बुधवार, 27 सितंबर 2023

पी जयराज

पूरा नाम पैदी जयराज
प्रसिद्ध नाम पी जयराज
🎂जन्म 28 सितम्बर, 1909
जन्म भूमि करीमनगर, आंध्र प्रदेश
⚰️मृत्यु 11 अगस्त, 2000
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
संतान पाँच (दो पुत्र दिलीप, जयतिलक और तीन पुत्रियाँ जयश्री, दीपा एवं गीता)
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनेता, निर्माता-निर्देशक
मुख्य फ़िल्में 'हमारी बात', 'नई कहानी', 'शिकारी', 'रायफल गर्ल', 'भाभी' आदि।
शिक्षा स्नातक
विद्यालय वुड नेशनल कॉलेज, हैदराबाद
पुरस्कार-उपाधि दादा साहब फाल्के पुरस्कार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाई अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाईं।
पी. जयराज (पूरा नाम- 'पैदी जयराज', अंग्रेज़ी: Paidi Jairaj, जन्म: 28 सितम्बर, 1909; मृत्यु: 11 अगस्त, 2000) हिन्दी फ़िल्म जगत् के एकमात्र ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने मूक फ़िल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर तक की अनेक फ़िल्मों में काम किया। हिन्दी सिनेमा के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। नौशाद जैसे महान् संगीतकार को फ़िल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी पी. जयराज को ही जाता है। उनकी ज़िंदगी हिन्दी सिने जगत् के इतिहास के साथ-साथ चलती हुई, एक सिनेमा की कहानी जैसी थी।

जीवन परिचय

जयराज का जन्म 28 सितम्बर, 1909 को निजाम स्टेट के करीमनगर ज़िले में हुआ था। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। हैदराबाद में पले बड़े हुए जिससे उर्दू भाषा पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा हैदराबाद के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढ़ाया गया जहां से उन्होंने संस्कृत की शिक्षा ली। फिर हैदराबाद के 'निजाम हाईस्कूल' में उर्दू पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए लंदन भेजना चाह्ते थे। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी इंग्लैंड जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, किस्मत आजमाने के लिए सन् 1929 में मुम्बई आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 वर्ष थी।

समुन्दर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम "रंग्या" था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे। कई जगह काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएँ भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर उनके आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फ़िल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था।

बतौर सहायक निर्देशक
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास उन्हें 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी सीखा। दिलीप कुमार की पहली फ़िल्म "प्रतिमा" का निर्देशन जयराज ने किया था।

बतौर निर्देशक
पी. जयराज ने फ़िल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री देविका रानी थीं।

अभिनय की शुरूआत
फ़िल्मों में बतौर अभिनेता वर्ष 1929 में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फ़िल्म 'जगमगाती जवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और जयराज सहायक चूंकि माधव काले को घुड़सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा जयराज ने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे। उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपये प्रतिमाह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम मुम्बई में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाड़ी चल निकली। 1930 में "रसीली रानी" फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपये से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हिरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दुस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा' ही हिन्दी फ़िल्म "रसीली रानी" के रूप में बनी थी) बतौर नायक उनकी पहली फ़िल्म 'रसीली रानी' 1929 में प्रदर्शित हुई माधुरी उनकी नायिका थीं। 'नवजीवन फ़िल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म बहुत सफल रही थी। मूक फ़िल्मों के दौर में वह फ़िल्म कई सिनेमाघरों में पांच सप्ताह चली थी जो उन दिनों बहुत बड़ी बात थी। मूक फ़िल्मों में तो जयराज के नाम की धूम मची हूई थी।

बोलती फ़िल्मों का नया दौर
1931 में जब 'आलम आरा' से बोलती फ़िल्मों का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने भी बोलती फ़िल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। उनकी पहली बोलती फ़िल्म थी 'शिकारी'। 1932 में प्रदर्शित इस फ़िल्म में जयराज ने एक बौद्ध भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और सांप, बाघ, शेर जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के दृश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ संगीत शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर 1935 से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब सिनेमा संगीतमय हो गया। हमजोली फ़िल्म में नूरजहाँ और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। जयराज की लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फ़िल्म 'भाभी' के लिए उन्हें बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फ़िल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फ़िल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। मुम्बई में उस फ़िल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो कलकत्ता में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के सिनेमा थे। जयराज ने मराठी, गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाईं। बतौर नायक उनकी अंतिम फ़िल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो वर्ष 1965 में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद उन्होंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएँ निभानी शुरु कर दीं। महात्मा गांधी की हत्या पर आधारित अमरीकी फ़िल्म- 'नाईन आवर्स टू रामा', मार्क रोब्सन निर्मित में जी. डी. बिड़ला की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान में प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फ़िल्म में आई. एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फ़िल्में हैं। इन्डो-रशियन फ़िल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फ़िल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।

बतौर निर्माता
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें नर्गिस, भारत भूषण और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था सागर। उनका बहुत नाम था सिने जगत में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। 1951 में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की "इनोच आर्डेन" पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी।

परिवार
1939 में अपने घनिष्ठ मित्र पृथ्वीराज कपूर के कहने पर उन्होंने सावित्री नाम की युवती से विवाह कर लिया। तब उन्होंने ही सावित्री के कन्यादान की रस्म निभाई थी। 1942 में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनकी 5 संतान थीं, दो पुत्र, दिलीप राज व जयतिलक और तीन पुत्रियाँ, जयश्री, दीपा एवं गीता। सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म "शहर और सपना" को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। जयराज का दूसरा पुत्र अमेरिका में रहता है। दूसरी बेटी थीं जयश्री, उनका विवाह राजकपूर की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। तीसरी बेटी थीं दीपा, फिर थी गीता सबसे छोटी।

मुख्य फ़िल्में
सन् 1938 - रायफल गर्ल
सन् 1939 - भाभी
सन् 1942 - खिलौना
सन् 1942 - मेरा गाँव
सन् 1943 - नई कहानी
सन् 1954 - बादबान
सन् 1954 - मुन्ना
सन् 1956 - अमरसिंह राठौड़
सन् 1956 - हातिमताई
सन् 1957 - परदेसी
सन् 1959 - चार दिल चार राहें
सन् 1962 - रजिया सुल्तान
पुरस्कार
50 के दशक में पी. जयराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। 1982 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी मिला।

निधन
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, मुम्बई में ⚰️11 अगस्त सन् 2000 को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फ़िल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। 11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फ़िल्मों से हमारा मनोरंजन करने वाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली

गुरुवार, 21 सितंबर 2023

अजरा

#अज़रा
#जन्म21सितम्बरमुम्बई
अभिभावक पिता- नानूभाई वक़ील, माता- सरोजिनी।
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'मदर इण्डिया', 'जंगली', 'गंगा यमुना', 'भारत की बेटी’, ‘संसार नैया’, ‘दीपक महल’, ‘संस्कार’, ‘ताजमहल’, ‘नया ज़माना’ और ‘सर्कस किंग’ आदि।
प्रसिद्धि भारतीय अभिनेत्री

 1958 में अज़रा जी की फ़िल्म 'टैक्सी 555' प्रदर्शित हुई। प्रदीप कुमार और शकीला की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फ़िल्म में वह सहनायिका थीं। 1959 में बनी फ़िल्म ‘घर घर की बात’ में वे नायिका बनीं। इस फ़िल्म का निर्माण उनके मौसा और सलीम शाह के पिता रमणीकलाल शाह ने किया था।
दिल्ली के रहने वाले शेख इमामुद्दीन और उनकी पत्नी मुनव्वर जहां के सात बच्चों में से दो बेटियां रोशनजहां उर्फ़ रानी और उनसे छोटी इशरतजहां 1930 और 1940 के दशक की फ़ैंटेसी फ़िल्मों की स्टार अभिनेत्रियां थीं। रोशनजहां का स्क्रीननेम ‘सरोजिनी’ था। साल 1934 में प्रदर्शित हुई फ़िल्म ‘दीवानी’ से फ़िल्मों में कदम रखने वाली सरोजिनी ने क़रीब 12 साल के कॅरियर में ‘भारत की बेटी’, सुंदरी’, ‘मधु बंसरी’, ‘संसार नैया’, ‘सन ऑफ़ अलादीन’, ‘दीपक महल’, ‘हातिमताई की बेटी’, ‘जादुई कंगन’, ‘संस्कार’, ‘जादुई बंधन’, ‘ताजमहल’, ‘फ़रमान’, ‘नया ज़माना’, ‘श्रीकृष्णार्जुन युद्ध’ और ‘सर्कस किंग’ जैसी फ़िल्मों में काम किया। उसी दौरान उन्होंने फैंटेसी फ़िल्मों के लिए मशहूर निर्माता-निर्देशक नानूभाई वक़ील के साथ गुप्त विवाह भी कर लिया था। अज़रा इन्हीं सरोजिनी और नानूभाई वक़ील की बेटी हैं। अज़रा जी के पिता नानूभाई वकील का निधन 19 दिसम्बर 1980 को हुआ और उनकी मां सरोजिनी 1993 में गुज़रीं।

उधर ‘इंदुरानी’ के नाम से 1936 में बनी मराठी फ़िल्म ‘सावित्री’ से कॅरियर शुरू करने वाली इशरतजहां ने अगले 12 सालों में ‘बुलडॉग’, ‘मेरी भूल’, ‘मि.एक्स’, ‘सुनहरा बाल’, ‘भेदी कुमार’, ‘चश्मावाली’, ‘मिडनाईट मेल’, ‘स्वास्तिक’, ‘हातिमताई की बेटी’, ‘जादुई कंगन’, ‘थीफ़ ऑफ़ तातार’, ‘अलादीन लैला’, ‘बुलबुले बग़दाद’, ‘ताजमहल’ और ‘ज़ेवर’ जैसी कई फ़िल्में कीं। इंदुरानी का विवाह निर्माता-निर्देशक रमणीकलाल शाह से हुआ था। सलीम शाह इन्हीं इंदुरानी के बेटे हैं।
अजरा छठवीं तक की पढ़ाई  सांताक्रुज़ के सेंट टेरेसा कॉन्वेन्ट हाईस्कूल से की और फिर साल 1950 में मैं अपनी नानी के पास दिल्ली चली गयी। क़रीब 5 साल दिल्ली में रहकर उन्होंने पहाड़ी भोजला-चितलीक़बर-जामा मस्जिद के सेंट फ़्रांसिस स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी की और फिर 1954-1955 में वापस मुम्बई लौट आयी।"

बुधवार, 20 सितंबर 2023

रीमा सेन

रिमी सेन
स्क्रीन नाम रिमी सेन
के रूप में जन्मे शुभमित्र सेन
पेशा अभिनेत्री

🎂जन्म21सितम्बर1981
जन्म (शहर) कलकत्ता, पश्चिम बंगाल

राष्ट्रीयता भारतीय
पिता राजा सेन
माँ पापिया सेन
उल्लेखनीय कार्य
पारोमिटर एक दिन (2000),
फिर हेरा फेरी (2006),
गोलमाल फन अनलिमिटेड (2006),
धूम 2 (2006),
जॉनी गद्दार (2007)
रिमी की पहली हिन्दी फिल्म हंगामा थी। उसके बाद वो बाग़बान में छोटे से रोल में दिखीं। उनकी कुछ सफल फिल्में हैं:- धूम, दीवाने हुए पागल, फिर हेरा फेरी और गोलमाल। बिग बॉस 9 में वो हिस्सा ले चुकी है। 2017 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली।
📽️
2008 दे ताली 
2007 जॉनी गद्दार 
2007 हैटट्रिक
2006 फिर हेरा फेरी 
2006 धूम 2 
2006 गोलमाल 
2005 क्योंकि माया 
2005 गरम मसाला 
2005 दीवाने हुए पागल 
2004 धूम स्वीटी 
2003 हंगामा 
2003 बाघबान

