शनिवार, 27 जनवरी 2024

विक्रम भट्ट

#27jan 
विक्रम भट्ट 

🎂27 जनवरी 1968

एक भारतीय निर्देशक हैं।  

विक्रम भट्ट 27 जनवरी 1968 में मुंबई में हुआ था।  उनके पिता का नाम प्रवीण भट्ट हैं।  

शादी 
भट्ट की शादी उनकी बचपन की दोस्त अदिति भट्ट से हुई है।  उनकी एक बेटी भी है-कृष्णा भट्ट।  साल 1998 में किन्ही कारणों से इस जड़ी ने एक दूसरे से तलाक ले लिया।  इसके बाद उनका अफेयर मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री सुष्मिता सेन से रहा। फिर वह उनसे भी अलग हो गए।  उसके बाद उन्होंने अभिनेत्री अमीषा पटेल को पांच साल तक डेट किया।  किन्ही कारणों  से अमीषा और भट्ट का ब्रेकअप हो गया। भट्ट का उनकी बेटी की तरफ झुकाव हैं।  उनकी बेटी उन्हें फिल्म के दौरान सेट पर बतौर सहायक निर्देशक के काम करतीं हैं।  

करियर 
विक्रम भट्ट ने अपने करियर की शुरुआत महज चौदह साल की उम्र में कर दी थी।  उनकी पहली फिल्म थी कानून क्या करेगा।  इसके बाद उन्होंने मुकुल आनंद के साथ बतौर सहायक निर्देशक फिल्म अग्निपथ में उनके साथ काम किया।  फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर काफी अच्छा व्यापार किया था।  

इस फिल्म के बाद भट्ट ने निर्देशक शेखर कपूर और महेश भट्ट के साथ दो-दो साल बतौर निर्देशक काम किया।  उन्होंने अपने सहायक फिल्म निर्देशन के दौर में कई हिट फ़िल्में जिनमे से एक हम हैं राही प्यार के फिल्म भी थी।  

उन्होंने अपने करियर की बतौर निर्देशक शुरुआत फिल्म जन्म से की।  इस फिल्म को मुकेश भट्ट ने प्रोड्यूस किया था।  उनकी शुरुआत की चार फ़िल्में बॉक्स-ऑफिस पर औंधेमुंह गिरी, जिसने विक्रम की हिम्मत को पूरी ठ तोड़ कर रख दिया था।  उसके बाद उन्होंने लगातार हिट फ़िल्में निर्देशित की, जिनमे कसूर, राज, आवारा पागल दीवाना जैसी फ़िल्में शामिल थीं।  हालंकि इस फिल्म के बाद फिर उनका करियर ख़राब दौर से गुजरने लगा।  

साल 2008 में भट्ट ने हॉरर फिल्म 1920 और शापित जैसी फिल्मों से अपनी हिंदी सिनेमा में वापसी की।  भट्ट ने पहली हिंदी सिनेमा में हॉन्टेड फिल्म 3डी में पेश की थी।  उनकी यह हांटेड फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर खूब कमाई की थी।  

साल 2012 में उन्होंने फिर से हॉन्टेड फिल्म राज निर्देशित की।   बॉक्सऑफिस  अच्छी कमाई की।  भट्ट ने इसके बाद बिपाशा के साथ मिलकर भुतहा फिल्म राज 3 का निर्माण किया।  हालांकि या फिल्म उनकी और हॉन्टेड फिल्मों की तरह दर्शकों रिझा नहीं पायी।  इसके बाद उन्होंने भुतहा फिल्म 1920 ईविल रिटर्न्स बनाई, इस फिल्म ने बॉक्सऑफिस पर ठीकठाक कमाई की।  

साल 2014 में उनकी एक और फिल्म क्रिएचर 3डी।  यह फिल्म दर्शकों को अपनी और आकर्षित करने में पूरी तरह नाकाम रही और बॉक्सऑफिस पर फिल्म को मुंह की खानी पड़ी।  

