सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

सैयद वाजिद हुसैन रिज़वी

अभिनेता पटकथा लेखक एवं शायर आगा जानी कश्मीरी के जन्मदिन पर हार्दिक श्रद्धांजलि

सैयद वाजिद हुसैन रिज़वी 
🎂 जन्म 16 अक्टूबर 1908  ⚰️27 मार्च 1998
जिन्हें उनके फ़िल्मी स्क्रीन नाम आगा जानी कश्मीरी के नाम से बेहतर जाना जाता है, एक भारतीय पटकथा लेखक अभिनेता और उर्दू कवि थे

उन्होंने पहली भारतीय सिनेमाई ब्लॉकबस्टर किस्मत (1943) से लेकर पाल्मे डी'ओर नामांकित मुझे जीने दो (1963) और नया जमाना (1971) तक कई क्लासिक फिल्मों के लिए एक लेखक के रूप में बॉलीवुड फिल्मों में काम किया उन्हें साहित्यिक उर्दू में अपने संवाद लिखने के लिए जाना जाता था , जो अंततः 1970 के दशक में सलीम-जावेद द्वारा अधिक बोलचाल की शैली को लोकप्रिय बनाने के बाद प्रचलन से बाहर हो गया

आगा जानी कश्मीरी का जन्म 16 अक्टूबर 1908 को लखनऊ , उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था प्रारंभिक बॉलीवुड फिल्म, शान ए सुभान (1933) (विभिन्न नामों से शान ए सुभान और शेन सुभान ) में अभिनय करने के लिए वह अपनी किशोरावस्था में घर से भाग गए थे कुछ हद तक, वह अपने पहले चचेरे भाई, लखनऊ के नवाब कश्मीरी से प्रेरित थे, जो शुरुआती भारतीय सिनेमा में सबसे प्रसिद्ध चरित्र अभिनेता थे, जिन्होंने यहूदी की लड़की (यहूदी की बेटी) जैसी हिट फ़िल्में दीं, जिसमें नवाब ने अभिनय किया था। एक बुजुर्ग यहूदी. इसके बाद, आगा जानी कलकत्ता लौट आए , कुछ छोटी भूमिकाएँ और कुछ मुख्य भूमिकाएँ कीं, जिनमें से दो बेगम अख्तर के साथ थीं । उन्होंने जिन तीन फिल्मों में अभिनय किया उनमें मिस मनोरमा और अनोखी अदा और भाभी थीं - ये तीनों फिल्में 1930 के दशक की थीं। 

उर्दू में उनकी साहित्यिक परवरिश को देखते हुए - वह प्रसिद्ध उर्दू कवि आरज़ू लखनवी के शिष्य थे और उन्होंने उर्दू साहित्य में स्कूली शिक्षा प्राप्त की थी - कश्मीरी फिल्म स्टूडियो बॉम्बे टॉकीज़ में शामिल हो गए, हिमांशु राय के साथ पटकथा लेखन सीखा , और 1930 के दशक की शुरुआत में अपनी पहली फिल्म लिखी। इसका निर्देशन जर्मन निर्देशक फ्रांज ओस्टेन ने किया था , जो उस समय बॉम्बे टॉकीज़ में काम करते थे। वचन (1938) नामक फिल्म सफल साबित हुई और कश्मीरी ने 50 से अधिक फिल्में लिखीं।

बॉम्बे (अब मुंबई ) में वह और उनकी पत्नी अपने बेटों ज़ुहैर कश्मीरी और सरवर कश्मीरी के साथ रहते थे। उन्होंने बॉलीवुड निर्माता-निर्देशकों के लिए लिखा, जिनमें सुबोध मुखर्जी, शशधर मुखर्जी, सुनील दत्त , मेहबूब खान , बॉम्बे टॉकीज के हिमांशु राय , फ्रांज ओस्टेन, प्रमोद चक्रवर्ती शामिल थे ; और अभिनेता अशोक कुमार , वीना, देविका रानी , ​​नूरजहाँ , सुरैया , साधना, सायरा बानो , जॉय मुखर्जी , शम्मी कपूर, दिलीप कुमार, राज कपूर और निम्मी 

आगा जानी कश्मीरी की मृत्यु 27 मार्च 1998 को हुई। उनके बेटे ज़ुहैर कश्मीरी कनाडा में पत्रकार हैं।

