शुक्रवार, 3 नवंबर 2023

तब्बू

तब्बू एक 

भारतीय फिल्म अभिनेत्री है। हालांकि उन्होंने कई तमिल, तेलुगू, मलयालम, बंगला भाषा एवं साथ ही एक अमरीकी फिल्म में भी काम किया है, लेकिन मुख्यतः उन्होंने हिंदी फिल्मों में ही अभिनय किया है। 
🎂जन्म : 04 नवंबर 1971, हैदराबाद
माता-पिता: जमाल हाशमी, रिज़वाना हाशमी
बहन: फरहा नाज़
कुछ अपवादों के बावजूद, तब्बू मुख्यतः कलात्मक एवं कम बजट फिल्मों में अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर आंकड़े (रुपये) जुटाने की बजाय कहीं अधिक आलोचनात्मक सराहना जुटाती हैं। व्यावसायिक तौर पर सफल फिल्मों में उनकी उपस्थिति कम ही रही है और ऐसी फिल्मों में उनकी भूमिका भी बहुत छोटी रही हैं, मसलन-बॉर्डर (1997), साजन चले ससुराल (1996), बीवी नंबर वन Hum Saath-Saath Hain: We Stand United (1999) आदि फ़िल्में. फिल्म माचिस (1996), विरासत (1997), हु तू तू (1999) अस्तित्व (2000), चांदनी बार (2001), मक़बूल (2003) एवं चीनी कम (2007) में उन्होंने उल्लेखनीय अभिनय किया है। मीरा नायर की अमेरिकी फिल्म 'द नेमसेक ' में भी उनकी मुख्य भूमिका को काफी प्रशंसा मिली। अपनी फिल्मों एवं भूमिकाओं के मामले में काफी चुनिन्दा मानी जाने वाली इस अभिनेत्री का कहना है कि 'मैं वही फ़िल्में करती हूं, जो मुझे भावुक बना दे एवं सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि फिल्म की यूनिट एवं निर्देशक मुझे प्रभावित करने चाहिए।

प्रारम्भिक जीवन

तब्बू 1971 में हैदराबाद में पैदा हुई जो जमाल हाशमी व रिजवाना की पुत्री हैं, हालांकि कुछ स्रोतों से उनके जन्म का वर्ष 1970 होने के भी संकेत मिले हैं। उनके जन्म के तुरंत बाद ही उनके माता-पिता का तलाक़ हो गया। उनकी मां एक स्कूल अध्यापिका थीं एवं उनके नाना-नानी, जो एक स्कूल चलाते थे, सेवा-निवृत्त प्राध्यापक थे। उनके नाना, मोहम्मद एहसान, अंकगणित के प्राध्यापक थे और नानी अंग्रेजी साहित्य की प्राध्यापिका थीं। उन्होंने अपनी पढ़ाई हैदराबाद के सेंट एन्स हाई स्कूल में की। 1983 में तब्बू मुंबई चली गयी एवं उन्होनें दो वर्षों तक वहां के सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज में पढ़ाई की। 

वे शबाना आज़मी की भतीजी एवं अभिनेत्री फरहा नाज़ की छोटी बहन हैं। उनके घर मुंबई एवं हैदराबाद दोनों जगहों पर हैं।

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तबस्सुम 'तब्बू' हाशमी ने अपने करियर की शुरुआत पंद्रह साल की उम्र में 'हम नौजवान ' (1985) फिल्म से की. इस फिल्म में उन्होंने (देव था आनंद की बेटी) एक दुष्कर्म पीड़िता का किरदार निभाया था , बाद मे देव साहब ने ही इन्हे तब्बू नाम दिया। एक अभिनेत्री के रूप में उनकी पहली भूमिका एक तेलुगू फिल्म, कुली नंबर 1 में थी। दिसम्बर 1987 में, बोनी कपूर ने अपनी दो बड़ी फिल्मों, रूप की रानी चोरों का राजा एवं प्रेम, की शुरुआत की. प्रेम में तब्बू को संजय कपूर के साथ लिया गया। यह फिल्म आठ साल में बनकर तैयार हुई. तब्बू ने एक बार मजाक में कहा "मुझे इस दशक का, सबसे ज्यादा इंतज़ार करने वाली नयी अभिनेत्री का अवॉर्ड मिलना चाहिए." मुख्य किरदार के रूप में हिंदी में उनकी पहली रिलीज़ हुई फिल्म थी पहला पहला प्यार, जो लोगों का ज़रा भी ध्यान आकर्षित नहीं कर पाई.विजयपथ (1994) में अजय देवगन के साथ उनकी भूमिका के बाद वे प्रतिष्ठित हुईं, इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला नवागंतुक अवॉर्ड हासिल हुआ। इसके बाद भी उनकी कई फ़िल्में आयीं, जो बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पायीं.
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ऋत्विक घटक

ऋत्विक घटक

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1925
जन्म भूमि ढाका, बांग्लादेश
⚰️मृत्यु 6 फ़रवरी, 1976
मृत्यु स्थान कोलकाता, पश्चिम बंगाल