टीवी करियर 
विक्रम भट्ट नई हॉरर फ़िल्में बनाने के एक एक हॉरर शोर इश्क किल्स निर्देशित किया।  जोकि एक रियल लाइफ बेस्ड शो था।  हालंकि शो को उतनी टीआरपी नहीं जिंतनी उनकी फिल्मों को मिलती है।  

प्रसिद्ध फ़िल्में 
जन्म ,मदहोश। गुनेहगार, फरेब, बंबई का बाबू, ग़ुलाम, कसूर,राज, आप मुझे अच्छे लगने लगे ,आवारा पागल दीवाना, आँखे, फियर, स्पीड, 1920 ऐतबार,शापित, हॉन्टेड, राज 3 डी, डेंजरस इश्क , मिस्टर एक्स।

भारत भूषण

indo-canadian mudar:
#27jan
भारत भूषण

🎂जन्म: 1920;
⚰️मृत्यु: 27 जनवरी, 1992

हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता थे। अपने अभिनय के रंगों से कालिदास, तानसेन, कबीर और मिर्ज़ा ग़ालिब जैसे ऐतिहासिक चरित्रों को नया रूप देने वाले अभिनेता रहे।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 1920 में जन्मे भारत भूषण गायक बनने का ख्वाब लिए मुंबई की फ़िल्म नगरी में पहुंचे थे, लेकिन जब इस क्षेत्र में उन्हें मौका नहीं मिला तो उन्होंने निर्माता-निर्देशक केदार शर्मा की 1941 में निर्मित फ़िल्म 'चित्रलेखा' में एक छोटी भूमिका से अपने अभिनय की शुरुआत कर दी। 1951 तक अभिनेता के रूप में उनकी ख़ास पहचान नहीं बन पाई। इस दौरान उन्होंने भक्त कबीर (1942), भाईचारा (1943), सुहागरात (1948), उधार (1949), रंगीला राजस्थान (1949), एक थी लड़की (1949), राम दर्शन (1950), किसी की याद (1950), भाई-बहन (1950), आँखेंं (1950), सागर (1951), हमारी शान (1951), आनंदमठ और माँ (1952) फ़िल्मों में काम किया।

बैजू बावरा ने दी नई दिशा

भारत भूषण के अभिनय का सितारा निर्माता-निर्देशक विजय भट्ट की क्लासिक फ़िल्म बैजू बावरा से चमका। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फ़िल्म की गोल्डन जुबली कामयाबी ने न सिर्फ विजय भट्ट के प्रकाश स्टूडियो को ही डूबने से बचाया, बल्कि भारत भूषण और फ़िल्म की नायिका मीना कुमारी को स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। आज भी इस फ़िल्म के सदाबहार गीत दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। ओ दुनिया के रखवाले.., मन तड़पत हरि दर्शन को आज.., तू गंगा की मौज में जमुना का धारा.., बचपन की मुहब्बत को.., इंसान बनो कर लो भलाई का कोई काम.., झूले में पवन के आई बहार.., और दूर कोई गाए.. धुन ये सुनाए जैसे फ़िल्म के इन मधुर गीतों की तासीर आज भी बरकरार है। इस फ़िल्म से जुडे़ कई रोचक पहलू हैं। निर्माता विजय भट्ट फ़िल्म के लिए दिलीप कुमार और नर्गिस के नाम पर विचार कर रहे थे, लेकिन संगीतकार नौशाद ने उन्हें अपेक्षाकृत नए अभिनेता-अभिनेत्री को फ़िल्म में लेने पर जोर दिया। इसी फ़िल्म के लिए नौशाद ने तानसेन और बैजू के बीच प्रतियोगिता का गाना शास्त्रीय गायन के धुरंधर उस्ताद आमिर खान और पंडि़त डी.वी. पलुस्कर से गवाया। फ़िल्म की एक और दिलचस्प बात यह थी कि इसके संगीतकार, गीतकार, शकील बदायूंनी और गायक मोहम्मद रफी तीनों ही मुसलमान थे और उन्होंने मिलकर भक्ति गीत 'मन तपड़त हरिदर्शन को आज..' जैसी उत्कृष्ट रचना का सृजन किया था। बैजू बावरा की सफलता से उत्साहित यही टीम एक बार फिर श्री चैतन्य महाप्रभु फ़िल्म के लिए जुड़ी और इसमें सशक्त अभिनय के लिए भारत भूषण को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्म फेयर पुरस्कार मिला। कलाकारों, साहित्यकारों, संगीतकारों, भक्तों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को अपने सहज स्वाभाविक अभिनय के रंगों से परदे पर जीवंत करने का भारत भूषण का यह सिलसिला आगे भी जारी रहा।

