शुक्रवार, 2 जून 2023

अंजन श्रीवास्तव


*🎂जन्म  2 जून 1948*
अभिनेता अंजन श्रीवास्तव के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

अंजन श्रीवास्तव बॉलीवुड और थिएटर के लोकप्रिय अभिनेता हैं। वह लोकप्रिय भारतीय टीवी धारावाहिक ‘में श्रीनिवास वागले’ की भूमिका निभाने के लिए प्रसिद्ध हैं।

अंजन का जन्म 2 जून 1948 को कलकत्ता में हुआ था उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी.कॉम और एलएलबी किया। स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने इलाहाबाद बैंक, कलकत्ता में काम किया।

हालाँकि उनका जन्म और पालन-पोषण कोलकता में हुआ था, लेकिन वे उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता मृत्युंजय श्रीवास्तव ’इलाहाबाद बैंक में बैंकर थे। उनके भाई ने एक डॉक्टर के रूप में काम किया। उन्होंने मधु श्रीवास्तव से शादी की, उनके तीन बच्चे हैं: जुड़वां (एक लड़की और एक लड़का है) और एक लड़की उनके बच्चों के नाम अभिषेक नूपुर एवं रंजना है

उनके पिता चाहते थे कि वे अभिनय के बजाय इलाहाबाद बैंक में शामिल हों। उन्होंने बैंक जॉइन किया लेकिन एक्टिंग भी जारी रखी। अपने कॉलेज के दिनों में, वह बंगाली थिएटर नाटकों में भाग लेते थे और ऑल इंडिया रेडियो के लिए नाटक भी करते थे। 1967 में उन्होंने कई बंगाली नाटकों जैसे नील दर्पन कायाकल्प एवं अनवर में अभिनय किया

1976 में, उनकी बहन की मृत्यु के बाद, उनके पिता ने उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी किस्मत आजमाने की अनुमति दी। वह मुंबई में इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) में शामिल हो गए और उसके बाद उन्होंने पृथ्वी थिएटर के साथ काम किया। उन्हें गोलमाल (1979), सजा-ए-मौत (1981), और गुलामी (1985) सहित कई लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्मों में काम करने का अवसर मिला

टीवी सीरियल्स ने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई। उन्होंने ये जो है जिंदगी (1984) से डेब्यू किया। उनका एक यादगार टीवी धारावाहिक वागले की दुनिया (1988-1990) है, जिसे डीडी राष्ट्रीय पर प्रसारित किया गया

1991 में, हॉलीवुड फिल्म 1991 मिसिसिपी मसाला ’में उनके अभिनय को काफी सराहा गया

उन्होंने जो जीता वही सिकंदर (1992), कभी खुशी कभी (1993), प्यार तो होना ही था (1998), बंधन (1998), ये कैसी मोहब्बत (2002), फिरंगी (2017) और पीएम नरेंद्र मोदी (2019) सहित 125 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया

☑️1980 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए धारावाहिक ‘वागले की दुनिया’ के आम आदमी श्रीनिवास वागले के तौर पर ज्यादा अच्छे से जानते हैं।

अभिनेता ने कहा कि उनके बच्चों ने जन्मदिन के मौके पर उनके लिए एक दावत का आयोजन किया है।

श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि वह ‘नायक’ की भूमिका निभाने के विचार से कभी प्रभावित नहीं हुए।

श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, “ मेरे कुछ बेहतरीन फिल्मों और धारावाहिकों की स्क्रीनिंग होगी। फिर, एक दावत होगी जिसमें मेरे कुछ पुराने मित्र और सहकर्मी शिरकत करेंगे।”

कोलकाता में जन्मे श्रीवास्तव ने बैंक कर्मचारी से लेकर, आकाशवाणी पर नाटकों को पढ़ने तक और फिर 1970 के दशक के अंत में मुंबई आने के बाद पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (आईपीटीए) में शामिल होने तक का लंबा सफर तय किया है।↔️अभिनेता ने कहा कि इस उम्र में रंगमंच करना मुश्किल है लेकिन वह इसके लिए वक्त निकालते हैं।

उन्होंने कहा, “मेरे लिए रंगमंच और जीवन में कोई अंतर नहीं है… मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि (जीवन के अंत तक) मैं रंगमंच करता रहूं। मैं टीवी या फिल्में करूं या नहीं, लेकिन रंगमंच करना मैं कभी नहीं छोड़ूंगा।”