फिल्में 

नया ज़माना (1971) (लेखक)
परवाना (1971) (संवाद और पटकथा)
तुमसे अच्छा कौन है (1969) (संवाद) 
लव इन टोक्यो (1966) (संवाद) 
अप्रैल फ़ूल (1964) (संवाद)
ग़ज़ल (1964) (लेखक) 
ज़िद्दी (1964) (संवाद) 
मुझे जीने दो (1963) (लिखित) 
ये रास्ते हैं प्यार के (1963) (लिखित)
जंगली (1961) (संवाद) 
लव इन शिमला (1960) (संवाद पटकथा) 
चोरी चोरी (1956) (संवाद) (पटकथा) 
अमर (1954) (संवाद)
औरत (1953) (पटकथा)
मल्किन (फ़िल्म) (1950) (पटकथा/संवाद)
अनोखी अदा (1948) (पटकथा और संवाद)
चंद्रलेखा (1948) (संवाद)
तक़दीर (1943) (पटकथा/संवाद)
नजमा (1943) (पटकथा/संवाद)
अनमोल घड़ी (1946) (लेखक) 
हुमायूँ (1945) (लेखक)
लाल हवेली (1945) (संवाद) 
वचन (1938) (पटकथा)

बुधवार, 27 सितंबर 2023

पी जयराज

पूरा नाम पैदी जयराज
प्रसिद्ध नाम पी जयराज
🎂जन्म 28 सितम्बर, 1909
जन्म भूमि करीमनगर, आंध्र प्रदेश
⚰️मृत्यु 11 अगस्त, 2000
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
संतान पाँच (दो पुत्र दिलीप, जयतिलक और तीन पुत्रियाँ जयश्री, दीपा एवं गीता)
कर्म भूमि मुम्बई
कर्म-क्षेत्र अभिनेता, निर्माता-निर्देशक
मुख्य फ़िल्में 'हमारी बात', 'नई कहानी', 'शिकारी', 'रायफल गर्ल', 'भाभी' आदि।
शिक्षा स्नातक
विद्यालय वुड नेशनल कॉलेज, हैदराबाद
पुरस्कार-उपाधि दादा साहब फाल्के पुरस्कार
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाई अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाईं।
पी. जयराज (पूरा नाम- 'पैदी जयराज', अंग्रेज़ी: Paidi Jairaj, जन्म: 28 सितम्बर, 1909; मृत्यु: 11 अगस्त, 2000) हिन्दी फ़िल्म जगत् के एकमात्र ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने मूक फ़िल्मों के दौर से लेकर वर्तमान दौर तक की अनेक फ़िल्मों में काम किया। हिन्दी सिनेमा के पर्दे पर सर्वाधिक राष्ट्रीय और ऐतिहासिक नायकों को जीवित करने का कीर्तिमान इसी कलाकार के साथ जुड़ा है। नौशाद जैसे महान् संगीतकार को फ़िल्मों में ब्रेक देने का श्रेय भी पी. जयराज को ही जाता है। उनकी ज़िंदगी हिन्दी सिने जगत् के इतिहास के साथ-साथ चलती हुई, एक सिनेमा की कहानी जैसी थी।

जीवन परिचय

जयराज का जन्म 28 सितम्बर, 1909 को निजाम स्टेट के करीमनगर ज़िले में हुआ था। 'पाइदीपाटी जैरुला नाइडू' उनका आन्ध्रीय नाम था। हैदराबाद में पले बड़े हुए जिससे उर्दू भाषा पर पकड़ अच्छी थी, वो काम आयी। उनके पिताजी सरकारी दफ्तर में लेखाजोखा देखा करते थे। उनकी प्रारंम्भिक शिक्षा हैदराबाद के रोमन कैथोलिक स्कूल में हुई। फिर तीन साल के लिए उन्हें 'वुड नेशनल कॉलेज' के बॉडिंग हाउस में पढ़ाया गया जहां से उन्होंने संस्कृत की शिक्षा ली। फिर हैदराबाद के 'निजाम हाईस्कूल' में उर्दू पढी। बी. एस. सी. करने के बाद नेवी में जाना चाह्ते थे किंतु उनके बडे भाई सुन्दरराज इंजीनिय्ररिंग की पढाई के लिए लंदन भेजना चाह्ते थे। उनकी माताजी बड़े भाई को ज्यादा प्यार देतीं थीं और उनकी इच्छा थी इंग्लैंड जाकर पढाई करने की जिसका परिवार ने विरोध किया जिससे नाराज होकर, युवा जयराज, किस्मत आजमाने के लिए सन् 1929 में मुम्बई आ गये। उस समय उनकी उम्र 19 वर्ष थी।