पति/पत्नी सुरमा घटक
संतान रिताबन घटक (पुत्र), संहिता घटक, सुचिस्मिता घटक (पुत्री)
कर्म-क्षेत्र फ़िल्म निर्माता-निर्देशक, नाट्य निर्देशक और पटकथा लेखक
मुख्य फ़िल्में 'नागोरिक' (1952), 'अजांत्रिक' (1958), 'मेघे ढाका तारा' (1960), 'कोमल गंधार' (1961) और 'सुबर्णरिखा' (1962) आदि।
पुरस्कार-उपाधि पद्म श्री, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी नाटकों का लेखन, निर्देशन और अभिनय के अलावा उन्होंने बेर्टेल्ट ब्रोश्ट और गोगोल को बांग्ला में अनुवाद भी किया। 1957 में उन्होंने अपना अंतिम नाटक ज्वाला (द बर्निंग) लिखा और निर्देशित किया।

जीवन परिचय
ऋत्विक घटक का जन्म 4 नवंबर, 1925 को तत्कालीन पूर्वी बंगाल के ढाका में हुआ। बाद में उनका परिवार कोलकाता आ गया। यही वह काल था जब कोलकाता शरणार्थियों का शरणस्थली बना हुआ था। चाहे 1943 में बंगाल का अकाल, चाहे 1947 में बंगाल के विभाजन हो या फिर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध, इस दौर का विस्थापन ने ऋत्विक घटक के जीवन को काफ़ी प्रभावित किया। यही कारण है कि सांस्कृतिक विच्छेदन और निर्वासन उनकी फ़िल्मों में बखूबी दिखता है। 1948 में ऋत्विक घटक ने अपना पहला नाटक 'कालो सायार' (द डार्क लेक) लिखा और ऐतिहासिक नाटक ‘नाबन्ना के पुनरुद्धार” में हिस्सा लिया। 1951 में वे इंडियन पीपल्स थिएटर एसोसिएशन के साथ जुड़ गए। नाटकों का लेखन, निर्देशन और अभिनय के अलावा उन्होंने बेर्टेल्ट ब्रोश्ट और गोगोल को बंगला में अनुवाद भी किया। 1957 में, उन्होंने अपना अंतिम नाटक ज्वाला (द बर्निंग) लिखा और निर्देशित किया। निमाई घोष के चिन्नामूल (1950) में बतौर अभिनेता और सहायक निर्देशक के रूप में ऋत्विक घटक ने फ़िल्मी दुनिया में प्रवेश किया। उनकी पहली पूर्ण फ़िल्म नागरिक (1952) आई, दोनों ही फ़िल्में भारतीय सिनेमा के लिए मील का पत्थर थीं। अजांत्रिक (1958) ऋत्विक घटक की पहली व्यावसायिक फ़िल्म थी। फ़िल्म मधुमती (1958) के पटकथा लेखक के रूप में ऋत्विक घटक की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता थी, जिसकी कहानी के लिए फ़िल्मफेयर पुरस्कार में नामांकित हुए। ऋत्विक घटक ने क़रीब आठ फ़िल्मों का निर्देशन किया। उनकी सबसे प्रसिद्ध फ़िल्में, मेघे ढाका तारा (1960), कोमल गंधार (1961) और सुबर्णरिखा (1962) थीं। 1966 में ऋत्विक घटक पुणे चले गए जहां वे भारतीय फ़िल्म और टेलीविजन संस्थान में अध्यापन करने लगे। 1970 के दशक में ऋत्विक घटक फ़िल्म निर्माण में फिर वापस लौटे। लेकिन तब तक वे खुद को अत्यधिक शराब के सेवन में डुबो चुके थे। उनका स्वास्थ्य खराब हो चुका था। उनकी आख़िरी फ़िल्म आत्मकथात्मक थी जिसका नाम था ‘जुक्ति तोक्को आर गोप्पो” (1974) थी। 6 फ़रवरी 1976 को उनका निधन हो गया।

