मंगलवार, 31 अक्टूबर 2023

नीता अंबानी0

नीता मुकेश अंबानी एक भारतीय महिला उद्यमी हैं। वे भारत के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी की पत्नी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी की पुत्रवधु हैं। नीता अंबानी धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल की संस्थापक और चेयरपर्सन हैं।

🎂जन्म: 01 नवंबर 1963, मुम्बई
पति: मुकेश अंबानी (विवा. 1985)
बच्चे: ईशा अम्बानी, अनंत अंबानी, आकाश अम्बानी
माता-पिता: रविन्द्रभाई दलाल, पूर्णिमा दलाल
बहन: ममता दलाल
वे एक मिडिल क्लास फैमिली से थीं। बचपन में नीता का नाम नयनतारा रखा गया था, जिसे बाद में छोटा कर 'नीता' कर दिया गया। मुकेश अंबानी से शादी के बाद अब ये कपल इंडियन बिजनेस वर्ल्ड का सबसे अमीर कपल है।
उनके पिता का नाम रविंद्र भाई दलाल और माता का नाम पूर्णिमा दलाल है।
-  नीता ने ग्रेजुएशन की डिग्री कॉमर्स में ली है। नीता अंबानी की बहन का नाम ममता है, जो धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाती हैं। उन्होंने भरतनाट्यम भी सीखा है।
 नीता का पूरा परिवार 
-  अंबानी परिवार की नेटवर्थ करीब 20 अरब डॉलर है। मुकेश और  नीता अंबानी के तीन बच्चे हैं। आकाश, अनंत और ईशा अंबानी। आकाश और ईशा अपने पिता के कारोबार से जुड़ चुके हैं। ईशा अंबानी अपने भाई आकाश के साथ रिलायंस जियो प्रोजेक्ट को देख रही हैं।

ऐसे हुई मुकेश से शादी
- मुकेश और  नीता  अंबानी  उनकी भरतनाट्यम परफॉर्मेंस को देखने के बाद ही स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी ने अपने बेटे मुकेश अंबानी से उनके विवाह का प्रपोजल दिया। 
- मुकेश  और नीता अंबानी की शादी 8 मार्च 1985 को हुई। शादी के समय मुकेश अंबानी 28 साल जबकि नीता अंबानी 22 साल की थीं। 
बचपन में नीता का नाम नयनतारा रखा गया था, जिसे बाद में छोटा कर 'नीता' कर दिया गया। मुकेश अंबानी से शादी के बाद अब ये कपल इंडियन बिजनेस वर्ल्ड का सबसे अमीर कपल है।
नीता अंबानी जी सुबह की चाय 3, लाख रुपए की पीती हैं और एकबार पहने हुए जूते दोबारा इस्तेमाल नहीं करती पूरे दिन का खर्च जो मैंने पढ़ा था 10 , लाख है। ज्यादा भी हो सकता है।
अगर 'हां' कर देतीं तो आज बॉलीवुड हिरोइन होतीं Mukesh Ambani की पत्नी नीता अंबानी, प्रोड्यूसर्स ने दिया था फिल्मों का ऑफर

शनिवार, 28 अक्टूबर 2023

वी शांताराम

राजाराम वांकुडरे शांताराम
अन्य नाम अन्नासाहब वी शांता राम

🎂जन्म 18 नवंबर, 1901
जन्म भूमि कोल्हापुर
⚰️मृत्यु 30 अक्टूबर, 1990
मृत्यु स्थान मुंबई

कर्म भूमि महाराष्ट्र
कर्म-क्षेत्र फ़िल्म निर्देशक, अभिनेता
मुख्य फ़िल्में 'अमर कहानी', 'अमर भूपाली', 'झनक-झनक पायल बाजे', 'दो आँखेंं बारह हाथ', 'नवरंग'।
विषय नृत्य, संवाद, कथानक, संगीत
पुरस्कार-उपाधि 'फ़िल्मफेयर पुरस्कार', 'पद्म विभूषण', 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार'
प्रसिद्धि फ़िल्म निर्देशक, फ़िल्मकार, अभिनेता

