शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

गीतकार अंजान

अंजान (गीतकार)
अंजान
पूरा नाम लालजी पाण्डेय
प्रसिद्ध नाम अंजान
🎂जन्म 28 अक्टूबर, 1930
जन्म भूमि बनारस, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 13 सितम्बर, 1997
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र शेरो-शायरी तथा गीत लेखन
मुख्य फ़िल्में 'मुकद्दर का सिकंदर', 'डॉन', 'खून पसीना', 'बहारें फिर भी आएँगी', 'लावारिस', 'याराना', 'हेराफेरी' आदि।
प्रसिद्धि गीतकार
नागरिकता भारतीय
कॅरियर की शुरुआत अंजान ने अपने कॅरियर की शुरूआत वर्ष 1953 में अभिनेता प्रेमनाथ की फ़िल्म 'गोलकुंडा का कैदी' से की थी। इस फ़िल्म के लिए सबसे पहले उन्होंने 'लहर ये डोले कोयल बोले...' और 'शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी...' गीत लिखे थे।
अन्य जानकारी अंजान के पसंदीदा संगीतकार के तौर पर कल्याणजी-आनंदजी का नाम सबसे ऊपर आता है। कल्याणजी-आनंदजी के संगीत निर्देशन में अंजान के गीतों को नई पहचान मिली।
भारतीय हिन्दी फ़िल्मों के मशहूर गीतकार तथा अपने समय के ख्याति प्राप्त शायर थे। इनका वास्तविक नाम 'लालजी पाण्डेय' था। अंजान के लिखे हुए गीत आज भी लोगों की जुबां पर चढ़े हुए हैं। 'खइके पान बनारस वाला', 'ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना' और 'रोते हुए आते हैं सब' जैसे न जाने कितने ही सदाबहार गीत अंजान ने लिखे और प्रसिद्धि की ऊँचाईयों को छुआ। अमिताभ बच्चन पर फ़िल्माये गए उनके गीत काफ़ी लोकप्रियता हासिल करते थे। अंजान के पसंदीदा संगीतकार के तौर पर कल्याणजी-आनंदजी का नाम सबसे ऊपर आता है। इनके संगीत निर्देशन में अंजान के गीतों को नई पहचान मिली थी। अंजान साहब के पुत्र समीर भी पिता के समान ही प्रसिद्ध गीतकार हैं।

जन्म
हिन्दी भाषा और साहित्य के करिश्माई व्यक्तित्व अंजान का जन्म 28 अक्टूबर, 1930 को उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी बनारस में हुआ था। बचपन के दिनों से ही उन्हें शेरो-शायरी के प्रति गहरा लगाव था।

कवि सम्मेलन तथा मुशायरा
शेरो-शायरी के अपने शौक को पूरा करने के लिए अंजान बनारस में आयोजित सभी कवि सम्मेलनों और मुशायरों में हिस्सा लिया करते थे। हालांकि मुशायरों में वह उर्दू का इस्तेमाल कम ही किया करते थे। जहां हिन्दी फ़िल्मों में उर्दू का इस्तेमाल एक पैशन की तरह किया जाता था, वही अंजान अपने रचित गीतों में हिन्दी पर ही अधिक जोर दिया करते थे।

फ़िल्मी शुरुआत
एक गीतकार के रूप में अंजान ने अपने कॅरियर की शुरूआत वर्ष 1953 में अभिनेता प्रेमनाथ की फ़िल्म 'गोलकुंडा का कैदी' से की। इस फ़िल्म के लिए सबसे पहले उन्होंने 'लहर ये डोले कोयल बोले...' और 'शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी...' गीत लिखे थे, लेकिन इस फ़िल्म के जरिये वह कुछ ख़ास पहचान नहीं बना पाए। उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। इस बीच उन्होंने कई छोटे बजट की फ़िल्में भी कीं, जिनसे उन्हें कुछ ख़ास फायदा नहीं हुआ।

सफलता
कुछ समय बाद अचानक ही उनकी मुलाकात जी. एस. कोहली से हुई, जिनके संगीत निर्देशन में उन्होंने फ़िल्म 'लंबे हाथ' के लिए 'मत पूछ मेरा है मेरा कौन...' गीत लिखा। इस गीत के जरिये वह काफ़ी हद तक अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए। लगभग दस वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद वर्ष 1963 में पंडित रविशंकर के संगीत से सजी प्रेमचंद के उपन्यास गोदान पर आधारित फ़िल्म 'गोदान' में उनके रचित गीत 'चली आज गोरी पिया की नगरिया...' की सफलता के बाद अंजान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अंजान को इसके बाद कई अच्छी फ़िल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए, जिनमें 'बहारें फिर भी आएंगी', 'बंधन', 'कब क्यों और कहां', 'उमंग', 'रिवाज', 'एक नारी एक ब्रह्मचारी', 'हंगामा' जैसी कई फ़िल्में शामिल थीं। इसके बाद अंजान ने सफलता की नई बुलंदियों को छुआ और एक से बढ़कर एक गीत लिखे।

