बुधवार, 10 जनवरी 2024

ऋतिक रोशन

#10jan 
ऋतिक रोशन
🎂जन्म की तारीख 10 जनवरी 1974
हृतिक रोशन एक भारतीय हिन्दी चलच्चित्राभिनेता हैं। उन्होंने विभिन्न प्रकार के चरित्रों को चित्रित किया है और अपने नृत्य कौशल के लिए जाने जाते हैं। भारत में सर्वाधिक आय वाले अभिनेताओं में से एक, उन्होंने छः फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कारों सहित कई पुरस्कार जीते हैं, जिनमें से चार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए थे।
रोशन ने अक्सर अपने पिता राकेश रोशन के साथ सहयोग किया है। उन्होंने 1980 के दशक में कई फिल्मों में एक बाल कलाकार के रूप में संक्षिप्त भूमिका निभाई और बाद में अपने पिता की चार फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में कार्य किया। उनकी पहली प्रमुख भूमिका बॉक्स ऑफ़िस की सफल कहो ना प्यार है (2000) में थी, जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले। 2000 की आतंकवादी नाटक फिज़ा और 2001 की पारिवारिक नाटक कभी खुशी कभी ग़म में प्रदर्शन ने उनकी प्रतिष्ठा को मजबूत किया, लेकिन इसके बाद कई खराब फ़िल्मों का प्रदर्शन किया।

2003 की विज्ञान कल्पना फ़िल्म कोई मिल गया, जिसके लिए रोशन ने दो फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते, उनके चलच्चित्रात्मक वृत्ति का एक महत्वपूर्ण मोड़ था; बाद में उन्होंने इसके शृंखला: कृष (2006 फ़िल्म)और कृष 3 (2013) में शीर्षकीय नायक के रूप में अभिनय किया। उन्होंने धूम 2 (2006) में एक चोर, जोधा अक्बर (2008) में मुगल बादशाह अक्बर और गुज़ारिश (2010) में क्वाड्रिप्लेजिक की भूमिका के लिए प्रशंसा अर्जित की। उन्होंने 2011 के नाटक ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा, 2012 की प्रतिशोधी नाटक अग्निपथ, 2014 की कर्म रोमांचक बैङ बैङ!, 2019 की बायोपिक सुपर 30 और 2019 की कर्म रोमांचक वौर में मुख्य भूमिका निभाकर व्यावसायिक साफल्य प्राप्त की; उनकी सर्वाधिक आय वाली प्रकाशन के रूप में सबसे बाद का रैंक।

रोशन ने मंच पर भी प्रदर्शित किया है और नृत्य वास्तविक प्रदर्शन जस्ट डांस (2011) के साथ दूरदर्शन पर आरम्भ की है। उत्तरार्ध में एक न्यायाधीश के रूप में, वह उस समय भारतीय दूरदर्शन पर सर्वाधिक प्रदत्त अभिनेता बन गए। वह कई मानवीय कारणों से जुड़े हुए हैं, कई ब्राण्डों और उत्पादों का समर्थन करते हैं और उन्होंने अपनी खुद की कपड़ों की लाइन लॉन्च की है। रोशन की शादी चौदह वर्ष के लिए सुज़ान खान से हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे हैं। ऋतिक की पहली पत्नी सुजैन खान से तलाक के बाद सबा आजाद उनके जीवन में आई। दोनों ने घर बसाने का निर्णय लिया।
हृतिक रोशन का जन्म को बम्बई में बॉलीवुड के एक प्रमुख परिवार में हुआ था। वह अपने पैतृक पक्ष में पंजाबी और बंगाली वंश का है। हृतिक की नानी इरा रोशन बंगाली थीं।
उनके पिता, चलच्चित्र निर्देशक राकेश रोशन, संगीत निर्देशक रोशनलाल नागरथ के पुत्र हैं; उनकी माता, पिंकी, निर्माता और निर्देशक जे ओम प्रकाश की बेटी हैं। उनके चाचा, राजेश, एक संगीतकार हैं। रोशन की एक बड़ी बहन, सुनैना है, और बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल, माहिम में शिक्षित हुई थी। रोशन एक हिन्दू परिवार से सम्बन्ध रखते हैं, यद्यपि वह स्वयं को धार्मिक से अधिक आध्यात्मिक मानते हैं।

