सोमवार, 5 फ़रवरी 2024

भपिंदर सिंह सिंगर

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#18july 
भूपिंदर सिंह

पूरा नाम भूपिंदर सिंह
🎂जन्म 06 फ़रवरी, 1940
जन्म भूमि अमृतसर, पंजाब
⚰️मृत्यु 18 जुलाई, 2022
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र

अभिभावक पिता- प्रोफेसर नत्था सिंह
पति/पत्नी मिताली सिंह
संतान पुत्र- निहाल
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय सिनेमा
प्रसिद्धि ग़ज़ल व पार्श्वगायक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी संगीतकार मदन मोहन ने एक संगीत समारोह में भूपिंदर सिंह को गाते देखा तो बस उनकी आवाज़ और अंदाज पर ऐसे फिदा हुए कि उनको अपनी अगली फिल्म में मौका देने की ठान ली।
भूपिंदर सिंह (अंग्रेज़ी: Bhupinder Singh, जन्म- 6 फ़रवरी, 1940; मृत्यु- 18 जुलाई, 2022) भारतीय सिनेमा के ख्याति प्राप्त पार्श्वगायक और ग़ज़ल गायक थे। उनके गाये हुए प्रसिद्ध गीतों में 'मेरा रंग दे बसंती चोला', 'नाम गुम जाएगा', 'प्यार हमें किस मोड़ पे', 'हुजूर इस कदर' आदि शामिल है। फ़िल्म 'मौसम' के गीत 'दिल ढूंढता है फिर वही, फुरसत के रात दिन' के गायक भूपिंदर सिंह ने संगीत की दुनिया में अपनी सत्ता लगातार बनाए रखी। अपनी जवारीदार गंभीर आवाज़़ से मखमली एहसास पैदा करने वाले महान गायक भूपिंदर सिंह का जादू हमेशा सिर चढ़ कर बोलता था।

परिचय
भूपिंदर सिंह का जन्म पंजाब के अमृतसर में 6 फरवरी, 1940 को हुआ था। उनके पिता प्रोफेसर नत्था सिंह खुद अच्छे संगीतकार थे। ‘दिल ढूंढता है फिर वही फुरसत के रात दिन’ से भूपिंदर सिंह को शोहरत मिली। भूपिंदर सिंह का मोहम्मद रफ़ी, तलत महमूद और मन्ना डे के साथ गाया गीत ‘होके मजबूर मुझे, उसने बुलाया होगा’ बेहद लोकप्रिय हुआ था। उनके लोकप्रिय गीतों में 'दुनिया छूटे यार ना छूटे', 'थोड़ी सी जमीन थोड़ा आसमान', 'दिल ढूंढ़ता है', 'नाम गुम जाएगा' जैसे कई गाने शामिल हैं। यही नहीं भूपिंदर सिंह ने अपनी पत्नी मिताली सिंह के साथ 'दो दीवाने शहर में', 'कभी किसी को मुकम्मल जहां', 'एक अकेला इस शहर में' जैसे कई हिट गाने भी गाए। उन्हें सत्ते पे सत्ता, आहिस्ता-आहिस्ता, दूरियां, हकीकत और कई अन्य फिल्मों के यादगार गानों के लिए भी भूपिंदर को खूब याद किया जाता है।

विवाह
भूपिंदर सिंह ने 1980 के दशक में बांग्लादेश की गायिका मिताली मुखर्जी से शादी की थी। एक कार्यक्रम में उन्होंने मिताली को गाते सुना था। उसके बाद दोनों की मुलाकात प्यार में बदल गई। मिताली-भूपिंदर ने एक साथ सैकड़ों लाइव शो किए। उनका एक बेटा निहाल भी संगीतकार है।

दिल तक पहुंचने वाली आवाज़़
दिग्गज लेखक और फिल्मकार गुलज़ार भूपिंदर सिंह की आवाज़ के मुरीद रहे। उनके बारे में गुलज़ार ने एक बार कहा था, 'भूपिंदर की आवाज़़ किसी पहाड़ी से टकराने वाली बारिश की बूंदों की तरह है। उनकी मखमली आवाज़़ आत्मा तक सीधे पहुंचती है।'

