गुरुवार, 18 मई 2023

अलीशा बेरी

तारा, गौतम बेरी


जन्म

19 मई 1988 

राष्ट्रीयता

Indian

व्यवसाय

Actress


तारा, गौतम बेरी (किरण खेर के पहले पति) और अभिनेत्री नंदिनी सेन की बेटी हैं।


तारा अलीशा बैरी एक भारतीय एक्ट्रेस और थियेटर आर्टिस्ट है, जो हिंदी सिनेमा जगत के साथ साथ तेलुगु सिनेमा में भी सक्रिय हैं ।[2] तारा अलीशा ने हिंदी सिनेमा में डेब्यू फिल्म मस्तराम (2014) से रखा था।मस्तराम (2020) में एक्ट्रेस तारा अलीशा बेरी मुख्य भूमिका में हैं। तारा ने रेणु का किरदार निभाया है। इस किरदार के लिए उनकी काफी सराहना भी हो रही है।सिकंदर खेर की सौतेली बहन हैं तारा अलीशा बेरी।


टीवी और वेब सीरीज


वर्ष शीर्षक भूमिका भाषा प्लैटफ़ॉर्म टिप्पणी

2015 रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियाँ आशालता हिंदी महाकाव्य टीवी चैनल एपिसोड 1, 2 और 3 (चोखेर बाली)

2018- 2019 प्यार वासना और भ्रम पोरोमा सरकार हिंदी विउ सीजन 1 और 2

2020 मस्तराम मधु हिंदी एमएक्स प्लेयर 

2020 स्टेट ऑफ सीज: 26/11 पार्वती पाटिल हिंदी ZEE5 

2020 डिस्कनेक्ट किया गया तारा अंग्रेज़ी यूट्यूब 

2021 प्रथम पाखी हिंदी यूट्यूब


पतली परत


वर्ष पतली परत भूमिका भाषा टिप्पणियाँ

2011 100% प्यार स्वप्ना तेलुगू डेब्यू फिल्म

2011 पैसा पैसा, और पैसा मेघना 

2014 मस्तराम रेणु हिंदी हिंदी पदार्पण

2015 द परफेक्ट गर्ल वेदिका 

2016 मोरेचिका ओएनआई बंगाली लघु फिल्म

2016 प्यार के खेल अलीशा अस्थाना हिंदी 

2017 अगम सरला 

2018 हम तुम लड़की लघु फिल्म [11]

2018 मरुधर एक्सप्रेस चित्रा 

2018 तीन पहलियां कुसुम टीवी फिल्म; मिर्ची मालिनी खंड

2019 गन पे डन रजिया 

2019 ए 1 दिव्या तामिल तमिल डेब्यू

2020 बिस्कोथ अनीता


NRI





 

बुधवार, 17 मई 2023

ब्राह्मण

 


ब्राह्मणों में कई जातियां है।इससे मूल कार्य व स्थान का पता चलता है

  • सामवेदी: ये सामवेद गायन करने वाले लोग थे।
  • अग्निहोत्री: अग्नि में आहुति देने वाला।
  • त्रिवेदी: वे लोग जिन्हें तीन वेदों का था ज्ञान वे त्रिवेदी है
  • चतुर्वेदी: जिन्हें चारों वेदों का ज्ञान था।वेलोग चतुर्वेदी हुए।
  • *एक वेद को पढ़ने वाले ब्रह्मण को पाठक कहा गया।
  • वेदी: जिन्हें वेदी बनाने का ज्ञान था वे वेदी हुए।
  • द्विवेदी:जिन्हें दो वेदों का ही ज्ञान था वे लोग द्विवेदी कहलाएं
  • *शुक्ल यजुर्वेद को पढ़ने वाले शुक्ल या शुक्ला कहलाए।
  • *चारो वेदों, पुराणों और उपनिषदों के ज्ञाता को पंडित कहा गया, जो आगे चलकर पाण्डेय, पांडे, पंडिया, पाध्याय हो गए। ये पाध्याय कालांतर में उपाध्याय हुआ।
  • *शास्त्र धारण करने वाले या शास्त्रार्थ करने वाले शास्त्री की उपाधि से विभूषित हुए।
ब्राह्मणो के बारे में
ब्राह्मण जाति को हिन्दू धर्म में शीर्ष पर रखा गया है। लेकिन ब्राह्मणो के बारे में आज भी बहुत ही कम लोग जानते है, कि ब्राह्मण कितने प्रकार के होते है। और उनके गोत्र कौन-कौन से होते है। आज के दौर में 90% ब्राह्मण भी ब्राह्मणो की वंशावली को नहीं जानते।

ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को आज भी है। चाहे वह किसी भी जाति, प्रांत या संप्रदाय से हो वह गायत्री दीक्षा लेकर ब्रह्माण बन सकता है, लेकिन नियमों का पालन करना होता है। अपने ब्राह्मण कर्म छोड़कर अन्य कर्मों को अपना लिया है। हालांकि अब वे ब्राह्मण नहीं रहे कहलाते अभी भी ब्राह्मण है। > स्मृति-पुराणों में ब्राह्मण के 8 भेदों का वर्णन है:- मात्र, ब्राह्मण, श्रोत्रिय, अनुचान, भ्रूण, ऋषिकल्प, ऋषि और मुनि। ब्राह्मण को धर्मज्ञ विप्र और द्विज भी कहा जाता है।> उपनाम में छुपा है पूरा इतिहास

1. मात्र : ऐसे ब्राह्मण जो जाति से ब्राह्मण हैं लेकिन वे कर्म से ब्राह्मण नहीं हैं उन्हें मात्र कहा गया है। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने से कोई ब्राह्मण नहीं कहलाता। बहुत से ब्राह्मण ब्राह्मणोचित उपनयन संस्कार और वैदिक कर्मों से दूर हैं, तो वैसे मात्र हैं। उनमें से कुछ तो यह भी नहीं हैं। वे बस शूद्र हैं। वे तरह तरह के देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और रा‍त्रि के क्रियाकांड में लिप्त रहते हैं। वे सभी राक्षस धर्मी भी हो सकते हैं।

2. ब्राह्मण : ईश्वरवादी, वेदपाठी, ब्रह्मगामी, सरल, एकांतप्रिय, सत्यवादी और बुद्धि से जो दृढ़ हैं, वे ब्राह्मण कहे गए हैं। तरह-तरह की पूजा-पाठ आदि पुराणिकों के कर्म को छोड़कर जो वेदसम्मत आचरण करता है वह ब्राह्मण कहा गया है।

3. श्रोत्रिय : स्मृति अनुसार जो कोई भी मनुष्य वेद की किसी एक शाखा को कल्प और छहों अंगों सहित पढ़कर ब्राह्मणोचित 6 कर्मों में सलंग्न रहता है, वह ‘श्रोत्रिय’ कहलाता है।

4. अनुचान : कोई भी व्यक्ति वेदों और वेदांगों का तत्वज्ञ, पापरहित, शुद्ध चित्त, श्रेष्ठ, श्रोत्रिय विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला और विद्वान है, वह ‘अनुचान’ माना गया है।

5. भ्रूण : अनुचान के समस्त गुणों से युक्त होकर केवल यज्ञ और स्वाध्याय में ही संलग्न रहता है, ऐसे इंद्रिय संयम व्यक्ति को भ्रूण कहा गया है।

6. ऋषिकल्प : जो कोई भी व्यक्ति सभी वेदों, स्मृतियों और लौकिक विषयों का ज्ञान प्राप्त कर मन और इंद्रियों को वश में करके आश्रम में सदा ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए निवास करता है उसे ऋषिकल्प कहा जाता है।

7. ऋषि : ऐसे व्यक्ति तो सम्यक आहार, विहार आदि करते हुए ब्रह्मचारी रहकर संशय और संदेह से परे हैं और जिसके श्राप और अनुग्रह फलित होने लगे हैं उस सत्यप्रतिज्ञ और समर्थ व्यक्ति को ऋषि कहा गया है।

8. मुनि : जो व्यक्ति निवृत्ति मार्ग में स्थित, संपूर्ण तत्वों का ज्ञाता, ध्याननिष्ठ, जितेन्द्रिय तथा सिद्ध है ऐसे ब्राह्मण को ‘मुनि’ कहते हैं।