अंजान के सिने कॅरियर पर यदि नजर डाली जाए तो सुपरस्टार अमिताभ बच्चन पर फ़िल्माये गए उनके रचित गीत काफ़ी लोकप्रिय हुआ करते थे। वर्ष 1976 में प्रदर्शित फ़िल्म 'दो अंजाने' के 'लुक छिप लुक छिप जाओ ना...' गीत की कामयाबी के बाद अंजान ने अमिताभ बच्चन के लिए कई सफल गीत लिखे, जिनमें 'बरसों पुराना ये याराना...', 'खून पसीने की जो मिलेगी तो खाएंगे...', 'रोते हुए आते हैं सब...', 'ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना...' जैसे कई सदाबहार गीत शामिल हैं।

प्रमुख फ़िल्में
अंजान के पसंदीदा संगीतकार के तौर पर कल्याणजी-आनंदजी का नाम सबसे ऊपर आता है। कल्याणजी-आनंदजी के संगीत निर्देशन में अंजान के गीतों को नई पहचान मिली। सबसे पहले इस जोड़ी का गीत वर्ष 1969 में प्रदर्शित फ़िल्म 'बंधन' में पसंद किया गया। इसके बाद अंजान द्वारा रचित फ़िल्मी गीतों में कल्याणजी-आनंदजी का ही संगीत हुआ करता था। इन दोनों की जोड़ी ने जिन फ़िल्मों के लिए अपना योगदान दिया, वे इस प्रकार थीं-

दो अनजाने - 1976
हेराफेरी - 1976
खून पसीना - 1977
गंगा की सौगंध - 1978
डॉन - 1978
मुकद्दर का सिकंदर - 1978
लावारिस - 1981
याराना - 1981
ईमानदार - 1987
दाता - 1989
जादूगर - 1989
थानेदार - 1990
प्रसिद्ध गीत
गीतकार अंजान द्वारा लिखे गए कुछ प्रसिद्ध गीत निम्नलिखित हैं-

आपके हसीं रुख पे - बहारें फिर भी आएँगी
खइके पान बनारस वाला - डॉन
दिल तो है दिल - मुकद्दर का सिकंदर
रोते हुए आते हैं सब - मुकद्दर का सिकंदर
ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना - मुकद्दर का सिकंदर
प्यार जिंदगी है - मुकद्दर का सिकंदर
मुझे नौलक्खा मंगा दे रे - शराबी
खून पसीने की जो मिलेगी तो खाएंगे - ख़ून पसीना
बरसों पुराना ये याराना
पंसदीदा संगीतकार तथा गायक
वर्ष 1989 में सुल्तान अहमद की फ़िल्म 'दाता' में कल्याणजी-आनंदजी के संगीत निर्देशन में अंजान का रचित यह गीत 'बाबुल का ये घर बहना कुछ दिन का ठिकाना है', आज भी श्रोताओं की आंखों को नम कर देता है। कल्याणजी-आनंदजी के अलावा अंजान के पसंदीदा संगीतकारों में बप्पी लाहिरी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, ओ. पी. नैयर, राजेश रोशन तथा आर. डी. बर्मन प्रमुख रहे। वहीं उनके गीतों को किशोर कुमार, आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी तथा लता मंगेशकर जैसे चोटी के गायक कलाकारों ने अपने स्वर से सजाया।

निधन
अंजान ने अपने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे सिने कॅरियर में लगभग 200 फ़िल्मों के लिए गीत लिखे। लगभग तीन दशकों तक हिन्दी सिनेमा को अपने गीतों से संवारने वाले अंजान का 67 वर्ष की आयु में 13 सितम्बर, 1997 को निधन हुआ। इनके निधन से फ़िल्मी दुनिया का एक बड़ा सितारा डूब गया। आज भी उनके लिखे गीत दिल को सकूँ देते हैं और हर कोई उन्हें गुनगुनाता है।

सत्यन कप्पू

चरित्र अभिनेता सत्येन कप्पू की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि

सत्येन कप्पू 
सत्येन्द्र कप्पू (जन्म सत्येन्द्र शर्मा ; जिन्हें सत्येन कप्पू के नाम से भी जाना जाता है ; 
🎂जन्म- 07 फरवरी1931, पानीपत; 
⚰️मृत्यु- 27 अक्टूबर, 2007, मुम्बई, महाराष्ट्र) 