बाल्यकाल में रोशन एकल अनुभव करते था; वह अपने दक्षिण हाथ के एक अतिरिक्त अंगुष्ठ के साथ जन्म हुए थे, जिसके कारण उनके कुछ साथियों ने उनसे बचना चाहा।
वह छः वर्ष की आयु से हकलाते थे; इससे उन्हें स्कूल में समस्याएँ हुईं, और उन्होंने मौखिक परीक्षणों से बचने के लिए चोट और बीमारी का नाटक किया।उन्हें रोजाना वागुपचार से सहायता मिली।रोशन के दादा, प्रकाश पहली बार उन्हें फ़िल्म आशा (1980 फ़िल्म) में छः वर्ष की आयु में पर्दे पर लाए; उन्होंने जितेन्द्र द्वारा बनाए गए एक गीत में नृत्य किया, जिसके लिए प्रकाश ने उन्हें ₹ 100 का भुगतान किया।[9][10] रोशन ने अपने पिता के निर्माण आप के दीवाने (1980 फ़िल्म) सहित विभिन्न पारिवारिक फ़िल्म परियोजनाओं में बिना श्रेय के अभिनय किया। प्रकाश की आस पास (1981 फ़िल्म) में, वह "शहर में चर्चा है" गीत में दिखें।
इस अवधि के दौरान अभिनेता की एकमात्र बोलने वाली भूमिका तब आई जब वह 12 वर्ष का था; उन्हें प्रकाश के भगवान दादा (1986 फ़िल्म) में शीर्षक चरित्र के दत्तक पुत्र गोविन्द के रूप में देखा गया था। रोशन ने निर्णय किया कि वह एक पूर्णकालिक अभिनेता बने, लेकिन उनके पिता ने जोर देकर कहा कि वह अपनी अध्ययन पर ध्यान दें। अपने प्रारम्भिक 20 के दशक में, उन्हें मेरुवक्रता का पता चला था जो उन्हें नृत्य करने या स्टंट करने की अनुमति नहीं देता था। शुरू में अभिघात ग्रस्त होने के बाद उन्होंने अन्ततः वैसे भी अभिनेता बनने का निर्णय किया। निदान के लगभग एक वर्ष बाद, जब वह एक मंदी में फंस गया, तो उसने एक समुद्र तट पर टहल कर एक मौका लिया। कोई पीड़ा नहीं था, और अधिक आश्वस्त होकर, वह बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के अपनी गति बढ़ाने में सक्षम था। रोशन इस दिन को "[अपने] जीवन के महत्वपूर्ण मोड़" के रूप में देखते हैं।
सन 1980 में जब रोशन छह वर्ष के थे, तब एक बाल कलाकार के रूप में उन्होंने फिल्म आशा के साथ अपने अभिनय की शुरुआत की थी, जिसमें वे नृत्य अनुक्रम में एक अतिरिक्त के रूप में निर्गत हुए। रोशन, आप के दीवाने (1980) और भगवान दादा (1986) जैसे फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाते रहे, उन दोनों फिल्मों में उनके पिताजी को अग्रणी भूमिका के रूप में दर्शाया गया था। फिर वे एक सहायक निर्देशक बने और अपने पिता की फिल्म करन अर्जुन (1995) और कोयला (1997) के उत्पादन में उनका सहयोग किया।

मंगलवार, 9 जनवरी 2024

सलीम गोंस

#10jan 
#28april 
सलीम गौस
🎂10 जनवरी 1952
मद्रास , मद्रास राज्य , भारत
मृत
⚰️28 अप्रैल 2022  
मुंबई , महाराष्ट्र , भारत
व्यवसायों
अभिनेताथिएटर निर्देशकयुद्ध कलाकार
जीवनसाथी
अनिता सलीम
सलीम गौस का जन्म चेन्नई में एक मुस्लिम पिता और एक ईसाई माँ के यहाँ हुआ था।  उन्होंने चेन्नई के क्राइस्टचर्च स्कूल और प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई की। वह भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान , पुणे से स्नातक भी थे ।
सलीम गौस को टीवी श्रृंखला सुबह में उनकी भूमिका और श्याम बेनेगल की टीवी श्रृंखला भारत एक खोज में राम , कृष्ण और टीपू सुल्तान की भूमिका के लिए जाना जाता है । उन्होंने टीवी सीरियल वागले की दुनिया में भी काम किया है ।

1989 में, उन्होंने प्रताप पोथेन द्वारा निर्देशित तमिल फिल्म वेट्री विजहा में कमल हासन के प्रतिद्वंद्वी के रूप में खलनायक की भूमिका निभाई । उन्होंने भारतन द्वारा निर्देशित क्लासिक मलयालम फिल्म थाज़्वारम में मोहनलाल के साथ अभिनय किया । 1993 में उन्होंने मणिरत्नम की फिल्म थिरुदा थिरुदा में खलनायक की भूमिका निभाई । उन्होंने 1997 की फिल्म कोयला में माधुरी दीक्षित और शाहरुख खान के साथ अभिनय किया ।
सलीम गौस का गुरुवार 28 अप्रैल 2022 को 70 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से मुंबई में निधन हो गया। गुरुवार सुबह उनका अंतिम संस्कार किया गया।
📽️
1978 स्वर्ग नरक
1981 चक्र
1981सारांश
1984 मोहनजोशी हाजिर हों
1985 त्रिकाल 
1985 अघाट
1986 अम्मा
1989 मुजरिम
1989 सूर्या एक जागृति
1990 ज़ुल्म की हुकुमत
1993आकांक्षा
1996 सरदारी बेगम
1997 कोयला 
1997शपथ
1998 महाराजा 
1998सैनिक
2000 बादल
2001 अक्स
2005 मिस काल
2010 शाबाश अब्बा

कमर जलाला बादी

#09march
#09jan 
क़मर जलालाबादी :

 🎂09 मार्च 1917
 ⚰️09 जनवरी 2003

महान शायर गीतकार कमर जलालाबादी 
क़मर जलालाबादी भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार और कवि थे। ये चार दशकों तक हिन्दी फ़िल्मी जगत् को बतौर गीतकार एक से बढ़कर एक गीत लिखकर प्रदान करते रहे। क़मर जलालाबादी द्वारा लिखे गए गीत आज भी भारत में बड़े पैमाने पर सुने जाते हैं। फ़िल्म 'हावड़ा ब्रिज' का मस्ती भरा गीत "मेरा नाम चिन चिन चूँ" और "आइये मेहरबां बैठिये जाने जाँ" कालजयी बन चुके हैं। क़मर जलालाबादी ने अपने लम्बे करियर में हिन्दी सिनेमा के लगभग सभी प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ कार्य किया। एक गीतकार के रूप में क़मर जलालाबादी ने बहुत सारे अविस्मरणीय गीत हिन्दी सिनेमा को दिये। बहुत कम गीतकार ऐसे होंगे, जिनके रचे गीत दशकों तक श्रोताओं के जीवन का अभिन्न अंग बन रहे हों।

