सोमवार, 10 जुलाई 2023

नशाद है नौशाद नही

नशाद ( उर्दू : ناشاد ) (11 जुलाई 1923 - 14 जनवरी 1981) भारतीय और पाकिस्तानी फिल्म उद्योग के एक फिल्म संगीतकार और संगीत निर्देशक थे । उन्होंने 1940 और 1950 के दशक में हिंदी फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया , स्क्रीन पर नशाद नाम से अभिनय किया और फिर बाद में 1964 में पाकिस्तान चले गए।

नशाद ناشاد
जन्म
शौकत अली हाशमी
🎂11 जुलाई 1923
दिल्ली , ब्रिटिश भारत
मृत
⚰️14 जनवरी 1981 (आयु 57 वर्ष)
व्यवसाय
फ़िल्म संगीतकार , फ़िल्म संगीत निर्देशक
सक्रिय वर्ष
1947-1981
सगे-संबंधी
वाजिद नशाद (पुत्र) (संगीत निर्देशक भी)
पुरस्कार
1964 और 1969 में 2 निगार पुरस्कार
शौकत अली का जन्म 11 जुलाई 1923 को दिल्ली , ब्रिटिश भारत में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शैक्षणिक शिक्षा दिल्ली के एक स्थानीय हाई स्कूल में प्राप्त की। उन्होंने बांसुरी बजाना सीखा. 1940 के दशक की शुरुआत में वह बंबई चले गए। अंततः नशाद में बसने से पहले उन्होंने कई नामों से रचनाएँ कीं। फिल्म निर्देशक नक्शब जार्चवी ने अपनी फिल्म नगमा (1953) के लिए शौकत अली का नाम बदलकर नशाद रख दिया । उन्होंने 1947 की एक्शन फिल्म दिलदार में शौकत देहलवी के नाम से संगीत की शुरुआत की । निर्देशक थे शिव राज और इसके बोल थे सीएम मुनीर के. कलाकारों में सगीना, यशोनत, देव राधा और दीपक शामिल थे।

उन्होंने 1948 की फ़िल्म जीने दो के लिए शौकत अली की भूमिका निभाई । जे. हिंद चित्रा के बैनर तले बनी इसके निर्देशक एएफ कीका और केए मजीद थे और कलाकारों में मोनिका देवी, पनालाल, हरीश, रतन पिया, लैला गुप्ता और शांता कंवर शामिल थे। उन्होंने 1948 की फिल्म पायल के लिए रचना करने के लिए अपने वास्तविक नाम शौकत अली का इस्तेमाल किया ।

1948 में, उन्होंने शौकत देहलवी के रूप में फिल्म टूटे तारे (1948) के लिए गाने भी लिखे । शेख मुख्तार की फिल्म निर्माण इकाई "उमर खय्याम फिल्म्स" के बैनर तले रिलीज़ हुई , निर्देशक हरीश थे, और कलाकारों में शमीम बानू और मोतीलाल शामिल थे । इस फिल्म में उन्होंने मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की प्रसिद्ध ग़ज़ल "ना किसी की आँख का नूर हूँ" की रचना की जो पूरे भारत में बहुत लोकप्रिय हुई।
1949 में, उन्होंने अभिनेता-निर्देशक याकूब की फिल्म, ऐये के लिए संगीत तैयार किया । फिल्म में याकूब और सुलोचना चटर्जी ने अभिनय किया था । 1949 में, नशाद ने शौकत अली हैदरी नाम का उपयोग करते हुए फिल्म " दादा " के लिए गाने तैयार किए। निर्देशक हरीश थे, और इसे "उमर खय्याम फिल्म्स" के बैनर तले रिलीज़ किया गया था, कलाकारों में शेख मुख्तार, बेगम पारा , मुनव्वर सुल्ताना , श्याम, मुराद , मुकरी और गुल्लू शामिल थे। इसे जुबली सिनेमा, कराची में रिलीज़ किया गया था ।
नशाद और नौशाद का अंतर
1953 में, फिल्म निर्देशक नक्शब जराचवी ने शौकत अली का नाम बदलकर नशाद रख दिया, जिसे उन्होंने जीवन भर बरकरार रखा। नाम बदलने के पीछे की कहानी "नौशाद: ज़र्रा जो आफ़ताब बना" (पेंगुइन) किताब में लिखी गई है। फिल्म निर्देशक ने सबसे पहले अपनी फिल्म के लिए संगीत तैयार करने के लिए नौशाद अली से संपर्क किया। जब नौशाद अली ने इनकार कर दिया, तो क्रोधित निर्देशक नक्शब जार्चवी ने शौकत अली का नाम बदलकर नशाद रख दिया, ताकि यह नौशाद जैसा लगे। इसके बाद नशाद ने जार्चवी की 1953 की फिल्म नगमा के लिए संगीत तैयार किया , जिसमें नादिरा और अशोक कुमार ने अभिनय किया था ।

