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बुधवार, 27 सितंबर 2023
पी जयराज
गुरुवार, 21 सितंबर 2023
अजरा
बुधवार, 20 सितंबर 2023
रीमा सेन
करीना कपूर अभिनेत्री
गुलशन ग्रोवर
अनूप कुमार
कल्याण कुमार गांगुली उर्फ़ अनूप कुमार का
🎂जन्म 24 मार्च 1927 में हुआ था
⚰️20 सितंबर 1997
अनूप कुमार ने लगभग 75 फिल्मों में अभिनय किया था
अनूप कुमार का जन्म खंडवा, मध्य प्रांत और बरार (अब मध्य प्रदेश) में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था। उनके पिता कुंजलाल गांगुली (गंगोपाध्याय) एक वकील थे और उनकी माँ गौरी देवी एक अमीर परिवार से सम्बन्ध रखती थीं। अनूप कुमार चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर के थे, अन्य तीन अशोक कुमार (सबसे बड़े), सती देवी और किशोर कुमार (सबसे छोटे) थे।
अनूप कुमार को फिल्म चलती का नाम गाड़ी में उनकी भूमिका के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है।
20 सितंबर 1997 में उनका निधन हो गया
#24march
#20sep
शकीला
प्रसिद्ध अभिनेत्री शकीला की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
शकीला एक भारतीय अभिनेत्री और मॉडल हैं, जिन्होंने मुख्य रूप से दक्षिण भारत के सिनेमा में अभिनय किया है। शकीला ने 18 साल की उम्र में एक सहायक अभिनेत्री के रूप में फ़िल्म प्लेगर्स से शुरुआत की।
🎂जन्म01जनवरी1935अफ़ग़ानिस्तान
⚰️मृत्यु:20सितंबर2017मुम्बई
पति: वाई॰ एम॰ इलियास (विवा. 1963)
बहन: Noorjahan
भांजियां या भतीजियां: तस्नीम काज़ी, फिरदौस काज़ी, कौसर काज़ी
अभिनेत्री शकीला का वास्तविक नाम 'बादशाहजहाँ' था। शकीला जी के अनुसार- "मेरे पूर्वज अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के शाही खानदान से ताल्लुक रखते थे। मेरा जन्म 1 जनवरी, 1936 को मध्यपूर्व में हुआ था। राजगद्दी पर कब्ज़े के खानदानी झगड़ों में मेरे दादा-दादी और मां मारे गए थे। मैं तीन बहनों में सबसे बड़ी थी और हम तीनों बच्चियों को साथ लेकर मेरे पिता और बुआ जान बचाकर मुम्बई भाग आए थे। उस वक़्त मैं क़रीब 4 साल की थी।" शकीला जी के मुताबिक़ उनके पिता भी बहुत जल्द गुज़र गए थे। उनकी बुआ फ़िरोज़ा बेगम का रिश्ता शहज़ाद नाम के जिस युवक से हुआ था, वह भी नवाब खानदान के थे। लेकिन शादी होने से पहले ही लन्दन में क्रिकेट खेलते समय उनका निधन हो गया था। ऐसे में बुआ ने ज़िंदगी भर अविवाहित रहने का फ़ैसला कर लिया। तीनों अनाथ भतीजियों का पालन पोषण बुआ ने ही किया। इन तीनों की पढ़ाई-लिखाई भी घर पर ही हुई।
अभिनेत्री शकीला की छोटी बहन नूर भी अभिनेत्री थीं। उनकी सबसे छोटी बहन ग़ज़ाला (नसरीन) साधारण गृहणी थीं। शकीला जी के पिता का जल्द ही निधन हो गया था, उनकी बुआ फ़िरोज़ा बेगम ने उनका तथा बहनों का पालन-पोषण किया था।