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आदिवासी जीवन पर पहली बार ऋत्विक घटक ने डाक्यूमेंट्री बनायी थी। बिहार सरकार का यह प्रयास था। ऋत्विक की उम्र तब यही कोई 25 के आस-पास थी। इप्टा से जुड़ चुके थे और नाटक लिखना भी शुरू कर दिया था। झारखंड से उनका परिचय हो चुका था। उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत ‘बेदिनी’ फ़िल्म से की थी। 1952 में फ़िल्म यूनिट को लेकर घाटशिला आये और स्वर्णरेखा नदी के किनारे 20 दिनों तक रहे और शूटिंग की। हालांकि यह फ़िल्म रिलीज नहीं हो सकी। ऋत्विक घटक आदिवासी समाज को सत्यजीत राय की तरह नहीं देखते थे। उन्होंने ‘आदिवासी जीवन के स्रोत’ एवं ‘उरांव’ बनायी, तो आदिवासी समाज को, उनकी संस्कृति को निकट से देखने की कोशिश की। फ़िल्मकार मेघनाथ के शब्दों में, “वे आई-लेवल से देख रहे थे।” यानी, यह दृष्टि समानता की थी, संवेदना की थी। दोनों डाक्यूमेंट्री की शूटिंग रांची और आस-पास और नेतरहाट क्षेत्र में की गयी थी। ‘आदिवासी जीवन के स्रोत’ की जब शूटिंग कर रहे थे, तो बीच में अपनी व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा समय निकालकर अपनी पत्‍नी को पत्र लिखते। एक पत्र 22 फ़रवरी 1955 का है। लिखा है, “उरांव-मुंडा के साथ सारा दिन बीत रहा है। इनके साथ रहकर मिट्टी की गंध मिल रही है। इनका अपूर्व गान हमें मदहोश कर दे रहा है।” आदिवासियों के सामाजिक जीवन की विसंगतियों की ओर भी ध्यान दिलाते हैं। लिखते हैं, “आदिवासियों में बचने की इच्छा है। यहां की सुंदरता भी इतनी अपार है कि इसका बूंद मात्र ही कैमरे में कैद कर पा रहा हूं।” वे उरांव नृत्य पर भी मोहित होते हैं।

इस अपूर्व सौंदर्य को कैद करने के लिए ऋत्विक घटक फिर रांची आये और अपनी ‘अजांत्रिक’ फ़िल्म की शूटिंग रांची, रामगढ़ रोड आदि क्षेत्रों में की। यह फ़िल्म बांग्ला में है, लेकिन पहली बार उरांव यानी कुड़ुख भाषा में संवाद और नृत्य को इस फीचर फ़िल्म में दिखाया गया है। उनके नृत्य से ऋत्विक घटक काफ़ी भाव-विभोर थे। इसलिए इसमें सरना झंडे भी लहरा रहे थे। आदिवासी जीवन की सरलता, लावण्यता का अनुभव किया। फ़िल्मकार मेघनाथ कहते हैं कि अजांत्रिक मानुष और मशीन के बीच संबंधों की कहानी हैं। हास्य का पुट है। लेकिन यह हंसी हूक भी पैदा करती है। बहरहाल, ऋत्विक घटक को झारखंड काफ़ी पसंद था। इसे वे कभी भूले नहीं। जब 1962 में सुबर्णरिखा बनायी, तब भी नहीं।
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विजय मेहता

विजया मेहता

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1934
जन्म भूमि बड़ौदा, गुजरात
पति/पत्नी हरिन खोटे, फ़ारुख मेहता
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय सिनेमा तथा रंगमंच
शिक्षा स्नातक
विद्यालय 'मुम्बई विश्वविद्यालय'
पुरस्कार-उपाधि सहायक अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' (1986), 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' (1975)
प्रसिद्धि फ़िल्मकार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी विजया मेहता की जिस फ़िल्म से हिन्दी फ़िल्म-जगत में सही अर्थों में पहचान बनी, वह थी- 'राव साहब'। सन 1986 में प्रदर्शित यह फ़िल्म बतौर निर्देशिका उनकी पहली फ़िल्म थी।
 भारतीय सिनेमा की एक उच्च श्रेणी की महिला फ़िल्मकार हैं। उन्होंने कई फ़िल्मों में अभिनय भी किया है। विजया मेहता रंगमंच से फ़िल्मी दुनिया में आई थीं। फ़िल्म माध्यम पर उनकी गहरी पकड़ है।

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1934 

को ब्रिटिश शासन काल में बड़ौदा (गुजरात) में हुआ था। उन्होंने 'मुम्बई विश्वविद्यालय' से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में इब्राहीम अलकाज़ी के साथ थियेटर का अध्ययन किया।

विवाह

विजया मेहता का प्रथम विवाह हरिन खोटे के साथ हुआ था, जो अपने समय की जाने मानी अभिनेत्री दुर्गा खोटे के पुत्र थे। लेकिन कुछ समय बाद ही हरिन खोटे का निधन हो गया। इसके बाद विजया मेहता ने फ़ारुख मेहता के साथ दूसरा विवाह कर लिया।

फ़िल्म निर्देशन

रंगमंच से मंझकर आई विजया मेहता की फ़िल्म-माध्यम पर गहरी पकड़ है। उनकी यह पकड़ कितनी पुख्ता है, यह उनकी फ़िल्म्स देखकर जाना जा सकता है। विजया मेहता की जिस फ़िल्म से हिन्दी फ़िल्म-जगत में सही अर्थों में पहचान बनी, वह थी- 'राव साहब'। सन 1986 में प्रदर्शित यह फ़िल्म बतौर निर्देशिका उनकी पहली फ़िल्म थी।