भारतीय हिंदी सिनेमा के चरित्र अभिनेता थे। उन्होंने 390 फ़िल्मों में अभिनय किया।

सत्येन कप्पू का जन्म 1931 को पानीपत में हुआ था।
इनका नाम सत्येन्द्र कपूर है।
यह भारतीय सिनेमा के चरित्र अभिनेता थे।
सत्येन कप्पू ने 390 फ़िल्मों में अभिनय किया है।
सत्येन कप्पू ने अपने करियर की शुरूआत 1952 में इंडियन पीपल थियेटर एसोसिएशन से की थी।
इन्होंने अपने समय के सभी नामी गिरामी निर्देशकों और ऐक्टर्स के साथ काम किया था।
राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, जितेन्द्र के नेतृत्व में कई फ़िल्मों में उनका काम उल्लेखनीय था।
सत्येन कप्पू को 27 अक्टूबर, 2007 शनिवार शाम 4 बजे मुम्बई में दिल का दौरा पड़ने के कारण निधन हो गया।

प्रमुख फ़िल्मों की सूची-
📽️
2002 अखियों से गोली मारे
2000 बेटी नम्बर वन
2000 खौफ़
1999 अनाड़ी नम्बर वन
1999 मन
1999 गैर
1998 मैं सोलह बरस की
1998 दंड नायक
1998 हिटलर
1998 विनाशक
1997 आँखों में तुम हो
1997 मेरे सपनों की रानी
1997 विरासत
1997 दिल के झरोखे में
1997 उफ़ ! ये मोहब्बत
1996 रंगबाज़
1996 शोहरत
1995 तकदीरवाला
1995 हम दोनों
1995 हकीकत
1995 हथकड़ी
1995 राजा
1995 पापी देवता
1994 वादे इरादे
1994 ब्रह्म
1994 गोपी किशन
1994 घर की इज्जत
1994 इंसानियत
1994 अमानत
1993 दिव्य शक्ति
1993 इंसानियत के देवता
1993 साहिबाँ
1993 तहकीकात
1993 दलाल
1993 गुरुदेव
1993 संतान
1993 बड़ी बहन
1993 संग्राम
1992 दिल का क्या कसूर
1992 इन्तेहा प्यार की
1992 हीर राँझा
1992 बेटा
1992 खुले आम
1991 गुनहगार
1991 खेल
1991 कुरबानी रंग लायेगी
1991 फूल और काँटे
1991 प्रतिकार
1991 झूठी शान
1991 कर्ज़ चुकाना है
1991 फ़तेह
1991 पाप की आँधी
1990 दीवाना मुझ सा नहीं
1990 दिल
1990 घर हो तो ऐसा
1990 जवानी ज़िन्दाबाद
1990 प्यार का देवता
1989 नाचे नागिन गली गली
1989 गैर कानूनी
1989 जोशीले
1989 मोहब्बत का पैगाम
1989 जायदाद
1989 अनजाने रिश्ते
1989 तुझे नहीं छोड़ूँगा
1989 जादूगर
1989 कानून अपना अपना
1989 घराना
1989 तौहीन
1989 दाता
1988 घरवाली बाहरवाली
1988 चरणों की सौगन्ध
1988 प्यार मोहब्बत
1988 मोहब्बत के दुश्मन
1988 मर मिटेंगे
1988 तमाचा
1988 सागर संगम
1988 अग्नि
1988 दो वक्त की रोटी
1988 जीते हैं शान से
1988 सोने पे सुहागा
1988 खतरों के खिलाड़ी
1988 ज़ख्मी औरत
1988 बीवी हो तो ऐसी
1987 कुदरत का कानून
1987 जवाब हम देंगे
1987 मजाल
1987 ईमानदार
1987 हिम्मत और मेहनत
1987 मुकद्दर का फैसला
1987 खुदगर्ज़
1986 नसीब अपना अपना
1986 तन बदन
1986 कृष्णा-कृष्णा
1986 प्यार किया है प्यार करेंगे
1986 सवेरे वाली गाड़ी
1986 प्यार के दो पल
1986 चमेली की शादी
1986 पाले ख़ान
1986 मुद्दत
1986 स्वर्ग से सुन्दर
1986 जीवा
1985 पैसा ये पैसा
1985 तेरी मेहरबानियाँ
1985 वफ़ादार
1985 मेरा जवाब
1985 ज़माना
1985 मर्द
1985 बेपनाह
1985 सरफ़रोश
1985 रामकली
1985 साहेब
1985 गिरफ्तार
1985 सत्यमेव जयते
1985 फाँसी के बाद
1985 युद्ध
1985 अलग अलग
1984 एक नया इतिहास
1984 कामयाब
1984 आज का एम एल ए राम अवतार
1984 लैला
1984 नया कदम
1984 ज़मीन आसमान
1984 गृहस्थी
1984 इंकलाब
1984 दुनिया
1984 लव मैरिज
1984 मेरा फैसला
1984 डिवोर्स
1984 शराबी
1984 यह देश
1983 कैसे कैसे लोग
1983 चोर पुलिस
1983 शुभ कामना
1983 हिम्मतवाला
1983 दो गुलाब
1983 वो जो हसीना
1983 कुली
1983 सौतन
1983 जस्टिस चौधरी
1983 मैं आवारा हूँ
1982 तेरी माँग सितारों से भर दूँ
1982 अनोखा बंधन
1982 नमक हलाल
1982 तीसरी आँख
1982 जॉनी आई लव यू
1982 अशान्ति
1982 सम्राट
1982 धर्म काँटा
1981 मैं और मेरा हाथी
1981 वक्त की दीवार
1981 शाका
1981 लावारिस
1981 कुदरत
1981 रॉकी
1981 रक्षा
1981 एक दूजे के लिये
1980 पत्थर से टक्कर
1980 ज्योति बने ज्वाला
1980 द बर्निंग ट्रेन
1979 मंज़िल
1979 सरकारी मेहमान
1979 मिस्टर नटवरलाल
1979 ढ़ोंगी
1979 दिल का हीरा
1979 काला पत्थर
1979 झूठा कहीं का
1978 काला आदमी
1978 सावन के गीत
1978 भोला भाला
1978 नालायक
1978 डॉन
1978 फंदेबाज़
1978 विश्वनाथ
1978 दरवाज़ा
1977 विश्वासघात
1977 दूसरा आदमी
1977 धूप छाँव
1977 चला मुरारी हीरो बनने
1977 जय विजय
1977 ईमान धर्म
1976 ख़ान दोस्त
1976 संतान
1976 उधार का सिंदूर
1976 लगाम
1976 फकीरा
1975 मौसम
1975 कैद
1975 आखिरी दाव
1975 शोले
1975 दीवार
1975 धर्मात्मा
1975 धोती लोटा और चौपाटी
1975 प्रतिज्ञा
1975 रानी और लालपरी
1974 विदाई
1974 हाथ की सफाई
1974 मज़बूर
1974 बेनाम
1974 दूसरी सीता सत्येन कप्पू नाम से
1974 खोटे सिक्के
1974 कसौटी
1974 ईमान
1973 यादों की बारात
1973 कीमत
1973 अनहोनी
1973 अविष्कार
1973 हिन्दुस्तान की कसम
1972 सीता और गीता
1972 रास्ते का पत्थर
1972 अपना देश
1972 अनुराग
1971 अमर प्रेम
1971 जाने अनजाने
1971 लाल पत्थर
1963 बन्दिनी