मुंबई आगमन
अपने पिता की सख्त मिजाजी के कारण शुरुआती दौर में भूपिंदर सिंह को संगीत से नफरत हो गई थी। लेकिन उनकी आवाज़ का जादू ज्यादा देर तक इस चिढ़ का बंधक न रह पाया और उनके सुरीले सफर का सिलसिला तेजी से शुरू हो गया। सबसे पहले उनकी गजलें आकाशवाणी में चलीं। इसके बाद दिल्ली दूरदर्शन में अवसर मिला। 1968 में संगीतकार मदन मोहन ने ऑल इंडिया रेडियो पर उनका कार्यक्रम सुनकर उन्हें मुंबई बुला लिया था।[1]

दरअसल, संगीतकार मदन मोहन ने एक संगीत समारोह में भूपिंदर सिंह को गाते देखा तो बस उनकी आवाज़ और अंदाज पर ऐसे फिदा हुए कि उनको अपनी अगली फिल्म में मौका देने की ठान ली। गायिका मिताली मुखर्जी से भूपिंदर सिंह की शादी 1984 में हुई थी। गायन और गिटार बजाने में माहिर भूपिंदर सिंह और मिताली की जोड़ी ने फिल्म संगीत और गजलों की दुनिया में खूब धूम मचाई। 'गुलमोहर', 'शबनम', 'अर्ज किया है', 'दूरियां', 'तेरा प्यार', 'चांद परोसा है' जैसे म्यूजिक एल्बम्स के अलावा फिल्म 'सत्ते पे सत्ता', 'दीवार', 'ज्वेल थीफ', 'मौसम', 'एक बार फिर' जैसी यादगार फिल्मों में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा।

प्रसिद्ध गीत
नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जायेगा
प्यार हमें किस मोड़ पे
दिल ढूंढता है फिर वही
किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है
मेरे घर आना जिंदगी
हो के मजबूर मुझे
दो दिवाने शहर में
हुजूर इस कदर
करोगे याद तो हर बात याद आएगी
थोड़ी सी जमींन थोड़ा आसमान
शमा जलाए रखना
कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता
मृत्यु
प्रसिद्ध गायक भूपिंदर सिंह का निधन 18 जुलाई, 2022 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी पत्नी मिताली का कहना था कि वह पिछले 9 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

सुजीत कुमार

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सुजीत कुमार 

🎂जन्म- 07 फ़रवरी, 1934, बनारस; 
⚰️मृत्यु- 05 फ़रवरी, 2010, मुम्बई) 

भोजपुरी और हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता थे। हिन्दी की अधिकांश फ़िल्मों में उन्होंने खलनायक का चरित्र निभाया था। अभिनेता सुजीत कुमार भोजपुरी फ़िल्मों के पहले सुपरस्टार माने जाते हैं। जब 60-70 के दशक में भोजपुरी फ़िल्मों की नैया डूबने वाली थी, उस वक्त भोजपुरी फ़िल्मों में सुजीत ने संजीवनी फूंकने का काम किया और बस तब से उनका जादू ऐसा चला कि वे भॉलीवुड के पहले सुपरस्टार बन गये थे।

परिचय
सुजीत कुमार एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुजीत कुमार ने शायद कभी सोचा भी नहीं था कि वे भोजपुरी सिनेमा के बेजोड़ अभिनेता बन जायेंगे। अपने समय के प्रसिद्ध अभिनेता राजेश खन्ना के साथ उन्होंने काफ़ी फ़िल्मों में सहायक अभिनेता की भूमिका निभाई थी। सुजीत कुमार के परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री है।

फ़िल्मी शुरुआत

यदि सुजीत कुमार के फिल्मी कॅरियर के शुरुआती दौर की बात की जाए तो सुजीत को फ़िल्मों में जाने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। बात उस वक्त की है, जब सुजीत लॉ की पढ़ाई कर रहे थे और उन्होंने एक नाटक में हिस्सा लिया था। सौभाग्य की बात ये रही कि उस नाटक प्रतियोगिता में जज थे फणि मजुमदार साहब, जो कि जाने माने निर्माता रहे हैं। फणि जी ने उन्हें नाटक का श्रेष्ठ अभिनेता करार दिया और कहा कि- 
"तुम फ़िल्मों में कोशिश क्यों नहीं करते?" 
इस एक वाक्य ने सुजीत कुमार का रुझान फ़िल्मों की तरफ कर दिया। पहली फिल्म ‘दूर गगन की छांव में’ किशोर कुमार ने सुजीत को अवसर दिया। लेकिन सफलता पाने के लिए सुनीत कुमार को ‘अराधना’ का इंतजार करना पड़ा। सुजीत कुमार राजेश खन्ना के ऑन-स्क्रीन साथी थे। 'हाथी मेरा साथी', 'अमर प्रेम', 'महबूबा', 'रोटी' जैसी फ़िल्मों में दोनों के साथ को खूब सराहा गया। राजेश खन्ना के अलावा सुजीत कुमार अमिताभ बच्चन और धर्मेन्द्र जैसे चोटी के अभिनेताओं के साथ भी अनेक बार नज़र आए। अमिताभ की 'द ग्रेट गैम्बलर', 'अदालत' एवं धर्मेन्द्र की 'जुगनु', 'धर्मवीर', 'चरस', 'ड्रीम गर्ल' और 'आँखेंं' जैसी फ़िल्मों में उन्हें काफ़ी पसंद किया गया।

