शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

ॐ शिव पुरी

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*Ş₳ŦเŞ𝓱👸🏻◣🍁💜⃝🇱♥︎2*
ओम शिव पूरी
🎂जन्म14 जुलाई 1938, राजस्थान
⚰️मृत्यु 15 अक्तूबर 1990, मुम्बई
पत्नी: सुधा शिवपुरी (विवा. 1968–1990)
बच्चे: रितु शिवपुरी, विनीत शिवपुरी
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नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा , नई दिल्ली के पूर्व छात्र, शिवपुरी नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा रिपर्टरी कंपनी (1964) के पहले प्रमुख और इसके अभिनेताओं में से एक बने। बाद में उन्होंने नई दिल्ली में अपने युग के एक महत्वपूर्ण थिएटर ग्रुप दिशांतर की स्थापना की।पटियाला में जन्मे ओम शिवपुरी ने अपने करियर की शुरुआत जालंधर रेडियो स्टेशन में काम करके की , जहाँ उस समय सुधा शिवपुरी (जो बाद में उनकी पत्नी बनीं) काम करती थीं। 

बाद में, वे नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा , नई दिल्ली में शामिल हो गए और थिएटर के दिग्गज इब्राहिम अल्काज़ी के तहत प्रशिक्षित हुए । 1963 में स्नातक होने के बाद, वे अभिनेता के रूप में नवगठित एनएसडी रिपर्टरी कंपनी में शामिल हो गए। ओम शिवपुरी एनएसडी रिपर्टरी कंपनी के पहले प्रमुख भी थे और 1976 तक बने रहे, जब मनोहर सिंह ने उनका अनुसरण किया।

⚰️ओम शिवपुरी की 1990 में दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई। उनके निधन के बाद उनकी कई फिल्में रिलीज भी हुईं।

