शनिवार, 2 सितंबर 2023

अर्जन बाजवा

अर्जन बाजवा 

🎂जन्म 3 सितंबर 1979
एक भारतीय अभिनेता हैं जो हिंदी और धारावाहिक फिल्मों में अपने काम के लिए जाते हैं। उन्हें फ़िल्मों में दीपक के रूप में श्रेय दिया जाता है जहाँ से उनका अपना करियर शुरू हुआ था। 2004 की हिंदी फिल्म वो तेरा नाम था शुरुआत करने के बाद उन्होंने समीक्षकों द्वारा प्रशंसा की 2007 की फिल्म गुरु से बॉलीवुड में सफलता हासिल की। उन्होंने 2008 की फ़िल्म फ़ैशन में मुख्य भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें स्टारस्टस्ट दस्तावेज़ मिला।
बाजवा का जन्म 3 सितंबर 1979 को दिल्ली , भारत में बाजवा कबीले के एक पंजाबी जट्ट सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता सविंदरजीत सिंह बाजवा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से दिल्ली के पूर्व डिप्टी मेयर थे ।  बाजवा ने दिल्ली से वास्तुकला में डिग्री हासिल की है और तायक्वोंडो में ब्लैक बेल्ट हैं ।

फिल्मों में आने से पहले बाजवा एक सफल मॉडल थे और उन्होंने कई बड़े फैशन डिजाइनरों के लिए रैंप वॉक किया था।  टेलीविजन पर उनकी सफलता लक्स, वीट, फिएट पालियो, गोदरेज एसी आदि ब्रांडों के कई विज्ञापनों के साथ शुरू हुई। इन विज्ञापनों में उन्हें बॉलीवुड की कुछ प्रमुख अभिनेत्रियों जैसे ऐश्वर्या राय, कैटरीना कैफ और प्रीति जिंटा के साथ दिखाया गया ।

आख़िर
उन्होंने संपांगी (2001) से अपना तेलुगु डेब्यू किया और प्रेमालो पावनी कल्याण (2002) सहित कुछ तेलुगु फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई। वो तेरा नाम था से हिंदी में डेब्यू करने के बाद , बाजवा को बॉलीवुड में सफलता निर्देशक मणिरत्नम की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म गुरु से मिली, जिसमें उन्होंने अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय के साथ खलनायक की भूमिका निभाई थी । इसके बाद, उन्होंने मधुर भंडारकर की फिल्म फैशन में प्रियंका चोपड़ा के साथ मुख्य भूमिका निभाई. फिल्म ने उन्हें ब्रेकथ्रू परफॉर्मेंस के लिए स्टारडस्ट अवॉर्ड जीता, जबकि फैशन ने दो राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ-साथ फिल्मफेयर, आईफा, स्टार स्क्रीन और स्टारडस्ट अवॉर्ड्स जैसे कई पुरस्कार जीते। बाजवा ने नागार्जुन अक्किनेनी और तृषा के साथ तेलुगु फिल्म किंग में भी अभिनय किया । इसके बाद वह अनुष्का शेट्टी और सोनू सूद अभिनीत एक और तेलुगु फिल्म अरुंधति में दिखाई दिए , जो उस समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्मों में से एक बन गई।

इसके बाद बाजवा अजय देवगन की एक्शन कॉमेडी फिल्म सन ऑफ सरदार में नजर आए , जहां उनकी जोड़ी सोनाक्षी सिन्हा के साथ थी । उन्होंने इमरान हाशमी के साथ एक्शन थ्रिलर क्रुक (2010) और विद्या बालन के साथ बॉबी जासूस (2014) में भी अभिनय किया । वह अक्षय कुमार , इलियाना डिक्रूज और ईशा गुप्ता अभिनीत फिल्म रुस्तम में दिखाई दिए , जो अगस्त 2016 में रिलीज़ हुई थी। 2019 में, उन्हें संदीप वांगा की कबीर सिंह में देखा गया था जहाँ उन्होंने शाहिद कपूर की भूमिका निभाई थी।का भाई. वह शुरू में मुख्य अभिनेता के बड़े भाई की भूमिका निभाने से झिझक रहे थे, लेकिन वांगा के आग्रह पर उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया, जिनके लिए वह इस किरदार को निभाने के लिए एकमात्र विकल्प थे।