वी शांताराम

परिचय
महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 18 नवंबर, 1901 को एक जैन परिवार में जन्मे राजाराम वांकुडरे शांताराम ने बाबूराव पेंटर की महाराष्ट्र फ़िल्म कम्पनी में छोटे-मोटे काम से अपनी शुरुआत की थी। शांताराम ने नाममात्र की शिक्षा पायी थी। उन्होंने 12 साल की उम्र में रेलवे वर्कशाप में अप्रेंटिस के रूप में काम किया था। कुछ समय बाद वह एक नाटक मंडली में शामिल हो गए।

गीत और संगीत
गीत और संगीत शांताराम की फ़िल्मों का एक और मज़बूत पक्ष होता था। एक फ़िल्मकार के रूप में वह अपनी फ़िल्मों के संगीत पर विशेष ध्यान देते और उनका ज़ोर इस बात पर रहता कि गानों के बोल आसान और गुनगुनाने योग्य हों। शांताराम की फ़िल्मों में रंगमंच का पुट ज़रूर नज़र आता था, लेकिन वह अपनी फ़िल्मों से समाज को एक नई दृष्टि देने में कामयाब रहे। हर फ़िल्म अपने वक़्त की कहानी बयान करती है, लेकिन उन्हें लगता है कि अब शांताराम की 'पड़ोसी' (1940) और 'दो आँखेंं बारह हाथ' जैसी जीवंत फ़िल्में दोबारा नहीं बनाई जा सकतीं। शांताराम की कुछ कृतियों की गुणवत्ता का मुक़ाबला आज भी नहीं किया जा सकता। क़रीब छह दशक लंबे अपने फ़िल्मी सफर में शांताराम ने हिन्दी व मराठी भाषा में कई सामाजिक एवं उद्देश्यपरक फ़िल्में बनाई और समाज में चली आ रही कुरीतियों पर चोट की।

निर्देशक
शांताराम ने फ़िल्मों की बारीकियाँ बाबूराव पेंटर से सीखीं। बाबूराव पेंटर ने उन्हें 'सवकारी पाश' (1925) में किसान की भूमिका भी दी। कुछ ही वर्षों में शांताराम ने फ़िल्म निर्माण की तमाम बारीकियाँ सीख लीं और निर्देशन की कमान संभाल ली। बतौर निर्देशक उनकी पहली फ़िल्म 'नेताजी पालकर' थी।

कंपनी का गठन
इसके बाद उन्होंने वी.जी. दामले, के. आर. धाईबर, एम. फतेलाल और एस. बी. कुलकर्णी के साथ मिलकर 'प्रभात फ़िल्म' कंपनी का गठन किया। अपने गुरु बाबूराव की ही तरह शांताराम ने शुरुआत में पौराणिक तथा ऐतिहासिक विषयों पर फ़िल्में बनाईं। लेकिन बाद में जर्मनी की यात्रा से उन्हें एक फ़िल्मकार के तौर पर नई दृष्टि मिली और उन्होंने 1934 में 'अमृत मंथन' फ़िल्म का निर्माण किया। शांताराम ने अपने लंबे फ़िल्मी सफर में कई उम्दा फ़िल्में बनाईं और उन्होंने मनोरंजन के साथ संदेश को हमेशा प्राथमिकता दी।

फ़िल्मी सफर
हिन्दी सिनेमा के शुरुआती दौर में प्रमुखता से उभरे फ़िल्मकार वी शांताराम उन हस्तियों में थे जिनके लिए फ़िल्में मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने का माध्यम थी। अपने लंबे फ़िल्मी सफर में उन्होंने प्रयोगधर्मिता को भी बढ़ावा दिया। डॉ. कोटनिस की अमर कहानी, झनक झनक पायल बाजे, दो आँखें बारह हाथ, नवरंग, दुनिया ना माने जैसी अपने समय की बेहद चर्चित फ़िल्मों में शांताराम ने फ़िल्म निर्माण से जुड़े कई प्रयोग किए। उन्होंने फ़िल्मों के मनोरंजन पक्ष से कोई समझौता किए बिना नए प्रयोग किए जिनके कारण उनकी फ़िल्में न केवल आम दर्शकों बल्कि समीक्षकों को भी काफ़ी प्रिय लगीं। शांताराम ने हिन्दी फ़िल्मों में मूविंग शॉट का प्रयोग सबसे पहले किया। उन्होंने बच्चों के लिए 1930 में रानी साहिबा फ़िल्म बनायी। 'चंद्रसेना' फ़िल्म में उन्होंने पहली बार ट्राली का प्रयोग किया।