उपरोक्त में से अधिकतर ‘मात्र’नामक ब्राह्मणों की संख्‍या ही अधिक है।

सबसे पहले ब्राह्मण शब्द का प्रयोग अथर्वेद के उच्चारण कर्ता ऋषियों के लिए किया गया था। फिर प्रत्येक वेद को समझने के लिए ग्रन्थ लिखे गए उन्हें भी ब्रह्मण साहित्य कहा गया। ब्राह्मण का तब किसी जाति या समाज से नहीं था।

“मनु-स्मॄति” के अनुसार आर्यवर्त वैदिक लोगों की भूमि है। “गोत्र” शब्द का अर्थ संस्कृत भाषा में “वंश” है। ब्राह्मण जाति के लोगों में, गोत्रों को पितृसत्तात्मक रूप से माना जाता है। प्रत्येक गोत्र एक प्रसिद्ध ऋषि या ऋषि का नाम लेता है जो उस कबीले के संरक्षक थे।

समाज बनने के बाद अब देखा जाए तो भारत में सबसे ज्यादा विभाजन या वर्गीकरण ब्राह्मणों में ही है जैसे:- सरयूपारीण, कान्यकुब्ज , जिझौतिया, मैथिल, मराठी, बंगाली, भार्गव, कश्मीरी, सनाढ्य, गौड़, महा-बामन और भी बहुत कुछ। इसी प्रकार ब्राह्मणों में सबसे ज्यादा उपनाम (सरनेम या टाईटल ) भी प्रचलित है। कैसे हुई इन उपनामों की उत्पत्ति जानते हैं उनमें से कुछ के बारे में।

ब्राह्मणों की श्रेणियां
ब्राह्मणों को सम्पूर्ण भारतवर्ष में विभिन्न उपनामों से जाना जाता है, जैसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में दीक्षित, शुक्ल, द्विवेदी त्रिवेदी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड में जोशी, जोशी उप्रेती त्रिवेदी, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान के कुछ भागों में जोशी,त्रिवेदी भार्गव, डाकोतखाण्डल विप्र, ऋषीश्वर, वशिष्ठ, कौशिक, भारद्वाज, सनाढ्य ब्राह्मण, राय ब्राह्मण, त्यागी , अवध (मध्य उत्तर प्रदेश) तथा मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड से निकले जिझौतिया ब्राह्मण,रम पाल, राजस्थान, मध्यप्रदेश व अन्य राज्यों में बैरागी वैष्णव ब्राह्मण, बाजपेयी, बिहार, झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश ,बंगाल व नेपाल में भूमिहार, जम्मू कश्मीर, पंजाब व हरियाणा के कुछ भागों में महियाल, मध्य प्रदेश व राजस्थान में गालव, गुजरात में श्रीखण्ड,भातखण्डे अनाविल, महाराष्ट्र के महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण, मुख्य रूप से देशस्थ, कोंकणस्थ , दैवदन्या, देवरुखे और करहाड़े है. ब्राह्मण में चितपावन एवं कार्वे, कर्नाटक में निषाद अयंगर एवं हेगडे, केरल में नम्बूदरीपाद, तमिलनाडु में अयंगर एवं अय्यर, आन्ध्र प्रदेश में नियोगी एवं राव, ओड़िशा में दास एवं मिश्र आदि तथा राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, बिहार में शाकद्वीपीय (मग)कहीं उत्तर प्रदेश में जोशी जाति भी पायी जाती है। आदि।




ब्राह्मणों के बारे में ब्राह्मणों की जाति को हिंदू धर्म में सबसे ऊपर रखा गया है। लेकिन ब्राह्मणो के बारे में आज भी बहुत ही कम लोग जानते हैं कि ब्राह्मण कितने प्रकार के होते हैं। और उनका गोत्र कौन-कौन से होता है। आज के दौर में 90% ब्राह्मण भी ब्राह्मणो की जाति को नहीं जानते। ब्राह्मण होने का अधिकार सभी को आज भी है। चाहे वह किसी भी समुदाय, प्रांत या संप्रदाय से हो वह गायत्री दीक्षा लेकर ब्रह्मा बन सकता है, लेकिन सूचनाओं का पालन करना होता है।

