शुक्रवार, 26 मई 2023

तरसेम सिंह धंधवार

 




*तरसेम सिंह धंधवार*


*🎂जन्म तिथि: 26-मई -1961*


*जन्म स्थान: जालंधर, पंजाब, भारत*


*पेशा: पटकथा लेखक, कार्यकारी निर्माता, फिल्म निर्देशक, फिल्म निर्माता*


*राष्ट्रीयता: भारत*


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तरसेम सिंह धंधवार (जन्म 26 मई 1961), जिन्हें पेशेवर रूप से तरसेम के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय निर्देशक हैं जिन्होंने फिल्मों, संगीत वीडियो और विज्ञापनों में काम किया है।


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तरसेम का जन्म जालंधर , पंजाब में एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता एक विमान इंजीनियर थे। उन्होंने शिमला में बिशप कॉटन स्कूल , दिल्ली में हंस राज कॉलेज में पढ़ाई की, और कैलिफोर्निया के पासाडेना में आर्ट सेंटर कॉलेज ऑफ़ डिज़ाइन से स्नातक हैं ।


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तरसेम ने संगीत वीडियो का निर्देशन करते हुए अपने करियर की शुरुआत की, जिसमें एन वोग द्वारा " होल्ड ऑन " , डीप फ़ॉरेस्ट द्वारा " स्वीट लोलाबी " और रेम के " लूज़िंग माई रिलिजन " शामिल हैं, जिनमें से बाद में 1992 में सर्वश्रेष्ठ संगीत वीडियो, शॉर्ट फॉर्म जीता। ग्रैमी पुरस्कार । उन्होंने नाइके और कोका-कोला जैसे ब्रांडों के लिए विज्ञापनों का निर्देशन किया है । तरसेम की फीचर फिल्म निर्देशन की पहली फिल्म द सेल (2000) थी, जिसमें जेनिफर लोपेज ने अभिनय किया था ।


2003 में, तरसेम ने आज तक के सबसे विस्तृत पेप्सी विज्ञापनों में से एक का निर्देशन किया। इसने क्वीन के " वी विल रॉक यू " के साथ एक ग्लैडीएटर थीम को संयोजित किया। व्यावसायिक रूप से यूरोप और उत्तरी अमेरिका में प्रसारित व्यावसायिक संस्करण में एनरिक इग्लेसियस और अरब दुनिया में प्रसारित संस्करण में अम्र दीब ने अभिनय किया।


तरसेम की दूसरी फिल्म, द फॉल , 2006 के टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में शुरू हुई और 2008 में संयुक्त राज्य अमेरिका में नाटकीय रूप से रिलीज़ हुई। उनकी तीसरी फिल्म 2011 की इम्मोर्टल्स थी ।  उन्होंने " स्नो व्हाइट " की ब्रदर्स ग्रिम कहानी के रूपांतरण का निर्देशन किया , जिसे मिरर मिरर (2012) कहा जाता है। 


2020 में, तरसेम ने लेडी गागा के एकल " 911 " के साथ संगीत वीडियो में अपनी वापसी की , जो 26 वर्षों में उनका पहला था।


2021 में, टोयोटा के लिए उनके सुपर बाउल विज्ञापन में यूएस पैरालिंपियन जेसिका लॉन्ग को गोद लेने की विशेषता ने महत्वपूर्ण आलोचनात्मक प्रशंसा हासिल की। 



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विशेष रूप से प्रदर्शित चलचित्र


द सेल (2000)

द फॉल (2006)

अमर (2011)

मिरर मिरर (2012)

स्व/कम (2015)

डियर जस्सी (पोस्ट-प्रोडक्शन, 2023 में अपेक्षित)


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विशेष रूप से प्रदर्शित चलचित्र


द सेल (2000)

द फॉल (2006)

अमर (2011)

मिरर मिरर (2012)

स्व/कम (2015)

डियर जस्सी (पोस्ट-प्रोडक्शन, 2023 में अपेक्षित)


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पिछले दशकों में सबसे अधिक व्यापक रूप से प्रशंसित और अत्यधिक विपुल सक्रिय वाणिज्यिक निदेशकों में से एक। यहां उनके अधिकांश कार्यों की एक व्यापक सूची है जो उनकी फीचर फिल्मों और संगीत वीडियो के समान ही प्रासंगिक कलात्मक और रचनात्मक कार्य किया गया है।


गुरुवार, 25 मई 2023

सुनील दत

 

सुनिलदत 

*🎂जन्म6 जून 1929*

*🕯️मृत्यु25 मई 2005,*

*🔛महान अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, राजनीतिज्ञ सुनील दत्त की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि*


*सुनील दत्त ने भी कुछ पंजाबी फिल्मों - मन जीते जग जीत (1973), दुख भंजन तेरा नाम (1974) और सत श्री अकाल (1977) में अभिनय किया -इसके अलावा, उन्होंने वास्तव में कभी किसी अन्य पंजाबी फिल्म में काम नहीं किया।*