रंगीन फ़िल्म
उन्होंने 1933 में पहली रंगीन फ़िल्म 'सैरंध्री' बनाई। भारत में एनिमेशन का इस्तेमाल करने वाले भी वह पहले फ़िल्मकार थे। वर्ष 1935 में प्रदर्शित हुई फ़िल्म 'जंबू काका' (1935) में उन्होंने एनिमेशन का इस्तेमाल किया था। उनकी फ़िल्म डॉ.कोटनिस की 'अमर कहानी' विदेश में दिखाई जाने वाली पहली भारतीय फ़िल्म थी।

राजकमल कला मंदिर
शांताराम ने प्रभात फ़िल्म के लिए तीन बेहद शानदार फ़िल्में बनाई। शांताराम ने 1937 में करुकू (हिन्दी में दुनिया ना माने), 1939 में मानुष (हिन्दी में आदमी) और 1941 में शेजारी (हिन्दी में पड़ोसी) बनाई। शांताराम ने बाद में प्रभात फ़िल्म को छोड़कर राजकमल कला मंदिर का निर्माण किया। इसके लिए उन्होंने 'शकुंतला' फ़िल्म बनाई। इसका 1947 में कनाडा की राष्ट्रीय प्रदर्शनी में प्रदर्शन किया गया। शांताराम की बेहतरीन फ़िल्मों में से एक है डॉ.कोटनिस की अमर कहानी। यह एक देशभक्त डाक्टर की सच्ची कहानी पर आधारित है जो सद्भावना मिशन पर चीन गए चिकित्सकों के एक दल का सदस्य था।

दो आँखें बारह हाथ
मुख्य लेख : दो आँखे बारह हाथ
शांताराम की सर्वाधिक चर्चित फ़िल्म दो आँखें बारह हाथ है। जो 1957 में प्रदर्शित हुई। यह एक साहसिक जेलर की कहानी है जो छह क़ैदियों को सुधारता है। इस फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ फ़ीचर फ़िल्म के लिए राष्ट्रपति के स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। इसे बर्लिन फ़िल्म फेस्टिवल में सिल्वर बियर और सर्वश्रेष्ठ विदेशी फ़िल्म के लिए सैमुअल गोल्डविन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। इस फ़िल्म का गीत ऐ मालिक तेरे बंदे हम... आज भी लोगों को याद है।

झनक झनक पायल बाजे और नवरंग
झनक झनक पायल बाजे और नवरंग उनकी बेहद कामयाब फ़िल्में रहीं। दर्शकों ने इन फ़िल्मों के गीत और नृत्य को काफ़ी सराहा और फ़िल्मों को कई-कई बार देखा।

पिंजरा
शांताराम की आख़िरी महत्त्वपूर्ण फ़िल्म थी पिंजरा। यह फ़िल्म जोसफ स्टर्नबर्ग की 1930 में प्रदर्शित हुई क्लासिक फ़िल्म 'द ब्ल्यू एंजेल' पर आधारित थी। वैसे उनकी आख़िरी फ़िल्म झांझर थी। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कामयाब नहीं हो सकी और सात दशकों तक चले उनके शानदार फ़िल्मी कैरियर का अंत हो गया।

पुरस्कार
शांताराम एक चलते-फिरते संस्थान थे, जिन्होंने फ़िल्म जगत में बहुत सम्मान हासिल किया। फ़िल्म निर्माण की उनकी तकनीक और उनके जैसी दृष्टि आज के निर्देशकों में कम ही नज़र आती है। उन्हें वर्ष 1957 में झनक-झनक पायल बाजे के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फ़िल्मफेयर पुरस्कार दिया गया था। उनकी कालजयी फ़िल्म दो आँखेंं बारह हाथ के लिए सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार प्रदान किया गया। इस फ़िल्म ने बर्लिन फ़िल्म समारोह और गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड में भी झंडे गाड़े। अन्नासाहब के नाम से मशहूर शांताराम को वर्ष 1985 में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विनोद मेहरा

