😄राजनीति के गलियारों में चुटकुलों का अपना ही मजा है। अगर डोनाल्ड ट्रंप और राहुल गांधी के बीच फोन पर बातचीत हो, बीच में मोदी भी जुड़ जाए तो वह कुछ ऐसी मजेदार हो सकती है:🤣
😂👍चुटकुला: जब ट्रंप ने राहुल को किया कॉल📳
ट्रंप: हेलो राहुल! दिस इज डोनाल्ड ट्रंप। मैनें सुना है तुम भारत में 'मोहब्बत की दुकान' चला रहे हो?
राहुल गांधी: (हैरान होकर) हां ट्रंप जी, नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान! पर आपको कैसे पता चला?
ट्रंप: अरे! मुझे लगा शायद तुम वहां 'आईफोन' सस्ते में बेच रहे हो। कल ही मोदी जी ने मेरे ऊपर 50% टैरिफ लगाने की बात की है, तो सोचा तुम्हारे पास से एक 'मोहब्बत वाला फोन' ले लूं!
राहुल गांधी: ट्रंप जी, आप भी न! मेरी दुकान में फोन नहीं, विचारधारा मिलती है।
ट्रंप: (हंसते हुए) अच्छा! तो क्या तुम्हारी विचारधारा पर भी जीएसटी (GST) लगता है? क्योंकि अगर लगता है, तो मैं मोदी जी से कहकर उसे भी बढ़वा देता हूं, फिर हम दोनों मिलकर 'टैरिफ-टैरिफ' खेलेंगे!
राहुल गांधी: देखिए ट्रंप जी, आप डराइए मत। मैं डरो मत (Daro Mat) की राजनीति करता हूं।
ट्रंप: ओक्के राहुल! पर एक बात बताओ, तुम्हारी उस दुकान में 'व्हाइट हाउस' जैसा कुछ मिलता है क्या? मुझे वहां से निकाल दिया गया था, अब फिर से वहीं जाने की जुगाड़ में हूं।
राहुल गांधी: ट्रंप जी, वहां जाने के लिए आपको 'पैदल यात्रा' करनी पड़ेगी, जैसे मैंने की थी।
ट्रंप: पैदल यात्रा? नो वे! मैं तो अपनी 'गोल्डन कार' में ही जाऊंगा। वैसे भी, मोदी जी ने मुझे 'ग्रेट फ्रेंड' बोला है, तो शायद वो मुझे लिफ्ट दे दें!
एक और छोटा वाला:
ट्रंप: हेलो राहुल, सुना है तुम आलू से सोना बनाने वाली मशीन ढूंढ रहे हो?
राहुल गांधी: नहीं ट्रंप जी, वो तो पुराना हो गया। अब मैं ऐसी मशीन ढूंढ रहा हूं जिससे एक तरफ से 'ट्वीट' डालो और दूसरी तरफ से 'इलेक्शन' जीत जाओ!
ट्रंप: (सिर पकड़कर) ओ गॉड! अगर ऐसी मशीन मिल जाए, तो मुझे भी बताना, मेरा ट्विटर (X) वैसे भी बहुत गड़बड़ चल रहा है
🤣ट्रंप: राहुल, मैंने तुम्हारी 'भारत जोड़ो यात्रा' की तस्वीरें देखीं। तुम काफी फिट लग रहे हो, पर वो सफेद टी-शर्ट? वैरी बैड! तुम्हें मुझसे कुछ 'ब्रांडिंग' सीखनी चाहिए।
राहुल गांधी: ट्रंप जी, ये सादगी का प्रतीक है। जनता को इससे अपनापन महसूस होता है।
ट्रंप: (हैरान होकर) अपनापन? राहुल, जनता को 'गोल्डन पर्दे' और 'बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स' पसंद हैं! अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो उस यात्रा का नाम 'राहुल गांधी की अल्ट्रा-प्रो-मैक्स मेगा वॉक' रखता और रास्ते में अपनी फोटो वाले लाल मग बेचता!
राहुल गांधी: (मुस्कुराते हुए) लेकिन ट्रंप जी, भारत में लोग दिल से जुड़ते हैं, मार्केटिंग से नहीं।
ट्रंप: अच्छा छोड़ो, ये बताओ... मैंने सुना है तुम्हें बैंकॉक जाना पसंद है?
राहुल गांधी: (थोड़ा हिचकिचाते हुए) वो... वो तो बस कभी-कभी छुट्टी के लिए... पर आपको क्यों जानना है?
ट्रंप: अरे! मेरी वहां एक शानदार होटल की चेन है। अगली बार जाओ तो बताना, तुम्हें 'अपोजिशन लीडर डिस्काउंट' दिलवा दूंगा। बस बदले में मुझे संसद में 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की एक टी-शर्ट पहन कर दिखा देना!