मंगलवार, 23 मई 2023

गोपाल शर्मा


 

*🕯️मृत्यु 22 मई*

*🎂जन्म 30 दिसंबर*

*रेडियो सिलोन में 11 साल तक एनाउंसर रहे मशहूर एनाउंसर गोपाल शर्मा की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि*


30 दिसंबर सन् 1931 में बिजनौर जनपद के चांदपुर नगर में जन्मे गोपाल शर्मा ने आवाज की दुनिया में वो नाम रोशन किया कि उनके समय का हर गायक और फिल्मी कलाकर उनका दीवाना रहा। हर गायक और कलाकर की तमन्ना होती कि गोपाल शर्मा उन पर नजरें करम कर दें और उनकी गाड़ी चल निकले। जानी-मानी गायिका आशा भोंसले ने तो उन्हें भाई बनाया था। गोपाल शर्मा के बेटे के जन्म पर वह चांदपुर आईं भी थीं।


टीवी से पहले रेडियो युग था। रेडियो कार्यक्रम सुनने के लिए उस समय लाइन लगती थी। आकाशवाणी दिल्ली से शाम को आने वाले किसान भाइयों के कार्यक्रम को सुनने के लिए चौपाल या रेडियो स्वामी के घर पर भीड़ एकत्र हो जाती थी।


सन् 1960 के आसपास रेडियो सिलोन भारत ही नहीं पूरी एशिया में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम प्रस्तुत करता था। विविध भारती शास्त्रीय संगीत पर आधारित कार्यक्रम पेश करता था।

उस पर बजने वाले फिल्मी गाने भी प्राय: शास्त्रीय संगीत पर आधारित होते थे। जबकि रेडियो सिलोन शुद्ध मनोरंजन के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत करता था और उस पर भारतीय फिल्मों के सभी गाने बजते थे।


मनोरंजन के लिए फिल्मों के गाने बजने के कारण रेडियो सिलोन पूरे एशिया में भारतीयों का सबसे पंसदीदा था। गोपाल शर्मा 1956 से 24 अप्रैल 67 तक 11 साल लगातार इस स्टेशन के हिंदी कार्यक्रमों के अनाउंसर रहे।




एक साल की उम्र में गोपाल शर्मा की माता का निधन हो गया। बिना माता की छत्र छाया में पले बढ़े गोपाल शर्मा ने आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए मेरठ कॉलेज मेरठ से बीए की परीक्षा उतीर्ण की। बीए करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भाग्य आजमाने मुंबई पहुंच गए। यहां कुछ बनने के लंबे और अथक संघर्ष में उनकी उस समय के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता बलराज साहनी से मुलाकात हो गई।


कुछ समय उनके ग्रुप में काम किया और बलराज साहनी की सलाह पर रेडियो की दुनिया में प्रवेश कर गए। रेडियो के कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में काम करते समय रेडियो सिलौन के लिए चयन हो गया। रेडियो सिलोन में काम करने के दौरान मेरठ में उनका विवाह हुआ।


रेडियो सिलोन के लिए 11 साल लगातार काम कर गोपाल शर्मा ने एक रिकार्ड बनाया। भारत लौटकर गोपाल शर्मा ने आकाशवाणी के कैजुअल आर्टिस्ट के रूप में काम करने के साथ ही विभिन्न कंपनियों के लिए विज्ञापन बनाने और बड़े कार्यक्रम के संचालन का लंबे समय तक कार्य किया। रेडियो सिलोन से लौटकर गोपाल शर्मा मुंबई में बस गए थे


एक भेंट में अपनी कामयाबी का राज समय का पालन करना बताया था। वह कहते थे कि मैं प्रत्येक कार्यक्रम में निर्धारित समय से पहले पहुंचता रहा हूं। रेडियो सिलोन के 11 साल के कार्यकाल में एक दिन भी देर से नहीं पहुंचा।


अपनी आत्मकथा आवाज की दुनिया के दोस्तों में वह कहते हैं कि विविध भारती में चयन के लिए बुलाए जाने पर उन्होंने कार्य करने से इसलिए इंकार कर दिया कि उस पर सरकारी तंत्र हावी है। कुछ नया करने वालों की कोई कदर नहीं है। अपनी आत्मकथा में गोपाल शर्मा लिखा है कि रेडियो सिलोन पर कार्य करने के दौरान मैं भारत आया था।


एक कार्यक्रम में बीबीसी लंदन के रत्नाकर भारतीय जी से मुलाकात हो गई। उन्होंने तुरंत कहा, शर्मा जी आप कहां रेडियो सिलोन में पड़े हैं। आपका स्थान बीबीसी लंदन है। आप जब चाहें तब आपको बुलवा सकता हूं। मैंने कहा, भारतीय जी बीबीसी लंदन नंबर एक है। लेकिन मेरा मानना यह है कि आपके प्रोग्राम सुनने वाले भारत में गिने चुने हैं। जबकि मेरा प्रोग्राम सुनने वाले एशिया भर में करोड़ों हैं। मैं करोड़ों श्रोताओं का दिल नहीं दुखा सकता। रुपया कमाना मेरा लक्ष्य नहीं है।


