सोमवार, 1 जनवरी 2024

अभिनेत्री शकीला

प्रसिद्ध अभिनेत्री शकीला की के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि
#01jan
#20sep

: 🎂01 जनवरी 1935, अफ़ग़ानिस्तान
⚰️: 20 सितंबर 2017, मुम्बई
पति: वाई॰ एम॰ इलियास (विवा. 1963)
बहन: Noorjahan
भांजियां या भतीजियां: तस्नीम काज़ी, कौसर काज़ी, फिरदौस काज़ी

शकीला  हिन्दी सिनेमा में सन 1950-60 की प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं। उनको गुरुदत्त की फिल्म 'आर पार' (1954) और 'सी.आई.डी.' के लिए याद किया जाता है। शकीला ने शक्ति सामंत की फिल्म 'चाईना टाउन' (1963) में अपने समय के प्रसिद्ध अभिनेता शम्मी कपूर के साथ अभिनय किया था। इस फिल्म का गीत 'बार बार देखो, हज़ार बार देखो...' आज तक लोगों के बीच काफ़ी लोकप्रिय है। शकीला जी ने 1963 में फिल्मों से संन्यास ले लिया और विवाह करके वह भारत से बाहर लंदन में बस गयीं। उनकी बहन नूरजहाँ का विवाह प्रसिद्ध हास्य अभिनेता जॉनी वॉकर के साथ हुआ था।

परिचय

अभिनेत्री शकीला का जन्म 1 जनवरी सन 1936 को हुआ था। उनका वास्तविक नाम 'बादशाहजहाँ' था। शकीला जी के अनुसार- "मेरे पूर्वज अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के शाही खानदान से ताल्लुक रखते थे। मेरा जन्म 1 जनवरी, 1936 को मध्यपूर्व में हुआ था। राजगद्दी पर कब्ज़े के खानदानी झगड़ों में मेरे दादा-दादी और मां मारे गए थे। मैं तीन बहनों में सबसे बड़ी थी और हम तीनों बच्चियों को साथ लेकर मेरे पिता और बुआ जान बचाकर मुम्बई भाग आए थे। उस वक़्त मैं क़रीब 4 साल की थी।"

#फ़िल्मी_कैरियर

‘दास्तान’ के बाद शकीला जी ने ‘गुमास्ता’ (1951), ‘खूबसूरत’, ‘राजरानी दमयंती’, ‘सलोनी’, 'सिंदबाद द सेलर’ (सभी 1952) और ‘आगोश’, ‘अरमान’, ‘झांसी की रानी’ (सभी 1953) में बतौर बाल कलाकार अभिनय किया।

सोहराब मोदी की फिल्म ‘झांसी की रानी’ में शकीला जी ने रानी लक्ष्मीबाई (अभिनेत्री मेहताब) के बचपन की भूमिका की थी। साल 1953 में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘मदमस्त’ में वह पहली बार नायिका बनीं। इस फिल्म में उनके नायक एन.ए. अंसारी थे। फिल्म ‘मदमस्त’ को पार्श्वगायक महेंद्र कपूर की पहली फिल्म के तौर पर भी जाना जाता है। उन्होंने अपने कॅरियर का पहला गीत ‘किसी के ज़ुल्म की तस्वीर है मज़दूर की बस्ती’ इसी फिल्म में, गायिका धन इन्दौरवाला के साथ गाया था। साल 1953 में शकीला जी की बतौर नायिका दो और फिल्में ‘राजमहल’ और ‘शहंशाह’ प्रदर्शित हुईं।

मृत्यु

अभिनेत्री शकीला की मृत्यु 20 सितम्बर, 2017 को हुई। 81 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हार्ट अटैक (हृदयाघात) के कारण हुई।

रविवार, 31 दिसंबर 2023

राज बराड़

राज बराड़ 
#03jan
#31dic 
🎂03 जनवरी 1972, 
मोगा
⚰️31 दिसंबर 2016, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल, चण्डीगढ़