मिर्ज़ा ग़ालिब में शानदार अदाकारी

भारत भूषण के फ़िल्मी करियर में निर्माता-निर्देशक सोहराब मोदी की फ़िल्म मिर्ज़ा ग़ालिब का अहम स्थान है। इस फ़िल्म में भारत भूषण ने शायर मिर्ज़ा ग़ालिब के किरदार को इतने सहज और असरदार ढंग से निभाया कि यह गुमां होने लगता है कि ग़ालिब ही परदे पर उतर आए हों। बेहतरीन गीत-संगीत, संवाद और अभिनय से सजी यह फ़िल्म बेहद कामयाब रही और इसे सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म और सर्वश्रेष्ठ संगीत के राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। इस फ़िल्म के लिए गजलों के बादशाह तलत महमूद की मखमली और गायिका, अभिनेत्री सुरैया की मिठास भरी आवाजों में गाई गई गजलें और गीत 'बेहद मकबूल हुए .., आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक.., फिर मुझे दीदए तर याद आया.., दिले नादां तुझे हुआ क्या है.., मेरे बांके बलम कोतवाल.., कहते हैं कि गालिब का है अंदाज-ए-बयां कुछ और भारत भूषण ने लगभग 143 फ़िल्मों में अपने अभिनय की विविधरंगी छटा बिखेरी और अशोक कुमार, दिलीप कुमार, राजकपूर तथा देवानंद जैसे कलाकारों की मौजूदगी में अपना एक अलग मुकाम बनाया।

वर्ष 1967 में प्रदर्शित फ़िल्म 'तकदीर नायक' के रूप में भारत भूषण की अंतिम फ़िल्म थी। इसके बाद वह माहौल और फ़िल्मों के विषय की दिशा बदल जाने पर चरित्र अभिनेता के रूप में काम करने लगे, लेकिन नौबत यहां तक आ गई कि जो निर्माता-निर्देशक पहले उनको लेकर फ़िल्म बनाने के लिए लालायित रहते थे। उन्होंने भी उनसे मुंह मोड़ लिया। इस स्थिति में उन्होंने अपना गुजारा चलाने के लिए फ़िल्मों में छोटी-छोटी मामूली भूमिकाएँ करनी शुरू कर दीं। बाद में हालात ऐसे हो गए कि भारत भूषण को फ़िल्मों में काम मिलना लगभग बंद हो गया। तब मजबूरी में उन्होंने छोटे परदे की तरफ रुख़ किया और दिशा तथा बेचारे गुप्ताजी जैसे धारावाहिकों में अभिनय किया। हालात की मार और वक्त के सितम से बुरी तरह टूट चुके हिंदी फ़िल्मों के स्वर्णिम युग के इस अभिनेता ने आखिरकार 27 जनवरी 1992 को 72 वर्ष की उम्र में

इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
📽️

चित्रलेखा (1941)
भक्त कबीर (1942)
भाईचारा (1943)
सावन (1945)
सुहाग रात (1948)
रंगीला राजस्थान (1949)
उधार (1949)
थेस (1949)
आंखें (1950)
भाई बहन (1950)
जन्माष्टमी (1950)
किसी की याद (1950)
राम दर्शन (1950)
हमारी शान (1951)
सागर (1951)
बैजू बावरा (1952)
माँ (1952)
आनंद मठ (1952)
पहेली शादी (1953)
दाना पानी (1953)
फरमाइश (1953)
लड़की (1953)
शुक रंभा (1953)
शबाब (1954)
मीनार (1954)
पूजा (1954)
श्री चैतन्य महाप्रभु (1954)
कवि (1954)
धूप छाँव (1954)
औरत तेरी यही कहानी (1954)
मिर्ज़ा ग़ालिब (1954)
अमानत (1955)
बसंत बहार (1956)
साक्षी गोपाल (1957)
मेरा सलाम (1957)
चम्पाकली (1957)
गेटवे ऑफ इंडिया (1957)
रानी रूपमती (1957)
सम्राट चंद्रगुप्त (1958)
फागुन (1958)
सोहनी महिवाल (1958)
सावन (1959)
कल हमारा है (1959)
अंगुलिमाल (1960) अहिंसाक उर्फ ​​अंगुलिमाल के रूप में
बरसात की रात (1960)
घूँघट (1960)
चाँदी की देवर (1960)
ग्यारा हज़ार लड़कियान (1962)
संगीत सम्राट तानसेन (1962)
जहाँ आरा (1964)
दूज का चाँद (1964)
नया कानून (1965)
तक़दीर (1967)
प्यार का मौसम (1969)
विश्वास (1969)
गोमती के किनारे (1972) भारत के रूप में
कहानी किस्मत की (1973) डॉक्टर के रूप में
रंगा ख़ुश (1975)
सोलह शुक्रवार (1977) भोला भगत के रूप में
हीरा और पत्थर (1977) तुलसीराम के रूप में
खून पसीना (1977) काका के रूप में
नवाब साहब (1978)
यूनीस-बीज़ (1980)
खारा खोटा (1981)
याराना (1981)
कमांडर (1981)
उमराव जान (1981) खान साहब (संगीत मास्टर) के रूप में
आदि शंकराचार्य (1983)
नास्तिक (1983) मंदिर के पुजारी के रूप में
जस्टिस चौधरी (1983)
हीरो (1983) जयकिशन के पिता रामू की भूमिका में
ज़ख्मी शेर (1984)
शराबी (1984) मास्टरजी के रूप में
फाँसी के बाद (1985)
मेरा साथी (1985)
मेरा धरम (1986)...बाबा
काला ढांडा गोरे लोग (1986)...महाराज
घर संसार (1986)...रहीम चाचा
हिम्मत और मेहनत (1987)... होटल में ग्राहक (विशेष उपस्थिति)
रामायण टीवी सीरियल (1987) में गोस्वामी तुलसीदास की भूमिका
प्यार का मंदिर (1988)
सोने पे सुहागा (1988)...काशीनाथ
मालामाल (1988) श्री मंगतराम के प्रबंधक के रूप में
अभी तो मैं जवान हूं (1989)
चांदनी (1989) डॉक्टर के रूप में
इलाका (1989) सूटकेस वाले आदमी के रूप में
घराना (1989) राधा के पिता के रूप में
तूफान (1989) हनुमान मंदिर में पुजारी के रूप में
जादूगर (1989) ज्ञानेश्वर के रूप में
जॉन के रूप में बाप नंबरी बेटा दस नंबरी (1990)।
मजबूर (1989 फ़िल्म) जज के रूप में
शेषनाग (1990)
Baaghi (1990) as Asha Father
Pyar Ka Devta (1991) as Doctor
Karz Chukana Hai (1991) as College Principal
Irada (1991)
Prem Qaidi (1991) as Suryanath
Swarg Yahan Narak Yahan (1991) as School Principal
Humshakal (1992) as The Judge
Aakhri Chetawani (1993)

बॉबी दियोल

#27jan

बॉबी दियोल
27 जनवरी 1969 (आयु 54 वर्ष), मुम्बई
पत्नी: तान्या देओल (विवा. 1996)
बच्चे: आर्यमन देओल, धरम देओल
भाई: सनी देओल, एशा देओल, अजीता देओल, विजेता देओल, अहाना देओल
माता-पिता: धर्मेन्द्र, प्रकाश कौर

