शुक्रवार, 3 नवंबर 2023

रीटा भादुड़ी

रीता भादुड़ी

🎂जन्म 04 नवम्बर, 1955
जन्म भूमि लखनऊ, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 17 जुलाई, 2018
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र

कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र अभिनय
प्रसिद्धि अभिनेत्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी रीता भादुड़ी का नाम जरीना वाहब के साथ उनकी बहन के रूप में कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

हिन्दी सिने जगत की जानीमानी अभिनेत्री थीं। सन 1968 से वह फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहीं। अपने पांच दशक के कॅरियर में रीता भादुड़ी ने 'कभी हां कभी ना', 'क्या कहना', 'दिल विल प्यार व्यार' और 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' जैसी फिल्मों में काम किया और प्रसिद्धि पाई। उन्होंने गुजराती फिल्मों में भी काम किया था।

परिचय
चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का जन्म 4 नवम्बर सन 1955 में लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। गौरतलब है कि अपने तीन दशक लंबे कॅरियर में रीता भादुड़ी 30 से ज्यादा टीवी धारावाहिकों के अलावा लगभग 70 फ़िल्मों में नज़र आईं। टीवी शो की बात करें तो ‘छोटी बहू’, ’कुमकुम’, साराभाई वर्सेस साराभाई’, ‘अमानत’ ‘एक महल हो सपनों’ जैसे धारावाहिक हैं। जबकि फ़िल्मों की बात करें तो रीता भादुड़ी ‘सवान को आने दो’, ‘विश्वनाथ’, ‘अनुरोध’ से लेकर हाल के वर्षों में ‘क्या कहना’ और ‘दिल विल प्यार व्यार’ जैसी फ़िल्मों में नज़र आई थीं।

प्रसंग

अक्सर लोग रीता जी के सरनेम की वजह से उन्हें जया भादुड़ी की बहन समझा करते थे। 2011 में हुए एक इंटरव्यू में उन्होंने एक वाकया बताया था। उन्होंने बताया था कि एक बार जब मैं जयपुर आई थीं तो किसी ने मुझसे पूछा था कि "क्या मैं जया भादूड़ी की बहन हूं?" ये सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया था। उनका कहना था कि "मुझे इंडस्ट्री में इतने साल हो गए हैं, लेकिन लोगों को अभी तक ये नहीं पता चला कि हम दोनों में कोई कनेक्शन नहीं है। लोग मुझे जया की बहन समझने की गलती कर देते हैं।"

रीता भादुड़ी का नाम आदित्य पंचोली की पत्नी जरीना वाहब के साथ भी कई बार जोड़ा गया था। जरीना और रीता बैचमेट थीं। दोनों ने साल 1973 में एफ़टीआईआई (FTII) से अभिनय का प्रशिक्षण लिया था।

कार्य के प्रति लगन

रीता भादुड़ी ने एक बार इंटरव्यू में कहा था कि- "बुढ़ापे में होने वाली बीमारियों के डर से क्या काम करना छोड़ दें। मुझे काम करना और व्यस्त रहना पसंद है। मुझे हर समय अपनी खराब हालत के बारे में सोचना पसंद नहीं, इसलिए मैं खुद को व्यस्त रखती हूं। मैं बहुत खुशनसीब हूं कि मुझे इतनी सपोर्टिव और समझने वाली कास्ट और क्रू के साथ काम करने का मौका मिला है।" रीता भादुड़ी ने अपनी एक्टिंग और काम से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई थी।

मृत्यु

फ़िल्म और टीवी की चर्चित अभिनेत्री रीता भादुड़ी का निधन 17 जुलाई, 2018 को मुम्बई, महाराष्ट्र में हुआ। वह 62 साल की थीं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनकी दोनों किडनी काफी कमजोर हो गयी थीं और लंबे समय से वह हर दूसरे दिन डायलिसिस के लिए जाया करती थीं। अपने अंतिम दिनों में रीता जी मुंबई के सुजय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थीं, जहां उनका इलाज चल रहा था।

सदा शिव अमरापुरकर

प्रसिद्ध चरित्र अभिनेता सदाशिवराव अमरापुरकर की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि
सदाशिव दत्ताराय अमरापुरकर 