करीना कपूर अभिनेत्री

#करीनाकपूर
के रूप में जन्मे करीना कपूर
अभिनेत्री

🎂जन्म_ 21_सितम्बर_1980
 बम्बई, महाराष्ट्र
राष्ट्रीयता भारतीय
जीवनसाथी सैफ अली खान 2012
पिता रणधीर कपूर
माँ बबीता कपूर
📽️
(हिन्दी फ़िल्में) रिफ्यूजी (2000),
कभी खुशी कभी गम (2001),
जब वी मेट (2007),
कुर्बान (2009),
उड़ता पंजाब (2016),
3 इडियट्स (2009),
बजरंगी भाईजान (2015)
कपूर फ़िल्म परिवार में जन्मी करीना ने अभिनय की शुरुआत साल 2000 में रिलीज़ हुई फ़िल्म रिफ्युज़ी के साथ की। इस फ़िल्म में अपने अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू यानि उस साल अपने अभिनय जीवन की शुरुआत करने वाली अभिनेत्रियों में से सर्वश्रेष्ठ अभिनत्री का पुरस्कार भी मिला। साल 2001में, अपनी दूसरी फ़िल्म मुझे कुछ कहना है रिलीज़ होने के साथ ही, कपूर को अपनी पहली व्यावसायिक सफलता मिली। इसके बाद इसी साल आई करन जौहर की नाटक से भरपूर फ़िल्म कभी खुशी कभी ग़म में भी करीना नज़र आयीं। ये फ़िल्म उस साल विदेशों में सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली भारतीय फ़िल्म बन गई और साथ ही करीना के लिए ये तब तक की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता थी।
करीना कपूर ने अन्य दूसरी प्रतिबद्धताओं के लिए भी समय निकाला, वो मानवतावादी से जुड़े कार्यक्रमों से लेकर स्टेज शो में भी भाग लेती रहीं साल 2002 में,हार्टथ्रोब्स कार्यक्रम में कपूर ने अपना पहला वर्ल्ड टूर किया, उनके साथ हृथिक रोशन, करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor), अर्जुन रामपाल (Arjun Rampal) और आफताब शिवदासानी (Aftab Shivdasani) भी थे इस शो का प्रदर्शन पूरे अमेरिका और कनाडा में किया और ये समारोह सफल रहा।

📽️अन्य फिल्मे
रिफ्यूजी 2000
मुझे कुछ कहना है 2001
यादें 2001
अजनबी 2001
अशोका 2001
कभी खुशी कभी ग़म 2001
मुझसे दोस्ती करोगे 2002
जीना सिर्फ मेरे लिये 2002
Talaash: The Hunt Begins... 2003
खुशी 2003
मैं प्रेम की दीवानी हूँ 2003
एलओसी कारगिल 2003
चमेली 2004
युवा 2004
देव2004
फ़िदा 2004
ऐतराज़ 2004
हलचल 2004
बेवफ़ा 2005
क्योंकि 2005
दोस्ती: फ्रेंड्स फॉरएवर 2005
36 चाइना टाऊन 2006
चुप चुप के 2006
ओमकारा 2006
डॉन 2006 
क्या लव स्टोरी है 2006
क्या लव स्टोरी है 2007
जब वी मेट 2006
हल्ला बोल 2008
टशन 2008
रोडसाइड रोमियो 2008
गोलमाल रिटर्नस 2008
लक् बाई चांस 2009
बिल्लू 2009
कमबख्त इश्क 2009
मैं और मिसेस खन्ना 2009
थ्री ईडियट्स 2009
मिलेंगे मिलेंगे ([:en:Milenge Milenge Milenge Milenge]) 2010
बाँडीगाड 2011
वीरे दी वेडिंग 208
लाल सिंह चड्ढा 2020

गुलशन ग्रोवर

गुलशन ग्रोवर हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। व्यक्तिवत जीवन गुलशन ग्रोवर का जन्म 

🎂21सितंबर 1955 में नई दिल्ली 

पिता कर्ण सिंह ग्रोवर व माता रामराखी सिंह ग्रोवर थी । इनके पत्नी कशिश ग्रोवर व बेटे संजय ग्रोवर है
पत्नी: कशिश ग्रोवर (विवा. 2001–2002), फिलोमिना ग्रोवर (विवा. 1998–2001)
बच्चे: संजय ग्रोवर
भाई: रीता ग्रोवर, रमेश ग्रोवर, सोनू ग्रोवर
माता-पिता: बिशम्बर नाथ ग्रोवर, रामराखी ग्रोवर
📽️
प्रमुख फिल्में
2007 मैरीगोल्ड 
2007 फूल एन फाइनल 
2006 गैंगस्टर 
2006 मेरे जीवन साथी 
2006 टॉम, डिक एंड हेरी 
2006 एन्थनी कौन है? 
2006 तथास्तु 
2006 शादी से पहले 
2006 फैमिली: खून के रिश्ते 
2005 द हैंगमैन 
2005 पद्मश्री लालू प्रसाद
2005 दस 
2004 मेरी बीवी का जवाब नहीं 
2004 सुनो ससुर जी 
2004 दोबारा 
2004 टार्ज़न द वण्डर कार 
2004 एक से बढ़कर एक 
2003 फंटूश 
2003 जिस्म 
2003 जोड़ी क्या बनाई वाह वाह रामजी 
2003 बूम सलीम 
2003 खंजर 
2003 बनाना ब्रदर्स 
2003 पाप  
2003 चुरा लिया है तुमने
2003 एक और एक ग्यारह 
2003 तीन दीवारें 
2003 धुंध इंस्पेक्टर
2003 परवाना 
2003 खेल 
2003 तलाश 
2002 लीला जय 
2002 हथियार 
2002 ये मोहब्बत है 
2002 दिल विल प्यार व्यार 
2001 ये ज़िन्दगी का सफर 
2001 बस इतना सा ख्वाब है
2001 लज्जा 
2001 मोक्ष 
2000 गैंग 
2000 आगाज़ 
2000 शिकार 
2000 दीवाने 
2000 खिलाड़ी 420 
2000 बाग़ी 
2000 हेरा फेरी 
2000 शिकारी 
1999 आया तूफान 
1999 सौतेला 
1999 कारतूस 
1999 इन्टरनेशनल खिलाड़ी 
1999 हिन्दुस्तान की कसम
1999 हम तुम पे मरते हैं 
1998 यमराज 
1998 किला 
1998 बारूद 
1998 दो हज़ार एक 
1998 हफ़्ता वसूली 
1998 अंगारे 
1998 सर उठा के जियो 
1998 ज़ुल्म-ओ-सितम 
1998 डुप्लीकेट 
1998 अर्थ 
1997 घूँघट 
1997 शेर-ए-हिन्दुस्तान 
1997 शपथ राजेश्वर 
1997 राजा की आयेगी बारात 
1997 गैम्बलर 
1997 कौन सच्चा कौन झूठा 
1997 ज़मीर रंजीत
1997 येस बॉस 
1997 भाई भाई 
1997 कहर 
1997 सनम 
1997 मिस्टर एंड मिसेज़
1996 दिलजले 
1996 मुकदमा 
1996 हिम्मत रंजीत 
1996 ज़ोरदार 
1996 नमक 
1995 रंगीला 
1995 अहंकार 
1995 मैदान-ए-जंग 
1995 राम जाने 
1995 कर्तव्य 
1995 क्रिमिनल 
1995 मिलन 
1995 रघुवीर 
1995 इम्तिहान 
1995 नाजायज़ 
1995 सबसे बड़ा खिलाड़ी 
1994 पहला पहला प्यार 
1994 आ गले लग जा 
1994 दिलवाले 
1994 कानून राजा 
1994 ज़माने से क्या डरना 
1994 विजयपथ 
1994 ईना मीना डीका
1994 राजा बाबू 
1994 अमानत 
1994 इन्साफ अपने लहू से 
1994 दुलारा 
1994 बेताज बादशाह 
1994 यार गद्दार 
1994 नाराज़ 
1994 क्रान्ति क्षेत्र 
1994 आतिश 
1994 आग 
1994 बेटा हो तो ऐसा 
1994 घर की इज्जत 
1994 मोहरा 
1994 चीता 
1994 आओ प्यार करें 
1993 चन्द्रमुखी 
1993 तड़ीपार 
1993 फूल और अंगार 
1993 बड़ी बहन 
1993 परवाने 
1993 हस्ती 
1993 शक्तिमान 
1993 अनाड़ी  
1993 सर 
1993 आँखें 
1992 दिल ही तो है 
1992 शोला और शबनम
1992 नसीबवाला विनोद 
1992 दुश्मन ज़माना 
1992 त्यागी 
1992 माँ 
1992 पुलिस ऑफिसर 
1992 साहेबज़ादे 
1992 महबूब मेरे महबूब 
1992 जिगर 
1992 विरोधी 
1992 विश्वात्मा 
1992 अधर्म 
1991 सपनों का मन्दिर 
1991 नामचीन 
1991 जिगरवाला 
1991 पत्थर 
1991 भाभी 
1991 बंजारन
1991 कर्ज़ चुकाना है 
1991 स्वर्ग यहाँ नर्क यहाँ 
1991 शिकारी 
1991 कुर्बान 
1991 रणभूमि 
1991 त्रिनेत्र 
1991 दो मतवाले 
1991 सौदागर 
1990 बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी 
1990 अपमान की आग 
1990 महासंग्राम 
1990 तकदीर का तमाशा 
1990 रोटी की कीमत 
1990 नया खून 
1990 काली गंगा 
1990 मेरा पति सिर्फ मेरा है 
1990 दूध का कर्ज़
1990 प्यार के नाम कुर्बान 
1989 लव लव लव 
1989 निगाहें 
1989 जंगबाज़ 
1989 मिट्टी और सोना 
1989 जैसी करनी वैसी भरनी 
1989 सच्चे का बोलबाला 
1989 दो कैदी 
1989 राम लखन 
1989 हिसाब खून का 
1989 मुज़रिम 
1989 बड़े घर की बेटी 
1989 नाइंसाफी 
1989 कानून अपना अपना 
1989 ताकतवर 
1989 लड़ाई 
1989 ईश्वर 
1988 शिव शक्ति 
1988 कसम 
1988 वक्त की आवाज़ 
1988 हलाल की कमाई 
1988 आखिरी अदालत 
1988 दरिया दिल 
1988 गुनाहों का फ़ैसला 
1988 वीराना 
1988 मैं तेरे लिये 
1988 विजय 
1987 मेरा लहू 
1987 इनाम दस हज़ार 
1987 हवालात 
1987 सड़क छाप 
1987 सिंदूर 
1987 हिफ़ाज़त 
1987 प्यार के काबिल 
1987 आग ही आग 
1986 सिंहासन 
1986 मेरा हक 
1986 दिलवाला 
1986 आशियाना 
1986 जीवा 
1986 अल्ला रक्ख़ा 
1986 घर संसार 
1986 तीसरा किनारा 
1986 जाल बलराम 
1986 इंसाफ़ की आवाज़ 
1985 महागुरु 
1985 शिवा का इन्साफ 
1985 पैसा ये पैसा 
1985 मेरा जवाब 
1985 जान की बाज़ी 
1985 थ्री डी 
1984 अंदर बाहर 
1984 मशाल 
1984 सोनी महिवाल
1984 इंसाफ कौन करेगा 
1984 यह देश 
1983 सदमा 
1983 अवतार चंदन किशन 
1982 अर्थ  
1982 तहलका 
1981 सनसनी कबीले का पुरुष 
1980 हम पाँच

अनूप कुमार

अभिनेता अनूप कुमार की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धाजंलि

कल्याण कुमार गांगुली उर्फ़ अनूप कुमार का
🎂जन्म  24 मार्च 1927 में हुआ था
⚰️20 सितंबर 1997
अनूप कुमार ने लगभग 75 फिल्मों में अभिनय किया था

अनूप कुमार का जन्म खंडवा, मध्य प्रांत और बरार (अब मध्य प्रदेश) में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था।  उनके पिता कुंजलाल गांगुली (गंगोपाध्याय) एक वकील थे और उनकी माँ गौरी देवी एक अमीर परिवार से सम्बन्ध रखती थीं।  अनूप कुमार चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर के थे, अन्य तीन अशोक कुमार (सबसे बड़े), सती देवी और किशोर कुमार (सबसे छोटे) थे।

अनूप कुमार को फिल्म चलती का नाम गाड़ी में उनकी भूमिका के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

20 सितंबर 1997 में उनका निधन हो गया
#24march
#20sep

शकीला

indo-canadian mudar:
प्रसिद्ध अभिनेत्री शकीला की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

शकीला एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से दक्षिण भारत के सिनेमा में अभिनय किया है। शकीला ने 18 साल की उम्र में एक सहायक अभिनेत्री के रूप में फ़िल्म प्लेगर्स से शुरुआत की।

🎂जन्म01जनवरी1935अफ़ग़ानिस्तान
⚰️मृत्यु:20सितंबर2017मुम्बई
पति: वाई॰ एम॰ इलियास (विवा. 1963)