अभिनेता फिल्मों में भी व्यस्त रहते हैं। उनकी अगली फिल्म फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के जीवन और समय पर आधारित विक्की कौशल-अभिनीत ‘सैम बहादुर’ है।

संगीतकार, गीतकार एवं गायक इलैयाराजा

प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार एवं गायक इलैयाराजा के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

इलैयाराजा (जन्म- 2 जून, 1943, तमिलनाडु) भारतीय फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार, गीतकार, गायक, वाद्य यंत्र वादक, ऑर्केस्ट्रेटर और कंडक्टर-एनेजर हैं। इन्होंने मुख्यतः दक्षिण भारतीय भाषाओं में बनी फ़िल्मों में संगीत दिया है। 2018 में इन्हें 'पद्म विभूषण' से सम्मानित किया गया था।

परिचय

इलैयाराजा का जन्म तमिलनाडु के तेनी जिले में पनिपुरम के एक गरीब ग्रामीण दलित परिवार में हुआ था। इलैयाराजा डैनियल रामास्वामी और चिन्नाथयमल के तीसरे बेटे थे। उनका बचपन गांव में ही बीता। बचपन से ही तमिल लोक संगीत को सुनना बेहद पसंद था। 14 वर्ष की उम्र में वह अपने बड़े सौतेले भाई पावलर वरदराजन की अध्यक्षता में एक यात्रा संगीत मंडल में शामिल हो गए और अगले दशक में पूरे दक्षिण भारत में प्रदर्शन किया।

साल 1968 में इलैयाराजा ने मद्रास (अब चेन्नई) में प्रोफेसर धनराज के साथ एक संगीत पाठ्यक्रम शुरू किया, जिसमें पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का एक सिंहावलोकन, काउंटरपॉइंट जैसी तकनीकों में रचनात्मक प्रशिक्षण और वाद्य प्रदर्शन में अध्ययन शामिल था। इलैयाराजा ने शास्त्रीय गिटार में विशिष्ट और लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक के साथ इसमें एक कोर्स भी किया हुआ है।

फ़िल्म 'पल्लवी अनुपल्लवी'

टेलीकॉम कंपनी आइडिया प्रीपेड की सिग्नेचर ट्यून दक्षिण के लोकप्रिय संगीतकार इलैयाराजा के संगीत से प्रेरित थी। कहते हैं कि ट्यून को उनके एक गाने ‘नगूवा नयना मधुरा मौना’ से लिया गया था। 1983 में यह गीत दक्षिण भारत में काफी मशहूर था और लोगों की जुबान पर भी। वहीं, इस गाने से एक और खास बात जुड़ी है। दरअसल यह गाना हिंदी सिनेमा के अभिनेता अनिल कपूर पर फिल्माया गया था। उस पिक्चर का नाम ‘पल्लवी अनुपल्लवी’ था, जिसमें किरन वैराले अनिल कपूर की अभिनेत्री थीं। अब तक कई हिट फिल्में दे चुके मंझे हुए निर्देशक मणिरत्नम ने पिक्चर को निर्देशित किया था।
‘पल्लवी अनुपल्लवी’ एक ऐसी प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म थी, जिसमें कम उम्र का युवक एक शादीशुदा महिला के प्यार में पड़ जाता है, जो अपने पति से अलग हो चुकी होती है। परिवारिक बाध्यताएं, सामाजिक बेड़ियों और कई समस्याओं से संघर्ष करती कहानी फिल्म को दिलचस्प बनाती है। इन सबके बीच प्यार की नई परिभाषा भी तलाशती है।

पुरस्कार व सम्मान

इलैयाराजा ने 'सागर संगम' (1984), 'सिंधु भैरवी' (1986) और 'रुद्रवेना' (1989) फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है। उन्होंने मलयालम फिल्म 'पजास्सी राजा' (2010) के लिए सर्वश्रेष्ठ पृष्ठभूमि स्कोर के लिए भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता है। उन्हें फिल्म 'विश्व थुलासी' (2005) के लिए वर्ल्डफेस्ट-ह्यूस्टन फिल्म फेस्टिवल में फिल्म संगीतकार एम. एस. विश्वनाथन के साथ संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ संगीत स्कोर के लिए गोल्ड रेमी अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