गोपाल शर्मा अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि उन्होंने तीन अन्य साथियों के साथ फिल्म अधिकार के भजन माटी कहे कुम्हार में बाल साधु की भूमिका की। मैं सोचता था कि गाने के दो तीन मिनट में स्क्रीन पर मेरा चेहरा एक दो बार दिखाया गया होगा। फिल्म रिलीज हो गई किंतु जेब में इतने पैसे नहीं थे कि फिल्म देख पाते। रेडियो सिलोन पर जाने से पूर्व चांदपुर गया तो हमारे बहुत सीनियर और हाकी के बड़े खिलाड़ी कैलाश मित्तल मेरे से विशेष रूप से मिलने आए। उनका चांदपुर में सिनेमा हाल है। कहने लगे शर्मा जी आपकी फिल्म अधिकार की एंक्टिग से मुझे बहुत आमदनी हुई।


मैंने जगह - जगह आपके नाम का प्रचार कराया कि चांदपुर का तरुण कलाकार गुरू रघुनाथ प्रसाद का लड़का गोपाल शर्मा फिल्म में काम कर रहा है। इसका इतना असर हुआ कि अकेले चांदपुर में फिल्म अधिकार एक साल तक चली। बिजनौर जनपद में कई साल तक यह फिल्म चलाई और इतनी आमदनी हुई कि हमारा एक और सिनेमा हाल बन गया।


मोहम्मद रफी से मुलाकात गोपाल शर्मा लिखते हैं कि मै एक बार भारत आने पर ओपी नैय्यर साहब से मिलने गया। मुझे देखते ही नैय्यर साहब ने कहा कि विदेश जाने की सूचना तो रेडियो से दो ही व्यक्तियों के बारे में दी जाती है, एक तो भारत के प्रधानमंत्री और दूसरे रेडियो सिलोन के गोपाल शर्मा की।


बाते शुरू ही की थीं कि कुछ ही देर में फोन आ गया। नैय्यर साहब ने कहा आप जिनके बारे में पूछ रहें हैं, वे मेरे पास बैठे हैं। उन्होंने मुझे फोन दे दिया। फोन करने वाले मो. रफी थे। वे मुझसे मिलना चाहते थे।


मैंने नैय्यर साहब से आज्ञा ली और रफी साहब से मिलने चला गया।मिलते ही उन्होंने तुरंत मुझे सीने से लगा लिया। बोले जब मैं नया नया मुंबई आया था तो मेरे भाई हमीद साहब ने मेरे लिए खूब भागदौड़ की। मेरा अरमान था कि मुझे जनाब कुंदन लाल सहगल साहब केसाथ गाने का मौका मिले।


मौका मिला भी जूही, जूही, जूही..., मेरे सपनों की रानी..., वाले गीत में। इस गीत के अंत में सोलो लाइन दो बार मैने गाई। संगीत प्रेमियों को यह बात रेडियो सिलोन पर सबसे पहले गोपाल शर्मा जी आप ने ही बताई। महान गायक रफी साहब ही नहीं बल्कि उस समय का हर गायक गोपाल शर्मा से मिलने केलिए उत्सुक रहता था।


रेडियो सिलोन के लगातार 11 साल तक अनांउसर रहे गोपाल शर्मा की शादी मेरठ के पंडित शिव शंकर शर्मा की पुत्री शशि शर्मा से 13 अप्रैल 1964 को हुई। मेरठ का यह परिवार आर्य समाजी था। शशि शर्मा के दादा पंडित तुलसीराम वेदों के बड़े विद्वान थे। इन्होंने संस्कृत से वेदों का हिंदी में अनुवाद किया था। इस शादी की विशेषता यह थी कि इसमें मुंबई से गायक महेंद्र कपूर आए थे।


गोपाल शर्मा ने अपनी पुस्तक आवाज की दुनिया के दोस्तों में इस शादी के बारे में भी विस्तार से बताया है। वह कहते हैं कि शशि के दादाजी की तुलसी प्रेस थी। उस समय उनकी शादी का सब और चर्चा था। अखबारों में खबर छप रही थी। 13 अप्रैल को दो बसों से मेरठ बरात गई थी। इस शादी में गायक महेंद्र कपूर, एक करोड़पति श्रोता सुरेश चंद्र अग्रवाल, आशा भोंसले के सेकेटरी प्राण ऐरी, गुजराती अनाउंसर सहाग दीवान और हिंदी विभाग के वरिष्ठ उद्घोषक शील वर्मा समेत पांच व्यक्ति मुंबई से आए थे।


वे कहते है कि उनके ससुरालवालों को ये पता नहीं था कि उनका दामाद रेडियो सिलोन का प्रसिद्ध उद्घोषक गोपाल शर्मा हैं। महेंद्र कपूर ने14 अप्रैल को सुबह दो बजे से सवेरे छह बजे चार घंटे लगातार बरातियों और घरातियों का मनोरजन किया। महेंद्र कपूर के कार्यक्रम की मेरठ में खूब धूम रही।