समुन्दर के साथ पहले से बहुत लगाव था सो, डॉक यार्ड में काम करने लगे ! वहाँ उनका एक दोस्त था जिसका नाम "रंग्या" था उसने सहायता की और तब, पोस्टर को रंगने का काम मिला जिससे स्टूडियो पहुंचे। उनकी मजबूत कद काठी ने जल्द ही उन्हें निर्माता की आंखों में चढ़ा दिया। महावीर फोटोप्लेज़ में काम मिला। उस समय चित्रपट मूक थे। कई जगह काम, ऐक्टर के बदले खड़े डबल का मिला, पर बाद में मुख्य भूमिकाएँ भी मिलने लगीं। भाभा वारेरकर उनके आकर्षक और सौष्ठव शरीर को देखकर उनके व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म में नायक की भूमिका के लिए चुन लिया। दुर्भाग्य से यह फ़िल्म बीच में ही बंद हो गई क्योंकि वारेरकर का अपने पार्टनर के साथ मनमुटाव हो गया था।

बतौर सहायक निर्देशक
भायखाला स्थित स्टुडियो में निर्देशक नागेन्द्र मजूमदार के पास उन्हें 'सहायक निर्देशक की नौकरी मिल गई। उनके साथ निर्देशन के अलावा संपादन, सिने-छांयाकन आदि का कार्य भी सीखा। दिलीप कुमार की पहली फ़िल्म "प्रतिमा" का निर्देशन जयराज ने किया था।

बतौर निर्देशक
पी. जयराज ने फ़िल्मों के निर्देशन का काम भी किया जिसमें बतौर निर्देशक पहली फ़िल्म थी-'प्रतिभा', जिसकी निर्मात्री देविका रानी थीं।

अभिनय की शुरूआत
फ़िल्मों में बतौर अभिनेता वर्ष 1929 में नागेन्द्र मजूमदार ने ही प्रथम फ़िल्म 'जगमगाती जवानी' में ब्रेक दिया। जिसमें माधव काले नायक थे और जयराज सहायक चूंकि माधव काले को घुड़सवारी और फाइटिंग नहीं आती थी, लिहाजा जयराज ने मास्क पहनकर उनका भी काम किया। जिसके मुख्य कलाकार माधव केले के स्टंट सीन भी उन्होंने ही किए थे। उसके बाद 'यंग इन्डिया पिक्चर्स' ने 35 रुपये प्रतिमाह, 3 वक्त का भोजन और 4 अन्य लोगों के साथ गिरगाम मुम्बई में रहने की सुविधा वाला काम दिया। अब जीवन की गाड़ी चल निकली। 1930 में "रसीली रानी" फ़िल्म बनी। माधुरी उनकी हिरोइन थीं। उसके बाद जयराज 'शारदा फ़िल्म कम्पनी' से जुड़े। 35 रुपये से 75 रुपये मिलने लगे। जेबुनिस्सा हिरोइन थीं जो हिन्दुस्तानी ग्रेटा के नाम से मशहूर थीं और जयराज जी गिल्बर्ट थे हिन्दुस्तान के। (Anthony Hope's की फ़िल्म 'द प्रिज़नर ऑफ़ जेंडा' ही हिन्दी फ़िल्म "रसीली रानी" के रूप में बनी थी) बतौर नायक उनकी पहली फ़िल्म 'रसीली रानी' 1929 में प्रदर्शित हुई माधुरी उनकी नायिका थीं। 'नवजीवन फ़िल्म्स' के बैनर तले बनी नागेन्द्र मजूमदार द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म बहुत सफल रही थी। मूक फ़िल्मों के दौर में वह फ़िल्म कई सिनेमाघरों में पांच सप्ताह चली थी जो उन दिनों बहुत बड़ी बात थी। मूक फ़िल्मों में तो जयराज के नाम की धूम मची हूई थी।