सारिका

अभिनेत्री सारिका के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं
सारिका

भारतीय अभिनेत्री

जन्म तिथि: 03-जून -1962

जन्म स्थान: नई दिल्ली, दिल्ली, भारत
सारिका ठाकुर, जिन्हें सारिका के नाम से बेहतर जाना जाता है, एक भारतीय अभिनेत्री हैं।
अभिनय के अलावा, उन्होंने राज कमल फिल्म्स इंटरनेशनल के तहत कुरुथिपुनल के लिए कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर, साउंड डिज़ाइनर और एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया।
2005 में, उन्होंने अंग्रेजी फिल्म परज़ानिया के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता।

अभिनेत्री सारिका के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

सारिका ठाकुर (जन्म 3 जून 1960), जिन्हें सारिका के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय अभिनेत्री हैं।  अभिनय के अलावा, उन्होंने राज कमल फिल्म्स इंटरनेशनल के तहत कुर्तीपुनल के लिए कॉस्ट्यूम डिजाइनर, साउंड डिजाइनर और एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में भी काम किया।  2005 में, उन्होंने अंग्रेजी फिल्म परजानिया  के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता।
सारिका का जन्म नई दिल्ली में महाराष्ट्रीयन और राजपूत वंश के परिवार में हुआ था जब वह बहुत छोटी थी, उसके पिता ने परिवार छोड़ दिया।  तभी से, वह परिवार की मुखिया बन गई और उसे काम करना पड़ा।  वह स्कूल नहीं गई।
सारिका ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 5 साल की उम्र में एक बाल कलाकार के रूप में की थी बॉलीवुड में 1960 के दौरान एक लड़के, मास्टर सूरज की भूमिका निभायी थी  बाल कलाकार के रूप में उनकी सबसे उल्लेखनीय और लोकप्रिय फ़िल्म 1967 में संगीतमय सुपरहिट हमराज़ थी, जहाँ उन्हें बेबी सारिका नाम की विमी की बेटी के रूप में देखा गया था  वह कई बच्चों की फिल्मों में दिखाई दीं।  बाद में, उन्होंने सचिन के साथ राजश्री प्रोडक्शंस गीत गाता चल के साथ फिल्मों में कदम रखा, जिसके साथ उन्होंने कई हिंदी और मराठी फिल्मों में अभिनय किया।
सारिका के अभिनय करियर में, उन्हें अक्सर अपने गैर-भारतीय लुक के कारण "पश्चिमी लड़की" के रूप में फिल्मों में लिया जाता था  उन्होंने 1986 में उन्होंने ने श्रुति हसन नाम की एक बच्ची को जन्म दिया। उन्होंने कमल हासन से शादी के बाद फिल्मों को अलविदा कह दिया और चेन्नई चली गईं उस समय वह अपने कैरियर के चरम पर थी अपने पति से अलग होने के बाद, उन्होंने हिंदी फिल्मों में वापसी की उन्होंने फिल्म सेक्रेड एविल - ए ट्रू स्टोरी में इप्सिता रे चक्रवर्ती की भूमिका निभाई जो बॉक्स ऑफिस पर असफल रही।
वर्ष 2000 में, सारिका ने फिल्म हे राम के लिए सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिज़ाइन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता  परज़ानिया में उनका प्रदर्शन जिसमें वह एक पारसी महिला की भूमिका निभायी थी जो 2002 के भारत के दंगों के दौरान अपने बच्चे को खो देती है, उसे सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला
सारिका ने फिल्म भेजा फ्राई (2006) में शीतल थडानी के रूप में अभिनय किया, जहां उन्होंने रजत कपूर की पत्नी की भूमिका निभाई।  मनोरमा सिक्स फीट अंडर में भी उनकी छोटी लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका थी। 

सारिका ने अपना टीवी डेब्यू सोनी टीवी के शो युद्ध में किया जिसमें अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे।


सारिका की दुखद दास्तान यह रही

मणि रत्नम

प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक मणिरत्नम के जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं

मणिरत्नम भारत के प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशकों में से एक हैं। वे तमिल तथा हिन्दी दोनों भाषाओं के ख्यातिप्राप्त फ़िल्म निर्माता हैं। जिस तरह नए लोगों के लिए फिल्मों में काम करना एक बड़ा सपना होता है, उसी तरह एक स्थापित अभिनेता और अभिनेत्री का सपना होता है कि वह चोटी के निर्देशक के साथ काम करे ताकि उसके कॅरियर को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके। मणिरत्नम भी एक ऐसे निर्देशक हैं, जिनकी फिल्मों में काम करके फिल्म कलाकार अपने आप को भाग्यशाली समझता है। वे एक ऐसे निर्देशक हैं, जिन्होंने अपनी उम्दा फिल्मों के चलते भारतीय फिल्म उद्योग को विश्व में पहचान दिलाई।

जन्म

🎂मणिरत्नम का जन्म तमिलनाडु के मदुरई में 2 जून, सन 1955 को हुआ था। जब उनका जन्म हुआ, तब उन्हें गोपाल रत्नम सुब्रमण्यम के नाम से जाना जाता था। मणिरत्नम पर उनके पिता का प्रभाव साफ तौर पर देखा जा सकता है। उनके पिता रत्नम अय्यर एक फिल्म निर्माता थे, जो 'वीनस पिक्चर' जैसी बड़ी प्रोडक्शन कंपनी के साथ काम कर चुके थे।

शिक्षा

मणिरत्नम ने स्कूली शिक्षा चेन्नई में रहकर पूरी की। उन्होंने 'मद्रास विश्वविद्यालय' से कॉमर्स क्षेत्र में स्नातक की उपाधि हासिल की। फिल्म बनाने से पहले उन्होंने 'जमना लाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडी' से एमबीए करके मैनेजमेंट कंसल्टेंट का काम किया। फिल्मों को वास्तविकता से रूबरू कराने वाले मणिरत्नम के दो भाई थे और दोनों ही फिल्म निर्माता थे, लेकिन किसी दुर्घटना की वजह से उनके दोनों भाई इस दुनिया में नहीं रहे। मणिरत्नम का विवाह राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सुहासनी से 1988 में हुआ। सुहासनी प्रख्यात अभिनेता कमल हसन की भतीजी और चारु हासन की बेटी हैं।

फिल्मी_कॅरियर

फिल्में बनाने से पहले मणिरत्नम फिल्म सहायक के तौर पर भी काम कर चुके थे। फिल्म निर्देशक के रूप में उनकी पहली फिल्म कन्नड़ में 'पल्लवी अनु पल्लवी' थी, जिसमें अभिनेता अनिल कपूर और लक्ष्मी ने काम किया। इसके बाद मणिरत्नम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दक्षिण की तमाम भाषाओं में फिल्में बनाई। लेकिन मणिरत्नम को लोकप्रियता 'मौना रागम' से मिली। यह फिल्म नव विवाहित जोड़े को लेकर बनाई गई थी, जिसे लोगों ने भी पसंद किया था। मणिरत्नम के लिए 1989 में बनाई गई ‘गीताजंली’ मील का पत्थर साबित हुई। यह व्यावसायिक रूप से बहुत ही सफल रही। इस फिल्म के लिए उन्हें 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार' भी प्रदान किया गया।

मणिरत्नम जिस तरह से दक्षिण के एक विख्यात निर्देशक हैं, उसी तरह से वह बॉलीवुड के जाने माने फ़िल्मकार भी हैं। हिन्दी फिल्मों में उन्होंने 'टेरोरिज्म ट्राइलॉजी', 'रोजा' (1992), 'बॉम्बे' (1995), 'दिल से' (1998) जैसी फिल्में दीं, जो पूरी तरह से आतंकवाद के ऊपर आधारित थीं। 'नायकन' मणिरत्नम की एक ऐसी फिल्म है, जिसे विदेशों में भी काफ़ी सराहा गया। टाइम पत्रिका ने वर्ष 2005 में पहली बार सर्वकालिक 100 महान् फिल्मों की सूची जारी की थी। इसमें मणिरत्नम की 'नायकन', सत्यजीत राय की 'द अपु ट्राइलॉजी' और गुरुदत्त की 'प्यासा' को जगह मिली थी।