भोजपुरी के प्रथम सुपरस्टार
हिन्दी फ़िल्मों में भले ही सुजीत कुमार जम चुके थे, लेकिन उनकी आत्मा तो भोजपुरी में बसती थी। अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति अपने उत्तरदायित्व को पूरा करने के लिए उन्होंने भोजपुरी फ़िल्मों का भी रुख किया। भोजपुरी की पहली फिल्म "गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो" में अभिनेत्री कुमकुम की जिद की वजह से उनकी जगह असीम कुमार को हीरो बनाया गया था; लेकिन सुजीत कुमार ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाया और भोजपुरी की फ़िल्मी धारा को मजबूती देने में लगे रहे। 1977 में भोजपुरी की पहली रंगीन फिल्म "दंगल" के वे हीरो थे। फ़िल्म ‘दंगल’ ने भोजपुरी सिनेमा की डूबती हुई कश्ती का बेड़ा पार लगाया। फ़िल्म की बॉक्स ऑफ़िस पर सफ़लता ने भोजपुरी को नया जीवन दिया। सुजीत कुमार के अभिनय का जलवा भोजपुरी फ़िल्मों में कुछ इस कदर बिखरा कि उन्हें भोजपुरी फ़िल्मों का पहला सुपरस्टार ही कहा जाने लगा। उनकी फिल्में भारत में ही नहीं अपितु मॉरीशस , गुयाना, फ़िजी, सूरीनाम आदि देशों में भी काफ़ी लोकप्रिय रहीं। 'दंगल' के बाद उन्होंने 'लोहा सिंह', 'पान खाए सैयां हमार', 'गंगा कहे पुकार के' और 'सजनवा बैरी भइले हमार' जैसी दर्जनों कामयाब फ़िल्मों में काम किया। 1983 में उन्होंने 'पान खाए सैयां हमार' का निर्माण और निर्देशन किया, जिसमें अमिताभ बच्चन और रेखा की जोड़ी मेहमान कलाकार की भूमिका में थी। इस तरह भोजपुरी फ़िल्मों में स्टार संस्कृति लाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। 90 के दशक तक आते-आते भोजपुरी सिनेमा भेड़चाल का शिकार हो चुका था। हताश होकर सुजीत कुमार ने इस तरह की फ़िल्मों से किनारा कर लिया।

फ़िल्मी सफर

सुजीत कुमार ने 'लागी नहीं छूटे राम', 'विदेशिया', 'दंगल', 'गंगा कहे पुकार के', 'गंगा जइसन भौजी हमार', 'सजनवा बैरी भइले हमार', 'हमार भौजी', 'माई के लाल', 'संपूर्ण तीर्थयात्रा' जैसी कई चर्चित एवं लोकप्रिय भोजपुरी फ़िल्मों में काम किया। हिन्दी फ़िल्मों में सुजीत कुमार का जिक्र आते ही लोगों के मन में 'आराधना' का बेहद लोकप्रिय गीत "मेरे सपनों की रानी" के दृश्य याद आ जाते हैं। उस गाने में राजेश खन्ना ट्रेन में बैठी शर्मिला टैगोर को लुभाने के लिए कार में बैठे गाना गाते हैं और उस कार को सुजीत कुमार चला रहे होते हैं। बतौर चरित्र अभिनेता सुजीत कुमार हिन्दी फ़िल्मों में भी काफ़ी सफल रहे और राजेश खन्ना की कई फ़िल्मों में उन्होंने बेहतरीन अभिनय किया। राजेश खन्ना की फिल्म 'आराधना' में उनके अभिनय को आज भी लोग याद करते हैं। इस फिल्म में उन्होंने नायक के मित्र की भूमिका निभाई थी। विदेशिया से शुरू सफर के बाद उन्होंने 'कोहरा', 'आँखें', 'आराधना', 'इत्तफाक', 'मन की आँखें', 'आन मिलो सजना', 'हाथी मेरे साथी', 'अमर प्रेम', 'शरारत' जैसी फ़िल्मों में काम किया। इसके बाद के दौर में उन्होंने 'रोटी', 'धरम वीर', 'देश-परदेश', 'दि ग्रेट गैंबलर', 'राम बलराम', 'इंसाफ का तराजू', 'आखिर क्यों' आदि फ़िल्मों में काम किया।

