बुधवार, 1 नवंबर 2023

पद्मनी कोहलापुरे

पद्मिनी कोल्हापुरे 

🎂जन्म 01 नवंबर 1965

पति: प्रदीप शर्मा (विवा. 1986)
बच्चे: प्रियांक शर्मा
माता-पिता: पंधारिनाथ कोल्हापुरे, अनुपमा कोल्हापुरे
बहन: शिवांगी कोल्हापुरी, तेजस्विनी कोल्हापुरे
 
एक भारतीय अभिनेत्री और गायिका हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी फिल्मों में काम करती हैं।
उन्होंने 1972 में 7 साल की उम्र में अभिनय करना शुरू किया और उनकी शुरुआती कृतियों में जिंदगी (1976) और ड्रीम गर्ल (1977) शामिल हैं।
इसके बाद उन्होंने फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम (1978) से अपनी आधिकारिक फिल्म की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने यंग रूपा की भूमिका निभाई।
कोल्हापुरे 1980 के दशक में सबसे प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक बन गईं। पंद्रह साल की उम्र में, कोल्हापुरे ने बदला लेने वाले नाटक 'इंसाफ का तराजू' (1980) में अपने प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता, और सत्रह साल की उम्र में, दुखद रोमांस 'प्रेम रोग' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। 1982), इस प्रकार संबंधित श्रेणियों में पुरस्कार जीतने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की अभिनेत्री बन गईं।
सौतन (1983) में उनकी भूमिका के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था और प्यार झुकता नहीं (1985) के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार के लिए एक और नामांकन भी प्राप्त हुआ।
📽️
फिल्में

1993 प्रोफेसर की पड़ोसन मेनका 
1991 कुरबानी रंग लायेगी 
1990 आग का दरिया 
1989 हम इन्तज़ार करेंगे
1989 दाना पानी 
1989 तौहीन 
1989 दाता 
1988 सागर संगम
1987 प्यार के काबिल
1987 सड़क छाप
1987 दादागिरी 
1987 हवालात 
1986 प्यार किया है प्यार करेंगे
1986 किरायदार 
1986 प्रीती 
1986 ऐसा प्यार कहाँ 
1986 स्वर्ग से सुन्दर
1986 मुद्दत
1985 पत्थर दिल
1985 प्यार झुकता नहीं
1985 दो दिलों की दास्तान
1985 वफ़ादार 
1985 प्यारी बहना 
1985 राही बदल गये 
1985 बेवफ़ाई 
1984 ये इश्क नहीं आसां 
1984 हम हैं लाज़वाब 
1984 एक नई पहेली 
1984 नया कदम
1983 वो सात दिन 
1983 लवर्स 
1983 सौतन
1983 बेकरार 
1982 तेरी माँग सितारों से भर दूँ 
1982 दर्द का रिश्ता 
1982 स्वामी दादा
1982 विधाता 
1982 प्रेम रोग 
1981 जमाने को दिखाना है 
1981 आहिस्ता आहिस्ता
1980 इंसाफ का तराजू
1980 गहराई 
1980 थोड़ी सी बेवफाई 
1978 सत्यम शिवम सुन्दरम
1976 ज़िन्दगी

मंगलवार, 31 अक्टूबर 2023

ईशान खट्टर

इशान खट्टर 

एक भारतीय अभिनेता हैं। वे पर्दे पर सर्वप्रथम 2005 में फिल्म वाह! लाइफ हो तो ऐसी में एक बच्चे का अभिनय किया था जिसमे शाहिद कपूर. जो की इशान के रिश्ते में भाई लगते है मुख्य मुख्य किरदार में थे ।.