पत्नी: बलविंदर कौर (विवा. ?–2016)
बच्चे: Savitaj Brar, Joshnoor Brar

एक भारतीय गायक, अभिनेता, गीतकार और संगीत निर्देशक थे जिन्होंने पंजाबी सिनेमा में काम किया था। वह अपने 2008 के हिट एल्बम रीबर्थ के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते थे।
एक भारतीय गायक, अभिनेता, गीतकार और संगीत निर्देशक थे जिन्होंने पंजाबी सिनेमा में काम किया । उन्हें उनके 2008 के हिट एल्बम रीबर्थ के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता था । उन्होंने 2010 की फिल्म जवानी जिंदाबाद से अपने अभिनय की शुरुआत की , और उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले आखिरी फिल्म आम आदमी की शूटिंग पूरी की थी , जो 2018 में रिलीज हुई थी।
किसी ने नहीं सोचा था कि पंजाबी इंडस्ट्री को उंचाईयों पर ले जाने वालों में से एक राज बराड़ अपने जन्मदिन से दो दिन पहले दुनिया को अलविदा कह जाएंगे।पंजाब के प्रसिद्ध गायक राज बराड़ का शनिवार दोपहर चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित जीएमसीएच में निधन हो गया। बराड़ के निधन पर मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। वह 44 साल के थे।राज बराड़ ने कई बार अपनी शराब पीने की आदत के बारे में सार्वजनिक रूप से भी बताया.
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2010 जवानी जिंदाबाद
2013 मूड में जाट
2014 पॉलीवुड में पुलिस
2018 आम आदमी
विशेष
राज बरार की मृत्यु के बाद उनके कई गाने रिलीज़ नहीं हुए। इसलिए, बंटी बैंस और उनकी बेटी स्वीटाज बराड़ ने उस गाने को रिलीज़ करने का फैसला किया। अप्रकाशित गीतों में से एक चंडीगढ़ ड्रॉपआउट्स है जो जुलाई 2021 में रिलीज़ हुऐ.

मुश्ताक

मुश्ताक
#31dic 
🎂31 दिसंबर 1969

बैहर, मध्य प्रदेश , भारत
व्यवसायों अभिनेता हास्य_अभिनेता
सक्रिय वर्ष

स्वागत
टेलीविजन
हम हैं राही प्यार केजोड़ी नंबर 1स्वागत
जीवनसाथी सलमा खान
बच्चे 2
बचपन में ही मनोरंजन की दुनिया से जुड़ गए थे मुशताक खान? मायानगरी आकर ऐसे काटे संघर्ष के दिन फुट पाथ पर गुजरी थी रातें

