शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2024

संदीपा धर

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संदीपा धर

🎂02 फ़रवरी 1989
श्रीनगर, कश्मीर, भारत

आवास मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत
जाति
भारतीय
पेशा मॉडल, अभिनेत्री

संदीपा धर एक भारतीय अभिनेत्री हैं।
संदीपा ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 2010 में इसी लाइफ में से की थी।
फिल्म में उनके प्रदर्शन के लिए, उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड, मोस्ट प्रॉमिसिंग न्यूकमर के लिए स्टार स्क्रीन अवॉर्ड और सुपरस्टार ऑफ टुमॉरो के लिए स्टारडस्ट अवॉर्ड के लिए नामांकित किया गया था।
संदीपा ने दबंग 2 में कैमियो किया था.
धर को साजिद नाडियाडवाला की हीरोपंती में उनके प्रदर्शन के लिए आलोचकों की प्रशंसा भी मिली।
धर का जन्म श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर, भारत में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था।वह पेशेवर रूप से प्रशिक्षित डांसर हैं। अपने नृत्य के लिए कई पुरस्कार जीते हैं, उन्होंने वाणी गणपति से 8 साल तक भरतनाट्यम का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने श्यामक डावर और टेरेंस लुईस से 4 साल तक जैज़ और कंटेम्परेरी में भी प्रशिक्षण लिया।

धार की शिक्षा सेंट माइकल कॉन्वेंट स्कूल, मनकापुर और नेशनल पब्लिक स्कूल, इंदिरानगर में हुई। इसके बाद उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की।

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2024

समिता शेट्टी

#02feb 

समिता शेट्टी
🎂जन्म02 फ़रवरी 1979 
मैंगलोर, कर्नाटक , भारत

शिक्षा
सिडेनहैम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स
एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय
सेंट्रल सेंट मार्टिन्स
व्यवसायों अभिनेत्री ,आंतरिक डिज़ाइनर

रिश्तेदार

शिल्पा शेट्टी (बहन)
राज कुंद्रा (जीजा)
शेट्टी का जन्म 02 फरवरी 1979 को मुंबई में एक तुलु भाषी बंट परिवार में हुआ था।  उनके दिवंगत पिता सुरेंद्र और उनकी मां सुनंदा फार्मास्युटिकल उद्योग में टैम्पर-प्रूफ वॉटर कैप के निर्माता थे। शिल्पा शेट्टी उनकी बड़ी बहन हैं।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट एंथोनी गर्ल्स हाई स्कूल, मुंबई से की। सिडेनहैम कॉलेज से वाणिज्य में अपनी डिग्री पूरी करने के बाद , शेट्टी ने एसएनडीटी कॉलेज , मुंबई से फैशन डिजाइनिंग डिप्लोमा किया । इसके बाद उन्होंने फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ​​के साथ अपनी इंटर्नशिप शुरू की , लेकिन मनीष ने उनमें एक चमक देखी और उन्हें अपने अभिनय करियर के लिए तैयार करने का सुझाव दिया। 2011 में, शेट्टी ने इंटीरियर डिजाइन में अपने जुनून का पालन करने का फैसला किया।उनका पहला एकल प्रोजेक्ट रॉयल्टी, मुंबई का एक क्लब था । बाद में, इंटीरियर डिज़ाइन के प्रति उनके प्यार ने उन्हें लंदन के सेंट्रल सेंट मार्टिंस और इंचबाल्ड स्कूल ऑफ़ डिज़ाइन से डिप्लोमा करने के लिए प्रेरित किया ।

शेट्टी एक फिटनेस और वेलनेस उत्साही हैं। वह सक्रिय रूप से कसरत, ध्यान और योग को बढ़ावा देती हैं। शेट्टी को पेंटिंग करना भी पसंद है।शमिता की पहली फ़िल्म यश राज फ़िल्म्स की आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्देशित मोहब्बतें थी। उनके किरदार इशिका के लिए उन्हें अपनी सहकर्मी किम शर्मा और प्रीति झंगियानी को आईफा का बेस्ट डेब्यू पुरस्कार मिला था। मेरे यार की शादी है और साथिया में उनके आइटम नम्बर की तारीफ़ हुई थी। ज़हर और फरेब उनकी कुछ और फ़िल्में है। बिग बॉस 3 में वो प्रतिभागी थी।