लक्ष्मीकांत बेर्डे

हास्य अभिनेता लक्ष्मीकांत बेर्डे के जन्मदिवस पर हार्दिक श्रद्धांजलि

लक्ष्मीकांत बेर्डे 
🎂26 अक्टूबर 1954 
⚰️16 दिसंबर 2004

 एक भारतीय अभिनेता थे जो मराठी और कई हिंदी फिल्मों में दिखाई दिए बेर्डे ने प्रोडक्शन कंपनी मराठी साहित्य संघ में एक कर्मचारी के रूप में अपना करियर शुरू किया और फिर कुछ मराठी स्टेज नाटकों में सहायक भूमिकाएँ निभाईं।  1983-84 में, वह पहली बार मराठी प्ले टूर टूर से प्रसिद्ध हुए

मराठी फिल्मों के अलावा, उनकी हास्य मंच भूमिकाएं जैसे शांततेचा कर्ता चालु आहे और बीघाडले स्वर्गेश द्वार भी सफल रहीं।  बेर्डे ने कई बॉलीवुड फिल्मों में अभिनय किया और कॉमिक रोल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए फिल्मफेयर अवार्ड के लिए चार नामांकन प्राप्त किए।  उन्होंने लगभग 185 हिंदी और मराठी फिल्मों में अभिनय किया।

लक्ष्मीकांत बेर्डे का जन्म 26 अक्टूबर 1954 को बॉम्बे (मुंबई) में हुआ था उनके पांच बड़े भाई-बहन थे और परिवार की आय बढ़ाने के लिए बेर्डे बचपन में ही लॉटरी टिकट बेचने लगे गिरगांव में किए गए गणेश उत्सव समारोह के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों के दौरान मंचीय नाटकों में उनकी भागीदारी से उन्हें अभिनय में रुचि मिली उन्होंने इंटर-स्कूल और इंटर-कॉलेज ड्रामा प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पुरस्कार जीते।  इसके बाद, बेर्दे ने मुंबई मराठी साहित्य संघ में काम करना शुरू कर दिया

मराठी साहित्य संघ में एक कर्मचारी के रूप में काम करते हुए, लक्ष्मीकांत बेर्डे ने मराठी मंचीय नाटकों में छोटी भूमिकाओं में अभिनय करना शुरू किया।  1983-84 में, उन्होंने पुरुषोत्तम बेर्दे के मराठी स्टेज प्ले टूर टूर में अपनी पहली प्रमुख भूमिका हासिल की जो हिट बन गई और बेर्डे की कॉमेडी की शैली को सराहा गया।