मुशताक बहुत कम उम्र में ही मनोरंजन जगत से जुड़ गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक जब वे सातवीं में थे तो नाटकों में हिस्सा लेने लगे। इसके अलावा बचपन में उन्होंने रामलीला में काम किया। इसके बाद वह बड़ा एक्टर बनने का सपना लेकर मायानगरी चले आए।
मुशताक खान का जन्म 31 दिसम्बर 1959 को बालाघाट मध्य प्रदेश में हुआ। मुशताक ने कम उम्र से ही लोगों का मनोरंजन करना शुरू कर दिया। बचपन में इन्हे जब रामलीला में काम करने का मौका मिलता तो ये पूरी जान लगा दिया करते।
मुशताक के अभिनय कौशल को देख इनके कुछ दोस्तों और शिक्षकों ने इन्हें मायानगरी जाकर किस्मत आजमाने की सलाह दी। दोस्तों ने कहा, 'तुम जैसे अच्छे कलाकार को इस छोटी सी जगह में नहीं रहना चाहिए। बाहर निकलो, कुछ बड़ा करो।' मुशताक ने जब अपने घर में इस बात का जिक्र किया तो सभी ने विरोध किया। मुशताक से फैमिली बिजनेस से जुड़ने को कहा गया। एक तरफ मुशताक की आंखों में एक्टर बनने के सपने थे, दूसरी तरफ परिवार के लोग विरोध में खड़े थे। हालांकि, इस दौरान मुशताक के बड़े भाई ने उनका भरपूर साथ दिया और घरवालों को मनाकर इन्हें मुंबई भेजने का इंतजाम करवा दिया।
मायानगरी में मुशताक के पास रहने की कोई जगह नहीं थी तो वह रेलवे स्टेशन पर रात गुजारते और फुटपाथ पर सोते थे। इनके पास पैसे तो थे पर इतने नहीं कि रहना और खाना दोनों हो सके। महीनों इन्होंने इसी तरह गुजारे। इनका एक-एक दिन पहाड़ के समान गुजरता था। दिनभर मुश्ताक काम की तलाश में लोगों से मिलते, मगर सब किसी ना किसी बहाने से मना कर देते। जिन दोस्तों ने मुंबई आने की सलाह दी वे ही मजाक उड़ाने लगे। बाद में मुशताक खान थिएटर से जुड़ गए। वहीं एक दिन जब ये एक नाटक में काम कर रहे थे तो मशहूर फिल्म निर्माता इस्माइल श्रॉफ की नजर इन पर पड़ी। उन्हें इनका अभिनय पसन्द आया और इस तरह उन्होंने अपनी फिल्म 'थोड़ी सी बेवफाई' मे काम करने का ऑफर मुशताक को दिया। इस तरह मुशताक खान का फिल्मी सफर शुरू हुआ। 
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अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है (1980) - लचर शॉपर 'जोन पिंटो' (स्मिता पाटिल) के साथ फ़्लर्ट करने की कोशिश कर रहा है
थोडिसी बेवफ़ाई (1980) - बीमार पत्नी के साथ काम करनेवाला - मुश्ताक
लाराज़ (1981) - एक कसाई के रूप में
सज़ाये मौत (1981) - अभिनेता
कालिया (1981) - राम दीन
विवेक (1985)
कांग्रेगेशन (1986) - बांके नवाब उर्फ ​​"अंजुमन"
अंगारे (1986) - मुस्ताक खान
कबज़ा (1988) - तिवारी
मैं आज़ाद हूँ (1989) - पांडे
आखिरी गुलाम (1989) - अभिनेता
आशिकी (1990) - रफू मास्टर - मुस्ताक खान
बाप नंबरी बेटा दस नंबरी (1990)- पुलिस इंस्पेक्टर
दिल है कि मानता नहीं (1991) - बस कंडक्टर
साथी (1991) - शेट्टी
सदक (1991) - दलाल
लक्ष्मणरेखा (1991) - दिलावर लाहौरी
ज़ुल्म की हुकुमत (1992) - प्रभाकर
धारावी (1992) - शंकर
सातवाँ आसमान (1992) - उस्मान भाई
एक लड़का एक लड़की (1992) - स्कूल टीचर
जुनून (1992) - आदिवासी भीम
अनाम (1992) - इंस्पेक्टर पीसी यादव
प्यार प्यार (1993) - राम सेवक गायतोंडे
आदमी (1993)
गुनाह (1993) - होटल मैनेजर
लुटेरे (1993) - जोशी
प्लेटफ़ॉर्म (1993) - अर्जुन
सर (1993) - कालू बा
हम हैं राही प्यार के (1993) - भगवती प्रसाद मिश्रा
गुमराह (1993) - बॉम्बे पुलिस इंस्पेक्टर
क्रांतिवीर (1994) - बब्बनराव देशमुख
गोपी किशन (1994) - पुलिस इंस्पेक्टर मिश्रा
नाराज़ (1994) - ज़फीर खान
राजा (1995) - बनवारीलाल सान्याल
मिलन (1995) - हवलदार शांताराम
गुनेघर (1995) - मौलवी
बाजी (1995) - जामदादे - सब इंस्पेक्टर