यारों के यार

सुजीत कुमार को फ़िल्मी जगत में 'यारों का यार' कहा जाता था। जितेन्द्र, राकेश रोशन, रणधीर कपूर, राजेश खन्ना और सावन कुमार टॉक जैसी हस्तियों से उनके बड़े करीबी सम्बन्ध थे। लेकिन इन संबंधों को उन्होंने कभी अपने लिए सीधी नहीं बनाया। बतौर अभिनेता सुजीत कुमार को उपलब्धि जो भी रही हो, लेकिन भोजपुरी फ़िल्मों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाने में उनके योगदान की जितनी सराहना की जाए कम है।

फ़िल्म निर्माण

भोजपुरी सिनेमा के पहले सुपरस्टार सुजीत कुमार ने कई फ़िल्मों के निर्माता के तौर पर भी काम किया, जिसमें 'खेल' (अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित), 'चैंपियन' (सनी देओल, मनीषा कोईराला) और 'ऐतबार' (अमिताभ बच्चन, जॉन अब्राहम, बिपाशा बसु) फ़िल्मों के नाम शामिल हैं।

निधन

सुजीत कुमार की मृत्यु 05 फ़रवरी, 2010 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुई। मृत्यु के समय उनकी आयु 75 वर्ष थी। वे काफ़ी लम्बे समय से कैंसर से जूझ रहे थे।
📽️
1985 आखिर क्यों? 
1984 यादगार 
1984 कैदी
1979 खानदान 
1978 देस परदेस
1977 कलाबाज़ 
1976 महबुबा 
1971 अमर प्रेम 
1970 गीत
1970 आन मिलो सजना 
1969 ग़ुस्ताखी माफ़
1969 आराधना 
1968 आंखे

जूथिका रॉय

#20april
#05feb 

जुथिका रॉय

🎂जन्म 20 अप्रैल, 1920
जन्म भूमि आमता, हावड़ा ज़िला (बंगाल)
⚰️मृत्यु 05 फ़रवरी, 2014 (93 वर्ष)
मृत्यु स्थान कोलकाता, पश्चिम बंगाल
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भजन गायिका
पुरस्कार-उपाधि पद्म श्री
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्ध गीत 'घुंघट के पट खोल', 'पग घुंघुरू बांध मीरा नाची', 'मैं तो वारी जाऊँ राम', 'कन्हैया पे तन मन'
जुथिका रॉय महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की पसन्दीदा गायिकाओं में से एक थीं।
भारतीय भजन (भक्ति संगीत) गायिका थीं। उन्होंने अपने चार दशक लम्बे कैरियर में 200 से अधिक हिन्दी और 100 से अधिक बंगाली गानों को अपनी आवाज़ दी। उन्होंने हिन्दी फ़िल्मों हेतु हिन्दी भक्ति संगीत भी रिकॉर्ड करवाये। जुथिका रॉय को 1972 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से पुरस्कृत किया गया था। 
जुथिका रॉय का जन्म संयुक्त बंगाल के हावड़ा ज़िले के आमता नामक स्थान पर 20 अप्रैल, 1920 में हुआ। जुथिका रॉय ने छोटी आयु में ही गाना आरम्भ कर दिया था। जुथिका रॉय को ख्याति 1930 में मिली। इन्हें मीरा के मधुर भजनों के लिए 'आधुनिक मीरा' के नाम से भी जाना जाता था। वे जब 12 साल की थीं तब उन्होंने अपना पहला एलबम 1932 में रिकॉर्ड किया था। जुथिका रॉय की प्रतिभा को कवि क़ाज़ी नज़रुल इस्लाम और बंगाली संगीत निर्देशक कमल दास गुप्ता ने पहचाना था और ये दोनों ही उनके संरक्षक रहे। 1940 व 1950 में ये देश के चुनिंदा गायिकाओं में से एक थीं। इनके भजन 'घुंघट के पट खोल' और 'पग घंघरू बांध मीरा नाची' काफ़ी लोकप्रिय थे। उन्हें 1972 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 15 अगस्त 1947 को भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस पर नेहरूजी ने झंडा फहराने के साथ उन्हें रेडियो पर लगातार गाने की विनती की थी। उन्हें नेहरू जी ने कहा था कि वे जब तक लाल क़िले पहुंचे और तिरंगा झंडा फहराएं तब तक वे गाती रहें। यहीं नहीं गांधीजी जब पुणे की जेल में थे तब उनके गाने हर दिन सुनते थे। वे हर सुबह प्रार्थना सभा की शुरूआत उनके ही गाने बजाकर करते थे। जुथिका रॉय ने दो बंगाली फिल्म 'धुली' और 'रतनदीप' में अपनी मधुर आवाज़ भी दी है।