मदन मोहन

महान संगीतकार मदन मोहन की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि
🎂जन्म 25 जून 1924 बगदाद, इराक
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 14 जुलाई 1975
मदन मोहन  हिन्दी फ़िल्मों के एक प्रसिद्ध 1950, 1960, और 1970 के दशक के बॉलीवुड फ़िल्म संगीत निर्देशक थे।इनका पूरा नाम मदन मोहन कोहली था। उन्हें विशेष रूप से फ़िल्म उद्योग में गज़लों के लिए याद किया जाता है।
मदन मोहन का 🎂जन्म 25 जून 1924 बगदाद, इराक में हुआ था। जहाँ उनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल इराकी पुलिस के साथ एक एकाउंटेंट जनरल के रूप में काम कर रहे थे, मध्य पूर्व में जन्मे मदन मोहन ने अपने जीवन के पहले पाँच साल यहाँ क्यू बिताए। उनके पिता राय बहादुर चुन्नीलाल फ़िल्म व्यवसाय से जुड़े थे और बाम्बे टाकीज और फ़िल्मीस्तान जैसे बड़े फ़िल्म स्टूडियो में साझीदार थे।
घर में फ़िल्मी माहौल होने के कारण मदन मोहन भी फ़िल्मों में काम कर बड़ा नाम करना चाहते थे लेकिन अपने पिता के कहने पर उन्होंने सेना में भर्ती होने का फैसला ले लिया और देहरादून में नौकरी शुरू कर दी। कुछ दिनों बाद उनका तबादला दिल्ली में हो गया। लेकिन कुछ समय के बाद उनका मन सेना की नौकरी में नहीं लगा और वह नौकरी छोड़ लखनऊ आ गये।
लखनऊ में मदन मोहन आकाशवाणी के लिये काम करने लगे। आकाशवाणी में उनकी मुलाकात संगीत जगत से जुडे उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ाँ, उस्ताद अली अकबर ख़ाँ , बेगम अख़्तर और तलत महमूद जैसी जानी मानी हस्तियों से हुई। इन हस्तियों से मुलाकात के बाद मदन मोहन काफ़ी प्रभावित हुये और उनका रुझान संगीत की ओर हो गया। अपने सपनों को नया रूप देने के लिये मदन मोहन लखनऊ से मुंबई आ गये
मुंबई आने के बाद मदन मोहन की मुलाकात एस.डी. बर्मन , श्याम सुंदर और सी. रामचंद्र जैसे प्रसिद्ध संगीतकारों से हुई और वह उनके सहायक के तौर पर काम करने लगे। बतौर संगीतकार वर्ष 1950 में प्रदर्शित फ़िल्म आँखें के ज़रिये मदन मोहन फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए। फ़िल्म आँखें के बाद लता मंगेशकर मदन मोहन की चहेती पार्श्वगायिका बन गयी और वह अपनी हर फ़िल्म के लिये लता मंगेश्कर से हीं गाने की गुज़ारिश किया करते थे। लता मंगेश्कर भी मदन मोहन के संगीत निर्देशन से काफ़ी प्रभावित थीं और उन्हें गज़लों का शहजादा कहकर संबोधित किया करती थी।
मदन मोहन के पसंदीदा गीतकार के तौर पर राजा मेंहदी अली खान, राजेन्द्र कृष्ण और कैफी आजमी का नाम सबसे पहले आता है। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने गीतकार राजेन्द्र किशन के लिये मदन मोहन की धुनों पर कई गीत गाये। जिनमें 'यूं हसरतों के दाग़'..अदालत (1958),हम प्यार में जलने वालों को चैन कहाँ आराम कहाँ'.. जेलर (1958), 'सपने में सजन से दो बातें एक याद रहीं एक भूल गयी'..गेटवे ऑफ इंडिया (1957), 'मैं तो तुम संग नैन मिला के'..मनमौजी,'ना तुम बेवफा हो'.. एक कली मुस्काई, 'वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी'..संजोग(1961) जैसे सुपरहिट गीत इन तीनों फनकारों की जोड़ी की बेहतरीन मिसाल है।
पचास_का_दशक
पचास के दशक में मदन मोहन के संगीत निर्देशन में राजेन्द्र कृष्ण के रचित रूमानी गीत काफ़ी लोकप्रिय हुये। उनके रचित कुछ रूमानी गीतों में 'कौन आया मेरे मन के द्वारे पायल की झंकार लिये'.. देख कबीरा रोया (1957), 'मेरा करार लेजा मुझे बेकरार कर जा'.(आशियाना)1952,'ए दिल मुझे बता दे'..भाई-भाई 1956 जैसे गीत
शामिल हैं।
साठ_का_दशक
मदन मोहन के संगीत निर्देशन में राजा मेंहदी अली खान रचित गीतों में 'आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल मुझे'..अनपढ़ (1962), 'लग जा गले'..(वो कौन थी) 1964, 'नैनो में बदरा छाये'.., 'मेरा साया साथ होगा'.. मेरा साया(1966) जैसे गीत श्रोताओं के बीच आज भी लोकप्रिय है
सत्तर_का_दशक
मदन मोहन ने अपने संगीत निर्देशन से कैफी आजमी रचित जिन गीतों को अमर बना दिया उनमें 'कर चले हम फिदा जानो तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'... हकीकत (1965),मेरी आवाज़ सुनो..प्यार का राज सुनो'..नौनिहाल (1967), 'ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नही'.. हीर रांझा (1970),'सिमटी सी शर्मायी सी तुम किस दुनिया से आई हो'...परवाना (1972), 'तुम जो मिल गये हो ऐसा लगता है कि जहां मिल गया'.. हंसते जख्म (1973) जैसे गीत शामिल है।

महान संगीतकार ओ.पी. नैयर जिनके निर्देशन में लता मंगेश्कर ने कई सुपरहिट गाने गाये अक्सर कहा करते थे। ..मैं नहीं समझता कि लता मंगेश्कर, मदन मोहन के लिये बनी हुयी है या मदन मोहन लता मंगेशकर के लिये लेकिन अब तक न तो मदन मोहन जैसा संगीतकार हुआ और न लता जैसी पार्श्वगायिका.. मदन मोहन के संगीत निर्देशन में आशा भोंसले ने फ़िल्म 'मेरा साया' के लिये
'झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में'.. गाना गाया जिसे सुनकर श्रोता आज भी झूम उठते हैं। मदन मोहन से आशा भोंसले को अक्सर यह शिकायत रहती थी कि- आप अपनी हर फ़िल्मों के लिये लता दीदी को हीं क्यो लिया करते है,इस पर मदन मोहन कहा करते थे जब तक लता ज़िंदा है मेरी फ़िल्मों के गाने वही गायेगी। आंखों को नम कर देने वाला ऐसा संगीत वर्ष 1965 में प्रदर्शित फ़िल्म हकीकत में मोहम्मद रफी की आवाज़ में मदन मोहन के संगीत से सज़ा यह गीत 'कर चले हम फिदा जानों तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों'...आज भी श्रोताओं में देशभक्ति के जज्बे को बुलंद कर देता है। आंखों को नम कर देने वाला ऐसा संगीत मदन मोहन ही दे सकते थे।

