ट करना शुरु कर दिया। कोई 7 साल बाद, बाबूभाई मिस्त्री की एक फिल्म पारसमणि (1963) में इन्हें बतौर संगीतकार काम करने का मौका मिला। मज़ा देखिए, बाबूभाई मिस्त्री का हाथ पकड़कर ही इनके गुरु कल्याणजी आनंदजी भी इंडस्ट्री में आए थे।क्योंकि लक्ष्मीकान्त जी बड़े भी थे और भारतीय संगीत को बहुत अच्छे से समझते भी थे, इसलिए ये तय हुआ कि लक्ष्मीकान्त जी कम्पोज़ करेंगे और प्यारेलाल जी म्यूजिक अरैन्ज करेंगे।इनकी पहली रिलीज़ फिल्म ‘पारसमणि’ के गाने इतने बम्पर हिट हुए कि साथ साथ फिल्म भी सुपरहिट करवा गए। हमेशा की तरह इनके लिए लता मंगेश्कर जी ने पहली फिल्म होते हुए भी गाने से न नुकूर करने की बजाए प्रोत्साहित किया और कम बजट होते हुए भी 6 में से 5 गाने गाए। इन गानों में ‘हँसता हुआ नूरानी चेहरा, काली जुलफ़े रंग सुनहरा’ आपने ज़रूर सुना होगा और आप यकीनन पसंद करते होंगे। साथ ही पहली फिल्म का शगुन करते हुए मोहम्मद रफी साहब ने पहला गाना ‘वो जब याद आए, बहुत याद आए’ के लिए कोई फीस न ली और कह दिया कि इस गाने की फीस आप किसी ज़रूरतमंद को देना। प्यारेलाल जी सौम्यता से बताते हैं कि ये लताजी और साबजी (रफी) का आशीर्वाद था उनके लिए।और यकीनन ये एक ऐसा आशीर्वाद साबित हुआ कि एल-पी के नाम से महशूर होने वाले इस म्यूजिक डूओ ने फिर पीछे मुड़कर देखना तो दूर, तुरंत ही कामयाबी के झंडे गाड़ने शुरु कर दिए। अगले ही साल एक और कमाल हुआ। 1964 में फिर एक लो बजट फिल्म संत ज्ञानेश्वर तैयार होने लगी और लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल को नए होने के चलते फिल्म में काम दिया गया। फिल्म के प्रोड्यूसर मशहूर ट्रेड अनिलिस्ट कोमल नाहटा के पिता रामराज नाहटा थे।फिल्म पहले तीन दिन में ही फ्लॉप डिक्लेयर होने को थी कि चौथे दिन रामराज जी के पास उनका असिस्टेंट दौड़ता हुआ आया और बोला “भाईसाहब, गजब हो गया, फिल्म तो सुपर हिट है ये” रामराज जी ने टोका भी “क्यों बेवकूफ बना रहे हो भाई” तो उसने उसी उत्साह में बताया “अरे नहीं, जैसे ही गाना ‘ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो’ गाना बजता है वैसे ही पब्लिक पागलों की तरह स्क्रीन पर रेजगारी फेंकने लगती है। मैंने आजतक काभी किसी भी सीन, किसी भी गाने के लिए इतनी रेजगारी लुटती नहीं देखी।“ कमाल की बात ये भी है कि यही गीत बिनाका गीत माला में दो साल तक टॉप थ्री में बना रहा था।इसी साल नई स्टार कास्ट के साथ फिल्म ‘दोस्ती’ न सिर्फ इनके गानों की वजह से सुपर-डुपर हिट हुई, बल्कि करिअर के दूसरे ही साल लक्ष्मीकान्त प्यारेलालजी को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। मोहम्मद रफी के गाए गाने ‘राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताये रे’ बहुत पसंद किया गया। अब क्योंकि यह दोनों ही शंकर-जयकिशन जी का संगीत बहुत पसंद करते थे, इसलिए इनका म्यूजिक स्टाइल भी कुछ लोगों को वैसा ही लगता था। लेकिन समय की करवट देखिए, कुछ सालों बाद शंकर-जयकिशन ने अपनी संगीत शैली में संगीत में फेरबदल कर ली कि लोग ये न कहें कि उनका संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल की कॉम्पोज़िशन से मिलता है। इसके बाद, फिल्म मिलन में मुकेश का गाना ‘सावन का महिना, पवन करे शोर’ हो या शागिर्द में लता जी का गाना ‘दिल विल प्यार व्ययर मैं क्या जानू रे’ हो, इनका हर गाना रेडियो पर नॉन-स्टॉप बजता मिलता था।फिल्म दो रास्ते, इंतकाम, बॉबी, रोटी कपड़ा और मकान, अमर अकबर एंथनी’ आदि सन 70 की हर बड़ी फिल्म में संगीत लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल जी का संगीत धूम मचा रहा था।