↔️भारत में नशाद की फिल्मों में शामिल हैं:

दिलदार] (1947) 
टूटे तारे (1948) 
सुहागी (1948)
जीने दो (1948) 
दादा (1949)
आइए (1949) 
राम भरोसे (1951)
गज़ब (1951)
नगमा (1953)
चार चंद (1953) कलाकार: श्यामा और सुरेश
दरवाज़ा (1954) निर्देशक: शाहिद लतीफ़ , लेखिका इस्मत चुगताई के पति , कलाकार: श्यामा , चन्द्रशेखर । इस फिल्म में उन्होंने पहली बारगायिका सुमन कल्याणपुर को पेश किया।
शहजादा (1955)
सबसे बड़ा रुपैया (1955) निर्देशक: पीएल संतोषी, कलाकार: शशिकला और आगा, संगीत: नशाद और ओपी नैय्यर।
शहजादा (1955), निर्देशक: मोहन सिन्हा, कलाकार: शीला रमानी और अजीत, संगीत: नशाद और एस. मोहिंदर [4]
जवाब (1955),
बारादरी (फ़िल्म) (1955) निर्देशक: के. अमरनाथ , गीत: खुमार बाराबंकी , कलाकार: गीता बाली , अजित , चन्द्रशेखर और प्राण। इस फिल्म में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के कुछ हिट गाने "भुला नहीं देना जी भुला नहीं देना, जमाना खराब है, भुला नहीं देना" और तलत महमूद का "तस्वीर बनाता हूं तसवीर नहीं बनती" थे । इस फिल्म में नशाद ने खुद एक गाना गाया था. 
आवारा शहजादी , निर्देशक, प्यारेलाल, कलाकार: मीना शोरी और दिलजीत, संगीत: नशाद और जिम्मी।
जल्लाद (1956) कलाकार: वीना, मुनव्वर सुल्ताना और नासिर खान।
बड़ा भाई (1957) कलाकार: कामिनी कौशल और अजीत।
जिंदगी या तूफान (1958) कलाकार: नूतन और प्रदीप कुमार 
महफ़िल कलाकार: रेहाना और दलजीत।
हथकड़ी (1958) कलाकार: शकीला और मोती लाल।
ज़रा बच के (1958) कलाकार: नंदा और सुरेश।
कातिल (1960) कलाकार: चित्रा और प्रेम नाथ ।
फ़्लाइट टू असम (1961) कलाकार: शकीला और रंजन।
प्यार की दास्तां (1961) कलाकार: अनीता गुहा और सुरेश कुमार 
रूपलेखा (1962) कलाकार: वजीह चौधरी और महिपाल।
माया महल (1963) कलाकार: हेलेन और महिपाल
मैं हूं जादूगर (1965)
फ्लाइंग मैन (1965) संगीतकार के रूप में नशाद की भारत में आखिरी फिल्म थी


↔️पाकिस्तान में
वह पाकिस्तान चले गए और 1964 में नखशब जराचवी द्वारा निर्देशित फिल्म मैखाना में संगीतकार के रूप में शुरुआत की , इसके पटकथा लेखक आगा नासिर थे ।नशाद ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत में मास्टर गुलाम हैदर , निसार बज़्मी , नौशाद से सीखने के लिए उनके सहायक के रूप में उनके साथ काम किया था। रूना लैला को सबसे पहले कराची से पाकिस्तानी फिल्म उद्योग में लाने का श्रेय उन्हें दिया जाता है।
उल्लेखनीय फिल्मे