रहमान_के_साथ_जुगलबंदी

फिल्म इंडस्ट्री में ए. आर. रहमान और मणिरत्नम की जुगलबंदी मशहूर है। मणिरत्नम की अधिकतर लोकप्रिय फिल्मों को ए. आर. रहमान ने अपने संगीत से सजाया है, जिसमें शामिल हैं- 'रोजा', 'बॉम्बे', 'दिल से', 'गुरु' आदि। इनके फिल्म के संगीत इतने लोकप्रिय हैं, जिसे आज भी लोग गुनगुनाते हैं।

पुरस्कार_व_सम्मान

मणिरत्नम को अब तक छः राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
वर्ष 2002 में उन्हें भारत सरकार का चौथा सर्वोच्च पुरस्कार 'पद्मश्री' दिया गया।
इसके अतिरिक्त मणिरत्नम ने अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल में भी कई पुरस्कार अपनी झोली में डाले हैं।

प्रमुख_फ़िल्में

मणिरत्नम की कुछ महत्त्वपूर्ण फ़िल्मों के नाम निम्नलिखित हैं

मणिरत्नम_की_प्रमुख_फ़िल्में

क्र.सं. फ़िल्म वर्ष
1. नायकम 1987
2. गीतांजली 1989
3. रोजा 1992
4. बॉम्बे 1995
5. दिल से 1998
6. साथिया 2002
7. युवा 2004
8. गुरु 2007
9. रावन 2010

राज कपूर

जन्म
रणबीर राज कपूर
🎂14 दिसम्बर 1924
पेशावर, पश्चिमोत्तर सीमांत ब्रिटिश भारत (वर्तमान में खैबर पख्तूनख्वा, पाकिस्तान)
मृत्यु
⚰️2 जून 1988 (उम्र 63)
नयी दिल्ली, भारत
राष्ट्रीयता
भारतीय
अन्य नाम
शोमैन, भारतीय सिनेमा का महान् शोमैन, भारतीय सिनेमा का चार्ली चैप्लिन, राज साहब
नागरिकता
भारतीय
व्यवसाय
अभिनेता, फिल्म-निर्माता, निर्देशक
कार्यकाल
1935–1988
जीवनसाथी
कृष्णा मल्होत्रा (वि॰ 1946–88)
बच्चे
रणधीर कपूर
ऋतु नंदा
ऋषि कपूर
रीमा कपूर जैन
राजीव कपूर
संबंधी
द्रष्टव्य कपूर परिवार
पुरस्कार
फिल्म फेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ फिल्म
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार
फिल्म फेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सम्पादक
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार हिन्दी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म

आपको पता है भारत से दो लोग रूस में बहुत पॉपुलर थे। एक था नेहड़ु और दूसरा राजकपूर। राज कपूर का फेमस होना इसलिए था कि वो भी नेहड़ु की तरह ही एक घोर वामपन्थी था। आपने अक्सर देखा होगा कि रूस में राजकपूर की फिल्में और गाने बड़े फेमस हुए हैं। लेकिन उसका कारण राज कपूर का कोई कालजयी फ़िल्म बना डालना नही था बल्कि वो इकोसिस्टम था जिसका वो हिस्सा था। रूस जो "हाफ ग्लास वाटर" थ्योरी को दुनिया मे फैला उनकी संस्कृति खत्म करने में लगा था उसमें राज कपूर भारत मे उसका सबसे बड़ा एजेंट था।
हाफ ग्लास थ्योरी वही थी जिसे आज "फ्री सेक्स" कहा जाता है। अर्थात महिला को इतना चरित्रहीन कर दो कि वो यहां वहां हमबिस्तर होती रहे और उसे इसमे कुछ गलत न लग ये आधुनिकता लगे। यही काम रूस अमेरिका से लेकर भारत हर जगह कर रहा था।

दुनिया को गलतफहमी है कि अमेरिका कोल्ड वॉर जीता लेकिन हकीकत ये है कि रूस का तो कुछ क्षेत्रफल गया लेकिन रूस ने अमेरिका का सारा कल्चर ही वामपन्थी बना दिया। उसकी हॉलीवुड में वो गंदगी भरी गयी कि पूरा अमेरिकी समाज आज परिवारमुक्त हो गया है। यही काम राज कपूर जैसे बॉलीवुड के माध्यम से कर रहे थे। आज भी हो रहा है।
सोचिये न कि कितना गन्ध राज कपूर के अंदर था कि अपनी माँ के साथ नहाते हुए वो उसके यौनांग निहारता था और उन्हें इमेजिन कर कर ऑब्सेस्ड होता था। यही चीज तो फिर उसने फिल्मों के माध्यम से दिखाया जहां मेरा नाम जोकर(शायद यही फ़िल्म) में छोटा ऋषि कपूर, सिमी अग्रवाल को नहाते हुए देखता है। जीनत अमान से लेकर मंदाकिनी जैसों को न्यूड कराया जाता है। बहुत सी अन्य फिल्मों में भी इस तरह के नग्न चित्रण किसी भक्ति से लेकर मातृत्व के नाम पर डाल दिये गए।