जगजीत सिंह नेगी


#02feb 
21jun 
जीत सिंह नेगी 

🎂जन्म- 02 फ़रवरी, 1925; 
⚰️निधन 21 जून, 2020 
 
उत्तराखंड के ऐसे पहले लोकगायक थे, जिनके गीतों का ग्रामोफोन रिकॉर्ड 1949 में जारी हुआ। जीत सिंह नेगी ने दो हिंदी फिल्मों में भी बतौर सहायक निर्देशक कार्य किया। वह संगीतकार और रंगकर्मी भी थे। वह पहले ऐसे गढ़वाली लोकगायक भी रहे, जिनके किसी गीत का ऑल इंडिया रेडियो से प्रसारण हुआ।
जीत सिंह नेगी उत्तराखंड के ऐसे पहले लोकगायक थे, जिनके गीतों का ग्रामोफोन रिकॉर्ड 1949 में यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी ने जारी किया था। तब पहली बार ऐसा हुआ था, जब किसी उत्तराखंडी लोकगायक के गीतों का रेकॉर्ड उस समय देश की मशहूर ग्रामोफोन कंपनी ने जारी किया। 2 फरवरी, 1925 को पौड़ी जिले के अयाल गांव में जन्मे और वर्तमान में देहरादून के नेहरू कॉलोनी (धर्मपुर) के निवासी जीत सिंह नेगी के इसमें 6 गीत शामिल किए गए थे। जीत सिंह नेगी अपने दौर के न केवल जाने-माने लोकगायक रहे, बल्कि उत्कृष्ट संगीतकार, निर्देशक और रंगकर्मी भी रहे। दो हिंदी फिल्मों में भी उन्होंने बतौर सहायक निर्देशक कार्य किया। ‘शाबासी मेरो मोती ढांगा…’ ‘रामी बौराणी…’ ‘मलेथा की गूल…’ जैसे कई उनके नाटक भी लोकप्रिय हुए।

रेडियो पर पहले गढ़वाली लोकगायक
जीत सिंह नेगी के ‘शाबासी मेरो मोती ढांगा’ को चीनी प्रतिनिधिमंडल ने कानपुर में न केवल रिकॉर्ड किया, बल्कि रेडियो पीकिंग से उसका प्रसारण भी किया। वे पहले ऐसे गढ़वाली लोकगायक थे, जिनके किसी गीत का ऑल इंडिया रेडियो से प्रसारण हुआ।

लोकप्रिय गीत
1950 के दशक की शुरूआत में रेडियो से यह गीत प्रसारित हुआ तो उत्तराखंड से लेकर देश के महानगरों तक प्रवासी उत्तराखंडियों के बीच पलक झपकते ही बेहद लोकप्रिय भी हो गया। इस सुमधुर खुदेड़ गीत के बोल थे, ‘तू होली उंचि डांड्यूं मा बीरा-घसियारी का भेष मां-खुद मा तेरी सड़क्यां-सड़क्यों रूणूं छौं परदेश मा…।’ (तू होगी बीरा उंचे पहाड़ों पर घसियारी के भेष में और मैं यहाँ परदेश की सड़कों पर तेरी याद में भटक रहा हूं-रो रहा हूं।)

निर्देशन कार्य
जीत सिंह नेगी के निर्देशन में 1954-1955 में दिल्ली में आयोजित गढ़वाली नाटक ‘भारी भूल’ का मंचन हुआ। कई अच्छे कलाकार नेगी जी की टोली से जुड़े रहे। मुंबई-दिल्ली-चंडीगढ़ समेत देश के कई प्रमुख नगरों में उस दौर में जीत सिंह नेगी के गीत और नाटक श्रोताओं-दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते थे।