क़मर जलालाबादी का जन्म वर्ष 1919 में ब्रिटिश कालीन भारत में अमृतसर के 'जलालाबाद' में हुआ था। इनके बहुत सारे गीतों में दर्शन समाहित रहा है। माता-पिता ने इनका नाम 'ओम प्रकाश भण्डारी' रखा था। क़मर जलालाबादी ने सात साल की बाल्यावस्था से ही उर्दू में कविताएँ लिखना प्रारम्भ कर दिया था। घर से तो उन्हें किसी प्रकार का प्रोत्साहन नहीं मिलता था, पर एक घुमंतु कवि अमर ने उनके अंदर छिपी काव्य प्रतिभा को पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित किया था। उन्होंने ही ओम प्रकाश भण्डारी को तखल्लुस 'क़मर' प्रदान किया, जिसका अर्थ होता है- 'चाँद'। उस समय की परिपाटी के अनुसार चूँकि ओम प्रकाश जी जलालाबाद में रहते थे, अतः उनका कवि के रूप में नामकरण हो गया "क़मर जलालाबादी

फ़िल्मों के प्रति आकर्षण क़मर जलालाबादी को चालीस के दशक के शुरू में पूना ले आया और 1942 में उन्हें 'जमींदार' फ़िल्म में गीत लिखने का मौका मिल गया। फ़िल्म के गीत अच्छे चले और ख़ास तौर पर श्मशाद बेगम द्वारा गाया गया गीत "दुनिया में गरीबों को आराम नहीं मिलता", अच्छा लोकप्रिय हुआ। बाद में वे बम्बई (वर्तमान मुम्बई) आ गये और अगले चार दशकों तक हिन्दी फ़िल्मी जगत् को बतौर गीतकार एक से बढ़कर एक गीत लिखकर प्रदान करते रहे। यूँ तो उन्होंने फ़िल्म की कहानी की माँग के अनुसार हर तरह के गीत लिखे, परंतु उनके द्वारा रचे गये वियोग वाले प्रेम गीत अपना एक अलग ही स्थान रखते हैं। मानवीय भावनाओं को उन्होंने अपने गीतों में बहुत खूबसूरती और गहराई से ढाला। उनके रचे गीत जीवन से एक गहरा जुड़ाव लिये हुये रहे।

फ़िल्म 'हावड़ा ब्रिज' का यह मस्ती भरा गीत "मेरा नाम चिन चिन चूँ रात चाँदनी मैं और तू" कालजयी बन चुका है। इसके निर्माण में संगीत निर्देशक ओ. पी. नैयर, गायिका गीता दत्त, नर्तकी और अदाकारा हेलन, निर्देशक शक्ति सामंत, नृत्य निर्देशक सूर्य कुमार, सिनेमेटोग्राफर चंदू के अलावा गीतकार क़मर जलालाबादी का भी भरपूर योगदान था, जिन्होंने इस गीत में मस्ती भरा आलम लाने के लिये आवश्यक शब्दों का ऐसा ताना-बाना बुना कि यह सुनने वाले के कानों से उसके दिल में समा जाता है और उसे एक खुशनुमा एहसास से भर देता है। परंतु बहुत सारे अन्य हिट गानों के साथ इस गीत के साथ भी यही दु:खद बात जुड़ी रहती है कि इस गाने को दशकों से सुनने वाले भी बस इस गीत को ओ. पी. नैयर और गीता दत्त के नामों के साथ जोड़ कर देखते हैं। बहुत कम ऐसे संगीत रसिक होंगे जो इस गीत को वाजिब शब्द देने वाले का नाम जानते होंगे या अगर नहीं जानते हैं तो जानने के लिये उत्सुक होंगे
'हावड़ा ब्रिज' का दूसरा प्रसिद्ध गीत "आइये मेहरबां बैठिये जाने जां शौक से लीजिये जी इश्क के इम्तिहां" के साथ भी यही होता आया है। इस मन लुभावने वाले गीत के साथ भी आशा भोंसले की मादक गायकी, मधुबाला के मोहक अभिनय और ओ. पी. नैयर के कर्णप्रिय संगीत को जोड़कर याद किया जाता है और बेहतरीन शब्दों का जाल बुनने वाला रचियता पार्श्व में छिपा रह जाता है।
"इक दिल के टुकड़े हज़ार हुये, कोई यहाँ गिरा कोई वहाँ गिरा।" सन 1948 में बनी फ़िल्म 'प्यार की जीत' के इस गीत को यदि सुना जाए तो ज्यादातर श्रोताओं को सिर्फ मुहम्मद रफ़ी की प्रसिद्ध गायकी का जुड़ाव इस गीत से सूझ पाता है और कुछ गम्भीर किस्म के संगीत रसिक इस जानकारी से आगे जाकर हुस्नलाल-भगतराम के नाम पर जा पहुंचते हैं, जिन्होने इस गीत के लिये संगीत की रचना की थी। इस गीत के शब्द भी क़मर जलालाबादी जी की ही रचनात्मक लेखनी से उत्पन्न हुये थे।

क़मर जलालाबादी ने अपने समय के लगभग सभी गायक-गायिकाओं के साथ कार्य किया। उनके लिखे गीतों को हिन्दी सिनेमा के लगभग सभी मशहूर गायक-गायिकाओं, मलिका-ए-तरन्नुम नूरजहाँ, जी.एम दुर्रानी, ज़ीनत बेग़म, मंजू, अमीरबाई कर्नाटकी, मोहम्मद रफ़ी, तलत महमूद, गीता दत्त, सुरैया, श्मशाद बेगम, मुकेश, मन्ना डे, आशा भोंसले, किशोर कुमार और स्वर-कोकिला लता मंगेशकर आदि ने गाया

क़मर जलालाबादी के लिखे गीतों को कुछ संगीत निर्देशकों ने स्वयं भी गाया। एस. डी. बर्मन ने 1946 में बनी 'एट डेज़' फ़िल्म के लिये एक कॉमिक गीत "ओ बाबू बाबू रे दिल को बचाना बचाना दिल का बनेगा निशाना…" अपनी आवाज़ में गाया। संगीत निर्देशक सरदार मलिक ने भी उनके लिखे कई गीत गाये और 1947 में बनी 'रेणुका' के एक गीत "सुनती नहीं दुनिया कभी फरियाद किसी की, दिल रोता रहा आती रही याद उसकी" ने लोकप्रियता हासिल की।