बोलती फ़िल्मों का नया दौर
1931 में जब 'आलम आरा' से बोलती फ़िल्मों का दौर शुरू हुआ तो उन्होंने भी बोलती फ़िल्मों के अनुरूप खुद को ढाला। उनकी पहली बोलती फ़िल्म थी 'शिकारी'। 1932 में प्रदर्शित इस फ़िल्म में जयराज ने एक बौद्ध भिक्षुक की भुमिका निभाई थी और सांप, बाघ, शेर जैसे हिंसक जानवरों के साथ लड़ने के दृश्य दिए। बोलती फ़िल्म के साथ संगीत शुरू हुआ। कई कलाकार प्ले बैक भी देने लगे पर 1935 से दूसरे गाते और कलाकार सिर्फ़ होंठ हिलाते जिससे आसानी हो गयी। अब सिनेमा संगीतमय हो गया। हमजोली फ़िल्म में नूरजहाँ और जयराज जी ने काम किया था। राइफल गर्ल, हमारी बात आदि फ़िल्म मिलीं। जयराज की लोकप्रियता देखकर 'बाम्बे टॉकीज' के मालिक हिमांशु राय ने अपनी कंपनी की फ़िल्म 'भाभी' के लिए उन्हें बतौर नायक अनुबंधित किया, जिससे फ़िल्म-जगत् में सनसनी फैल गई। तब 'बाम्बे टॉकीज' बाहर के कलाकारों को अपनी फ़िल्म में काम नहीं देता था। फांज आस्टिन द्वारा निर्देशित वह फ़िल्म 'भाभी' बहुत सफल रही। मुम्बई में उस फ़िल्म ने रजत जयंती मनाई थी तो कलकत्ता में वह 80 सप्ताह चली थी। फिर आयी 'स्वामी' फ़िल्म, जिसमें सितारा देवी थीं। हातिम ताई, तमन्ना, उस समय के सिनेमा थे। जयराज ने मराठी, गुजराती फ़िल्म भी कीं। अपने फ़िल्मी कैरियर में बतौर अभिनेता तो लगभग 300 फ़िल्मों में अभिनय किया जिनमें से 160 फ़िल्मों में नायक की भूमिकाएँ निभाईं। बतौर नायक उनकी अंतिम फ़िल्म थी-खूनी कौन मुजरिम कौन', जो वर्ष 1965 में प्रदर्शित हुई थी। उसके बाद उन्होंने उम्र की मांग के अनुसार चरित्र भूमिकाएँ निभानी शुरु कर दीं। महात्मा गांधी की हत्या पर आधारित अमरीकी फ़िल्म- 'नाईन आवर्स टू रामा', मार्क रोब्सन निर्मित में जी. डी. बिड़ला की भूमिका निभाने का भी अवसर मिला जो आज तक हिन्दुस्तान में प्रदर्शित नहीं हो पायी है। माया फ़िल्म में आई. एस. जौहर के साथ काम किया। यह दोनों अमरीकी फ़िल्में हैं। इन्डो-रशियन फ़िल्म 'परदेसी' में भी काम किया। दो बार दुर्घट्ना ग्रस्त हो जाने के कारण चलने फिरने में तकलीफ होने लगी तो फ़िल्मों से दूरी बनानी शुरु कर दी।

बतौर निर्माता
एक फ़िल्म जयराज जी ने बनाना शुरू किया था जिसमें नर्गिस, भारत भूषण और ख़ुद वे काम कर रहे थे। फ़िल्म का नाम था सागर। उनका बहुत नाम था सिने जगत में और कई सारे निर्माता, निर्देशक, कलाकार उन्हें जन्मदिन की बधाई देने सुबह से उनके घर पहुँचते थे। 1951 में सागर फ़िल्म बनायी, जो लॉर्ड टेनिसन की "इनोच आर्डेन" पर आधारित कथा थी। वह निष्फल हुई क्योंकि जयराज ने अपना खुद का पैसा लगाया था और उन्होंने कुबूल किया था कि व्यवासायिक समझ उनमें नहीं थी।

परिवार
1939 में अपने घनिष्ठ मित्र पृथ्वीराज कपूर के कहने पर उन्होंने सावित्री नाम की युवती से विवाह कर लिया। तब उन्होंने ही सावित्री के कन्यादान की रस्म निभाई थी। 1942 में उनका वेतन 200 रुपये प्रतिमाह से बढ़कर 600 रुपये प्रतिमाह हो गया। उनकी 5 संतान थीं, दो पुत्र, दिलीप राज व जयतिलक और तीन पुत्रियाँ, जयश्री, दीपा एवं गीता। सबसे बड़े दिलीप राज, जो ऐक्टर बने। उनके द्वारा अभिनीत के. ए. अब्बास की फ़िल्म "शहर और सपना" को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला था। जयराज का दूसरा पुत्र अमेरिका में रहता है। दूसरी बेटी थीं जयश्री, उनका विवाह राजकपूर की पत्नी कृष्णा के छोटे भाई भूपेन्द्रनाथ के साथ हुआ था। तीसरी बेटी थीं दीपा, फिर थी गीता सबसे छोटी।

मुख्य फ़िल्में
सन् 1938 - रायफल गर्ल
सन् 1939 - भाभी
सन् 1942 - खिलौना
सन् 1942 - मेरा गाँव
सन् 1943 - नई कहानी
सन् 1954 - बादबान
सन् 1954 - मुन्ना
सन् 1956 - अमरसिंह राठौड़
सन् 1956 - हातिमताई
सन् 1957 - परदेसी
सन् 1959 - चार दिल चार राहें
सन् 1962 - रजिया सुल्तान
पुरस्कार
50 के दशक में पी. जयराज को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। 1982 में उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भी मिला।

निधन
जयराज का निधन लीलावती अस्पताल, मुम्बई में ⚰️11 अगस्त सन् 2000 को हुआ और हिन्दी सिने संसार का मूक फ़िल्मों से आज तक का मानो एक सेतु ही टूट कर अदृश्य हो गया। 11 मूक चित्रपट और 200 बोलती फ़िल्मों से हमारा मनोरंजन करने वाले एक समर्थ कलाकार ने इस दुनिया से विदा ले ली