इनके गानों की फेरहिस्त यहाँ लगाकर उसका गुणगान करना तो सूरज को दीया दिखाना है, पर अमर अकबर एंथनी की बात आई है तो इतना ज़रूर बताना चाहूँगा कि कि उस वक़्त के चार लिजेंड, टॉप फॉर को एक ही गाने में लाना, ये सिर्फ प्यारेलालजी और लक्ष्मीकान्त जी के बस का काम था। हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या  करें, इस गाने में मुकेश, रफी साहब, किशोर कुमार और लता मंगेश्कर भी हैं। ये पहला और आखिरी गाना है जिसमें ये चारों साथ हैं। साथ ही, आपको इस फिल्म का, अमिताभ बच्चन पर फिल्माया वो कॉमेडी सॉन्ग तो याद ही होगा ‘माई नेम इज एंथनी गोनज़ालवेज, मैं दुनिया में अकेला हूँ’। यह गाना प्यारेलाल जी की तरफ से उनके उन्हीं गोवानी उस्ताद एंथनी के लिए समर्पित था। इनके संगीत की ऊँचाइयों की क्या बात करूँ, अस्सी के दशक में तो इन्होंने सत्तर से ज़्यादा कहर ढाया था।फिल्म कर्ज़, एक दूजे के लिए, प्रेम रोग, नाम, नगीना, मिस्टर इंडिया, तेज़ाब, चालबाज़, राम लखन, आदि एक से बढ़कर एक म्यूज़िकल हिट दी। नब्बे में भी सौदागर, खुदा गवाह, खलनायक, दीवाना मस्ताना, आदि सब टॉप क्लास म्यूजिक से सजी ब्लॉकबस्टर फिल्में थीं।फिर धीरे-धीरे लक्ष्मीकान्त जी की सेहत गिरने लगी और प्यारेलाल जी का मन भी संगीत के बदलते तौर से विरक्त होने लगा। लक्ष्मीकान्त जी की देथ के बाद भी उन्होंने कुछ समय काम किया और एल्बम पर लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल ही लिखा, लेकिन वो बात न रही। पर प्यारेलाल जी सन 1998 से लेकर आज 2021 तक भी संगीत से जुड़े हुए हैं और आज भी म्यूजिक अरेंज में उनका कोई जवाब नहीं है। उनकी सौम्यता का हाल तो क्या बताऊँ साहब, उनके यहाँ 50 साल पहले जो वादक काम करने आते थे, उनकी चौथी पीढ़ियाँ तक अभी भी उनके पास ही आती हैं। वह लता जी से हमेशा टच में रहते हैं। मुकेश जी की वह तारीफ करते नहीं थकते। रफी साहब के बारे में तो फख्र से कहते हैं कि रफी साहब कल भी थे, आज भी हैं, हमेशा रहेंगे। सुबह 5 बजे से उनके गाने सुनने शुरु करता हूँ और शाम सात बजे तक सुनता हूँ। सारा दिन साहबजी की संगत में बीत जाता है। ऐसे ही प्यारे, हम सब के दुलारे, संगीत के लिए चौबीस घंटे समर्पित प्यारेलाल जी को हम मायापुरी मैगजीन की ओर से उनके 80वें जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं और आशा करते हैं कि वह स्वस्थ रहें और सदा संगीत से जुड़े रहें।सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’ फिल्म - मिलन (1967) संगीत - लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल गीतकार - आनंद बक्षी गायक - लता मंगेशकर, मुकेश हम तुम युग-युग से ये गीत मिलन के गाते रहे हैं गाते रहेंगे हम तुम जग में जीवन साथी बन के आते रहे हैं आते रहेंगे जब-जब हमने जीवन पाया जब-जब ये रूप सजा सजना हर बार तुम्हीं ने माँग भरी तुमने ही पहनाया कँगना हम फूल बने या राख हुए पर साथ नहीं छूटा अपना हर बार तुम्हीं तुम आन बसे इन आँखों में बनके सपना हम तुम युग-युग... सावन में जब कभी भी ये बादल गगन पे छाये बिजली से डर गए तुम डर कर करीब आये फिर क्या हुआ बताओ बरसात थम न जाए बरसात थम न जाए हम तुम युग-युग... जग ये बंधन ना तोड़ सका हम तोड़ के हर दीवार मिले इस जनम-जनम की नदिया के इस पार मिले, उस पार मिले भगवान ने पूछा मांगो तो तुमको सारा संसार मिले पर हमने कहा संसार नहीं हमको साजन का प्यार मिले हम तुम युग-युग... हम आज कहें तुमको अपना हम तुम किस रोज़ पराये थे बाहों के हार तुम्हें हमने बरसों पहले पहनाए थे दुनिया समझी हम बिछड़ गये ऐसे भी ज़माने आये थे लेकिन वो जुदा होने वाले हम नहीं, हमारे साये थे हम तुम युग-युग.*