यही वो दौर था जहां पर्दे पर ये सब हो रहा था और पीठ पीछे उसी तरह की अश्लील पार्टियां चल रही थी जिन्हें आज Rave Party कहते हैं जहां नशा और सेक्स खुलकर परोसा जाता है। आप अक्सर सुनते होंगे कि बॉलीवुड में तो पत्नी एक्सचेंज का रिवाज भी है.. तो ये कल्चर एकाएक नही बना। बॉलीवुड के शुरुआत जहां कोई लड़की भांड नही बनना चाहती थी वहां सबसे पहले वेश्याओं से काम शुरू किया गया। फिर इस इंडस्ट्री को पॉपुलर और अट्रैक्टिव बना आम घर की लड़कियों को यहां जाने को प्रेरित कराया गया। फिर धीरे धीरे ऑडिशन के नाम पर इनका कास्टिंग काउच हुआ।(गूगल में आपको तस्वीरे मिल जाएंगी जहां उस दौर में लड़की को अंतवस्त्र में खड़ा किया है फ़िगर चेक करने को)। धीरे धीरे फिर वही हुआ जो आज आपको टिकटोक से दिखता है। जैसे टिकटोक पर लड़कियां समझ गयी कि पुट्ठे दिखाने फॉलोवर बढाने का शॉर्टकट है वैसे ही तब बॉलीवुड एक शोहरत और पैसा बनाने का शॉर्टकट बन गया था, फिर क्या हो गया जो पर्दे के पीछे समझौते करने थे?

लड़की सोचती थी कि पर्दे पर तो एक सुंदर हीरोइन दिख रही हूँ। हर कोई मेरे दीवाने हैं। लड़कियां मुझ जैसा बनना चाहती हैं। पुरुष मुझसे शादी करने के सपने देखता है। जहां जाती हूँ भीड़ ठहर जाती है मेरे दीदार को। ये सब की चाहत ने घर घर मे सपने पनपा दिए कि मैं भी तो सुंदर हूँ.. मैं भी हीरोइन बनूंगी। तो कर लेंगे पर्दे के पीछे के समझौते।

शुरुआत में सारे अय्याशी-अश्लीलता के काम पर्दे के पीछे इसलिए थे क्योंकि पर्दे पर अश्लीलता देखने को अधिकतर समाज तैयार नही था लेकिन धीरे धीरे भाँडो ने एक एक पत्थर चला समाज की गहराई नापनी शुरू की। नतीजा ये हुआ कि "साला मैं तो साहब बन गया" पर जिस समाज मे बवाल हो गया था कि साला कैसे बोल दिया गाने में, वो धीरे धीरे कर भाग DK बोस तक बना दिया गया। ऐसे ही जहां रोमांस के नाम पर पेड़ के इर्द गिर्द घुमा जाता था। किसिंग के नाम पर दो फूल मिलते थे। वहां राज कपूर से शुरू हुआ... आज इस कदर बन चुका है कि खुलकर न्यूडिटी चलती है। धक्के वाले शॉट्स तक दिखाए जाते हैं सेक्स सीन के नाम पर वो भी पूरे साउंड इफेक्ट(moaning) के साथ। और क्या कहा जाता है कि क्रिएटिविटी है। ये सीन डालना जरूरी था। जैसे पुरानी फिल्में बिना इन सीन के तो अधूरी ही रह जाती थी.. लोग कहानी समझ ही नही पाते थे।