🎂11 मई 1950 
⚰️03 नवंबर 2014

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मार्च 2014 में, होली त्योहार के दौरान पानी की बर्बादी रोकने की कोशिश करते समय अमरापुरकर को छह लोगों ने पीटा था ।
अन्ना हजारे आंदोलन को भी अपना समर्थन दिया था और 2009 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए कई चर्चाएं आयोजित करके नागरिकों को शामिल करने में सक्रिय थे।
वह एक सेकुलर वादी, सामाजिक कार्यकर्ता थे और नागरिक रूप से कई सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए भी थे।
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अमरापुरकर का जन्म महाराष्ट्र के नासिक में 11 मई 1950 को हुआ था। अमरापुरकर का बचपन का नाम गणेश कुमार नोरवाडे था लेकिन 1974 में इन्होंने अपना नाम सदाशिव रख लिया। महाराष्ट्र के ब्राहमण परिवार में जन्में अमरापुरकर को करीबी मित्र तत्य कहकर पुकारते थे। हमेशा से ही उनका झुकाव समाज के वंचित तबके की ओर रहा। सदाशिव का विवाह सुनंदा करमाकर के साथ हुआ। दोनों के बीच हाई स्कूल में ही प्रेम की शुरूआत हो गई थी। पुणे कॉलेज से इतिहास में एमए कर चुके अमरापुरकर ने कॉलेज के दिनों से ही थियटर और फिल्मों के लिए काम करना शुरू कर दिया था।

कैरियर

1981 में मराठी नाटक हैंड्स अप में अभिनय के दौरान अमरापुरकर की मुलाकात डायरेक्टर गोविंद निहालनी से हुई। गोविंद उस समय अपनी फिल्म अर्द्धसत्य के लिए कलाकारों का चयन कर रहे थे। फिल्म अर्ध सत्य में सदाशिव अमरापुरकर ने डॉन रामा शेट्टी का किरदार निभाया। इसी फिल्म के लिए अमरापुरकर को 1984 में सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार का अवॉर्ड मिला। अमरापुरकर को हिंदी फिल्मों के ही मैन के लिए लकी माना गया। 1987 में आई फिल्म हुकूमत उन्होंने धर्मेद्र के साथ काम किया। इस फिल्म में सदाशिव ने मुख्य खलनायक का किरदार निभाया और यह फिल्म ब्लॉकबस्टर रही। अर्द्धसत्य के बाद अमरापुरकर ने पुराना मंदिर, नासूर, मुद्दत, वीरू दादा, जवानी, और फरिश्ते जैसी फिल्मों में रोल किए लेकिन 1991 में आई सड़क उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई।

अमरापुरकर ने हिंदी और मराठी के अलावा कुछ बंगाली और उडिया फिल्मों में भी काम किया। 1991 में रिलीज हुई फिल्म सड़क के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला। महेश भट्ट ने फिल्मसिटी में सदाशिव को महारानी के किरदार के बारे में बताया। उन्होंने सदाशिव को यह भी बताया कि यह कैरक्टर नाकाम भी हो सकता है। इसके बावजूद, सदाशिव ने यह ऑफर स्वीकर कर लिया। अपने विलेन और कॉमिडी के किरदार के साथ सदाशिव अमरापुरकर ने सिर्फ सिनेमा के लिए ही नहीं बल्कि सोसायटी के लिए भी काफी काम किया। सदाशिव अमरापुरकर फिलैन्ट्रॉफिस्ट, सोशल ऎक्टिविस्ट तो थे ही, साथ में वह कई सामाजिक संगठनों के साथ जुड़े भी हुए थे। अंदश्रद्धा निर्मूलन समिति, स्नेहालय, लोकशाही प्रबोधन व्यासपीठ, अहमदनगर ऎतिहासिक वास्तु संग्रहालय जैसे संगठनों से वह प्रमुखता से जुड़े हुए थे।

ग्रामीण युवकों के विकास के लिए वह निरंतर प्रयास करते रहे। सदाशिव अमरापुरकर फिल्मों के अलावा छोटे पर्दे पर भी नजर आए। टीवी शो शोभा सोमनाथ की में उनके काम को खूब सराहा गया। उनकी बेटी रीमा भी बॉलिवुड में निर्देशन की बारीकियां सीख रही हैं और अब तक एक शॉर्ट फिल्म का डायरेक्शन कर चुकी हैं। सदाशिव की बेटी अब टीवी के लिए एक शो प्रड्यूस करने की तैयारी कर रही हैं। सदाशिव अमरापुरकर आखिरी बार मीडिया में उस वक्त दिखाई दिए जब होली के मौके पर पानी की बर्बादी रोकने की कोशिश के बाद उनके साथ मारपीट हुई। वर्सोवा में स्थित अपने घर के पड़ोस चल रही रेन डांस पार्टी में लोगों से पानी बचाने की अपील करने पहुंचे सदाशिव से 5 लोगों ने मारपीट की। 25 अक्टूबर 2014 से सदाशिव फेफड़ों में इंफेक्शन के चलते मुंबई के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद तीन नवबंर को अमरापुरकर का निधन हो गया।

प्रेम नाथ

प्रसिद्ध अभिनेता प्रेमनाथ 

नवम्बर महीने में 🎂जन्म दिन और ⚰️श्रद्धांजलि दिवस 🇮🇳

🎂जन्म की तारीख और समय: 21 नवंबर 1926, पेशावर, पाकिस्तान
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 03 नवंबर 1992, मुम्बई