नगमा (1953) [2]
बारा दारी (1955) [5]
ज़िन्दगी या तूफ़ान (1958) [5]
मैखाना (1964)
फिर सुबह होगी (1966)
हम दोनों (1966)
रिश्ता है प्यार का (1967) [6]
तुम मिले प्यार मिला (1969)
सालगिरा (1969) [7]
चांद सूरज (1970)
सपेरा (1970)
अफशां (1971)
रिम झिम (1971)
बहारो फूल बरसाओ (1972)
एक रात (1972)
अज़मत (1973)
इंसान और गधा (1973)
नया रास्ता (1973)
दीदार (1974)
ज़ीनत (1975)
पालकी (1975)
मिलन (1978)

कुमार गौरव

कुमार गौरव 
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🎂जन्म की तारीख और समय: 11 जुलाई 1956 (आयु 66 वर्ष), लखनऊ
पत्नी: नम्रता दत्त (विवा. 1984)
बच्चे: साची कुमार, सिया कुमार
माता-पिता: राजेंद्र कुमार, शुक्ला कुमार
बहन: डिंपल पटेल, तुलसी चेलाराम
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प्रमुख फिल्में
2002 काँटे एंडी 
1987 दिल तुझको दिया विजय साहनी 
1986 नाम रवि कपूर 
1983 लवर्स विजू 
1982 तेरी कसम टोनी 
1981 लव स्टोरी बंटी 
1984 हम हैं लाजवाब ठाकुर पवन कुमार सिंह
निर्माता के रूप में नाम फिल्म है
कुमार गौरव से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां क्या कुमार गौरव शराब पीते हैं?: हां कुमार गौरव शराब पीते हैं?: हां कुमार गौरव का जन्म लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेता राजेंद्र कुमार और शुक्ला कुमार (राजेंद्र कुमार की पत्नी) के घर हुआ था। उन्हें बचपन से ही अभिनय और यात्रा करने का मौका मिल रहा है। वर्ष 1981 में, उन्होंने फिल्म "लव स्टोरी" के साथ अपने अभिनय की शुरुआत की, जो एक ब्लॉकबस्टर फिल्म थी। वह अपनी शुरुआती फिल्मों के कारण पूरे देश का दिल की तरफ देखने लगीं। साल 1984 में उन्होंने स्टेज एक्टर सुनील दत्त की बेटी और संजय दत्त की बहन नम्रता दत्त से शादी की। 80 के दशक के मध्य में उनके अभिनय से बॉक्स ऑफिस पर दर्शक कुछ खास प्रभावित नहीं कर सके, जिसके बाद उनकी एक के बाद एक फिल्में सामने आईं। वर्ष 1993 में, उनके पिता राजेंद्र कुमार ने अपने बेटे कुमार गौरव के साथ दोस्ती को पुनर्जीवित करने के लिए एक फिल्म "फूल" बनाई। लेकिन दुर्भाग्य से उनकी फिल्म भी फ्लॉप रही। उनकी फिल्म "फूल" की असफलता के बाद उन्होंने अभिनय से ब्रेक ले लिया। साल 1999 में उन्होंने कुछ टेलीविज़न सीरीज़ में भी काम किया। इसी वर्ष उनके पिता राजेंद्र कुमार का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया। वर्ष 2002 में आई फिल्म "कांटे" में उनकी भूमिका काफी सराहया गयी। वर्ष 2004 में उन्होंने अमेरिकी फिल्म "गुयाना 1838" में अभिनय किया। 
 वर्तमान में वह एक टूरिज्म और टूर कंपनी को चला… उन्होंने कुछ टेलीविज़न सीरीज़ में भी काम किया। इसी वर्ष उनके पिता राजेंद्र कुमार का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया। वर्ष 2002 में आई फिल्म "कांटे" में उनकी भूमिका काफी सराहया गयी। वर्ष 2004 में उन्होंने अमेरिकी फिल्म "गुयाना 1838" में अभिनय किया। 
 वर्तमान में वह एक टूरिज्म और टूर कंपनी को चला… उन्होंने कुछ टेलीविज़न सीरीज़ में भी काम किया। इसी वर्ष उनके पिता राजेंद्र कुमार का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया। वर्ष 2002 में आई फिल्म "कांटे" में उनकी भूमिका काफी सराहया गयी। वर्ष 2004 में उन्होंने अमेरिकी फिल्म "गुयाना 1838" में अभिनय किया। 
 वर्तमान में वह एक टूरिज्म और टूर कंपनी को चला रहे है