अभिनय के अलावा, बाजवा ने वर्ष 2007 में फिल्मफेयर अवॉर्ड्स (दक्षिण), 2010 और 2014 में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव गोवा समापन समारोह और जालंधर में कबड्डी विश्व कप उद्घाटन समारोह की मेजबानी की है। बाजवा ने 2014 और 2016 में पीटीसी पंजाबी फिल्म अवार्ड्स की भी मेजबानी की ।

मनोज जोशी

मनोज जोशी
🎂03 सितम्बर 1965
उनके पिता नवनीत जोशी थे और उनके छोटे भाई राजेश जोशी भी एक अभिनेता थे। ⚰️भाई: राजेश जोशी की 1998 में मृत्यु हो गई। जोशी उत्तरी गुजरात में हिम्मतनगर के पास अदपोदरा गांव के रहने वाले हैं ।
 हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। इन्होने अपना करियर मराठी थिएटर से आरम्भ किया था,साथ ही साथ इन्होने अपना योग्यदान गुजराती एवं हिन्दी थिएटर् में भी दिया। सन १९९८ से अब तक इन्होने ६० से अधिक फ़िल्मो में अभिनय किया है, जिनमें अधिकतर हास्य अभिनय है।
जन्म
अदापोदारा, तालुका : हिम्मतनगर,जिला: साबरकांठा जिला गुजरात, भारत
राष्ट्रीयता
भारतीय
उपनाम
मनोज जोशी
शिक्षा
ललित कला स्नातक
पेशा
अभिनेता, हास्य अभिनेता
प्रसिद्धि का कारण
चक्रवर्तीं अशोक सम्राट, भोपाल (फिल्म), देवदास (उपन्यास), धूम (2004 फ़िल्म), गुरु (२००७ फ़िल्म), रेडी(2011 फिल्म), भूल भुलैया (2007 फ़िल्म), भागम भाग (2006 फ़िल्म), विवाह (2006 फ़िल्म)

2015 
किस किसको प्यार करूँ || ||

2008 मेरे बाप पहले आप चिराग 
2007 भूल भुलैया 
2007 गुरु घनश्याम भाई 
2006 फिर हेरा फेरी कचरा सेठ 
2006 विवाह भगत 
2006 गोलमाल 
2006 चुप चुप के 
2006 भागम भाग 
2006 हमको दीवाना कर गये 
2005 मुंबई गॉडफ़ादर 
2005 क्योंकि 
2005 शिकार अमृत पाटील 
2005 गरम मसाला 
2004 धूम 
2004 हलचल 
2004 आन माणकराव 
2003 हंगामा 
2002 देवदास