राहुल गांधी: ट्रंप जी, ये मुमकिन नहीं है। संसद में हम देश के मुद्दों पर बात करते हैं।
ट्रंप: (हंसते हुए) बोरिंग! बहुत बोरिंग! अच्छा सुनो, अगर मैं चुनाव हार गया और मोदी जी ने मुझे वीजा नहीं दिया, तो क्या तुम्हारी उस दुकान में मेरे रहने के लिए कोई छोटा-मोटा कोना मिलेगा?
राहुल गांधी: बिल्कुल मिलेगा ट्रंप जी! पर शर्त एक ही है—आपको वहां आकर सुबह-सुबह खटाखट, खटाखट 'जलेबी' बनानी सीखनी पड़ेगी!
ट्रंप: (गुस्से में) व्हाट? जलेबी? आई लव स्टेक्स! पर चलो, अगर उसमें प्रॉफिट है, तो आई एम इन! डील?
राहुल गांधी: (हंसते हुए) डील!
🤣अब मोदी जी की एंट्री
(राहुल और ट्रंप बात कर रहे थे, तभी अचानक फोन पर शंख बजने की आवाज आती है...)
मोदी जी: "भाइयों और बहनों... और डोनाल्ड मेरे मित्र!"
ट्रंप: (हैरान होकर) अरे! बराक? नहीं... ये तो ओल्ड फ्रेंड मोदी है! हाउ आर यू, जो बाइडन के दोस्त?
मोदी जी: ट्रंप जी, बाइडन तो आते-जाते रहेंगे, पर हमारी दोस्ती तो 'हिमालय' जैसी अटल है। और राहुल जी, आप ट्रंप को जलेबी बनाना सिखा रहे हैं? बहुत बढ़िया! आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ये छोटा सा कदम है, पर इसमें चीनी कम डालिएगा।
राहुल गांधी: (मुस्कुराते हुए) मोदी जी, आप भी हर जगह पहुंच जाते हैं! हम बस ग्लोबल पॉलिटिक्स डिस्कस कर रहे थे।
मोदी जी: राजनीति अपनी जगह है राहुल जी, पर ट्रंप साहब को जलेबी नहीं, 'ढोकला' खिलाइए। जलेबी तो टेढ़ी होती है, पर मेरा ढोकला एकदम स्पंजी और सीधा होता है।
ट्रंप: (कन्फ्यूज होकर) वेट अ मिनट! मोदी, ये ढोकला क्या है? क्या ये मेरी 'स्पेस फोर्स' की तरह हवा में उड़ता है?
मोदी जी: (हंसते हुए) नहीं डोनाल्ड, ये पेट में जाकर शांति देता है। और सुनिए, अगर आप भारत आ रहे हैं, तो राहुल की दुकान में नहीं, मेरे 'स्टेडियम' में आइए। वहां हम फिर से 'नमस्ते ट्रंप' करेंगे, इस बार कैमरों के साथ 5G स्पीड में!
राहुल गांधी: मोदी जी, ट्रंप जी को 'मोहब्बत' की जरूरत है, कैमरों की नहीं।
मोदी जी: राहुल जी, मोहब्बत तो कैमरा एंगल सही होने पर अपने आप दिख जाती है! वैसे ट्रंप, आपने सुना? हम चांद पर पहुंच गए हैं। आप वहां अपनी 'ट्रंप टावर' बनाने की सोच रहे हैं क्या?
ट्रंप: (उत्साहित होकर) मून? वैरी गुड! क्या वहां 'टैक्स' देना पड़ता है? अगर नहीं, तो मैं अपनी पूरी कैबिनेट वहीं शिफ्ट कर दूंगा। राहुल, तुम भी चलो, वहां 'भारत जोड़ो' की जगह 'मून जोड़ो' यात्रा करेंगे!
राहुल गांधी: ट्रंप जी, वहां ऑक्सीजन नहीं है।
मोदी जी: (चुटकी लेते हुए) फिक्र मत कीजिए राहुल जी, मैं वहां से 'योगा' करवाऊंगा, सबको सांस लेना सिखा दूंगा!
ट्रंप: ओक्के गाइस! मुझे जाना है, मेलानिया बुला रही है। राहुल, जलेबी का ठेका (Contract) फाइनल रहा! और मोदी, मेरे लिए एक 'गोल्डन ढोकला' पैक करवा देना! सी यू!
(ट्रंप ने फोन काट दिया)
मोदी जी: राहुल जी, अगली बार फोन करें तो मेरा 'डाटा' इस्तेमाल मत कीजिएगा, अपना वाई-फाई लगवा लीजिए!