गुरुवार, 21 सितंबर 2023

अजरा

#अज़रा
#जन्म21सितम्बरमुम्बई
अभिभावक पिता- नानूभाई वक़ील, माता- सरोजिनी।
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'मदर इण्डिया', 'जंगली', 'गंगा यमुना', 'भारत की बेटी’, ‘संसार नैया’, ‘दीपक महल’, ‘संस्कार’, ‘ताजमहल’, ‘नया ज़माना’ और ‘सर्कस किंग’ आदि।
प्रसिद्धि भारतीय अभिनेत्री

 1958 में अज़रा जी की फ़िल्म 'टैक्सी 555' प्रदर्शित हुई। प्रदीप कुमार और शकीला की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फ़िल्म में वह सहनायिका थीं। 1959 में बनी फ़िल्म ‘घर घर की बात’ में वे नायिका बनीं। इस फ़िल्म का निर्माण उनके मौसा और सलीम शाह के पिता रमणीकलाल शाह ने किया था।
दिल्ली के रहने वाले शेख इमामुद्दीन और उनकी पत्नी मुनव्वर जहां के सात बच्चों में से दो बेटियां रोशनजहां उर्फ़ रानी और उनसे छोटी इशरतजहां 1930 और 1940 के दशक की फ़ैंटेसी फ़िल्मों की स्टार अभिनेत्रियां थीं। रोशनजहां का स्क्रीननेम ‘सरोजिनी’ था। साल 1934 में प्रदर्शित हुई फ़िल्म ‘दीवानी’ से फ़िल्मों में कदम रखने वाली सरोजिनी ने क़रीब 12 साल के कॅरियर में ‘भारत की बेटी’, सुंदरी’, ‘मधु बंसरी’, ‘संसार नैया’, ‘सन ऑफ़ अलादीन’, ‘दीपक महल’, ‘हातिमताई की बेटी’, ‘जादुई कंगन’, ‘संस्कार’, ‘जादुई बंधन’, ‘ताजमहल’, ‘फ़रमान’, ‘नया ज़माना’, ‘श्रीकृष्णार्जुन युद्ध’ और ‘सर्कस किंग’ जैसी फ़िल्मों में काम किया। उसी दौरान उन्होंने फैंटेसी फ़िल्मों के लिए मशहूर निर्माता-निर्देशक नानूभाई वक़ील के साथ गुप्त विवाह भी कर लिया था। अज़रा इन्हीं सरोजिनी और नानूभाई वक़ील की बेटी हैं। अज़रा जी के पिता नानूभाई वकील का निधन 19 दिसम्बर 1980 को हुआ और उनकी मां सरोजिनी 1993 में गुज़रीं।

उधर ‘इंदुरानी’ के नाम से 1936 में बनी मराठी फ़िल्म ‘सावित्री’ से कॅरियर शुरू करने वाली इशरतजहां ने अगले 12 सालों में ‘बुलडॉग’, ‘मेरी भूल’, ‘मि.एक्स’, ‘सुनहरा बाल’, ‘भेदी कुमार’, ‘चश्मावाली’, ‘मिडनाईट मेल’, ‘स्वास्तिक’, ‘हातिमताई की बेटी’, ‘जादुई कंगन’, ‘थीफ़ ऑफ़ तातार’, ‘अलादीन लैला’, ‘बुलबुले बग़दाद’, ‘ताजमहल’ और ‘ज़ेवर’ जैसी कई फ़िल्में कीं। इंदुरानी का विवाह निर्माता-निर्देशक रमणीकलाल शाह से हुआ था। सलीम शाह इन्हीं इंदुरानी के बेटे हैं।
अजरा छठवीं तक की पढ़ाई  सांताक्रुज़ के सेंट टेरेसा कॉन्वेन्ट हाईस्कूल से की और फिर साल 1950 में मैं अपनी नानी के पास दिल्ली चली गयी। क़रीब 5 साल दिल्ली में रहकर उन्होंने पहाड़ी भोजला-चितलीक़बर-जामा मस्जिद के सेंट फ़्रांसिस स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी की और फिर 1954-1955 में वापस मुम्बई लौट आयी।"