बहन: Noorjahan
भांजियां या भतीजियां: तस्नीम काज़ी, फिरदौस काज़ी, कौसर काज़ी

अभिनेत्री शकीला का वास्तविक नाम 'बादशाहजहाँ' था। शकीला जी के अनुसार- "मेरे पूर्वज अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के शाही खानदान से ताल्लुक रखते थे। मेरा जन्म 1 जनवरी, 1936 को मध्यपूर्व में हुआ था। राजगद्दी पर कब्ज़े के खानदानी झगड़ों में मेरे दादा-दादी और मां मारे गए थे। मैं तीन बहनों में सबसे बड़ी थी और हम तीनों बच्चियों को साथ लेकर मेरे पिता और बुआ जान बचाकर मुम्बई भाग आए थे। उस वक़्त मैं क़रीब 4 साल की थी।" शकीला जी के मुताबिक़ उनके पिता भी बहुत जल्द गुज़र गए थे। उनकी बुआ फ़िरोज़ा बेगम का रिश्ता शहज़ाद नाम के जिस युवक से हुआ था, वह भी नवाब खानदान के थे। लेकिन शादी होने से पहले ही लन्दन में क्रिकेट खेलते समय उनका निधन हो गया था। ऐसे में बुआ ने ज़िंदगी भर अविवाहित रहने का फ़ैसला कर लिया। तीनों अनाथ भतीजियों का पालन पोषण बुआ ने ही किया। इन तीनों की पढ़ाई-लिखाई भी घर पर ही हुई।
अभिनेत्री शकीला की छोटी बहन नूर भी अभिनेत्री थीं। उनकी सबसे छोटी बहन ग़ज़ाला (नसरीन) साधारण गृहणी थीं। शकीला जी के पिता का जल्द ही निधन हो गया था, उनकी बुआ फ़िरोज़ा बेगम ने उनका तथा बहनों का पालन-पोषण किया था।

उसकी बुआ को फिल्मों का शौक था और वह अपनी भतीजियों को शो में ले जाती थी।  कारदार और महबूब खान के साथ उनके पारिवारिक सम्बन्ध थे वास्तव में, यह 'करदार' ही थे जिन्होंने शकीला को फ़िल्म दास्तान (1949) में अभिनय करने का मौका दिया  उन्होंने उनका नाम बादशाह जहाँ से शकीला रख दिया और उन्होंने फिल्म में बाल कलाकार के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की, जिसमें सुरैया ने अभिनय किया था उन्होंने जल्दी ही सुरैया के साथ एक और फिल्म में अभिनय किया जिसका शीर्षक दुनिया (1949) था।  गुमास्ता (1951), सिंदबाद द सेलर (1952), राजरानी दमयंती (1952), आगोश (1953), शहंशाह (1953), राज महल (1953), अरमान (1953) सहित कई फिल्मों में भूमिकाओं के बाद अंत में उन्हें गुरुदत्त की आर-पार (1954) में अभिनय का अवसर मिला आर-पार में, उन्होंने गुरु दत्त के जीवन की दूसरी महिला कैबरे डांसर की भूमिका निभाई, जिसे समाज द्वारा तिरस्कृत किया जाता है फ़िल्म आर-पार सुपरहिट फिल्म थी और इसके बेहतरीन गाने शकीला पर फिल्माए गए थे।  उनकी बहन नूर ने भी आर-पार (1954) में अभिनय किया और बाद में प्रसिद्ध कॉमेडियन जॉनी वॉकर से शादी की और फिल्मों को छोड़ दिया, जैसा कि नसरीन ने किया, जो एक गृहिणी बन गईं।

गुरु दत्त शकीला के अभिनय से बहुत प्रभावित थे और राज खोसला निर्देशित फ़िल्म  सी.आई.डी.  (1956) में शकीला को अभिनय का मौका दिया शकीला की मौसी उसका करियर संभाल रही थी और वह नहीं चाहती थी कि शकीला को फंतासी फिल्मों में टाइपकास्ट किया जाए, इसलिए उन्होंने फ़िल्म अलीबाबा और फोर्टी थीव्स (1954) के लिए निर्माता से यह सोचकर इतनी बड़ी रकम मांग ली वह शकीला को फ़िल्म में नही लेंगे उस समय उन्होंने 10000 रुपये रकम की डिमांड की थी यह सोचकर कि यह निर्माता को उसे कास्ट करने से रोकेगा, लेकिन निर्माता इतने बड़ी रकम पर भी सहमत हो गये और उसने फिल्म में अभिनय किया।  फ़िल्म हिट हो गयी  इसका परिणाम यह हुआ कि  शकीला बी-ग्रेड पौराणिक और फंतासी फिल्मों में सिमट गई और उसने फिल्म बिरादरी से "अरबी चेहरा" (अरेबियन राजकुमारी) का खिताब अर्जित किया।  उन्होंने लालपरी (1954), वीर राजपूतानी (1955), रूप कुमारी (1956), आगरा रोड (1957), अल-हिलाल (1958) आदि में अभिनय किया। उन्होंने "हातिम ताई" (1956) में एक अलौकिक परी की भूमिका निभाई जो अरेबियन नाइट्स की कहानी पर आधारित ए-ग्रेड कलर की हिट फिल्म थी उन्होंने 1957 में कुछ हलचल पैदा की, जब किशोर कुमार के साथ अभिनीत उनकी फिल्म बेगुनाह को रिलीज होने के 10 दिनों के बाद प्रतिबंधित कर दिया गया यह फिल्म डैनी केय अभिनीत हॉलीवुड की नॉक ऑन वुड (1954) की कार्बन कॉपी थी और उस फिल्म के निर्माता अदालत गए और इस फिल्म की आगे की स्क्रीनिंग को रोकने के लिए केस जीत लिया।  नतीजतन, इस फिल्म के सभी निगेटीब्स नष्ट कर दिये गये 1958 में, उन्होंने सस्पेंस/थ्रिलर फ़िल्म  पोस्ट बॉक्स 999 में सुनील दत्त के साथ अभिनय किया अपने करियर के उत्तरार्ध में, शक्ति सामंत ने उन्हें शम्मी कपूर के साथ चाइना टाउन (1962) में कास्ट किया यह फ़िल्म जबरदस्त हिट रही

अपने चौदह साल के करियर के दौरान, वह प्रसिद्ध अभिनेताओं और निर्देशकों के साथ 50 से अधिक फिल्मों में दिखाई दीं।  उसके बाद, उन्होंने फ़िल्म उद्योग छोड़ दिया और शादी कर ली और जर्मनी चली गईं।  शादी टूटने के  बाद, वह वापस मुंबई आ गई और एक अफगान व्यक्ति से दोबारा शादी की जो भारत में कॉउंसेलेट जनरल थे उनकी एक बेटी मीनाज़  थी वह विदेश में रहने चले गयी 1991 में, उन्हें एक भयानक झटका लगा जब उनकी बेटी की मौत हो गयी त्रासदी को पीछे छोड़ते हुए, वह वापस मुंबई चली गई और अपनी बहनों और दोस्तों के करीब रही।  उसने सभी फ़िल्म और टेलीविज़न धारावाहिकों के प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया और वापसी करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह चाहती थी कि प्रशंसक उसे एक युवा, सुंदर नायिका के रूप में याद रखें।  20 सितंबर, 2017 को मुंबई, भारत में 82 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई।  उन्होंने शक्ति सामंत की चाइना टाउन (1962) में शम्मी कपूर के साथ अभिनय किया।  उन्होंने शहीद भगत सिंह (1963) में भी शम्मी कपूर के साथ काम किया।  उन्होंने पोस्ट बॉक्स 999 जैसी फिल्मों में भी सुनील दत्त के साथ खूबसूरती से काम किया था।

उन्होंने 1963 में सिनेमा से संन्यास ले लिया, जब उन्होंने वाई एम इलीयास से शादी की और अपने पति के साथ लंदन चली गईं, उनके पति फिल्म उद्योग से नहीं थे।  उनके साथ मीनाज़ नाम की एक बेटी थी।  मीनाज़ ने 1991 में आत्महत्या कर ली। शकीला की बहन नूर (नूरजहां) की शादी जॉनी वॉकर से हुई थी।

शकीला का 82 वर्ष की आयु में 20 सितंबर 2017 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। शकीला को महाराष्ट्र के मुंबई के माहिम कब्रिस्तान में दफनाया गया।

ए नागेश्वर

दादा साहब फाल्के से सम्मानित फ़िल्म निर्माता अभिनेता ए नागेश्वर राव की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रधांजलि
अक्किनेनी नागेश्वर राव मुख्य रूप से तेलुगू सिनेमा में काम करने वाले भारतीय फ़िल्म अभिनेता एवं निर्माता थे। उन्हें मुख्यतः उनके नायिका के अभिनय के लिए जाना जाता था क्योंकि उस समय महिलाओं का फ़िल्मों में अभिनय करना निषिद्ध था। 

🎂जन्म20सितंबर1924, रामापुरम (वेंकट राघव पुरम)
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 2014, हैदराबाद
बच्चे:अक्किनेनी नागार्जुन, अक्किनेनी वेंकट, नागा सुशीला, ज़्यादा
पत्नी: अन्नपुर्णा अक्किनेनी           (विवा. 1949–2011)

पोते या नाती: नागा चैतन्य, अखिल अक्किनेनी, सुशांत
इनाम: पद्म विभूषण (2011), पद्म भूषण (1988),

ए नागेश्वर राव भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध तेलुगु फ़िल्म अभिनेता और फ़िल्म निर्माता है। इन्हें कला क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा सन् 2011 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पद्म विभूषण और 1990 में भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अपने पाँच भाइयों में सबसे छोटे ए. नागेश्वर राव का 20 सितम्बर 1924 को रामपुरम, कृष्णा ज़िला, आंध्र प्रदेश के एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम अक्किनेनी पुन्नम्मा और पिता का नाम अक्किनेनी वेंकटरतनम है। परिवार की कमज़ोर आर्थिक स्थिति के कारण इनकी प्रारम्भिक शिक्षा प्राइमरी स्कूल तक ही हो पायी थी। इनके पुत्र 'अक्किनेनी नागार्जुन' प्रसिद्ध अभिनेता हैं।

सन 1941 में मात्र 17 वर्ष की आयु में इन्होंने घंटसाल बालारमैया की तेलुगु फ़िल्म 'सीता राम जननम' (1942) से अपना फ़िल्मी कैरियर आरम्भ किया। इस फ़िल्म में इन्होंने भगवान श्रीराम की भूमिका की।
भारतीय फ़िल्मोद्योग के सबसे बड़े दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज तेलुगू निर्माता-अभिनेता अक्कीनेनी नागेश्वर राव का बुधवार तड़के 22 जनवरी, 2014 को हैदराबाद में निधन हो गया। 91 वर्षीय नागेश्वर राव पिछले कई सालों से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। प्यार से 'एएनआर' कहकर पुकारे जाने वाले नागेश्वर राव के बेटे और अभिनेता नागार्जुन ने कहा कि श्री राव का निधन नींद में ही हो गया। नागेश्वर राव को 'तेनालीराम कृष्णा', 'देवदास', 'माया बाज़ार' और 'मिस्साम्मा' जैसी हिट फ़िल्मों में अभिनय के लिए याद किया जाता है। नागेश्वर राव के परिवार में तीन बेटियां और दो बेटे हैं। उनके पुत्र नागार्जुन को हिन्दी फ़िल्मों के दर्शक भी अच्छी तरह जानते हैं, और नागार्जुन की पत्नी अमला भी हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय कर चुकी हैं। नागेश्वर राव के कई पौत्र भी अभिनेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं। सात दशक से भी अधिक समय तक चले अपने लंबे करियर में नागेश्वर राव ने लगभग 250 तेलुगू और कई तमिल फ़िल्मों में काम किया, और फिलहाल वह 'मनम' शीर्षक से बनाई जा रही फ़िल्म में अभिनय कर रहे थे, जिसमें उनके परिवार की तीनों पीढ़ियों के अभिनेता काम कर रहे थे।

नूर जहां

अल्लाह रखा वसई (नूर_जहां)
🎂जन्म21सितम्बर1926
कसूर , पंजाब , ब्रिटिश भारत
⚰️मृत23दिसंबर2000 (आयु 74 वर्ष)
कराची , सिंध , पाकिस्तान
शांत स्थान
गिज़री कब्रिस्तान, कराची
राष्ट्रीयता
पाकिस्तानी (1947-2000)
अन्य नामों
पूरब की कोकिला 
दिलों की रानी 
राष्ट्र की बेटी 
पंजाब की कोकिला 
व्यवसायों
पार्श्वगायकसंगीतकारअभिनेत्रीनिदेशक
सक्रिय वर्ष
1930 - 2000
उल्लेखनीय कार्य
ज़ीनत (1945)
अनमोल घड़ी (1946)
जुगनू (1947)
मिर्ज़ा साहिबान (1947)
चान वे (1951)
दुपट्टा (1952)
इंतेज़ार (1956)
अनारकली (1958)
कोयल (1959)
शैली
फिल्मीग़ज़लशास्त्रीय संगीतकव्वाली
शीर्षक
"मलिका-ए-तरन्नुम" (राग की रानी)
जीवन साथी
शौकत हुसैन रिज़वी
​( एम.  1941; प्रभाग  1953 )
इजाज़ दुर्रानी
​( एम.  1959; प्रभाग  1971 )
बच्चे
ज़िल-ए-हुमा , नाज़िया एज़ाज़ खान सहित 4
अभिभावक
इमदाद अली (पिता)फ़तेह बीबी (मां)
रिश्तेदार
सोन्या जहान (पोती)
सिकंदर रिज़वी (पौत्र)
अहमद अली बट (पौत्र)
पुरस्कार
15 निगार पुरस्कार
सम्मान
प्रदर्शन का गौरव (1965)
तमग़ा-ए-इम्तियाज़ (1965)
सितारा-ए-इम्तियाज़ (1996)