इसलिए आज जो बॉलीवुड की हकीकत है जहां सेक्स, ड्रग्स, वैश्यावृत्ति सब चलती है.. वो सब इस राज कपूर की देन है। लोग कहते भी हैं कि ये इतना श्याना था कि इसने इन सब चीजों से अपने घर की महिलाएं दूर रखी.. इसके परिवार में पहले तो किसी की शादी फिल्मी हीरोइन से नही होती थी लेकिन हो गयी तो ये उससे भी फ़िल्म छुड़वा देता था... लेकिन दूसरों की लड़कियों का इसने जो शोषण किया था उसी की हाय इसे ऐसी लगी कि फिर इसकी पोतियां आज तैमूर पैदा कर रही हैं। इमैजिन जिस खानदान में नाम पृथ्वीराज के नाम पर पड़ते थे, उस खानदान से आज तैमूर और जहांगीर जैसे निकल रहे हैं। ये इसको लगा श्राप ही है।

आज इसका पूरा खानदान कमजोर हो चुका है। एक समय जिनका सिक्का बॉलीवुड में चलता था, आज वहां कपूर खानदान के नाम पर गिने चुने बचे हैं जिनमे से बड़ा एक्टर या डायरेक्टर है ही कौन?? बस रणबीर कपूर जैसे तैसे चल रहा है जिसका भी करियर सलमान खान ने खराब कर दिया था कटरीना के चक्कर मे। आज बॉलीवुड में D गैंग की चलती है जो तेजी से इसका इस्लामीकरण कर रहा है। राज कपूर ने इसका वामीकरण किया था। नतीजा आज इसके अंदर सिर्फ ये दो प्रजाति के लोग हैं और अगर यहां काम करना है तो इनके शर्तो पर करना होगा। एक आपसे शरीर बिक़वायेगा तो दूसरा आपसे या अल्ला, या खुदा बिक़वायेगा। इसीलिए कथित राष्ट्रवादी भी भले ही कितना भारत भारत करते रहें लेकिन इन मामलों में उनका स्टैंड बाकी के भाँडो जैसा ही होता है।

अगर मना करोगे तो आप वहां काम ही नही कर पाओगे और हो सकता है आपका सुशांत भी बना दिया जाए और फिर ये लोग आपको कहें कि आप मानसिक रूप से बच्चे थे.. वहां की पॉलिटिक्स नही झेल पाए।

गुरुवार, 1 जून 2023

सोनाक्षी सिन्हा

सोनाक्षी सिन्हा

भारतीय फिल्म अभिनेत्री


जन्म तिथि: 02जून-1987

जन्म स्थान: मुंबई, महाराष्ट्र, भारत

पेशा: अभिनेता, गायक, फैशन मॉडल, मॉडल, फिल्म अभिनेता

राष्ट्रीयता: भारत


  • सोनाक्षी सिन्हा (उच्चारण [so?na?k?i? s?n?a?]; जन्म 2 जून 1987) एक भारतीय फिल्म अभिनेत्री और गायिका हैं।
  • अपने शुरुआती करियर में एक कॉस्ट्यूम डिजाइनर के रूप में काम करने के बाद, सिन्हा ने एक्शन-ड्रामा फिल्म दबंग (2010) में अभिनय की शुरुआत की, जिसने उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। सिन्हा ने कई फिल्मों में पुरुष नायक की रोमांटिक रुचि निभाई है। राउडी राठौर (2012), सन ऑफ सरदार (2012), दबंग 2 (2012) और हॉलिडे: ए सोल्जर इज नेवर ऑफ ड्यूटी (2014) सहित टॉप-ग्रॉसिंग एक्शन-ड्रामा, हालांकि उन्हें भूमिका निभाने के लिए उनकी आलोचना की गई थी। कम कार्य क्षेत्र।
  • उन्हें रोमांटिक ड्रामा लुटेरा (2013) में तपेदिक से पीड़ित एक महिला के चित्रण के लिए आलोचनात्मक प्रशंसा मिली, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन मिला।
  • उन्होंने मिशन मंगल (2019) के अपवाद के साथ व्यावसायिक असफलताओं की एक श्रृंखला में अभिनय करके इस शुरुआती सफलता का अनुसरण किया, जिसमें उनकी सहायक भूमिका थी। फिल्मों में अभिनय के अलावा, सिन्हा ने इमरान खान के गीत में एक छोटा सा हिस्सा गाया है। उनकी फिल्म तेवर (2015) में "लेट्स सेलिब्रेट"।
  • उन्होंने एकल "आज मूड इश्कोलिक है" भी गाया है और उनकी कुल चार फिल्मों में गाया है।