फ़िल्म 'राव साहब' परम्परा और आधुनिकता के द्वंद्व को कई पहलुओं से उकेरती है। यह उस काल (1910-1920 ई.) की कहानी है, जब महाराष्ट्र के ठेठ परम्परावादी माहौल में कई युवक इंग्लैंड से शिक्षा ग्रहण कर स्वदेश लौट रहे थे। वहां के आधुनिक समाज से क्रांति के बीज वे अपने साथ लेकर आए थे। लेकिन यहां की मिट्टी उनके लिये उपयुक्त नहीं थी। अत: उनकी यह क्रांतिकारिता कोरी वैचारिक थी। कामकाज या कहें कृत्य उनके परम्परावादी ही थे। ऐसा ही एक विचार था- 'विधवा विवाह', जिसका वे खुलकर समर्थन नहीं कर सकते थे। फ़िल्म 'राव साहब' जयंत दलवी के प्रसिद्ध मराठी नाटक 'बैरिस्टर' पर आधारित थी। इस नाटक का रंगमंच पर असफलतापूर्वक मंचन स्वयं विजया मेहता कर चुकी हैं। मंच पर बैरिस्टर की भूमिका विक्रम गोखले ने की थी, जबकि फ़िल्म में अनुपम खेर ने भूमिका निभाई थी। इसी नाटक में युवा विधवा की भूमिका सुहास जोशी ने निभाई, जबकि फ़िल्म में तन्वी आकामी ने निभाई थी।

पुरस्कार व सम्मान

नाटक और फ़िल्म दोनों ही जगह विधवा मौसी की भूमिका स्वयं निर्देशिका विजया मेहता ने की थी। उल्लेखनीय है कि 'राव साहब' को न सिर्फ दर्शकों और समीक्षकों की सराहना मिली, बल्कि राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहुप्रशंसित और पुरस्कृत भी हुई थी। इस फ़िल्म के लिए विजया को सहायक अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' (1986) मिला था। इससे पहले वर्ष 1975 में उन्हें 'संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार' का पुरस्कार भी मिला था।

रीटा भादुड़ी

रीता भादुड़ी

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1955
जन्म भूमि लखनऊ, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 17 जुलाई, 2018
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अभिनय
प्रसिद्धि अभिनेत्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी रीता भादुड़ी का नाम जरीना वाहब के साथ उनकी बहन के रूप में कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

हिन्दी सिने जगत की जानीमानी अभिनेत्री थीं। सन 1968 से वह फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं। अपने पांच दशक के कॅरियर में रीता भादुड़ी ने 'कभी हां कभी ना', 'क्या कहना', 'दिल विल प्यार व्यार' और 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' जैसी फिल्मों में काम किया और प्रसिद्धि पाई। उन्होंने गुजराती फिल्मों में भी काम किया था।

परिचय
चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का जन्म 4 नवम्बर सन 1955 में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। गौरतलब है कि अपने तीन दशक लंबे कॅरियर में रीता भादुड़ी 30 से ज्यादा टीवी धारावाहिकों के अलावा लगभग 70 फ़िल्मों में नज़र आईं। टीवी शो की बात करें तो ‘छोटी बहू’, ’कुमकुम’, साराभाई वर्सेस साराभाई’, ‘अमानत’ ‘एक महल हो सपनों’ जैसे धारावाहिक हैं। जबकि फ़िल्मों की बात करें तो रीता भादुड़ी ‘सवान को आने दो’, ‘विश्वनाथ’, ‘अनुरोध’ से लेकर हाल के वर्षों में ‘क्या कहना’ और ‘दिल विल प्यार व्यार’ जैसी फ़िल्मों में नज़र आई थीं।

प्रसंग

अक्सर लोग रीता जी के सरनेम की वजह से उन्हें जया भादुड़ी की बहन समझा करते थे। 2011 में हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने एक वाकया बताया था। उन्होंने बताया था कि एक बार जब मैं जयपुर आई थीं तो किसी ने मुझसे पूछा था कि "क्या मैं जया भादूड़ी की बहन हूं?" ये सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया था। उनका कहना था कि "मुझे इंडस्ट्री में इतने साल हो गए हैं, लेकिन लोगों को अभी तक ये नहीं पता चला कि हम दोनों में कोई कनेक्शन नहीं है। लोग मुझे जया की बहन समझने की गलती कर देते हैं।"

रीता भादुड़ी का नाम आदित्य पंचोली की पत्नी जरीना वाहब के साथ भी कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

कार्य के प्रति लगन

रीता भादुड़ी ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि- "बुढ़ापे में होने वाली बीमारियों के डर से क्या काम करना छोड़ दें। मुझे काम करना और व्यस्त रहना पसंद है। मुझे हर समय अपनी खराब हालत के बारे में सोचना पसंद नहीं, इसलिए मैं खुद को व्यस्त रखती हूं। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे इतनी सपोर्टिव और समझने वाली कास्ट और क्रू के साथ काम करने का मौका मिला है।" रीता भादुड़ी ने अपनी एक्टिंग और काम से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई थी।

मृत्यु

फ़िल्म और टीवी की चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का निधन 17 जुलाई, 2018 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ। वह 62 साल की थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनकी दोनों किडनी काफी कमजोर हो गयी थीं और लंबे समय से वह हर दूसरे दिन डायलिसिस के लिए जाया करती थीं। अपने अंतिम दिनों में रीता जी मुंबई के सुजय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थीं, जहां उनका इलाज चल रहा था।