विवेक ओब्राय

नाम :- विवेक ओबेरॉय
जन्मतिथि :-🎂03 सितम्बर 1976
ऊँचाई :- 1.78 मी
मिनी बायो:- विवेक ओबेरॉय का जन्म 3 सितंबर 1976 को हुआ था और उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज में पढ़ाई की थी। लंदन में एक अभिनेता की कार्यशाला में उन्हें किसी और ने नहीं बल्कि NYU के निदेशक ने देखा, जो (आश्चर्यजनक रूप से) विवेक को न्यूयॉर्क ले गए, जहां उन्होंने फिल्म अभिनय में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। भारत में अपने घर वापस आकर विवेक ने पटकथा लेखक के रूप में काम किया और उससे मिले पैसे से उन्होंने अपनी पहली कार खरीदी। लेकिन इस आकर्षक व्यक्ति को बड़ा ब्रेक तब मिला जब प्रसिद्ध फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने विवेक को अपनी गैंगस्टर फिल्म, कंपनी (2002) में एक भूमिका की पेशकश की। बॉलीवुड में किसी नवोदित कलाकार के लिए प्रवेश काफी असामान्य है, क्योंकि युवा अभिनेताओं के लिए आदर्श तब तक अच्छे प्रेमी लड़कों की भूमिका निभाना है जब तक कि फिल्म जगत में उनकी जगह सुरक्षित न हो जाए। विवेक नहीं. जाहिर तौर पर, राम गोपाल वर्मा कंपनी में विवेक को कास्ट करने के बारे में दूसरे विचार कर रहे थे क्योंकि उन्हें लगा कि विवेक एक गैंगस्टर के लिए बहुत प्यारे लग रहे थे - और उन्होंने उन्हें ऐसा बताया। विवेक, पीछे न हटने के लिए, मुंबई की मलिन बस्तियों में गया और अपना होमवर्क किया और कुछ हफ़्ते बाद चंदू गैंगस्टर के वेश में वर्मा के कार्यालय में घुस गया, मेज पर अपने पैर ऊपर उठाए, और अनुबंध प्राप्त कर लिया। वहाँ से सड़क चली गई ऊपर की ओर. कंपनी में विवेक का बेदाग प्रदर्शन - जिसमें उन्होंने बॉलीवुड के बिग बैड बॉय अजय देवगन, मिस बॉली मनीषा कोइराला और मलयालम सिनेमा के दादा मोहनलाल के साथ अभिनय किया - मीडिया को ओबेरॉय की प्रशंसा दिलाने के लिए पर्याप्त था। अगली पंक्ति में साइको-थ्रिलर रोड (2002) (कंपनी की सह-कलाकार और सह-नवागंतुक अंतरा माली के विपरीत), दम (2003) (जो बिना किसी निशान के डूब गई - दीया मिर्जा के विपरीत) और अगली बड़ी उपलब्धि, साथिया (2002) थी। ), रानी मुखर्जी के विपरीत। उन्होंने हाल ही में लंबे समय से प्रेमिका रही गुरप्रीत से सगाई की और फिर ब्रेकअप कर लिया। और वर्तमान में रानी मुखर्जी और ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ जुड़ा हुआ है। हाल ही में वह सलमान खान के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी (यानी प्रेस कॉन्फ्रेंस) कर सुर्खियों में आ गए।

प्यारे लाल

प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा
प्रसिद्ध नाम प्यारेलाल
🎂जन्म 3 सितम्बर, 1940
जन्म भूमि गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
कर्म भूमि मुंबई
कर्म-क्षेत्र संगीतकार
मुख्य रचनाएँ सावन का महीना, दिल विल प्यार व्यार, बिन्दिया चमकेगी, चिट्ठी आई है आदि
मुख्य फ़िल्में मिलन, शागिर्द, इंतक़ाम, दो रास्ते, सरगम, हीरो, नाम, तेज़ाब, खलनायक आदि
पुरस्कार-उपाधि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने सात बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का फ़िल्मफेयर पुरस्कार जीता।
नागरिकता भारतीय
प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा 
🎂जन्म: 3 सितम्बर, 1940
हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल में से एक हैं।

