जागो या जग्गो समारोह का क्या मतलब है?
इसका मतलब है "जागना"। यह दुल्हन और दूल्हे दोनों के मातृ परिवारों द्वारा शुरू किया गया उत्सव है। परिवार बहुत धूमधाम से शादी स्थल पर पहुंचते हैं।
जागो का अर्थ है जगाना
जग्गो या जागो समारोह जग्गो पंजाबी में जागो शब्द का अर्थ है 'जागना' और यह दोनों परिवारों द्वारा एक साथ मिलकर जश्न मनाने की रात होती है। यह आमतौर पर शादी समारोह से एक या दो दिन पहले आयोजित किया जाता है।जग्गो या जागो पंजाबी परिवारों का एक उत्सव है जिस को पंजाबी परिवार शादी के समय मनाकर नजदीक रहने वालो को जगाते है या पुनः रिमाइंडर देते है कि याद रहे शादी में संलित होने को आ जाना शादी समारोह की जिन मित्र संबंधियों को निमंत्रित करना भूल गए होते है उनको भी इस प्रकार से निमंत्रण दे देते है इसी को जागो कहा गया है।
पहले समय में इस जग्गो या जागो वैवाहिक उत्सव का आरंभ जागो संध्या के दौरान, दूल्हा और दुल्हन (अपने परिवारों के साथ) अपने अलग-अलग घरों में इकट्ठा होते हैं और पूरी रात या कम से कम सुबह तक जागते थे।
आधुनिक युग में भले ही मानव को हर किस्म की सुविधाएं उपलब्ध हो गई हों लेकिन आधुनिकता के बढ़ रहे प्रभाव ने पंजाब के अमीर विरसे जग्गो या जागो को एक बड़ी चुनौती दे डाली है। पंजाब की संस्कृति में भंगड़े, गिद्दे और गीत-संगीत को भले ही जैसे तैसे किसी भी रूप में फिलहाल संभाला हुआ हो, लेकिन वास्तव में बदलता माहौल पंजाबी संस्कृति के लिए घातक ही साबित होता दिखाई दे रहा है।
ऐसे ही प्रभाव से पीड़ित दिखाई दे रही है जागो की वो रस्म। इसके जरिए लोगों को जगाने का प्रयास होता था। किसी समय विवाह शादी के अवसर पर जागो का विशेष स्थान होता था। आज स्थिति यह है कि जागो के नाम से भी युवा पीढ़ी अंजान दिखाई दे रही है।
कोई समय होता था जब जागो को पंजाब में होने वाली शादियों के दौरान प्रेम-प्यार के इजहार का साधन माना जाता था। विवाह के अवसर पर आने वाली नानका मेल द्वारा निकाली गई जागो का एक अलग ही नजारा होता था। मामी व मौसियों द्वारा सिर पर टिकाई टोकनी (मटके जैसा बर्तन) पर दीप जलाकर मोहल्ले का चक्कर जगाना होता था।
जागो निकालते समय लोगों के साथ छोटे छोटे मजाक करना जागो के दृश्य को अति आनंदमय बना देते थे। जागो निकालते समय यदि किसी का कुछ नुकसान हो हो जाए तो वह उसकी शिकायत किसी से नहीं करता था।
अब जागो भूलती जा रही युवा पीढ़ी।
जागो निकालते समय जट्टा जाग बई हुन जागो आइआ, बल्ले बई हुन जागो आइआ, चुप कर बीबी मसां सवाइआ- लोरी दे दे पाइआ, बई हुन जागो आइआ और एहना नानकियां दी रड़े भंवीरी बोले आदि गीतों से जो माहौल बनता था उसकी मिसाल देना भी मुश्किल है। आजकल अगर कॉलेजों व स्कूलों में जागो के दर्शन भी करवाए जाते है तो सिर्फ खानपूर्ति के लिए। जबकि सच्चाई यह है कि हमारी युवा पीढ़ी को जागो की वास्तविकता तक की जानकारी नहीं है।
आज तो आर्केस्ट्रा ने किया जागो का प्रभाव धीमा
और धीरे-धीरे हमारे पर आरकेस्ट्रा के बढ़ रहे प्रभाव ने जागो के रूझान को धीमा कर दिया है। भले ही कुछ घर परिवारों में आज जागो को जिंदा रखने के लिए थोड़ा प्रयास हो रहा है लेकिन आधुनिकता की होड़ ने लोगों को जगाने वाली जागो को हमसे फिलहाल छीन ही लिया है।
आने वाले भविष्य में इस जागो को लुप्त होती विरासत के रूप में जाना जाएगा
आइये बात करते हैं जागो या जागो समारोह की जिसमें ननिहाल वाले परिवार बहुत धूमधाम से शादी स्थल पर पहुंचते हैं। वे गाते और नाचते भी हैं। महिला रिश्तेदार बारी-बारी से गागर (मोमबत्तियों से जलाया गया एक सजाया हुआ मिट्टी का बर्तन मिट्टी को सनातन परंपरा में शुद्ध गिना गया है और इसका पूजा में महत्व भी है बदलते समय के अनुसार मिट्टी की गागर का स्वरूप अब हल्का और धातु का हो गया है मोमबत्ती और दीपक की जगह आधुनिक चाइनीज लड़ियों ने ले ली है जिनको) लेकर महिला रिश्तेदार नाचती और गाती हैं। मिट्टी के बर्तन के साथ, लोग घंटियों से सजी एक सजी हुई छड़ी के साथ नृत्य करते हैं।