अहमद रुश्दी के साथ , उनके पास पाकिस्तानी सिनेमा के इतिहास में सबसे अधिक फिल्मी गीतों को आवाज देने का रिकॉर्ड है। उन्होंने उर्दू, पंजाबी और सिंधी सहित विभिन्न भाषाओं में लगभग 20,000 गाने रिकॉर्ड किए।  आधी सदी से भी अधिक लंबे करियर के दौरान उन्होंने 1,148 पाकिस्तानी फिल्मों में कुल 2,422 गाने गाए। उन्हें पहली महिला पाकिस्तानी फिल्म निर्देशक भी माना जाता है। 
नूरजहाँ  वह इमदाद अली और फतेह बीबी की ग्यारह संतानों में से एक थीं।
📽️
1935 पिंड दी कुड़ी
1935 शिला
1936 मिस्र का सितारा
1937 हीर सियाल
1939 गुल बकावली
1939 इमानदार 
1939 पयाम-ए-हक 
1936 गुल-ए-बकावली
1940 सजनी 
1940 यमला जाट 
1941 चौधरी 
1941 लाल सिग्नल 
1941 उम्मीद 
1941 सुसराल 
1942 चांदनी 
1942 धीरज 
1942 फरयाद 
1942 खानदान
1943 नादान 
1943 दुहाई
1943 नौकर (1943 की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म)
1944 लाल हवेली 
1944 दोस्त
1945 जीनत
1945 गाँव की गोरी
1945 बड़ी माँ
1945 भाई जान 
1946 अनमोल घड़ी
1946 दिल 
1946 हमजोली 
1946 सोफिया 
1946 महाराणा प्रताप 
1947 मिर्ज़ा साहिबान
1947 जुगनू 
1947 आबिदा 
1947 मीराबाई 
1951 चानवे
1952 दोपट्टा  पाकिस्तान में 1952 की सबसे बड़ी हिट
1953 गुलनार 
1955 पतेय खान 
1956 लक्त-ए-जिगर
1956 Intezaar
1997 नूरन
1958 छू मंतर 
1958 अनारकली
1959 नींद 
1959 Pardaisan 
1959 कोयल
1961 ग़ालिब 
1994 डंडा पीर 
1996 दम मस्त कलंदर/आलमी गुंडे

जुबेदा बेगम

ज़ुबैदा बेग़म धनराजगीर एक हिन्दी फ़िल्म अभिनेत्री थीं। उन्होंने पहली हिन्दी बोलती फ़िल्म आलम आरा में अभिनय किया था। वह सूरत के पास के सचिन राजघराने से थीं और उनकी माँ फ़ातिमा बेग़म थीं जो कि भारत की प्रथम महिला फ़िल्म निर्देशक थीं तथा पिता सचिन के नवाब थे। उनकी बहनें अभिनेत्रियाँ शहज़ादी और सुल्ताना थीं।

🎂जन्म : 1911, सूरत
⚰️मृत्यु: 21 सितंबर 1988, मुम्बई

बहन: सुल्ताना, शहज़ादी
नातिन या पोती: रिया पिल्लई
जीवनसाथी
महाराज नरसिंगीर धनराजगीर ज्ञान बहादुर
बच्चे: धुर्रेश्वर धनराजगिर, हुमायूँ धनराजगिर
माता-पिता: फात्मा बेगम, नवाब सिदी इब्राहिम मुहम्मद याकुट खान उनकी माँ फ़ातिमा बेग़म थीं जो कि भारत की प्रथम महिला फ़िल्म निर्देशक थीं तथा पिता सचिन के नवाब थे। उनकी बहनें अभिनेत्रियाँ शहज़ादी और सुल्ताना थीं।

महेश भट्ट

कंट्रोवर्सी किंग के नाम से मशहूर फिल्म निर्माता, निर्देशक और स्क्रीन राइटर महेश भट्ट का 

🎂जन्म_20_सितंबर_1948_मुंबई 🇮🇳

महेश की प्रारंभिक पढ़ाई डॉन बोस्को हाई स्कूल, माटुंगा से हुई थी। इस दौरान महेश ने पैसे कमाने के लिए पार्ट टाइम जॉब करना शुरू कर दिया
उनके पहले दौर की एक असाधारण फिल्म सारांश (1984) है, जिसे 14वें मॉस्को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया था । यह उस वर्ष की सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के अकादमी पुरस्कार के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बन गई। 1986 की फिल्म नाम उनकी व्यावसायिक सिनेमा की पहली कृति थी। 1987 में, वह अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ " विशेष फिल्म्स " के बैनर तले फिल्म कब्ज़ा के साथ निर्माता बन गये ।
फ़िल्म निर्देशकनिर्मातापटकथा लेखक
जीवन साथी
लोरेन ब्राइट "कीरा भट्ट"
सोनी राजदान ​( एम.  1986 )

माता-पिता
नानाभाई भट्ट (पिता)
रिश्तेदार
बच्चे पूजा , राहुल, शाहीन
मुकेश भट्ट (भाई)
मोहित सूरी (भतीजा)
इमरान हाशमी (भतीजा)
रणबीर कपूर (दामाद)
परिवार
भट्ट परिवार
भट्ट का जन्म नानाभाई भट्ट और शिरीन मोहम्मद अली से हुआ था। भट्ट के पिता एक गुजराती हिंदू नागर ब्राह्मण थे और उनकी मां एक गुजराती मुस्लिम थीं । 

उनके भाई-बहनों में भारतीय फिल्म निर्माता मुकेश भट्ट हैं । भट्ट ने अपनी स्कूली शिक्षा डॉन बॉस्को हाई स्कूल, माटुंगा से की । स्कूल में रहते हुए, भट्ट ने पैसे कमाने के लिए ग्रीष्मकालीन नौकरियां शुरू कीं, साथ ही उत्पाद विज्ञापन भी किए। परिचितों के जरिए उनका परिचय फिल्म निर्देशक राज खोसला से हुआ। इस प्रकार भट्ट ने खोसला के सहायक निर्देशक के रूप में शुरुआत की। 
भट्ट का मानना ​​है कि कांग्रेस पार्टी धर्मनिरपेक्षता के लिए प्रतिबद्ध है। 2014 के लोकसभा चुनावों में , उन्होंने कारवां-ए-बेदारी (जागरूकता का कारवां) में प्रचार किया और लोगों से कांग्रेस के लिए वोट करने और भाजपा के प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को हराने के लिए कहा , क्योंकि उनका मानना ​​​​है कि मोदी सांप्रदायिक हैं । भट्ट 1984 के सिख दंगों में भूमिका के लिए कांग्रेस पार्टी के सांप्रदायिक रिकॉर्ड की भी आलोचना करते हैं । वह एक फिल्म बनाने की योजना बना रहे हैं, जो दिल्ली में हुए दंगों को संबोधित करेगी। महेश भट्ट ने इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक का समर्थन किया था जब आतंकवाद पर उनकी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए उन्हें यूनाइटेड किंगडम में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था।

मंगलवार, 19 सितंबर 2023

रोशनी वालिया

रोशनी_वालिया
अभिनेत्री
जन्म20सितंबर2001
जन्म (शहर) इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
जन्म (देश) भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
माँ स्वीटी वालिया
उल्लेखनीय कार्य
(हिन्दी फ़िल्में) माई फ्रेंड गणेशा 3 (2010),
मछली जल की रानी है (2014),
आई एम बन्नी (2019)
उल्लेखनीय कार्य
(टेलीविजन) मैं लक्ष्मी तेरे आंगन की (2012),
देवों के देव महादेव (2013),
तारा फ्रॉम सतारा (2019)
रोशनी वालिया का जन्म 20 सितंबर 2001 को  प्रयागराज , उत्तर प्रदेश , भारत में हुआ था । वह मुंबई में रहती है . उनकी मां स्वीटी वालिया हैं। उनकी एक बड़ी बहन, नूर वालिया है।  वालिया के नाना एक सेना अधिकारी थे। 
वालिया ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन विज्ञापनों से की।इसके बाद, वालिया ने लाइफ ओके ड्रामा सीरीज़ मैं लक्ष्मी तेरे आंगन की में अभिनय किया , इसमें उन्होंने जियाना की भूमिका निभाई।बाद में, वालिया को लाइफ ओके की एक और ड्रामा सीरीज़ रिंगा रिंगा रोज़ेज़ में कास्ट किया गया , उन्होंने समीर सोनी के किरदार की बेटी की भूमिका निभाई । 

2014 में, वालिया ने भारत का वीर पुत्र-महाराणा प्रताप में महाराणा प्रताप की पहली पत्नी, युवा महारानी अजबदे ​​पुनवार की भूमिका निभाई ।  उन्हें 13वें इंडियन टेली अवार्ड्स 2014 में सर्वश्रेष्ठ बाल अभिनेता - महिला के लिए नामांकित किया गया था।  दिसंबर 2014 में, वालिया ने युवा अपराध नाटक श्रृंखला गुमराह: एंड ऑफ इनोसेंस के तीसरे सीज़न में अभिनय किया । यह शो चैनल वी इंडिया पर प्रसारित हुआ , जिसमें उन्होंने आरोही की भूमिका निभाई।

2015 में, वालिया ने ज़ी टीवी के ये वादा रहा में सुरवी का किरदार निभाया ।

2019 में, उन्होंने  सोनी टीवी  पर  तारा फ्रॉम सतारा में तारा माने की भूमिका निभाई ।

प्रणिति परकश

प्रणति राय प्रकाश
पेशा अभिनेत्री

🎂जन्म 20 सितंबर 1994
जन्म (शहर) देहरादून, उत्तराखंड
जन्म (देश) भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
पिता कर्नल प्रेम प्रकाश
माँ साधना राय
उल्लेखनीय कार्य
(टेलीविजन) इंडियाज़ नेक्स्ट टॉप मॉडल (2016),
पॉइज़न (2019),
लव आज कल (2020),
कार्टेल (2021)

प्रणति राय प्रकाश एक भारतीय फैशन मॉडल है, जोकि मुख्यत इंडिया टॉप नेक्स्ट मॉडल 2016 संस्करण के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा वह मिस इंडिया 2015 की सेमी फाइनलिस्ट भी रह चुकी हैं।

निजी जीवन-  
              प्रणति राय प्रकाश कर्नल प्रेम प्रकाश और साधना राय के घर में हुआ था। प्रणति पटना, बिहार से ताल्लुकात रखती हैं। पिता की नौकरी आर्मी होने के कारण प्रणिति ने अपना बचपन और पढाई देश के विभिन्न क्षेत्रों (श्रीनगर, पोर्ट ब्लेयर, भठिंडा ,दिल्लीस,शिलोंग ,देहरादून ,पटना)से पूरी की है। उन्होंने फैशन कम्युनिकेशन की पढाई एनआईऍफ़टी, मुंबई से की। प्रणिती को योगा, पेंटिंग, डिजाइनिंग, और घूमने का बेहद शौक है।

मॉडलिंग करियर-  
                   प्रणती को मिस इंडिया 2015 के बाद कई मॉडलिंग ऑफर्स मिले, वह इंडिया नेक्स्ट टॉप मॉडल सीजन 2 की विजेता भी हैं।

दत्तात्रेय शंकर दावजेकर

मंगेशकर बहनों,अनुराधा पौडवाल, सुधा मल्होत्रा जैसी गायिकाओं को लांच करने वाले हिंदी मराठी फिल्मों के मशहूर संगीतकार दत्ता डावजेकर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
🎂जन्म15 नवंबर, 1917 को पुणे, महाराष्ट्र, भारत में हुआ था।
⚰️मृत्यु 19 सितंबर 2007
दत्तात्रेय शंकर दावजेकर जिन्हें दत्ता डावजेकर या दत्ता दौजेकर (मराठी: दत्ता डावजेकर) के रूप में जाना जाता है, मुख्य रूप से मराठी और हिंदी फिल्मों के एक अनुभवी संगीत संगीतकार थे।  उन्हें कई गायकों को ब्रेक देने का श्रेय दिया जाता है, जो कालांतर में बेहद लोकप्रिय हो गए, जिनमें मंगेशकर बहनें , लता मंगेशकर,आशा भोसले और उषा मंगेशकर शामिल है और साथ ही अनुराधा पौडवाल जैसे अन्य लोगों को भी उन्होंने  ब्रेक दिया