बुधवार, 20 सितंबर 2023

रीमा सेन

रिमी सेन
स्क्रीन नाम रिमी सेन
के रूप में जन्मे शुभमित्र सेन
पेशा अभिनेत्री

🎂जन्म21सितम्बर1981
जन्म (शहर) कलकत्ता, पश्चिम बंगाल

राष्ट्रीयता भारतीय
पिता राजा सेन
माँ पापिया सेन
उल्लेखनीय कार्य
पारोमिटर एक दिन (2000),
फिर हेरा फेरी (2006),
गोलमाल फन अनलिमिटेड (2006),
धूम 2 (2006),
जॉनी गद्दार (2007)
रिमी की पहली हिन्दी फिल्म हंगामा थी। उसके बाद वो बाग़बान में छोटे से रोल में दिखीं। उनकी कुछ सफल फिल्में हैं:- धूम, दीवाने हुए पागल, फिर हेरा फेरी और गोलमाल। बिग बॉस 9 में वो हिस्सा ले चुकी है। 2017 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली।
📽️
2008 दे ताली 
2007 जॉनी गद्दार 
2007 हैटट्रिक
2006 फिर हेरा फेरी 
2006 धूम 2 
2006 गोलमाल 
2005 क्योंकि माया 
2005 गरम मसाला 
2005 दीवाने हुए पागल 
2004 धूम स्वीटी 
2003 हंगामा 
2003 बाघबान

करीना कपूर अभिनेत्री

#करीनाकपूर
के रूप में जन्मे करीना कपूर
अभिनेत्री

🎂जन्म_ 21_सितम्बर_1980
 बम्बई, महाराष्ट्र
राष्ट्रीयता भारतीय
जीवनसाथी सैफ अली खान 2012
पिता रणधीर कपूर
माँ बबीता कपूर
📽️
(हिन्दी फ़िल्में) रिफ्यूजी (2000),
कभी खुशी कभी गम (2001),
जब वी मेट (2007),
कुर्बान (2009),
उड़ता पंजाब (2016),
3 इडियट्स (2009),
बजरंगी भाईजान (2015)
कपूर फ़िल्म परिवार में जन्मी करीना ने अभिनय की शुरुआत साल 2000 में रिलीज़ हुई फ़िल्म रिफ्युज़ी के साथ की। इस फ़िल्म में अपने अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट फीमेल डेब्यू यानि उस साल अपने अभिनय जीवन की शुरुआत करने वाली अभिनेत्रियों में से सर्वश्रेष्ठ अभिनत्री का पुरस्कार भी मिला। साल 2001में, अपनी दूसरी फ़िल्म मुझे कुछ कहना है रिलीज़ होने के साथ ही, कपूर को अपनी पहली व्यावसायिक सफलता मिली। इसके बाद इसी साल आई करन जौहर की नाटक से भरपूर फ़िल्म कभी खुशी कभी ग़म में भी करीना नज़र आयीं। ये फ़िल्म उस साल विदेशों में सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली भारतीय फ़िल्म बन गई और साथ ही करीना के लिए ये तब तक की सबसे बड़ी व्यावसायिक सफलता थी।
करीना कपूर ने अन्य दूसरी प्रतिबद्धताओं के लिए भी समय निकाला, वो मानवतावादी से जुड़े कार्यक्रमों से लेकर स्टेज शो में भी भाग लेती रहीं साल 2002 में,हार्टथ्रोब्स कार्यक्रम में कपूर ने अपना पहला वर्ल्ड टूर किया, उनके साथ हृथिक रोशन, करिश्मा कपूर (Karisma Kapoor), अर्जुन रामपाल (Arjun Rampal) और आफताब शिवदासानी (Aftab Shivdasani) भी थे इस शो का प्रदर्शन पूरे अमेरिका और कनाडा में किया और ये समारोह सफल रहा।

📽️अन्य फिल्मे
रिफ्यूजी 2000
मुझे कुछ कहना है 2001
यादें 2001
अजनबी 2001
अशोका 2001
कभी खुशी कभी ग़म 2001
मुझसे दोस्ती करोगे 2002
जीना सिर्फ मेरे लिये 2002
Talaash: The Hunt Begins... 2003
खुशी 2003
मैं प्रेम की दीवानी हूँ 2003
एलओसी कारगिल 2003
चमेली 2004
युवा 2004
देव2004
फ़िदा 2004
ऐतराज़ 2004
हलचल 2004
बेवफ़ा 2005
क्योंकि 2005
दोस्ती: फ्रेंड्स फॉरएवर 2005
36 चाइना टाऊन 2006
चुप चुप के 2006
ओमकारा 2006
डॉन 2006 
क्या लव स्टोरी है 2006
क्या लव स्टोरी है 2007
जब वी मेट 2006
हल्ला बोल 2008
टशन 2008
रोडसाइड रोमियो 2008
गोलमाल रिटर्नस 2008
लक् बाई चांस 2009
बिल्लू 2009
कमबख्त इश्क 2009
मैं और मिसेस खन्ना 2009
थ्री ईडियट्स 2009
मिलेंगे मिलेंगे ([:en:Milenge Milenge Milenge Milenge]) 2010
बाँडीगाड 2011
वीरे दी वेडिंग 208
लाल सिंह चड्ढा 2020