मृत्यु
जीत सिंह नेगी का निधन 21 जून, 2020 को हुआ। उन्होंने अपने धर्मपुर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से लोक कलाकारों के साथ ही प्रदेशवासियों में शोक दौड़ पड़ी। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड के लोकगायक और गीतकार जीत सिंह नेगी के निधन पर शोक व्यक्त किया।

गोपालबाबू गोस्वामी

#02feb
#26nov 
गोपाल बाबू गोस्वामी 

🎂02 फ़रवरी 1941
चांदीखेत, अल्मोड़ा, संयुक्त प्रांत
⚰️निधन नवम्बर 26, 1996

उत्तराखण्ड राज्य के एक सुविख्यात व लोकप्रिय कुमाऊँनी लोकगायक थे।

दिल्ली, भारत
विधायें लोक संगीत
पेशा गायक
वाद्ययंत्र हारमोनियम, मुरली

हिमालय सुर सम्राट स्व•गोपाल बाबू गोस्वामी का जन्म संयुक्त प्रांत के अल्मोड़ा जनपद के पाली पछांऊॅं क्षेत्र में मल्ला गेवाड़ के चौखुटिया तहसील स्थित चांदीखेत नामक गॉंंव में २ फरवरी १९४१ को मोहन गिरी एवम् चनुली देवी के घर हुआ था। गोपाल बाबु ने प्राइमरी शिक्षा चौखुटिया के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। ५वीं पास करने के बाद मिडिल स्कूल में उन्होंने नाम तो लिखवाया, परन्तु ८वीं उत्तीर्ण करने से पूर्व ही उनके पिता का देहावसान हो गया। इसके बाद गोस्वामी जी नौकरी करने पहाड़ के बेरोजगार युवाओं की परम्परानुसार दिल्ली चले गये। वहां वह कई वर्षों तक नौकरी की तलाश में रहे, पहले एक प्राइवेट नौकरी की, कुछ वर्ष डी. जी. आर. में आकस्मिक कर्मचारी के रूप में कार्यरत भी रहे परन्तु स्थाई नहीं हो सके। इस दौरान वे दिल्ली, पंजाब तथा हिमांचल में रहे। पक्की नौकरी न मिल सकने के कारण बाद में उन्हें गाँव वापस आना पड़ा, जहां वह खेती के कार्यों में लग गये।
1970 में उत्तर प्रदेश राज्य के गीत और नाटक प्रभाग का एक दल किसी कार्यक्रम के लिये चौखुटिया आया था, जहाँँ उनका परिचय गोपाल बाबू गोस्वामीजी से हुआ। तत्पश्चात् नाटक प्रभाग से आये हुए एक व्यक्ति ने उन्हें नैनीताल केन्द्र का पता दिया और नाटक प्रभाग में भर्ती होने का आग्रह किया। १९७१ में उन्हें गीत और नाटक प्रभाग में नियुक्ति मिल गई।

प्रभाग के मंच पर कुमाऊँनी गीत गाने से उन्हें दिन-प्रतिदिन सफलता मिलती रही और धीरे धीरे वे चर्चित होने लगे। इसी दौरान उन्होंने आकाशवाणी लखनऊ में अपनी स्वर परीक्षा करा ली। वे आकाशवाणी के गायक भी हो गये। लखनऊ में ही उन्होंने अपना पहला गीत "कैलै बजै मुरूली ओ बैणा" गया था। आकाशवाणी नजीबाबाद व अल्मोड़ा से प्रसारित होने पर उनके इस गीत के लोकप्रियता बढ़ने लगी। १९७६ में उनका पहला कैसेट एच. एम. वी ने बनाया था। उनके कुमाऊँनी गीतों के कैसेट काफी प्रचलित हुए। पौलिडोर कैसेट कंपनी के साथ उनके गीतों का एक लम्बा दौर चला। उनके मुख्य कुमाऊँनी गीतों के कैसेटों में थे - "हिमाला को ऊँचो डाना प्यारो मेरो गाँव", "छोड़ दे मेरो हाथा में ब्रह्मचारी छों", "भुर भुरु उज्याव हैगो", "यो पेटा खातिर", "घुगुती न बासा", "आंखी तेरी काई-काई", तथा "जा चेली जा स्वरास"। उन्होंने कुछ युगल कुमाऊँनी गीतों के कैसेट भी बनवाए। गीत और नाटक प्रभाग की गायिका श्रीमती चंद्रा बिष्ट के साथ उन्होंने लगभग 15 कैसेट बनवाए।