विनोद मेहरा

🎂जन्म: 13 फ़रवरी 1945, अमृतसर
⚰️मृत्यु : 30 अक्तूबर 1990, मुम्बई

पत्नी: किरन मेहरा (विवा. 1988–1990), ज़्यादा
बच्चे: रोहन मेहरा, सोनिया मेहरा, Rohan Mehra (born 1991)
बहन: शारदा
विनोद मेहरा ने की थी तीन शादियां

विनोद मेहरा की पहली शादी मीना ब्रोका नाम की लड़की से हुई थी, जो उनकी मां ने पसंद की थी. शादीशुदा होने के बाद उन्हें एक्ट्रेस बिंदिया गोस्वामी से प्यार हुआ और उन्होंने पहली पत्नी को तलाक दिए बिना शादी कर ली, हालांकि बाद में उन्होंने पहली पत्नी को तलाक दे दिया था.

अफवाह साबित हुई

इंडियन एक्सप्रेस ने पहले बताया था कि टीवी होस्ट तबस्सुम, जो विनोद मेहरा की करीबी दोस्त थीं, ने पुष्टि की थी कि रेखा और विनोद प्यार में थे। हालाँकि, उन्होंने उन खबरों का भी खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि वे शादीशुदा हैं । उन्होंने ज्यादातर फिल्में उनके साथ कीं।

विनोद मेहरा का जन्म 13 फरवरी, 1945 को लाहौर में हुआ। उन्होंने अपने 3 दशक लंबे करियर में करीब 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
30 अक्टूबर 1990 को हार्ट अटैक की वजह से विनोद का निधन हो गया था। जब विनोद की मौत हुई तो उनकी बेटी सोनिया की उम्र दो साल से भी कम थी। 1988 को जन्मीं सोनिया, विनोद की तीसरी पत्नी किरण की बेटी हैं। बता दें कि विनोद ने कुल 4 शादियां की थीं। लेकिन इनमें से एक बीवी ऐसी रही, जिसे कभी भी पत्नी होने का दर्जा नहीं मिल पाया।
दरअसल विनोद ने पहली शादी अपनी मां की मर्जी से मीना ब्रोका से की थी।

बिंदिया गोस्वामी उम्र में विनोद मेहरा से 16 साल छोटी हैं। हालांकि कुछ महीनों तक अफेयर के बाद दोनों ने शादी भी कर ली। लेकिन ये रिश्ता सिर्फ चार साल चला

यासीर उस्मान की किताब 'रेखा: एन अनटोल्ड स्टोरी' के मुताबिक, विनोद मेहरा ने रेखा से भी शादी की थी। किताब के मुताबिक, कोलकाता में शादी कर रेखा, जब विनोद मेहरा के घर आईं तो विनोद की मां कमला मेहरा ने गुस्से में आकर चप्पल निकाल ली। जैसे ही रेखा उनके पैर छूने लगीं, तो उन्होंने रेखा को धक्का मारकर दूर हटा दिया। रेखा घर के दरवाजे पर खड़ी थीं और उनकी सास गालियां दे रही थीं। हालांकि, बाद में विनोद मेहरा ने बीच-बचाव किया और मां को किसी तरह समझाया। बाद में विनोद मेहरा ने रेखा से कहा था कि वो अपने घर लौट जाएं और फिलहाल वहीं रहें। हालांकि बाद में ये शादी टूट गई थी।

महज 45 साल की उम्र में विनोद मेहरा की मौत के बाद उनकी पत्नी किरण बच्चों के साथ केन्या शिफ्ट हो गई थीं। बेटी सोनिया का पालन-पोषण उनकी नाना-नानी के घर ही हुआ। केन्या और लंदन से पढ़ीं सोनिया ने 8 साल की उम्र में एक्टिंग की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी। इस दौरान लंदन एकेडमी ऑफ म्यूजिक एंड ड्रामेटिक आर्ट्स के एक्टिंग एग्जामिनेशन में उन्हें गोल्ड मेडल भी मिला था। 17 साल की उम्र में सोनिया मुंबई आ गईं और अनुपम खेर के इंस्टीट्यूट एक्टर प्रीपेयर्स से 3 महीने का कोर्स किया। एक्ट्रेस होने के साथ-साथ सोनिया ट्रेंड डांसर भी हैं।
संक्षिप्त परिचय