वर्ष 1970 में प्रदर्शित फ़िल्म दस्तक के लिये मदन मोहन सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किये गये। मदन मोहन ने अपने ढ़ाई दशक लंबे सिने कैरियर में लगभग 100 फ़िल्मों के लिये संगीत दिया।

अपनी मधुर संगीत लहरियों से श्रोताओं के दिल में ख़ास जगह बना लेने वाले मदन मोहन 14 जुलाई 1975 को इस दुनिया से जुदा हो गए। उनकी मौत के बाद वर्ष 1975 में हीं मदन मोहन की मौसम और लैला मजनू जैसी फ़िल्में प्रदर्शित हुयी जिनके संगीत का जादू आज भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करता है।

कुलवंत जानी

🎂14जुलाई

⚰️28मार्च 

बॉलीवुड गीतकार.

बॉलीवुड फिल्म एक ही रास्ता साल 1993 में रिलीज हुई थी, इसका निर्देशन दीपक बाहरी ने किया था और फिल्म के सितारे अजय देवगन , रवीना टंडन हैं । संगीत किशोर शर्मा , महेश शर्मा द्वारा रचित था और गीत देव कोहली , कुलवंत जानी , गुलशन बावरा , नक्श लायलपुरी द्वारा लिखे गए थे और गायक विनोद राठौड़ , कुमार शानू , बेला सुलखे , साधना सरगम , कविता कृष्णमूर्ति , विपीन देसाई , विपीन सचदेव हैं ।

↔️कुलवंत जानी गीत कार थे

कुलवंत जानी

कुलवंत जानी बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार और गीतकार हैं। फ़िल्में : संगीत विभाग: 1998 घर बाज़ार (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1995 फ़ैसला मैं करुंगी (गीतकार) 1994 मोहब्बत की आरज़ू (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1993 एक ही रास्ता (गीतकार - कुलवंत जानी) 1992 सूर्यवंशी (गीतकार) 1990 कसम झूठ की (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1989 गोला बारूद (गीतकार - कुलवंत जानी) 1989 दो क़ैदी (गीतकार) 1988 धर्मयुद्ध (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1987 कौन जीता कौन हारा (गीतकार - कुलवंत जानी) 1987 मददगार (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1986 मोहब्बत की कसम (गीत - कुलवंत जानी के रूप में) 1985 कला सूरज (गीतकार - कुलवंत जानी) 1985 ज़ुल्म का बदला (गीतकार - कुलवंत जानी) 1985 पत्थर (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1984 सरदार (गीतकार) 1982 अफ़्रीका का आदमी और भारत की लड़की (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1982 राख और चिंगारी (गीतकार) 1981 ज्वाला डाकू (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1980 एक बार कहो (गीतकार - कुलवंत जानी) 1979 दादा (गीतकार) 1979 शैतान मुजरिम (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1977 महा बदमाश (गीतकार) 1977 पापी (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1976 लगाम (गीतकार) 1975 जग्गू (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1974 हमराही (गीतकार) 1974 एक लड़की बदनाम सी (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) 1972 ललकार (द चैलेंज) (गीतकार) लेखक : 1995 मुक़द्दर (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1992 कल की आवाज़ (पटकथा - कुलवंत जानी) 1992 सूर्यवंशी (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1987 ईमानदार (कहानी - कुलवंत जानी के रूप में) 1986 अधिकार (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1983 धरती आकाश (टीवी मूवी) (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) / (पटकथा - कुलवंत जानी के रूप में) 1982 तेरी मेरी कहानी (टीवी मूवी) (संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) 1979 हम तेरे आशिक हैं (अतिरिक्त संवाद - कुलवंत जानी के रूप में) / (अतिरिक्त पटकथा - कुलवंत जानी के रूप में) 1974 ठोकर (गीतकार - कुलवंत जानी के रूप में) गीत संगीत : 1989 गोला बारूद (गीत: "डोली उठेगी.. आज तेरी बहना", "सिपाही मेरे पीछे पह गया", "दर्द दिल का मेरे इलाज करदे", "याद आई", "शब्बा शब्बा.. क्या रात है") 1989 दो क़ैदी (गीत: "ये चली वो चली चुराके ले चली") 1982 अफ़्रीका का आदमी और भारत की लड़की (गीत: "किसी को मुजरिम")