जट (जाट समुदाय)

 



🔛अभिनेता/अभिनेत्री जट जाट 

जाट (जट)लिस्ट
बॉबी देओल, भारतीय अभिनेता
दारा सिंह, भारतीय अभिनेता 
दर्शन कुमार, भारतीय अभिनेता 
धर्मेंद्र, भारतीय फिल्म अभिनेता 
जयदीप अहलावत, भारतीय फिल्म अभिनेता
मल्लिका शेरावत, भारतीय फिल्म अभिनेत्री 
रणदीप हुड्डा, भारतीय फिल्म अभिनेता 
सिमरन मुंडी, भारतीय फिल्म अभिनेत्री 
सनी देओल, भारतीय फिल्म अभिनेता 
मेघना मलिक, भारतीय अभिनेत्री 
दिलजीत दोसांझ, पंजाबी और हिंदी फ़िल्म अभिनेता
अमरिंदर गिल, पंजाबी फिल्म अभिनेता
एम्मी विर्क, पंजाबी फिल्म अभिनेता

🔛जाट धार्मिक लोग

भाई बाला (संधू जाट) - गुरु नानक (सिख धर्म के पहले गुरु) के अनुयायी और साथी और 
बाबा बुद्ध (रंधावा जाट) - गुरु नानक के साथी और सिख धर्म के सबसे सम्मानित संतों में से एक 
भाई बिधि चंद छिना  - प्रसिद्ध सिख योद्धा और उपदेशक, घोड़ों की वसूली के लिए प्रसिद्ध, गुरु हरगोबिंद के 
जसनाथ जी
वीर तेजाजी राजस्थान के लोकदेवता
वीर बिग्गाजी

🔛जाट जट राज
राजा राम जाट
महाराजा रणजीत सिंह संधवालिया
महेंद्र प्रताप, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक, मुरसान 
सूरज मल, भरतपुर राज्य के 
हीरा सिंह नाभा, नाभा राज्य के 
पटियाला के महाराजा आला सिंह 
पटियाला राज्य के महाराजा भूपिंदर सिंह 
रघुबीर सिंह जींद, जींद राज्य के
बल्लभगढ़ रियासत के राजा नाहर सिंह 
आनंगपाल सिंह जी तोमर
बाबा दीप सिंह जी
देवी सिंह जी 1857 के क्रांतिकारी
ग्वालियर नरेश भीम सिंह राणा

🔛पहलवानों में

दारा सिंह 
सुशील कुमार, दो बार के ओलंपिक पदक विजेता
गीता फोगट
बबीता फोगाट
बजरंग पुनिया ओलम्पिक पदक विजेता
रवि कुमार दहिया ओलम्पिक पदक विजेता
साक्षी मलिक
पवन कुमार
विनेश फोगाट
रितु फोगाट
संगीता फोगाट
🔛मुक्केबाजों में

ओलंपिक कांस्य पदक विजेता विजेंदर सिंह 
परमजीत समोता
गौरव सोलंकी
सीमा बेनीवाल
🔛एथलीट में
कृष्णा पूनिया,  डिस्कस थ्रोअर और ट्रैक एंड फील्ड एथलीट 
सीमा अंतिल
क्रिकेटरों
संपादित करें
आशीष नेहरा
युवराज सिंह
शुबमन गिल
दीपक हुड्डा
प्रवीण कुमार
वीरेंद्र सहवाग 
युजवेन्द्र चहल
दीपक चाहर
राहुल चाहर
राहुल तेवतिया
अनिकेत चौधरी
प्रदीप साहू
शिखर धवन
अर्शदीप सिंह