उसकी बुआ को फिल्मों का शौक था और वह अपनी भतीजियों को शो में ले जाती थी। कारदार और महबूब खान के साथ उनके पारिवारिक सम्बन्ध थे वास्तव में, यह 'करदार' ही थे जिन्होंने शकीला को फ़िल्म दास्तान (1949) में अभिनय करने का मौका दिया उन्होंने उनका नाम बादशाह जहाँ से शकीला रख दिया और उन्होंने फिल्म में बाल कलाकार के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की, जिसमें सुरैया ने अभिनय किया था उन्होंने जल्दी ही सुरैया के साथ एक और फिल्म में अभिनय किया जिसका शीर्षक दुनिया (1949) था। गुमास्ता (1951), सिंदबाद द सेलर (1952), राजरानी दमयंती (1952), आगोश (1953), शहंशाह (1953), राज महल (1953), अरमान (1953) सहित कई फिल्मों में भूमिकाओं के बाद अंत में उन्हें गुरुदत्त की आर-पार (1954) में अभिनय का अवसर मिला आर-पार में, उन्होंने गुरु दत्त के जीवन की दूसरी महिला कैबरे डांसर की भूमिका निभाई, जिसे समाज द्वारा तिरस्कृत किया जाता है फ़िल्म आर-पार सुपरहिट फिल्म थी और इसके बेहतरीन गाने शकीला पर फिल्माए गए थे। उनकी बहन नूर ने भी आर-पार (1954) में अभिनय किया और बाद में प्रसिद्ध कॉमेडियन जॉनी वॉकर से शादी की और फिल्मों को छोड़ दिया, जैसा कि नसरीन ने किया, जो एक गृहिणी बन गईं।
गुरु दत्त शकीला के अभिनय से बहुत प्रभावित थे और राज खोसला निर्देशित फ़िल्म सी.आई.डी. (1956) में शकीला को अभिनय का मौका दिया शकीला की मौसी उसका करियर संभाल रही थी और वह नहीं चाहती थी कि शकीला को फंतासी फिल्मों में टाइपकास्ट किया जाए, इसलिए उन्होंने फ़िल्म अलीबाबा और फोर्टी थीव्स (1954) के लिए निर्माता से यह सोचकर इतनी बड़ी रकम मांग ली वह शकीला को फ़िल्म में नही लेंगे उस समय उन्होंने 10000 रुपये रकम की डिमांड की थी यह सोचकर कि यह निर्माता को उसे कास्ट करने से रोकेगा, लेकिन निर्माता इतने बड़ी रकम पर भी सहमत हो गये और उसने फिल्म में अभिनय किया। फ़िल्म हिट हो गयी इसका परिणाम यह हुआ कि शकीला बी-ग्रेड पौराणिक और फंतासी फिल्मों में सिमट गई और उसने फिल्म बिरादरी से "अरबी चेहरा" (अरेबियन राजकुमारी) का खिताब अर्जित किया। उन्होंने लालपरी (1954), वीर राजपूतानी (1955), रूप कुमारी (1956), आगरा रोड (1957), अल-हिलाल (1958) आदि में अभिनय किया। उन्होंने "हातिम ताई" (1956) में एक अलौकिक परी की भूमिका निभाई जो अरेबियन नाइट्स की कहानी पर आधारित ए-ग्रेड कलर की हिट फिल्म थी उन्होंने 1957 में कुछ हलचल पैदा की, जब किशोर कुमार के साथ अभिनीत उनकी फिल्म बेगुनाह को रिलीज होने के 10 दिनों के बाद प्रतिबंधित कर दिया गया यह फिल्म डैनी केय अभिनीत हॉलीवुड की नॉक ऑन वुड (1954) की कार्बन कॉपी थी और उस फिल्म के निर्माता अदालत गए और इस फिल्म की आगे की स्क्रीनिंग को रोकने के लिए केस जीत लिया। नतीजतन, इस फिल्म के सभी निगेटीब्स नष्ट कर दिये गये 1958 में, उन्होंने सस्पेंस/थ्रिलर फ़िल्म पोस्ट बॉक्स 999 में सुनील दत्त के साथ अभिनय किया अपने करियर के उत्तरार्ध में, शक्ति सामंत ने उन्हें शम्मी कपूर के साथ चाइना टाउन (1962) में कास्ट किया यह फ़िल्म जबरदस्त हिट रही