🎂जन्म: 01 नवंबर 1995 , मुम्बई
माता-पिता: नीलिमा अज़ीम, राजेश खट्टर
भाई: शाहिद कपूर
📽️
2005 वाह! लाइफ हो तो ऐसी
2016 उड़ता पंजाब
2017 आधी विधवा
बादलों से परे
2018 धड़क
2020 खाली पीली
2021 ऊपर मत देखो
2022 फोन भूत
2023 फुर्सत

टिस्का चोपड़ा

टिस्का चोपड़ा
🎂 जन्म 01नवंबर 1973
 एक भारतीय अभिनेत्री, लेखिका और फिल्म निर्माता हैं। उन्होंने आमिर खान, प्रकाश झा, मधुर भंडारकर, अभिनय देव, नागेश कुकुनूर और अनूप सिंह जैसे कई प्रतिष्ठित निर्देशकों के साथ विभिन्न भाषाओं में 45 से अधिक फीचर फिल्मों में अभिनय किया है। टिस्का चोपड़ा ने जीवन का एक पूरा चक्र पूरा कर लिया है। उन्होंने अपना करियर अजय देवगन की नायिका के रूप में शुरू किया, फिल्म उद्योग से गायब हो गईं, फिर महात्मा बनाम गांधी, सेल्समैन रामलाल और इंशाह अल्लाह जैसे नाटक किए और अंत में कहानी घर घर की के साथ टेलीविजन से जुड़ गईं। उन्होंने हैदराबाद ब्लूज़ II, लोकनायक जय प्रकाश नारायणन और कर्मा जैसी फिल्मों में भी काम किया है।
चोपड़ा ने कैप्टन संजय चोपड़ा से शादी की, जो एयर इंडिया के पायलट हैं।उनकी एक बेटी, तारा और मुंबई में रहती हैं।वह कई NGO, सहायक शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों के साथ काम करती है

इलियाना डी क्रूज

इलियाना डी'क्रूज़

🎂Born 10नंबर1987
Gender Female
Nationality Indian
Height 1.65 M
Parent(s) समिरा डी क्रूज़, , रोनाल्डो डी क्रूज़
Religion ईसाई
Residence मुंबई
Occupation अभिनेत्री मॉडल
इलियाना डी'क्रूज़ एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री है, जो मुख्यतः तेलुगू सिनेमा और बॉलीवुड में दिखाई देती है। उन्होने 2006 की तेलुगू फिल्म देवदासू के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था। वह पोकीरी (2006), जलासा (2008), किक (2009) और जुलीय (2012) जैसी हिट फिल्मों में दिखाई दी, खुद को तेलुगू सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया।

नीता अंबानी0

नीता मुकेश अंबानी एक भारतीय महिला उद्यमी हैं। वे भारत के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी की पत्नी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की पुत्रवधु हैं। नीता अंबानी धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल की संस्थापक और चेयरपर्सन हैं।

🎂जन्म: 01 नवंबर 1963, मुम्बई
पति: मुकेश अंबानी (विवा. 1985)
बच्चे: ईशा अम्बानी, अनंत अंबानी, आकाश अम्बानी
माता-पिता: रविन्द्रभाई दलाल, पूर्णिमा दलाल
बहन: ममता दलाल
वे एक मिडिल क्लास फैमिली से थीं। बचपन में नीता का नाम नयनतारा रखा गया था, जिसे बाद में छोटा कर 'नीता' कर दिया गया। मुकेश अंबानी से शादी के बाद अब ये कपल इंडियन बिजनेस वर्ल्ड का सबसे अमीर कपल है।
उनके पिता का नाम रविंद्र भाई दलाल और माता का नाम पूर्णिमा दलाल है।
-  नीता ने ग्रेजुएशन की डिग्री कॉमर्स में ली है। नीता अंबानी की बहन का नाम ममता है, जो धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाती हैं। उन्होंने भरतनाट्यम भी सीखा है।
 नीता का पूरा परिवार 
-  अंबानी परिवार की नेटवर्थ करीब 20 अरब डॉलर है। मुकेश और  नीता अंबानी के तीन बच्चे हैं। आकाश, अनंत और ईशा अंबानी। आकाश और ईशा अपने पिता के कारोबार से जुड़ चुके हैं। ईशा अंबानी अपने भाई आकाश के साथ रिलायंस जियो प्रोजेक्ट को देख रही हैं।