पत्नी: बीना राय (विवा. 1952–1992)
भाई: राजेन्द्र नाथ, नरेन्द्र नाथ, कृष्णा कपूर, उमा चोपड़ा
बच्चे: प्रेम किशन, मोंटी नाथ
पोते या नाती: अकांक्षा मल्होत्रा, सिद्दार्था पी. मल्होत्रा,
ऋषि कपूर और राजीव कपूर के मामा। उनकी बहन की शादी प्रसिद्ध राज कपूर (ऋषि और राजीव के पिता) से हुई थी।

प्रेमनाथ मल्होत्रा (21 नवंबर 1926 - 3 नवंबर 1992), जिन्हें प्रेम नाथ के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय अभिनेता और निर्देशक थे, जिन्हें हिंदी फिल्मों में उनके कामों के लिए जाना जाता था।  नाथ ने फिल्म अजीत (1948) से अपनी शुरुआत की, और अपने पूरे करियर में 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।  उन्हें तीन फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया था, और बाद में 1985 में सेवानिवृत्त हुए। 1992 में, नाथ का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।

उनका जन्म 1926 में पेशावर में घण्टा घर के पास करीमपुरा इलाके में हुआ था।  उनका परिवार विभाजन के बाद जुबुलपोर (वर्तमान जबलपुर) चला गया और वह बंबई चले गए जहाँ उन्होने एक अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनायी

उन्हें औरत फ़िल्म के शूटिंग के दौरान अभिनेत्री बीना राय से प्यार हो गया उन्होंने बीना राय से  शादी कर ली बीना के साथ मिलकर उन्होंने पी.एन. प्रोडक्शन कंपनी बनाई, उनके बच्चे अभिनेता प्रेम कृष्णन और कैलाश नाथ (मोंटी) हैं।  वे अभिनेत्री आकांक्षा मल्होत्रा और निर्देशक सिद्धार्थ मल्होत्रा के दादा-दादी भी हैं जो प्रेम कृष्णन के बच्चे हैं।  आदिराज मल्होत्रा और अर्जुन मल्होत्रा कैलाश नाथ के पुत्र हैं।  उनकी बहन कृष्णा ने राज कपूर से शादी की, जबकि उनकी दूसरी बहन उमा की शादी दिग्गज हिंदी फिल्म अभिनेता प्रेम चोपड़ा से हुई।  उनके भाई राजेंद्र नाथ और नरेंद्र नाथ भी अभिनेता थे, जो ज्यादातर कॉमिक और सहायक भूमिकाओं में दिखाई दिए।  वह अभिनेत्री आशा पारेख की भी करीबी दोस्त थे उनके 66 वें जन्मदिन से ठीक 18 दिन पहले 1992 में 65 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।

प्रेमनाथ ने अपने फ़िल्मी कैरियर की शुरुआत फ़िल्म अजीत (1948) में मोनिका देसाई के साथ की थी, जो पहली रंगीन फिल्मों में से एक थी।  उन्हें राज कपूर की पहली निर्देशित फिल्म आग और बरसात (1949) में प्रमुख भूमिकाएँ मिलीं जो उनकी पहली बड़ी सफलता थी।  1951 में, नाथ ने मधुबाला के साथ बादल में अभिनय किया, जो बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट थी प्रेमनाथ ने अगले तीन दशकों तक कई फिल्मों में काम किया, जिनमें से कुछ  फिल्में इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर थीं जिन फिल्मों में उन्होंने केंद्रीय भूमिका निभाई, वे अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रहीं, लेकिन जिन फिल्मों में उन्होंने केंद्रीय खलनायक की भूमिका निभाई या सहायक भूमिका निभाई, वे भारतीय फिल्म इतिहास की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर थीं।

उनकी कुछ सबसे उल्लेखनीय फ़िल्में आन (1952), तीसरी मंजिल(1966), जॉनी मेरा नाम (1970), तेरे मेरे सपने (1971), रोटी कपडा और मक़ान (1974), धर्मात्मा (1975), कालीचरण (1976) और देश प्रेमी (1982) है  उन्होंने धार्मिक पंजाबी फिल्म सत श्री अकाल (1977) में भी अभिनय किया उनको शोर (1972), बॉबी (1973), अमीर गरीब (1974) और रोटी कपडा और मकन (1974) के लिये सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के रूप में नामांकित किया गया