सौंदर्य मलिका अभिनेत्री नसीम बानू ने भी 1947 में बनी फ़िल्म 'मुलाकात' में एक ग़ज़ल "दिल किस लिये रोता है, प्यार की दुनिया में ऐसा ही होता है" को अपनी आवाज़ गाया। मशहूर नृत्यांगना सितारा देवी ने भी 1944 में बनी फ़िल्म 'चाँद' में क़मर जलालाबादी के लिखे कुछ गीतों को गाया। 'चाँद' क़मर जलालाबादी की शुरुआती उल्लेखनीय फ़िल्मों में से एक है।

काम के बाद बचा हुआ वक्त्त घर पर परिवार के साथ बिताना पसंद करने वाले क़मर जलालाबादी ने अपने लम्बे करियर में हिन्दी सिनेमा के लगभग सभी प्रसिद्ध संगीतकारों ग़ुलाम हैदर, जी. दामले, प. अमरनाथ, खेमचंद प्रकाश, हुस्नलाल भगतराम, एस. डी. बातिश, श्याम सुंदर, सज्जाद हुसैन, सी. रामचंद्र, मदन मोहन, सुधीर फड़के, एस. डी. बर्मन, सरदार मलिक, रवि, अविनाश व्यास, ओ. पी. नैयर, कल्याणजी आनंदजी, सोनिक ओमी, उत्तम सिंह और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल आदि के साथ काम किया।

1954 में बनी फ़िल्म 'पहली तारीख़' के लिये क़मर जलालाबादी ने एक ऐसा गीत लिखा था, जो दशकों तक हर महीने की पहली तारीख़ को रेडियो सीलोन पर बजाया जाता था और शायद अब भी इस गीत को हर महीने की पहली तारीख़ को बजाया जाता हो। संसार के वेतनभोगी वर्ग के लिये 'वेतन दिवस' का बहुत बड़ा महत्व है और भारत के करोड़ों वेतन भोगियों से सीधा सम्बंध बनाता हुआ यह गीत उनकी खुशी का इज़हार करता है। सुधीर फड़के के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने क़मर जलालाबादी के लिखे मस्ती भरे बोलों को मस्ती भरे अंदाज़ में गाकर इस गीत को अमर बना दिया

क़मर जलालाबादी का निधन 9 जनवरी, 2003 को हुआ। उन्होंने भारतीय सिनेमा तथा जनता को ऐसे बेहतरीन गीत दिए, जिन्हें कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता।

फरहान अख्तर

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फरहान अख्तर
 🎂जन्म - 09 जनवरी 1974,
पत्नी: शिबानी डांडेकर (विवा. 2022), अधुना भबानी अख्तर (विवा. 2000–2017)
बच्चे: शाक्य अख्तर, अकीरा अख्तर
माता-पिता: जावेद अख़्तर, हनी ईरानी
बहन: ज़ोया अख़्तर
 एक भारतीय फ़िल्म निर्माता, पटकथा लेखक, अभिनेता, पार्श्वगायक, गीतकार, फ़िल्म निर्माता और टीवी होस्ट है।

निर्देशक के रूप में उनकी पहली फ़िल्म (दिल चाहता है, 2001) की काफी प्रशंसा की गई थी और तभी से एक खास दर्शक वर्ग में उनकी अलग पहचान है। आनंद सुरापुर की फ़िल्म, द फकीर ऑफ वेनिस (2007)और रॉक ऑन!! (2008) से उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। 2008

फरहान अख्तर मुंबई के पटकथा लेखक जावेद अख्तर और हनी ईरानी के घर पैदा हुए. उनका जन्म एक ईरानी-मुस्लिम परिवार में हुआ। उन्होंने जुहू के मानिक जी कूपर स्कूल में स्कूली शिक्षा पायी और बाद में कामर्स में डिग्री के लिए एचआर कॉलेज में दाखिला लिया, हालांकि दूसरे साल उन्होंने उसे छोड़ दिया।

अभिनेत्री शबाना आज़मी उनकी सौतेली माँ है। वह उर्दू कवि जान निसार अख्तर के पोते और बॉलीवुड की फ़िल्म निर्देशक और नृत्य कोरियोग्राफर फराह खान के चचेरे भाई हैं। उसकी बहन, जोया अख्तर ने हाल में ही लक बाइ चांस फ़िल्म से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा, जिसमें फरहान मुख्य भूमिका में थे। उनका विवाह एक हेयर स्टाइलिस्ट अधुना भावनी अख्तर के साथ हुआ, जो अपने भाई के साथ बी ब्लंट सैलून चलाती हैं। उनकी दो बेटियां-अकीरा और शाक्य हैं। फरहान और रितिक रोशन बचपन से ही अच्छे दोस्त हैं।

फरहान अख्तर ने अपना करियर 17 साल की उम्र में लमहे (1991) जैसी फ़िल्मों के लिए सिनेमाटोग्राफर-निर्देशक मनमोहन सिंह के साथ प्रशिक्षु के रूप में शुरू किया था। 1997 में फ़िल्म हिमालय पुत्र (1997) में निर्देशक पंकज पराशर के सहायक के तौर पर काम करने के बाद तीन साल के लिए एक टेलीविजन प्रोडक्शन हाउस को सेवा देनेवाले फरहान विभिन्न तरह के कार्य कर रहे हैं।