शुक्रवार, 26 मई 2023

पंजाब के कलाकार

 

पंजाब के कला कार

पंजाबी गायकों की सूची : आइए दोस्तों आज के हम अपने इस लेख में पंजाबी गायकों की सूची में पंजाबी गायकों और गीतों के नाम जानते हैं। साथ में उनकी जन्मतिथि भी जानते हैं।



पंजाब के कलाकार


क्रगायक का नाम
1अबरार-उल-हक
2आबिदा परवीन
3अताउल्लाह खान एसखेलवी
4आसा सिंह मस्ताना
5अमर सिंह चमकिला
6अली जफर
7आतिफ असलम
8अमंत अली
9अमरिंदर सिंह गिल
10अखिल पसरेजा
11अंगरेज अली
12अमनदीप सिंह हेयर
13आलम लोहार
14अमृतपाल सिंह ढिल्लों (एपी ढिल्लों)
15एआर पैस्ले
16आरिफ लोहार
17अर्जन ढिल्लों
18अहमद रुश्दी
19अजरा जहां
20अमृत ​​मान
21अमिंदरपाल सिंह विर्क (एमी विर्क)
22अमर अर्शी
23अमर नूरी
24बब्बू मान (तेजिंदर सिंह)
25भगवंत मान
26बल्ली सागू (बलजीत सिंह)
27बोहेमिया (रोजर डेविड)
28बेंजामिन सिस्टर्स
29बलजीत मालवा
30बलकार सिद्धू
31बब्बल राय
32बाबा सहगल (हरजीत सिंह)
33बिक्रम सिंह
34बिलाल सईद
35बी प्राक (प्रतीक बचन)
36चन्नी सिंह (हरचरनजीत सिंह रूपल)
37दलेर मेहंदी
38दिलशाद अख्तर
39देव सिंह ढिल्लों
40दिलजीत दोसांझ (दलजीत सिंह दोसांझ)
41दीदार संधू
42डॉ ज़ीउस (बलजीत सिंह पदम)
43दीप जंदू
44धरमप्रीत
45दुर्गा रंगीला
46फरीहा परवेज
47फरीदा खानम
48फतेह डो
49गुरदास मान
50गुरमीत बावा
51गुरनाम भुल्लर
52गुलाम अली
53गिप्पी ग्रेवाल (रुपिंदर सिंह)
54गुरशाबाद
55गुरु रंधावा (गुरशरणजोत सिंह रंधावा)
56गैरी संधू (गुरमुख सिंह)
57गुर सिद्धू (गुरसिमरन सिंह सिद्धू)
58गुरिंदर गिल
59हरभजन मान
60हादिका कियानी
61हार्डी संधू (हरदविंदर सिंह संधू)
62हनी सिंह (हिरदेश सिंह)
63हैप्पी रायकोटी
64एच-धामी (हरतिंदर धामी)
65हंस राज हंस
66हरजीत हरमन
67हर्षदीप कौर
68हिमांशी खुराना
69हुमायरा चन्ना
70हकम सूफी
71इनायत हुसैन भट्टी
72इमरान खान
73इंद्रजीत निक्कू
74जगमोहन कौर
75जाबिर जस्सी
76चमेली सैंडलस
77जसविंदर बराड़
78जस बाजवा
79जस माणक
80जस्सा ढिल्लों
81जॉर्डन संधू
82जवाद अहमद
83जाज धामी (जसविंदर सिंह धामी)