14 की शाम को बरात विदा होकर चांदपुर आ गई। रेडियो सिलोन ने उनकी शादी की खुशी में सभी भाषाओं के प्रोग्राम में विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किए। वे कहते हैं कि उनकी शादी की दावत मुंबई के होटल नटराज में हुई थी। व्यवस्था गायक महेंद्र कपूर ने की थी। प्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोंसले ने उन्हें अपना भाई बनाया था। उनके बेटी के जन्म पर वे चांदपुर आई थीं और बेटी का नामकरण किया था। बेटी को नाम दिया था चेतना। बाद में परिवार वालों की सलाह के बाद उसका नाम महिमा कर दिया था।


मुम्बई  में 22 मई 2020 को उन्होंने आखिरी सांस ली। वे 88 साल के थे।

सोमवार, 22 मई 2023

राज मेहरा जी

जन्म-20 मई 1913*

मृत्यु-तिथि अज्ञात,1993

आज 20 मई को, *पुराने ज़माने के भूले बिसरे चरित्र अभिनेता, दिवंगत राज मेहरा जी* के जन्मदिन पर सादर नमन कर उन्हें याद करते है।


              उनके फिल्मी जीवन पर एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है।


*राज मेहरा-फिल्मी जीवन*

*लेखक व संकलनकर्ता-संतोष कुमार मस्के*


1)- *जन्म-20 मई 1913*

2)- *मृत्यु-तिथि अज्ञात,1993*


3)- *फिल्मी सफर-1948 से 1993*

4)- *5 दशक तक 40 वर्ष काम*

5)- *लगभग 400 फिल्मो में चरित्र अभिनेता का रोल*

6)- *किरदार में खासकर पोलिस कमिश्नर,आई जी पोलिस,पोलिस SP, इंस्पेक्टर,जमींदार,रईस,अमीर सेठ,डॉक्टर आदि पात्र*

7)- *फिल्मे-चुनिंदा किरदार*


१)- *पतंगा 1949-गोप के चौकीदार का*

२)- *शारदा 1957-काशीनाथ*

३)- *जिस देश मे गंगा बहती है 1960-SP*

४)- *जब प्यार किसी से होता है 1961-खन्ना*

५)- *वो कौन थी 1962-SP*

६)- *जिद्दी 1964-ठाकुर महेंद्र सिंह*

७)- *नीला आकाश 1965-नीला के पिता*

८)- *आये दिन बहार के 1966- जमींदार*

९)- *तीसरी मंजिल 1966-सुनीता के पिता*

१०)- *पत्थर के सनम 1967- बरगदलाल*

११)- *साजन 1969-इंस्पेक्टर खान*

१२)- *प्यार ही प्यार 1969 -कैलाशनाथ काटजू*

१३)- *आप आये बहार आई 1971-बक्षी*

१४)- *शोर 1972-डॉक्टर*

१५)- *बेईमान 1972-सेठ जमुनादास*

१६)- *राजा रानी 1972- गोवर्धनदास*

१७)- *लोफर 1973-राजेन्द्रनाथ मेहरा*

१८)- *जुगनू 1973-आई जी पोलिस*

१९)- *अमीर ग़रीब 1974-पोलिस कमिश्नर*

२०)- *शिरडी के साईंबाबा 1977- मूर्ति*

२१)- *बेरहम 1980-पोलिस कमिश्नर गुप्ते*

२२)- *पाँचवी मंजिल 1983- पोलिस कमिश्नर घाणेकर*

२३)- *आपके साथ 1986-डॉक्टर*

२४)- *तनबदन 1986-ठाकुर शमशेर सिंह*

२५)- *आँसू बने अंगारे 1993- अंतिम फ़िल्म*

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8)- *फ़िल्म इंडस्ट्री में अच्छे व्यवहार के लिए जाने जाते*

9)- *फ़िल्म फेयर अवार्ड-सर्वश्रेष्ठ सपोर्टिंग एक्टर (फ़िल्म-शारदा 1957)*

10)- *उनकी फिल्मो से कुछ चुनिंदा नग़मे*


१)- *मेरे पियाँ गए रंगून वहाँ से किया है टेलीफुन,तुम्हारी याद सताती है-पतंगा*

२)- *आ अब लौट चले-जिस देश मे गंगा बहती है*

३)- *ये चँदा रूस का ना ये जापान का,ना ये अमरीकन प्यारे ये तो है हिंदुस्तान का-गेटवे ऑफ इंडिया*