दत्ता दावजेकर के पिता बाबूराव लाइव लोक संगीत नाटकों के साथ-साथ उर्दू नाटकों के लिए तबला भी बजाते थे।  दावजेकर ने तबला और हारमोनियम बजाना सीखा और इस तरह संगीत में रुचि पैदा की।  उन्होंने गीतों की रचना भी शुरू की।  बाद में, उन्हें प्रसिद्ध स्टार शांता आप्टे ने अपने शो में प्रदर्शन करने के लिए आमंत्रित किया।  दावजेकर ने इलाहाबाद और लाहौर जैसे  दूर स्थानों पर जाकर प्रदर्शन किया

कुछ समय के लिए दावजेकर ने सी रामचंद्र और चित्रगुप्त के रूप में काम किया  उनको पहला ब्रेक 1941 में म्युनिसिपालिटी नामक एक मराठी फिल्म में मिला  इसके बाद 1942 में सरकरी पाहुन आई। फिल्म का एक गीत नाचे संगीत नटवर काफी हिट रहा। दत्ता दावजेकर को  राजा परांजपे, गजानन जागीरदार, मास्टर विनायक, दिनकर पाटिल, दत्ता धर्माधिकारी, राजदत्त और राजा ठाकुर जैसे मराठी सिनेमा में बड़े नामों के साथ काम करने का मौका मिला

उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में रंगल्या रात्रि आश्रय, पाथलग, पीहू रे कितनी वात, थोरातांची कमला, पदचया, चिमनराव गुण्डाभाऊ, पेडगाँव शेहना, जूना ते सोना, संत वाहे कृष्णा माई, सुखाची सांवली, विसाख वनवा और यशोदा शामिल हैं।  उनकी अंतिम फ़िल्म रिलीज़ 1992 में पहटे पुनेची थी। उनका गैर-फ़िल्मी गीत "सैनिक हो तुमकिया साथी" एक बड़ी हिट थी

52 साल के करियर में, दावजेकर ने साठ फिल्मों, बारह नाटकों और कई वृत्तचित्रों के लिए कई भाषाओं में संगीत की रचना की।  उन्होंने नाटक के लिए संगीत बनाने के लिए जर्मन संगीत सीखा

1943 में प्रदर्शित फिल्म माजे बाल, लता मंगेशकर के साथ दावजेकर की पहली मराठी फिल्म थी।  उन्होंने लता मंगेशकर को अपने गीतों के साथ हिंदी फिल्मों में लांच किया लता ने अपने कैरिय की शुरुवात गीत पाँव लागू कर जोरी  रे से किया जो  फिल्म आप की सेवा (1947)  से था

दावजेकर ने दो और हिंदी फ़िल्में की, वसंत जोगलेकर की आलाप और प्रेमनाथ की अंग्रेज़ी-हिंदी द्विभाषी, प्रिजनर ऑफ़ गोलकोंडा, जिसमें उन्होंने सुधा मल्होत्रा ​​को लांच किया

19 सितंबर 2007 को दावजेकर का अंधेरी, मुंबई में उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

प्रिय तेंदुलकर

प्रसिद्ध अभिनेत्री टीवी कलाकार प्रिया तेंदुलकर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
जन्म की तारीख और समय: 19 अक्तूबर 1954, भारत
मृत्यु की जगह और तारीख: 19 सितंबर 2002, मुंबई
पति करन राजदान  (विवा. 1988–2002)
भाई:  सुषमां तेंदुलकर, राजा तेंदुलकर
माता-पिता:

विजय तेंदुलकर, निर्मला तेंदुलकर

भारत की पहली टीवी स्टार प्रिया तेंडुलकर ने अनेक फिल्मों व टीवी धारावाहिकों में भूमिका निभाई पर संभवतः वे संपूर्ण जीवन अपने सबसे पहले टीवी अवतार "रजनी" के नाम से ही बेहतर पहचानी जाती रहीं। 1985 में निर्मित व बासू चटर्जी द्वारा निर्देशित इस धारावाहिक में उन्होंने भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ बेखौफ आवाज़ उठाने वाली एक साधारण गृहणी का किरदार निभाया था। वह लेखिका भी थी।
प्रिया प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंडुलकर की सुपुत्री थीं। उनका जन्म 19 अक्टुबर, 1954 को हुआ, उनकी दो बहनें और एक भाई था। प्रिया का विवाह अभिनेता व लेखक करण राजदान से 1988 में हुआ। पर यह विवाह सात साल ही चल सका और इसके बाद उनका संबंध विच्छेद हो गया। करण व प्रिया ने "रजनी" और "किस्से मियाँ बीवी के" धारावाहिकों में पती पत्नी के वास्तविक जीवन के किरदार भी निभाये। 1974 में श्याम बेनेगल की फिल्म अंकुर में निभाई भूमिका के कारण प्रिया के अभिनेता अनंत नाग से भी संबंध जोड़े जाते रहे।
प्रिया का प्रारंभ से ही अभिनय की और झुकाव था। 1939 में जब वे स्कूल में थीं, उन्होंने सत्यदेव दुबे के निर्देशन तले गिरीश कर्नाड के लिखे पौराणिक नाटक "हयवदन" में गुड़िया की भूमिका निभाई। इस नाटक में निर्देशिका कल्पना लाज़मी उनकी सह कलाकार थीं। इसके बाद पिग्मेलियन, अंजी, कमला, कन्यादान, सखाराम बाइंडर, ती फूलराणी, एक हठी मुलगी जैसे अनेकों मराठी नाटकों में उन्होंने भूमिकायें कीं। प्रिया ने टीवी पर जहाँ गुलज़ार निर्देशित स्वयंसिद्ध जैसे नारीवादी धारावाहिक में काम किया वहीं "हम पाँच" जैसे हास्य धारावाहिक में फोटो फ्रेम से बोलती मृत बीवी की भूमिका भी अदा की और "द प्रिया तेंडुलकर शो" और "ज़िम्मेदार कौन" जैसे सफल टॉक शो भी किये जिसमें वे काफी आक्रामक तेवर के लिये जानी जाती थीं। अंकुर, मोहरा और त्रिमूर्ती जैसी कुछ हिन्दी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया पर कोई उल्लेखनीय भूमिकायें नहीं।
शायद "रजनी" के किरदार और अपने पिता का ही प्रभाव था कि प्रिया सामाजिक मुद्दों के प्रति सदा जागरूक रहीं। उनका व्यक्तित्व खुला और साहसी था। "द प्रिया तेंडुलकर शो" की बुलंदी पर शिवसेना समेत कई राजनीतिक दलों ने उन्हें अपने दल में शामिल करने का प्रयास किया पर वे मन नहीं बना पाईं।
वे स्वयं लघु कथायें लिखती रहती थीं। ज्याचा त्याचा प्रश्न, जन्मलेला प्रत्येकला, असंही व पंचतारांकित उनकी कुछ कृतियाँ हैं, जिनमें से कुछ पुरस्कृत भी हुईं।
19 सितंबर, 2002 में 47 वर्ष की अल्पायु में उनका हृदयाघात से देहांत हो गया। वे कुछ समय कैंसर से भी लड़ती रहीं।
प्रसिद्ध_फिल्में
1974 - अंकुर
1978 - देवता
1983 - माहेरची मानसे, रानीने दाव जिंकाला
1984 - गोंघळत गोंधळ
1985 - मुम्बईचा फौजदार, रजनी (टीवी धारावाहिक)
1987 - कालचक्र
1988 - किस्से मियाँ बीवी के (टीवी धारावाहिक)
1989 - एक शून्य (टीवी धारावाहिक)
1990 - घर (टीवी धारावाहिक)
1994 - मोहरा
1995 - त्रिमूर्ति
1996 - द प्रिया तेंदुलकर शो (टीवी टॉक शो)
1997 - और प्यार हो गया, ज़िम्मेदार कौन (टीवी टॉक शो), गुप्त, हम पाँच (टीवी धारावाहिक)
2000 - राजा को रानी से प्यार हो गया
2001 - प्यार इश्क और मुहब्बत

सोमवार, 18 सितंबर 2023

सूरज संतोष

#सूरज_संतोष 
एक भारतीय गायक, गीतकार, निर्माता और संगीतकार हैं। वह स्वतंत्र संगीत और पार्श्व गायन की दुनिया में कदम रखते हैं, दोनों के बीच आसानी से चलते हैं। सूरज केरल राज्य फिल्म पुरस्कार, 2 मिर्ची संगीत पुरस्कार और केरल राज्य फिल्म समीक्षक पुरस्कार के प्राप्तकर्ता हैं। उन्होंने 8 भाषाओं में करीब 300 गाने गाए हैं।
🎂 #जन्म19सितंबर1987
पत्नी: अंजली पैनिकर (विवा. 2016)
माता-पिता: संतोष कुमार
उनका कोई संगीतमय परिवार नहीं था. उनके पिता संतोष कुमार वन विभाग में काम करते थे और उनकी मां जयाकुमारी एक शिक्षिका थीं। न तो उनका और न ही उनके विस्तृत परिवार का कोई संगीत संबंध था। सूरज की मां के स्कूल में संगीत शिक्षक ही थे जिन्होंने 5 साल की उम्र में संगीत के प्रति उनके लगाव को पहचाना था। उसने उसे एक गाना सिखाया जिसे उसने खूबसूरती से गाया। उनकी सलाह पर ही सूरज के माता-पिता ने इसे गंभीरता से लिया और 6 साल की उम्र में उन्हें डॉ. केजे येसुदास द्वारा स्थापित थारंगनिसारी स्कूल ऑफ म्यूजिक में दाखिला दिला दिया।. उस संस्थान में उनके शुरुआती वर्ष कठिन थे क्योंकि उन्हें अचानक वरिष्ठ गायकों के बीच में डाल दिया गया था। एक बच्चे के रूप में उन्हें यह समझने में संघर्ष करना पड़ा कि क्या हो रहा था और उनसे क्या अपेक्षा की जा रही थी। लेकिन वह अपनी मां के निरंतर प्रोत्साहन के साथ डटे रहे, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि वह नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित हों। सूरज प्रोफेसर के. ओमानकुट्टी , कोल्लम जीएस बालमुरली और पार्वतीपुरम पद्मनाभ अय्यर के संरक्षण में भी रहे हैं ।

सूरज ने अपनी हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर की शिक्षा गवर्नमेंट मॉडल बॉयज़ हायर सेकेंडरी स्कूल, तिरुवनंतपुरम से पूरी की । हाई स्कूल में उन्होंने स्कूल युवा उत्सवों और राज्य युवा उत्सवों में भाग लिया और पुरस्कार जीते।  उन्होंने महात्मा गांधी कॉलेज , त्रिवेन्द्रम से वाणिज्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की , और मार इवानियस कॉलेज , त्रिवेन्द्रम से वाणिज्य में स्नातकोत्तर किया । कॉलेज में रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय विश्वविद्यालय युवा महोत्सवों में भाग लिया और लगातार पुरस्कार जीते।

जिन कार्यक्रमों में उन्होंने भाग लिया उनमें से एक सूर्या टीवी पर एक संगीत प्रतियोगिता थी जहां प्रसिद्ध बांसुरीवादक कुदामलूर जनार्दन मुख्य न्यायाधीशों में से एक थे। प्रत्येक प्रदर्शन के बाद न्यायाधीशों ने संगीत और इसकी जटिलताओं पर कई प्रश्न पूछे। यह एक दिलचस्प प्रारूप था और सूरज ने प्रतियोगिता जीत ली। इसके बाद उन्होंने श्री कुदामलूर जनार्दन से संगीत सीखना शुरू किया । इससे उसके लिए एक नई दुनिया खुल गई। उन्हें एहसास हुआ कि संगीत में प्रतियोगिताओं में भाग लेने और जीतने के अलावा भी बहुत कुछ है। यही वह क्षण था जिसने उनके दिमाग को संगीत की दुनिया के लिए खोल दिया और वह संगीत के जादू से मंत्रमुग्ध हो गये। उसके मन में लगातार उठती शंकाओं का समाधान हो रहा था और उसे कोई ऐसा व्यक्ति मिल गया था जो स्पष्टता प्रदान कर सकता था।

सूरज ने अपने गृह नगर त्रिवेन्द्रम में गायन कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

सुनील सिकंद

सुनील सिकंद
स्क्रीन नाम सुनील सिकंद
के रूप में जन्मे सुनील सिकंद
पेशा फ़िल्म निर्देशक
आयु
(वर्तमान)
73
🎂जन्म  19 सितंबर 1949
जन्म (शहर) बम्बई (अब मुंबई), महाराष्ट्र
जन्म (देश) भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
पिता प्राण
(अभिनेता)
माँ शुक्ल शिखंड
पति-पत्नी