84जज़ी बी (जसविंदर सिंह बैंस)
85जग्गी डी (जगविंदर सिंह धालीवाल)
86जस्सी गिल (जसदीप सिंह गिल)
87जगजीत सिंह
88जे सीन (कमलजीत सिंह झूटी)
89जसपिंदर नरूला
90जस्सी सिद्धू
91काका (रविंदर सिंह)
92कमल हीर
93कंठ कलेर
94कुलदीप माणक
95कुलविंदर ढिल्लों
96करमजीत अनमोल
97करण औजला (जसकरण सिंह)
98कनिका कपूर
99किरण अहलूवालिया
100करनैल गिल
101केएस माखन
102कमलजीत नीरू
103करनैल सिंह पारस
104कुलविंदर बिल्ला
105लाभ जंजुआ
106लखविंदर वडाली
107लेहंबर हुसैनपुरी
108लाल चंद याला जाट
109मन्नी संधू (अमरिंदर सिंह संधू)
110मोहम्मद रफी
111मोहम्मद सादिक
112मनमोहन वारिस
113मेहदी हसन
114माला (नसीम बेगम)
115मेहनाज
116मिस पूजा (गुरिंदर कौर कैंथ)
117मास्टर सलीम
118मलकीत सिंह
119मिकी सिंह (हरमनजीत मिकी सिंह)
120मसूद राणा
121मुसर्रत नज़ीर
122मनिंदर बुट्टर
123नुसरत फतह अली खान
124नाहिद अख्तर
125निम्रत खैरा
126नछतर गिल
127नरेंद्र बीबा
128नूरजहाँ
129नव (नवराज सिंह गोराया)
130नवाब इंदर
131नसीम बेगम
132निंजा (अमित भल्ला)
133निशा बानो (निशा सिंह)
134नछतर छत्ता
135पम्मी बाई (परमजीत सिंह सिद्धू)
136पंजाबी एमसी (राजिंदर सिंह राय)
137प्रीत बराड़
138प्रेम ढिल्लों (परमजीत सिंह ढिल्लों)
139प्रीत हरपाल (हरपाल सिंह)
140राज बराड़
141रविंदर ग्रेवाल
142रंजीत बावा (रंजीत सिंह बाजवा)
143रंजीत कौर
144राहत फ़तेह अली खान
145रोशन प्रिंस
146रेशमा
147सतिंदर सरताज
148सुरिंदर कौर
149सुरजीत बिंद्राखिया
150संगतर
151सतविंदर बिट्टी
152साहिर अली बागा
153सज्जाद अली
154सूरज सहोता
155सरबजीत चीमा
156शौकत अली
157सुरजीत खान
158शाजिया मंजूर
159सतिंदर सत्ती
160सुखिंदर शिंदा
161सलीम रजा
162सुरिंदर शिंदा
163सरदूल सिकंदर
164शन्नो खुराना
165सुखविंदर सिंह
166सुखबीर
167सईं जहूर
168सुखविंदर पंछी
169शैरी मान
170सिद्धू मूसेवाला
171शुभ
172शिंदा काहलों
173तरसेम जस्सर
174तरसमे सिंह सैनी
175तेगी पन्नू
176भविष्यवाणी
177तुफैल नियाजी
178वेरोनिका मेहता
179युवराज हंस
180जुबैदा खानम