सदा शिव अमरापुरकर

प्रसिद्ध चरित्र अभिनेता सदाशिवराव अमरापुरकर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
सदाशिव दत्ताराय अमरापुरकर 

🎂11 मई 1950 
⚰️03 नवंबर 2014

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मार्च 2014 में, होली त्योहार के दौरान पानी की बर्बादी रोकने की कोशिश करते समय अमरापुरकर को छह लोगों ने पीटा था ।
अन्ना हजारे आंदोलन को भी अपना समर्थन दिया था और 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए कई चर्चाएं आयोजित करके नागरिकों को शामिल करने में सक्रिय थे।
वह एक सेकुलर वादी, सामाजिक कार्यकर्ता थे और नागरिक रूप से कई सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए भी थे।
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अमरापुरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक में 11 मई 1950 को हुआ था। अमरापुरकर का बचपन का नाम गणेश कुमार नोरवाडे था लेकिन 1974 में इन्होंने अपना नाम सदाशिव रख लिया। महाराष्ट्र के ब्राहमण परिवार में जन्में अमरापुरकर को करीबी मित्र तत्य कहकर पुकारते थे। हमेशा से ही उनका झुकाव समाज के वंचित तबके की ओर रहा। सदाशिव का विवाह सुनंदा करमाकर के साथ हुआ। दोनों के बीच हाई स्कूल में ही प्रेम की शुरूआत हो गई थी। पुणे कॉलेज से इतिहास में एमए कर चुके अमरापुरकर ने कॉलेज के दिनों से ही थियटर और फिल्मों के लिए काम करना शुरू कर दिया था।

कैरियर

1981 में मराठी नाटक हैंड्स अप में अभिनय के दौरान अमरापुरकर की मुलाकात डायरेक्टर गोविंद निहालनी से हुई। गोविंद उस समय अपनी फिल्म अर्द्धसत्य के लिए कलाकारों का चयन कर रहे थे। फिल्म अर्ध सत्य में सदाशिव अमरापुरकर ने डॉन रामा शेट्टी का किरदार निभाया। इसी फिल्म के लिए अमरापुरकर को 1984 में सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार का अवॉर्ड मिला। अमरापुरकर को हिंदी फिल्मों के ही मैन के लिए लकी माना गया। 1987 में आई फिल्म हुकूमत उन्होंने धर्मेद्र के साथ काम किया। इस फिल्म में सदाशिव ने मुख्य खलनायक का किरदार निभाया और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही। अर्द्धसत्य के बाद अमरापुरकर ने पुराना मंदिर, नासूर, मुद्दत, वीरू दादा, जवानी, और फरिश्ते जैसी फिल्मों में रोल किए लेकिन 1991 में आई सड़क उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई।

अमरापुरकर ने हिंदी और मराठी के अलावा कुछ बंगाली और उडिया फिल्मों में भी काम किया। 1991 में रिलीज हुई फिल्म सड़क के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला। महेश भट्ट ने फिल्मसिटी में सदाशिव को महारानी के किरदार के बारे में बताया। उन्होंने सदाशिव को यह भी बताया कि यह कैरक्टर नाकाम भी हो सकता है। इसके बावजूद, सदाशिव ने यह ऑफर स्वीकर कर लिया। अपने विलेन और कॉमिडी के किरदार के साथ सदाशिव अमरापुरकर ने सिर्फ सिनेमा के लिए ही नहीं बल्कि सोसायटी के लिए भी काफी काम किया। सदाशिव अमरापुरकर फिलैन्ट्रॉफिस्ट, सोशल ऎक्टिविस्ट तो थे ही, साथ में वह कई सामाजिक संगठनों के साथ जुड़े भी हुए थे। अंदश्रद्धा निर्मूलन समिति, स्नेहालय, लोकशाही प्रबोधन व्यासपीठ, अहमदनगर ऎतिहासिक वास्तु संग्रहालय जैसे संगठनों से वह प्रमुखता से जुड़े हुए थे।

ग्रामीण युवकों के विकास के लिए वह निरंतर प्रयास करते रहे। सदाशिव अमरापुरकर फिल्मों के अलावा छोटे पर्दे पर भी नजर आए। टीवी शो शोभा सोमनाथ की में उनके काम को खूब सराहा गया। उनकी बेटी रीमा भी बॉलिवुड में निर्देशन की बारीकियां सीख रही हैं और अब तक एक शॉर्ट फिल्म का डायरेक्शन कर चुकी हैं। सदाशिव की बेटी अब टीवी के लिए एक शो प्रड्यूस करने की तैयारी कर रही हैं। सदाशिव अमरापुरकर आखिरी बार मीडिया में उस वक्त दिखाई दिए जब होली के मौके पर पानी की बर्बादी रोकने की कोशिश के बाद उनके साथ मारपीट हुई। वर्सोवा में स्थित अपने घर के पड़ोस चल रही रेन डांस पार्टी में लोगों से पानी बचाने की अपील करने पहुंचे सदाशिव से 5 लोगों ने मारपीट की। 25 अक्टूबर 2014 से सदाशिव फेफड़ों में इंफेक्शन के चलते मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद तीन नवबंर को अमरापुरकर का निधन हो गया।