विनोद मेहरा का जन्म 13 फरवरी, 1945 को अमृतसर में हुआ था। इन्होंने तीन शादियाँ की थी। मीना ब्रोका इनकी पहली पत्नी थी। बिंदिया गोस्वामी इनकी दूसरी पत्नी जिनके साथ विनोद ने कई फ़िल्मों में काम किया। किरण विनोद मेहरा की तीसरी पत्नी थी। किरण और विनोद की एक बेटी सोनिया और एक बेटा रोहन है।

विनोद मेहरा के फ़िल्म करियर के मौसम को खुशनुमा बनाने में अभिनेत्री मौसमी चटर्जी का योगदान रहा है। शक्ति सामंत की फ़िल्म अनुराग (1972) में मौसमी चटर्जी और विनोद मेहरा पहली बार साथ आए। मौसमी ने एक दृष्टिहीन युवती का रोल संजीदगी के साथ किया था। विनोद एक आदर्शवादी नायक थे और अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध वह मौसमी से शादी करना चाहते थे। इसके बाद फ़िल्म उस पार (बसु चटर्जी), दो झूठ (जीतू ठाकुर) तथा स्वर्ग नरक (दसारी नारायण राव) में मौसमी के नायक बने।

अर्जुन बिजलानी

अर्जुन बिज्लानी 
एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं। यह लेफ्ट राइट लेफ्ट, नागिन, मोहे रंग दे, रिमिक्स, कार्तिका, बॉक्स क्रिकेट लीग, मिले जब हम तुम, यह है आशिक़ी, परदेस में मिला कोई अपना, रोड डायरिस, तेरी मेरी लव स्टोरी, काली - एक पुनर अवतार, जो बीवी से करे प्यार और परदेस में है मेरा दिल आदि में कार्य कर चुके हैं।

🎂जन्म : 31 अक्तूबर 1982 , मुम्बई

पत्नी: नेहा स्वामी (विवा. 2013)
माता-पिता: सुदर्शन बिजलानी, शक्ति बिजलानी
अर्जुन और नेहा की शादी को 10 साल हो चुके हैं. दोनों ने 20 मई 2013 को एक दूजे संग सात फेरे लिए थे. कपल का एक बेटा है.
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2004 कार्तिका
2005 रिमिक्स
2006-2008 लेफ़ राइट लेफ्ट
2008 मोहे रंग दे
2008–2010 मिले जब हम तुम
2011 परदेस में मिला कोई अपना
2012 रोड डायरिस
2012 तेरी मेरी लव स्टोरी
2013 काली - एक पुनर अवतार
2013 चिंटू बन गया जैंटलमेन
2013 जो बीवी से करे प्यार
2014 यह है आशिक़ी
2014-2015 बॉक्स क्रिकेट लीग
2015 सीआईडी 
2015 मेरी आशिकी तुम से ही
2015 नागिन 1
2016 परदेस में है मेरा दिल
जिसे एकता कपूर ने बनाया
 लिखा रितु भाटिया ने
आयुष अग्रवाल
निर्देशक  रहे

वास्तविक भाषा हिंदी
एपिसोड की संख्या 170

अनन्या पांडे

अनन्या पांडे 
🎂जन्म 30 अक्टूबर 1998 
एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री हैं जो हिन्दी फिल्मों में काम करती हैं।अभिनेता चंकी पांडे की बेटी, उन्होंने 2019 में किशोर फिल्म स्टूडेंट ऑफ़ द ईयर 2 और कॉमेडी पति पत्नी और वो में प्रमुख भूमिकाओं के साथ अभिनय किया।