४)- *जियाँ हो,जियाँ ओ जियाँ कुछ बोल दो-जब प्यार किसी से होता है*

५)- *छोड़कर तेरे प्यार का दामन-वो कौन थी*

६)- *सुनो सजना पपीहे ने कहा-आये दिन बहार के*

७)- *बच्चे में है भगवान,बच्चा ही जग की शान-नन्हा फ़रिश्ता*

८)- *साजन साजन,पुकारूँ मैं गलियों में-साजन*

९)- *तौबा ये मतवाली चाल-पत्थर के सनम*

१०)- *तुमको भी तो ऐसा ही कुछ,होता होगा ओ सजना- आप आये बहार आई*

११)- *इक़ प्यार का नग़मा है-शोर*

१२)- *आज मौसम बड़ा बेईमान है-लोफर*

१३)- *हो सोनी और मोनी की है जोड़ी अजीब साजन गरीब,सजनी अमीर-अमीर ग़रीब*

१४)- *साँईबाबा बोलो,साँईबाबा बोलो-शिरडी के साईं बाबा*

१५)- *साईनाथ,साईनाथ,साईनाथ तेरे हजारों हाथ- शिरडी के साईंबाबा*

 

रजीत कपूर

 


रजीत कपूर

जन्म तिथि: 22-मई -1960*

*जन्म स्थान: अमृतसर, पंजाब, भारत*

*पेशा: अभिनेता*

*राष्ट्रीयता: भारत*
🔛रजित कपूर के बारे में
रजित कपूर एक भारतीय फिल्म और थिएटर अभिनेता और निर्देशक हैं।
उन्हें 1996 की फिल्म द मेकिंग ऑफ द महात्मा में महात्मा गांधी के चित्रण के लिए जाना जाता है।
अन्य उल्लेखनीय भूमिकाएं मलयालम फिल्म अग्निसाक्षी में नायक उन्नी के रूप में हैं, और काल्पनिक जासूस ब्योमकेश बख्शी नाम की टेलीविजन श्रृंखला में, बसु चटर्जी द्वारा निर्देशित और दूरदर्शन पर प्रसारित होती हैं।
उनकी पहली फिल्म सूरज का सातवां घोड़ा (1992) थी, जिसका निर्देशन श्याम बेनेगल ने किया था।

🔛रजित कपूर ने प्रसिद्ध बंगाली जासूस ब्योमकेश बख्शी की भूमिका टीवी श्रृंखला ब्योमकेश बख्शी (1993) में निभाई। ब्योमकेश बख्शी लोकप्रिय बंगाली लेखक शरदेंदु बंद्योपाध्याय द्वारा बनाया गया एक काल्पनिक चरित्र है । बसु चटर्जी ने बंद्योपाध्याय की कहानियों पर आधारित एक टीवी शो का निर्देशन किया, और रजित कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई। यह शो बहुत लोकप्रिय था और रजित कपूर ने इस शो के माध्यम से मीडिया में अपनी पहली पहचान हासिल की। कपूर भारत में एक बहुत ही प्रमुख थिएटर अभिनेता और निर्देशक भी हैं। उन्होंने 1999 में मलयालम फिल्म अग्निसाक्षी में अभिनय किया , जिसने मलयालम में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई पुरस्कार जीते।, और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया । उन्होंने कई व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों जैसे किक , उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक और राज़ी में भी अभिनय किया है । उनका नवीनतम काम द थ्रेशोल्ड है।

🔛📽️ 1992सूरज का सतवन घोड़ा माणिक मुल्ला श्याम बेनेगल
1994 मम्मो रियाज (वयस्क) श्याम बेनेगल "श्याम बेनेगल की मुस्लिम त्रयी" में पहली फिल्म
चरचर लखिंदर बुद्धदेव दासगुप्ता
1995 सीमित मनुस्कि सदानंद बोरसे जय पटवर्धन
नचिकेत पटवर्धन

मराठी फिल्म
1996 द मेकिंग ऑफ द महात्मा मोहनदास करमचन्द गांधी श्याम बेनेगल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता
सरदारी बेगम सादिक मूसवी श्याम बेनेगल "श्याम बेनेगल की मुस्लिम त्रयी" में दूसरी फिल्म
1998 पाकिस्तान को ट्रेन इकबाल पामेला रूक्स
गुलाम जय विक्रम भट्ट
1999 समर श्याम बेनेगल
अग्निसाक्षी उन्नी श्यामाप्रसाद मलयालम फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए केरल राज्य फिल्म पुरस्कार
2000 हरि-भरी खुर्शीद श्याम बेनेगल
2001 दत्तक सुनील गुल बहार सिंह
सेंसर देव आनंद
ज़ुबैदा रियाज मसूद श्याम बेनेगल "श्याम बेनेगल की मुस्लिम त्रयी" में तीसरी फिल्म
2002 सप्टक डॉ. गुजराल शाजी एन करुण
निषाद डॉ. गोपी गुजराल शाजी एन करुण
जिंदगी खूबसूरत है प्रकाश मनोज पुंज
आबैधा गुल बहार सिंह बांग्ला फिल्म
2003 एक अलग मौसम जॉर्ज केपी शशि
2004 रोक सको टू रोक लो स्वीटी का पति अरिंदम चौधरी
2005 नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो आबिद हसन श्याम बेनेगल
मैंने गांधी को नहीं मारा रोनू चौधरी जह्नू बरुआ
2006 समय सीमा: सिर्फ 24 घंटे डॉ. वीरेन गोयनका तनवीर खान
2007 दाहेक - एक बेचैन मन अजय माथुर अरूप अधिकारी
2008 सज्जनपुर में आपका स्वागत है एकत्र करनेवाला श्याम बेनेगल
2009 दो पैसे की धूप, चार आने की बारिश देबू दीप्ति नवल 2009 के कान फिल्म समारोह में प्रीमियर हुआ
डायरेक्ट-टू-वीडियो