🔛समाज सुधारक
संपादित करें
स्वामी केशवानंद 
जसनाथ जी
कर्माबाई
धन्ना भगत
रानाबाई

🔛राज नीति में

भारत

अमरिंदर सिंह, 
बलराम जाखड़ 
बंसी लाल 
चौधरी भूपेन्द्र सिंह हुड्डा
चरण सिंह , भारत के छठे 
चौधरी देवी लाल 
चौधरी भरत सिंह 
छोटू राम 
हरकिशन सिंह सुरजीत 
हरलाल सिंह 
प्रताप सिंह कैरों 
साहिब सिंह वर्मा 
नवजोत सिंह सिद्धू, राजनीतिज्ञ, टेलीविजन व्यक्तित्व और पूर्व क्रिकेटर।
हनुमान बेनीवाल
रामेश्वर लाल डूडी
शीशराम ओला
पाकिस्तान
संपादित करें
चौधरी मुमताज जज्जा - राष्ट्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं के पूर्व सदस्य 
भगवंत मान
प्रकाश सिंह बादल परिवार

🔛ऐतिहासिक

सूरज मल राजस्थान में भरतपुर के महाराजा 1755-1763 तक  महाराजा सूरजमल या सूजान सिंह (13 फरवरी 1707 – 25 दिसम्बर 1763) राजस्थान के भरतपुर के हिन्दू जाट राजा थे। उनका शासन जिन क्षेत्रों में था वे वर्तमान समय में भारत की राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, बुलन्दशहर, ग़ाज़ियाबाद, फ़िरोज़ाबाद, इटावा, हाथरस, एटा, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ जिले; राजस्थान के भरतपुर, धौलपुर, अलवर, जिले; हरियाणा का गुरुग्राम, रोहतक, झज्जर, फरीदाबाद, रेवाड़ी, मेवात जिलों के अन्तर्गत हैं। राजा सूरज मल में वीरता, धीरता, गम्भीरता, उदारता, सतर्कता, दूरदर्शिता, सूझबूझ, चातुर्य और राजमर्मज्ञता का सुखद संगम सुशोभित था। मेल-मिलाप और सह-अस्तित्व तथा समावेशी सोच को आत्मसात करने वाली भारतीयता के वे सच्चे प्रतीक थे। राजा सूरज मल के समकालीन एक इतिहासकार ने उन्हें 'जाटों का प्लेटों' कहा है। इसी तरह एक आधुनिक इतिहासकार ने उनकी स्प्ष्ट दृष्टि और बुद्धिमत्ता को देखने हुए उनकी तुलना ओडिसस से की है।

सूरज मल भरतपुर के महाराजा बहादुर जंग ब्रजनरेश महाराजा सूरजमल महाराजा सूरजमल शासनावधि 1755 - 1763 AD राज्याभिषेक डीग, 22 May 1755 पूर्ववर्ती बदन सिंह उत्तरवर्ती महाराजा जवाहर सिंह जन्म 13 फरवरी 1707 भरतपुर निधन 25 दिसम्बर 1763 दिल्ली जीवनसंगी महारानी किशोरी देवी संतान जवाहर सिंह नाहर सिंह रतन सिंह नवल सिंह रंजीत सिंह घराना सिनसिनवार जाट पिता बदन सिंह माता महारानी देवकी सूरज मल के नेतृत्व में जाटों ने आगरा नगर की रक्षा करने वाली मुगल सेना (गैरिज़न) पर अधिकार कर कर लिया। 25दिसम्बर 1763ई में दिल्ली के शाहदरा में मुगल सेना द्वारा घात लगाकर किए गए एक हमले में सूरजमल की मृत्यु हो गयी। उनकी मृत्यु के समय उनके अपने किलों पर तैनात सैनिकों के अलावा, उनके पास 25,000 पैदल सेना और 15,000 घुड़सवारों की सेना थी।

महाराजा सूरज मल के शासन मे जाट साम्राज्य

🔛भरतपुर दुर्ग

गोवर्धन में सूरज मल का चित्र जिसे विलियम हेनरी बेकर ने १८१८६० में बनाया था। भरतपुर जहां स्थित है, वह इलाका सोघरिया जाट सरदार रुस्तम के अधिकार में था। यहां पर सन 1733 में भरतपुर नगर की नींव डाली गई। सन 1732 में बदनसिंह ने अपने 25 वर्षीय पुत्र सूरजमल को डीग के दक्षिण-पश्चिम में स्थित सोघर गांव के सोघरियों पर आक्रमण करने के लिए भेजा। सूरजमल ने सोघर को जीत लिया। वहाँ राजधानी बनाने के लिए किले का निर्माण शुरू कर दिया। भरतपुर में स्थित यह किला लोहागढ़ किला ( Iron fort ) के नाम से जाना जाता है। यह देश का एकमात्र किला है, जो विभिन्न आक्रमणों के बावजूद हमेशा अजेय व अभेद्य रहा। बदन सिंह और सूरजमल यहां सन 1753 में आकर रहने लगे।