अपने चौदह साल के करियर के दौरान, वह प्रसिद्ध अभिनेताओं और निर्देशकों के साथ 50 से अधिक फिल्मों में दिखाई दीं। उसके बाद, उन्होंने फ़िल्म उद्योग छोड़ दिया और शादी कर ली और जर्मनी चली गईं। शादी टूटने के बाद, वह वापस मुंबई आ गई और एक अफगान व्यक्ति से दोबारा शादी की जो भारत में कॉउंसेलेट जनरल थे उनकी एक बेटी मीनाज़ थी वह विदेश में रहने चले गयी 1991 में, उन्हें एक भयानक झटका लगा जब उनकी बेटी की मौत हो गयी त्रासदी को पीछे छोड़ते हुए, वह वापस मुंबई चली गई और अपनी बहनों और दोस्तों के करीब रही। उसने सभी फ़िल्म और टेलीविज़न धारावाहिकों के प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया और वापसी करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह चाहती थी कि प्रशंसक उसे एक युवा, सुंदर नायिका के रूप में याद रखें। 20 सितंबर, 2017 को मुंबई, भारत में 82 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने शक्ति सामंत की चाइना टाउन (1962) में शम्मी कपूर के साथ अभिनय किया। उन्होंने शहीद भगत सिंह (1963) में भी शम्मी कपूर के साथ काम किया। उन्होंने पोस्ट बॉक्स 999 जैसी फिल्मों में भी सुनील दत्त के साथ खूबसूरती से काम किया था।
उन्होंने 1963 में सिनेमा से संन्यास ले लिया, जब उन्होंने वाई एम इलीयास से शादी की और अपने पति के साथ लंदन चली गईं, उनके पति फिल्म उद्योग से नहीं थे। उनके साथ मीनाज़ नाम की एक बेटी थी। मीनाज़ ने 1991 में आत्महत्या कर ली। शकीला की बहन नूर (नूरजहां) की शादी जॉनी वॉकर से हुई थी।
शकीला का 82 वर्ष की आयु में 20 सितंबर 2017 को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। शकीला को महाराष्ट्र के मुंबई के माहिम कब्रिस्तान में दफनाया गया।
ए नागेश्वर
अक्किनेनी नागेश्वर राव मुख्य रूप से तेलुगू सिनेमा में काम करने वाले भारतीय फ़िल्म अभिनेता एवं निर्माता थे। उन्हें मुख्यतः उनके नायिका के अभिनय के लिए जाना जाता था क्योंकि उस समय महिलाओं का फ़िल्मों में अभिनय करना निषिद्ध था।
🎂जन्म20सितंबर1924, रामापुरम (वेंकट राघव पुरम)
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 2014, हैदराबाद
बच्चे:अक्किनेनी नागार्जुन, अक्किनेनी वेंकट, नागा सुशीला, ज़्यादा
पत्नी: अन्नपुर्णा अक्किनेनी (विवा. 1949–2011)
पोते या नाती: नागा चैतन्य, अखिल अक्किनेनी, सुशांत
इनाम: पद्म विभूषण (2011), पद्म भूषण (1988),
ए नागेश्वर राव भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध तेलुगु फ़िल्म अभिनेता और फ़िल्म निर्माता है। इन्हें कला क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा सन् 2011 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान पद्म विभूषण और 1990 में भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