कुलवंत सिंह जानी उम्र 64 वर्ष की कैंसर से एक साल की लंबी लड़ाई के बाद 28 मार्च को सुबह 9:19 बजे उनके परिवार के आराम के बीच उनके घर में मृत्यु हो गई। जानी का जन्म पुंछ भारत में हुआ था और वह छोटी उम्र से ही अमेरिका में रहने की इच्छा रखते थे। एक बड़े परिवार में गरीब होने के कारण उन्हें स्कूल छोड़कर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। जानी ने अपने जीवनकाल में कई तरह की नौकरियाँ कीं और पूरे भारत और यूरोप की यात्रा की। कठिन परिस्थितियों और बाधाओं के बावजूद वह अमेरिका जाने के अपने सपने को साकार करने में सफल रहे। जिन उपलब्धियों पर उन्हें सबसे अधिक गर्व था उनमें से एक थी वारविक ब्लव्ड पर स्थित एक स्थानीय सुविधा स्टोर जानी फूड मार्ट की स्थापना करना। हम सभी जानी को एक दयालु व्यक्ति के रूप में याद करते हैं जो किसी भी कमरे में जाने पर उसे रोशन करने की क्षमता रखता था। वह हर किसी से प्यार करता था चाहे आप श्वेत मुस्लिम काले बैपटिस्ट हों; उन्होंने हर किसी को सिर्फ इंसान के रूप में देखा। उनका मानना ​​था कि हर किसी में ईश्वर का एक अंश है। कृपया कुलवंत सिंह जानी के जीवन को मनाने के लिए शनिवार 31 मार्च 2018 को हमसे जुड़ें। अंतिम संस्कार सेवा वेमाउथ अंतिम संस्कार गृह में सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित की जाएगी: 12746 नेट्टल्स ड्राइव न्यूपोर्ट न्यूज़ वीए 23606। अंतिम संस्कार के बाद चेसापीक गुरुद्वारा में प्रार्थना और दोपहर का भोजन किया जाएगा: 780 फिनक लेन चेसापीक वीए 23320। व्यवस्थाएं वेमाउथ द्वारा की जाती हैं अंतिम संस्कार की जगह।

*Aa jaan-e-jaan - Paapi - Bappi Lahiri - Kulwant Jani - Lata Mangeshkar -.mp3*1977

डेली प्रेस द्वारा 30 मार्च 2018 को प्रकाशित कुछ अंश।

लीला चिटनिस

पुराने ज़माने की अभिनेत्री लीला चिटनिस की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि
लीला चिटनिस 
🎂जन्म 9 सितंबर, 1909; 
⚰️मृत्यु: 14 जुलाई, 2003
हिन्दी फ़िल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री थीं।लीला चिटनिस ने 52 वर्ष तक अभिनय किया औरअशोक कुमार की नायिका रहीं, तो बाद में अनेक फ़िल्मों में वे दिलीप कुमार, राजकपूर और देव आनंद की मां की भूमिकाओं में आईं। लीला चिटनिस ने अभिनय करने के अलावा एक फ़िल्म 'आज की बात' (1955) का निर्माण और निर्देशन भी किया।