नाटक प्रभाग में नियुक्ति से पहले गोपाल बाबू पहाड़ के मेलों,विभिन्न समाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा आम जनता के बीच में अपनी उपस्थिति दर्ज कर एक निस्वार्थ लोकप्रिय कलाकार के रूप में समाज की चेतना को जागृत करने के लिये मनमोहक लोकगीत गाते थे। स्वयं के द्वारा रचे हुये लोकगीतों को अपने मधुर कंठ के माध्यम से समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन कर उत्कृष्ट समाजसेवा का उदाहरण प्रस्तुत करने वाले गोपाल बाबू सदी के बेहद ही दुर्लभतम कलाकार थे। गोस्वामी जी के मधुर कंठ को लोगों ने भी बहुत पसंद किया था। उनमें यह विशेषता भी थी की वे उच्च पिच के गीतों को भी बड़े सहज ढंग से गाते थे। उनके गाये अधिकांश कुमाऊँनी गाने स्वरचित थे। प्रसिद्ध कुमाऊँनी लोकगाथाओं, जैसे मालूशाही तथा हरूहीत के भी उन्होंने कैसेट बनवाए थे।

गोस्वामी जी ने कुछ कुमाऊँनी तथा हिंदी पुस्तकें भी लिखी थी। जिसमें से "गीत माला (कुमाऊँनी)" "दर्पण" "राष्ट्रज्योति (हिंदी)" तथा "उत्तराखण्ड" आदि प्रमुख थी। एक पुस्तक "उज्याव" प्रकाशित नहीं हो पाई। 55बर्ष की आयु में उन्होंने अनेक उतार-चढ़ाव देखे। 90 के दशक की शुरुआत में उन्हें ब्रेन ट्यूमर हो गया था। उन्होंने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, दिल्ली में आपरेशन भी करवाया। परन्तु वे स्वस्थ नहीं हो सके।26नवम्बर 1996को उनका असामयिक निधन हो गया।
🎧प्रसिद्ध गीत

बेड़ू पाको बारमासा
घुघुती न बासा
कैलै बजै मुरूली
हाये तेरी रुमाला
हिमाला को ऊँचा डाना
भुर भुरु उज्याव हैगो

मृत्यु

गोपाल बाबु गोस्वामी का जीवन गढ़वाली - कुमाउनी संगीत को शीर्ष तक ले गया और अन्त में गोपाल बाबु गोस्वामी की मृत्यु ब्रेन ट्युमर से हुई जिसका इलाज उनके द्वारा दिल्ली से कराया गया था परन्तु इस रोग से उन्हें इजात ना मिल पाई और 26 नवम्बर 1996को गोपाल बाबु गोस्वामी का शरीर पंचतत्वों में विलीन हो गया |

गोपाल बाबु गोस्वामी के गीत आज भी हर युवा ने सुने और कहीं ना कहीं से जुबान पर निकल आते हैं गोपाल बाबु गोस्वामी आज भी हमारे दिलो में जीवित हैं।

रमेश देव

#30jan 
#02feb 

रमेश देव 
🎂जन्म 30 जनवरी 1926
 ⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 02 फ़रवरी 2022, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल आणि मेडिकल रिसर्च इन्स्टिट्यूट, मुम्बई
पत्नी: सीमा देओ (विवा. 1963–2022)
बच्चे: अजिंक्या देओ, अभिनय देव
पार्टनर: सीमा देओ (1960–)
पोते या नाती: आर्य देओ, तान्या देव
एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेता हैं जिन्होंने अपने लंबे करियर में 285 से अधिक हिंदी फिल्मों, 190 मराठी फिल्मों और 200 से अधिक प्रदर्शनों के साथ 30 मराठी नाटकों में काम किया है।  उन्होंने फीचर फिल्मों, टेलीविजन धारावाहिकों और 250 से अधिक विज्ञापन फिल्मों का भी निर्माण किया है।  उन्होंने कई फिल्मों, वृत्तचित्रों और टेलीविजन धारावाहिकों का निर्देशन भी किया है।  उन्हें अपने काम के लिए कई राज्य और राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं

रमेश देव का जन्म कोल्हापुर, महाराष्ट्र में हुआ था उनकी पैतृक जड़ें राजस्थान के जोधपुर से हैं।  उनके पिता कोल्हापुर के न्यायाधीश थे।


उनके पूर्वज कोल्हापुर में स्थानांतरित हो गए क्योंकि उनके परदादा और दादा दोनों इंजीनियर थे  उन्होंने जोधपुर पैलेस बनाया था  कोल्हापुर शहर के निर्माण के लिए उन्हें छत्रपति शाहू महाराजा ने बुलाया था उनके दादा शाहू महाराज के बुलाने पर मुख्य इंजीनियर बन कर  आये थे उनके पिता उनके कानूनी सलाहकार थे


उनकी शुरुआत 1951 की मराठी फिल्म पातलाची पोर में एक कैमियो के रूप में हुई  राजा परांजपे के निर्देशन में बनी रमेश देव ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत मराठी फिल्म अंधला मगता एक डोला (1956) से की  उन्होंने खलनायक के रूप में शुरुआत की उनकी पहली हिंदी फिल्म राजश्री प्रोडक्शन की आरती (1962) थी अपने लंबे करियर में, उन्होंने अमिताभ बच्चन (आनंद), राजेश खन्ना (आप की कसम), शत्रुघ्न सिन्हा (मेरे अपने) जैसे सितारों के साथ काम किया


जनवरी 2013 में, उन्हें 11 वें पुणे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (PIFF) में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मनित किया गया


उन्होंने प्रसिद्ध अदाकारा सीमा देव (जिसे पहले नलिनी सराफ के नाम से जाना जाता था) से शादी की थी उनके बेटे अजिंक्य देव - प्रसिद्ध मराठी अभिनेता और अभिनय देव - प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक - दिल्ली बेली (2011) फेम है

📽️

रामेश देव

1990 आज़ाद देश के गुलाम किशोर भंडारी
1989 घराना
1988 घरवाली बाहरवाली
1988 सोने पे सुहागा
1987 गोरा
1987 मिस्टर इण्डिया
1987 कुदरत का कानून वकील
1987 दिलजला
1987 शेर शिवाजी
1987 इनाम दस हज़ार
1986 खेल मोहब्बत का
1986 अल्ला रक्ख़ा पुलिस इंस्पेक्टर
1986 मेरा हक
1986 प्यार किया है प्यार करेंगे
1986 इल्ज़ाम पुलिस इंस्पेक्टर यादव
1985 रामकली इंस्पेक्टर राजीव चौहान
1985 पत्थर दिल
1985 एक चिट्ठी प्यार भरी कमल राजेन्द्रनाथ
1985 हम नौजवान
1985 कर्मयुद्ध
1984 गृहस्थी
1983 फ़िल्म ही फ़िल्म
1983 मैं आवारा हूँ प्रेमनाथ
1983 तकदीर रणधीर प्रताप सिंह
1982 श्रीमान श्रीमती
1982 दौलत धरमदास
1982 अशान्ति पुलिस इंस्पेक्टर महेश
1982 हथकड़ी
1982 खुद्दार
1981 दहशत
1979 बॉम्बे एट नाइट
1978 हीरालाल पन्नालाल
1977 यही है ज़िन्दगी माइकल
1976 दो लड़कियाँ
1976 फकीरा रंजीत
1975 आखिरी दाव इंस्पेक्टर वर्मा
1975 सुनहरा संसार मधु
1975 ज़मीर राम सिंह
1975 एक महल हो सपनों का
1975 सलाखें गौतम
1975 रानी और लालपरी
1974 ३६ घंटे
1974 प्रेम नगर
1974 गीता मेरा नाम इंस्पेक्टर चंदू
1974 कोरा कागज़ अर्चना का चाचा
1974 कसौटी हीरा
1973 जैसे को तैसा
1972 ज़मीन आसमान
1972 ज़िन्दगी ज़िन्दगी
1972 जोरू का गुलाम रमेश
1972 बंसी बिरजू
1972 यह गुलिस्ताँ हमारा
1971 हलचल
1971 मेरे अपने अरुण गुप्ता
1971 संजोग अस्तपताल डॉक्टर
1971 बनफूल अजय के पिता
1970 आनन्द
1970 दर्पण विनोद
1970 खिलौना किशोर सिंह
1970 जीवन मृत्यु
1970 मस्ताना जग्गू
1968 शिकार
1968 सरस्वतीचन्द्र
1967 मेहरबाँ
1966 दस लाख मनोहर
1962 आरती