प्रसिद्ध गीत
घुंघट के पट खोल
कन्हैया पे तन मन
पग घुंघुरू बांध मीरा नाची
तोरे अंगसे अंग मिलाके कन्हाई
मैं राम नाम की चुड़ियाँ पहेनु
मैं तो वारी जाऊँ राम
निधन
भजन गायिका जुथिका रॉय का कोलकाता में 5 फ़रवरी, 2014 को निधन हो गया। वह वर्ष 93 की थीं। उन्हें उम्र से संबंधित बीमारियों से ग्रसित होने के कारण जनवरी 2014 में रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान में भर्ती कराया गया था।

अभिषेक बच्चन

#05feb 
अभिषेक बच्चन

🎂जन्म 05 फ़रवरी, 1976
जन्म भूमि बम्बई, महाराष्ट्र

अभिभावक अमिताभ बच्चन और जया बच्चन
पति/पत्नी ऐश्वर्या राय
2002 में अमिताभ बच्चन के 60वें जन्मदिन पर उन्होंने 'करिश्मा कपूर' के साथ अपनी सगाई की घोषणा की, हालांकि 2003 में बिना कोई कारण बताये दोनों परिवारों ने यह सगाई तोड़ दी। 14 जनवरी 2007 को उन्होंने 1994 की 'मिस वर्ल्ड' ऐश्वर्या राय के साथ अपनी सगाई की घोषणा की और 20 अप्रैल 2007 को दोनों विवाह बंधन में बंध गए। 16 नवंबर को वह एक पुत्री आराध्या के पिता बने, जिसका जन्म मुंबई के सेवन हिल्स अस्पताल में हुआ।
संतान पुत्री- आराध्या बच्चन
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनेता, फ़िल्म निर्माता.
फ़िल्मों के प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता और फ़िल्म निर्माता हैं। अभिषेक बच्चन ने अपने सुपर स्टार पिता अमिताभ बच्चन की छाया में अपने फ़िल्मी कैरियर को प्रारम्भ किया। अमिताभ बच्चन का पुत्र होने के कारण से जहाँ उन्हें अच्छी फ़िल्में मिलने लगीं वहीं दूसरी ओर उनकी तुलना अमिताभ से होने लगी। अपने प्रारम्भिक समय में उनके कुछ विशेष सफलता नहीं मिली और उनकी कुछ फ़िल्में असफल रही, परन्तु धीरे धीरे उन्होंने फ़िल्मी जगत् में अपनी अलग छवि बना ली। फ़िल्म 'सरकार', 'युवा', 'बंटी और बबली' से उन्होंने अपने अभिनय कौशल का भी प्रमाण दे दिया। अपने अभिनय के साथ साथ उन्होंने फ़िल्म 'ब्लफ़ मास्टर' में गाना भी गाया।