उन्हों‍ने 2001 की हिट फ़िल्म- दिल चाहता है के साथ हिंदी सिनेमा में लेखन और निर्देशन करियर की शुरुआत की, जिसका निर्माण एक्सेल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड (Excel Entertainment Pvt. Ltd) ने किया, जिसका निर्माण 1999 में उन्होंने रितेश सिदवानी के साथ किया था।यह फ़िल्म तीन दोस्तों (आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने इसमें अभिनय किया) की कहानी है, जो हाल ही में कॉलेज से स्नातक डिग्री लेते हैं और फ़िल्म‍ प्यार और दोस्ती के इर्द-गिर्द घूमती है। इसे समीक्षकों ने तो सराहा ही, व्यावसायिक कामयाबी भी मिली, खासकर युवा पीढ़ी में यह काफी लोकप्रिय हुई। इस फ़िल्म को विभिन्न अवार्ड समारोहों में सर्वश्रेष्ठ पटकथा, निर्देशन और फ़िल्म सहित कई नामांकन मिले। फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फ़िल्म का उस साल का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला।

अख्तर फिर अपनी अगली परियोजना, ऋतिक रोशन और प्रीति जिंटा अभिनीत फ़िल्म लक्ष्य (2004), के निर्माण में जुटे, जो उन लक्ष्यहीन नौजवानों के बारे में थी, जो आखिर में अपने लिए एक लक्ष्य तय करने में कामयाब होते हैं। हालांकि फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी हासिल नहीं की, पर बहुत सारे समीक्षकों ने प्रशंसा की फ़िल्म की स्क्रिप्ट उनके पिता जावेद अख्तर ने लिखी थी। इस बीच, उन्होंने गुरिंदर चड्ढा की 2004 की हॉलीवुड फ़िल्म ब्राइड एंड प्रिज्युडिस के लिए भी गीत लिखे.

उसके बाद उन्होंने 1978 की अमिताभ बच्चन की फ़िल्म डॉन का रीमेक डॉन - द चेज़ विगिंस अगेन शुरू किया, जिसमें मुख्य भूमिका में शाहरुख खान थे। 20 अक्टूबर 2006 को फ़िल्म रिलीज हुई। हालांकि समीक्षकों ने इसकी काफी आलोचना की, पर यह बॉक्स ऑफिस पर खूब कामयाब रही। इसने 50 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार तो किया ही, साथ में साल की पांचवीं सबसे हिट फ़िल्म भी रही 2007 में उन्होंने फ़िल्म हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड का निर्माण किया, जिसने बाक्स ऑफिस पर काफी अच्छा प्रदर्शन किया।

2007 में उन्होंने HIV के कलंक और रोगी के प्रति परिवारवालों की सहानुभुति की जरूरत पर 12 मिनट की लघु फ़िल्म, पोजिटिव का निर्देशन किया। मुंबई में इसकी शूटिंग हुई और यह 'एडस जागो रे'(AIDS Awake) की चार लघु फ़िल्मों की सिरीज का एक हिस्सा थी, जिसका निर्देशन मीरा नायर, संतोष सिवान, विशाल भारद्वाज और फरहान अख्तर ने किया। यह सिरीज मीराबाई फ़िल्म्स, स्वयंसेवी संगठन आवाहन तथा बिल एंड मिलिंडा गेटस फाउंडेशन की संयुक्त पहल का नतीजा थी। इस फ़िल्म में बोमन ईरानी, शबाना आजमी और एक नए अभिनेता अर्जुन माथुर ने भुमिकाएं निभाईं.

2008 में, अख्तर ने रॉक ऑन!! से अपने अभिनय कला की शुरुआत की। इस फ़िल्म को समीक्षकों ने तो सराहा ही, बॉक्स आफिस पर, खासकर महानगरों में यह उम्मीद से ज्यादा चली.वे निर्देशन के क्षेत्र में पहला कदम रखने वाली अपनी बहन जोया की फ़िल्म लक बाइ चांस में लीड पुरुष अभिनेता के रूप में दिखे. वह आगामी तीन फ़िल्मों: कार्तिक कॉलिंग कार्तिक, ध्रुव और गुलेल (इनमें केवल उनका अभिनय है, निर्माण नहीं) में भी दिखेंगे.

अख्तर ने गायन के क्षेत्र में पहला कदम रॉक ऑन!! से रखा और फ़िल्म के ज्यादातर गाने गाये. यहां तक कि फ़िल्म ब्लू में भी वह गाने वाले थे, जिसे संगीत से ए आर रहमान ने सजाया है हालांकि कार्तिक कॉलिंग कार्तिक की शूटिंग में व्यस्त रहने के कारण समय नहीं निकाल सके।

वह डांस रियलिटी शो नच बलिये (2005) के पहले सत्र में एक जज के रूप में टेलीविजन के कुछ शो और फेमिना मिस इंडिया (2002 में) में जज के रूप में दिखे. वे NDTV इमेजिन पर अपने शो ओए!, इट इज फ्राइडे के लिए टीवी शो मेजबान के भी रूप में दिखे.It's Friday!

