गुरुवार, 2 नवंबर 2023

मीता वशिष्ट

मीता वशिष्ठ
मीता वशिष्ठ एक लोकप्रिय अभिनेत्री हैं। मीता वशिष्ठ द्वारा अभिनीत नवीनतम फिल्में नियत, चल जिंदगी, गुड लक जेरी, सिद्धेश्वरी और पातालघर हैं । मीता वशिष्ठ का 

🎂जन्म 02 नवंबर 1967 

को हुआ था।

 एक भारतीय टेलीविजन और फिल्म अभिनेत्री हैं, जो मुख्य रूप से हिंदी टीवी धारावाहिक और फिल्मों में अपने काम के लिए जानी जाती हैं। अपने करियर के दौरान वशिष्ठ ने कई तरह की भूमिकाएं निभाई हैं। उनकी सबसे प्रमुख में कृतियों में शामिल हैं; साइंस फिक्शन टेलीविजन श्रृंखला 'स्पेस सिटी सिग्मा' जिसका प्रसारण 1989-1991 तक हुआ, पचपन खंबे लाल दीवारें। शो स्वाभिमान में एलन के किरदार से सीरियल 'कहानी घर घर की' में तृष्णा के रूप में और ज़ी टीवी के सीरियल 'काला टीका' में जेठी मां के किरदार से लेकर हिंदी सिनेमा के कई भूमिकाओं में उन्हें उनके किरदार के रूप में पहचान मिली। 
📽️
2006 शादी से पहले 
2004 फिर मिलेंगे 
2003 पातालघर 
2002 पिता 
2002 घाव 
2001 कुछ खट्टी कुछ मीठी 
2000 ज़िन्दगी ज़िन्दाबाद 
1999 ताल 
1998 ग़ुलाम 
1998 दिल से 
1995 स्वाभिमान दूरदर्शन धारावाहिक
1994 द्रोह काल
1994 तर्पण 
1993 रुदाली 
1991 कस्बा 
1991 ईडियट 
1990 दृष्टि
1990 चाँदनी 
1989 ख्याल गाथा 
1989 चाँदनी

रोशनी चोपड़ा

रोशनी चोपड़ा हिन्दी फ़िल्मों की एक अभिनेत्री एवं मॉडल हैं।

🎂जन्म: 02 नवंबर 1980 नई दिल्ली
पति: सिद्धार्थ आनंद कुमार (विवा. 2006)
बच्चे: जयवीर
माता-पिता: मंजू चोपड़ा, रवि चोपड़ा
बहन: दीया चोपड़ा
चोपड़ा की छोटी बहन दीया चोपड़ा भी एक अभिनेत्री हैं। चोपड़ा ने फिल्म निर्माता सिद्धार्थ आनंद कुमार से शादी की है। उन्होंने 05 नवंबर 2012 को अपने पहले बच्चे, बेटे जयवीर को जन्म दिया। उन्होंने 18 अगस्त 2016 को अपने दूसरे बेटे रेयान को जन्म दिया।

करियर: रोशनी ने विक्रम भट्ट की फ़िल्म 'फ़िर' में अभिनय किया, जो 12 अगस्त 2011 में रिलीज़ हुई। उन्होंने 2009-10 में सोनी टीवी पर कॉमेडी सर्कस तीन का तड़का शो की मेजबानी की है, और वर्तमान में स्टार स्पोर्ट्स पर 'हीरोज - लम्हें और यादें' की एंकर हैं। उन्होंने मौत का खेल में एक डरावनी टीवी श्रृंखला में भी काम किया है, उन्होंने कलर्स पर कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में भी काम किया।

ईशा दियोल

ईशा देओल

🎂जन्म: 02 नवंबर 1981 मुम्बई
 
एक भारतीय अभिनेत्री है। वह प्रसिद्ध अदाकार धर्मेंद्र और अदाकारा हेमा मालिनी की बेटी है। उसने 2002में फ़िल्म कोई मेरे दिल सौ पूछे से बालीवुड में अपनी अदाकारी की शुरुआत की। यह फ़िल्म कामयाब नहीं हुई। उसको 2004 की फ़िल्म धूम से कामयाबी मिली। 
पति: भरत तख्तानी (विवा. 2012)
माता-पिता: हेमा मालिनी, धर्मेन्द्र
भाई: अहाना देओल, बॉबी देओल, सनी देओल, अजीता देओल, विजेता देओल
कज़न: अभय देयोल
बेटियां- 2
🎂• राध्या (20 अक्टूबर 2017 को जन्म)
🎂• मिराया (10 जून 2019 को जन्म)
विजेता देओल (सौतेली बहनें)
• अजीता देओल (सौतेली बहनें)