ऐसे हुई मुकेश से शादी
- मुकेश और  नीता  अंबानी  उनकी भरतनाट्यम परफॉर्मेंस को देखने के बाद ही स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी ने अपने बेटे मुकेश अंबानी से उनके विवाह का प्रपोजल दिया। 
- मुकेश  और नीता अंबानी की शादी 8 मार्च 1985 को हुई। शादी के समय मुकेश अंबानी 28 साल जबकि नीता अंबानी 22 साल की थीं। 
बचपन में नीता का नाम नयनतारा रखा गया था, जिसे बाद में छोटा कर 'नीता' कर दिया गया। मुकेश अंबानी से शादी के बाद अब ये कपल इंडियन बिजनेस वर्ल्ड का सबसे अमीर कपल है।
नीता अंबानी जी सुबह की चाय 3, लाख रुपए की पीती हैं और एकबार पहने हुए जूते दोबारा इस्तेमाल नहीं करती पूरे दिन का खर्च जो मैंने पढ़ा था 10 , लाख है। ज्यादा भी हो सकता है।
अगर 'हां' कर देतीं तो आज बॉलीवुड हिरोइन होतीं Mukesh Ambani की पत्नी नीता अंबानी, प्रोड्यूसर्स ने दिया था फिल्मों का ऑफर

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023

वी शांताराम

राजाराम वांकुडरे शांताराम
अन्य नाम अन्नासाहब वी शांता राम

🎂जन्म 18 नवंबर, 1901
जन्म भूमि कोल्हापुर
⚰️मृत्यु 30 अक्टूबर, 1990
मृत्यु स्थान मुंबई

कर्म भूमि महाराष्ट्र
कर्म-क्षेत्र फ़िल्म निर्देशक, अभिनेता
मुख्य फ़िल्में 'अमर कहानी', 'अमर भूपाली', 'झनक-झनक पायल बाजे', 'दो आँखेंं बारह हाथ', 'नवरंग'।
विषय नृत्य, संवाद, कथानक, संगीत
पुरस्कार-उपाधि 'फ़िल्मफेयर पुरस्कार', 'पद्म विभूषण', 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार'
प्रसिद्धि फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्मकार, अभिनेता

वी शांताराम

परिचय
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 18 नवंबर, 1901 को एक जैन परिवार में जन्मे राजाराम वांकुडरे शांताराम ने बाबूराव पेंटर की महाराष्ट्र फ़िल्म कम्पनी में छोटे-मोटे काम से अपनी शुरुआत की थी। शांताराम ने नाममात्र की शिक्षा पायी थी। उन्होंने 12 साल की उम्र में रेलवे वर्कशाप में अप्रेंटिस के रूप में काम किया था। कुछ समय बाद वह एक नाटक मंडली में शामिल हो गए।

गीत और संगीत
गीत और संगीत शांताराम की फ़िल्मों का एक और मज़बूत पक्ष होता था। एक फ़िल्मकार के रूप में वह अपनी फ़िल्मों के संगीत पर विशेष ध्यान देते और उनका ज़ोर इस बात पर रहता कि गानों के बोल आसान और गुनगुनाने योग्य हों। शांताराम की फ़िल्मों में रंगमंच का पुट ज़रूर नज़र आता था, लेकिन वह अपनी फ़िल्मों से समाज को एक नई दृष्टि देने में कामयाब रहे। हर फ़िल्म अपने वक़्त की कहानी बयान करती है, लेकिन उन्हें लगता है कि अब शांताराम की 'पड़ोसी' (1940) और 'दो आँखेंं बारह हाथ' जैसी जीवंत फ़िल्में दोबारा नहीं बनाई जा सकतीं। शांताराम की कुछ कृतियों की गुणवत्ता का मुक़ाबला आज भी नहीं किया जा सकता। क़रीब छह दशक लंबे अपने फ़िल्मी सफर में शांताराम ने हिन्दी व मराठी भाषा में कई सामाजिक एवं उद्देश्यपरक फ़िल्में बनाई और समाज में चली आ रही कुरीतियों पर चोट की।