फरहा खान

#09jan 
फरहा खान
🎂09 जनवरी 1965 
बम्बई , महाराष्ट्र , भारत

सेंट जेवियर्स कॉलेज, बॉम्बे
व्यवसायों फ़िल्म निर्देशक,अभिनेत्री,टेलीविज़न प्रस्तोता, कोरियोग्राफर, लेखक,निर्माता ,नर्तकी

जीवनसाथी
शिरीष कुंदर ​( एम.  2004 )
बच्चे3
रिश्तेदार
हनी ईरानी (चाची)
डेज़ी ईरानी (चाची)
साजिद खान (भाई)
❤️

फराह खा 100 से ज्‍यादा गानों में वे अपनी कोरियोग्राफी की कला दिखा चुकी हैं।

फराह खान का जन्‍म मुंबई में हुआ था। उनकी मां का नाम मेनका है जो कि स्‍क्रीनराइटर हनी ईरानी की बहन हैं। उनके भाई का नाम साजिद खान है जो कि मशहूर कॉमेडियन, अभिनेता और फिल्‍म निर्देशक हैं। फरहान अख्‍तर और जोया अख्‍तर फराह के कजिन्‍स हैं।

फराह ने सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से सोशियोलॉजी की पढ़ाई की। वे माइकल जैक्‍सन से खासा प्रभावित हुईं और डांस को अपने करियर के रूप में आगे बढ़ाया। उन्‍होंने अपने आप से ही डांस सीखा और डांस ग्रुप तैयार किया।

उन्‍होंने 2004 में शिरीष कुंदूर से शादी कर ली जिनसे उन्‍हें तीन बच्‍चे हैं। शिरीष फिल्‍म 'मैं हूं ना' के फिल्‍म एडिटर और 'जोकर' फिल्‍म के निर्देशक थे।

जब फिल्‍म 'जो जीता वही सिकंदर' को कोरियोग्राफर सरोज खान ने छोड़ दिया, फराह ने वो जगह ले ली। इसके बाद उन्‍होंने कई गानों में कोरियोग्राफ किया। वे 'कभी हां कभी ना' के सेट पर शाहरूख खान से मिलीं और तब से वे अच्‍छे दोस्‍त बन गए और साथ में काम करने लगे।

मॉनसून वेडिंग, बॉम्‍बे ड्रीम्‍स, वैनिटी फेयर में उनके काम को देखते हुए उन्‍हें बेस्‍ट कोरियोग्राफर के तौर पर 2004 के टोनी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया। उन्‍हें 5 बार फिल्‍मफेयर का सर्वश्रेष्‍ठ कोरियोग्राफी पुरस्‍कार भी मिल चुका है। निर्देशक के तौर पर उनकी पहली फिल्‍म 'मैं हूं ना' थी जिसमें शाहरूख ही फिल्‍म के हीरो थे। यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर सुपरहिट रही। उनकी दूसरी फिल्‍म 'ओम शांति ओम' ने अपने रिलीज के दौरान सबसे ज्‍यादा कमाई की और फिल्‍म देश के साथ साथ विदेशों में भी खूब सराही गई। वहीं उनके द्वारा निर्देशित फिल्‍म 'तीस मार खान' फलाप हो गई। उन्‍होंने फिल्‍मों में मुख्‍य अभिनेत्री के तौर पर अपना डेब्‍यू फिल्‍म 'शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी' से किया जिसमें उनके हीरो बोमन ईरानी थे। उनकी फिल्‍म 'हैप्‍पी न्‍यू ईयर' बड़ी हिट साबित हुई जो कि एक लंबी स्‍टारकास्‍ट वाली फिल्‍म थी और एक बार फिर फिल्‍म के मुख्‍य अभिनेता शाहरूख खान ही थे। एमटीवी वीडियो म्‍यूजिक अवार्ड्स के लिए फराह ने कोलम्बियन पॉप स्‍टार शकीरा के गाने 'हिप्‍स डोंट लाई' के बॉलीवुड वर्जन के लिए उन्‍हें प्रशिक्षित किया। उन्‍होंने फिल्‍म 'ब्‍लू' के 'चिगी विगी' गाने के लिए काइली मिनोग को भी कोरियोग्राफ किया।

उन्‍होंने सेलिब्रिटी चैट शो 'तेरे मेरे बीच में' को होस्‍ट किया और इंडियन आइडल के सीजन 1 और सीजन 2, जो जीता वही सुपरस्‍टार, एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा और डांस इंडिया डांस लिटिल मास्‍टर्स जैसे शोज की जज भी रहीं। स्‍टार प्‍लस पर प्रसारित हुए शो जस्‍ट डांस में भी वे रितिक रोशन और वैभवी मर्चेंट के साथ जज के रूप में दिखाई दीं। वे बिग बॉस भी होस्‍ट कर चुकी हैं।

मैं हूं ना, ओम शांति ओम, तीस मार खान, शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी, हैप्‍पी न्‍यू ईयर।
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1998 कुछ कुछ होता है
2003 कल हो ना हो
2004 मैं हूं ना
2007 शांति
2010 जाने कहां से आई है हाँ
2010 तीस मार खान
2010 खिचड़ी: द मूवी  (कैमियो)
2012 जोकर
2012 शीरीं फरहाद की तो निकल पड़ी 
2012 स्टूडेंट ऑफ द ईयर
2014 नए साल की शुभकामनाएँ
2016 देवी 
2019 स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2
2020 श्रीमती सीरियल किलर 
2023 खिचड़ी 2: मिशन पंथुकिस्तान

राहत फतेह अली खान

#09dic

🎂09 दिसंबर 1974  फ़ैसलाबाद, पाकिस्तान

पत्नी: निदा राहत (विवा. 2001)
अंकल: नुसरत फ़तेह अली ख़ान
बच्चे: Shazmaan Khan, फ़िल्ज़ा खान, महीन खान
माता-पिता: फर्रुख फतेह अली खान
भाई: वजाहत अली खान