अनन्या पांडे

पांडे ने 2017 में धीरूभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल से स्नातक किया। उन्हें 2017 में ला विले लुमिएर, पेरिस में वैनिटी फेयर के ले बाल डेस डेब्यूटेंट्स इवेंट में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था और वह इस कार्यक्रम की सदस्य थीं।इनके पिता का नाम चंकी पांडे है तथा इनकी माँ का नाम भावना पांडे है। अनन्या पांडे की एक छोटी बहन है जिनका नाम रायसा पांडे है।

हिंदी फिल्म उद्योग में

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उद्योग में भाई-भतीजावाद के लाभार्थी होने के कारण पांडे ने अक्सर नकारात्मक ध्यान और ऑनलाइन ट्रोलिंग का मुकाबला किया है।उन्होंने कहा, "यह उतना आसान नहीं है जितना लोग कहते हैं। यदि आपके पास पहुंच है और इसे समर्थन देने की प्रतिभा नहीं है, तो लोग आप में अपना पैसा निवेश नहीं करेंगे। ऐसा कहने के बाद, मैं मेरा मानना ​​है कि भाई-भतीजावाद मौजूद है और यह सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं बल्कि सभी उद्योगों में मौजूद है।"  2019 में, उन्होंने सोशल मीडिया बुलिंग के बारे में जागरूकता पैदा करने, नकारात्मकता को रोकने और एक सकारात्मक समुदाय का निर्माण करने के लिए सो पॉजिटिव नामक एक पहल शुरू की।

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शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

सौमित्र चटर्जी

सौमित्र चटर्जी 
🎂जन्म: 19 जनवरी, 1935; ⚰️मृत्यु- 15 नवंबर, 2020, कोलकाता, पश्चिम बंगाल) प्रसिद्ध बांग्ला अभिनेता थे। सन 2001 में राष्ट्रीय पुरस्कार को ठुकराने वाले प्रख्यात बांग्ला अभिनेता सौमित्र चटर्जी को सन 2011 में भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। उन्हें अभिनेता प्राण, मनोज कुमार और अभिनेत्री वैजयंती माला पर वरीयता देते हुए इस पुरस्कार के लिए चुना गया था।सौमित्र चटर्जी प्रथम बांग्ला व्यक्ति थे, जिन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिला था। चटर्जी को राजनेता और साथी कलाकार एक महान सांस्कृतिक प्रतीक, भरोसेमंद दोस्त और विविध क्षेत्रों में रुचि रखने वाले दिग्गज के तौर पर याद कर रहे हैं।

जीवन परिचय
सौमित्र चटर्जी का जन्म 19 जनवरी, 1935 में बंगाल में हुआ था। उन्होंने लंबे समय तक सत्यजीत रे के साथ भी काम किया। सत्यजीत रे की 14 फ़िल्मों में उन्होंने अभिनय किया। सौमित्र चटर्जी ने 1959 में सत्यजीत रे की फ़िल्म ‘अपूर संसार’ से अपना कैरियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने सत्यजीत रे की फ़िल्म ‘देवी,’ ‘चारुलता’ और ‘घरे बाइरे’ में भी अभिनय किया। फ़िल्मकार सत्यजित रे और अभिनेता सौमित्र चटर्जी की जोड़ी की तुलना हॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता-निर्देशक जो़डी अकीरा कुरोसोवा-तोशिरो मिफ्यून और मार्केलो मास्ट्रोइयान्नी-फेडेरिको फेलिनो से की जानी लगी थी।

सौमित्र चटर्जी ने सत्यजित रे के अलावा मृणाल सेन, तपन सिन्हा और तरुण मजुमदार सहित कई अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निर्देशकों के साथ भी काम किया। 2004 में पद्म भूषण से सम्मानित अभिनेता सौमित्र चटर्जी अपर्णा सेन, गौतम घोष और ऋतुपर्णो घोष जैसे प्रसिद्ध निर्देशकों के साथ भी काम कर चुके थे। वह रंगमंच से भी जु़डे रहे। उनको कला के क्षेत्र का फ्रांस का सर्वोच्च पुरस्कार "द ऑफिसर डेस आर्ट्स एट मेटियर्स" तथा इटली से लाइफ टाइम अचीवमेंट पुस्कार भी मिला।