अलग हो गए ज्योति सिकंद

1982
बेटा सिद्धार्थ सिकंद
उल्लेखनीय कार्य (हिन्दी फ़िल्में)
[दूसरी इकाई के निदेशक के रूप में] अमर अकबर एंथनी (1977),
धरम वीर (1977),
परवरिश (1977),
सुहाग (1979),
फरिश्ता (1984)
उल्लेखनीय कार्य (हिन्दी फ़िल्में)
[निर्देशक के रूप में] लक्ष्मणरेखा (1991)

सुनील सिकंद अहलूवालिया एक भारतीय फिल्म निर्देशक और अनुभवी अभिनेता प्राण के बेटे हैं। उन्होंने अपनी पहली फिल्म 1984 में फरिश्ता और दूसरी फिल्म 1991 में लक्ष्मणरेखा निर्देशित की, जिसमें जैकी श्रॉफ, नसीरुद्दीन शाह, शम्मी कपूर, डैनी डेन्जोंगपा और उनके पिता प्राण ने अभिनय किया था।

कल्पना कार्तिक

कल्पना कार्तिक 
जिनका वास्तविक नाम मोना सिंहा है, उन्होंने छः हिन्दी फ़िल्मों में काम किया है। उन्होंने इसके बाद फ़िल्मों को छोड़कर देव आनन्द के साथ घर बसा लिया। चेतन आनन्द ने नवकेतन फ़िल्म्स द्वारा बनाई गई बाज़ी में सन् 1951 में पहली बार चांस दिया था। उनके दो बच्चे हैं।
🎂जन्म : 19 सितंबर 1931 
 शिमला
📽️
1बाज़ी 
2 आँधियां जानकी 
3 हमसफ़र -
4 टैक्सी ड्राइवर माला
5 हाउस नम्बर 44 
6 नौ दो ग्यारह 
पति: देव आनन्द (विवा. 1954–2011)
बच्चे: सुनील आनंद, देविना आनंद

ताहिर हुसैन

ताहिर हुसैन
भारतीय फ़िल्म निर्माता
अंग्रेज़ी से अनुवाद किया गया कॉन्टेंट-मोहम्मद ताहिर हुसैन खान, जिन्हें ताहिर हुसैन के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय फिल्म निर्माता, पटकथा लेखक, अभिनेता और फिल्म निर्देशक थे जो हिंदी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते थे।
🎂जन्म : 19 सितंबर 1938, शाहाबाद
⚰️मृत्यु: 02 फ़रवरी 2010, मुम्बई
पत्नी: ज़ीनत हुसैन (विवा. ?–2010)
भाई: नासिर हुसैन
माता-पिता: जाफ़र हुसैन खान
बच्चे: आमिर खान, फैसल ख़ान, फरहत खान, निखत खान
ताहिर हुसैन अभिनेता आमिर खान और फैसल खान के पिता थे । हिट फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक नासिर हुसैन ताहिर हुसैन के बड़े भाई और गुरु थे। ताहिर के बेटे, आमिर खान ने कयामत से कयामत तक में अभिनय किया , यह फिल्म उनके चाचा नासिर हुसैन द्वारा निर्मित और उनके चचेरे भाई मंसूर खान द्वारा निर्देशित थी ।

ताहिर हुसैन ने अपने बेटे आमिर को पहली बार (और एकमात्र) 1990 में तुम मेरे हो निर्देशित फिल्म में निर्देशित किया था ।

ताहिर हुसैन भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के रिश्तेदार थे ।  02 फरवरी 2010 को गंभीर दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में उनका निधन हो गया

मेघना नायडू

मेघना नायडू एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं। 
मेघना नायडू का 🎂जन्म 19 सितंबर 1980
 को विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम इतिराज है, जोकि एक टेनिस कोच हैं। उनकी माँ पूर्णिमा हैं- वह हाफ बंगाली हैं। वह एक अध्यपिका हैं। उनकी एक छोटी बहन है-सोना नायडू। 

पढ़ाई 
मेघना का पूरा बचपन मुंबई में ही बीता है।  उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई भावना कॉलेज अँधेरी से संपन की है।  वह कॉमर्स से स्नातक हैं।  वह शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम में पूर्ण पारंगत हैं। इस नृत्य को उन्होंने महज सात साल की उम्र से ही सीखना शुरू कर दिया था। 

करियर 
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की।  उसके बाद उन्होंने तेलुगु फिल्मों से अपना अभिनय करियर शुरू किया। उनकी पहली तेलुगु फिल्म प्रेमसाक्षी है। जो बॉक्स-ऑफिस पर ठीक-ठाक रही थी। इसके बाद वह कुछ-एक कन्नड़ फिल्मों आयीं। उन्हें हिंदी सिनेमा में पहचान कलियों का चमन एल्बम से मिली।  

उन्होंने अपने हिंदी सिनेमा करियर की शुरुआत बी-ग्रेड फिल्मों से की। उनकी पहली फिल्म हवस थी। जो वर्ष 2004 में प्रदर्शित हुई थी। इस फिल्म  पृष्ठभूमि शादी के बाद के प्रेमप्रसंगों पर आधारित थी। उसके बाद वह कई बी-गर्दे फिल्मों में नजर आई। हालांकि यह फ़िल्में कब आई-कब गयी दर्शकों को भी नहीं पता।  

टीवी करियर 
मेघना नायडू ने अपने टीवी करियर की शुरुआत स्टंट बेस्ड रियलिटी शो फियर फैक्टर से की थी। हालांकि वह इस शो की विजेता नहीं बन सकी थी। इसके अलावा वह एकता कपूर के शो जोधा-अकबर में बेनजीर की भूमिका में भी नजर आ चुकीं हैं। 
नायडू की पहली प्रमुख उपस्थिति UMI10 के "कलियों का चमन" (2002) के संगीत वीडियो में थी, लता मंगेशकर के 1981 के गीत " थोड़ा रेशम लगता है " (बदले में, 2002 का गीत ") का आधिकारिक रीमिक्स था। ट्रुथ हर्ट्स द्वारा लिखित " एडिक्टिव " रीमिक्स से प्रेरित था)। भारतीय फिल्मों में काम शुरू करने से पहले उन्हें सरू मैनी के वीडियो "दिल दे दिया था (सुट्टा मिक्स)"  में भी दिखाया गया था ।
📽️
2003 हवस
2004 AK 47
2004जैकपॉट - द मनी गेम 
प्यार का क्लासिक नृत्य
2005माशूका
2005वर्षा: भीतर का आतंक
2005बुरा दोस्त
2005आठवां: शनि की शक्ति
2006 रिवाज
2012 पहली नज़र में प्यार 
2012इश्क दीवाना
2016 क्या कूल हैं हम 3

जया भट्टाचार्य

#जायाभट्टाचार्य
#जन्म01_जुलाई_1978 
लखनऊ , उत्तर प्रदेश , भारत
पेशा
टेलीविजन अभिनेत्री
के लिए जाना जाता है
क्योंकि सास भी कभी बहू थी , थपकी प्यार की
जया भट्टाचार्य एक भारतीय टेलीविजन अभिनेत्री हैं। वह टीवी धारावाहिकों में विरोधी भूमिकाएं निभाने के लिए जानी जाती हैं। (उन्होंने फिल्मों में छोटे-मोटे रोल भी किये हैं.) उन्हें धारावाहिक ' क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में पायल का किरदार निभाने के लिए जाना जाता है, उन्होंने 'कसम से ' में जिज्ञासा बाली, 'झाँसी की रानी' में सक्कू बाई और ' गंगा ' में सुधा बुआ की भूमिकाएँ भी निभाईं । उन्होंने ड्रामा सीरीज़ थपकी प्यार की (2015-2017) में वसुंधरा पांडे की भूमिका से फिर से लोकप्रियता हासिल की । वह सिलसिला बदलते रिश्तों का (2018-2019) में दिखाई दीं और फिर उन्होंने थपकी प्यार की 2 में वीणा देवी की भूमिका निभाई ।
उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों देवदास और लज्जा में छोटी भूमिकाएँ निभाईं । वह टेलीविजन पर क्योंकि सास भी कभी बहू थी , पायल का किरदार निभाते हुए, और बनूं मैं तेरी दुल्हन जैसे शो में भी दिखाई दीं । भट्टाचार्य को 2000 के दशक की हिंदी फिल्म फ़िज़ा में करिश्मा कपूर अभिनीत एक छोटी सी भूमिका दी गई थी । उन्होंने फिल्म जिज्ञासा में भी काम किया है जहां उन्होंने एक फिल्म निर्माता की भूमिका निभाई है जो एक विवादास्पद अभिनेत्री पर एक वृत्तचित्र बनाना चाहता है। यह किरदार भारतीय फिल्म रंग दे बसंती में ऐलिस पैटन की भूमिका के समान था. उन्होंने 2007 में कसम से में जिज्ञासा के रूप में भी यही भूमिका निभाई थी।

भट्टाचार्य को ज़ी टीवी पर ऐतिहासिक श्रृंखला झाँसी की रानी में सक्कू बाई के अवतार में देखा गया था । वह रोमांटिक सोप ओपेरा थपकी प्यार की में वसुंधरा पांडे के प्रमुख सहायक किरदार में शामिल हुईं; यह शो 2015-2017 के बीच प्रसारित हुआ। 2018 में, उन्होंने हिट शो बढ़ो बहू में एक सामाजिक कार्यकर्ता सुषमा बुआ के रूप में प्रवेश किया।

ईशा कोपियर

ईशा कोप्पिकर एक भारतीय अभिनेत्री, मॉडल और राजनीतिज्ञ हैं जो तमिल फिल्मों के साथ-साथ हिंदी फिल्मों में भी दिखाई दी हैं। उन्होंने कई तेलुगु , कन्नड़ और मराठी फिल्मों में भी अभिनय किया है।
🎂 जन्म: 19 सितंबर 1976  माहीम, मुम्बई
पति: टिम्मी नारंग (विवा. 2009)
माता-पिता: रागव कोप्पीकर, Bairal Koppikar
बच्चे: रियाना नारंग
आने वाली फ़िल्म: अयलान
शादी की जगह: ISKCON temple Mumbai, मुम्बई

ईशा कोप्पिकर ताइक्वांडो में ब्लैक बैल्ट हैं। अपने अंक ज्योतिषी की सलाह से ईशा ने अपने नाम की स्पेल्लिंग में दो बार फेरबदल किया। जिसमें पहले ishaa koppikar और दूसरी बार में eesha koppikhar बनीं। परन्तु 2015 में इन्होंने एक बार फिर से अपने नाम की असल स्पेलिंग लिखना शुरू कर दिया।
1998 में ईशा तमिल की डेब्यू फ़िल्म काढल कविथाई के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के किरदार के फिल्मफेयर अवार्ड से नवाज़ी गईं। 2003 में स्टारडस्ट अवार्ड में कंपनी फ़िल्म के लिए इनको सबसे आकर्षक चेहरे नये चेहरे का खिताब दिया गया।
अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर का जन्म 19 सितम्बर 1976 को मुंबई के एक कोंकणी परिवार में हुआ था। ईशा ने अपनी पढ़ाई मुंबई से पूरी की। इस दौरान ईशा का झुकाव मॉडलिंग की तरफ हुआ और उन्होंने मॉडलिंग में किस्मत आजमाने की सोची। इसके लिए उन्होंने कुछ फोटोशूट भी करवाए, जिसकी बदौलत ईशा को अपने करियर की शुरुआत में ही कई अच्छे विज्ञापनों में काम करने का मौका मिला। ईशा ने 1995 में मिस इंडिया कांटेस्ट में हिस्सा लिया, जिसमें उन्हें मिस टैलेंट के क्रॉउन से नवाजा गया। इन्होंने तमिल फिल्म 'चंद्रलेखा' से एक्टिंग डेब्यू किया। इसके बाद बॉलीवुड का रुख किया। 
ईशा कोप्पिकर का फिल्मी करियर कुछ ज्यादा खास नहीं रहा है और न ही इंडस्ट्री में उनको उस तरह की सफलता मिली। हालांकि, सपोर्टिंग एक्ट्रेस के तौर पर इन्होंने अपनी ठीक-ठाक पहचान बना ली। बता दें कि ईशा कोप्पिकर ने साल 1997 में फिल्म 'एक था दिल एक थी धड़कन' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। बॉलीवुड में ईशा कोप्पिकर को अच्छी पहचान मिली फिल्म 'कंपनी' के खल्लास गाने से। यह आइटम नंबर काफी हिट हुआ था और इसके बाद ईशा कोप्पिकर को 'खल्लास गर्ल' कहा जाने लगा। ईशा कोप्पिकर अभिनय और डांस के साथ ही राजनीति में भी सक्रिय हैं। इसके अलावा ईशा कोप्पिकर ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हैं। उन्होंने काफी अवसरों पर ताइक्वांडो वाला अपना टैलेंट दिखाया है। 
ईशा कोप्पिकर ने टिम्मी नारंग से शादी की है। उनकी एक तीन साल की बेटी है। हालांकि उनका नाम एक्टर इंदर कुमार के साथ भी जुड़ा था। दोनों के रिश्ते को लेकर काफी चर्चाएं उठी थीं, लेकिन साल 2009 में उन्होंने टिम्मी से शादी कर ली। ईशा भले ही बॉलीवुड में ज्यादा नाम न कमा पाई हों लेकिन अब वह करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईशा कोप्पिकर की नेट वर्थ 44 करोड़ रूपये है