राहत फ़तह अली ख़ान एक पाकिस्तानी संगीतकार हैं। वह विश्व प्रसिद्ध सूफी गायक नुसरत फतह अली खान के भतीजे है । राहत भी मुख्य रूप से सूफी गीतकार हैं। कव्वाली के अलावा वह गजल भी गाते हैं। राहत भारतीय फिल्म उद्योग बालीवुड के एक जाने माने पार्श्वगायक हैं।
उनके परिवार में क़व्वाली गाने की परंपरा पीढी-दर-पीढी चली आ रही है। राहत के पूरे घर में ही संगीत का माहौल था। उनके वालिद फर्रुख फतेह अली ख़ान साहेब को भी संगीत का शौक था। राहत ने संगीत की शिक्षा अपने तायाजी नुसरत फ़तेह अली ख़ान से प्राप्त की। राहत ने अपना पहला स्टेज शो 07वर्ष की उम्र में किया था
बालीवुड में राहत की गायकी का सफर 2003में पूजा भट्ट निर्देशित पाप फिल्म के गाने ‘लागी तुझ से मन की लगन’ से शुरु हुआ। इस गाने के बाद से राहत की प्रसिद्धि दिन प्रतिदिन बढती गयी। तब से आज तक उनके गाये हुये गीतों ने लोकप्रियता की नयी ऊँचाइयों को छुआ है। राहत ने हालीवुड की फिल्मों के लिये भी काम किया है। 1995में उन्होने उस्ताद नुसरत फतह अली खान और अपने वालिद के साथ मिलकर डेड मैन वाकिंग का संगीत देने में सहायता की थी। इसके बाद 2002में उन्होने फ़ोर फ़ेदर्स के साउंड ट्रेक पर काम किया। 2006 में आई एपोकैलिप्सो मूवी के साउंड ट्रैक में भी राहत ने आवाज़ दी है
दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर राहत और उनके ग्रुप उस समय रोक लिया गया जब उनके पास से क़रीब सवा लाख डॉलर नगद मिले। अधिकारियों के अनुसार उन्होने इमीग्रेशन जांच के दौरान विदेशी मुद्रा के बारे में जानकारी नहीं दी थी। राहत और उनके मैनेजर मारुफ़ पर विदेशी मुद्रा विनिमय अधिनियम (फ़ेमा) और कस्टम कानून के तहत मामला चलाया गया था। जाँच के बाद राहत फ़तह अली ख़ान और उनके मैनेजर मारुफ़ अली पर 15-15 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया।

सोमवार, 8 जनवरी 2024

फरहा नाज हाशमी

#09dic 
फराह नाज़ हाशमी

🎂09 दिसंबर 1968
  हैदराबाद, तेलंगाना , भारत

पेशा
अभिनेत्री
सक्रिय वर्ष
1984-2005
जीवन साथी
विंदू दारा सिंह
​( एम.  1996; प्रभाग.  2002 )
सुमीत सहगल ​( एम.  2003 )
बच्चे
1 (विन्दु दारा सिंह के साथ)
फराह नाज़ हाशमी , जिन्हें आमतौर पर फराह के नाम से जाना जाता है, 1980 के दशक के मध्य और 1990 के दशक की शुरुआत की एक प्रमुख बॉलीवुड अभिनेत्री हैं। वह तब्बू की बड़ी बहन हैं ।
फराह ने 1985 में यश चोपड़ा फिल्म्स के बैनर तले फिल्म फासले से डेब्यू किया । अस्सी के दशक के अंत और नब्बे के दशक की शुरुआत में वह बॉलीवुड की प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक थीं। 1989 की बंगाली फिल्म आमार तुमी में उनकी जोड़ी प्रोसेनजीत चटर्जी के साथ थी । फरहा की ऐतिहासिक फिल्में थीं नसीब अपना-अपना (1986), ईमानदार (1987), वो फिर आएगी , नकाब (1989),  यतीम (1988), बाप नंबरी बेटा दस नंबरी (1990), बेगुनाह (1991), भाई हो तो ऐसा (1995) और सौतेला भाई (1996)। उन्होंने राजेश खन्ना के साथ तीन फिल्में भी कीं ।

अपनी पहली शादी के बाद 1996 में उन्होंने अभिनय से संन्यास ले लिया,  हालांकि बाद में उन्होंने कुछ टेलीविजन धारावाहिकों में काम किया। उन्होंने अपने समय के लगभग सभी शीर्ष अभिनेताओं के साथ काम किया, जिनमें राजेश खन्ना , ऋषि कपूर , संजय दत्त , सनी देओल , अनिल कपूर , जैकी श्रॉफ , आमिर खान , मिथुन चक्रवर्ती , गोविंदा और आदित्य पंचोली शामिल हैं ।
फराह का जन्म जमाल अली हाशमी और रिजवाना के घर एक हैदराबादी मुस्लिम परिवार में हुआ था ।उसके माता-पिता का जल्द ही तलाक हो गया।  उनकी माँ एक स्कूल-अध्यापिका थीं और उनके नाना-नानी सेवानिवृत्त प्रोफेसर थे जो एक स्कूल चलाते थे। उनके दादा, मोहम्मद अहसान, गणित के प्रोफेसर थे, और उनकी दादी अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर थीं।

वह शबाना आजमी , तन्वी आजमी और बाबा आजमी की भतीजी और तब्बू की बड़ी बहन हैं ।
फराह ने 1985 में महेंद्र कपूर के बेटे रोहन कपूर के साथ यश चोपड़ा की फासले से अपनी शुरुआत की थी  हालांकि फासले एक आपदा थी, फराह को कई अन्य बड़े प्रस्ताव मिले जैसे शक्ति सामंत की पाले खान , केसी बोकाडिया की नसीब अपना अपना और प्राण लाल मेहता की लव 86 ।

वह मरते दम तक , नसीब अपना अपना , लव 86 ,  ईमानदार , घर घर की कहानी , दिलजला , रखवाला , वो फिर आएगी , वीरू दादा , बाप नंबरी बेटा दस नंबरी और बेगुनाह जैसी हिट फिल्मों का हिस्सा थीं।

जेपी दत्ता की यतीम को आलोचकों की प्रशंसा मिली, और यह उनकी प्रदर्शन-उन्मुख भूमिकाओं में से एक थी, साथ ही हमारा खानदान , कारनामा , नकाब , खतरानाक और पति पत्नी और तवायफ जैसी फिल्में भी थीं, हालांकि वे व्यावसायिक रूप से असफल रहीं। हिट फिल्मों - वो फिर आएगी और बेगुनाह में उनके अभिनय को समीक्षकों द्वारा सराहा गया।