प्रेम नाथ

प्रसिद्ध अभिनेता प्रेमनाथ 

नवम्बर महीने में 🎂जन्म दिन और ⚰️श्रद्धांजलि दिवस 🇮🇳

🎂जन्म की तारीख और समय: 21 नवंबर 1926, पेशावर, पाकिस्तान
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 03 नवंबर 1992, मुम्बई

पत्नी: बीना राय (विवा. 1952–1992)
भाई: राजेन्द्र नाथ, नरेन्द्र नाथ, कृष्णा कपूर, उमा चोपड़ा
बच्चे: प्रेम किशन, मोंटी नाथ
पोते या नाती: अकांक्षा मल्होत्रा, सिद्दार्था पी. मल्होत्रा,
ऋषि कपूर और राजीव कपूर के मामा। उनकी बहन की शादी प्रसिद्ध राज कपूर (ऋषि और राजीव के पिता) से हुई थी।

प्रेमनाथ मल्होत्रा (21 नवंबर 1926 - 3 नवंबर 1992), जिन्हें प्रेम नाथ के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय अभिनेता और निर्देशक थे, जिन्हें हिंदी फिल्मों में उनके कामों के लिए जाना जाता था।  नाथ ने फिल्म अजीत (1948) से अपनी शुरुआत की, और अपने पूरे करियर में 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।  उन्हें तीन फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया था, और बाद में 1985 में सेवानिवृत्त हुए। 1992 में, नाथ का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

उनका जन्म 1926 में पेशावर में घण्टा घर के पास करीमपुरा इलाके में हुआ था।  उनका परिवार विभाजन के बाद जुबुलपोर (वर्तमान जबलपुर) चला गया और वह बंबई चले गए जहाँ उन्होने एक अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनायी

उन्हें औरत फ़िल्म के शूटिंग के दौरान अभिनेत्री बीना राय से प्यार हो गया उन्होंने बीना राय से  शादी कर ली बीना के साथ मिलकर उन्होंने पी.एन. प्रोडक्शन कंपनी बनाई, उनके बच्चे अभिनेता प्रेम कृष्णन और कैलाश नाथ (मोंटी) हैं।  वे अभिनेत्री आकांक्षा मल्होत्रा और निर्देशक सिद्धार्थ मल्होत्रा के दादा-दादी भी हैं जो प्रेम कृष्णन के बच्चे हैं।  आदिराज मल्होत्रा और अर्जुन मल्होत्रा कैलाश नाथ के पुत्र हैं।  उनकी बहन कृष्णा ने राज कपूर से शादी की, जबकि उनकी दूसरी बहन उमा की शादी दिग्गज हिंदी फिल्म अभिनेता प्रेम चोपड़ा से हुई।  उनके भाई राजेंद्र नाथ और नरेंद्र नाथ भी अभिनेता थे, जो ज्यादातर कॉमिक और सहायक भूमिकाओं में दिखाई दिए।  वह अभिनेत्री आशा पारेख की भी करीबी दोस्त थे उनके 66 वें जन्मदिन से ठीक 18 दिन पहले 1992 में 65 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

प्रेमनाथ ने अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत फ़िल्म अजीत (1948) में मोनिका देसाई के साथ की थी, जो पहली रंगीन फिल्मों में से एक थी।  उन्हें राज कपूर की पहली निर्देशित फिल्म आग और बरसात (1949) में प्रमुख भूमिकाएँ मिलीं जो उनकी पहली बड़ी सफलता थी।  1951 में, नाथ ने मधुबाला के साथ बादल में अभिनय किया, जो बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट थी प्रेमनाथ ने अगले तीन दशकों तक कई फिल्मों में काम किया, जिनमें से कुछ  फिल्में इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर थीं जिन फिल्मों में उन्होंने केंद्रीय भूमिका निभाई, वे अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रहीं, लेकिन जिन फिल्मों में उन्होंने केंद्रीय खलनायक की भूमिका निभाई या सहायक भूमिका निभाई, वे भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर थीं।

उनकी कुछ सबसे उल्लेखनीय फ़िल्में आन (1952), तीसरी मंजिल(1966), जॉनी मेरा नाम (1970), तेरे मेरे सपने (1971), रोटी कपडा और मक़ान (1974), धर्मात्मा (1975), कालीचरण (1976) और देश प्रेमी (1982) है  उन्होंने धार्मिक पंजाबी फिल्म सत श्री अकाल (1977) में भी अभिनय किया उनको शोर (1972), बॉबी (1973), अमीर गरीब (1974) और रोटी कपडा और मकन (1974) के लिये सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के रूप में नामांकित किया गया