जीवन परिचय
प्यारेलाल का बचपन बेहद संघर्ष भरा रहा। उनकी माँ का देहांत छोटी उम्र में ही हो गया था। उनके पिता 'पंडित रामप्रसाद जी' ट्रम्पेट बजाते थे और चाहते थे कि प्यारेलाल वायलिन सीखें। पिता के आर्थिक हालात ठीक नहीं थे, वे घर घर जाते थे जब भी कहीं उन्हें बजाने का मौक़ा मिलता था और साथ में प्यारे को भी ले जाते। उनका मासूम चेहरा सबको आकर्षित करता था। एक बार पंडित जी उन्हें लता मंगेशकर के घर लेकर गए। लता जी प्यारे के वायलिन वादन से इतनी खुश हुईं कि उन्होंने प्यारे को 500 रुपए इनाम में दिए जो उस ज़माने में बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। वो घंटों वायलिन का रियाज़ करते। अपनी मेहनत के दम पर उन्हें मुंबई के 'रंजीत स्टूडियो' के ऑर्केस्ट्रा में नौकरी मिल गई जहाँ उन्हें 85 रुपए मासिक वेतन मिलता था। अब उनके परिवार का पालन इन्हीं पैसों से होने लगा। उन्होंने एक रात्रि स्कूल में सातवें ग्रेड की पढ़ाई के लिए दाख़िला लिया पर 3 रुपये की मासिक फीस उठा पाने की असमर्थता के चलते उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। मुश्किल हालातों ने भी उनके हौसले कम नहीं किए, वो बहुत महत्त्वाकांक्षी थे, अपने संगीत के दम पर अपने लिए नाम कमाना और देश विदेश की यात्रा करना उनका सपना था।

"मैंने संगीत सीखने के लिए एक संगीत ग्रुप (मद्रिगल सिंगर) जॉइन किया, पर वहां मुझे हिंदू होने के कारण स्टेज आदि पर परफोर्म करने का मौक़ा नहीं मिलता था। वो लोग पारसी और ईसाई वादकों को अधिक बढ़ावा देते थे। पर मुझे सीखना था तो मैं सब कुछ सह कर भी टिका रहा। पर मेरे पिता ये सब अधिक बर्दाश्त नहीं कर पाते थे। उन्होंने ख़ुद ग़रीब बच्चों को मुफ़्त में सिखाने का ज़िम्मा उठाया और वो उन्हें संगीतकार नौशाद साहब के घर भी ले जाया करते थे। क़रीब 1500 बच्चों को मेरे पिता ने तालीम दी"

लक्ष्मीकांत से मुलाकात
मुख्य लेख : लक्ष्मीकांत
"उन दिनों लक्ष्मीकांत 'पंडित हुस्नलाल भगतराम' के साथ काम करते थे, वो मुझसे 3 साल बड़े थे उम्र में, धीरे धीरे हम एक दूसरे के घर आने जाने लगे। साथ बजाते और कभी कभी क्रिकेट खेलते और संगीत पर लम्बी चर्चाएँ करते। हमारे शौक़ और सपने एक जैसे होने के कारण हम बहुत जल्दी अच्छे दोस्त बन गए।" "सी. रामचंद्र जी ने एक बार मुझे बुला कर कहा कि मैं तुम्हें एक बड़ा काम देने वाला हूँ। वो लक्ष्मी से पहले ही इस बारे में बात कर चुके थे। चेन्नई में हमने ढ़ाई साल साथ काम किया फ़िल्म थी "देवता" कलाकार थे जेमिनी गणेशन, वैजयंती माला, और सावित्री, जिसके हमें 6000 रुपए मिले थे। ये पहली बार था जब मैंने इतने पैसे एक साथ देखे। मैंने इन पैसों से अपने पिता के लिए एक सोने की अंगूठी ख़रीदी जिसकी कीमत 1200 रुपए थी।"

कुछ प्रसिद्ध गीत
लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने हिन्दी सिनेमा को बेहतरीन गीत दिये उनमें कुछ के नाम नीचे दिये गये हैं।

सावन का महीना... (फ़िल्म- मिलन)
दिल विल प्यार व्यार... (फ़िल्म- शागिर्द)
बिन्दिया चमकेगी... (फ़िल्म- दो रास्ते)
मंहगाई मार गई... (फ़िल्म- रोटी कपड़ा और मकान)
डफली वाले... (फ़िल्म- सरगम)
तू मेरा हीरो है... (फ़िल्म- हीरो )
यशोदा का नन्दलाला... (फ़िल्म- संजोग)
चिट्ठी आई है... (फ़िल्म- नाम)
एक दो तीन... (फ़िल्म- तेज़ाब)
चोली के पीछे क्या है... (फ़िल्म- खलनायक)