हिंदी फिल्मों के अलावा, वह 1967 में अमेरिकी टेलीविजन श्रृंखला माया के एक एपिसोड में भी नजर आए और 1969 की अमेरिकी फिल्म केनेर में पूर्व अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी अभिनेता जिम ब्राउन के साथ अभिनय किया  उन्होंने सत श्री अकाल (1977) जैसी कई पंजाबी फिल्मों में अभिनय किया।  उन्होंने अपने होम प्रोडक्शन हाउस पी एन के लिए फिल्म समुंदर (1957) का निर्देशन भी किया, जो उनकी एकमात्र निर्मित निर्देशित फिल्म थी उनकी आखिरी फिल्म हम दोनों (1985)थी जिसके बाद उन्होंने अभिनय से संन्यास ले लिया।
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1990 किशन कन्हैया 
1985 हम दोनों 
1982 देश प्रेमी
1981 क्रोधी
1980 कर्ज़
1980 गेस्ट हॉउस 
1979 ढ़ोंगी 
1979 जानी दुश्मन
1979 मुकाबला 
1979 गौतम गोविन्दा 
1978 विश्वनाथ 
1978 हीरालाल पन्नालाल 
1978 शालीमार
1977 चाँदी सोना 
1977 चला मुरारी हीरो बनने 
1977 सत श्री अकाल 
1977 जादू टोना 
1977 दरिन्दा 
1977 फरिश्ता या कातिल 
1977 शिरडी के साईं बाबा 
1976 जानेमन 
1976 दस नम्बरी
1976 आप बीती 
1976 जय बजरंग बली
1976 नागिन
1976 कालीचरण
1976 कबीला
1975 धर्मात्मा
1975 सन्यासी 
1975 धरम करम 
1975 दफ़ा 302
1975 धोती लोटा और चौपाटी 
1975 रानी और लालपरी 
1974 अमीर गरीब
1974 रोटी कपड़ा और मकान 
1974 इश्क इश्क इश्क 
1974 प्राण जाये पर वचन न जाये
1973 बॉबी
1973 नफ़रत
1973 छुपा रुस्तम 
1972 रानी मेरा नाम 
1972 मोम की गुड़िया
1972 राजा जानी 
1972 शोर
1972 गोरा और काला 
1972 बेईमान
1972 वफ़ा
1971 तेरे मेरे सपने 
1970 पु्ष्पांजली 
1970 जॉनी मेरा नाम 
1967 बहारों के सपने 
1966 प्यार मोहब्बत 
1966 तीसरी मंज़िल
1966 आम्रपाली 
1965 सिकन्दर-ए-आज़म 
1960 अपना घर 
1957 समुंदर 
1953 औरत
1952 साकी 
1952 आन 
1951 बादल 
1951 आराम
1950 हिन्दुस्तान हमारा 
1949 बरसात
1948 आग 
1948 अजीत 
1947 दौलत के लिए

सुष्मिता सेन

सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) एक भारतीय अभिनेत्री, मॉडल और सौंदर्य रानी हैं, जिन्हें 1994 में फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स का ताज पहनाया गया था और बाद में उन्होंने 18 साल की उम्र में मिस यूनिवर्स 1994 की प्रतियोगिता जीती थी। सुष्मिता प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय महिला है। अपने करियर में, सुष्मिता हिंदी, तमिल और बंगाली जैसे विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में दिखाई दी हैं।

सुष्मिता सेन बॉलीवुड की जानी-मानी भारतीय मॉडल और अभिनेत्री हैं. उनका 

🎂जन्‍म 19 नवंबर 1975 

को हैदराबाद में हुआ था. सुष्मिता सेन वायुसेना के सेवानिवृत विंग कमांडर सुबीर सेन और ज्वैलरी डिजाइनर सुभा सेन की बेटी हैं. सुष्मिता सेन पहली बार 1994 में मिस इंडिया का खिताब जीतने के बाद सुर्खियों में आईं. खास बात यह थी कि इस खिताब के लिए उनकी टक्कर ऐश्वर्या राय के साथ थी. उन्होंने ऐश्वर्या को पछाड़ते हुए मिस यूनिवर्स का खिताब हासिल किया. उसी साल ऐश्वर्या राय ने ‘मिस व‌र्ल्ड’ का खिताब जीता.

1997 में महेश भट्ट की फ़िल्म ‘दस्तक’ से सुष्मिता सेन ने फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा. इस फिल्म में उन्होंने अपने ही चरित्र को जीया. हालांकि फिल्म को सफलता नहीं मिली. दूसरी फ़िल्म ‘जोर’ भी नहीं चली. उनको पहली सफलता फ़िल्म ‘सिर्फ तुम’ के ‘दिलबर दिलबर गाने’ में मिली, जिसमें उनकी अदाओं को दर्शकों ने पसंद किया. डेविड धवन की फ़िल्म ‘बीवी नंबर वन’ में सुष्मिता सेन ने बीवी नंबर टू का रोल किया और यह उनकी पहली हिट फ़िल्म साबित हुई. उनकी चर्चित फ़िल्मों में ‘आंखें’, ‘समय’, ‘मैं हूं ना’, ‘बेवफा’, ‘मैंने प्यार क्यों किया’, ‘चिंगारी’, ‘दस्तक’,‘सिर्फ तुम’, ‘बीवी नंबर वन’, ‘आगाज’, ‘फिजा’, ‘नो प्रॉब्लम’ जैसी फिल्में शामिल हैं.