द डॉन (1995)-प्रजापति
सरहद: द बॉर्डर ऑफ़ क्राइम (1995) - मिस्टर लोबो
इंग्लिश बाबू देसी मेम (1996)
बंबई का बाबू (1996) - कमिश्नर - डीए चौहान
चाहत (1996) - वेटर - अन्ना
यश (1996) - शराफत अली
अग्नि प्रेम (1996)
अग्नि मोर्चा (1997)
अकेले हम अकेले तुम (1997) - वकील श्री भतीजा
मृत्युदाता (1997) - पुलिस इंस्पेक्टर दानापानी
लहू के दो रंग (1997) - पप्पू शिकारी
मिलिट्री राज (1998)-मंत्री छेदीलाल
मेजर साब (1998) - हनुमान प्रसाद
जब प्यार किसी से होता है (1998) - सिंह
राजाजी (फिल्म) (1999) - कालीचरण उर्फ ​​कड़वा
तेरी मोहब्बत के नाम (1999) - पुलिस कांस्टेबल प्यारेलाल
हेरा फेरी (2000) - देवी प्रसाद का नौकर
हमारा दिल आपके पास है (2000)
गदर एक प्रेम कथा (2001) - गुल खान
जोड़ी नंबर 1 - (2001) - कैसीनो मैनेजर डी कोस्टा
दाल: द गैंग (2001) - बनारसी
दिल ने फिर याद किया (2001 फ़िल्म)
तनवीर जैदी के साथ बे-लगाम (2002) पुलिसवाला
एक और एक ग्यारह (2003) इंस्पेक्टर बहादुर सिंह
30 डेज़ (2004) - हवलदार गंगाराम
मुझसे शादी करोगी (2004) - छुटकी बाबा
रहगुज़ार (2006) - परवेज़
सैंडविच (2006) - पोपटलाल
खल्लास: द बिगिनिंग ऑफ एंड (2007) - शिंदे
लाइफ में कभी-कभी (2007) - मोनिका का एजेंट
माई फ्रेंड गणेशा (2007)
वेलकम (2007) - बल्लू
इश्क हो गया मामू (2008) - शायर ए आजम
ब्लैक एंड व्हाइट (2008) - मोहनलाल अग्रवाल - विधायक
मेहबूबा (2008)
आपको कामयाबी मिले! (2008)-तरुण के महाप्रबंधक
एक विवाह... ऐसा भी (2008) - बस में सीटी बजाता हुआ
ओह, माई गॉड (2008) - इंस्पेक्टर राणा
आसमा: द स्काई इज़ द लिमिट (2009) - कमलेश पांडे
शॉर्टकट - द कॉन इज़ ऑन (2009) - गायत्री के पिता
आखिरी फैसला (2010) - रंजीत (मुश्ताक खान के रूप में)
वांटेड (2010) - पुलिस इंस्पेक्टर
माई फ्रेंड गणेशा 3 (2010) - शिवधर पांडुरंग कांबले
अपार्टमेंट: अपने जोखिम पर किराया (2010) - चौकीदार मिश्रा
वह लड़की पीले जूते में (2011)
शागिर्द (2011) - जेलर
रास्कल्स (2011) - उस्मान
राउडी राठौड़ (2012) - बाबाजी के सहायक
वंस अपॉन ए टाइम इन मुंबई दोबारा! -असलम (इमरान के पिता)
डी सैटरडे नाइट (2014)
दिल मांगे कुछ और (2014)
गुर्जर आंदोलन अधिकार की लड़ाई (2014) - मनोहर गुर्जर (गुर्जर नेता) (अरुण नागर द्वारा निर्देशित)
हॉन्टेड रूह (2015) - जितेंद्र सिंह द्वारा निर्देशित
बस एक चांस (2015) - कीर्तन पटेल द्वारा निर्देशित गुजराती फिल्म
वेलकम बैक (2015) - बल्लू
रोमियो और राधिका (2016) गुजराती फिल्म
मिस टीचर (2016) - जय प्रकाश द्वारा निर्देशित
निदेशक का अंतिम कट (2016)
जब ओबामा को ओसामा से प्यार था (2018)
बाला (2019) - वकील
डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे (2020)
अतुल्य भारत (2020)
सीक्रेट पॉकेटमार (2021)
मरने से पहले (2022)
है तुझे सलाम इंडिया (2022)
सौराष्ट्र (2022)
गदर 2 (2023)
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ज़ी हॉरर शो आफत में गंगवा मयूरी पिता के रूप में
कुछ रंग प्यार के ऐसे भी - बलदेव त्रिपाठी (2016-17)
अदालत - झिलमिल "केडीज़ फ्रेंड" (2010-11)
चाचा चौधरी
टेढ़े मेढ़े सपने - (2001)
चमत्कार - एनडी तिवारी (1996)
देवता - (1999)
हम सब एक हैं - (1999) (एपिसोड 66)
भारत एक खोज (1988)....मियां बुवन एपिसोड 31- राणा सांगा , इब्राहिम लोधी और बाबर
वागले की दुनिया (1988)...मनोहर के रूप में- एपिसोड लैंडलॉर्ड
नुक्कड़ (1986)....प्रभाकर के रूप में- एपिसोड मिस्ट्री वुमन
बेलन वाली बहू (2018) प्रेमनाथ अवस्थी के रूप में
कुछ रंग प्यार के ऐसे भी सीजन 3 - बलदेव त्रिपाठी (2021)
हमने तो लूट लिया (2023)... एमएक्स प्लेयर फिल्म