📽️मुख्य फ़िल्में गुरु, सरकार, युवा, धूम, कभी अलविदा न कहना, बंटी और बबली, ज़मीन, ब्लफ़ मास्टर, दोस्ताना, बोल बच्चन आदि।
पुरस्कार-उपाधि फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता पुरस्कार (तीन बार)
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सन 2010 में उन्होंने छोटे परदे पर क़दम रखा और कलर्स चैनल के लिये गेम शो 'नेशनल बिंगो नाईट' की मेजबानी की।
उनके पिता सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और माता प्रसिद्ध अभिनेत्री जया बच्चन हैं। उनकी एक बहन है श्वेता, जो उद्योगपति निखिल नंदा से विवाहित है। अभिषेक ने अपनी स्कूली शिक्षा 'जमनाबाई नर्सरी स्कूल', 'बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल' और दिल्ली के 'मॉडर्न स्कूल' से की। स्कूल ख़त्म करने के बाद उन्होंने 'ऐग्लों कॉलेज' में दाखिला लिया। वे व्यापार पढ़ने के लिए अमेरिका गए पर अभिनेता बनने के लिए उन्होंने अपनी पढाई बीच में ही छोड़ दी।
अभिषेक बच्चन ने अपने फ़िल्मी सफ़र की शुरुआत 'रिफ़्यूजी' फ़िल्म से की। इसी फ़िल्म से उनकी सह कलाकार नायिका करीना कपूर भी पहली बार सिने चित्र पर दर्शकों के सामने आईं। इस फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर औसत कारोबार किया और अभिषेक को भी कुछ ख़ास सफलता नहीं मिली। उनकी अगली फ़िल्में 'कुछ न कहो' और 'बस इतना सा ख्वाब है' भी औसत रहीं। फ़िल्म 'कुछ न कहो' से ऐश्वर्या और अभिषेक बच्चन के बीच नजदीकियां बढ़ीं और दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे। अपने पिता की तरह ही अभिषेक की भी  17 फ़िल्में असफल रही पर 2003 के बाद उनका कैरियर चमकने लगा। 2003 में 'मैं प्रेम की दीवानी हूँ' और 2004 में मणिरत्नम की 'युवा' से उनके अभिनय कौशल को दर्शक सरहाने लगे। उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली  यशराज फ़िल्म 'धूम' से जो उस साल की सबसे बड़ी सफल फ़िल्म थी।
उनका सुनहरा दौर आगे बढ़ा और 2005 में उन्होंने एक के बाद एक 4 सफल फ़िल्में दी। अभिनेत्री रानी मुखर्जी के साथ 'बंटी और बबली' 2005 की सबसे सफल फ़िल्मों में रही। इसी फ़िल्म में उन्होंने पिता अमिताभ बच्चन और ऐश्वर्या राय के साथ मशहूर आइटम गाना 'कजरारे' किया जो दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। उनकी अगली फ़िल्म 'सरकार' में उनके अभिनय को बेहद पसंद किया गया और उन्हें उनका पहला फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता पुरस्कार मिला। उनकी अगली फ़िल्में 'दस' और 'ब्लफ़मास्टर' भी उस साल की सफल फ़िल्मों में से रही। ब्लफ़मास्टर और धूम में वे पार्श्व गीतकार भी रहे। 2006 में उनकी फ़िल्म 'कभी अलविदा न कहना' विदेशों में अब तक की सबसे सफल फ़िल्म रही और उन्हें फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता का पुरस्कार मिला। हालांकि उनकी अगली फ़िल्म 'उमराव जान' बेहद असफल रही।  उन्होंने धूम 2 से वापसी की जो उस साल की सबसे सफल फ़िल्म रही। 2007 में उन्होंने फिर ऐश्वर्या के साथ फ़िल्म 'गुरु' में जोड़ी बनायीं और दर्शकों ने उनके अभिनय को बेहद पसंद किया। कहा जाता है कि यह फ़िल्म धीरुभाई अम्बानी के जीवन पर आधारित थी। उनकी अगली फ़िल्म, 'झूम बराबर झूम' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही। 2008 भी उनके लिए अच्छा रहा और उनकी 2 फ़िल्में 'सरकार राज' और 'दोस्ताना' साल की सबसे सफल फ़िल्मों में रही। 2009 में उन्होंने फ़िल्म 'पा' में अपने पिता अमिताभ बच्चन के पिता का किरदार निभाया। इस फ़िल्म में अमिताभ एक लाइलाज बीमारी 'प्रोजेरिया' से पीड़ित थे और अभिषेक उनके पिता थे। फ़िल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी अगली फ़िल्में, मणि रत्नम की 'रावण", आशुतोश गोवरिकर की 'खेलें हम जी जान से', 'गेम' और 'दम मारो दम' असफल रही। इनके बाद अभिषेक बच्चन ने 'बोल बच्चन' (2012), धूम 3 (2013) और 'हैप्पी न्यू ईयर' (2014) जैसी सफल फ़िल्में दीं।