पंडित किशन जी महाराज

पंडित किशन महाराज
🎂जन्म 3 सितंबर, 1923
जन्म भूमि काशी, उत्तर प्रदेश
⚰️मृत्यु 4 मई, 2008
मृत्यु स्थान वाराणसी
अभिभावक पंडित हरि महाराज
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र तबला वादक
पुरस्कार-उपाधि पद्मश्री, पद्म विभूषण, संगीत नाटक अकादमी सम्मान
प्रसिद्धि तबला वादक
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी किशन महाराज तबले के उस्ताद होने के साथ साथ मूर्तिकार, चित्रकार, वीर रस के कवि और ज्योतिष के मर्मज्ञ भी थे।
किशन महाराज का जन्म काशी के कबीरचौरा मुहल्ले में 3 सितंबर 1923 को एक संगीतज्ञ के परिवार में हुआ। कृष्ण जन्माष्टमी पर आधी रात को जन्म होने के कारण उनका नाम किशन पड़ा। उन्होंने अपने प्रारंभिक वर्षों में पिता पंडित हरि महाराज से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की। पिता के देहांत के बाद उनके चाचा एवं पंडित बलदेव सहाय के शिष्य पंडित कंठे महाराज ने उनकी शिक्षा का कार्यभार संभाला।

तबला वादन
किशन महाराज ने तबले की थाप की यात्रा शुरू करने के कुछ साल के अंदर ही उस्ताद फ़ैयाज़ ख़ाँ, पंडित ओंकार ठाकुर, उस्ताद बड़े ग़ुलाम अली खां, पंडित भीमसेन जोशी, वसंत राय, पंडित रवि शंकर, उस्ताद अली अकबर खान जैसे बड़े नामों के साथ संगत की। कई बार उन्होंने संगीत की महफिल में एकल तबला वादन भी किया। इतना ही नहीं नृत्य की दुनिया के महान् हस्ताक्षर शंभु महाराज, सितारा देवी, नटराज गोपी कृष्ण और बिरजू महाराज के कार्यक्रमों में भी उन्होंने तबले पर संगत की। उन्होंने एडिनबर्ग और वर्ष 1965 में ब्रिटेन में कॉमनवेल्थ कला समारोह के साथ ही कई अवसरों पर अपने कार्यक्रम प्रस्तुत कर प्रतिष्ठा अर्जित की। उनके शिष्यों में वर्तमान समय के जाने माने तबला वादक पंडित कुमार बोस, पंडित बालकृष्ण अय्यर, सुखविंदर सिंह नामधारी सहित अन्य नाम शामिल हैं।

प्रभावशाली व्यक्तित्व
आदरणीय स्वर्गीय पंडित किशन महाराज प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी थे, माथे पर एक लाल रंग का टिक्का हमेशा लगा रहता था, वे जब संगीत सभाओं में जाते, संगीत सभायें लय ताल से परिपूर्ण हो गंधर्व सभाओं की तरह गीत, गति और संगीतमय हो जाती। तबला बजाने के लिए वैसे पद्मासन में बैठने की पद्धति प्रचलित हैं, किंतु स्वर्गीय पंडित किशन महाराज जी दोनों घुटनों के बल बैठ कर वादन किया करते थे, ख्याल गायन के साथ उनके तबले की संगीत श्रोताओं पर जादू करती थी, उनके ठेके में एक भराव था, और दांये और बांये तबले का संवाद श्रोताओं और दर्शकों पर विशिष्ट प्रभाव डालता था। अपनी युवा अवस्था में पंडित जी ने कई फ़िल्मों में तबला वादन किया, जिनमें नीचा नगर, आंधियां, बड़ी माँ आदि फ़िल्में प्रमुख हैं। कहते हैं न महान् कलाकार एक महान् इंसान भी होते हैं, ऐसे ही महान् आदरणीय स्वर्गीय पंडित किशन महाराज जी भी थे, उन्होंने बनारस में दूरदर्शन केन्द्र स्थापित करने के लिए भूख हड़ताल भी की और संगत कलाकारों के प्रति सरकार की ढुलमुल नीति का भी पुरजोर विरोध किया।[1]