विजय सिंह देओल, जिन्हें मुख्य रूप से बॉबी देओल के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं। ये मशहूर फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के छोटे बेटे हैं। इनका जन्म 27 जनवरी 1969 को हुआ था। इन्होंने हिन्दी सिनेमा की कई मुख्य फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई है। और अपने फिल्मी करियर की शुरुआत धरम वीर मूवी से की।
देयोल का जन्म विजय सिंह देयोल के रूप में 27 जनवरी 1969 को बंबई में एक पंजाबी परिवार में हुआ था । वह बॉलीवुड स्टार धर्मेंद्र और प्रकाश कौर के दूसरे बेटे हैं । वह सनी देओल के छोटे भाई हैं और उनकी दो बहनें विजयता और अजीता भी हैं जो कैलिफोर्निया में रहती हैं। उनकी सौतेली माँ हेमा मालिनी हैं , जिनसे उनकी दो सौतेली बहनें, अभिनेत्री ईशा देयोल और अहाना देयोल हैं। उनके चचेरे भाई अभय देयोल भी एक अभिनेता हैं। वह करण देयोल और राजवीर देयोल के चाचा हैं 

उन्होंने 1996 में तान्या आहूजा से शादी की; दंपति के दो बेटे हैं। 
📽️
1977 धरम वीर
1995 बरसात 
1997 गुप्त: छिपा हुआ सच 
और प्यार हो गया
1998 करीब
1998सैनिक
1999 दिल्लगी
2000 बादल 
2000हम तो मोहब्बत करेगा 
2000बिच्छू
2001 आशिक
2001अजनबी
2001 क्रांति
200123मार्च1931शहीद
2002हमराज़
2002चोर मचाए शोर
2004किस्मत
2004बरदाश्त
2004 अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों
2005जुर्म अविनाश 
2005टैंगो चार्ली
2005बरसात
2005नालायक
2005दोस्ती: फ्रेंड्स फॉरएवर
2006 हमको तुमसे प्यार है
2007 शाकालाका बूम बूम
2007 झूम राबर झूम
2007 अपने
2007 नकाब
2007 शांति
2007नन्हें जैसलमेर
2008 चमकू
2008 नायको
2008 दोस्ताना
2009 एक: एक की शक्ति
2009 वादा रहा
2010 मदद विक 
2011 यमला पगला दीवाना 2017 पोस्टर बॉयज़
2018यमला पगला दीवाना:
2018 दौड़ 3 
 2019 हाउसफुल 4
2020 '83 की कक्षा
2022 लव हॉस्टल
2024 जानवर