गृहनगर साहनेवाल, लुधियाना, पंजाब
स्कूल/विद्यालय जमनाबाई नरसी स्कूल मुंबई
कॉलेज/विश्वविद्यालय ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, यूके
शौक्षिक योग्यता मीडिया और कंप्यूटर प्रौद्योगिकी में परास्नातक
धर्म सिख 
जाति जाट
आहार शाकाहारी 
विवाद वर्ष 2006 में उन्होंने फिल्म 'प्यारे मोहन' की शूटिंग के दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री अमृता राव को थप्पड़ मार दिया। एक साक्षात्कार में, ईशा ने कहा, हां, मैंने अमृता को थप्पड़ मारा। पैक-अप के एक दिन बाद, उसने मेरे निर्देशक इंद्र कुमार और मेरे कैमरामैन के सामने मुझे गालियां दीं और मुझे लगा कि यह बिल्कुल गलत है। अपने स्वाभिमान और मर्यादा की रक्षा के लिए मैंने उस क्षण की तपिश में उसे थप्पड़ मार दिया। मुझे कोई पछतावा नहीं है क्योंकि वह उस समय मेरे प्रति अपने व्यवहार के लिए पूरी तरह से योग्य थी। मैं सिर्फ अपने और अपनी गरिमा के लिए खड़ी हुई।” 

📽️
प्रमुख फिल्में
2007 जस्ट मैरिड 
2007 कैश
2006 मेरा दिल लेके देखो 
2005 मैं ऐसा ही हूँ 
2005 शादी नम्बर वन 
2005 इन्सान 
2005 काल 
2005 नो एन्ट्री 
2005 दस 
2004 धूम 
2004 युवा   
2003 चुरा लिया है तुमने 
2003 कुछ तो है 
2002 क्या दिल ने कहा 
2002 ना तुम जानो ना हम  
2002 कोई मेरे दिल से पूछे

बुधवार, 1 नवंबर 2023

राम मोहन


नाम राम मोहन

🎂जन्म 02 नवंबर, 1929
जन्म भूमि अंबाला
⚰️मृत्यु 06 दिसम्बर, 2015
मृत्यु स्थान मुम्बई

अभिभावक पिता- डॉक्टर साधुराम शर्मा और माता- योगमाया शर्मा
संतान तीन पुत्र और एक पुत्री
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र सिनेमा जगत
मुख्य फ़िल्में 'हरियाली और रास्ता', 'मेरे हुज़ूर', 'तक़दीर', 'शोर', 'किताब', 'जियो तो ऐसे जियो', 'अंगूर', 'सावन को आने दो', 'शान', 'नदिया के पार', 'बंटवारा', 'ग़ुलामी', 'रंगीला' और 'कोयला'
शिक्षा बी. ए.
विद्यालय जी. एम. एन. कॉलेज, अंबाला
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी राम मोहन 4 साल 'सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष और 6 साल महासचिव पद पर रहे तथा इसके अलावा वो सिनेमा से जुड़े लोगों के हित में कार्यरत विभिन्न एसोसिएशनों में भी सक्रिय रहते थे।

हिंदी सिनेमा में खलनायक और चरित्र अभिनेता के तौर पर पहचाने जाते थे। उन्होंने 'मिर्ज़ा ग़ालिब', 'तारा', 'शतरंज', 'संसार', 'बहादुर शाह ज़फ़र', 'ये दिल्ली है' और 'महाभारत' जैसे 15 टेलिविज़न धारावाहिकों में अभिनय भी किया था।