बेर्डे ने अपनी फिल्म की शुरुआत 1984 की मराठी फिल्म लेक चलली ससरला से की इसके बाद, उन्होंने और अभिनेता महेश कोठारी ने फिल्म धूम धड़ाका (1984) और दे दनादन (1987) में एक साथ अभिनय किया।  ये दोनों फिल्में प्रसिद्ध हुईं और बेर्डे ने अपनी ट्रेडमार्क कॉमेडी शैली स्थापित करने में मदद की

ज्यादातर फिल्मों में, उन्होंने कोठारी के साथ या अभिनेता अशोक सराफ के साथ अभिनय किया लक्ष्मीकांत बेर्डे  अशोक सराफ की जोड़ी को भारतीय सिनेमा में एक सफल मुख्य अभिनेता के रूप में पहचाना जाता है बेर्डे ने अशोक सराफ, सचिन पिलगांवकर और महेश कोठारी के साथ मिलकर 1989 की मराठी फिल्म ऐश ही बनवा बनवी में एक साथ अभिनय करने के बाद मराठी फिल्मों में एक सफल चौकड़ी बनाई

उस दशक को मराठी फिल्म उद्योग द्वारा "अशोक-लक्ष्य" युग के रूप में याद किया जाएगा।  बेर्ड की मृत्यु तक दोनों कलाकार सबसे अच्छे दोस्त बने रहे।  ज्यादातर फिल्मों में, बेर्डे की अभिनेत्री उनकी भावी पत्नी प्रिया अरुण ही रही

बेर्डे की पहली हिंदी फिल्म 1989 में सलमान ख़ान द्वारा अभिनीत सूरज बड़जात्या की मैंने प्यार किया थी। उनकी कुछ अन्य लोकप्रिय हिंदी फ़िल्मों में हम आपके हैं कौन ..!, मेरे सपनों  की रानी, ​​आरज़ू, साजन, बेटा, 100 डेज और अनाड़ी शामिल हैं।  बेर्दे हिट मराठी मंच नाटकों जैसे शांता कर्ता चालु आहे और अन्य में मुख्य अभिनेता के रूप में भी काम करते रहे।

1992 में, बेर्डे ने अपने कॉमेडी मोल्ड से अलग होने की कोशिश की और फिल्म एक होता विदुषक में एक गंभीर भूमिका निभाई फिल्म को सफलता नहीं मिलने पर बेर्डे कॉमेडी में वापस आ गए, हालांकि वे फिल्म की असफलता से निराश थे।

1985 से 2000 तक, बेर्डे ने कई अन्य मराठी ब्लॉकबस्टर्स जैसे आमि दोगे राजा रानी, ​​हमाल दे धमाल, बलचे बाप ब्रह्मचारी, एक पेक्सा एक, भूतच चू, थरथराहट धड़ाकेबाज़ और ज़ापाटेला में अभिनय किया। 

बेर्डे ने मराठी टीवी धारावाहिक नस्ती आफत में अभिनय किया था।

16 दिसंबर 2004 को किडनी की बीमारी के कारण मुंबई में लक्ष्मीकांत बेर्डे की मृत्यु हो गई उनके अंतिम संस्कार में महेश कोठारी अशोक सराफ और सचिन पिलगांवकर जैसी मराठी फिल्म उद्योग की कई उल्लेखनीय हस्तियों ने भाग लिया

अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, बेर्डे ने अपना प्रोडक्शन हाउस 'अभिनय आर्ट्स' चलाया, जिसका नाम उनके बेटे अभिनय बेर्डे के नाम पर रखा गया।  बहुत कम लोग जानते हैं कि लक्ष्मीकांत बेर्डे बहुत अच्छे वेंट्रिलक्विस्ट और गिटारवादक थे।

जय श्री

राजश्री शांताराम
🎂08 अक्टूबर 1944
बम्बई , बम्बई प्रेसीडेंसी , ब्रिटिश भारत ब्रिटिश राज
सिटिज़नशिप
अमेरिकन
पेशा
अभिनेत्री
सक्रिय वर्ष
1954
1961-1973
जीवनसाथी
ग्रेग चैपमैन
अभिभावक)
वी. शांताराम (पिता), जयश्री (मां)
राजश्री प्रशंसित भारतीय फिल्म निर्माता वी. शांताराम और अभिनेत्री जयश्री की बेटी हैं , जो वी. शांताराम की दूसरी पत्नी हैं। उनके भाई किरण शांताराम मुंबई के पूर्व शेरिफ थे ।

अमेरिका में राज कपूर के साथ फिल्म अराउंड द वर्ल्ड की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात अमेरिकी छात्र ग्रेग चैपमैन से हुई। दोनों ने तीन साल बाद एक भारतीय समारोह में शादी की, जो पांच दिनों तक चला। वह अपने पति के साथ स्थायी रूप से अमेरिका में रहने चली गयीं।उनकी एक बेटी है। वे लॉस एंजिल्स में रहते हैं । 