शुक्रवार, 26 जनवरी 2024

किरत भट्टल

#26jan 
किरत भट्टल 

🎂जन्म:  26 जनवरी  मोनरोविया , लाइबेरिया में 

, जिन्हें पेशेवर रूप से किरात या कीरथ के नाम से जाना जाता है , एक भारतीय अभिनेत्री हैं। उन्होंने मॉडलिंग भूमिकाओं में शुरुआत की और फिर तमिल फिल्म उद्योग में सफलता हासिल की ।लाइबेरिया में जन्मे किरात का परिवार चंडीगढ़ के एक सिख परिवार से है।उन्होंने 4 नवंबर को अभिनेता और वीजे गौरव कपूर से शादी की।
किरत भट्टल जिन्हें पेशेवर तौर पर किरात के नाम से जाना जाता है, एक लोकप्रिय जाट-सिख भारतीय फिल्म अभिनेत्री हैं। उन्होंने मॉडलिंग भूमिकाओं में शुरुआत की और फिर तमिल फिल्म उद्योग में सफलता हासिल की। किरात का जन्म पश्चिम अफ्रीका में लाइबेरिया के मोन्रोविया में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा एलिट बोर्डिंग स्कूल द लॉरेंस स्कूल, सनावर में की, उनके कुछ प्रसिद्ध पूर्व छात्र अभिनेता संजय दत्त, पूजा बेदी, राहुल रॉय, सैफ अली खान, नेस वाडिया और मेनका गांधी, उमर अब्दुल्ला जैसे राजनेताओं के साथ-साथ मॉडल भी हैं। , फ़िरोज़ गुजराल, और निर्देशक अपूर्व लाखिया। किरात ने सफ़ी विज्ञापन से शुरुआत की और फिर साथी भारतीय राइमा सेन के साथ फेयर एंड लवली, सियाराम और लैक्मे विज्ञापनों जैसे कई अन्य अभियानों में काम किया, जिन्होंने तब से बॉलीवुड फिल्म उद्योग में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। फिर, किरत ने दक्षिण भारत में अपना दावा पेश करने के लिए चेन्नई में श्री कुमारन सिल्क्स के लिए मॉडलिंग की। किरात ने तेलुगु फिल्म डोंगोडी पेली से डेब्यू किया था। अनुष्का शेट्टी के प्रोजेक्ट से हटने के बाद सरन ने उन्हें अपनी पहली बड़ी फिल्म वत्तारम के लिए साइन किया था। वट्टाराम में आर्य और नेपोलियन भी शामिल हैं। वट्टाराम एक बंदूक विक्रेता के प्रेम की कहानी कहता है। आर्य ने वट्टाराम के बाद फिर से किरात के साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने धनुष के साथ प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट देसिया नेदुंचलाई 47 करने के लिए साइन अप किया, लेकिन हालांकि, प्रोजेक्ट में देरी हुई और बाद में रद्द कर दिया गया। चूंकि फिल्म लगभग तीन महीने तक निष्क्रिय रही थी, भट्टल ने प्रज्वल देवराज के साथ गेलेया नामक कन्नड़ भाषा की फिल्म साइन की थी, जिसे हिट घोषित किया गया था। उन्होंने फिल्म संतोष सुब्रमण्यम में एक अतिथि भूमिका स्वीकार की, जो तेलुगु भाषा की फिल्म बोम्मारिलु की रीमेक है जिसमें जेनेलिया और जयम रवि हैं। फिल्म में उनकी भूमिका के लिए उन्हें काफी प्रशंसा मिली है, भले ही यह भूमिका छोटी थी। कुछ समीक्षाओं में कहा गया है कि उन्होंने नायिका जेनेलिया को मात दे दी। उन्होंने सिलुनु ओरु कधल और दोराई के निर्देशक कृष्णा के साथ एक तमिल फिल्म भी साइन की, जिसमें अर्जुन सरजा मुख्य भूमिका में थे। किरात लैक्मे, क्लेरेस, फेयर एंड लवली, मोटोरोला और मैकलीन्स सहित विभिन्न उत्पादों के ब्रांड एंबेसडर भी रहे हैं।

गुरुवार, 25 जनवरी 2024

अनिल गांगुली

#15jan
#26jan 
अनिल गांगुली

🎂जन्म26 जनवरी, 1933
कलकत्ता , बंगाल प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत (अब पश्चिम बंगाल , भारत )
⚰️मृत15 जनवरी 2016 (आयु 82 वर्ष)
मुंबई, महाराष्ट्र , भारत

भारतीय
व्यवसायों,निदेशक पटकथा,लेखक

उल्लेखनीय कार्य
कोरा कागज़
तपस्या (1976 फ़िल्म)
रिश्तेदार
रूपाली गांगुली (बेटी) विजय गांगुली (बेटा)
 एक भारतीय फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक थे, जिन्होंने 1970 से 2001 तक हिंदी सिनेमा में काम किया । उन्हें जया भादुड़ी अभिनीत फिल्म कोरा कागज (1974) और राखी अभिनीत फिल्म तपस्या (1975) के लिए जाना जाता है। ), जिनमें से दोनों ने संपूर्ण मनोरंजन प्रदान करने वाली सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता । उन्हें राखी के साथ तृष्णा , आंचल , साहेब (1985) जैसी फिल्मों के लिए भी जाना जाता है। बाद में अपने करियर में, 1986 के बाद उन्होंने सात फ़िल्में बनाईं जिनमें से कोई भी सफल नहीं हुई।