गुलशन ग्रोवर

गुलशन ग्रोवर हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। व्यक्तिवत जीवन गुलशन ग्रोवर का जन्म 

🎂21सितंबर 1955 में नई दिल्ली 

पिता कर्ण सिंह ग्रोवर व माता रामराखी सिंह ग्रोवर थी । इनके पत्नी कशिश ग्रोवर व बेटे संजय ग्रोवर है
पत्नी: कशिश ग्रोवर (विवा. 2001–2002), फिलोमिना ग्रोवर (विवा. 1998–2001)
बच्चे: संजय ग्रोवर
भाई: रीता ग्रोवर, रमेश ग्रोवर, सोनू ग्रोवर
माता-पिता: बिशम्बर नाथ ग्रोवर, रामराखी ग्रोवर
📽️
प्रमुख फिल्में
2007 मैरीगोल्ड 
2007 फूल एन फाइनल 
2006 गैंगस्टर 
2006 मेरे जीवन साथी 
2006 टॉम, डिक एंड हेरी 
2006 एन्थनी कौन है? 
2006 तथास्तु 
2006 शादी से पहले 
2006 फैमिली: खून के रिश्ते 
2005 द हैंगमैन 
2005 पद्मश्री लालू प्रसाद
2005 दस 
2004 मेरी बीवी का जवाब नहीं 
2004 सुनो ससुर जी 
2004 दोबारा 
2004 टार्ज़न द वण्डर कार 
2004 एक से बढ़कर एक 
2003 फंटूश 
2003 जिस्म 
2003 जोड़ी क्या बनाई वाह वाह रामजी 
2003 बूम सलीम 
2003 खंजर 
2003 बनाना ब्रदर्स 
2003 पाप  
2003 चुरा लिया है तुमने
2003 एक और एक ग्यारह 
2003 तीन दीवारें 
2003 धुंध इंस्पेक्टर
2003 परवाना 
2003 खेल 
2003 तलाश 
2002 लीला जय 
2002 हथियार 
2002 ये मोहब्बत है 
2002 दिल विल प्यार व्यार 
2001 ये ज़िन्दगी का सफर 
2001 बस इतना सा ख्वाब है
2001 लज्जा 
2001 मोक्ष 
2000 गैंग 
2000 आगाज़ 
2000 शिकार 
2000 दीवाने 
2000 खिलाड़ी 420 
2000 बाग़ी 
2000 हेरा फेरी 
2000 शिकारी 
1999 आया तूफान 
1999 सौतेला 
1999 कारतूस 
1999 इन्टरनेशनल खिलाड़ी 
1999 हिन्दुस्तान की कसम
1999 हम तुम पे मरते हैं 
1998 यमराज 
1998 किला 
1998 बारूद 
1998 दो हज़ार एक 
1998 हफ़्ता वसूली 
1998 अंगारे 
1998 सर उठा के जियो 
1998 ज़ुल्म-ओ-सितम 
1998 डुप्लीकेट 
1998 अर्थ 
1997 घूँघट 
1997 शेर-ए-हिन्दुस्तान 
1997 शपथ राजेश्वर 
1997 राजा की आयेगी बारात 
1997 गैम्बलर 
1997 कौन सच्चा कौन झूठा 
1997 ज़मीर रंजीत
1997 येस बॉस 
1997 भाई भाई 
1997 कहर 
1997 सनम 
1997 मिस्टर एंड मिसेज़
1996 दिलजले 
1996 मुकदमा 
1996 हिम्मत रंजीत 
1996 ज़ोरदार 
1996 नमक 
1995 रंगीला 
1995 अहंकार 
1995 मैदान-ए-जंग 
1995 राम जाने 
1995 कर्तव्य 
1995 क्रिमिनल 
1995 मिलन 
1995 रघुवीर 
1995 इम्तिहान 
1995 नाजायज़ 
1995 सबसे बड़ा खिलाड़ी 
1994 पहला पहला प्यार 
1994 आ गले लग जा 
1994 दिलवाले 
1994 कानून राजा 
1994 ज़माने से क्या डरना 
1994 विजयपथ 
1994 ईना मीना डीका
1994 राजा बाबू 
1994 अमानत 
1994 इन्साफ अपने लहू से 
1994 दुलारा 
1994 बेताज बादशाह 
1994 यार गद्दार 
1994 नाराज़ 
1994 क्रान्ति क्षेत्र 
1994 आतिश 
1994 आग 
1994 बेटा हो तो ऐसा 
1994 घर की इज्जत 
1994 मोहरा 
1994 चीता 
1994 आओ प्यार करें 
1993 चन्द्रमुखी 
1993 तड़ीपार 
1993 फूल और अंगार 
1993 बड़ी बहन 
1993 परवाने 
1993 हस्ती 
1993 शक्तिमान 
1993 अनाड़ी  
1993 सर 
1993 आँखें 
1992 दिल ही तो है 
1992 शोला और शबनम
1992 नसीबवाला विनोद 
1992 दुश्मन ज़माना 
1992 त्यागी 
1992 माँ 
1992 पुलिस ऑफिसर 
1992 साहेबज़ादे 
1992 महबूब मेरे महबूब 
1992 जिगर 
1992 विरोधी 
1992 विश्वात्मा 
1992 अधर्म 
1991 सपनों का मन्दिर 
1991 नामचीन 
1991 जिगरवाला 
1991 पत्थर 
1991 भाभी 
1991 बंजारन
1991 कर्ज़ चुकाना है 
1991 स्वर्ग यहाँ नर्क यहाँ 
1991 शिकारी 
1991 कुर्बान 
1991 रणभूमि 
1991 त्रिनेत्र 
1991 दो मतवाले 
1991 सौदागर 
1990 बाप नम्बरी बेटा दस नम्बरी 
1990 अपमान की आग 
1990 महासंग्राम 
1990 तकदीर का तमाशा 
1990 रोटी की कीमत 
1990 नया खून 
1990 काली गंगा 
1990 मेरा पति सिर्फ मेरा है 
1990 दूध का कर्ज़
1990 प्यार के नाम कुर्बान 
1989 लव लव लव 
1989 निगाहें 
1989 जंगबाज़ 
1989 मिट्टी और सोना 
1989 जैसी करनी वैसी भरनी 
1989 सच्चे का बोलबाला 
1989 दो कैदी 
1989 राम लखन 
1989 हिसाब खून का 
1989 मुज़रिम 
1989 बड़े घर की बेटी 
1989 नाइंसाफी 
1989 कानून अपना अपना 
1989 ताकतवर 
1989 लड़ाई 
1989 ईश्वर 
1988 शिव शक्ति 
1988 कसम 
1988 वक्त की आवाज़ 
1988 हलाल की कमाई 
1988 आखिरी अदालत 
1988 दरिया दिल 
1988 गुनाहों का फ़ैसला 
1988 वीराना 
1988 मैं तेरे लिये 
1988 विजय 
1987 मेरा लहू 
1987 इनाम दस हज़ार 
1987 हवालात 
1987 सड़क छाप 
1987 सिंदूर 
1987 हिफ़ाज़त 
1987 प्यार के काबिल 
1987 आग ही आग 
1986 सिंहासन 
1986 मेरा हक 
1986 दिलवाला 
1986 आशियाना 
1986 जीवा 
1986 अल्ला रक्ख़ा 
1986 घर संसार 
1986 तीसरा किनारा 
1986 जाल बलराम 
1986 इंसाफ़ की आवाज़ 
1985 महागुरु 
1985 शिवा का इन्साफ 
1985 पैसा ये पैसा 
1985 मेरा जवाब 
1985 जान की बाज़ी 
1985 थ्री डी 
1984 अंदर बाहर 
1984 मशाल 
1984 सोनी महिवाल
1984 इंसाफ कौन करेगा 
1984 यह देश 
1983 सदमा 
1983 अवतार चंदन किशन 
1982 अर्थ  
1982 तहलका 
1981 सनसनी कबीले का पुरुष 
1980 हम पाँच