वह पिछले 30 वर्षों से अमेरिका में रह रही हैं और अपने पति के साथ एक बहुत ही सफल कस्टम कपड़ों का व्यवसाय चला रही हैं, जबकि फिल्मों में उनकी रुचि अभी भी बरकरार है। वह हैक-ओ-लैंटर्न , टैंटेड लव और मॉनसून में सहायक निर्देशक थीं और उन्होंने "अशोक बाय अनदर नेम" नामक बच्चों के वीडियो पर कथन भी किया है।
📽️
1954 सुबह का तारा
1961 स्त्री
1963 ग्रहस्थि
1963 घर बसाके देखो
1964 शहनाई
1964 जी चाहता है 
1964 गीत गाया पत्थरों ने
1965 दो दिल 
1965 जानवर
1966 सागाई 
1966 मोहब्बत जिंदगी है 
1967 दिल ने पुकारा
1967 गुनाहों का देवता 
1967 दुनिया भर में रीता 
1968 सुहाग रात 
1968 ब्रह्मचारी
1973 नैना

सोमवार, 23 अक्टूबर 2023

शारदा

शारदा राजन आयंगर जिन्हें केवल शारदा नाम से श्रेय दिया गया, हिन्दी फिल्मों की पार्श्वगायिका रही हैं। 1960 और 70 के दशक में वो सक्रिय रही और 1969 से लेकर 1972 तक फिल्मफेयर पुरस्कारों में उन्हें चार नामांकन प्राप्त हुए, जिसमें से उन्हें जहाँ प्यार मिले के "बात ज़रा है आपस की" के लिये पुरस्कार प्राप्त भी हुआ।

🎂जन्म की तारीख और समय: 25 अक्तूबर 1933, मद्रास प्रैज़िडन्सी
⚰️मृत्यु की जगह और तारीख: 14 जून 2023
बच्चे: शम्मी राजन
शारदा जी को फिल्म सूरज (1966) में उनके गीत "तितली उड़ी" के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है। 2007 में, उन्होंने अपना एल्बम अंदाज़-ए-बयान और जारी किया , जिसमें मिर्ज़ा ग़ालिब की ग़ज़लों पर आधारित उनकी अपनी रचनाएँ थीं ।
शारदा भारत के तमिलनाडु के एक अयंगर परिवार से थीं और बचपन से ही उनका रुझान संगीत की ओर था। 
उनकी आवाज़ आखिरी बार कांच की दीवार (1986) में सुनी गई थी।
वैसे 21 जुलाई 2007 को शारदा ने अपना ग़ज़ल एल्बम अंदाज़-ए-बयान और जारी किया , जो मिर्ज़ा ग़ालिब की ग़ज़लों का संकलन था। यह एल्बम अभिनेत्री शबाना आज़मी के हाथों जुहू जागृति मुंबई में जारी किया गया था ।
14 जून 2023 को 89 वर्ष की आयु में शारदा का निधन हो गया।

रविवार, 22 अक्टूबर 2023

मीनू मुमताज

मालिकाउन्निसा अली
प्रसिद्ध नाम मीनू मुमताज़
🎂जन्म 26 अप्रॅल, 1942
जन्म भूमि बम्बई 🇮🇳(आज़ादी पूर्व, वर्तमान मुम्बई, महाराष्ट्र)
⚰️मृत्यु 23 अक्टूबर, 2021
मृत्यु स्थान टोरंटो🇨🇦
अभिभावक पिता- मुमताज़ अली
पति/पत्नी सईद अली अकबर
संतान चार
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र भारतीय सिनेमा
मुख्य फ़िल्में ‘चौदहवीं का चांद’, ‘कागज के फूल’, ‘साहिब बीवी और गुलाम’, ‘ताजमहल’, ‘घूंघट’, ‘इंसान जाग उठा’, ‘घर बसाके देखो’ आदि।
प्रसिद्धि अभिनेत्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी मीनू मुमताज़ अपने समय के मशहूर कॉमेडियन और सुपर स्टार महमूद अली की बहन थीं। उन्हें मीनू मुमताज़ नाम अभिनेत्री मीना कुमारी ने दिया था।
भारतीय अभिनेत्री थीं। वह अपने समय के मशहूर कॉमेडियन महमूद अली की बहन थीं। भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री रहीं मीना कुमारी और मीनू मुमताज़ में काफी गहरी मित्रता थी। सन 1950 से लेकर 1960 के दशक में बतौर डांसर कई फिल्मों में काम करने वाली मीनू मुमताज़ एक डांसर के साथ-साथ कैरेक्टर आर्टिस्ट भी थीं। मीनू मुमताज़ का असली नाम मालिकाउन्निसा अली था। जब फिल्मों में काम करने लगीं तो मीना कुमारी ने उनका नाम बदलकर मीनू मुमताज़ कर दिया था। तब से फिल्म इंडस्ट्री में मीनू मुमताज़ के नाम से मशहूर हो गईं।
परिचय
मीनू मुमताज ने फिल्मी दुनिया में ‘सखी हातिम’ से कदम रखा था। 1950 और 1960 के दशक की कई हिंदी फिल्मों में उन्होंने काम किया। कई बार फिल्मों में वह डांसर के तौर पर भी नजर आई हैं। उनकी सबसे ज्यादा मशहूर फिल्मों में ‘सीआईडी’, ‘नया दौर’, ‘ताज महल’, ‘गबन’ और ‘जमीर’ शामिल हैं। पहली फिल्म ‘सखी हातिम’ में मीनू मुमताज बलराज साहनी जैसे दिग्गज अभिनेता के साथ थीं। उन्होंने गुरुदत्त साहब के साथ भी काम किया। ‘चौदहवीं का चांद’, ‘कागज के फूल’, ‘साहिब बीवी और गुलाम’, ‘ताजमहल’, ‘घूंघट’, ‘इंसान जाग उठा’, ‘घर बसाके देखो’ जैसी कई फिल्मों में उन्होंने काम किया था।