मनोज तिवारी

#01feb 
मनोज तिवारी 

🎂जन्म 01 फरवरी 1971

एक भारतीय राजनीतिज्ञ, गायक और अभिनेता हैं जो उत्तर पूर्वी दिल्ली से संसद सदस्य के रूप में कार्यरत हैं।
उन्होंने 2009 का आम चुनाव समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में गोरखपुर लोकसभा से लड़ा लेकिन योगी आदित्यनाथ से हार गए।
फिर, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में 2014 का भारतीय आम चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
उन्हें 2016 में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।
वह दिल्ली में भाजपा संगठन के प्रमुख थे जब पार्टी ने 2017 एमसीडी चुनावों में रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी।
वह बिग बॉस में प्रतियोगी थे।
पीफिल्मों में कार्य करने से पूर्व मनोज तिवारी ने तकरीबन दस साल भोजपुरी गायक के रूप में कार्य किया। सन २००३ में उन्होने फिल्म 'ससुरा बड़ा पैसा वाला'में अभिनय किया जो मनोरंजन और आर्थिक दृष्टि से बहुत सफल फिल्म साबित हुई और माना जाने लगा की भोजपुरी फिल्मों का नया मोड़ शुरू हो चुका है। इसके बाद उन्होने दो और फिल्मों 'दारोगा बाबू आई लव यू' और 'बंधन टूटे ना'नामक फिल्मों में अभिनय किया।

मनोज तिवारी ने एक टेलीविज़न कार्यक्रम 'चक दे बच्चे' में बतौर मेज़बान कार्य किया। सन २०१० में मनोज तिवारी ने प्रतिभागी के तौर पर रियलिटी शो 'बिग बॉस' में हिस्सा लिया। मनोज तिवारी और श्वेता तिवारी 'कब अइबू अंगनवा हमार' और 'ए भौजी के सिस्टर' नामक फिल्मों में साथ-साथ कार्य कर चुके हैं। सन २०११ के मध्य में मनोज और उनकी पत्नी रानी में अलगाव हो गया।

मनोज तिवारी ने नयी धुनें,गाने और एल्बम बनाना जारी रखा। उन्होंने अनुराग कश्यप द्वारा निर्देशित फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के लिए एक लोकप्रिय गीत 'जिया हो बिहार के लाला' भी गाया। मनोज तिवारी सन २०११ में बाबा रामदेव द्वारा रामलीला मैदान पर शुरू किए गए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और अन्ना आंदोलन में सक्रिय रहे। २००९ में मनोज तिवारी ने समाजवादी पार्टी की ओर से राजनीति में अपना भविष्य आज़माया था किन्तु असफल रहे थे। फिलहाल तिवारी बीजेपी की तरफ से राजनीति में सक्रिय हैं।और उतर-पूर्वी दिल्ली से संसद सदस्य हैं।
२००९ में मनोज तिवारी ने गोरखपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से १५वीं लोकसभा चुनाव में बतौर समाजवादी पार्टी उम्मीदवार हिस्सा लिया किन्तु भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार योगी आदित्यनाथ से चुनाव हार गए। मनोज तिवारी अगस्त महीने में अन्ना हज़ारे द्वारा शुरू किए गए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में भी सक्रिय रहे। सन २०१४ के आम चुनावों में मनोज तिवारी उत्तर पूर्वी दिल्ली लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार घोषित किए गए और चुनाव जीत गए।