टुनटुन

उमा देवी खत्री
उर्फ
टुनटुन
*🎂जन्म की तारीख और समय: 11 जुलाई 1923, उत्तर प्रदेश*
*⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 24 नवंबर 2003, अँधेरी*
बच्चे: पूनम खत्री
पति: अख्तर अब्बास काज़ी (विवा. 1947–2003)

Actress Tun Tun: मां-बाप-भाई की हत्या के बाद भी भारत की पहली महिला कॉमेडियन ‘टुन टुन’ ने छुआ आसमान
Actress Tun Tun: भारत की पहली महिला कॉमेडियन टुन टुन को कहा जाता है। (Entertainment News) टुन टुन एक अभिनेत्री और गायिका भी थीं। उन्होंने हिंदी सिनेमा में ढेरों फिल्मों में काम किया। बॉलीवुड (Entertainment News) में उनका पांच दशक का लंबा कॅरियर रहा और हर किसी के दिल पर उन्होंने राज किया। टुन टुन का असली नाम उमा देवी खत्री था। उन्हें यह नाम दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार ने दिया था।

उमा देवी खत्री यानी कि टुन टुन का जन्म 11 जुलाई, 1923 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ था। टुन टुन बॉलीवुड का कभी न भूलने वाला नाम है। क्योंकि जो लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरता है उसे भला कोई कैसे भूल सकता है। (Entertainment News) टुन टुन ने अपनी कॉमेडी से लोगों को खूब हंसाने काम काम किया, लेकिन असल जिंदगी में उन्होंने खूब दुःख-दर्द भी झेले हैं।
टुन टुन जब बहुत छोटी थी तब ही वे अपने माता-पिता को खो चुकी थी। (Entertainment News) छोटी सी उम्र में टुन टुन के माता-पिता की जमीनी विवाद में हत्या कर दी गई थी। छोटी सी टुन टुन अनाथ हो चुकी थीं। इतना ही नहीं इसी विवाद में उनके भाई को भी मार दिया गया था। अपना पूरा परिवार खोकर बुरी तरह से टूट चुकी टुन टुन ने हिम्मत नहीं हारी और आगे चलकर वे हिंदी सिनेमा एवं भारत की पहली कॉमेडियन कहलाईं।

बताया जाता है कि बचपन से टुन टुन गाने की शौकीन थीं। उस दौर में वे रेडियो पर गाने सुनकर अभ्यास करती थीं। टुन टुन जब 23 साल की थीं, तो वे घर छोड़कर मुंबई आ गई। क्योंकि वे मुंबई में नाम कमाना चाहती थीं। मुंबई आकर उनका पहुंचना सीधा संगीतकार नौशाद अली के बंगले पर हुआ। (Entertainment News) नौशाद से टुन टुन काम की जिद करने लगीं। टुन टुन ने तो नौशाद को धमकी तक दे दी कि अगर उन्हें काम नहीं मिला तो वे उनके बंगले से समुद्र में कूदकर जान दे देंगी। नौशाद ने टुन टुन की धमकी के बाद उनका ऑडीशन ले लिया। फिर उन्हें काम भी मिल गया। पहली बार टुन टुन ने वामिक अजरा फिल्म में गाया।
ऐसे बनी गायिका :
उसके बाद उमा देवी काम की तलाश करने लगी। उन्हें कहीं से पता चला कि डायरेक्टर अब्दुल रशीद करदार फि़ल्म दर्द बना रहे हैं. वे उनके स्टूडियो पहुंचकर उनके सामने खड़े हो गई। उन्होंने पहले कभी करदार साहब को नहीं देखा था। बेबाक तो वो बचपन से ही थी, उनसे ही सीधे पूछ बैठी, करदार साहब कहां मिलेंगे? मुझे उनकी फि़ल्म में गाना गाना है।