भरतपुर के किले का निर्माण-कार्य शुरू करने के कुछ समय बाद बदनसिंह की आंखों की ज्योति क्षीण होने लगी। अतः उसने विवश होकर राजकाज अपने योग्य और विश्वासपात्र पुत्र सूरजमल को सौंप दिया। वस्तुतः बदनसिंह के समय भी शासन की असली बागडोर सूरजमल के हाथ में रही।

मुगलों, मराठों व राजपूतों से गठबंधन का शिकार हुए बिना ही सूरजमल ने अपनी धाक स्थापित की। घनघोर संकटों की स्थितियों में भी राजनीतिक तथा सैनिक दृष्टि से पथभ्रांत होने से बचता रहा। बहुत कम विकल्प होने के बावजूद उसने कभी गलत या कमजोर चाल नहीं चली। उसने यत्न किया कि संघर्ष का पथ अपनाने से पहले सब शांतिपूर्ण उपायों को अवश्य आज़माया जाए।

नवजात जाट राज्य की रक्षा करने और उसे सुरक्षित बनाए रखने के लिए उसने साहस तथा सूझबूझ का परिचय दिया।

उत्पत्ति और पूर्वज शक्ति का उदय मराठों से मतभेद महाराजा सूरजमल की उदारता इन्हें भी देखने योग्य है

🔛भारतीय उपमहाद्वीप के कुछ जाट वंशों के नाम और उनका प्राप्ति-क्षेत्र दिया गया है।

राजवंश राज्य वर्तमान स्थान
सिनसिनवार भरतपुर राज्य राजस्थान
देशवाल धौलपुर राज्य[राजस्थान
कसवां सिद्धमुख राजस्थान
सिहाग सुईं राजस्थान
बेनीवाल रासलाना  राजस्थान
पूनिया बलुंडा राजस्थान
सहारण भाड़ंग राजस्थान
जोहिया भुरूपाल राजस्थान
सोगरिया सोगर राजस्थान
नागवंशी नागौर राजस्थान
नागिल रणथम्भोर राजस्थान
गोदारा शेखसर
टप्पा राया राजस्थान
उत्तर प्रदेश
ठेनुवा हाथरस
मुरसान
सासनी
बेसवाँ उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश
तोमर सौंख
पिसावा उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश
दलाल कुचेसर  उत्तर प्रदेश
काकरान सहानपुर उत्तर प्रदेश
सिकरवार जारखी  उत्तर प्रदेश
पिलानिया ऊंचागांव उत्तर प्रदेश
पवार मौलाहेडी उत्तर प्रदेश
रोहिला रामपुर रियासत उत्तर प्रदेश
तेवतिया बल्लभगढ़ राज्य हरियाणा
अघा तिलपत हरियाणा
मण्ढ़ान कुंजपुरा हरियाणा
गिल निशानवालिया मिस्ल हरियाणा
सिद्धु कैथल
जीन्द राज्य
पटियाला राज्य
नाभा राज्य
फरीदकोट राज्य
मलौद
भदौड़
फूलकियाँ मिस्ल हरियाणा
हरियाणा
पंजाब (भारत)
पंजाब (भारत)
पंजाब (भारत)
पंजाब (भारत)
पंजाब (भारत)
पंजाब (भारत)
अहलुवालिया अहलुवालिया मिस्ल
कपूरथला राज्य पंजाब (भारत)
पंजाब (भारत)
बैंस अलावलपुर पंजाब (भारत)
विर्क सिंघपुरिया मिस्ल
रूपनगर पंजाब (भारत)
पंजाब (भारत)
ढिल्लों भंगी मिस्ल  पंजाब (भारत)
धालीवाल करोड़सिंहिया मिस्ल] पंजाब (भारत)
संधू शहीद मिस्ल
कलसिया राज्य
थानेसर
बुरिया
कन्हैया मिस्ल
नकई मिस्ल पंजाब (भारत)
हरियाणा
हरियाणा
हरियाणा
पंजाब (पाकिस्तान)
पंजाब (पाकिस्तान)
सियाल सियालकोट पंजाब (पाकिस्तान) इनके कुल पुरोहित थे मंडार 
लंगाह मुल्तान पंजाब (पाकिस्तान)
संधवालिया सुकेरचकिया मिस्ल
पंजाब साम्राज्य
लाडवा पंजाब (पाकिस्तान)
भारतीय उपमहाद्वीप
हरियाणा
बमरौलिया गोहद राज्य
ग्वालियर मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश
दोंदरिया इंदरगढ़
पिछोर मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश
हंसेलिया भितरवार मध्य प्रदेश
खिरवार नरसिंहपुर मध्य प्रदेश
मलिक वाराही
बजना गुजरात
गुजरात
केकन कैकान राज्य  सिंध
हाला हालाखंडी सिंध
सामानी सीसम सिंध
माकड़ मकरान बलूचिस्तान
वराह हरवार, नीमच
हरियाणा