🏆🥇

2002 इंडियन टेली अवार्ड्स
2017 लायंस गोल्ड अवार्ड्स

बेन किंग्सले

#31dic 
बेन किंग्सले लोकप्रिय हॉलीवुड अभिनेता है। उन्होने 1967 में थिएटर शुरू किया।
बेन किंग्सले का जन्म 

🎂31दिसंबर 1943 में उत्तरी योर्कशायर,  इंग्लैण्ड में हुआ।
पत्नी: डनिएला लैवेंडर (विवा. 2007)
बच्चे: फर्डीनांड किंग्सले, जास्मीन भांजी, एडमंड किंग्सले, ज़्यादा
इनाम: अकेडमी पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, ज़्यादा
माता-पिता: रहीमतुल्ला हरजी भांजी, एना लीना मैरी गुडमैन
नामांकन: अकेडमी पुरस्कार - सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, ज़्यादा
उन्होने 1972 में पहली फिल्म ‘फीयर इज द की’ रिलीज हुई। इस दौरान टीवी पर काफी काम किया।

1882 में आई फिल्म ‘गांधी’ में उन्होने गांधी की भूमिका निभाई।

इसके लिए बेस्ट एक्टर का ऑस्कर मिला। दो गोल्डन ग्लोब के साथ ग्रैमी, बाफ्टाऔर स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवॉर्ड भी अपने नाम कर चुके है।

जन्म
बेन किंग्सले का जन्म 31दिसंबर 1943 में उत्तरी योर्कशायर,  इंग्लैण्ड में हुआ।

उन्हे कृष्ण पंडित भांजी के नाम से भी जाना जाता है।

उनके पिता का नाम रहिमतुल्ला हरी भांजी था जोकि एक भारतीय डॉक्टर थे तथा उनकी माता का नाम ऐना लीना मेरी एक अभिनेत्री व मॉडल थी। किंग्सले के पिता केन्या में जन्मे गुजराती भारतीय वंश के है; उनके दादा मसालों के व्यापारी थे जो जंजीबार से भारत आए थे जहां किंग्सले 14 की उम्र तक रहे जिसके पश्च्यात वे इंग्लैण्ड चले गए।

वे पेंडल्बरी, सैल्फोर्ड में बड़े हुए। उन्होने चार बार शादी की। उनकी पत्नियों के नाम इस प्रकार है – एंजेला मोरांत (1966–72; तलाकशुदा; 2 बच्चे), एलीसन सूटक्लिफे (1978–92; तलाकशुदा; 2 बच्चे),  अलेक्सैंड्रा क्रिस्टमैन (2003–2005; तलाकशुदा), डैनियला लैवेंडर (2007–अबतक)

करियर
उन्होने 1967 में थिएटर शुरू किया। उन्होने 1972 में पहली फिल्म ‘फीयर इज द की’ रिलीज हुई। इस दौरान टीवी पर काफी काम किया। वे 1998 में बनी फ़िल्म ‘गांधी’ में महात्मा गांधी की भूमिका के लिए जाने जाते है जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया था। उन्होंने शिंडलर्स लिस्ट (1993), सेक्सी बिस्ट (2000), हाउस ऑफ़ सैंड एंड फोग (2003) और ह्यूगो (2011) जैसी फ़िल्मों में भी अभिनय किया है।

पुरस्कार – बेन किंग्सले की जीवनी
फिल्म ‘गांधी’ के लिए उन्हे बेस्ट एक्टर का ऑस्कर अवॉर्ड प्रदान किया गया।
अकादमी पुरस्कार, बाफ्टा, गोल्डन ग्लोब पुरस्कार और स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवार्ड्स से नवाज़ा जा चूका है।