नरगिस दत्त

प्रसिद्ध अभिनेत्री नरगिस के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि।  🎂।                       ⚰️
नर्गिस दत्त हिन्दी सिनेमा की महान् अभिनेत्रियों में से एक है। नर्गिस मशहूर गायिका जद्दनबाई की पुत्री थीं। कला नर्गिस को विरासत में मिली थी और सिर्फ छह साल की उम्र में नर्गिस ने फ़िल्म 'तलाशे हक़' (1935) से अभिनय की शुरुआत कर दी थी। फ़िल्म मदर इंडिया में राधा की भूमिका के जरिए भारतीय नारी को एक नया और सशक्त रूप देने वाली नर्गिस हिंदी सिनेमा की महानतम अभिनेत्रियों में से एक थीं, जिन्होंने लगभग 2 दशक लंबे फ़िल्मी सफर में दर्ज़नों यादगार एवं संवदेनशील भूमिकाएँ की और अपने सहज अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन किया।

नर्गिस दत्त का जन्म फ़ातिमा अब्दुल रशीद के रूप में 1 जून, 1929 को कलकत्ता में हुआ था। हालांकि उनके जन्मस्थान को लेकर विवाद है, कुछ लोग उनका जन्म इलाहबाद में होना मानते है। नर्गिस के पिता उत्तमचंद मूलचंद, रावलपिंडी से ताल्लुक रखने वाले समृद्ध हिन्दू थे एवं माता जद्दनबाई, एक हिंदुस्तानी क्लासिकल गायिका थीं। उनके दो भाई, अख्तर व अनवर हुसैन थे। नर्गिस की माता भारतीय सिनेमा से सक्रियता से जुड़ी हुई थीं।

कला नर्गिस को विरासत में मिली थी और सिर्फ छह साल की उम्र में नर्गिस ने फ़िल्म 'तलाशे हक़' (1935) से अभिनय की शुरुआत कर दी थी। नर्गिस ने मदर इंडिया के अलावा आवारा, श्री 420, बरसात, अंदाज, लाजवंती, जोगन परदेशी, रात और दिन सहित दर्ज़नों कामयाब फ़िल्मों में बेहतरीन अभिनय किया। राजकपूर के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से सराही गई और दोनों की जोड़ी को हिंदी फ़िल्मों की सर्वकालीन सफल जोड़ियों में से गिना जाता है।

1940 और 50 के दशक में नर्गिस ने कई फ़िल्मों में काम किया और 1957 में प्रदर्शित महबूब ख़ान की फ़िल्म 'मदर इंडिया' नर्गिस की सर्वाधिक चर्चित फ़िल्मों में रही। इस फ़िल्म को ऑस्कर के लिए नामित किया गया था। उनके कुछ प्रमुख फ़िल्में इस प्रकार हैं- मदर इंडिया, अंदाज़, अनहोनी, जोगन, आवारा, रात और दिन, अदालत, घर संसार, लाजवंती, परदेशी, चोरी चोरी।

नर्गिस को पद्मश्री सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। इनमें फ़िल्मफेयर पुरस्कार के अलावा फ़िल्म 'रात और दिन' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनय का राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल है।

1957 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार (फ़िल्म- मदर इंडिया)
1958 - कार्लोवी (अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव वरी) में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए पुरस्कार (फ़िल्म- मदर इंडिया)
1958 - पद्मश्री
1968 - राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (फ़िल्म- रात और दिन)

अभिनय से अलग होने के बाद नर्गिस सामाजिक कार्य में जुट गईं। नर्गिस ने पति सुनील दत्त के साथ अजंता आर्ट्स कल्चरल ट्रूप की स्थापना की। यह दल सीमाओं पर जाकर जवानों के मनोरंजन के लिए स्टेज शो करता था। इसके अलावा वे स्पास्टिक सोसाइटी से भी जुड़ी रहीं। बाद में नर्गिस को राज्यसभा के लिए भी नामित किया गया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। इसी कार्यकाल के दौरान वे गंभीर रूप से बीमार हो गईं और 3 मई 1981 को कैंसर के कारण उनकी मौत हो गई।

नर्गिस की याद में 1982 में नर्गिस दत्त मेमोरियल कैंसर फाउंडेशन की स्थापना की गई। इस प्रकार निधन के बाद भी नर्गिस लोगों के दिल में बसी हुई हैं।

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