मध्यप्रदेश
हरियाणा


अमरीश पुरी

 


जन्म

23 जून 1932

नवांशहर, पंजाब, ब्रिटिश इंडिया

मृत्यु

12 जनवरी 2005 (उम्र 72)

मुंबई, महाराष्ट्र, भारत

व्यवसाय

अभिनेता

कार्यकाल

1970–2005

जीवनसाथी

उर्मिला दिवेकर (1957–2005)

(मृत्यु तक)

बच्चे

राजीव पुरी (बेटा)

नम्रता (बेटी )

संबंधी

मदनलाल पुरी (भाई)


क्या आप जानते हैं एक लंबी करियर लिस्ट के बीच उन्होंने कुछ पंजाबी फिल्मों में भी काम किया था! आइए एक नजर डालते हैं!


सत अरी अकाल (1977):


सत श्री अकाल' 1977 में रिलीज़ हुई थी जिसमें सुनील दत्त, रीना रॉय, प्रेम नाथ, परीक्षित साहनी और अन्य कलाकार थे। यह फिल्म श्री गुरु ग्रंथ साहिब के गुरता गद्दी दिवस (राज्याभिषेक) के 300 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विनम्र श्रद्धांजलि थी। सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन चमन निलय ने किया था।


चन परदेसी (1980):

चन परदेसी छन्न परदेसी, एक गंभीर नाटक जिसे न केवल दुनिया भर में बहुत सराहना मिली बल्कि राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली पहली पंजाबी फिल्म बनकर इतिहास भी रचा। वर्ष 1980 में रिलीज़ हुई इस फिल्म का निर्देशन चित्रार्थ ने किया था और स्वर्ण सेधा, बलदेव गिल और जेएस चीमा ने इसका निर्माण किया था।


फिल्म में राज बब्बर, ओम पुरी, कुलभूषण खरबंदा, रामा विज, रजनी शर्मा, सुंदर, सुषमा सेठ, सुनीता धीर, मोहन बग्गन, राणा जंग बहादुर, बलदेव गिल, योगराज सेधा, गुरचरण बग्गन, भारत भूषण वर्मा, की कलाकारों की टुकड़ी शामिल थी। वरयाम मस्त, प्राण सभरवाल, मेहर मित्तल और अमरीश पुरी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

दो दशकों के अंतराल के बाद, अमरीश ने चित्रार्थ सिंह द्वारा निर्देशित 'शहीद उधम सिंह' के साथ वापसी की , जो उसी फिल्म के बाद पंजाबी सिनेमा में भी लौट आए थे। इस फिल्म को अपने समय की सबसे महंगी फिल्म माना गया था। शत्रुघ्न सिन्हा, जूही चावला, गुरदास मान, अमरीश पुरी, किमी वर्मा, हरशरण सिंह, पलविंदर धामी, राजेंद्र गुप्ता, टॉम ऑल्टर, डेव एंडरसन, चार्लीन कार्सवेल, दीपक काजिर, गुरकीर्तन, प्राण सभरवाल, प्रभाशरण कौर, गुरदयाल सिरा, नवतेज हुंदल, बीएन शर्मा, बैरी जॉन, दर्शन औलख, गौरव त्रेहन, जैज़ी बैंस और रंजीत ने फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। 