निर्देशक
शांताराम ने फ़िल्मों की बारीकियाँ बाबूराव पेंटर से सीखीं। बाबूराव पेंटर ने उन्हें 'सवकारी पाश' (1925) में किसान की भूमिका भी दी। कुछ ही वर्षों में शांताराम ने फ़िल्म निर्माण की तमाम बारीकियाँ सीख लीं और निर्देशन की कमान संभाल ली। बतौर निर्देशक उनकी पहली फ़िल्म 'नेताजी पालकर' थी।

कंपनी का गठन
इसके बाद उन्होंने वी.जी. दामले, के. आर. धाईबर, एम. फतेलाल और एस. बी. कुलकर्णी के साथ मिलकर 'प्रभात फ़िल्म' कंपनी का गठन किया। अपने गुरु बाबूराव की ही तरह शांताराम ने शुरुआत में पौराणिक तथा ऐतिहासिक विषयों पर फ़िल्में बनाईं। लेकिन बाद में जर्मनी की यात्रा से उन्हें एक फ़िल्मकार के तौर पर नई दृष्टि मिली और उन्होंने 1934 में 'अमृत मंथन' फ़िल्म का निर्माण किया। शांताराम ने अपने लंबे फ़िल्मी सफर में कई उम्दा फ़िल्में बनाईं और उन्होंने मनोरंजन के साथ संदेश को हमेशा प्राथमिकता दी।

फ़िल्मी सफर
हिन्दी सिनेमा के शुरुआती दौर में प्रमुखता से उभरे फ़िल्मकार वी शांताराम उन हस्तियों में थे जिनके लिए फ़िल्में मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने का माध्यम थी। अपने लंबे फ़िल्मी सफर में उन्होंने प्रयोगधर्मिता को भी बढ़ावा दिया। डॉ. कोटनिस की अमर कहानी, झनक झनक पायल बाजे, दो आँखें बारह हाथ, नवरंग, दुनिया ना माने जैसी अपने समय की बेहद चर्चित फ़िल्मों में शांताराम ने फ़िल्म निर्माण से जुड़े कई प्रयोग किए। उन्होंने फ़िल्मों के मनोरंजन पक्ष से कोई समझौता किए बिना नए प्रयोग किए जिनके कारण उनकी फ़िल्में न केवल आम दर्शकों बल्कि समीक्षकों को भी काफ़ी प्रिय लगीं। शांताराम ने हिन्दी फ़िल्मों में मूविंग शॉट का प्रयोग सबसे पहले किया। उन्होंने बच्चों के लिए 1930 में रानी साहिबा फ़िल्म बनायी। 'चंद्रसेना' फ़िल्म में उन्होंने पहली बार ट्राली का प्रयोग किया।

रंगीन फ़िल्म
उन्होंने 1933 में पहली रंगीन फ़िल्म 'सैरंध्री' बनाई। भारत में एनिमेशन का इस्तेमाल करने वाले भी वह पहले फ़िल्मकार थे। वर्ष 1935 में प्रदर्शित हुई फ़िल्म 'जंबू काका' (1935) में उन्होंने एनिमेशन का इस्तेमाल किया था। उनकी फ़िल्म डॉ.कोटनिस की 'अमर कहानी' विदेश में दिखाई जाने वाली पहली भारतीय फ़िल्म थी।

राजकमल कला मंदिर
शांताराम ने प्रभात फ़िल्म के लिए तीन बेहद शानदार फ़िल्में बनाई। शांताराम ने 1937 में करुकू (हिन्दी में दुनिया ना माने), 1939 में मानुष (हिन्दी में आदमी) और 1941 में शेजारी (हिन्दी में पड़ोसी) बनाई। शांताराम ने बाद में प्रभात फ़िल्म को छोड़कर राजकमल कला मंदिर का निर्माण किया। इसके लिए उन्होंने 'शकुंतला' फ़िल्म बनाई। इसका 1947 में कनाडा की राष्ट्रीय प्रदर्शनी में प्रदर्शन किया गया। शांताराम की बेहतरीन फ़िल्मों में से एक है डॉ.कोटनिस की अमर कहानी। यह एक देशभक्त डाक्टर की सच्ची कहानी पर आधारित है जो सद्भावना मिशन पर चीन गए चिकित्सकों के एक दल का सदस्य था।