शायद उनका ये बेबाक अंदाज़ करदार साहब को पसंद आ गया, इसलिए बिना देर किये उन्होंने संगीतकार नौशाद के सहायक गुलाम मोहम्मद को बुलाकर उमा देवी का टेस्ट लेने को कह दिया। उस टेस्ट में उमादेवी ने फिल्म जीनत में नूरजहां द्वारा गाया गीत ‘आँधियां गम की यूं चली’ गाया। हालांकि उमा देवी एक प्रशिक्षित गायिका नहीं थी, लेकिन रेडियो पर गाने सुनकर और उन्हें दोहराकर वे अच्छा गाने लगी थी। बरहलाल, उनका गया गाना सबको पसंद आया और वो 500 रुपये की पगार पर नौकरी पर रख ली गई।जब उमा देवी की मुलाक़ात नौशाद से हुई, तो उनसे भी बेबकीपूर्ण अंदाज़ में उन्होंने कह दिया कि उन्हें अपनी फि़ल्म में गाना गाने का मौका दें, नहीं तो वे उनके घर के सामने समुद्र में डूबकर अपनी जान दे देंगी। नौशाद साहब भी उनकी बेबाकी पर हैरान थे। खैर, उन्होंने उमा देवी को गाने मौका दिया और दर्द फिल्म का गीत अफ़साना लिख रही हूं …उनसे गवाया। यह गीत बहुत हिट हुआ और आज तक लोगों की ज़ेहन में बसा हुआ है। उस फि़ल्म के अन्य गीत आज मची है धूम, ये कौन चला, बेताब है दिल .. भी लोगों को बहुत पसंद आये।

फिर क्या था , उमा देवी की गायिका के रूप में गाड़ी चल पड़ी। कई फि़ल्मी गीतों को उन्होंने अपनी सुरीली आवाज़ से सजाया। 1947 में ही बनी फि़ल्म नाटक में उन्हें गाने का मौका मिला और उन्होंने गीत दिलवाले जल कर मर ही जाना गाया। फिर 1948 की फि़ल्म अनोखी अदा में दो सोलो गीत काहे जिया डोले हो कहा नहीं जाए, दिल को लगा के हमने कुछ भी न पाया और फि़ल्म चांदनी रात में शीर्षक गीत’चांदनी रात है, हाय क्या बात है, में भी उन्होंने अपनी आवाज़ दी। उमादेवी को गाने के मौके मिलते रहे और वो गाती रहीं। उन्होंने कई फि़ल्मों में गाने गए। उनके द्वारा गाये गए गीत लगभग 45 के आस-पास हैं।
↔️गायिका से अभिनेत्री का सफ़र :
बच्चों के जन्म के साथ उनकी पारिवारिक जि़म्मेदारियां बढ़ रही थी। साथ ही लता मंगेशकर , आशा भोंसले जैसी संगीत की विधिवत् शिक्षा प्राप्त गायिकाओं का भी बॉलीवुड फि़ल्म इंडस्ट्रीज में पदार्पण हो चुका था। उमादेवी ने गायन का प्रशिक्षण नहीं लिया था। इसलिए धीरे-धीरे उनका गायन का काम सिमटता गया और एक दिन वह अपना गायन करिअर छोड़कर पूरी तरह अपने परिवार में रम गई। परिवार चलाना मुश्किल हुआ तो उमादेवी ने फिर से फि़ल्मों में काम करने का मन बनाया।

वे अपने गुरू नौशाद साहब से मिली। उमादेवी फिर से फि़ल्मों में गाना चाहती थीं, लेकिन समय आगे निकल चुका था। स्थिति को देखते हुए नौशाद साहब ने उन्हें कहा, तुम अभिनय में हाथ क्यों नहीं आजमाती? उमादेवी ने अपने बेबाक अंदाज़ में उन्होंने कह दिया, मैं एक्टिंग करूंगी, लेकिन दिलीप कुमार के साथ। दिलीप कुमार उस समय के सुपरस्टार थे। इसलिए उमादेवी की बात सुनकर नौशाद साहब हंस पड़े, लेकिन इसे किस्मत ही कहा जाए कि अपने अभिनय करिअर की शुरूआत उमादेवी ने दिलीप कुमार के साथ ही की। फिल्म थी ‘बाबुल’ जिसमें हिरोइन थीं – नर्गिस।
⚰️24 नवंबर 2003 में उन्होंने इस दुनिया से विदा ली, लेकिन आज भी वे हिन्दी फिल्मों की पहली और सबसे सफ़ल महिला कॉमेडियन के रूप में याद की जाती हैं।