फ़िल्मी कैरियर

1997 में महेश भट्ट की फ़िल्म 'दस्तक' से सुष्मिता सेन ने फ़िल्मी दुनिया में पर्दापण किया, जिसमें उन्होंने अपने ही चरित्र को जिया। फ़िल्म को सफलता नहीं मिली। दूसरी फ़िल्म 'जोर' भी नहीं चली। उनको पहली सफलता फ़िल्म 'सिर्फ तुम' के दिलबर दिलबर गाने में मिली, जिसमें उनकी अदाओं को दर्शकों ने पसंद किया। डेविड धवन की फ़िल्म 'बीवी नंबर वन' में सुष्मिता सेन ने बीवी नंबर टू का रोल किया और यह उनकी पहली हिट फ़िल्म साबित हुई। उनकी चर्चित फ़िल्मों में आंखें, समय, मैं हूं ना, बेवफा, मैंने प्यार क्यों किया और फ़िल्म 'चिंगारी' के नाम शामिल हैं।

प्रमुख फ़िल्में

दस्तक, ज़ोर ,सिर्फ तुम , बीवी नंबर वन , हिंदुस्तान की कसम,  आगाज , बस इतना सा ख्वाब है ,  क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता , फिलहाल , तुमको न भूल पाएंगे , आंखें , लीला , समय ,  पैसा वसूल , मैं हूं न , वास्तुशात्र ,  बेवफा , मैं ऐसा ही हूं ,  मैंने प्यार क्यों किया ,  चिंगारी ,  राम गोपाल वर्मा की आग ,  डू नॉट डिस्टर्ब ,  दूल्हा मिल गया ,  नो प्रॉब्लम

मॉडलिंग कैरियर

फेमिना मिस इंडिया

1994 में, किशोरी के रूप में, सुष्मिता ने फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में भाग लिया। उन्होंने मिस यूनिवर्स 1994 प्रतियोगिता में प्रतिस्पर्धा करते हुए ‘फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स’ का शीर्षक जीता।

मिस यूनीवर्स

मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में, सुष्मिता प्रारंभ में तीसरे स्थान पर रही। सुष्मिता बाद के राउंड में दूसरे, पांचवें और तीसरे स्थान पर रही और आखिर में मिस यूनिवर्स 1994 का खिताब और ताज जीता। वह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय थी।

मिस यूनिवर्स 2016

पेजेंट जीतने के 23 साल बाद 65 वें मिस यूनिवर्स 2016 सौंदर्य पृष्ठ के जज में वह एक के रूप में थी। पेजेंट 30 जनवरी, 2017 को फिलीपींस के मेट्रो मनीला के मॉल ऑफ एशिया एरेना, पासय में हुआ था।

सम्मान और पुरस्कार

o   वर्ष 1994 में सुष्मिता सेन ने मिस इंडिया व मिस यूनिवर्स का ख़िताब जीता ।

o   उन्हें राजीव गांधी पुरस्कार, आईआईएफए (IIFA) पुरस्कार, दो फिल्मफेयर पुरस्कार, स्टार स्क्रीन अवार्ड्स और तीन ज़ी सिने इत्यादि विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है ।

o   1994 में मिस इण्डिया का ख़िताब जितने के बाद इन्होंने ऐश्वर्या रॉय को बैकस्टेज में धकेल दिया था । जिसकी वजह से इनकी आलोचना भी हुई थी ।

o   वर्ष 2012 में एथेंस हवाई अड्डे पर इनका पर्स चोरी हो गया था । उसमे इनका डेविट कार्ड और पासपोर्ट भी था । इस वजह से इन्हें एयरपोर्ट पर अपनी पहचान साबित करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था ।

रोचक जानकारियां

o   इनका वास्तविक नाम सुष्मिता सेन है ।

o   इन्हें दो उपनामों सुश और टीटू से भी जाना जाता है ।

o   ये मुख्य रूप से सिनेमा जगत में अभिनेत्री का काम करती हैं ।

o🎂इनका जन्म 19 नवम्बर 1975 को हुआ था ।

o   इनका जन्म तेलंगाना के हैदराबाद में हुआ था ।

o   ये मूल रूप से कोलकाता की रहने वाली हैं ।

o   इनकी माता का नाम सुभ्रा सेन तथा पिता का नाम सुबीर सेन है ।

o   एबकि माता आभूषण डिजाइनर हैं ।

o   इनके पिता एयर फ़ोर्स में अधिकारी हैं ।

o   इनके भाई का नाम राजीव सेन है ।

o   इनकी बहन का नाम नीलम सेन है ।

o   इन्हें कविता और गद्य लिखने का शौक है ।

o   इनके घर का पता 6 वीं मंजिल, बीच क्वीन, यारी रोड, वर्सोवा, अंधेरी पश्चिम, मुंबई है ।