गांगुली ने अपने करियर की शुरुआत सशक्त महिला भूमिकाओं और वैवाहिक कलह के विषयों के साथ साहित्यिक रूपांतरण करते हुए की। अपनी दूसरी फिल्म कोरा कागज के लिए उन्होंने आशुतोष मुखोपाध्याय की कहानी "सात पाके बंधा" को रूपांतरित किया , जिसे पहले इसी नाम से एक बंगाली फिल्म में रूपांतरित किया गया था। फ़िल्मों की मुख्य अभिनेत्री जया भादुड़ी ने अपनी भूमिका के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता ।उनकी अगली फिल्म, तपस्या (1975) जिसमें राखी मुख्य भूमिका में थीं, का निर्माण राजश्री प्रोडक्शंस द्वारा किया गया था , और यह आशापूर्णा देवी की कहानी पर आधारित थी । राखी ने अपनी भूमिका के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीता बाद में उन्होंने शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास परिणीता को संकोच (1976) के रूप में रूपांतरित किया, जिसमें सुलक्षणा पंडित और जीतेंद्र मुख्य भूमिका में थे।  1980 में बनी राखी अभिनीत हमकदम सत्यजीत रे की महानगर का रूपांतरण थी ।

उन्होंने राजेश खन्ना को मुख्य नायक के रूप में लेकर आंचल बनाई और फिल्म प्लैटिनम जुबली हिट साबित हुई। उनकी आखिरी बड़ी फिल्म अनिल कपूर और अमृता सिंह स्टारर साहेब (1985) थी। बाद में अपने करियर में, उन्होंने एक्शन और थ्रिलर फिल्में बनाना शुरू कर दिया, लेकिन 1986 से उनकी बनाई गई 9 में से नौ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं। उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म तापस पॉल और देबाश्री रॉय के साथ बंगाली फिल्म ' किये पारा किये नजारा' (1998) थी । 15 जनवरी 2016 को 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। 
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हाफ टिकट (1962) सहायक निदेशक
भीगी रात (1965) सहायक निर्देशक
कोरा कागज़ (1974)
तपस्या (1975)
संकोच (1976)
तृष्णा (1978)
खानदान (1979)
समझौता (1980)
नियत (1980)
आँचल (1980)
हमकदम (1980)
करवट (1982)
कौन? कैसी? (1983)
साहेब (1985)
मेरा यार मेरा दुश्मन (1987)
प्यार के काबिल (1987)
सड़क छाप (1987)
बालिदान (बोलिदान) (1990, बंगाली)
दुश्मन देवता (1991)
दिल की बाजी (1993)
अंगारा (1996)
किये पारा किये निजारा (1998, उड़िया)

करतार सिंह दुग्गल

#01march
#26jan 
करतार सिंह दुग्गल
अन्य नाम के. एस. दुग्गल

🎂जन्म 01 मार्च, 1917
⚰️मृत्यु 26 जनवरी, 2012

मृत्यु स्थान दिल्ली
पति/पत्नी आयशा
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र लेखक
मुख्य रचनाएँ 'हाल मुरीदों का', 'उपर की मंजिल', 'इन्सानियत' आदि।
भाषा पंजाबी, हिंदी और उर्दू
विद्यालय फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज
शिक्षा एम. ए
पुरस्कार-उपाधि पद्म भूषण (1988)
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी करतार सिंह दुग्गल ने सैकड़ों कहानियाँ और कविताएँ लिखीं तथा उनकी कहानियों के कुल 24 संग्रह प्रकाशित हुए। इसी तरह कविताओं के भी 2 संग्रह प्रकाशित हुए।

परिचय
करतार सिंह दुग्गल का जन्म 1 मार्च, 1917 को रावलपिंडी (अब पाकिस्तान), अविभाजित पंजाब में हुआ था। उन्होंने लाहौर के फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज से अंग्रेज़ी में एम.ए. किया था। उन्होंने 1942 से 1966 तक आकाशवाणी में केंद्र निदेशक समेत विभिन्न पदों पर काम किया तथा इस दौरान उन्होंने आकाशवाणी के लिये पंजाबी समेत दूसरी भाषाओं में कई नाटक और कहानियाँ लिखीं। इनकी पत्नी का नाम 'आयशा' है तथा इनका एक पुत्र भी है। 1966-73 में करतार सिंह दुग्गल नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक पद पर थे और 1973 से 1976 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में बतौर सलाहकार उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।