📽️
2007 राख 
2007 सलाम-ए-इश्क 
2006 डॉन 
2006 36 चाइना टाउन 
2006 डरना जरूरी है 
2005 क्या कूल हैं हम 
2005 मैंने प्यार क्यूँ किया 
2004 रुद्राक्ष 
2004 एक से बढ़कर एक 
2004 हम तुम 
2003 पिंजर 
2003 दिल का रिश्ता 
2003 कयामत 
2003 डरना मना है
2001 प्यार इश्क और मोहब्बत 
2001 आमदनी अठन्नी खर्चा रुपइया 
2000 फ़िज़ा

निशि कोहली

निशि कोहली

🎂जन्म 1935 जनवरी 01
 
सियालकोट , फिर पंजाब , ब्रिटिश भारत में
राष्ट्रीयता
भारतीय
पेशा
अभिनेत्री

के लिए जाना जाता है
रेलवे प्लेटफार्म
पिंड दी कुड़ी
जीवनसाथी
राजकुमार कोहली
बच्चे
अरमान कोहली , गोगी कोहली
निशी एक जानी-मानी पंजाबी एक्ट्रेस हैं, जो हिंदी फिल्मों में कोई बड़ी कलाकार नहीं हैं, लेकिन वह पंजाबी सिनेमा में एक बड़ा नाम हैं। जबकि उन्हें हिंदी सिनेमा में माध्यमिक नक्षत्र में लिया गया था, उन्होंने पंजाबी फिल्मों में ए-श्रेणी की फिल्मों में अभिनय किया था, शॉ फिल्म फेस्टिवल में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते थे। पंजाबी सिनेमा में उनकी प्रमुख कृतियों में प्रेमनाथ के साथ "जट्टी मैं पंजाब दी" और उनके साथ "सतलुज दे कंधे" जैसी फिल्में शामिल हैं। बलराज साहनी . निशी पंजाबी सिनेमा में ब्लैक एंड व्हाइट युग की अभिनेत्री थीं, लेकिन बाद में उन्हें बॉलीवुड की रंगीन फिल्मों में भी अभिनय करने का मौका मिला और उन्होंने राज कपूर , बलराज साहनी, भारत भूषण , हेलेन जैसे भारतीय सिनेमा के प्रमुख सितारों के साथ अभिनय किया। अशोक कुमार , शम्मी कपूर , मधुबाला, राजेंद्र कुमार और बॉलीवुड के अन्य शीर्ष अग्रणी सितारे। जहां उन्हें पंजाबी फिल्मों में एक प्रमुख अभिनेत्री के रूप में चुना गया, वहीं हिंदी फिल्मों में उन्हें माला सिन्हा, मधुबाला या वैजयंतीमाला जैसी नायिकाओं के साथ सहायक भूमिका निभाते देखा गया। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में 'मैं नशे में हूं', 'गंवार', 'फागुन', 'बॉय फ्रेंड', 'नया कानून' और 'रेलवे प्लेटफॉर्म' शामिल हैं। हालाँकि, वह बी-टाउन में भी कुछ मुख्य भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहीं, लेकिन उन्हें पंजाबी फिल्मों में ही कुछ अच्छी भूमिकाएँ मिलीं। बाद में उन्होंने निर्माता राज कुमार कोहली से शादी कर ली, जिन्होंने नागिन और जानी दुश्मन (दोनों 1979 और 2002 में) जैसी स्नेक वुमन थ्रिलर बनाई।

उन्होंने हिंदी में 68 फिल्मों में काम किया है और बॉलीवुड में अपना जादुई जादू छोड़ा है। उनके अच्छे लुक और स्क्रीन प्रेजेंस ने अक्सर उन्हें प्रमुख हिंदी अभिनेत्रियों के साथ राजकुमारी या यहां तक ​​कि अमीर महिला की भूमिकाएं दीं। वह बेहद खूबसूरत थी और उसका चेहरा फोटोजेनिक था। निशी कोहली का एक बेटा अरमान कोहली और एक बेटी गोगी कोहली है। निशि के बेटे भी एक अभिनेता हैं जिन्होंने अपने पिता की बदले की आग और राज तिलक जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी। निशी कोहली ने अपने बेटे को भी अपने पति के प्रोडक्शन की फिल्म से लॉन्च किया था, लेकिन इसके बाद एक्टर बिग बॉस जैसे टीवी शो में नजर आए। उनका बेटा सलमान खान की सबसे महंगी फिल्म ' प्रेम रतन धन पायो ' से वापसी की थी ।

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1969 -  नानक नाम जहाज है
1969 - दारा सिंह के साथ डंका
1966 -  दारा सिंह के साथ दुल्ला भट्टी
1966 -  जेतो के रूप में लाइये तोड़ निभाइये
1965 - धरती वीरां दी
1964 -  मैं जट्टी पंजाब दी
1963 -  लाजो
1963 - सपनी
1963 -  पिंड दी कुड़ी
1962 - बंटो
1962 - ढोल जानी
1961 - गुगुद्दिड्डी
1961 -  गुड्डी
1961 - जीजा जी
1959 -   बंटो के रूप में भांगड़ा
हिंदी फ़िल्में 
1955 -   श्रीमती कपूर  के रूप में रेलवे प्लेटफार्म
1955 -   रूप  के रूप में चार पैसे
1958 -  फागुन  राजकुमारी  के रूप में
1959 -   रीता बख्शी  के रूप में मैं नशे में हूं
1959 - क्या ये बम्बई है
1959 -  इंसान जाग उठा  हंसा / रिनी के रूप में
1960 -   बिमला  के रूप में तू नहीं और सही
1961 -   सुषमा  के रूप में बॉय फ्रेंड
1964 -  हरक्यूलिस
1964 -  दारासिंह: आयरनमैन  मधुमती एच. सिंह के रूप में
1964 -  बादशाह  शीबा/टिंगू  के रूप में
1965 -   शबाना के रूप में लुटेरा
1970 -  गंवार  श्रीमती राय  के रूप में

अभिनेत्री निशी कोहली को हिंदी और पंजाबी सिनेमा में उनके शानदार लुक और दमदार अभिनय के लिए याद किया जाएगा

रूपेश

रूपेश कुमार हिन्दी फ़िल्मों के एक चरित्र अभिनेता थे, जो खलनायक की भूमिका के लिए प्रसिध्द थे। अपनी फ़िल्मी यात्रा के दौरान उन्होने 100 से अधिक फ़िल्मो मे काम किया। वे अभिनेत्री मुमताज़ के चचेरे भाई थे। 

🎂जन्म: 16 जनवरी 1946, मुम्बई
⚰️मृत्यु : 29 जनवरी 1995, मुम्बई
कुमार का जन्म मुंबई में अब्बास फरशाही के रूप में हुआ था। वह अली असगर फरशाही (पुणे शहर, मंडई के असगर सेठ) और मरियम की सबसे बड़ी संतान थे। वह पुणे के दस्तूर स्कूल के छात्र थे। बचपन से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी। उनका परिवार पुणे में रेस्तरां और बेकरी व्यवसाय में था लेकिन उन्होंने अभिनेता बनना चुना। कुमार को प्यार से दादाश (फारसी में भाई का अर्थ) के नाम से जाना जाता था। वह अपनी चचेरी बहन अभिनेत्रियों मुमताज और मलिका के बहुत करीब थे । उनकी सबसे बड़ी बेटी की शादी दिलीप कुमार के भतीजे जाहिद खान से हुई है और उनके दो बच्चे हैं।

29 जनवरी 1995 को, एक पुरस्कार समारोह में भाग लेने के दौरान कुमार को दिल का दौरा पड़ा और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। 49 वर्ष की आयु में अस्पताल ले जाते समय एम्बुलेंस में उनकी मृत्यु हो गई।

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1995 पापी देवता कुंदन 
1994 आ गले लग जा 
1993 मेरी आन
1990 पति पत्नी और तवायफ़ 
1990 वर्दी 
1989 गुरु रुपेश 
1989 ज़ुर्रत 
1989 मुज़रिम 
1989 दाता जी 
1988 ज़ख्मी औरत राज 
1988 आखिरी अदालत 
1986 जाल 
1986 इंसाफ़ की आवाज़ 
1986 पाले ख़ान 
1986 मुद्दत 
1985 निशान 
1985 हम दोनों 
1985 प्यार झुकता नहीं
1984 आशा ज्योति 
1984 राम तेरा देश 
1984 माटी माँगे खून 
1983 सौतन 
1983 बड़े दिल वाला 
1982 जानवर
1981 महफ़िल 
1980 दो प्रेमी 
1980 हम पाँच 
1980 सबूत 
1980 यारी दुश्मनी 
1979 सावन को आने दो
1979 अमर दीप 
1979 द ग्रेट गैम्बलर 
1979 मुकाबला 
1979 राधा और सीता
1978 खून की पुकार भीमा 
1978 दिल और दीवार 
1977 जय विजय 
1977 चाचा
1977 कर्म 
1977 दिलदार 
1977 कसम कानून की 
1976 शंकर दादा 
1976 नाच उठे संसार 
1975 दफ़ा 302
1975 धोती लोटा और चौपाटी 
1974 पाप और पुण्य 
1973 प्रभात 
1973 लोफर 
1972 सीता और गीता 
1971 चाहत 
1971 कल आज और कल 
1971 अंदाज़ 
1970 माँ और ममता 
1970 नया रास्ता सूरज
1970 जीवन मृत्यु 
1969 जीने की राह
1969 बंधन 
1968 सपनों का सौदागर

शकीला

शकीला एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से दक्षिण भारत के सिनेमा में अभिनय किया है। शकीला ने 18 साल की उम्र में एक सहायक अभिनेत्री के रूप में फ़िल्म प्लेगर्स से शुरुआत की।
🎂जन्म की तारीख और समय:01 जनवरी 1935, अफ़ग़ानिस्तान
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 20 सितंबर 2017, मुम्बई
पति: वाई॰ एम॰ इलियास (विवा. 1963)
बहन: Noorjahan
भांजियां या भतीजियां: तस्नीम काज़ी, फिरदौस काज़ी, कौसर काज़
शकीला का जन्म नेल्लोर स्थित एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनकी मां चांद बेगम, आंध्र प्रदेश के नेल्लोर की थीं । उनके छह भाई-बहन थे और उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मद्रास के छह अलग-अलग स्कूलों से की। उसके दादा एक अफगान थे।
शकीला एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से दक्षिण भारत के सिनेमा में अभिनय किया है।शकीला ने 18 साल की उम्र में एक सहायक अभिनेत्री के रूप में फ़िल्म प्लेगर्स (1995) से शुरुआत की। वह लगभग 250 फिल्मों में दिखाई दीं, जिनमें से अधिकांश सॉफ्टकोर थीं,जिसने उन्हें 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में एक प्रमुख सेक्स सिंबल बना दिया।
उन्होंने कई बी ग्रेड फिल्मों और सॉफ्ट-पोर्न फिल्मों में अभिनय किया।मलयालम में उनकी एक बड़ी हिट किन्नरथुंबिकाल थी, जिसने उन्हें सुर्खियों में ला दिया था और इसके परिणामस्वरूप युवाओं से लेकर बूढ़े तक के लिए उनके मन में एक अनहोनी हो गई थी। अपनी शुरुआती फिल्मों में उन्होंने कुछ विवादास्पद टॉपलेस सीन किए, जब तक कि वे नज़र नहीं आए। उनकी बी-ग्रेड फिल्मों को लगभग सभी भारतीय भाषाओं में डब और रिलीज़ किया गया। उनकी फिल्मों को नेपाली, चीनी और सिंहल जैसी विदेशी भाषाओं में डब किया गया था। कई फिल्मों में अभिनय करने के बाद, भारत में सॉफ्ट-पोर्न फिल्मों को बोलचाल की भाषा में "शकीला फिल्में" कहा जाने लगा।शकीला ने अपने टॉपलेस सीन करने के लिए एक बॉडी डबल सूर्या भानु को हायर किया।

शकीला 2003 से तमिल, तेलुगु और कन्नड़ भाषा की फिल्मों में पारिवारिक चरित्र भूमिकाओं में दिखाई देने लगीं। उन्होंने अपनी आत्मकथा मलयालम में लिखी, जिसमें उनका परिवार, उनकी पृष्ठभूमि, साथ ही साथ उनके परिचित फिल्मी हस्तियों, राजनेताओं और बचपन के दोस्तों के साथ थे।

जनवरी 2018 में, उसने एक अभिनेता के रूप में अपनी 250 वीं फिल्म शीलवती की घोषणा की, निर्माण शुरू करेगी
2002 में, शकीला ने घोषणा की कि वह अब बी ग्रेड फिल्मों में अभिनय नहीं करेगी। शकीला ने 2013 में अपनी आत्मकथा शकीला: आत्ममाता को रिलीज़ किया।शकीला ने एक ट्रांसजेंडर बेटी थंगम को गोद लिया है।
CID की शकीला का निधन, परियों की रानी के रूप में मशहूर थीं
गुजरे जमाने की मशहूर अभिनेत्री शकीला का निधन हो गया है. वो 82 साल की थी. ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमा के दौरान उनका रुतबा किसी सुपरस्टार से कम नहीं था.