नाटक मंच से स्नेह
बीबीसी बांग्ला को दिए एक साक्षात्कार में सौमित्र चटर्जी ने कहा था कि कृष्णानगर में बचपन में ही उन्होंने नाटकों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। बचपन में हम घर में तख्तों से मंच बनाते थे और बेड शीट से पर्दे बनाते थे। हम भाई-बहनों और दोस्तों के साथ मिलकर नाटक करते थे। इसके लिए घर के बुज़ुर्गों ने भी हमें बहुत हौसला दिया। नाटकों का उनका शौक बाद में भी उनके साथ रहा और वो फ़िल्मों के साथ-साथ मंच पर नज़र आते। बाद में उनके पिता काम के लिए कलकत्ता चले गए, फिर कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए सौमित्र भी कलकत्ता चले आए।

सत्यजीत रे से मित्रता
कॉलेज के अपने दिनों के दौरान उनके एक मित्र ने उनका परिचय सत्यजीत रे से करवाया था। उस वक़्त हुई ये छोटी-सी मुलाक़ात बाद में दोनों के बीच गहरी दोस्ती में बदल गई। सत्यजीत रे की फ़िल्म के साथ शुरुआत करने के बाद उन्होंने उनके साथ कई और फ़िल्मों में काम किया। फ़िल्म आलोचक जीवनी लेखिका मैसी सेटॉन को एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, "जब सत्यजीत रे ने मुझसे पूछा कि मैं क्या करना चाहता हूं तो मेरे पास कोई उत्तर नहीं था। मुझे उस वक़्त स्टेज पर और फ़िल्मों में ऐक्टिंग के फ़र्क़ के बारे में अधिक जानकारी नहीं थी। मुझे डर था कि मैं ओवरऐक्ट न करूं।" सौमित्र चटर्जी ने फ़िल्मों में कई तरह के किरदार निभाए। 'शोनार किल्ला' में वो शरलॉक होम्स की तरह के एक जासूस के किरदार में नज़र आए, 'देवी' में वो नियमों का पालन करने वाला दूल्हा बने, 'अभिजान' में ग़ुस्से में रहने वाला उत्तर भारतीय टैक्सी ड्राइवर बने तो 'अशनि संकट' में एक शांत रहने वाले पुजारी के किरदार में दिखे। नोबल सम्मान पाने वाले रवींद्रनाथ टैगोर की कहानी 'चारूलता' पर बनी सत्यजीत रे की फ़िल्म में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सौमित्र चटर्जी, सत्यजीत रे के पसंदीदा एक्टर थे और सत्यजीत उन्हें सिनेमा पर लिखी किताबें पढ़ने के लिए देते थे। रविवार को दोनों साथ मिलकर हॉलीवुड की फ़िल्में देखते थे और चर्चा करते थे। सौमित्र चटर्जी ने एक बार कहा था, "वो जो भी करते थे वो बिना कारण नहीं था, ऐसे नहीं था कि रविवार को मुझे एंटरटेंमेन्ट के लिए साथ में लेकर जाते थे।" सत्यजीत रे का कहना था कि सौमित्र बेहतरीन एक्टर हैं लेकिन अगर उन्हें "बुरी कहानी दी जाएगी तो उनका अभिनय भी वैसा ही होगा।" साल 1992 में सत्यजीत रे की मौत हो गई। उस दौरान सौमित्र ने एक इंटरव्यू में कहा था, "एक भी दिन ऐसा नहीं गुज़रा, जब मैंने सत्यजीत रे को याद न किया हो या उनके बारे में बात न की हो। प्रेरणा के तौर पर मेरी ज़िंदगी में वो हमेशा ही मौजूद रहे हैं। मैं जब भी उनके बारे में सोचता हूं मुझे प्रेरणा मिलती है।"