शनिवार, 30 दिसंबर 2023

प्रिया राजवंश

#27march
#30dic 
प्रिया राज वंश
वेरा सुंदर सिंह
,🎂30 दिसंबर 1936
शिमला , पंजाब प्रांत , ब्रिटिश भारत
(अब शिमला , हिमाचल प्रदेश , भारत )
मृत
⚰️27 मार्च 2000 (आयु 63 वर्ष)
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
पेशा
अभिनेत्री
सक्रिय वर्ष
1964-1986
साथी
चेतन आनंद
प्रिया राजवंश का जन्म शिमला में वीरा सुंदर सिंह के रूप में हुआ था । उनके पिता सुंदर सिंह वन विभाग में संरक्षक थे। वह अपने भाइयों कमलजीत सिंह (गुलु) और पदमजीत सिंह के साथ शिमला में पली-बढ़ीं। उन्होंने ऑकलैंड हाउस , जहां वह स्कूल कैप्टन थीं, और कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी, शिमला में पढ़ाई की । उन्होंने 1953 में सेंट बेडे कॉलेज, शिमला से इंटरमीडिएट पास किया और भार्गव म्यूनिसिपल कॉलेज (बीएमसी) में शामिल हो गईं, इस अवधि के दौरान, उन्होंने शिमला के प्रसिद्ध गेयटी थिएटर में कई अंग्रेजी नाटकों में अभिनय किया ।

उनके पिता संयुक्त राष्ट्र के एक कार्य पर थे, इसलिए स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद वह लंदन , यूके में रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट ( आरएडीए ) में शामिल हो गईं।
जब वह लंदन में थीं और 22 साल की थीं, तब लंदन के एक फोटोग्राफर द्वारा ली गई उनकी एक तस्वीर किसी तरह हिंदी फिल्म उद्योग तक पहुंच गई । उस समय के एक फिल्म निर्माता, ठाकुर रणवीर सिंह, जो कोटा के एक राजपूत परिवार से थे, को उनके बारे में पता चला। सिंह ने यूल ब्रायनर और उर्सुला एंड्रेस अभिनीत लोकप्रिय ब्रिटिश और हॉलीवुड फिल्में लिखी और बनाई थीं और वह पीटर ओ'टूल और रिचर्ड बर्टन से परिचित थे। रणवीर सिंह ने लोकप्रिय अभिनेता रणजीत को जिंदगी की राहें (जीवन की सड़कें) नामक फिल्म में अपना पहला प्रस्ताव भी दिया था , जिसे वह बनाना चाहते थे।

इसके बाद, रणवीर सिंह उन्हें 1962 में चेतन आनंद ( देव आनंद और विजय आनंद के भाई) से मिलवाने लाए और उन्होंने उन्हें अपनी एक फिल्म हकीकत (1964) में कास्ट किया। यह फिल्म हिट हुई और अक्सर इसे सर्वश्रेष्ठ भारतीय युद्ध-फिल्मों में गिना जाता है। जल्द ही वह अपने गुरु चेतन आनंद के साथ रिश्ते में थीं, जो हाल ही में अपनी पत्नी से अलग हुए थे। प्रिया चेतन से कई साल छोटी थी. इसके बाद, उन्होंने केवल चेतन आनंद की फिल्मों में अभिनय किया, जिसमें वह कहानी से लेकर स्क्रिप्टिंग, गीत और पोस्ट-प्रोडक्शन तक हर पहलू में शामिल थीं। चेतन ने भी कभी भी उनके मुख्य किरदार के बिना कोई फिल्म नहीं बनाई। अत्यधिक प्रतिभाशाली अभिनेत्री होने के बावजूद, उनका अंग्रेजी उच्चारण और पश्चिमी स्त्रीत्व भारतीय दर्शकों को पसंद नहीं आया।

उनकी अगली फिल्म, हीर रांझा 1970 में आई, जिसमें उन्होंने उस समय के लोकप्रिय अभिनेता राज कुमार के साथ अभिनय किया और फिल्म हिट रही। इसके बाद 1973 में 'हंसते ज़ख्म' आई , जो यकीनन उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म थी। उनकी अन्य प्रसिद्ध फ़िल्में राज कुमार के साथ हिंदुस्तान की कसम (1973) और राजेश खन्ना के साथ कुदरत (1981) थीं , जहाँ उनकी समानांतर भूमिका थी। हेमा मालिनी मुख्य भूमिका में हैं। उन्होंने 1977 में साहेब बहादुर में देव आनंद के साथ अभिनय किया। उनकी आखिरी फिल्म हाथों की लकीरें 1985 में रिलीज हुई थी, जिसके बाद उन्होंने अपना फिल्मी करियर खत्म कर दिया।
प्रिया राजवंश और चेतन आनंद के बीच व्यक्तिगत संबंध थे और वे एक साथ रहते थे, हालांकि उन्होंने पहले कालूमल एस्टेट में अपना फ्लैट रखा और बाद में मंगल किरण में एक बड़ा घर रखा। उनके दो भाई, कमलजीत सिंह (गुलु) और पदमजीत सिंह, क्रमशः लंदन और अमेरिका में रहते हैं, और उनका पैतृक घर चंडीगढ़ में है। 