रविवार, 17 सितंबर 2023

असित् सेन

असित सेन
🎂जन्म 13 मई, 1917
जन्म भूमि गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 18 सितम्बर, 1993
पति/पत्नी मुकुल सेन
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र सिनेमा जगत
मुख्य फ़िल्में '20 साल बाद', 'चांद और सूरज', 'भूत बंगला', 'नौनिहाल', 'ब्रह्मचारी', 'यकीन और आराधना', 'प्यार का मौसम', 'पूरब और पश्चिम' आदि
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी असित सेन ने 200 से अधिक बॉलीवुड फ़िल्मों में हास्य और चरित्र अभिनेता का किरदार निभाकर अपने अभिनय की अलग पहचान बनाई।
असित सेन 

🎂जन्म: 13 मई, 1917, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश; 
⚰️मृत्यु: 18 सितम्बर, 1993) 

हिंदी सिनेमा के कॉमेंडी किंग कहे जाते थे। उन्होंने चार दशक तक बॉलीवुड पर चरित्र अभिनेता और हास्य कलाकार के रूप में अपनी खास पहचान बनाकर दर्शकों को अपनी अदाओं से लोट-पोट होने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने 200 से अधिक बॉलीवुड फ़िल्मों में हास्य और चरित्र अभिनेता का किरदार निभाकर अपने अभिनय की अलग पहचान बनाई। असित सेन ने बांग्ला फ़िल्म 'अमानुष' और 'आनंद आश्रम' सहित अनुसंधान में भी काम किया।

परिचय
असित सेन का जन्म 13 मई, 1917 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में हुआ था। उन्हें फोटोग्राफी का बहुत शौक था, इसलिए उन्होंने गोरखपुर में सेन फोटो स्टूडियो खोला। असित सेन की पत्नी का नाम मुकुल सेन था, जो कोलकाता की रहने वाली थीं। यहीं पर उनकी तबियत खराब हुई। वह पत्नी को इलाज के लिए बॉम्बे लेकर गए, लेकिन कुछ ही माह के बाद उनकी मौत हो गयी।

असित सेन ने अपने अभिनय की शुरुआत दुर्गाबाड़ी में चलने वाले कई बांग्ला नाटकों में अभिनय से किया। सन 1950 में वह कोलकाता अपने ससुराल गए थे। वहां पर उन्हें एक नाटक कंपनी में एक रोल मिल गया। जब वह प्ले हुआ तो फ़िल्म निर्देशक विमल रॉय उनके अभिनय ने उन्हें खासा प्रभावित हुए और वह उन्हें लेकर मुंबई चले गए।

प्रमुख फ़िल्में
असित सेन ने 200 से अधिक फ़िल्मों में काम किया। जिसमें उनकी 1963 में बनी फ़िल्म 'चांद और सूरज', 1965 में 'भूत बंगला', 1967 में 'नौनिहाल', 1968 में 'ब्रह्मचारी', 1969 में 'यकीन और आराधना', 'प्यार का मौसम', 1970 में 'पूरब और पश्चिम', 'दुश्मन', 'मझली दीदी', 'बुड्ढा मिल गया' जैसी फ़िल्मों में अभिनय किया। 1971 में 'मेरा गांव मेरा देश', 'आनंद', 'दूर का राही', 'अमर प्रेम' जैसी यादगार फ़िल्मों में अभिनय किया। 1972 में 'बॉन्बे टू गोवा', 'बालिका वधू', 1976 में 'बजरंग बली', 1977 में 'आनंद' आश्रम सहित 200 से अधिक फ़िल्मों में अपने हास्य अभिनय और चरित्र किरदार का लोहा मनवाया।

निधन
हास्य कलाकार टुनटुन, जीतेंद्र, राजेश खन्ना, संजीव कुमार और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन से उनका खासा दोस्ताना रहा। यह सभी उनके काफी करीब रहे। इनके साथ उन्होंने कई यादगार फ़िल्मों में काम भी किया। असित सेन हास्य अभिनेता के साथ एक सरल हृदय इंसान भी थे। उनका निधन 18 सितंबर, 1993 को 76 साल की उम्र में हो गया।




शबाना आजमी

शबाना आज़मी
🎂जन्म 18 सितम्बर, 1950
जन्म भूमि हैदराबाद, भारत
अभिभावक पिता- कैफ़ी आज़मी, माता- शौकत आज़मी
पति जावेद अख़्तर
प्रख्यात बॉलीवुड पटकथा लेखक जावेद अख्तर और उनकी पत्नी शबाना आजमी जो एक सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं , के कोई संतान नहीं है ।

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'अंकुर', 'फ़ायर', 'पार', 'अमर अकबर अंथोनी', 'शतरंज के खिलाड़ी', 'अमरदीप', 'अतिथि', 'अर्थ', 'मासूम' तथा 'स्पर्श' आदि।
पुरस्कार-उपाधि 'गांधी इंटरनेशल अवार्ड फॉर पीस', सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' (पाँच बार),
प्रसिद्धि अभिनेत्री
विशेष योगदान प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में शबाना आज़मी का योगदान उल्लेखनीय है। 'फायर' जैसी विवादास्पद फ़िल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया।
नागरिकता भारतीय

 आज़मी ने 1973 में अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत की। उनकी पहली फ़िल्म थी श्याम बेनेगल की 'अंकुर'। अंकुर जैसी आर्ट फ़िल्म की सफलता ने शबाना आज़मी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
शबाना आज़मी जन्म- 18 सितम्बर, 1950, हैदराबाद, भारत) हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। वे एक ऐसी मंझी हुई अदाकारा हैं, जो हर अभिनय के अनुरूप उसी साँचे में ढल जातीं हैं। उन्होंने हिन्दी फ़िल्मों में तरह-तरह के रोल अदा किये हैं। वह आज भी फ़िल्मों में सक्रिय हैं। एक अभिनेत्री होने के साथ-साथ शबाना आज़मी सामाजिक कार्यों में भी समान रूप से जुड़ी रहतीं हैं। शबाना आज़मी हिन्दी सिनेमा के मशहूर लेखक और संगीतकार जावेद अख़्तर की पत्नी हैं। अपने दौर में शबाना आज़मी को स्मिता पाटिल की ही तरह श्रेष्ठ अभिनेत्रियों में गिना जाता था।

परिचय
🎂शबाना आज़मी का जन्म 18 सितंबर, 1950 को हैदराबाद में हुआ था। उनके पिता कैफ़ी आज़मी प्रसिद्ध शायर थे। उनके भाई बाबा आज़मी एक सिनेमेटोग्राफर हैं। शबाना आज़मी का बचपन कलात्मक माहौल में बीता। पिता मशहूर शायर कैफ़ी आज़मी और माँ रंगमंच की अदाकारा शौकत आज़मी के सान्निध्य में शबाना आज़मी का सुहाना बचपन बीता। माँ से विरासत में मिली अभिनय प्रतिभा को सकारात्मक मोड़ देकर शबाना ने हिन्दी फ़िल्मों में अपने सफर की शुरुआत की।

विवाह
शबाना आज़मी ने हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर लेखक जावेद अख़्तर से विवाह किया। जावेद पहले से शादी-शुदा थे, लेकिन फिर भी शबाना के प्यार में उन्होंने तलाक लेकर शादी की। पति जावेद अख़्तर के सक्रिय सहयोग ने शबाना आज़मी के हौसले को बढ़ाया और वे फ़िल्मों में अभिनय के रंग भरने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक मंचों पर देश और समाज से जुड़ी अपनी चिंताएं अभिव्यक्त करने लगीं।

फ़िल्मी कॅरियर
शबाना आज़मी ने 1973 में अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत की। उनकी पहली फ़िल्म थी श्याम बेनेगल की 'अंकुर'। अंकुर जैसी आर्ट फ़िल्म की सफलता ने शबाना आज़मी को बॉलिवुड में जगह दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अपनी पहली ही फ़िल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का 'राष्ट्रीय पुरस्कार' हासिल हुआ था। इसके बाद 1983 से 1985 तक लगातार तीन सालों तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। 'अर्थ', 'खंडहर' और 'पार' जैसी फ़िल्मों के लिए उनके अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया, जो एक बेहतरीन अदाकारा के लिए सम्मान की बात है।

'अमर अकबर एंथोनी', 'परवरिश', 'मैं आजाद हूं' जैसी व्यावसायिक फ़िल्मों में अपने अभिनय के रंग भरकर शबाना आज़मी ने सुधी दर्शकों के साथ-साथ आम दर्शकों के बीच भी अपनी पहुंच बनाए रखी। प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में उनका योगदान उल्लेखनीय है। 'फायर' जैसी विवादास्पद फ़िल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया। भारतीय सिनेमा जगत की सक्षम अभिनेत्रियों की सूची में शबाना आज़मी का नाम सबसे ऊपर आता है। जीवन के छठे दशक में प्रवेश करने के बाद भी शबाना आज़मी की ऊर्जा अतुलनीय है। वे आज भी रुपहले पर्दे पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराती हैं। '15 पार्क एवेन्यू' और 'हनीमून ट्रैवेल्स प्राइवेट लिमिटेड' जैसी फ़िल्मों में उनका अभिनय नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों पर हावी रहा।

प्रयोगात्मक सिनेमा में योगदान
प्रयोगात्मक सिनेमा के भरण-पोषण में शबाना आज़मी का योगदान उल्लेखनीय है। 'फायर' जैसी विवादास्पद फ़िल्म में शबाना ने बेधड़क होकर अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रमाण दिया। वहीं, बाल फ़िल्म 'मकड़ी' में वे चुड़ैल की भूमिका निभाती हुई नजर आईं। यदि 'मासूम' में मातृत्व की कोमल भावनाओं को जीवंत किया तो वहीं, 'गॉड मदर' में प्रभावशाली महिला डॉन की भूमिका भी निभाकर लोगो को हैरत मे डाल दिया। भारतीय सिनेमा जगत की सक्षम अभिनेत्रियों की सूची में शबाना आज़मी का नाम सबसे ऊपर आता है।

सम्मान तथा पुरस्कार
मुंबई की झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोगों के लिए कार्य करने के लिए शबाना आज़मी को 'गांधी इंटरनेशल अवार्ड फॉर पीस' प्रदान किया गया। वर्ष 1992-1994 तक वह 'चिल्ड्रन्स फ़िल्म सोसाइटी' की सभापति भी रह चुकी हैं। शबाना आज़मी को पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के 'राष्ट्रीय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है, जो एक रिकॉर्ड है। उन्हें पहली बार 1975 में फ़िल्म 'अंकुर', फिर 1983 में 'अर्थ', 1984 में 'खंडहर', 1985 में 'पार' और 1999 में फ़िल्म 'गॉडफादर' के लिए यह सम्मान दिया गया था।

सामाजिक कार्यकर्ता
किसी ने सच ही कहा है कि जब भी कोई अभिनेत्री कामयाबी की मंजिल तक पहुंचती है तो उसके नाम को कई अभिनेताओं के नाम के साथ जोड़ा जाता है; पर बहुत कम ही अभिनेत्रियां ऐसी होती हैं जो बिना किसी की परवाह किए अपने अंदाज़से जिन्दगी को जीती हैं। उन अभिनेत्रियों में से एक नाम शबाना आज़मी का भी है। सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी शबाना आज़मी ने अपनी नई पहचान बनाई। एड्स के प्रति जागरुकता फैलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। वे 1997 में राज्य सभा की सदस्या मनोनीत की गईं। एक सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारी गंभीरता के साथ निभाने के साथ-साथ उन्होंने स्वयं को किसी राजनीतिक दल से नहीं जोड़ा। किसी भी गंभीर राष्ट्रीय, सामाजिक मुद्दे पर वे अपने विचार को लेकर मुखर रही हैं।

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...