 जीवन परिचय

राम मोहन का जन्म 02 नवंबर, 1929 को अंबाला कैंट में हुआ था। इनके पिता डॉक्टर साधुराम शर्मा मूल रूप से जगाधरी के रहने वाले थे और अंबाला में अपना चिकित्सालय चलाते थे। राम मोहन की माताजी श्रीमती योगमाया शर्मा गृहिणी थीं। ये उनकी इकलौती संतान थे, हालांकि पिता की पहली शादी से भी इनका एक बड़ा भाई और एक बड़ी बहन थे। राम मोहन ने अंबाला के आर्या स्कूल से मैट्रिक शिक्षा प्राप्त की।

: राम मोहन का फ़िल्मी कॅरियर

राम मोहन के एक परिचित और अंबाला के ही रहने वाले महेश उप्पल मुंबई सेंट्रल के पास ही मौजूद 'फेमस आर्ट स्टूडियो' में चित्रकार की नौकरी करते थे और रहते भी स्टूडियो में ही थे। राम मोहन ने क़रीब दो महीने महेश उप्पल के साथ रहकर गुज़ारे। राम मोहन के मुताबिक़़ वो उस दौरान रोज़ाना आसपास के इलाक़ों दादर और महालक्ष्मी में मौजूद 'रंजीत मूवीटोन' और 'फ़ेमस स्टूडियो' जैसे फ़िल्म स्टूडियोज़ के चक्कर काटते थे। कभी कभार उन स्टूडियोज़ में घुसने के लिए उन्हें दरबान को रिश्वत भी देनी पड़ती थी। दो महीने बाद उन्हें महेश उप्पल का स्टूडियो छोड़ना पड़ा तो वो रहने के लिए विले पारले चले आए।

📽️प्रमुख फ़िल्में

 राम मोहन की प्रमुख फ़िल्में
राम मोहन की फ़िल्म 'जग्गू' की कामयाबी के बाद उनके रास्ते आसान हो गये। अगले कुछ सालों में उन्होंने 'श्री चैतन्य महाप्रभु' (1953), 'पेंशनर' (1954), 'होटल', 'लाल-ए-यमन' (दोनों 1956), 'देवर भाभी', 'मिस 58', 'नाईट क्लब', 'राजसिंहासन' (सभी 1958), 'भगवान और शैतान', 'चाचा ज़िंदाबा', 'दो बहनें', 'टीपू सुल्तान' (सभी 1959), 'अंगुलिमाल', 'बहादुर लुटेरा', 'चोरों की बारात', 'काला आदमी' और 'मिस्टर सुपरमैन की वापसी' (सभी 1960) जैसी फ़िल्मों में अहम भूमिकाएं निभायीं।

टेलिविज़न धारावाहिक
राम मोहन ने 'मिर्ज़ा ग़ालिब', 'तारा', 'शतरंज', 'संसार', 'बहादुर शाह ज़फ़र', 'ये दिल्ली है' और 'महाभारत' जैसे 15 टेलिविज़न धारावाहिकों में अभिनय किया। इसके साथ ही 4 साल 'सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन' के उपाध्यक्ष और 6 साल महासचिव पद पर रहने के अलावा वो सिनेमा से जुड़े लोगों के हित में कार्यरत विभिन्न एसोसिएशनों में भी सक्रिय रहे।