मृत्यु
अभिनेत्री मीनू मुमताज़ की मृत्यु 23 अक्टूबर, 2021 को कनाडा में हुई। वह बीते कई सालों से बीमार थीं और लगभग बीस वर्षों से कनाडा में ही रह रही थीं। मीनू मुमताज़ के निधन के बारे में बात करते हुए उनके भतीजे नौषाद ने कहा, "वह जईफ थीं और उनकी उम्र भी 80 के आसपास थी। अब तक मैं जिस किसी से भी मिला हूं, वह उनमें से सबसे प्यारी इंसान थीं।" अपने बड़े भाई महमूद की तरह मीनू मुमताज़ ने भी अपनी पहचान फिल्मों में बनाने का फैसला किया था।

देवन वर्मा

देवेन वर्मा  

🎂जन्म 23 अक्टूबर, 1937
⚰️मृत्यु 02 दिसम्बर, 2014
मृत्यु स्थान पुणे, महाराष्ट्र
पति/पत्नी रूपा गांगुली
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र बॉलीवुड
मुख्य फ़िल्में 'गोलमाल', 'अंगूर', 'खट्टा मीठा', 'नास्तिक', 'रंग बिरंगी', 'चोरी मेरा काम', 'चोर के घर चोर' आदि।
शिक्षा राजनीति विज्ञान तथा समाजशास्त्र से स्नातक।
पुरस्कार-उपाधि सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का फ़िल्मफेयर पुरस्कार (तीन बार)
प्रसिद्धि हास्य कलाकार
नागरिकता भारतीय
फ़िल्मों में प्रवेश देवेन वर्मा का फ़िल्मों में प्रवेश 1961 में बी. आर. चोपड़ा के बैनर तले फ़िल्म 'धर्मपुत्र' से हुआ।
अन्य जानकारी देवेन वर्मा बड़े पर्दे पर आख़िरी बार वर्ष 2003 में प्रदर्शित 'कलकत्ता मेल' फ़िल्म में नज़र आए थे। इस फ़िल्म में ये रानी मुखर्जी के दादाजी के किरदार में थे।
देवेन वर्मा भारतीय सिनेमा में हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता थे। उन्होंने हिन्दी फ़िल्मों में अपने शानदार हास्य अभिनय से सभी का दिल जीत लिया था। देवेन वर्मा ने लगभग 149 फ़िल्मों में काम किया। 'गोलमाल', 'अंगूर', 'खट्टा मीठा', 'नास्तिक', 'रंग बिरंगी' आदि उनके कॅरियर की बड़ी फ़िल्मों में से एक रही थीं। 'बेशर्म' सहित कुछ फ़िल्मों का निर्माण और निर्देशन भी उन्होंने किया था। 'चोरी मेरा काम', 'चोर के घर चोर' तथा 'अंगूर' फ़िल्मों के लिए उन्हें बेस्ट कॉमेडियन के फ़िल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा़ गया था।

जन्म तथा शिक्षा
देवेन वर्मा का जन्म 23 अक्टूबर, 1937 को हुआ था। उनका पालन-पोषण पुणे में हुआ। उन्होंने यहीं से राजनीति विज्ञान तथा समाजशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। देवेन वर्मा अपने समय के प्रसिद्ध अभिनेता और 'दादा मुनि' के नाम से मशहूर अशोक कुमार के दामाद थे। अशोक कुमार की सबसे छोटी पुत्री रूपा गांगुली से उनका विवाह हुआ था।