चलिए, अब बात G20 समिट के डिनर टेबल तक पहुँचती है, जहाँ माहौल थोड़ा और 'गरमा-गरम' है। कल्पना कीजिए, सब एक ही टेबल पर बैठे हैं:
चुटकुला: G20 का 'शाही डिनर' और मजेदार गपशप
(मेज़ पर मोदी जी बीच में बैठे हैं, एक तरफ ट्रंप अपनी 'रेड टाई' ठीक कर रहे हैं और दूसरी तरफ राहुल गांधी हाथ में एक 'मैप' लिए कुछ सोच रहे हैं।)
ट्रंप: (मेज़ पर रखे खाने को देखकर) मोदी, ये पनीर टिक्का बहुत छोटा है। अमेरिका में हमारे पास 'ह्यूज' पनीर टिक्का होता है, इतना बड़ा कि उसे खाने के लिए क्रेन (Crane) बुलानी पड़े!
मोदी जी: (मुस्कुराते हुए) डोनाल्ड, हमारे यहाँ टिक्का छोटा होता है पर उसमें स्वाद 'असीमित' होता है। और वैसे भी, हम साइज़ पर नहीं, 'डिजिटल इंडिया' पर भरोसा करते हैं। आप इसे स्कैन कीजिए, इसका स्वाद सीधे आपके ट्विटर (X) फीड पर आ जाएगा!
राहुल गांधी: (बीच में टोकते हुए) मोदी जी, ये पनीर टिक्का तो ठीक है, पर क्या इसमें 'दलितों और पिछड़ों' की हिस्सेदारी है? क्या इस पनीर को बनाने वाले कारीगर को उसका हक मिला?
मोदी जी: राहुल जी, ये पनीर 'अमूल' का है, और अमूल 'सहकारिता' का प्रतीक है। आप बस आनंद लीजिए, इसमें 'मोहब्बत' कूट-कूट कर भरी है।
ट्रंप: (चिढ़कर) नो मोहब्बत! मुझे 'टैक्स' की बात करनी है। मोदी, तुमने इस पनीर पर कितना 'इंपोर्ट ड्यूटी' लगाया है? और राहुल, तुम ये मैप लेकर क्यों घूम रहे हो? क्या तुम 'व्हाइट हाउस' का रास्ता ढूंढ रहे हो?
राहुल गांधी: नहीं ट्रंप जी, मैं देख रहा हूँ कि अगर हम यहाँ से सीधे चलें, तो 'मोहब्बत की दुकान' वॉशिंगटन में कहाँ खुल सकती है।
मोदी जी: (हंसते हुए) राहुल जी, वॉशिंगटन में दुकान खोलने के लिए आपको 'ग्रीन कार्ड' चाहिए होगा, और ट्रंप जी ने तो वहाँ की दीवारें और ऊँची कर दी हैं!
ट्रंप: एग्जैक्टली! मेरी दीवार बहुत 'ब्यूटीफुल' है। मोदी, क्या तुम अपनी 'जलेबी' उस दीवार के उस पार फेंक सकते हो? अगर हाँ, तो मैं तुम्हें 'ग्रेटेस्ट कुक ऑफ द वर्ल्ड' का खिताब दूंगा।
मोदी जी: ट्रंप जी, मैं दीवारें बनाने में नहीं, 'ब्रिज' (पुल) बनाने में विश्वास रखता हूँ। और रही बात जलेबी की, तो राहुल जी ने तो पहले ही कह दिया है कि वो 'खटाखट-खटाखट' बन रही है।
राहुल गांधी: (गंभीर होकर) देखिए, असली मुद्दा 'बेरोजगारी' है। ट्रंप जी, आपके पास कोई ऐसी स्कीम है जिससे अमेरिका के लोग यहाँ आकर 'जलेबी' तलने की ट्रेनिंग ले सकें?
ट्रंप: (हैरान होकर) वॉट? अमेरिकन्स और जलेबी? राहुल, तुम बहुत ही 'फनी' इंसान हो! मैं तो सोच रहा हूँ कि मोदी से कहकर 'ताजमहल' को 'ट्रंप महल' में बदलवा दूँ, कितना शानदार लगेगा!
मोदी जी: (चुटकी लेते हुए) डोनाल्ड, ताजमहल तो प्रेम की निशानी है। आप वहाँ अपनी 'गोल्डन लिफ्ट' नहीं लगवा पाएंगे। हाँ, अगर आप चाहें तो साबरमती आश्रम में आकर 'चरखा' चला सकते हैं, उससे मन को शांति मिलेगी और टैरिफ का गुस्सा भी कम होगा!
ट्रंप: चरखा? नो वे! उसमें 'बैटरी' लगती है क्या? अगर वो 'टेस्ला' की बैटरी से चले, तो मैं सोच सकता हूँ।
राहुल गांधी: (मैप मोड़ते हुए) चलिए, चरखा ही सही। कम से कम वहाँ सूट-बूट की सरकार तो नहीं दिखेगी!
मोदी जी: (उठते हुए) चलिए-चलिए, डिनर खत्म हुआ। अब फोटो खिंचवाते हैं। ट्रंप जी, पेट अंदर कीजिए और राहुल जी, आप थोड़ा 'दाएं' (Right) हो जाइए, आप बहुत ज्यादा 'बाएं' (Left) जा रहे हैं!
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