हिंदुस्तानी सिनेमा में आने वाली स्नातक अभिनेत्रियों में दुर्गा खोटे के बाद लीला चिटनिस का नाम शिखर पर हैं। अपने जीवन में भी पति गजानन यशवंत चिटनिस से तलाक के बाद चार बच्चों की परवरिश उन्होंने बड़े जतन से की और 93 वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु भी अमेरिका में उनके ज्येष्ठ पुत्र के घर हुई।लीला चिटनिस ने अपने पति के साथ स्वतंत्रता संग्राम में इस तरह सहयोग किया कि क्रांतिकारी मानवेंद्र नाथ राय को अपने घर में ब्रिटिश पुलिस की निगाह से बचाकर रखा। लीला चिटनिस पहली
भारतीय अभिनेत्री हैं, जिन्होंने 1941 में 'लक्स' साबुन के लिए विज्ञापन फ़िल्म में काम किया। उनके पूर्व केवल हॉलीवुड नायिकाओं को लिया जाता था। परंतु 1930 वाले दौर में पारंपरिक समाज स्त्री को किसी तरह आज़ादी और सुविधा नहीं देता था, तब इन महिलाओं ने रंगमंच पर अभिनय किया है, फ़िल्में की हैं और स्वतंत्रता संग्राम में भी सहयोग किया है। लीला चिटनिस को देविका रानी जैसी विरल सुंदर महिला के स्टूडियो में उनके प्रिय नायक अशोक कुमार के साथ अपनी काबिलियत सिद्ध करनी थी। देविका रानी कठोर प्रशासक थीं। प्रेमिका की भूमिकाओं से नए लोगों द्वारा
विस्थापित होने के बाद कभी अपने नायक रहे कलाकारों की मां की भूमिका करना आसान यात्रा नहीं थी।लीला चिटनिस अपनी लंबी पारी में कभी भी किसी विवाद में नहीं उलझीं।

प्रमुख_फ़िल्में

दिल तुझको दिया (1987)
बिन माँ के बच्चे (1980)
सत्यय शिवम सुन्दरम (1978) Wife
जीवन मृत्यु (1970)
फूल और पत्थर (1966)
वक़्त (1965)
गाइड (1965)
दोस्ती (1964)
वटवारा (1961)
धर्मपुत्र (1961)
गंगा जमुना (1961)
हम दोनों (1961)
परख (1960)
काला बाज़ार (1960)
धूल का फूल (1959)
नया दौर (1957)
आज की बात (1955)
आवारा (1951)
बन्धन (1940)
कंगन (1939)
इंसाफ़ (1937)
श्री सत्यनारायण (1935)

नसीम अहमद उर्फ सुरेश

पुराने जमाने के अभिनेता सुरेश उर्फ नसीम अहमद की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

सुरेश 
🎂13 नवंबर 1928 
⚰️ 14 जुलाई 1979
जिनका असली नाम नसीम अहमद था जिन्हें एन ए सुरेश के नाम से भी जाना जाता है, फिल्मी दुनिया के प्रसिद्ध अभिनेता थे, जिनका जन्म भारत के पंजाब के गुरदासपुर में हुआ था उन्होंने 1929 से 1979 तक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया

सुरेश ने 1929 में बाल कृष्ण के रूप में फ़िल्म गोपाल कृष्ण में बाल कलाकार के रूप में और 1937 में निशान-ए-जंग में बाल कलाकार के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की उनकी शुरुआती फिल्में अंजान (1941) नया संसार (1941) और बसंत (1942) थीं

1950 के दशक में उन्हें मधुबाला, सुरैया, वैजयंतीमाला और गीता बाली सहित उस समय की मुख्य नायिकाओं के साथ एक प्रमुख अभिनेता के रूप काम करने का मौका मिला  उन्हें अपनी कई फिल्मों में निर्माता / निर्देशक ए आर करदार ने हीरो के रूप में लिया
जिसमें दुलारी (1949) मधुबाला के साथ जादू (1951) नलिनी जयवंत के साथ  दीवाना (1952), सुरैया के साथ  फ़िल्म यास्मीन के वैजयंती माला के साथ  कैदी पद्मिनी के साथ और तीन उस्ताद (1961) में उन्होंने नायिका के रूप में अमिता के साथ जोड़ी बनाई।  श्यामा के साथ सुरेश फ़िल्म चार चाँद (1953) के नायक थे सुरेश और निगार सुल्ताना फ़िल्म रिश्ता (1954) की प्रमुख जोड़ी थी और सुरेश और उषा किरण ने फ़िल्म दोस्त (1954) में  नायक और नायिका के रूप में काम किया