हिंदी फिल्मों के अलावा, वह 1967 में अमेरिकी टेलीविजन श्रृंखला माया के एक एपिसोड में भी नजर आए और 1969 की अमेरिकी फिल्म केनेर में पूर्व अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी अभिनेता जिम ब्राउन के साथ अभिनय किया  उन्होंने सत श्री अकाल (1977) जैसी कई पंजाबी फिल्मों में अभिनय किया।  उन्होंने अपने होम प्रोडक्शन हाउस पी एन के लिए फिल्म समुंदर (1957) का निर्देशन भी किया, जो उनकी एकमात्र निर्मित निर्देशित फिल्म थी उनकी आखिरी फिल्म हम दोनों (1985)थी जिसके बाद उन्होंने अभिनय से संन्यास ले लिया।
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1990 किशन कन्हैया 
1985 हम दोनों 
1982 देश प्रेमी
1981 क्रोधी
1980 कर्ज़
1980 गेस्ट हॉउस 
1979 ढ़ोंगी 
1979 जानी दुश्मन
1979 मुकाबला 
1979 गौतम गोविन्दा 
1978 विश्वनाथ 
1978 हीरालाल पन्नालाल 
1978 शालीमार
1977 चाँदी सोना 
1977 चला मुरारी हीरो बनने 
1977 सत श्री अकाल 
1977 जादू टोना 
1977 दरिन्दा 
1977 फरिश्ता या कातिल 
1977 शिरडी के साईं बाबा 
1976 जानेमन 
1976 दस नम्बरी
1976 आप बीती 
1976 जय बजरंग बली
1976 नागिन
1976 कालीचरण
1976 कबीला
1975 धर्मात्मा
1975 सन्यासी 
1975 धरम करम 
1975 दफ़ा 302
1975 धोती लोटा और चौपाटी 
1975 रानी और लालपरी 
1974 अमीर गरीब
1974 रोटी कपड़ा और मकान 
1974 इश्क इश्क इश्क 
1974 प्राण जाये पर वचन न जाये
1973 बॉबी
1973 नफ़रत
1973 छुपा रुस्तम 
1972 रानी मेरा नाम 
1972 मोम की गुड़िया
1972 राजा जानी 
1972 शोर
1972 गोरा और काला 
1972 बेईमान
1972 वफ़ा
1971 तेरे मेरे सपने 
1970 पु्ष्पांजली 
1970 जॉनी मेरा नाम 
1967 बहारों के सपने 
1966 प्यार मोहब्बत 
1966 तीसरी मंज़िल
1966 आम्रपाली 
1965 सिकन्दर-ए-आज़म 
1960 अपना घर 
1957 समुंदर 
1953 औरत
1952 साकी 
1952 आन 
1951 बादल 
1951 आराम
1950 हिन्दुस्तान हमारा 
1949 बरसात
1948 आग 
1948 अजीत 
1947 दौलत के लिए

सुष्मिता सेन

सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) एक भारतीय अभिनेत्री, मॉडल और सौंदर्य रानी हैं, जिन्हें 1994 में फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स का ताज पहनाया गया था और बाद में उन्होंने 18 साल की उम्र में मिस यूनिवर्स 1994 की प्रतियोगिता जीती थी। सुष्मिता प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय महिला है। अपने करियर में, सुष्मिता हिंदी, तमिल और बंगाली जैसे विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में दिखाई दी हैं।

सुष्मिता सेन बॉलीवुड की जानी-मानी भारतीय मॉडल और अभिनेत्री हैं. उनका 

🎂जन्‍म 19 नवंबर 1975 

को हैदराबाद में हुआ था. सुष्मिता सेन वायुसेना के सेवानिवृत विंग कमांडर सुबीर सेन और ज्वैलरी डिजाइनर सुभा सेन की बेटी हैं. सुष्मिता सेन पहली बार 1994 में मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद सुर्खियों में आईं. खास बात यह थी कि इस खिताब के लिए उनकी टक्कर ऐश्वर्या राय के साथ थी. उन्होंने ऐश्वर्या को पछाड़ते हुए मिस यूनिवर्स का खिताब हासिल किया. उसी साल ऐश्वर्या राय ने ‘मिस व‌र्ल्ड’ का खिताब जीता.

1997 में महेश भट्ट की फ़िल्म ‘दस्तक’ से सुष्मिता सेन ने फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा. इस फिल्म में उन्होंने अपने ही चरित्र को जीया. हालांकि फिल्म को सफलता नहीं मिली. दूसरी फ़िल्म ‘जोर’ भी नहीं चली. उनको पहली सफलता फ़िल्म ‘सिर्फ तुम’ के ‘दिलबर दिलबर गाने’ में मिली, जिसमें उनकी अदाओं को दर्शकों ने पसंद किया. डेविड धवन की फ़िल्म ‘बीवी नंबर वन’ में सुष्मिता सेन ने बीवी नंबर टू का रोल किया और यह उनकी पहली हिट फ़िल्म साबित हुई. उनकी चर्चित फ़िल्मों में ‘आंखें’, ‘समय’, ‘मैं हूं ना’, ‘बेवफा’, ‘मैंने प्यार क्यों किया’, ‘चिंगारी’, ‘दस्तक’,‘सिर्फ तुम’, ‘बीवी नंबर वन’, ‘आगाज’, ‘फिजा’, ‘नो प्रॉब्लम’ जैसी फिल्में शामिल हैं.