टीवी पर मेजबानी

वर्ष 2010 में उन्होंने छोटे परदे पर क़दम रखा और कलर्स चैनल के लिये गेम शो 'नेशनल बिंगो नाईट' की मेजबानी की।

📽️

हैप्पी न्यू ईयर (2014)
धूम 3 (2013)
बोल बच्चन (2012)
प्लेयर्स (2012)
दम मारो दम (2011)
गेम (2011)
खेलें हम जी जान से (2010)
रावण (2010 )
पा (2009)
दिल्ली 6 (2009)
दोस्ताना (2008 )
द्रोण (2008 )
मिशन इस्तांबुल (2008)
सरकार राज (2008 )
लगा चुनरी में दाग़ (2007 )
राम गोपाल वर्मा की आग (2007 )
झूम बराबर झूम (2007)
गुरु (2007 )
धूम 2 (2006 )
उमराव जान (2006 )
कभी अलविदा ना कहना (2006 )
ब्लफमास्टर (2005 )
दस (2005 )
सरकार (2005 )
बंटी और बबली (2005 )
नाच (2004 )
धूम (2004)
युवा (2004 )
फिर मिलेंगे (2004 )
रन (2004 )
एल.ओ.सी. - कारगिल (2003 )
जमींन (2003 )
कुछ ना कहो (2003 )
मुंबई से आया मेरा दोस्त (2003 )
मैं प्रेम की दीवानी हूँ (2003 )
शरारत (2002 )
ओम जय जगदीश (2002 )
हाँ मैंने भी प्यार किया (2002 )
बस इतना सा ख़्वाब है (2001 )
ढाई अक्षर प्रेम के (2000 )
तेरा जादू चल गया (2000 )
रिफ़्यूजी (2000)

सम्मान और पुरस्कार

सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फ़िल्म 'पा' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (निर्माता के तौर पर)।
'युवा' में फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता पुरस्कार।
'सरकार' में फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता पुरस्कार।
'कभी अलविदा न कहना' में फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता पुरस्कार मिला।

रविवार, 4 फ़रवरी 2024

रवि त्रिपाठी

रवि त्रिपाठी/रवि के त्रिपाठी 

🎂जन्म 04फरवरी, 1978

एक प्रख्यात भारतीय पार्श्वगायक, संगीतकार, संगीत निर्देशक, अभिनेता व टेलीविजन मेज़बान हैं। इन्हें सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के रियालिटी शो इंडियन आइडल (सीजन २) से ख्याति मिली। उन्होंनें दूरदर्शन के क्लोज-अप-परफॉर्मर जैसे कार्यक्रम की मेज़बानी की हैं।
इनके पिता श्रीकृष्ण त्रिपाठी, प्रतापगढ़ जिला के लालगंज तहसील में भूमि एवं जल संरक्षण विभाग]में अधिकारी रहें है और माँ श्रीमती सुमित्रा त्रिपाठी एक गृहणी हैं। त्रिपाठी ने गायन की शुरुआत चार वर्ष की आयु से की। वे पटियाला घराने से आते हैं, और बेल्हा प्रतापगढ़ के पैत्रिक निवासी हैं।

रवि लखनऊ विश्वविद्यालय सें स्नातक हैं। कुछ वर्ष तक भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। बाद में वे प्रसिद्ध संगीतकार सुरेश वाडकर के संगीत के गुण सीखे।