मनोज तिवारी ने 1999 में अपनी पहली पत्नी रानी तिवारी से शादी की।उनकी एक बेटी है जिसका नाम रीति है। 2011 में, मनोज और रानी शादी के 11 साल बाद तलाक की कार्यवाही में शामिल थे। उन्होंने 2012 में तलाक ले लिया।

बाद में उन्होंने सुरभि से शादी की, जिनसे उनकी एक बेटी है, जिसका जन्म 30 दिसंबर 2020 को हुआ।

जैकी श्राफ

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जैकी श्राफ

अन्य नाम जयकिशन काकुभाई श्रॉफ
जग्गू दादा
जन्म तिथि: 01 फरवरी, 1957
बम्बई, बम्बई राज्य, भारत

व्यवसायअभिनेता निर्माता
पति या पत्नी(रों)
आयशा दत्त
बच्चे2
निवास मुंबई महाराष्ट्र
एक गुजराती बनिया परिवार में हुआ था ! इनका वास्तविक नाम जयकिशन कटुभाई श्रॉफ है, इनके पिता का नाम कटुभाई व माता का नाम रीटा श्रॉफ है! वे मुंबई के वालकेश्वर इलाके में तीन बत्ती की एक चाल में रहा करते थे! फ़िल्मों में आने से पहले इन्होने कुछ विज्ञापनों में एक मॉडल के रूप में काम किया था ! इन्हें सबसे पहले देव आनंद साहब की फ़िल्म स्वामी दादा में एक छोटी सी भूमिका मिली! 1983 में निर्माता निर्देशक सुभाष घई ने इनको अपनी एक फ़िल्म हीरो में प्रमुख भूमिका प्रदान की ! खुशकिस्मती से उनकी ये फ़िल्म बहुत ही ज्यादा सफल हुई और वो रातों रात एक बड़े सितारे बन गए! 80 के दशक में इन्होने अपनी प्रेमिका आयशा दत्त से विवाह कर लिया ! आयशा जो बाद में फ़िल्म एक फ़िल्म निर्मात्री भी बनीं! ये दोनों जैकी श्रॉफ एंटरटेनमेंट लिमिटेड नामक मीडिया कंपनी भी चलाते हैं ! इनके सोनी टीवी में 10% शेयर थे, जिन्हें उन्होंने सन 2012 में बेच दिया! इनके दो बच्चे हैं, पुत्र का नाम टाइगर (जय हेमंत) तथा पुत्री का नाम कृष्णा है!
📽️
निर्माता के रूप में
2001 ग्रहण 
2000 जिस देश में गंगा रहता है
📽️कुछ प्रसिद्ध फिल्मे📽️
2018 साहो 
2017 सरकार 3 
2016 हाउसफुल 3
2016 जज़्बा 
2015 चॉक एन डस्टर 
2015 ब्रदर्स गैरी फर्नांडिस 
2014 हैप्पी न्यू ईयर
2013 धूम 3 
2013 महाभारत
2013 औरंगज़ेब (फ़िल्म) 
2013 शूटआऊट ऍट वडाला 
2010 एक सेकंड... जो ज़िन्दगी बदल दे? 
2010 मालिक एक 
2010 वीर 
2009 किसान 
2009 एक - द पॉवर ऑफ़ वन 
2007 एकलव्य 
2007 फूल एन फाइनल 
2007 कुर्बानी 
2007 फर्स्ट फीयर 
2007 आतिशें 
2006 अपना सपना मनी मनी 
2006 नकशा 
2006 भागम भाग 
2006 भूत अंकल 
2006 मेरा दिल लेके देखो 
2006 अस्त्रम 
2005 सुख 
2005 क्योंकि 
2005 डिवोर्स 
2005 अंतर्महल 