अपने पाँच भाइयों में सबसे छोटे ए. नागेश्वर राव का 20 सितम्बर 1924 को रामपुरम, कृष्णा ज़िला, आंध्र प्रदेश के एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था। इनकी माता का नाम अक्किनेनी पुन्नम्मा और पिता का नाम अक्किनेनी वेंकटरतनम है। परिवार की कमज़ोर आर्थिक स्थिति के कारण इनकी प्रारम्भिक शिक्षा प्राइमरी स्कूल तक ही हो पायी थी। इनके पुत्र 'अक्किनेनी नागार्जुन' प्रसिद्ध अभिनेता हैं।
सन 1941 में मात्र 17 वर्ष की आयु में इन्होंने घंटसाल बालारमैया की तेलुगु फ़िल्म 'सीता राम जननम' (1942) से अपना फ़िल्मी कैरियर आरम्भ किया। इस फ़िल्म में इन्होंने भगवान श्रीराम की भूमिका की।
भारतीय फ़िल्मोद्योग के सबसे बड़े दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज तेलुगू निर्माता-अभिनेता अक्कीनेनी नागेश्वर राव का बुधवार तड़के 22 जनवरी, 2014 को हैदराबाद में निधन हो गया। 91 वर्षीय नागेश्वर राव पिछले कई सालों से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। प्यार से 'एएनआर' कहकर पुकारे जाने वाले नागेश्वर राव के बेटे और अभिनेता नागार्जुन ने कहा कि श्री राव का निधन नींद में ही हो गया। नागेश्वर राव को 'तेनालीराम कृष्णा', 'देवदास', 'माया बाज़ार' और 'मिस्साम्मा' जैसी हिट फ़िल्मों में अभिनय के लिए याद किया जाता है। नागेश्वर राव के परिवार में तीन बेटियां और दो बेटे हैं। उनके पुत्र नागार्जुन को हिन्दी फ़िल्मों के दर्शक भी अच्छी तरह जानते हैं, और नागार्जुन की पत्नी अमला भी हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय कर चुकी हैं। नागेश्वर राव के कई पौत्र भी अभिनेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं। सात दशक से भी अधिक समय तक चले अपने लंबे करियर में नागेश्वर राव ने लगभग 250 तेलुगू और कई तमिल फ़िल्मों में काम किया, और फिलहाल वह 'मनम' शीर्षक से बनाई जा रही फ़िल्म में अभिनय कर रहे थे, जिसमें उनके परिवार की तीनों पीढ़ियों के अभिनेता काम कर रहे थे।
नूर जहां
जुबेदा बेगम
महेश भट्ट
मंगलवार, 19 सितंबर 2023
रोशनी वालिया
प्रणिति परकश
दत्तात्रेय शंकर दावजेकर
प्रिय तेंदुलकर
प्रसिद्ध अभिनेत्री टीवी कलाकार प्रिया तेंदुलकर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
जन्म की तारीख और समय: 19 अक्तूबर 1954, भारत
मृत्यु की जगह और तारीख: 19 सितंबर 2002, मुंबई
पति करन राजदान (विवा. 1988–2002)
भाई: सुषमां तेंदुलकर, राजा तेंदुलकर
माता-पिता:
विजय तेंदुलकर, निर्मला तेंदुलकर
भारत की पहली टीवी स्टार प्रिया तेंडुलकर ने अनेक फिल्मों व टीवी धारावाहिकों में भूमिका निभाई पर संभवतः वे संपूर्ण जीवन अपने सबसे पहले टीवी अवतार "रजनी" के नाम से ही बेहतर पहचानी जाती रहीं। 1985 में निर्मित व बासू चटर्जी द्वारा निर्देशित इस धारावाहिक में उन्होंने भ्रष्टाचार और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ बेखौफ आवाज़ उठाने वाली एक साधारण गृहणी का किरदार निभाया था। वह लेखिका भी थी।