🎧एलबम्स🎧

बातें
मोरे कृष्णा
श्री सिद्धिविनायक मोरया
किनारा
धुँआ धुँआ
झनकार

पूजा कुमार

#04feb 

पूजा कुमार

🎂: 04 फ़रवरी 1977

 सेंट लुइस, मिसूरी, संयुक्त राज्य अमेरिका
भाई: पराग कुमार
 एक इंडो-अमेरिकन अभिनेत्री हैं जो भारतीय फिल्मों में अपने काम के लिए जानी जाती हैं।
मिस इंडिया यूएसए का खिताब जीतने के बाद, उन्होंने एक अमेरिकी अभिनेत्री, निर्माता और मॉडल के रूप में अपना वैश्विक करियर शुरू किया।
भारतीय अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उन्हें चमकीले नए सितारों में से एक के रूप में चुना, जहां उन्होंने उस मान्यता के लिए लड़ रहे 60,000 से अधिक प्रतियोगियों को देखा।
उन्होंने उन्हें प्रियदर्शन से मिलवाया और उन्होंने उन्हें अंतर्राष्ट्रीय मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता की मेजबानी करने का अवसर दिया, जिसका 50 से अधिक देशों में सीधा प्रसारण किया गया।
वह मैन ऑन ए लेज, ब्रॉल इन सेल ब्लॉक 99, बॉलीवुड हीरो, (एसएनएल स्टार क्रिस कट्टन के साथ अभिनीत), फ्लेवर्स, हिडिंग दिव्या, पार्क शार्क, बॉलीवुड बीट्स, नाइट ऑफ मेंहदी, एनीथिंग फॉर जैसी हॉलीवुड फीचर फिल्मों में दिखाई दी हैं। आप, चाक के साथ ड्राइंग, और गांठें अर्बन।
उनकी अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं में विश्वरूपम और अभिनेता कमल हासन और उत्तम विलेन के साथ विश्वरूपम 2 शामिल हैं।
इन्हें हिंदी और तमिल दोनों भाषाओं में एक साथ शूट किया गया था।
उन्होंने राजशेखर अभिनीत पीएसवी गरुड़ वेगा से टॉलीवुड में पदार्पण किया। वह भारत के चैनल वी के लिए बीपीएल ओए के लिए वीजे थीं, जावेद जाफरी के साथ बजाज की लहरें नामक एक भारतीय फिल्म शो, और ज़ी टीवी के लिए मिलान, इटली में जागो और जीतो नामक गेम शो की मेजबानी की।

पूजा कुमार भट्ट का जन्म 4 फरवरी, 1977 को सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था ।  उनके माता-पिता, रविंदर और निरुपमा भट्ट, 1970 में भारत से आए थे।उन्होंने वाशिंगटन विश्वविद्यालय में दाखिला लिया , जहां उन्होंने डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की राजनीति विज्ञान और वित्त में ।  वह भारतीय शास्त्रीय नृत्य में भी प्रशिक्षित हैं । कुमार ने 1995 में मिस इंडिया यूएसए का खिताब जीता। कुमार की शादी विशाल जोशी से हुई है। उनकी एक बेटी है, जिसका जन्म 2020 में हुआ।

वरुण शर्मा

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वरुण शर्मा
 
🎂जन्म 04 फरवरी 1990

वरुण शर्मा का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था और वह दिल्ली से हैं। उनके पिता दिल्ली से हैं और माँ एक मराठी हैं। उन्होंने मारवाह इंस्टीट्यूट, नोएडा से एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से जनसंचार की पढ़ाई की । उन्होंने मॉडलिंग और थिएटर किया. 🌹


 एक भारतीय फिल्म अभिनेता हैं जिन्होंने फुकरे (2013) और किस किसको प्यार करूं (2015) सहित व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में अभिनय किया है।
वित्तीय विफलताओं की एक श्रृंखला के बाद, उनकी सबसे अधिक कमाई वाली रिलीज़ एक्शन कॉमेडी दिलवाले (2015), फुकरे रिटर्न्स (2017), और छिछोरे (2019) के साथ आई।शर्मा ने अपनी शिक्षा सनावर के लॉरेंस स्कूल में पूरी की, बाद में कक्षा 11 और 12 को पूरा करने के लिए जालंधर के एपीजे स्कूल में स्थानांतरित हो गए। उन्होंने आईटीएफटी चंडीगढ़ से मीडिया, मनोरंजन और फिल्म प्रौद्योगिकी में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
📽️2013 फुकरे दिलीप "
रब्बा मैं क्या करूं 

📽️ 2014 यारां दा कैचअप
अंग्रेज 
डॉली की डोली
📽️2015किस किस को प्यार करूं 
दिलवाले
📽️2017 Raabta 
फुकरे रिटर्न्स
📽️2018 फ्राईडे 
2019अर्जुन पटियाला
खानदानी शफाखाना 
छिछोरे
📽️2020 जय मम्मी दी
📽️2021 रूही
चुट्ज़पाह
📽️2022 फोन भूत
सर्कस
📽️2023 डार्क डार्लिंग 
फुकरे 3

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...