निधन
राम मोहन का निधन 86 साल की उम्र में 06 दिसम्बर, 2015 को मुम्बई में हो गया।

सोहराब मोदी

सोहराब मोदी

🎂जन्म 02 नवम्बर, 1897
जन्म भूमि बम्बई
⚰️मृत्यु 28 जनवरी, 1984

कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनेता, निर्माता व निर्देशक
मुख्य फ़िल्में 'रज़िया सुल्तान', 'घर की लाज', 'कुंदन' आदि।
पुरस्कार-उपाधि दादा साहब फाल्के पुरस्कार
प्रसिद्धि अभिनेता और फ़िल्म निर्माता-निर्देशक
जीवन परिचय
सोहराब मोदी का जन्म 2 नवम्बर, 1897 में बम्बई में हुआ था। सोहराब मोदी अपनी स्कूली शिक्षा खत्म करने के बाद वह अपने भाई केकी मोदी के साथ यात्रा प्रदर्शक का कार्य किया। सोहराब मोदी ने कुछ मूक फ़िल्मों के अनुभव के साथ एक पारसी रंगमंच से बतौर अभिनेता के रूप में शुरुआत की थी। सोहराब मोदी का बचपन रामपुर में बीता, जहां उनके पिता नवाब के यहां अधीक्षक थे। नवाब रामपुर का पुस्तकालय बहुत समृद्ध था। रामपुर में ही सोहराब मोदी ने फर्राटेदार उर्दू सीखी। अभिनय की प्रारंभिक शिक्षा उन्हें अपने भाई रुस्तम की नाटक कंपनी सुबोध थिएट्रिकल कंपनी से मिली, जिसमें उन्होंने 1924 से काम करना शुरू कर दिया था। वहीं उन्होंने संवाद को गंभीर और सधी आवाज में बोलने की कला सीखी, जो बाद में उनकी विशेषता बन गयी। कुछ ही समय में वे नाटकों में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाने लगे। ‘हैमलेट’ और ‘द सोल ऑफ़ डाटर’ उनके लोकप्रिय नाटक थे जिनमें उन्होंने अभिनय किया। बाद में उनका परिवार रामपुर से बंबई चला आया। वहां उन्होंने परेल के न्यू हाईस्कूल से मैट्रिक पास किया। जब ये अपने प्रिंसिपल से यह पूछने गये कि भविष्य में क्या करें, तो उनके प्रिंसिपल ने कहा,-‘तुम्हारी आवाज सुन कर तो यही लगता है कि तुम्हे या तो नेता बनना चाहिए या अभिनेता।’ और सोहराब अभिनेता बन गये। उनकी आवाज की तरह बुलंद थी। अंधे तक उनकी फ़िल्मों के संवाद सुनने जाते थे।

आरम्भिक जीवन

16 वर्ष की उम्र में सोहराब मोदी ग्वालियर के टाउनहाल में फ़िल्मों का प्रदर्शन करते थे। बाद में अपने भाई रुस्तम की मदद से उन्होंने ट्रैवलिंग सिनेमा का व्यवसाय शुरू किया। फिर अपने भाई के साथ ही उन्होंने बंबई में स्टेज फ़िल्म कंपनी की स्थापना की। इस कंपनी की पहली फ़िल्म 1953 में बनी ‘खून का खून’ थी, जो उनके नाटक ‘हैमलेट’ का फ़िल्मी रूपांतर थी। इसमें सायरा बानो की माँ नसीम बानो पहली बार परदे पर आयीं। ‘सैद –ए-हवस’ (1936) भी नाटक ‘किंग जान’ पर आधारित थी। सोहराब मूलतः नाटक से आये थे, यही वजह है कि उनकी पहले की फ़िल्मों में पारसी थिएटर की झलक मिलती है। ऐतिहासिक फ़िल्में बनाने में वे सबसे आगे थे।

सोहराब मोदी ने सन 1935 में स्टेज फ़िल्म कंपनी की स्थापना की थी। 1936 में स्टेज फ़िल्म कंपनी मिनर्वा मूवीटोन हो गयी और इसका प्रतीक चिह्न शेर हो गया। अपने इस बैनर में उन्होंने जो फ़िल्में बनायीं वे थीं-

आत्म तरंग (1937)
खान बहादुर (1937)
डाइवोर्स (1938)
जेलर (1938)
मीठा जहर (1938)
पुकार (1939)
भरोसा (1940)
सिकंदर (1941)
फिर मिलेंगे (1942)
पृथ्वी वल्लभ ((1943)
एक दिन का सुलतान (1945)
मंझधार (1947)
दौलत (1949)
शीशमहल (1950)
झांसी की रानी (1953)
मिर्जा गालिब (1954)
कुंदन (1955)
राजहठ (1956)
नौशेरवा-ए-आदिल (1957)
मेरा घर मेरे बच्चे (1960)
समय बड़ा बलवान (1969)
इनके अलावा उन्होंने सेंट्रल स्टूडियो के लिए ‘परख’ और शैली फ़िल्म्स के लिए ‘मीनाकुमारी की अमर कहानी’ बनायी। 