जोहरा सहगल

जोहरा सहगल
जन्म की तारीख और समय: 27 अप्रैल 1912, सहारनपुर
मृत्यु की जगह और तारीख: 10 जुलाई 2014, नई दिल्ली
पति: कामेश्वर सहगल (विवा. 1942–1959)
बच्चे: किरण सहगल, पवन सहगल
पोते या नाती: अनुष्का सेगल, तामरा सेगल, रोहन सेगल
भाई: उज़रा बट, इकरामउल्लाह बेगम मुमताज़-उल्लाह ख़ान, ज़्यादा
अभिनेत्री जोहरा सहगल आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। फिल्मों में अपने जबर्दस्त अभिनय से उन्होंने काफी नाम कमाया है।करीब 102 वर्ष का जीवन जीने के बाद एक्ट्रेस ने 10 जूलाई 2014 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दिल का दौरा पड़ने से जोहरा का निधन हो गया। मगर लोग आज भी उनकी बेहतरीन अदाकारी के कायल हैं।27 अप्रैल 1912 को रामपुर रियासत के नवाबी खानदान में जन्मी जोहरा का पूरा नाम साहिबजादी जोहरा मुमताजुल्ला खान बेगम था। एक्ट्रेस की जिंदगी बचपन में संघर्षों भरी रही। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया। उनकी मां चाहती थीं कि जोहरा लाहौर जाकर पढ़ें इसलिए वह अपनी बहन के साथ क्वीन मैरी कॉलेज में दाखिला लेने चली गई। एक्ट्रेस स्कूल की लगातार टॉप करती रहीं।मगर जोहरा के के पिता उनकी शादी करना चाहते थे। यह बात उनकी प्रिंसिपल को यह बात पसंद नहीं आई और उन्होंने लगातार उन्हें तीन बार फेल कर दिया, जिससे वह दसवीं में रहें। जोहरा ने स्कूल के दिनों में नाटकों और डांस में भाग लिया। पढ़ाई में अव्वल रहने वाली जोहरा देश की पहली महिला पायलट बनना चाहती थीं। 
प्रमुख फिल्में

2007 चीनी कम 
2007 साँवरिया 
2005 द मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेज़ 
2004 कौन है जो सपनों में आया? 
2004 वीर-ज़ारा 
2003 साया 
2001 द मिस्टिक मसियूर 
2000 तेरा जादू चल गया 
1999 दिल्लगी 
1999 हम दिल दे चुके सनम
1997 तमन्ना 
1984 द ज्वैल इन द क्राउन
1969 द गुरु 
2002 चलो इश्क लड़ाए

रविवार, 9 जुलाई 2023

कवि कुमार आज़ाद

कवि कुमार आज़ाद को उनकी DeathAnniversary (09 जुलाई 2018) पर भावपूर्वक याद किया
 .🎂जन्म की तारीख और समय: 12 मई 1972, सासाराम
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 9 जुलाई 2018, मुंबई

 कवि कुमार आज़ाद एक अभिनेता थे जिन्हें भारतीय सिटकॉम तारक मेहता का उल्टा चश्मा में हंसराज हाथी के किरदार के लिए जाना जाता था।  उन्हें अभिनय और लेखन में रुचि थी।  पढ़ाई पूरी करने के बाद वह फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने के लिए मुंबई चले गए।  अपने करियर की शुरुआत में, उन्होंने कई लघु फिल्मों में काम किया और कुछ फिल्मों में सहायक भूमिकाएँ निभाईं।  उन्हें फिल्म जोधा अकबर में एक गेहूं विक्रेता के रूप में देखा गया था।  उन्होंने 2001-2003 डीडी राष्ट्रीय टीवी सुपरहीरो शो जूनियर जी में एक मजाकिया पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में अभिनय किया।  उन्हें जुलाई 2008 में शुरू हुए शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा से लोकप्रियता मिली। उन्होंने बिहार के रहने वाले गोकुलधाम सोसाइटी के निवासी डॉ. हंसराज हाथी की भूमिका निभाई।