दो साल के लिए, सुरेश पाकिस्तान गए और 1950 और 1951 में दो फिल्मों में अभिनय किया, लेकिन फिर जल्द ही भारत लौट आए

1961 के बाद, उनकी लोकप्रियता में गिरावट आई और उन्होंने लव मैरिज, मेरे हमसफर, दिल्लगी, ब्रह्मचारी, परदे के पीछे जैसी कई फिल्मों में सहायक अभिनेता के रूप में अभिनय किया

उन्होंने 55 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया उन्होंने सुनील दत्त, शशि कपूर और रीना रॉय द्वारा अभिनीत एक फिल्म गंगा और सूरज (1980) का निर्माण किया जिसके मुख्य खलनायक अनवर हुसैन के खराब स्वास्थ्य के कारण यह फ़िल्म ओवर बजट हो गयी और सुरेश को आर्थिक रूप से काफी कमजोर कर दिया  यह फिल्म 1980 में उनकी मृत्यु के बाद रिलीज़ हुई, 1979 में उनका देहांत हो गया

उन्हें दुलारी (1949) में उनकी भूमिका के लिए सबसे अधिक जाना जाता है, विशेष रूप से मोहम्मद रफी द्वारा गाया गाना "सुहानी रात ढाल चुकी" के लिये

अभिनेता मिलिंद गुनाजी देवदास,

अभिनेता मिलिंद गुनाजी देवदास,

🎂 14 जुलाई, 1968 को पुणे, महाराष्ट्र
 
एलओसी कारगिल, देव जैसी फिल्मों में नजर आ चुके हैं।खट्टा मीठा, कामसूत्र-3डी. 14 जुलाई, 1968 को पुणे, महाराष्ट्र में जन्मे मिलिंद गुणाजी ने महाराष्ट्र सरकार के कई कार्यों के लिए ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी काम करना शुरू किया। वह एक विपुल यात्रा लेखक भी हैं।

1993 में उन्होंने निर्देशित 'पपीहा' से डेब्यू कियासई परांजपेएक वन अधिकारी की मुख्य भूमिका में। समीक्षकों ने फिल्म की सराहना की. 1996 में, उन्होंने महेश भट्ट की फिल्म फरेब में इंस्पेक्टर इंद्रजीत सक्सेना की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। नकारात्मक भूमिका में यह अभी भी उनके प्रतिष्ठित प्रदर्शनों में से एक है। इससे पहले उन्होंने गोविंद निहालिनी की फिल्म 'द्रोह काल' में काम किया था, जिसमें उन्होंने मनोज बाजपेयी के साथ एक आतंकवादी की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म में मिलिंद ने उनके साथ सह-अभिनय किया थाओम पुरी,नसीरुद्दीन शाह, आशीष विद्यार्थी।

इस प्रकार, उन्होंने विरासत (1997) और गॉडमदर (1999) जैसी दो बहुत अलग फिल्म परियोजनाओं में सहायक भूमिकाएँ करके अपने करियर का एक और नया चरण शुरू किया। इन दोनों फिल्मों ने बड़े पर्दे पर उनके करियर को काफी हद तक आगे बढ़ाया। उन्होंने गोविंद निहालिनी की देव, हजार चौरासी की मां और द्रोह काल जैसी तीन सफल परियोजनाओं में अभिनय किया है। देवदास में कालीबाबू की भूमिका ने उन्हें व्यावसायिक सिनेमा में अपना कद बढ़ाने में मदद की। मिलिंद गुणाजी ने कला और सार्थक सिनेमा दोनों में अभिनय करके अपने प्रदर्शन को संतुलित कियाशबाना आजमी, ,जया बच्चन,सनी देयोल, ओम पुरी और नसीरुद्दीन शाह।