1990 के दशक में, उन्होंने आमिर खान के साथ दो फिल्मों में काम किया; जवानी जिंदाबाद और इसी का नाम जिंदगी , लेकिन दोनों ही बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं। उन्हें खुदा गवाह के लिए साइन किया गया था और उन्होंने कुछ दृश्यों की शूटिंग भी की थी, लेकिन निर्माण में देरी के कारण बाद में उनकी जगह शिल्पा शिरोडकर को ले लिया गया । हालाँकि, आज तक, राजेश खन्ना के साथ वो फिर आएगी और बेगुनाह में उनकी भूमिका को उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। उसी दौरान उन्होंने दारा सिंह के बेटे विंदू दारा सिंह से शादी कर ली ।

इसके बाद फराह ने मुकाबला , धरतीपुत्र और इज्जत की रोटी जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभानी शुरू कर दीं । मुक़ाबला बहुत सफल रही, लेकिन बाद में, 1993 और 1996 के बीच उनकी अन्य फ़िल्में सफल नहीं रहीं, हालाँकि सौतेला भाई एक व्यावसायिक हिट थी और समीक्षकों द्वारा प्रशंसित थी।

बाद में उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया और अमर प्रेम , अंदाज , अहा (तीनों हिमेश रेशमिया द्वारा निर्मित ), विलायती बाबू , आंगन, अर्धांगिनी, औरत तेरी यही कहानी और पापा जैसे धारावाहिकों में काम किया । फराह तकदीर नामक एक मेगा धारावाहिक की भी योजना बना रही थीं , लेकिन उन्होंने इस परियोजना को स्थगित कर दिया। इसके बाद उन्होंने 2004 में हलचल में अभिनय किया।
फराह ने 1996 में अभिनेता विंदू दारा सिंह से शादी की , जिनसे उनका एक बेटा फतेह रंधावा (जन्म 1997) है। 2002 में दोनों का तलाक हो गया। बाद में उन्होंने 2003 में साथी बॉलीवुड और टेलीविजन अभिनेता सुमीत सहगल से दोबारा शादी की
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2005 शिखर कुसुम हिंदी
2004 हलचल गोपी हिंदी
2002 भारत भाग्य विधाता नगमा हिंदी
2000 भाई नंबर 1 नेहा हिंदी
1998 अचानक मधु हिंदी
1997 लहू के दो रंग संगीता बी. श्रीवास्तव हिंदी
1996 hukamnama हिंदी
रब डायन राखन संध्या पंजाबी
माहिर पारो हिंदी
नमक डॉ. अंजू हिंदी
सौतेला भाई बिंदिया हिंदी
1995 भाई हो तो ऐसा हिंदी
सरहद: अपराध की सीमा संध्या माथुर हिंदी
ताक़त सावित्री हिंदी
फौजी रूपा हिंदी
1994 जनम से पहले गीता भारद्वाज हिंदी
चौराहा नर्तकी हिंदी
इन्साफ अपने लहू से रानी हिंदी
1993 इज्जत की रोटी कनिष्ठा हिंदी
धरतीपुत्र कर्मा हिंदी
मुकाबला वन्दना हिंदी
जीवन की शतरंज राधा वी. शर्मा हिंदी
कुंदन शन्नो हिंदी
ज़ख्मों का हिसाब बिंदिया हिंदी
1992 इसी का नाम जिंदगी चुमकी हिंदी
नसीबवाला हिंदी
1991 पाप की आँधी निरीक्षण किरण गुप्ता हिंदी
बेगुनाह गुड्डु/निर्मला 'निम्मो'/बुलबुल हिंदी
बलिदान नर्तक/गायक हिंदी
1990 पति पत्नी और तवायफ श्रीमती शांति सक्सैना हिंदी
बाप नंबरी बेटा दस नंबरी रोज़ी डिसूज़ा हिंदी
हार जीत हिंदी
जवानी जिंदाबाद सुगंधा श्रीवास्तव हिंदी
जीने दो चंदा हिंदी
कारनामा माला हिंदी
मजबूर (1989 फ़िल्म) प्रिया हिंदी
Khatarnaak डॉ. संगीता जोशी हिंदी
वीरू दादा रेखा हिंदी
रखवाला रामतकी हिंदी
क़ैदी करो मीनू हिंदी

काला बाज़ार कामिनी संपत हिंदी
मजबूर हिंदी
मेरी ज़बान बच्चा हिंदी
नकाब आसिया हिंदी
1988 पाप को जला कर राख कर दूंगा पूजा सक्सैना/पूजा डी. मल्होत्रा हिंदी
हलाल की कमाई हिंदी
घर घर की कहानी आशा धनराज हिंदी
मोहब्बत के दुश्मन रेशमा हिंदी
हमारा खानदान रूबी मिरांडा हिंदी
यतीम गौरी एस.यादव हिंदी
महाकाली हिंदी
वो फिर आएगी आरती हिंदी
दिलजला ममता आर गुप्ता/मादुरी हिंदी
इमानदार रेनू एस राय हिंदी
7 साल बाद हिंदी
मार्टे डैम तक ज्योति आर दयाल हिंदी
1986 प्रेम 86 लीना हिंदी
नसीब अपना अपना राधा हिंदी
पलय खान हेलेन बोन्ज़ हिंदी
1985 फासले चांदनी हिंदी
1984 नसबंदी हिंदी

अमरीकी ट्रंप

ट्रंप चले थे ईरान हराने , खुद अभी बने पप्पू  राहुल बने थे शेर ट्रंप के बल , खुद मुंह के बल गिरे।  दोनों हो रह बेइज्जत दुनिया हुई...