दो आँखें बारह हाथ
मुख्य लेख : दो आँखे बारह हाथ
शांताराम की सर्वाधिक चर्चित फ़िल्म दो आँखें बारह हाथ है। जो 1957 में प्रदर्शित हुई। यह एक साहसिक जेलर की कहानी है जो छह क़ैदियों को सुधारता है। इस फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ फ़ीचर फ़िल्म के लिए राष्ट्रपति के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। इसे बर्लिन फ़िल्म फेस्टिवल में सिल्वर बियर और सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्म के लिए सैमुअल गोल्डविन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इस फ़िल्म का गीत ऐ मालिक तेरे बंदे हम... आज भी लोगों को याद है।

झनक झनक पायल बाजे और नवरंग
झनक झनक पायल बाजे और नवरंग उनकी बेहद कामयाब फ़िल्में रहीं। दर्शकों ने इन फ़िल्मों के गीत और नृत्य को काफ़ी सराहा और फ़िल्मों को कई-कई बार देखा।

पिंजरा
शांताराम की आख़िरी महत्त्वपूर्ण फ़िल्म थी पिंजरा। यह फ़िल्म जोसफ स्टर्नबर्ग की 1930 में प्रदर्शित हुई क्लासिक फ़िल्म 'द ब्ल्यू एंजेल' पर आधारित थी। वैसे उनकी आख़िरी फ़िल्म झांझर थी। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कामयाब नहीं हो सकी और सात दशकों तक चले उनके शानदार फ़िल्मी कैरियर का अंत हो गया।

पुरस्कार
शांताराम एक चलते-फिरते संस्थान थे, जिन्होंने फ़िल्म जगत में बहुत सम्मान हासिल किया। फ़िल्म निर्माण की उनकी तकनीक और उनके जैसी दृष्टि आज के निर्देशकों में कम ही नज़र आती है। उन्हें वर्ष 1957 में झनक-झनक पायल बाजे के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फ़िल्मफेयर पुरस्कार दिया गया था। उनकी कालजयी फ़िल्म दो आँखेंं बारह हाथ के लिए सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार प्रदान किया गया। इस फ़िल्म ने बर्लिन फ़िल्म समारोह और गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड में भी झंडे गाड़े। अन्नासाहब के नाम से मशहूर शांताराम को वर्ष 1985 में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विनोद मेहरा

विनोद मेहरा

🎂जन्म: 13 फ़रवरी 1945, अमृतसर
⚰️मृत्यु : 30 अक्तूबर 1990, मुम्बई

पत्नी: किरन मेहरा (विवा. 1988–1990), ज़्यादा
बच्चे: रोहन मेहरा, सोनिया मेहरा, Rohan Mehra (born 1991)
बहन: शारदा
विनोद मेहरा ने की थी तीन शादियां

विनोद मेहरा की पहली शादी मीना ब्रोका नाम की लड़की से हुई थी, जो उनकी मां ने पसंद की थी. शादीशुदा होने के बाद उन्हें एक्ट्रेस बिंदिया गोस्वामी से प्यार हुआ और उन्होंने पहली पत्नी को तलाक दिए बिना शादी कर ली, हालांकि बाद में उन्होंने पहली पत्नी को तलाक दे दिया था.

अफवाह साबित हुई

इंडियन एक्सप्रेस ने पहले बताया था कि टीवी होस्ट तबस्सुम, जो विनोद मेहरा की करीबी दोस्त थीं, ने पुष्टि की थी कि रेखा और विनोद प्यार में थे। हालाँकि, उन्होंने उन खबरों का भी खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि वे शादीशुदा हैं । उन्होंने ज्यादातर फिल्में उनके साथ कीं।