भारत की पहली रंगीन फ़िल्म

भारत की पहली टेकनीकलर फ़िल्म ‘झांसी की रानी’ उन्होंने बनायी थी। इसके लिए वे हालीवुड से तकनीशियन और साज-सामान लाये थे। इसमें 'झांसी की रानी' बनी थीं उनकी पत्नी महताब। सोहराब मोदी राजगुरु बने थे। इस फ़िल्म को उन्होंने बड़ी लगन से बनाया था, लेकिन फ़िल्म फ़्लॉप हो गयी। इस विफलता से उबरने के लिए उन्होंने ‘मिर्जा गालिब’ (सुरैया-भारतभूषण) बनायी। यह फ़िल्म व्यावसायिक तौर पर तो सफल रही बल्कि इसे राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक भी मिला। उन्होंने सामाजिक समस्याओं पर भी कुछ यादगार फ़िल्में बनायीं। इनमें शराबखोरी की बुराई पर बनायी गयी फ़िल्म ‘मीठा जहर’ और तलाक की समस्या पर ‘डाईवोर्स’ उल्लेखनीय हैं। उनकी सर्वाधिक चर्चित और सफल ऐतिहासिक फ़िल्म थी ‘पुकार’। इसमें चंद्रमोहन (जहांगीर), नसीम बानो (नूरजहां), सोहराब मोदी (संग्राम सिंह) और सरदार अख्तर की प्रमुख भूमिकाएँ थीं। इस फ़िल्म को न सिर्फ प्रेस बल्कि दर्शकों से भी भरपूर प्रशंसा मिली। ‘सिकंदर’ में पोरस और ‘पुकार’ में संग्राम सिंह की भूमिका में सोहराब मोदी के अभिनय की बड़ी प्रशंसा हुई।

पारिवारिक जीवन

महताब से उनकी शादी 21 अप्रैल 1946 को हुई, लेकिन मोदी का परिवार उन्हें बहू के रूप में स्वीकारने को तैयार नहीं था इसलिए कई साल उन्हें अलग रहना पड़ा। 1950 में उनके परिवार ने उनकी शादी को स्वीकार कर लिया।

पुरस्कार
सोहराब मोदी को सन 1980 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारत में ऐतिहासिक फ़िल्मों को प्रतिष्ठा दिलाने का श्रेय उन्हें ही जाता है।

निधन
1978 तक आते-आते 80 साल के मोदी साहब को चलने-फिरने में छड़ी का सहारा लेना पड़ गया था। उनकी बड़ी ख्वाहिश थी ‘पुकार’ को फिर से बनाने की। लेकिन बीमारी ने ऐसा नहीं करने दिया। 1984 में डॉक्टरों ने यह घोषित कर दिया कि उन्हें कैंसर है। तब तक उन्हें खाना निगलने में भी तकलीफ होने लगी थी। 1983 में उन्होंने अपनी आखिरी फ़िल्म ‘गुरुदक्षिणा’ का मुहूर्त किया था। उसे अधूरा छोड़ 28 जनवरी 1984 को मोदी हमेशा के लिए चिरनिद्रा में निमग्न हो गये। वे बड़े आला तबीयत के इंसान थे। उनका धैर्य भी अपार था। कई बार कलाकार कई रिटेक देते, पर मोदी साहब के चेहरे पर शिकन तक नहीं पड़ती।

अनु मालिक

अनु मलिक 

🎂जन्म की तारीख और समय: 02 नवंबर 1960, मुम्बई

भारतीय संगीतकार और गायक हैं। इन्होंने संगीत निर्माण का कार्य 1977 में शुरू किया। वह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता संगीत निर्देशक हैं, जो मुख्य रूप से हिन्दी फिल्म उद्योग में काम करते हैं। 1990 के दशक में वह कई सफल फिल्मों के गाने संगीतबद्ध कर चुके हैं। वह सरदार मलिक के पुत्र हैं। 
जन्म की तारीख और समय: 02 नवंबर 1960, मुम्बई
पत्नी: अंजु अनु मलिक
बच्चे: अनमोल मलिक, अदा मलिक
माता-पिता: सरदार मलिक
भाई: डब्बू, अबु मलिक।