रचनाएँ
करतार सिंह दुग्गल ने सैकड़ों कहानियाँ और कविताएँ लिखीं तथा उनकी कहानियों के कुल 24 संग्रह प्रकाशित हुये। इसी तरह कविताओं के भी 2 संग्रह प्रकाशित हुये। इसके अलावा उन्होंने 10 उपन्यास और 7 नाटक भी साहित्य संसार को सौंपे। इनकी कई कहानियों के भारतीय-विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुए और सैकड़ों संग्रह प्रकाशित हुए। करतार सिंह के दो कविता संग्रह और एक आत्मकथा भी पाठकों तक पहुँची। उनकी पुस्तकें कई विश्वविद्यालयों में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनीं।

लोकप्रिय रचनाएँ
हाल मुरीदों का
ऊपर की मंजिल
इंसानियत
मिट्टी मुसलमान की
चील और चट्टान
तुषार कण
सरबत्त दा भला
माहिर फ़नकार
करतार सिंह के साहित्य को जानने वाले लोग इन्हें एक माहिर फ़नकार के तौर पर याद करते हैं। दिल्ली पंजाबी साहित्य अकादमी के सचिव रवैल सिंह करतार सिंह दुग्गल को पंजाबी लेखकों में पहली पंक्ति का सिपाही मानते हैं। रवैल सिंह दुग्गल को गुरु ग्रंथ साहब के नए काव्य संस्करण के लिए भी याद करते हैं।

पुरस्कार
करतार सिंह दुग्गल को सन 1988 में भारत सरकार द्वारा 'साहित्य एवं शिक्षा' के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। करतार सिंह साहित्य अकादमी सम्मान सहित कई सम्मानों से नवाजे गए उन्होंने उपन्यास, कहानियाँ, और नाटक लिख कर अपने लिए साहित्य की दुनिया में जगह बनाई।

विश्व पुस्तक मेले के आरम्भकर्ता
करतार सिंह दुग्गल जब नेशनल बुक ट्रस्ट के संचालक बने तब उन्होंने 'विश्व पुस्तक मेले' का आग़ाज़ किया जो आज तक जारी है। भारत का सबसे बड़ा पुस्तकालय आन्दोलन, राजा राममोहन रॉय फाउंडेशन, भी दुग्गल साहब के हाथों क़ायम हुआ।

⚰️निधन
करतार सिंह दुग्गल का निधन 26 जनवरी, 2012 को दिल्ली में हुआ था।

मार्गेट ग्रोटि

#26jan 
मार्गेट गोरेटी

🎂जन्म26 जनवरी 1972 
मुंबई , भारत

व्यवसाय अभिनेत्री, शेफ, मॉडल

जीवनसाथी अरशद वारसी ​( एम.  1999 )
गोरेटी एक लोकप्रिय एमटीवी वीजे थे और उन्होंने एनडीटीवी गुड टाइम्स चैनल पर टीवी शो डू इट स्वीट की मेजबानी की थी।  गोरेटी ने अपने बेटे ज़ेके वारसी के साथ फिल्म सलाम नमस्ते में एक विशेष भूमिका निभाई। उन्होंने रजत कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म रघु रोमियो और एक साइंस-फिक्शन फिल्म जाने होगा क्या में छोटी भूमिका निभाई। उन्होंने एल्बम ओए-होये में हरभजन मान का मशहूर गाना "कुड़ी कद के कालजा लेगी, गल्लां गोरियां हरभजन मान" पेश किया।गोरेटी ने 14 फरवरी 1999 को हिंदी फिल्म अभिनेता अरशद वारसी से शादी की , जिनसे उनकी मुलाकात 1991 में हुई थी, जब उन्हें कॉलेज में एक नृत्य प्रतियोगिता को जज करने के लिए आमंत्रित किया गया था, जिसमें वह भाग ले रही थीं।उन्होंने 2016 में मुंबई मैराथन पूरी की।

मनुस्मृति

. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...