असद भोपाली

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असद भोपाली 
🎂10 जुलाई 1921 
⚰️0 9 जून 1990

एक भारतीय हिंदी-उर्दू कवि और गीतकार थे।
गुलज़ार और सैबल चटर्जी द्वारा संकलित हिंदी सिनेमा का विश्वकोश, उन्हें "कुछ नामों में से एक के रूप में वर्णित करता है जो हिंदी फिल्म गीतों में उनके योगदान के लिए खड़े हैं"।
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असद भोपाली का जन्म भोपाल में असदुल्लाह खान के रूप में हुआ था। वह अरबी और फ़ारसी भाषाओं के शिक्षक मुंशी अहमद खान की सबसे बड़ी संतान थे।

1949 में, असद भोपाली की नज़र बॉम्बे (अब मुंबई) की फिल्म निर्माता जोड़ी फ़ाज़ली ब्रदर्स पर पड़ी । भारत के विभाजन के बाद , उनकी फिल्म दुनिया के गीतकार आरज़ू लखनवी , नव निर्मित पाकिस्तान में चले गए। इस समय तक फ़िल्म के केवल दो गाने लिखे गये थे। फ़ाज़ली ब्रदर्स नये गीतकारों की तलाश में थे। व्यवसायी सुगम कपाड़िया, जो भोपाल में कुछ सिनेमाघरों के मालिक थे, ने उन्हें बताया कि भोपाल में कई अच्छे कवि हैं, और उन्हें एक मुशायरे में भाग लेने का सुझाव दिया।(कवियों की बैठक) वहां. फ़ाज़ली ब्रदर्स सहमत हो गए और कपाड़िया ने 5 मई 1949 को अपने भोपाल टॉकीज़ में एक मुशायरे का आयोजन किया। असद भोपाली के प्रदर्शन से प्रभावित होकर, निर्माताओं ने उन्हें बॉम्बे में आमंत्रित किया। 28 साल की उम्र में, असद भोपाली ने हिंदी फिल्म उद्योग में गीतकार बनने के लिए 18 मई 1949 को बॉम्बे की यात्रा की ।

असद भोपाली ने फ़ाज़ली ब्रदर्स की दुनिया (1949) के लिए दो गीत लिखे: रोना है तो चुपके-चुपके ( मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया ) और अरमान लुटे, दिल टूट गया (सुरैया द्वारा गाया गया)। अगले वर्ष, उन्होंने कुछ फ़िल्मों के लिए गीत लिखे; इन गानों को लता मंगेशकर और शमशाद बेगम ने गाया था । भोपाली का बड़ा ब्रेक बीआर चोपड़ा की अफसाना (1951) थी, जिसके लिए उन्होंने 5 गाने लिखे।

भोपाली ने कई प्रसिद्ध संगीत निर्देशकों के साथ काम किया। उन्होंने लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की पहली रिलीज़ फिल्म पारसमणि के लिए लोकप्रिय गीत वो जब याद आये, बहुत याद आये लिखा ।  उन्होंने उषा खन्ना द्वारा रचित बड़ी संख्या में फ़िल्मी गीत लिखे ।1949 से 1990 तक उन्होंने सौ से अधिक फिल्मों के लिए लगभग 400 गीत लिखे। हालाँकि, वह मजरूह सुल्तानपुरी , साहिर लुधियानवी , जान निसार अख्तर और राजेंद्र कृष्ण जैसे शीर्ष गीतकारों की तरह सफल नहीं थे।. उन्होंने जिन फ़िल्मों के लिए लिखा उनमें से कई निम्न-स्तरीय फ़िल्में थीं, और अन्य स्थापित गीतकारों के विपरीत, उन्हें उच्च-स्तरीय फ़िल्मों में केवल कुछ गाने ही मिलते थे। भोपाली उन गीतकारों में से एक थे जिन्होंने 1989 की संगीतमय हिट मैंने प्यार किया के लिए गीत लिखे थे । कुछ ही समय बाद, उन्हें गंभीर लकवा मार गया। परिजन उन्हें भोपाल ले गये। 1990 में, उन्हें दिल दीवाना के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार मिला , लेकिन वह पुरस्कार समारोह में शामिल नहीं हो सके।