देव, देवदास, एलओसी कारगिल आदि जैसी फिल्मों ने शुरुआती सप्ताहांत में प्रभावशाली कमाई की और आम तौर पर युवा दर्शकों ने उन्हें नोटिस किया। उन्होंने फिल्म में जनरल अंसारी के रूप में खलनायक की भूमिका निभाई।असम्भव'जो बॉक्स ऑफिस पर औसत कमाई करने वाली फिल्म थी। 2006 में, अभिनेता को एक विवादास्पद फीचर फिल्म जिज्ञासा पर आधारित फिल्म में देखा गया थामल्लिका शेरावत. अभिनेता ने असामान्य हास्य फिल्म फिर हेरा फेरी (2009) और खट्टा मीता (2010) में अभिनय किया। 2015 में उन्हें 'संकल' और 'कार्बन' जैसी दो फिल्मों में देखा गया था।

इस अभिनेता की कोई सुपर-हीरो छवि नहीं थी, लेकिन भारतीय सिनेमा में सार्थक किरदारों को चित्रित करने के लिए उनके पास एक अच्छा माचो लुक था। वह तमिल, पंजाबी, तेलुगु और मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में भी दिखाई दिए हैं।

धनंजय सिंह

धनंजय सिंह
🎂जन्मतिथि: 14-07-1965
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अवलोकन धारावाहिक और शो 

धनंजय सिंह हिंदी अभिनेता
🎂जन्मतिथि: 14-07-1965
» चलचित्र-अभिनेता
धनंजय सिंह दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के डुप्लीकेट अभिनेता हैं। उन्हें धर्मेंद्र का डबल रोल भी माना जाता है। जब उन्हें एक विज्ञापन के लिए फिल्म 'शोले' का एक डायलॉग बोलना था, तो उन्हें एक शिफ्ट के लिए लगभग 20,000 रुपये का भुगतान किया गया, जो लगभग तीन से चार घंटे तक चल सकती थी। इस प्रकार, धनंजय सिंह - जो धर्मेंद्र जैसा दिखता है - हमेशा अभिनेता के लिए डबल अप का विकल्प होता है। हाल ही में बर्गर के एक विज्ञापन में उनकी बॉडी ने बॉलीवुड के दिग्गजों की जगह ले ली। धनंजय को लगता है कि वह धरमजी जैसा दिखता है। यह अभिनेता एक अभिनेता के रूप में विकसित होने के लिए 1985 में अलीगढ़ से मुंबई आया था, लेकिन वह केवल अभिनेता के साथ अपनी समानता का ही फायदा उठा सका। इस तरह ये गरीब अभिनेता, जो फिल्मों में हास्य अभिनेता या साइड हीरो की भूमिका के रूप में काम करना चाहते थे, कैमरे के पीछे अभिनय करने तक सिमट कर रह गए और पहचाने जाने लगे। सौतेली मॉडलें युगल होने से बिल्कुल भी नाखुश नहीं हैं, जिन्हें अधिकतर पहचान नहीं मिलती है, लेकिन फिर भी उन्होंने परिवार के लिए रोजी-रोटी जुटाने के लिए काम करना जारी रखा है। यह अभिनेता एक अन्य डबल-अभिनेता फ़िरोज़ के साथ मित्रवत है, जो वास्तव में डुप्लिकेट अभिनेता है। इन दोनों ने एक फिल्म 'डुप्लीकेट शोले' के लिए साथ काम किया है, जो 2002 की एक स्पूफ फिल्म थी जो 1975 की क्लासिक बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर शोले की नकल करती थी। उन्होंने फिल्म में एक गाने के सीक्वेंस के लिए कैमियो के रूप में भी काम किया।शांति' जो हैदीपिका पादुकोनेऔर शाहरुख खान मुख्य भूमिका में हैं. एक्टर को 'संन्यासी मेरा नाम' नाम की फिल्म में भी देखा गया थामिथुन चक्रवर्तीऔर शालिनी कपूर मुख्य भूमिका में हैं। इसके अलावा वह कुछ टीवी सीरियल्स में भी नजर आए और सुर्खियों में बने रहने में कामयाब रहे। कुछ प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक जिनमें वह दिखाई दिए थे, उनमें शामिल हैं, 'बूगी वूगी', 'फुल्ली फालतू', 'शरारत' और 'ये चंदा कानून है', आदि। कई लोगों के लिए, बॉडी डबलिंग एक करियर है और यही कारण है कि अधिकांश बॉडी मॉडल अपने करियर को गंभीरता से लेते हैं।

मनुस्मृति

. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...