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गुरुवार, 2 नवंबर 2023

मोनाली ठाकुर

मोनाली ठाकुर 

🎂जन्म : 03 नवंबर 1985 , कोलकाता
बहन: मेहुली ठाकुर गोस्वामी
माता-पिता: शक्ति ठाकुर
एक भारतीय पार्श्व गायिका हैं जो मुख्य रूप से बॉलीवुड फिल्मों में गाती हैं। और मोनाली ने लक्ष्मी नामक फिल्म में भी काम किया है। जो 2012 में रिलीज हुईं।

ठाकुर का सम्बन्ध एक संगीतमय परिवार से है, उनके पिता शक्ति ठाकुर एक बंगाली गायक और अभिनेता हैं और उनकी बहन मेहुली ठाकुर गोस्वामी एक पेशेवर पार्श्वगायिका हैं।बचपन में, वे एक बंगाली टेलीविजन धारावाहिक, आलोकितो एक इंदु, में इंदु की मुख्य भूमिका निभा चुकी हैं। वर्तमान में, उनकी मेइयांग चांग के साथ मित्रता हैं। ठाकुर ने अपने कैरियर की शुरुआत स्कूल और कॉलेज की प्रतियोगिताओं और स्थानीय समारोहों में प्रदर्शन के साथ की और फिर वे इंडियन आइडल 2 में, जो की पॉप आइडल का भारतीय संस्करण है, में नौवां स्थान प्राप्त कर वे लोकप्रिय हो गयीं।

अपने निष्कासन से पहले वे कभी भी नीचे से तीसरे नंबर पर नहीं आई, और अपने निष्कासन के तुरंत बाद, जज अनु मलिक ने उन्हें गायन के क्षेत्र में अवसर देने का आश्वासन दिया, जो जानेमन फिल्म में एक गाने के रूप में सामने आया।

एक संगीतमय परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद, इंडियन आइडल के बाद भी उन्हें संगीत के क्षेत्र में अपनी जगह बनाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा. अंत में, उन्हें संगीत निर्देशक प्रीतम से 2008 की हिट फिल्म रेस में दो गाने "जरा जरा टच मी" और "ख्वाब देखे (सेक्सी लेडी)" गाने का प्रस्ताव मिला। मूलतः उन्हें एक ही गाना गाने के लिए चुना गया था, लेकिन उनके पहले गाने की रिकॉर्डिंग ने फिल्म के निर्देशक अब्बास और मस्तान को काफी प्रभावित किया और उन्हें दूसरा गाना भी गाने को दिया गया।

"जरा जरा टच मी" अत्यंत सफल रहा, और 2008 के प्रथम छ महीनो में भारतीय रेडियो पर चौथे नंबर पर सर्वाधिक बजने वाला गीत बन गया।ताइवानीज - अमेरिकन गायक लीहोम वांग, ने, इस गाने पर एक मुकदमा भी कर दिया, लीहोम ने आरोप लगाया की "ज़रा ज़रा टाच मी" उनके एल्बम दा सन एंड मून इन माई हार्ट के गाने, "डीप इन बैम्बू ग्रूव" जो की दिसम्बर 2004 में रिलीज हुआ था, से काफी मिलता जुलता है।
तब से उन्होंने पीछे मुड कर नहीं देखा है। उन्होंने बॉलीवुड के लिए कई गाने गाये और बंगाली में ढेरों गाने गाये हैं और अब वे अपने पहले एकल एल्बम पर काम कर रही हैं। जून 2008 मई ठाकुर ने दावा किया था की उनके एल्बम में कुल 9 गाने होंगे, जिसमे से 6 गाने ठाकुर और सचिन गुप्ता ने मिल कर लिख लिए हैं और ये गाने रॉक और शास्त्रीय गानों का सम्मिश्रण होंगे। उन्होंने बदमाश कम्पनी में जिंगल और न्यूयॉर्क में है जुनून रीमिक्स भी गाया है। हालांकि, इन दोनों गानों में उनके द्वारा गाये गए हिस्से नहीं दिखाए गए हैं।