विनोद मेहरा का जन्म 13 फरवरी, 1945 को लाहौर में हुआ। उन्होंने अपने 3 दशक लंबे करियर में करीब 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
30 अक्टूबर 1990 को हार्ट अटैक की वजह से विनोद का निधन हो गया था। जब विनोद की मौत हुई तो उनकी बेटी सोनिया की उम्र दो साल से भी कम थी। 1988 को जन्मीं सोनिया, विनोद की तीसरी पत्नी किरण की बेटी हैं। बता दें कि विनोद ने कुल 4 शादियां की थीं। लेकिन इनमें से एक बीवी ऐसी रही, जिसे कभी भी पत्नी होने का दर्जा नहीं मिल पाया।
दरअसल विनोद ने पहली शादी अपनी मां की मर्जी से मीना ब्रोका से की थी।

बिंदिया गोस्वामी उम्र में विनोद मेहरा से 16 साल छोटी हैं। हालांकि कुछ महीनों तक अफेयर के बाद दोनों ने शादी भी कर ली। लेकिन ये रिश्ता सिर्फ चार साल चला

यासीर उस्मान की किताब 'रेखा: एन अनटोल्ड स्टोरी' के मुताबिक, विनोद मेहरा ने रेखा से भी शादी की थी। किताब के मुताबिक, कोलकाता में शादी कर रेखा, जब विनोद मेहरा के घर आईं तो विनोद की मां कमला मेहरा ने गुस्से में आकर चप्पल निकाल ली। जैसे ही रेखा उनके पैर छूने लगीं, तो उन्होंने रेखा को धक्का मारकर दूर हटा दिया। रेखा घर के दरवाजे पर खड़ी थीं और उनकी सास गालियां दे रही थीं। हालांकि, बाद में विनोद मेहरा ने बीच-बचाव किया और मां को किसी तरह समझाया। बाद में विनोद मेहरा ने रेखा से कहा था कि वो अपने घर लौट जाएं और फिलहाल वहीं रहें। हालांकि बाद में ये शादी टूट गई थी।

महज 45 साल की उम्र में विनोद मेहरा की मौत के बाद उनकी पत्नी किरण बच्चों के साथ केन्या शिफ्ट हो गई थीं। बेटी सोनिया का पालन-पोषण उनकी नाना-नानी के घर ही हुआ। केन्या और लंदन से पढ़ीं सोनिया ने 8 साल की उम्र में एक्टिंग की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी। इस दौरान लंदन एकेडमी ऑफ म्यूजिक एंड ड्रामेटिक आर्ट्स के एक्टिंग एग्जामिनेशन में उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला था। 17 साल की उम्र में सोनिया मुंबई आ गईं और अनुपम खेर के इंस्टीट्यूट एक्टर प्रीपेयर्स से 3 महीने का कोर्स किया। एक्ट्रेस होने के साथ-साथ सोनिया ट्रेंड डांसर भी हैं।
संक्षिप्त परिचय

विनोद मेहरा का जन्म 13 फरवरी, 1945 को अमृतसर में हुआ था। इन्होंने तीन शादियाँ की थी। मीना ब्रोका इनकी पहली पत्नी थी। बिंदिया गोस्वामी इनकी दूसरी पत्नी जिनके साथ विनोद ने कई फ़िल्मों में काम किया। किरण विनोद मेहरा की तीसरी पत्नी थी। किरण और विनोद की एक बेटी सोनिया और एक बेटा रोहन है।

विनोद मेहरा के फ़िल्म करियर के मौसम को खुशनुमा बनाने में अभिनेत्री मौसमी चटर्जी का योगदान रहा है। शक्ति सामंत की फ़िल्म अनुराग (1972) में मौसमी चटर्जी और विनोद मेहरा पहली बार साथ आए। मौसमी ने एक दृष्टिहीन युवती का रोल संजीदगी के साथ किया था। विनोद एक आदर्शवादी नायक थे और अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध वह मौसमी से शादी करना चाहते थे। इसके बाद फ़िल्म उस पार (बसु चटर्जी), दो झूठ (जीतू ठाकुर) तथा स्वर्ग नरक (दसारी नारायण राव) में मौसमी के नायक बने।

मनुस्मृति

. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...