गुलमोहर देवेन गजेंद्र अहिरे
ये मेरा इंडिया अरुण तलरेजा एन चंद्रा
नीला संतरे नीलेश राजेश गांगुली
प्रभात फेरी इंद्र अरूप दत्ता
मरेगा साला राहुल अवस्थी देवांग ढोलकिया
2010 गुजारिश लोक अभियोजक विपिन पटेल संजय लीला भंसाली
शाबाश अब्बा इंस्पेक्टर ऋषभ रेड्डी श्याम बेनेगल
2011 शैतान एमी के पिता बिजॉय नांबियार
डैम 999 शंकरन सोहन राय यूएई-भारतीय सह-निर्माण फिल्म
मोनिका राज जेटली सुषेण भटनागर
2013 सिंह साब द ग्रेट इकबाल अनिल शर्मा
मिशावर रावश्यो अल मामून श्रीजीत मुखर्जी बांग्ला फिल्म
2014 ढिशकियाऊं विकी के पिताजी सनमजीत सिंघलवार
लात मारना डॉ. जयंत वर्मा साजिद नाडियाडवाला
2015 उवा प्रधान अध्यापक जसबीर भाटी
रॉय जासूस वाडिया विक्रमजीत सिंह
2016 अन्ना : किसान बाबूराव हजारे शशांक उदापुरकरा
बार बार देखो पंडित जी नित्या मेहरा विशिष्ट व्यक्ति के रुप मे उपस्थित होना
की और का श्री कुमार बंसल आर बाल्की
2017 एक सज्जन काव्या के पिता राज निदिमोरु और कृष्णा डीके
कामना का वृक्ष फातिमा के पिता मनिका शर्मा
बेगम जान इलियास खान श्रीजीत मुखर्जी
2018 राजी हिदायत खान मेघना गुलज़ार
फिर से... कृष कुणाल कोहली अजय भुइयां
महरम इखलाक सिद्दीकी ज़ैन अनवर ZEE5 पर रिलीज हुई लघु फिल्म [4]
2019 बाइपास रोड प्रताप नमन नितिन मुकेश
22 गज मिताली घोषाल
उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक भारत के प्रधान मंत्री आदित्य धर
2020 फितरत ताहिर अली बेग लघु फिल्म
2021 नेल पॉलिश न्यायाधीश किशोर भूषण कीड़े भार्गव कृष्ण एक कानूनी थ्रिलर, ZEE5 ओरिजिनल फिल्म
2022 जीवन अच्छा है अनंत महादेवन
रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट विक्रम साराभाई माधवन एक बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म ।
कोड नाम: तिरंगा कबीर अली रिभु दासगुप्ता
2023 मिशन मजनू शांतनु बागची


ग्रेट गामा पहलवान (पंजाबी)

 


ग्रेट गामा


*🎂जन्म तिथि: 22-मई -1878*


*😁जन्म स्थान: अमृतसर, पंजाब, भारत*


*मृत्यु तिथि: 23-मई-1960*


*पाकिस्तानी पेशेवर पहलवान*


*पेशा: पेशेवर पहलवान, शौकिया पहलवान*


*राष्ट्रीयता: पाकिस्तान*


*पत्नी: वज़ीर बेगम*

*वज़न: 113 kg*

*बच्चे: असलम पहलवान*

*लंबाई: 1.71 मी*

*माता-पिता: मुहम्मद अज़ीज़ बक्ष*



गुलाम मोहम्मद बख्श बट (22 मई 1878 - 23 मई 1960), जिन्हें द ग्रेट गामा के नाम से जाना जाता है, एक पाकिस्तानी पहलवान थे जो विश्व के अपराजित चैंपियन बने रहे।

वह अपने बाकी दिनों में लाहौर में रहे। अमृतसर में पैदा हुए, फिर ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत में, 1878 में, उन्हें 15 अक्टूबर 1910 को विश्व हैवीवेट चैम्पियनशिप के भारतीय संस्करण से सम्मानित किया गया, और मुक्त हार गए। दुनिया भर में शैली कुश्ती चैंपियन।

52 साल से अधिक के करियर में अपराजित, उन्हें अब तक के सबसे महान पहलवानों में से एक माना जाता है।