हालांकि अमरीश पुरी का कैमियो रोल था, लेकिन उनकी मौजूदगी ने निश्चित रूप से पर्दे पर आकर्षण ला दिया।



अमरिंदर गिल


 

अमरिंदर गिल

अमरिंदर सिंह गिल

जन्म
अमरिंदर सिंह गिल
🎂11 मई 1976💐
बूरचंद, अमृतसर, पंजाब
आवास
चंडीगढ़, पंजाब
अन्य नाम
एमी
शिक्षा प्राप्त की
गुरु नानकदेव विश्वविद्यालय
व्यवसाय
अभिनेता गायक संगीत-लेखक नर्तक

गिल बूरचंद, अमृतसर, पंजाब से है।उन्होंने खालसा कॉलेज, अमृतसर में अध्ययन कर कृषि विज्ञान में मास्टर की डिग्री प्राप्त की। वे गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के एक पूर्व छात्र है। कॉलेज के दौरान वे सरबजीत चीमा जैसे व्यक्तित्व के लिए एक समर्थन कलाकार के रूप में भांगड़ा नृत्य प्रदर्शन किया करते थे। अपने गायन कैरियर शुरू करने से पहले अमरिंदर सिंह एक प्रबंधक के रूप में फिरोज़पुर केंद्रीय सहकारी बैंक में काम किया करते थे।

उन्होंने जालंधर दूरदर्शन कार्यक्रम काला डोरिया के लिए अपना पहला गीत दर्ज किया। गिल को सफलता ट्रैक "पैगाम" से मिली और वे सुर्खियों में आये। उनके द्वारा गाये हिट गानों में "दारू", "मदानिया" और "खेदन डे दीन" शामिल है। सुनिधि चौहान के साथ, और कई अन्य दूसरे कलाकारों के साथ "मेल करा डे" और "दिलदारिया" जैसे गाने रिकॉर्ड किये। उनका एल्बम जुदा उस समय का सबसे सफल पंजाबी एल्बम में से एक माना जाता है। २०१२ में जुदा सर्वश्रेष्ठ एल्बम के लिए ब्रिट एशिया संगीत पुरस्कार प्राप्त किया। जुदा के मध्य २०१४ में सफलता के बाद अमरिंदर गिल एक उत्तरकथा जुदा 2 के साथ आये और अधिक सफलता प्राप्त की। जुदा 2 पंजाब में एक सुपर हिट फ़िल्म बन गयी। अंग्रेज (२०१५) की एक फिल्म थी जो उस समय की सभी फिल्मो में सबसे व्यावसायिक रूप से सफल पंजाबी फिल्मों में से एक बन गई।




पंजाबी पुरानी फिल्मे

 


1 यहां पुरानी पंजाबी फिल्मों की सूची दी गई है एक बार जरूर देखे

 1. नानक नाम जहाज है (1969)

 2. माहुल ठीक है (1999)

 3. चान परदेसी (1980)

4. मामला गरबर है (1984)

 5. जी अयान नू (2003)

 6. बदला जट्टी दा (1991)

7. दाज (1976)

 8. यारी जट्ट दी (1984)

9. उच्च दर बेबे नानक दा (1982)

10. पुट्ट जट्टान डे (1983)

11. दुख भंजन तेरा नाम (1974)

12. शहीद ए मोहब्बत बूटा सिंह (1999)

13. गुड्डी (1961)

14. लोंग दा लिशकारा (1986)

 15. मैन जीते जग जीत (1973)



सोमवार, 15 मई 2023

कुलराज कौर रंधावा

 





कुलराज कौर रंधावा (जन्म 16 मई 1983) एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो हिंदी और पंजाबी भाषा की फिल्मों में दिखाई देती हैं। वह टीवी श्रृंखला करीना करीना में "करीना" के रूप में अपनी भूमिका के लिए जानी जाती हैं । 

राष्ट्रीयताभारतीय
पेशाअभिनेत्री


भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...