प्रिया प्रसिद्ध नाटककार विजय तेंडुलकर की सुपुत्री थीं। उनका जन्म 19 अक्टुबर, 1954 को हुआ, उनकी दो बहनें और एक भाई था। प्रिया का विवाह अभिनेता व लेखक करण राजदान से 1988 में हुआ। पर यह विवाह सात साल ही चल सका और इसके बाद उनका संबंध विच्छेद हो गया। करण व प्रिया ने "रजनी" और "किस्से मियाँ बीवी के" धारावाहिकों में पती पत्नी के वास्तविक जीवन के किरदार भी निभाये। 1974 में श्याम बेनेगल की फिल्म अंकुर में निभाई भूमिका के कारण प्रिया के अभिनेता अनंत नाग से भी संबंध जोड़े जाते रहे।
प्रिया का प्रारंभ से ही अभिनय की और झुकाव था। 1939 में जब वे स्कूल में थीं, उन्होंने सत्यदेव दुबे के निर्देशन तले गिरीश कर्नाड के लिखे पौराणिक नाटक "हयवदन" में गुड़िया की भूमिका निभाई। इस नाटक में निर्देशिका कल्पना लाज़मी उनकी सह कलाकार थीं। इसके बाद पिग्मेलियन, अंजी, कमला, कन्यादान, सखाराम बाइंडर, ती फूलराणी, एक हठी मुलगी जैसे अनेकों मराठी नाटकों में उन्होंने भूमिकायें कीं। प्रिया ने टीवी पर जहाँ गुलज़ार निर्देशित स्वयंसिद्ध जैसे नारीवादी धारावाहिक में काम किया वहीं "हम पाँच" जैसे हास्य धारावाहिक में फोटो फ्रेम से बोलती मृत बीवी की भूमिका भी अदा की और "द प्रिया तेंडुलकर शो" और "ज़िम्मेदार कौन" जैसे सफल टॉक शो भी किये जिसमें वे काफी आक्रामक तेवर के लिये जानी जाती थीं। अंकुर, मोहरा और त्रिमूर्ती जैसी कुछ हिन्दी फिल्मों में भी उन्होंने काम किया पर कोई उल्लेखनीय भूमिकायें नहीं।
शायद "रजनी" के किरदार और अपने पिता का ही प्रभाव था कि प्रिया सामाजिक मुद्दों के प्रति सदा जागरूक रहीं। उनका व्यक्तित्व खुला और साहसी था। "द प्रिया तेंडुलकर शो" की बुलंदी पर शिवसेना समेत कई राजनीतिक दलों ने उन्हें अपने दल में शामिल करने का प्रयास किया पर वे मन नहीं बना पाईं।
वे स्वयं लघु कथायें लिखती रहती थीं। ज्याचा त्याचा प्रश्न, जन्मलेला प्रत्येकला, असंही व पंचतारांकित उनकी कुछ कृतियाँ हैं, जिनमें से कुछ पुरस्कृत भी हुईं।
19 सितंबर, 2002 में 47 वर्ष की अल्पायु में उनका हृदयाघात से देहांत हो गया। वे कुछ समय कैंसर से भी लड़ती रहीं।
प्रसिद्ध_फिल्में
1974 - अंकुर
1978 - देवता
1983 - माहेरची मानसे, रानीने दाव जिंकाला
1984 - गोंघळत गोंधळ
1985 - मुम्बईचा फौजदार, रजनी (टीवी धारावाहिक)
1987 - कालचक्र
1988 - किस्से मियाँ बीवी के (टीवी धारावाहिक)
1989 - एक शून्य (टीवी धारावाहिक)
1990 - घर (टीवी धारावाहिक)
1994 - मोहरा
1995 - त्रिमूर्ति
1996 - द प्रिया तेंदुलकर शो (टीवी टॉक शो)
1997 - और प्यार हो गया, ज़िम्मेदार कौन (टीवी टॉक शो), गुप्त, हम पाँच (टीवी धारावाहिक)
2000 - राजा को रानी से प्यार हो गया
2001 - प्यार इश्क और मुहब्बत
सोमवार, 18 सितंबर 2023
सूरज संतोष
सुनील सिकंद
कल्पना कार्तिक
ताहिर हुसैन
मेघना नायडू
जया भट्टाचार्य
ईशा कोपियर
निशि कोहली
रूपेश
शकीला
रविवार, 17 सितंबर 2023
असित् सेन
शबाना आजमी
भारत ईरान संबंध
भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...