फ़िल्मी कैरियर

1997 में महेश भट्ट की फ़िल्म 'दस्तक' से सुष्मिता सेन ने फ़िल्मी दुनिया में पर्दापण किया, जिसमें उन्होंने अपने ही चरित्र को जिया। फ़िल्म को सफलता नहीं मिली। दूसरी फ़िल्म 'जोर' भी नहीं चली। उनको पहली सफलता फ़िल्म 'सिर्फ तुम' के दिलबर दिलबर गाने में मिली, जिसमें उनकी अदाओं को दर्शकों ने पसंद किया। डेविड धवन की फ़िल्म 'बीवी नंबर वन' में सुष्मिता सेन ने बीवी नंबर टू का रोल किया और यह उनकी पहली हिट फ़िल्म साबित हुई। उनकी चर्चित फ़िल्मों में आंखें, समय, मैं हूं ना, बेवफा, मैंने प्यार क्यों किया और फ़िल्म 'चिंगारी' के नाम शामिल हैं।

प्रमुख फ़िल्में

दस्तक, ज़ोर ,सिर्फ तुम , बीवी नंबर वन , हिंदुस्तान की कसम,  आगाज , बस इतना सा ख्वाब है ,  क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता , फिलहाल , तुमको न भूल पाएंगे , आंखें , लीला , समय ,  पैसा वसूल , मैं हूं न , वास्तुशात्र ,  बेवफा , मैं ऐसा ही हूं ,  मैंने प्यार क्यों किया ,  चिंगारी ,  राम गोपाल वर्मा की आग ,  डू नॉट डिस्टर्ब ,  दूल्हा मिल गया ,  नो प्रॉब्लम

मॉडलिंग कैरियर

फेमिना मिस इंडिया

1994 में, किशोरी के रूप में, सुष्मिता ने फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लिया। उन्होंने मिस यूनिवर्स 1994 प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा करते हुए ‘फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स’ का शीर्षक जीता।

मिस यूनीवर्स

मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में, सुष्मिता प्रारंभ में तीसरे स्थान पर रही। सुष्मिता बाद के राउंड में दूसरे, पांचवें और तीसरे स्थान पर रही और आखिर में मिस यूनिवर्स 1994 का खिताब और ताज जीता। वह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय थी।

मिस यूनिवर्स 2016

पेजेंट जीतने के 23 साल बाद 65 वें मिस यूनिवर्स 2016 सौंदर्य पृष्ठ के जज में वह एक के रूप में थी। पेजेंट 30 जनवरी, 2017 को फिलीपींस के मेट्रो मनीला के मॉल ऑफ एशिया एरेना, पासय में हुआ था।

सम्मान और पुरस्कार

o   वर्ष 1994 में सुष्मिता सेन ने मिस इंडिया व मिस यूनिवर्स का ख़िताब जीता ।

o   उन्हें राजीव गांधी पुरस्कार, आईआईएफए (IIFA) पुरस्कार, दो फिल्मफेयर पुरस्कार, स्टार स्क्रीन अवार्ड्स और तीन ज़ी सिने इत्यादि विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है ।

o   1994 में मिस इण्डिया का ख़िताब जितने के बाद इन्होंने ऐश्वर्या रॉय को बैकस्टेज में धकेल दिया था । जिसकी वजह से इनकी आलोचना भी हुई थी ।

o   वर्ष 2012 में एथेंस हवाई अड्डे पर इनका पर्स चोरी हो गया था । उसमे इनका डेविट कार्ड और पासपोर्ट भी था । इस वजह से इन्हें एयरपोर्ट पर अपनी पहचान साबित करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था ।

रोचक जानकारियां

o   इनका वास्तविक नाम सुष्मिता सेन है ।

o   इन्हें दो उपनामों सुश और टीटू से भी जाना जाता है ।

o   ये मुख्य रूप से सिनेमा जगत में अभिनेत्री का काम करती हैं ।

o🎂इनका जन्म 19 नवम्बर 1975 को हुआ था ।

o   इनका जन्म तेलंगाना के हैदराबाद में हुआ था ।

o   ये मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली हैं ।

o   इनकी माता का नाम सुभ्रा सेन तथा पिता का नाम सुबीर सेन है ।

o   एबकि माता आभूषण डिजाइनर हैं ।

o   इनके पिता एयर फ़ोर्स में अधिकारी हैं ।

o   इनके भाई का नाम राजीव सेन है ।

o   इनकी बहन का नाम नीलम सेन है ।

o   इन्हें कविता और गद्य लिखने का शौक है ।

o   इनके घर का पता 6 वीं मंजिल, बीच क्वीन, यारी रोड, वर्सोवा, अंधेरी पश्चिम, मुंबई है ।

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