आइफा पुरस्कारों में उन्हें "ज़रा ज़रा टच मी" गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक की श्रेणी में भी नामांकित किया गया।
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गाने
ज़रा ज़रा टच मी - रेस
ख्वाब देखे झूठे मूठे- रेस
खुदाया खैर-बिल्लू
म्याऊ - गोलमाल रिटर्न्स
दिलरुबाओ के जलवे- दूल्हा मिल गया
मस्तीलोगी (बंगाली)- साथी अमर बोंधू अमर
क़ुबूल कर ले - जान-ए-मन
पृथिबी अनेक बोरो (बंगाली) - प्यार
बधुआ-सड (बंगाली)- दुजोने
बधुआ- रोमानी (बंगाली)-दुजोने
करो चोखे (बंगाली)-दुजोने
सोनाली रोद्दुर (बंगाली)-दुजोने
बोलो ना तुमि अमर बंगाली)- बोलो ना तुमि अमर
हेट यू (बंगाली) - बोलो ना तुमि अमर
इश्क में - प्रिन्स
सवाम्वर (बंगाली) - एक बंगाली रियलिटी टीवी शो
एखाने आकाश नील (बंगाली)- एक बंगाली दैनिक धारावाहिक
शब्बा रब्बा (बंगाली)- ले चक्का
अंजाना अंजानी (2010)
इट्स ओनली पेयर, ओ यारा वे, बोल ना आर-(बंगाली)-दुई -प्रिरहिबी 2010
"ढोल बाजे" (हिंदी ) - एक पहेली लीला (2015)
"मोह मोह के धागे" (हिंदी) - दम लगा के हईशा (2015)

फरयाल

फरयाल

🎂जन्म 03 नवंबर 1945 

को सीरिया में हुआ था। वह हिंदी फिल्मों में काम करने वाली मिश्रित भारतीय और अरबी मूल की एक अभिनेत्री और नर्तकी हैं। वह 1960 और 1970 के दशक में एक लोकप्रिय बॉलीवुड कैबरे डांसर और अभिनेत्री थीं। 

फरयाल ने 1965 में प्रदीप कुमार के साथ मुख्य भूमिका में ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म जिंदगी और मौत से बॉलीवुड में प्रवेश किया । इस फिल्म में आशा भोंसले और महेंद्र कपूर द्वारा गाया गया प्रसिद्ध गीत "दिल लगा कर हम ये समझे" शामिल था ; ये दोनों गाने यूट्यूब पर उपलब्ध हैं . फरयाल को लोगों ने पसंद किया और नतीजा यह हुआ कि उन्हें शशि कपूर के साथ फिल्म बिरादरी में मुख्य भूमिका मिल गई । फिल्म पूरी तरह से फ्लॉप रही। उन्हें 1967 में रिलीज हुई फिल्म ज्वेल थीफ में कैबरे डांसर के रूप में उनकी भूमिका के लिए जाना गया। फिल्म की रिलीज के बाद, ऑफर आने लगे। 1973 में एक साक्षात्कार में, फरयाल ने कहा कि "जब से गोल्डी ने मुझे उस ग्लैमरस डांसर की भूमिका में कास्ट किया है ज्वेल थीफ में , फिल्म निर्माताओं ने मुझे एक "उत्कृष्ट कैबरे डांसर" के रूप में देखा है। "जबकि वास्तव में मैंने कभी नृत्य नहीं सीखा है।" "मुझे नृत्य करना भी पसंद नहीं है; मुझे इससे नफरत है"। उन्हें राजेश खन्ना-मुमताज अभिनीत फिल्म सच्चा झूठा और धर्मेंद्र-वहीदा रहमान अभिनीत फिल्म मन की आंखें में उनकी भूमिकाओं के लिए भी पहचाना गया था। पहले टाइपकास्ट होने के डर से, फरयाल कई प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए अनिच्छुक थीं। ज्वेल थीफ़ की रिलीज़ के तुरंत बाद प्राप्त हुआ । लेकिन धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि अगर उन्होंने भूमिकाओं से इनकार कर दिया तो दस अन्य लोग उनकी जगह लेने के लिए तैयार थे। "और अब 1972 में रिलीज़ हुई अपराध में बाथ टब दृश्य ने मुझे और भी खराब छवि दे दी है", उन्होंने कहा चुटकी ली।फरयाल ने गोल्ड मेडल में जीतेंद्र की प्रेमिका के रूप में अपने प्रदर्शन के बाद 1984 में फिल्मों से संन्यास ले लिया ।
फरयाल ने फिल्में छोड़ने के बाद अपने लॉन्ग टाइम बॉयफ्रेंड से शादी कर ली और वह फिलहाल इजराइल में रह रही हैं ।
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1965 जिंदगी और मौत
1966 बिरादरी
ज्वेल थीफ विजय आनंद द्वारा निर्देशित1967कैबरे डांसर
1968 फरेब 
1969 स्वर्ण पदक 
1970 इंसान और शैतान
1970 मन की आंखें
1970 पुष्पांजलि
1970 सच्चा झूठा
1971 हंगामा रीता 
1972 अप्राध 
1972 रानी मेरा नाम 
1973 खून खून 
1973 धर्म 
1973 रामपुर का लक्ष्मण 
1973 झील के उस पार  
1973 दूर नहीं मंजिल
1974 धर्मात्मा 
1974 मनोरंजन
1975 रफू चक्कर
1976 ज़माने से पूछो 
1977 आफत