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दुनिया में अजेय गामा पहलवान का जन्म 22 मई 1878 ई. को अमृतसर, पंजाब में हुआ था, हालांकि इनके जन्म को लेकर विवाद है। इनके बचपन का नाम ग़ुलाम मुहम्मद था। इन्होंने 10 वर्ष की उम्र में ही पहलवानी शुरू कर दी थी। इन्होंने पत्थर के डम्बल से अपनी बॉडी बनाई थी। उस समय दुनिया में कुश्ती के मामले में अमेरिका के जैविस्को का बहुत नाम था। गामा ने इसे भी परास्त कर दिया था। पूरी दुनिया में गामा को कोई नहीं हरा सका था,बस एक बार कलकत्ता के दंगल में मथुरा के पहलवान "चंद्रसेन टिक्की वाले" ने कुश्ती का दांव मार बेहोश कर हराया था । इस कुश्ती की बहुत चर्चा न जाने क्यों नहीं हुई? हा बाकी उन्हें वर्ल्ड चैंपियन का ख़िताब मिला था। भारत-पाक बटवारे के समय ही ये अपने परिवार के साथ लाहौर चले गए। मई 1960 को लाहौर में ही उनकी मृत्यु हो गई।


गामा ने पहलवानी की शिक्षा अपने मामा इड़ा पहलवान से प्रारंभ की। आगे चलकर इनके अभ्यास में काफी बदलाव आए। जैसे कि, यूँ तो बाकी पहलवानों कि तरह उनका अभ्यास भी सामान्य ही था,परंतु इस सामान्यता में भी असामान्यता यह थी कि वे प्रत्येक मैच एक से नहीं बल्कि चालिस प्रतिद्वंदीयों के साथ एक-साथ लड़ते थे और उन्हें पराजित भी करते थे । गामा रोज़ तीस से पैंतालीस मिनट में, सौ किलो कि हस्ली पहन कर पाँच हजार बैठक लगाते थे, और उसी हस्ली को पहन कर उतने ही समय में तीन हजार दंड लगाते थे । वे रोज़


डेढ़ पौंड बादाम मिश्रण (बादाम पेस्ट)

दस लीटर दूध

मौसमी फलों के तीन टोकरे

आधा लीटर घी

दो देसी मटन

छः देसी चिकन

छः पौंड मक्खन

फलों का रस

एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ अपनी रोज़ कि खुराक के रुप में लिया करते थे ।



🔛जाने-माने कराटे योद्धा और अभिनेता ब्रूस ली गामा पहलवान के बहुत बड़े फैन थे । वे प्रायः अखबार में उन पर लिखे हुए लेख पढ़ा करते थे कि किस तरह से गामा पहलवान ने अपनी शक्ति का विस्तार किया, अपने शरीर को सुदृढ़ बनाया और किस तरह से उन्होंने अपनी शक्ति में वृद्धि की। इन सभी को ब्रूस ली ने भी अपने जीवन में अपनाया और वह भी कसरत के समय दंड बैठक लगाया करते थे। गामा पहलवान की 100 किलो की हस्ली आज भी पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान में संभाल कर, सुरक्षित रूप से रखी हुई है। 22 मई 2022 को, सर्च इंजन गूगल ने गामा को डूडल के साथ उनकी 144वीं जयंती पर याद किया।गूगल ने टिप्पणी की: "गामा की विरासत आधुनिक समय के सेनानियों को प्रेरित करती है। यहां तक कि ब्रूसली भी एक प्रसिद्ध प्रशंसक हैं और गामा की कंडीशनिंग के पहलुओं को अपने स्वयं के प्रशिक्षण दिनचर्या में शामिल करते हैं।


🔛अमेरिकी और यूरोपीय पहलवानों के विरुद्ध द्वंद्वों की विजययात्रा

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अपनी इस विजय यात्रा के दौरान गामा ने कई प्रसिद्ध और आदरणीय पहलवानों को हराया जैसे कि:-


संयुक्त राज्य के डॉक्टर बेंजामिन रोलर

स्विट्जरलैंड के मॉरिस डेरियस

स्विट्जरलैंड के जॉन लेम

स्वीडन के जेस पीटरसन (विश्व चैंपियन)

टैरो मियाके (जापानी जूडो चैंपियन)

जॉर्ज हेकेनस्किमित

संयुक्त राज्य के फ्रैंक गॉच

रहीम बक्श सुल्तानीवाला से अंतिम सामना

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इंग्लैंड से लौटने के तुरंत बाद ही गामा पहलवान का सामना रहीम बक्श सुल्तानी वाला से अलाहाबाद में हुआ । काफी देर तक चलने वाले इस द्वंद्व में अंततः गामा पहलवान को विजय प्राप्त हुई और साथ ही साथ रुस्तम-ए-हिंद का खिताब भी जीत लिया ।जीवन में बहुत समय बाद एक साक्षात्कार में जब उनसे यह पूछा गया कि गामा पहलवान को सबसे मुश्किल टक्कर किसने दी है तो उन्होंने कहा "रहीम बक्श सुल्तानीवाला" ।