2005 तुम हो ना 
2004 आन 
2004 दोबारा 
2004 हलचल 
2003 तीन दीवारें 
2003 संध्या 
2003 समय 
2003 बूम 
2003 एक और एक ग्यारह 
2003 बाज़ 
2002 देवदास
2002 अग्नि वर्षा 
2002 क्या यही प्यार है 
2002 पिता 
2002 मुलाकात
2001 यादें 
2001 सेंसर
2001 लज्जा 
2001 फ़र्ज़ 
2001 बस इतना सा ख्वाब है 
2001 अलबेला 
2001 वन टू का फोर 
2001 ग्रहण 
2001 हद 
2000 रिफ्युज़ी 
2000 मिशन कश्मीर 
2000 कहीं प्यार ना हो जाये 
2000 जंग 
2000 गैंग 
1999 कोहराम 
1999 फूल और आग 
1999 आग ही आग 
1999 होते होते प्यार हो गया 
1999 कारतूस 
1999 लावारिस 
1999 सिर्फ तुम 
1998 तिरछी टोपी वाले 
1998 कभी ना कभी 
1998 बदमाश 
1998 यमराज 
1998 उस्तादों के उस्ताद 
1998 बंधन 
1998 युगपुरुष 
1998 दो हज़ार एक 
1998 जाने जिगर 
1998 हफ़्ता वसूली 
1997 शेयर बाज़ार 
1997 बॉर्डर 
1997 आर या पार 
1997 शपथ 
1997 विश्वविधाता 
1996 बंदिश 
1996 रिटर्न ऑफ ज्वैलथीफ
1996 अग्नि साक्षी
1996 चाल 
1996 कलिंगा 
1996 शिकार 
1996 तलाशी 
1995 दुश्मनी 
1995 राम शस्त्र 
1995 त्रिमूर्ति 
1995 मिलन 
1995 ग़ॉड एंड गन
1995 रंगीला
1994 स्टंटमैन 
1994 चौराहा 
1993 शतरंज 
1993 किंग अंकल 
1993 रूप की रानी चोरों का राजा
1993 1942: अ लव स्टोरी 
1993 आइना 
1993 गर्दिश 
1993 अंतिम न्याय 
1993 हस्ती
1993 खलनायक 
1992 अंगार 
1992 पुलिस ऑफिसर
1992 प्रेम दीवाने
1992 दिल ही तो है 
1992 लाटसाब 
1992 संगीत 
1991 अकेला 
1991 लक्ष्मण रेखा
1991 100 डेज़ 
1991 हफ़्ता बंद 
1991 सौदागर 
1990 दूध का कर्ज़ 
1990 जीने दो 
1990 वर्दी 
1990 बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी 
1990 पत्थर के इंसान 
1990 आज़ाद देश के गुलाम 
1989 परिन्दा 
1989 राम लखन 
1989 सच्चे का बोलबाला 
1989 मैं तेरा दुश्मन 
1989 काला बाज़ार 
1989 सिक्का 
1989 हम भी इंसान हैं 
1989 त्रिदेव 
1988 आखिरी अदालत 
1988 फ़लक 
1987 उत्तर दक्षिण 
1987 काश 
1987 कुदरत का कानून 
1987 जवाब हम देंगे 
1987 मर्द की ज़बान 
1987 सड़क छाप 
1987 दिलजला 
1986 हाथों की लकीरें 
1986 दहलीज़ 
1986 अल्ला रक्ख़ा 
1986 पाले ख़ान 
1986 मेरा धर्म 
1986 कर्मा 
1985 शिवा का इन्साफ 
1985 जानू 
1985 युद्ध 
1985 मेरा जवाब 
1985 पैसा ये पैसा 
1985 तेरी मेहरबानियाँ 
1984 अंदर बाहर 
1983 हीरो 
1982 स्वामी दादा 
1973 हीरा पन्ना

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...