फ़िल्मों में प्रवेश
वर्ष 1959 में पढ़ाई समाप्त कर देवेन वर्मा मुम्बई आ गए। फ़िल्मी कॅरियर आरंभ करने में उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं हुई। 'दादा मुनि' अशोक कुमार के वे दामाद थे। 'बीआर फ़िल्म्स' और 'यशराज फ़िल्म्स' में लगातार उन्हें काम मिला, क्योंकि इस बैनर से दादा मुनि के अंतरंग सम्बन्ध थे। देवेन वर्मा का फ़िल्मों में प्रवेश 1961 में बी. आर. चोपड़ा के बैनर तले फ़िल्म 'धर्मपुत्र' से हुआ। इसका निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था। इस फ़िल्म में उनका छोटा-सा रोल था, जिस पर किसी ने अधिक ध्यान नहीं गया। 1964 में आई फ़िल्म 'सुहागन' में उनके अभिनय पर निर्माताओं की नजरें इनायत हुईं। 'देवर' फ़िल्म में उनका निगेटिव रोल था, तो दूसरी फ़िल्म 'मोहब्बत जिंदगी है' में उन्होंने हास्य भूमिका निभाई। दोनों फ़िल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई।

यह समय देवेन वर्मा के लिए निर्णायक था। उन्हें कॉमेडी या खलनायकी में से किसी एक को चुनना था। उन्होंने कॉमेडी की ओर अपनी दिलचस्पी दिखाई। देवेन वर्मा के अभिनय की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि वे बड़ी आसानी से किरदार को अपने अंदर उतार लेते थे। वह फ़िल्मी जीवन में सिर्फ अभिनय करने ही नहीं आए थे। उन्हें निर्माता-निर्देशक बनकर अपनी अतिरिक्ति ऊर्जा को भी दर्शाना था।

यादगार भूमिकाएँ
फ़िल्म 'चोरी मेरा काम' (1975) में देवेन वर्मा परवीन भाई पब्लिशर के रूप में परदे पर आते हैं। एक किताब के प्रकाशित होते ही सबका ध्यान उनकी ओर आकर्षित होता है। इसी रोल को कुछ साल बाद 'चोर के घर चोर' (1978) फ़िल्म में और आगे ले जाया गया, जैसा इन दिनों सीक्वेल फ़िल्मों में किया जा रहा है। उनके कॅरियर की यादगार फ़िल्में थीं- 'गोलमाल' (1979), 'अंगूर' (1982) तथा 'रंग बिरंगी' (1983)। बासु चटर्जी, ऋषिकेश मुखर्जी, गुलज़ार जैसे संवेदनशील निर्देशकों की फ़िल्मों में काम करने से देवेन को पुरस्कार भी मिले और प्रतिष्ठा भी। शेक्सपीयर के मशहूर नाटक 'कॉमेडी ऑफ़ एरर्स' पर भारत में कई फ़िल्में बनी हैं, जिनमें गुलज़ार निर्देशित 'अंगूर' सर्वोत्तम मानी जाती है। इन फ़िल्मों के अलावा भी देवेन वर्मा ने कई फ़िल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं और दर्शकों को तनाव मुक्त किया। उन्होंने कॉमेडी करने के लिए अश्लीलता का कभी सहारा नहीं लिया और हमेशा अपने संवाद बोलने के अंदाज़और बॉडी लैंग्वेज के जरिये दर्शकों को हंसाया। उनके परदे पर आते ही दर्शक हंसने के लिए तैयार हो जाते थे

📽️प्रमुख फ़िल्में
देवेन वर्मा की प्रमुख फ़िल्में
फ़िल्म वर्ष फ़िल्म वर्ष
अनुपमा 1966 खामोशी 1970
गुड्डी 1971 बुड्ढा मिल गया 1971
मेरे अपने 1971 अन्नदाता 1972
धुंध 1973 कोरा कागज 1974
चोरी मेरा काम 1975 कभी कभी 1976
चोर के घर चोर 1978 गोलमाल 1979
लोक परलोक 1979 सौ दिन सास के 1980
जुदाई 1980 कुदरत 1981
ले‍डिस टेलर 1981 सिलसिला 1981
अंगूर 1982 रंग बिरंगी 1983
झूठी 1986 चमत्कार 1992
क्या कहना 2000 खट्टा मीठा 1977
देवेन वर्मा बड़े पर्दे पर आख़िरी बार 'कलकत्ता मेल' फ़िल्म में नजर आए थे। मशहूर कॉमेडी फ़िल्म 'अंदाज़ अपना अपना' में उन्होंने आज के सुपर स्टार आमिर ख़ान के पिता की भूमिका निभाई थी।

सम्मान और पुरस्कार
1975 - 'चोरी मेरा काम' - फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता।
1982 - 'अंगूर' - फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता।
1979 - 'चोर के घर चोरी' - फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता।
1980 - 'जुदाई' - फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के लिए नामांकित किया गया।
निधन
देवेन वर्मा का निधन 77 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से #02dic  दिसम्बर, 2014 को हुआ

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...