अनूप कुमार

अभिनेता अनूप कुमार की पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धाजंलि

कल्याण कुमार गांगुली उर्फ़ अनूप कुमार का
🎂जन्म  24 मार्च 1927 में हुआ था
⚰️20 सितंबर 1997
अनूप कुमार ने लगभग 75 फिल्मों में अभिनय किया था

अनूप कुमार का जन्म खंडवा, मध्य प्रांत और बरार (अब मध्य प्रदेश) में एक हिंदू बंगाली परिवार में हुआ था।  उनके पिता कुंजलाल गांगुली (गंगोपाध्याय) एक वकील थे और उनकी माँ गौरी देवी एक अमीर परिवार से सम्बन्ध रखती थीं।  अनूप कुमार चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर के थे, अन्य तीन अशोक कुमार (सबसे बड़े), सती देवी और किशोर कुमार (सबसे छोटे) थे।

अनूप कुमार को फिल्म चलती का नाम गाड़ी में उनकी भूमिका के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है।

20 सितंबर 1997 में उनका निधन हो गया
#24march
#20sep

भारत ईरान संबंध

भारत-ईरान संबंध भारत गणराज्य और ईरान इस्लामी गणराज्य के बीच द्विपक्षीय संबंध हैं । स्वतंत्र भारत और ईरान ने 15 मार्च 1950 को राजनयिक संबंध ...