वैसे यह उत्सव ननिहाल पक्ष की ओर से आयोजित होता है।जिसे ननिहाल पक्ष विवाह वाले स्थल पर आकर आयोजित करवाता है।
क्यों कि आपस में रहते रहते लोगों के आपसी मन मुटाव भी उत्पन हो गए होते है विवाह उत्सव पर उनको दूर कर एक करने की इस प्रक्रिया को ननिहाल पक्ष तीसरे पक्ष की भूमिका में उनके स्थान पर जागो के रूप में मनवाता है कि इनका सौहाद्र प्यार पुनः बना रहे और एक दूसरे के सुख दुख में शामिल होते रहें।इस उद्देश से जागो की रस्म ननिहाल पक्ष लेकर एकता करवाने की रस्म करता है।
पंजाबी विवाह जागो:
एक परिवारिक पारंपरिक और रंगीन अनुष्ठान है
पंजाबी संस्कृति में विवाह एक महत्वपूर्ण और रंगीन अनुष्ठान है, जिसमें कई पारंपरिक रीति-रिवाज और रस्में शामिल हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जागो, जो विवाह के एक दिन पहले आयोजित किया जाता है और इसके आयोजक ननिहाल पक्ष के लोग भी प्रमुख होते है। इस लेख में, हम पंजाबी विवाह जागो के बारे में विस्तार से कहने का प्रयास कर रहे है।
जागो का अर्थ और महत्व
जागो का अर्थ है "जागरण" या "जगाना"। यह अनुष्ठान विवाह के एक दिन पहले आयोजित किया जाता है, जिसमें दूल्हे या दुल्हन और उसके ननिहाल के परिवार के सदस्य और मित्र भाग लेते हैं। जागो का मुख्य उद्देश्य विवाह के लिए दूल्हे और दुल्हन को तैयार करना और उन्हें विवाह के लिए आशीर्वाद देना और पारिवारिक समाजिक एकता बनाए रखना होता है।
जागो की तैयारी
जागो की तैयारी में कई दिन लगते हैं। दूल्हे और दुल्हन के परिवार के सदस्य और मित्र इस अनुष्ठान के लिए विशेष रूप से तैयारी करते हैं। इसमें विशेष भोजन, पेय, और मिठाइयों की व्यवस्था की जाती है। साथ ही, जागो के लिए विशेष रूप से सजावट की जाती है, जिसमें रंगीन पताके, फूल, और अन्य सजावटी सामग्री का उपयोग किया जाता है।
जागो का अनुष्ठान
जागो का अनुष्ठान रात में आयोजित किया जाता है, जब दूल्हे और दुल्हन के परिवार के सदस्य और मित्र अपनी अपनी जगह पर एकत्रित होते हैं। इस अनुष्ठान में, दूल्हे और दुल्हन को उनके परिवार द्वारा विशेष रूप से सजाया जाता है, जिसमें उन्हें नए कपड़े, आभूषण, और अन्य सजावटी सामग्री पहनाई जाती है।
इसके बाद, दूल्हे और दुल्हन को विशेष रूप से उनके स्थानों पर आशीर्वाद दिया जाता है, जिसमें उन्हें विवाह के लिए शुभकामनाएं दी जाती हैं। साथ ही, इस अनुष्ठान में, विशेष रूप से गीत, नृत्य, और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
जागो का महत्व
जागो का महत्व पंजाबी संस्कृति में बहुत अधिक है। यह अनुष्ठान विवाह के लिए दूल्हे और दुल्हन को तैयार करने और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए आयोजित किया जाता है। साथ ही, यह अनुष्ठान पंजाबी संस्कृति की रंगीनता और जीवंतता को प्रदर्शित करता है।
निष्कर्ष
पंजाबी विवाह जागो एक महत्वपूर्ण और रंगीन अनुष्ठान है, जो विवाह के लिए दूल्हे और दुल्हन को तैयार करने के साथ साथ पारिवारिक ,सामाजिक मन मुटाव को मिटा कर दूल्हे दुल्हन को आशीर्वाद देने के लिए दूल्हे या दुल्हन पक्ष द्वारा दूल्हे दुल्हन के स्थान पर आयोजित किया जाता है। यह अनुष्ठान पंजाबी संस्कृति की रंगीनता और जीवंतता को प्रदर्शित करता है और विवाह के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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