असद भोपाली की ⚰️मृत्यु 9 जून 1990 को भोपाल में हुई। उन्होंने रंग भूमि के लिए गीत लिखे , जो 1992 में उनकी मृत्यु के बाद रिलीज़ हुई थी। रोशनी, धूप, चांदनी , उनकी कविता का एक संग्रह, 1995 में भोपाल की उर्दू अकादमी द्वारा प्रकाशित किया गया था। 

असद भोपाली ने दो बार शादी की। आयशा से उनकी पहली शादी से उनके दो बेटे (ताज और ताबिश) और छह बेटियाँ थीं। उनकी दूसरी पत्नी से हुए बेटे ग़ालिब असद भोपाली भी फिल्म लेखक और गीतकार बने, जिन्होंने भिंडी बाजार इंक और मुंबई मिरर जैसी फिल्में लिखीं । और असद भोपाली के छोटे भाई क़मर जमाअली भी उर्दू शायर बने।

नमित दास

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नमित दास

भारतीय अभिनेता

🎂जन्मतिथि: 10-जुलाई -1984

व्यवसाय: अभिनेता, टेलीविजन अभिनेता

राष्ट्रीयता: भारत

नमित दास (जन्म 10 जुलाई 1984) एक भारतीय फिल्म, टेलीविजन और थिएटर अभिनेता हैं।
उन्होंने कई टेलीविजन विज्ञापनों में अभिनय किया है।
वह संगीतकारों और गायकों के परिवार से हैं, उनके पिता प्रतिष्ठित ग़ज़ल गायक चंदन दास हैं।
उनके नाना के. थे.
पन्नालाल, जो दिल्ली ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के लिए काम करते थे और एक उत्कृष्ट संगीतकार थे।
उनके एक मामा, जयदेव कुमार एक प्रसिद्ध पंजाबी संगीत निर्देशक हैं और दूसरे, अजय के.
पन्नालाल, एक पंजाबी फिल्म निर्देशक।
नमित एक प्रशिक्षित गायक भी हैं और उन्होंने अपने पिता चंदन दास और भवदीप जयपुरवाले से शास्त्रीय-संगीत की शिक्षा ली, लेकिन लंबे समय तक उन्होंने गायन के बजाय अभिनय को प्राथमिकता दी।
हाल ही में उन्होंने अनुराग शंकर के साथ एक एल्बम जारी किया है, जिसमें पांच ट्रैक हैं। नमित दास ने 15 फरवरी 2015 को अपनी लॉन्गटाइम गर्लफ्रेंड श्रुति व्यास से शादी की।
श्रुति खुद एक थिएटर और फिल्म अभिनेत्री हैं और कई विज्ञापनों में दिखाई दी हैं, जिसमें एक OLX Womanianian विज्ञापन भी शामिल है, जहां वह OLX का चेहरा थीं।
वह अभिनेता सुमीत व्यास की बहन हैं।
नमित और श्रुति ने मुंबई में एक पारंपरिक समारोह में परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में शादी की।
नमित के छोटे भाई अंशुल नौटियाल भी एक भूमिगत संगीत निर्माता हैं जो दिल्ली स्थित हैं।
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नमित दास ने 15 फरवरी 2015 को अपनी लंबे समय से प्रेमिका श्रुति व्यास से शादी की। श्रुति खुद एक थिएटर और फिल्म अभिनेत्री हैं और कई विज्ञापनों में दिखाई दी हैं, जिसमें एक OLX वुमनियन विज्ञापन भी शामिल है, जहां वह OLX का चेहरा थीं। वह अभिनेता सुमीत व्यास की बहन हैं । नमित और श्रुति ने मुंबई में एक पारंपरिक समारोह में परिवार और दोस्तों की मौजूदगी में शादी की। नमित के छोटे भाई अंशुल नौटियाल भी एक भूमिगत संगीत निर्माता हैं जो दिल्ली स्थित हैं।

मनुस्मृति

. ................मनुस्मृति.................... जरा सोचिए, अगर आज भारत का कानून यह तय कर दे कि— "एक आम आदमी चोरी करे तो उसे...