1997 में चेतन आनंद की मृत्यु के बाद, उन्हें उनकी पहली शादी से जन्मे बेटों के साथ उनकी संपत्ति का एक हिस्सा विरासत में मिला। 27 मार्च 2000 को भारत के मुंबई के जुहू में चेतन आनंद के रुइया पार्क बंगले में उनकी हत्या कर दी गई थी । पुलिस ने चेतन आनंद के बेटों केतन आनंद और विवेक आनंद के साथ-साथ उनके कर्मचारियों माला चौधरी और अशोक चिन्नास्वामी पर उनकी हत्या का आरोप लगाया। उनका मकसद चेतन आनंद की संपत्ति पर अपना अधिकार जताना माना गया। राजवंश के हस्तलिखित नोट्स और उनके द्वारा विजय आनंद को संबोधित एक पत्र अभियोजन पक्ष द्वारा सबूत के रूप में अदालत में पेश किया गया था।पत्र और नोट्स राजवंश की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु से पहले की अवधि के दौरान उसके डर और चिंता पर प्रकाश डालते हैं।

जुलाई 2002 में चारों आरोपियों को दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई लेकिन उन्हें नवंबर 2002 में जमानत दे दी गई। 2011 में, बॉम्बे हाई कोर्ट दायर अपीलों पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ आरोपी युगल द्वारा।
प्रिया राजवंश और चेतन आनंद के बीच व्यक्तिगत संबंध थे और वे एक साथ रहते थे, हालांकि उन्होंने पहले कालूमल एस्टेट में अपना फ्लैट रखा और बाद में मंगल किरण में एक बड़ा घर रखा। उनके दो भाई, कमलजीत सिंह (गुलु) और पदमजीत सिंह, क्रमशः लंदन और अमेरिका में रहते हैं, और उनका पैतृक घर चंडीगढ़ में है। 

1997 में चेतन आनंद की मृत्यु के बाद, उन्हें उनकी पहली शादी से जन्मे बेटों के साथ उनकी संपत्ति का एक हिस्सा विरासत में मिला। 27 मार्च 2000 को भारत के मुंबई के जुहू में चेतन आनंद के रुइया पार्क बंगले में उनकी हत्या कर दी गई थी । पुलिस ने चेतन आनंद के बेटों केतन आनंद और विवेक आनंद के साथ-साथ उनके कर्मचारियों माला चौधरी और अशोक चिन्नास्वामी पर उनकी हत्या का आरोप लगाया।उनका मकसद चेतन आनंद की संपत्ति पर अपना अधिकार जताना माना गया। राजवंश के हस्तलिखित नोट्स और उनके द्वारा विजय आनंद को संबोधित एक पत्र अभियोजन पक्ष द्वारा सबूत के रूप में अदालत में पेश किया गया था।पत्र और नोट्स राजवंश की रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु से पहले की अवधि के दौरान उसके डर और चिंता पर प्रकाश डालते हैं।

जुलाई 2002 में चारों आरोपियों को दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई  लेकिन उन्हें नवंबर 2002 में जमानत दे दी गई।2011 में, बॉम्बे हाई कोर्ट दायर अपीलों पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया। ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ आरोपी युगल द्वारा। 
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1986 हाथों की लकीरें 
1981 कुदरत
1977 साहेब बहादुर 
1973 हंसते ज़ख़्म 
1973 हिंदुस्तान की कसम 
1970 हीर रांझा 
1964 Haqeeqat