परिचय
अनु मलिक का जन्म 2 नवंबर, 1960 को पंजाब में हुआ था। उनके पिता सर्द मालिक एक गीतकार और संगीत निर्देशक थे। सात साल की उम्र से ही अनु मलिक की संगीत में रूचि जाग्रत हुई और उन्होंने अपने पिता की सह में संगीत शुरू कर दिया। अनु मलिक का विवाह अंजू मालिक से हुआ। उनकी दो बेटियां हैं। उनकी एक बेटी अनमोल मलिक हिंदी सिनेमा में पार्श्वगायन करती हैं।

कॅरियर
अनु मलिक ने अपने कॅरियर की शुरुआत साल 1977 में फिल्म 'हंटरवाली' से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा की कई सुपरहिट फिल्मों में संगीत दिया। साल 1993 में अनु मलिक को हिंदी सिनेमा में पहचान फिल्म महेश भट्ट की फिल्म 'बाजीगर' से मिली। 'बाजीगर' का गाना 'ये काली काली आँखें' उस समय सबसे ज्यादा हिट साबित हुआ था।

उसके बाद आने वाले समय में उन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों में अपनी आवाज दी और संगीत दिया जो सुपरहिट साबित हुआ। जिस कारण से वह हिंदी सिनेमा में रातों-रात स्टार बन गए। जैसे-जैसे अनु मलिक कामयाबी की सीढ़ी चढ़ते गए, वैसे ही विवादों में भी घिरने लगे। उन पर लोगों ने आरोप लगाया कि वह दूसरे की धुनें चुराते हैं। लेकिन अनु मलिक ने कभी भी इन सब चीजों का अपने काम पर असर नहीं पड़ने दिया और हिंदी सिनेमा को अच्छे-अच्छे गाने दिए।

शारूख खान

शाहरुख खान
🎂 जन्म 02  नवंबर 1965
 को दिल्ली
 बॉलीवुड जगत का नामी चेहरा है I बॉलीवुड में शाहरुख़ खान का सिक्का चलता है I इनके नाम से ही फिल्मे करोड़ो की कमाई कर जाती है I शाहरुख़ को SRK , किंग खान, बॉलीवुड बादशाह के नाम से भी लोग पुकारते है I

शाहरुख़ के माता पिता मूलत पठानी थे I शाहरुख़ के पिता का नाम ताज मोहम्मद जो की एक स्वतंत्रता सैनानी थे और माता जी का नाम लतीफा खान जो की मेजर जनरल शाहनवाज खान की बेटी थी I

शाहरुख़ के पिता भारत विभाजन से पहले पाकिस्तान में पेशावर के कहानी बाजार में रहते थे और माँ रावलपिंडी में रहती थी I शाहरुख़ की बहन का नाम शहनाज़ है I

शाह रुख खान
🎂 जन्म 02 नवंबर 1965 को दिल्ली में हुआ I 

शाहरुख़ खान ने अपनी स्कूल की शिक्षा St Columba ‘s School Delhi से पूरी की इसके पश्चात हंसराज कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ़ दिल्ली से इकोनॉमिक्स में स्नातक की शिक्षा पूरी की तत्पश्चात जामिआ मिल्लीअ इस्लामिआ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री पूरी की है I  

Height   5’8 feet Inch

Weight   75 Kg

Age        53 years (2018)

Shah Rukh Khan Filmy Career in Hindi I शाहरुख खान फिल्मी करियर

शाहरुख़ खान अपनी पहचान बॉलीवुड जगत में बनाना चाहते थे इसके लिए उन्होंने मुंबई की ओर अपना रुख किया ओर फिल्म “दीवाना” से अपने बॉलीवुड की पारी की शुरुआत की ओर लोगो की ये दिखा दिया की वो किसी से काम नहीं है I फिल्म “दीवाना” बॉक्स ऑफिस पे सुपर हिट साबित रही I इसके बाद 1993 में आयी फिल्म “बाजीगर” में भी शाहरुख़ खान की अदाकारी देखने लायक थी एक नेगेटिव किरदार होते हुए भी उन्होंने फिल्म में उनको सबसे ज्यादा पसंद किया गया I इसके बाद फिल्म “डर” में भी उनकी अदाकारी सबको अपना दीवाना बना गयी I “डर” फिल्म में उनका रोले एक सिरफिरे आशिक़ का था जिस समय शाहरुख़ खान इस तरह के नेगेटिव किरदारों को किये जा रहे थे उस समय हीरो ऐसे रोल करने से कतराते थे क्युकी कही उन लोगो के करियर पे ऐसे किरदारों का ही मुहर न लग जाये लेकिंग शाहरुख़ ने इस चुनौती को स्वीकार किया I इसके बाद “कभी हा कभी ना” फिल्म में काम किया I