रूमा घोष

रूमा घोष

🎂03 नवंबर 1934
कलकत्ता , बंगाल प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत
मृत
⚰️03 जून 2019
कोलकाता , पश्चिम बंगाल , भारत

अभिनेत्री गायक
जीवनसाथी किशोर कुमार
अरूप गुहा ठाकुरता
​( एम.  1960, मृत्यु 2004 )
बच्चे
अमित कुमार समेत 3
संगीत कैरियर
शैलियां फ़िल्म संगीत गायक
रूमा गुहा ठाकुरता का जन्म 03 नवंबर 1934 को सत्येन घोष (मोंटी घोष) और गायिका सती देवी के घर रूमा घोष के रूप में हुआ था।उनका परिवार सांस्कृतिक रूप से ब्रह्म समाज की ओर झुका हुआ था , जो ब्रह्मवाद का एक सामाजिक घटक है । उनकी मां सती सत्यजीत रे की पत्नी बिजोया रे की सबसे बड़ी बहन थीं ।

गुहा ठाकुरता एक प्रशिक्षित गायिका और नर्तक थीं। उन्होंने कोलकाता के स्वराबितन में संगीत का प्रशिक्षण शुरू किया , जिसे उनके माता-पिता ने स्थापित किया था। बाद के वर्षों में, उन्होंने बॉम्बे में पटियाला घराने के उस्ताद अब्दुल रहमान खान , निर्मला देवी और लक्ष्मी शंकर के उस्ताद के अधीन अध्ययन किया । उन्होंने अल्मोडा में " उदय शंकर इंडिया कल्चरल सेंटर" में नृत्य का प्रशिक्षण भी लिया।

उन्होंने 1951 में किशोर कुमार से शादी की और इस शादी से उन्हें एक बेटा अमित कुमार हुआ। 1958 में इस जोड़े का तलाक हो गया और उन्होंने 1960 में अरूप गुहा ठाकुरता से शादी कर ली।इस जोड़े के दो बच्चे थे, अयान और स्रोमोना। स्रोमोना एक गायिका भी हैं।

आजीविका

गुहा ठाकुरता ने अपने अभिनय की शुरुआत दस साल की उम्र में अमिया चक्रवर्ती की ज्वार भाटा (1944)से की। यह दिलीप कुमार की पहली फिल्म थी । रूमा घोष के रूप में उनकी अगली फिल्म नितिन बोस थी , जिनके पहले चचेरे ससुर उनके चचिया ससुर थे, उनकी हिंदी में मशाल (1950) थी , जिसका बंगाली संस्करण समर था , जो बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास रजनी पर आधारित थी ।उन्होंने एक अंधी लड़की, सरला का किरदार निभाया।

अपने तलाक के बाद, रूमा समरेश बोस के प्रसिद्ध पंथ उपन्यास पर आधारित राजेन तरफदार की गंगा में अभिनय करने के लिए कलकत्ता चली गईं । उन्होंने संध्या रॉय के साथ दो प्रमुख महिलाओं में से एक के रूप में काम किया । गंगा ने उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता और रूमा के हिमी के चित्रण को आलोचनात्मक प्रशंसा मिली। उसी वर्ष, उन्होंने भानु बंदोपाध्याय के साथ पर्सनल असिस्टेंट और तपन सिन्हा की खनिकेर अतिथि में अभिनय किया।

उनका फिल्मी करियर 1962 में उनके द्वारा निर्मित और उनके पति द्वारा निर्देशित बनारसी से पुनर्जीवित हुआ। यह एक वेश्या की कहानी थी जो गरिमा और सम्मान का जीवन जीने की कोशिश करती है, जब उसका बचपन का प्रेमी रतन उसे उसके भयानक माहौल से दूर ले जाता है। यह फ्लॉप हो गई, लेकिन अगले वर्ष सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए बीएफजेए पुरस्कार जीता।

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1944 ज्वार भाटा
1950 मशाल 
1950अफसर
1952 रग रंग
1976 बैराग
1979 बेदर्द

अमरीकी ट्रंप

ट्रंप चले थे ईरान हराने , खुद अभी बने पप्पू  राहुल बने थे शेर ट्रंप के बल , खुद मुंह के बल गिरे।  दोनों हो रह बेइज्जत दुनिया हुई...