संग्रह कर्ता



शीर्ष 10 पंजाबी गायक : निचे दिए गए टेबल में आपको प्रसिद्ध पंजाबी गायकों के नाम देखने को मिलेंगे। इस लिस्ट में आपको सिर्फ फेमस पंजाबी सिंगर्स के नाम देखने को मिलेंगे।

क्रगायक का नामजन्म की तारीख
1सिद्धू मूस वाला11 जून, 1993
2बब्बू मान29 मार्च, 1975
3अमृत ​​मान10 जून, 1992
4जस्सी गिल26 नवंबर, 1988
5दिलजीत दोसांझ6 जनवरी, 1984
6जस माणक12 फरवरी, 1999
7गिप्पी ग्रेवाल2 जनवरी, 1983
8हनी सिंह15 मार्च, 1983
9गुरु रंधावा30 अगस्त, 1991
10हार्डी संधू6 सितंबर, 1986

प्रसिद्ध पंजाबी गायिका महिला

टॉप पंजाबी फीमेल सिंगर्स 2023 : निचे दिए गए लिस्ट में आपको टॉप 10 पंजाबी फीमेल सिंगर्स के नाम की सूची देखने को मिलेगी।

क्रगायक का नामजन्म की तारीख
1चमेली सैंडलस4 सितंबर, 1988
2सुनंदा शर्मा30 जनवरी, 1992
3निम्रत खैरा13 मार्च, 1982
4नेहा कक्कड़6 जून, 1988
5मिस पूजा4 दिसंबर, 1980
6अनमोल गगन मान26 फरवरी, 1990
7जेनी जोहल18 अप्रैल, 1993
8कौर बी5 जुलाई, 1991
9रूपिंदर हांडा30 सितंबर, 1985
10अफसाना खान12 जून, 1994


पंजाब के टॉप 10 सिंगर्स में से नंबर 1 पर सिद्धू मोसे वाला हैं। इनका पूरा नाम शुभदीप सिंह सिद्धू हैं।



पंजाब में टॉप 10 सिंगर्स का नाम निचे दिया गया है।
1. सिद्धू मूस वाला
2. बब्बू मान
3. अमृत मान
4. जस्सी गिल
5. दिलजीत दोसांझ
6. जस माणक
7. गिप्पी ग्रेवाल
8. हनी सिंह
9. गुरु रंधावा
10. हार्डी संधू

पंजाबी गायकों में से सबसे युवा पंजाबी गायक जस माणक हैं। इसका जन्म 12 फरवरी, 1999 को एक पंजाबी परिवार में हुआ था।



सुरिंदर कौर का एक भारतीय कनेक्शन और देनदारी थे। उन्होंने मुख्य रूप से पंजाबी लोक गीत गाए, जहां उन्हें अग्रणी और शैली को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है, 1948 और 1952 के बीच हिंदी फिल्मों के लिए गाने के रूप में भी गाने रिकॉर्ड किए।











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भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...