1995 में आयी आदित्य चोपड़ा की फिल्म “दिल वाले दुल्हनिया ले जायेंगे” से शाहरुख़ खान की इमेज एक लवर बॉय ओर किंग ऑफ़ रोमांस की छवि लेकर लोगो के सामने आयी लोगो ने फिल्म ओर शाहरुख़ खान की एक्टिंग को बहुत प्यार दिया ओर पसंद किया फिल्म सुपर डुपेर हिट साबित हुई इस फिल्म के लिए शाहरुख़ को फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला ओर फिल्म इतिहास की सबसे हिट फिल्म साबित हुई कुछ सिनेमा घरो में 12 सालो तक इस फिल्म को चलाया गया I इसके बाद यश चोपड़ा की फिल्म “दिल तो पागल है”, सुभाष घाई की फिल्म “परदेस” जैसी फिल्मो से शाहरुख़ को ओर भी प्रसिद्दि हासिल हुई I कारन जोहर की फिल्म “कुछ कुछ होता है” साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हुई ओर मणि रत्नम की फिल्म “दिल से” भी लोगो के बिच बहुत सफल रही I

शाहरुख़ खान समय के साथ ऊंचाइयों की तरफ बढ़ते जा रहे थे बॉलीवुड में उनकी फिल्मो का सफर रह रह कर सफलता की बुलंदियओ की तरफ बढ़ता जा रहा था अपितु ओर लोगो की तरह उनकी सारी फिल्मे सफल न होती लेकिंग कुछ फिल्मो में वो अपने अभिनय के द्वारा सबको पीछे छोड़ते जा रहे थे I

2000 में “मोहब्बते” 2001 में फिल्म “अशोका” ओर “कभी ख़ुशी कभी गम” फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पे बहुत अच्छा प्रदर्शन किया I इसके बाद 2002 में आयी फिल्म “देवदास” में शाह रुख खान के अभिनय को लोगो ने बहुत प्यार दिया फिल्म बॉक्स ऑफिस पे हिट साबित हुई I वीर जारा, डॉन, ॐ शांति ॐ, रब ने बना दी जोड़ी, माय नाम इस खान, चेन्नई एक्सप्रेस ओर रईस जैसी फिल्मो की पारी ने शाहरुख़ खान को बॉलीवुड किंग खान की उपाधि दी ओर ये साबित कर दिया की अगर लगन, कौशल ओर सपने पुरे करने का जुनून हो तो सब हासिल किया जा सकता है I

Shah Rukh Khan Favorite Things in Hindi

– शाहरुख़ खान को खाने में तंदूरी चिकन बहुत पसंद है I

– उनका फेवरेट एक्टर संजय दत्त, अनिल कपूर, दिलीप कुमार ओर अमिताभ बच्चन है I

– फेवरेट एक्ट्रेस काजोल, जूही चावला, माधुरी दीक्षित, मुमताज़ ओर सायरा बानू है I

– ब्लू एंड ब्लैक उनका फेवरेट कलर है I

– उनको लंदन ओर दुबई में घूमना बहुत पसंद है I

– उनको स्पोर्ट्स में हॉकी, फुटबॉल ओर क्रिकेट पसंद है I  

Shah Rukh Khan Marriage News Date and Wife and Childrens Name

शाह रुख खान की शादी गौरी छिब्बर से साथ 25 अक्टूबर 1991 को हुई थी I शादी के बाद गौरी छिब्बर गौरी खान के बाम से जाने जानी लगी I गौरी खान एक फिल्म प्रोडूसर ओर इंटेरियर डिज़ाइनर है I शाहरुख़ खान औऱ गौरी खान के दो बेटे आर्यन खान ओर अबराम खान औऱ एक बेटी सुहाना खान है I

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...