राजेश दीवाना

#27april
#31dic 
राकेश दीवाना
🎂जन्म 31 दिसंबर 1969
हाथरस , उत्तर प्रदेश , भारत
⚰️मृत27अप्रैल 2014 
इंदौर , मध्य प्रदेश , भारत
पेशा
अभिनेता
के लिए जाना जाता है
ये रिश्ता क्या कहलाता है
राकेश दीवाना ( सी.  1969 - 27 अप्रैल 2014) उत्तर प्रदेश के हाथरस के एक भारतीय चरित्र अभिनेता थे ।  अप्रैल 2014 की सुबह इंदौर में बेरियाट्रिक सर्जरी के बाद हुई बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई ।
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या रब (2014)
हेलो हम लल्लन बोल रहे हैं (2010)
बाबर नन्हा के रूप में (2009)
मनोरंजन: द एंटरटेनमेंट (2006)
📺
कुंभकर्ण के रूप में रामायण (2008)
ये रिश्ता क्या कहलाता है महाराज के रूप में (2009-2014)
तारक मेहता का उल्टा चश्मा में वनराज हाथी के रूप में (2008 -2014)
देवों के देव...महादेव कुबेर के रूप में (2013)

हरभजन सिंह मान

#30dic 
हरभजन सिंह मान
🎂जन्म30 दिसंबर 1965
खेमुआना, पंजाब , भारत
शैलियां
पंजाबी लोक भांगड़ा
व्यवसाय
गायक, अभिनेता, फ़िल्म निर्माता
मान का जन्म भारत के पंजाब के बठिंडा जिले में स्थित खेमुआना गाँव में हुआ था ।  वह सिख मूल के हैं। मान ने 1980 में शौकिया तौर पर गाना शुरू किया और कनाडा में हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान दक्षिण एशियाई समुदाय के लिए स्थानीय शो में प्रदर्शन किया। एक पेशेवर कलाकार के रूप में उनकी शुरुआत 1992 में देखी जा सकती है, जब वह पंजाब में थे । मान को एहसास हुआ कि कनाडा में पंजाबी संगीत का बाज़ार छोटा है, और वह अपने एल्बम रिकॉर्ड करने के लिए पंजाब लौट आए।

मान को 1999 में सफलता मिली, जब इंडिया एमटीवी और टी-सीरीज़ ने उनके ओए होए एल्बम के लिए प्रदर्शन प्रदान किया । उनकी पंजाबी-पॉप शैली थी और उन्होंने जल्द ही पार्श्व गायन की भूमिकाएँ निभाईं।

पार्श्वगायन के काम से अभिनय भूमिकाएँ मिलीं और मान पंजाबी सिनेमा के पुनरुद्धार में एक प्रमुख व्यक्ति बन गए । उन्होंने सात फिल्मों में अभिनय और निर्माण किया है - जी अयान नू , आसा नू मन वतना दा , दिल अपना पंजाबी , मिट्टी वजन मर्दी , मेरा पिंड-माई होम , जग जियोंदियां दे मेले और उनकी सबसे हालिया फिल्म, [ कब? ] हीर रांझा .

2 जनवरी 2013 को, उन्होंने अपने भाई गुरसेवक मान के साथ मिलकर सतरंगी पींघ 2 रिलीज़ की। हरभजन मान ने कहा कि वह ऐसा संगीत बनाना चाहते हैं जो दशकों तक जीवित रहे।

2013 में, मान ने हन्नी में अभिनय किया, जिसका निर्देशन अमितोज मान ने किया था । दोनों ने गद्दार - द ट्रैटर में फिर से साथ काम किया , जो 29 मई 2015 को रिलीज़ हुई थी। 

हरभजन मान ने 2014 में अपना सिंगल "डेल्ही '84" रिलीज़ किया, जिसके लिए संगीत सुखिंदर शिंदा ने दिया है। 

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2002 जी अयां नूं
2004 आसा नू मान वतना दा 
2006 दिल अपना पंजाबी
2007 मिट्टी वजन मारदी 
2008 मेरा पिंड-मेरा घर 
2009 जग जोंदेयां दे मेले एक निर्माता के रूप में पदार्पण
2009 हीर रांझा संगीत: गुरुमीत सिंह
2011 यारा ओ दिलदारा टी-सीरीज़ फिल्म
2013 हानी 
2015 गद्दार: गद्दार 
2016 सादे सीएम साब 
2022 जनसंपर्क

मनुस्मृति

. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...