मृत्यु
सौमित्र चटर्जी की मृत्यु 15 नवंबर, 2020, कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुई। उन्हें 6 अक्टूबर को अस्पताल में कोविड-19 से संक्रमित पाए जाने पर भर्ती कराया गया था। वह संक्रमण से उबर गए लेकिन उनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ। न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन के विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम पिछले 40 दिनों में सौमित्र चटर्जी के स्वास्थ्य को फिर पटरी पर लाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन कोई भी कोशिश सफल नहीं हो पा रही थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सौमित्र चटर्जी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि- "उनका निधन विश्व सिनेमा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और पूरे देश के सांस्कृतिक जीवन के लिए बहुत बड़ी क्षति है"। मोदी जी ने ट्वीट कर कहा, "श्री सौमित्र चटर्जी का निधन विश्व सिनेमा के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और पूरे देश के सांस्कृतिक जीवन के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उनके निधन से अत्यंत दु:ख हुआ है। परिजनों और प्रशंसकों के लिए मेरी संवेदनाएं। ओम शांति"।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वयोवृद्ध अभिनेता के निधन को बंगाल के लिये बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि- "सौमित्र चटर्जी एक योद्धा थे, जिन्हें उनके काम के लिये याद किया जाता रहेगा। यह बंगाल और दुनिया भर में उनके प्रशंसकों के लिये दु:खद दिन है"। ममता बनर्जी ने ट्विटर पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, "फेलूदा नहीं रहे। ‘अपु’ ने अलविदा कह दिया। विदाई, सौमित्र (दा) चटर्जी। वह अपने जीवनकाल में दिग्गज रहे"।

कुणाल कोहली

कुणाल कोहली
🎂जन्म 28 अक्टूबर 1970
व्यवसाय निर्देशक, पटकथा लेखक, निर्माता, अभिनेता
जीवनसाथी रवीना कोहली
बच्चे 1 (बेटी)
रिश्तेदार डेविड धवन (मामा)
वरुण धवन (चचेरा भाई)
रोहित धवन (चचेरा भाई)
कुणाल कोहली बॉलीवुड में एक भारतीय फिल्म निर्देशक, निर्माता, अभिनेता और लेखक हैं । उन्हें हम तुम (2004) और फना (2006) के निर्देशक के रूप में जाना जाता है । वह कुणाल कोहली प्रोडक्शंस के प्रोडक्शन हाउस के भी मालिक हैं , जिसकी पहली फिल्म थोड़ा प्यार थोड़ा मैजिक (2008) थी।
कुणाल कोहली एक भारतीय फिल्म निर्देशक/निर्माता और लेखक हैं, जो हिंदी सिनेमा में अपने बेहतरीन काम के लिए जाने जाते हैं। कुणाल हिंदी सिनेमा में फिल्म हम तुम, फना,आदि के लिए जाने जाते हैं। कुनाल कोहली का अपना प्रोडक्शन हाउस है, जिसके तहत उन्होंने फिल्म थोड़ा प्यार थोड़ा मेजिक निर्देशित की।

 
निजी जीवन 
कुणाल कोहली का जन्म 28 अक्टूबर 1970 को हुआ था।  कुणाल की शादी रवीना कोहली से हुई है, रवीना कॉफी विद करण की निर्देशक रह चुकी हैं। दोनों के एक बेटी भी है- राधा।

करियर 
कोहली ने अपने करियर की शुरुआत बतौर फिल्म क्रिटिक्स से वर्ष 1990 के आखिरी में की थी। फिल्मी दुनिया में बतौर निर्देशक कदम रखने से पहले कुणाल कई म्यूजिक वीडियो को डायरेक्ट कर चुके हैं। कुणाल ने बतौर निर्देशक डेब्यू टीवी शो त्रिकोण से की, इसके बाद उन्होंने यश राज फिल्मस के तहत चार फ़िल्में निर्देशित की, कुनाल की पहली फिल्म मुझसे दोस्ती करोगे थी, जो बॉक्स-ऑफिस पर कुछ खास कमाल ना दिखा सकी। इसके बाद उन्होंने हम तुम निर्देशित की, इस फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर के अवार्ड से भी नवाजा गया, साथ ही इस फिल्म ने अन्य 5 अवार्ड भी अपने नाम किये।  इसके बाद कुनाल ने फना, थोड़ा प्यार थोड़ा मेजिक, ब्रेक के बाद जैसी फ़िल्में निर्देशित की।

प्रसिद्ध फिल्में 
मुझसे दोस्ती करोगे, हम तुम, थोड़ा प्यार थोड़ा मेजिक,ब्रेक के बाद, तेरी मेरी कहानी, फिर से

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