ज़ैविस्को से पुनः द्वंद

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रहीम बक्श सुल्तानीवाला पर विजय प्राप्त करने के बाद सन 1916 में गामा पहलवान ने पहलवान पंडित बिद्दु (जो कि उस समय भारत के जाने-माने पहलवानों में से एक थे) का सामना किया और उन पर विजय प्राप्त की।


सन 1922 में वेल्स के राजकुमार भारत के दौरे पर आए और उन्होंने गामा पहलवान को चांदी की एक गदा भेंट की ।


जब 1927 तक गामा पहलवान को चुनौती देने वाला कोई भी पहलवान नहीं बचा तो यह घोषणा हुई की गामा और ज़ैविस्को फिर एक बार आमना- सामना करेंगे । उनकी मुलाकात 1928 में पटियाला में हुई। अखाड़े में आते ही ज़ैविस्को ने अपना सुदृढ़ शरीर और बड़ी-बड़ी मांसपेशियां दिखाई, परंतु गामा पहलवान पहले से काफी दुबले-पतले लग रहे थे । फिर भी गामा पहलवान ने केवल 1 मिनट में ही ज़ैविस्को को धराशाई कर दिया जिससे उन्हें भारतीय-विश्व स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता का विजयी घोषित कर दिया गया और ज़ैविस्को ने भी उन्हें बाघ कहकर संबोधित किया।


जब तक गामा पहलवान 48 वर्ष के हुए तब तक वह भारत के महान पहलवानों में से एक गिने जाने लगे।


बलराम हीरामण सिंह यादव के साथ द्वंद

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ज़ैविस्को पर विजय प्राप्त करने के बाद गामा ने जेज़ पीटरसन पर 1929 को विजय प्राप्त की। यह द्वंद डेढ़ मिनट चला। यह अंतिम द्वंद था जो गामा ने अपने करियर में लड़ा । सन 1940 को हैदराबाद के निज़ाम ने गामा को निमंत्रण दिया जिसमें गामा ने सभी पहलवानों को हरा दिया। निज़ाम ने उसके बाद पहलवान बलराम हीरामण सिंह यादव को गामा से सामना करने के लिए भेजा, जोकि स्वयं कभी भी नहीं हारा था। यह द्वंद बहुत समय तक चला परंतु इसका कोई भी निष्कर्ष नहीं निकला। बलराम हीरामण सिंह यादव उन पहलवानों में से था जिनका सामना करना गामा के लिए भी बहुत मुश्किल था।


भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 को गामा पहलवान पाकिस्तान की तरफ चले गए। जिस समय हिंदू-मुसलमान भाई आपस में लड़ रहे थे, तब भीड़ से कितने ही हिंदू भाइयों को गामा ने बचाया था । अंततः सन 1952 तक गामा ने संन्यास ले लिया। संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपने भतीजे भोलू पहलवान को पहलवानी सिखाई, जिन्होंने लगभग 20 साल तक पाकिस्तान में होने वाले सभी कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लिया।

धीरज कुमार

 


🎂जन्म 1 अक्तूबर 1944
💕पत्नी: ज़ुबी कोचर

,🔛📽️दीदार (1970)
रातों का राजा (1971)

फिल्म रातों का राजा
बहारों फूल बरसाओ (1972)
हीरा पन्ना (1973)
शराफत छोड़ दी मैंने (1973)
रोटी कपड़ा और मकान (1975)
रंगा खुश (1975)
अंगारे (1976)
दाज (1976)
फौजी (1976) (पंजाबी फिल्म)

फाेजी 1974

उधार का सिंदूर (1976)

शेर पुत्तर (1977) पंजाबी फिल्म   
स्वामी (1977)
शिरडी के साईं बाबा (1977)
सरगम (1979 फ़िल्म)
सहती मुराद (1979) (पंजाबी फिल्म)
चोरन नू मोर (1980) (पंजाबी फिल्म)
मांग भरो सजना (1980)
क्रांति (1981)
पांचवीं मंजिल (1983)
पुराना मंदिर (1984)
बेपनाह (1985) शेषनाग के रूप में
कर्म युद्ध (1985) कुंदन के रूप में
" रब्ब दा रेडियो " (2017) हरदीप/दीपा के रूप में

🔛📺टेलीविजन

🎬निर्देशक/निर्माता

कहां गए वो लोग (1986) (निर्देशक)
अदालत (1986)
संसार (1993)
ॐ नमः शिवाय (1997)
धूप छांव (1999)
जैप टैप व्रत (2000)
श्री गणेश (2000) चैनल: सोनी
सच (2001)
जाने अनजाने (2001)
पवन (2004) चैनल: हंगामा टीवी
क्या मुझसे दोस्ती करोगे (2004) चैनल: हंगामा टीवी
हे...ये तो है वो! (2004) चैनल: स्टार वन
ओम नमो नारायण (2004) चैनल: सहारा वन
बंधम
रूबी दुबे हब डब (2005) चैनल: सहारा वन
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मन में है विश्वास (2006) चैनल: सोनी
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इश्क आज कल (2019)


भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...