बिंदास जीवन शैली
किशन महाराज का ज़िंदगी जीने का अन्दाज़ बहुत बिंदास रहा। उन्होंने ज़िंदगी को हमेशा 'आज' के आइने में देखा और अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ बिंदास जिया। लुंगी कुर्ते में पूरे मुहल्ले की टहलान और पान की दुकान पर मित्रों के साथ जुटान ताज़िंदगी उनका शगल बना रहा। मर्ज़ी हुई तो भैंरो सरदार को एक्के पर साथ बैठाया और घोड़ी को हांक दिया। तबीयत में आया तो काइनेटिक होंडा में किक मारी और पूरे शहर का चक्कर मार आए।

दिनचर्या
उनकी दिनचर्या पूजा पाठ, टहलना, रियाज, अपने शौक़ पूरे करना, मित्रों से गप्पे मारना था। यह सब ज़िंदगी की आखिरी घड़ी तक जारी रहा। वे बड़ी बेबाकी से कहते थे कि मैं कोई उलझन या दुविधा नहीं पालता बल्कि उसे जल्दी से जल्दी दूर कर देता हूं। ताकि न रहे बांस और न बजे बांसुरी। साठ साल पहले शेविंग के दौरान मूंछें सेट करने में एक तरफ छोटी तो दूसरी तरफ बड़ी हो जाने की दिक्कत महसूस की तो झट से उसे पूरी तरह साफ़ करा दिया। इसके बाद फिर कभी मूंछ रखने की जहमत नहीं उठाई। उनकी दिनचर्या बड़ी नियमित थी। प्रात: छह बजे तक उठ जाते थे। बगीचे की सफाई, चिड़ियों को दाना पानी और फिर टहलने निकल जाते थे।

पसंद-नापसंद
किशन महाराज का खानपान का भी अपना अलग स्टाइल था। दाल, रोटी, चावल के साथ छेना या केला और लौकी चाप उन्हें काफ़ी पसंद था। गर्मी के सीजन में दोपहर में सप्ताह में दो तीन रोज सत्तू भी खाते थे। परंपरागत बनारसी नाश्ता पूड़ी-कचौड़ी उन्हें पसंद नहीं था। कभी-कभार किसी पार्टी में पंडित जी पैंट-शर्ट में भी जलवा बिखेरते दिख जाते थे। मगर अलीगढ़ी पायजामा और कुर्ता उनका पसंदीदा पहनावा था। गहरेबाजी, पतंगबाजी और शिकार के शौकीन रहे पंडित जी क्रिकेट और हॉकी में भी ख़ासी दिलचस्पी रखते थे।[2]

सम्मान और पुरस्कार
लय भास्कर, संगीत सम्राट, काशी स्वर गंगा सम्मान, संगीत नाटक अकादमी सम्मान, ताल चिंतामणि, लय चक्रवती, उस्ताद हाफिज़ अली खान व अन्य कई सम्मानों के साथ पद्मश्री व पद्म विभूषण अलंकरण से इन्हें नवाजा गया।

निधन
किशन महाराज 3 सितम्बर 1923 की आधी रात को ही इस धरती पर आए थे और 4 मई, 2008 की आधी रात को ही वे इस धरती को छोड़, स्वर्ग की सभा में देवों के साथ संगत करने हमेशा के लिए चले गए। उनके जाने से भारत ने एक युगजयी संगीत दिग्गज को खो दिया।

अच्छी फिल्मों की गंदी हिरोइन सोनम खान

अभिनेत्री सोनम
बख्तावर खान
भारत
अन्य नामों
सोनम राय
पेशा
अभिनेत्री
🎂जन्म की तारीख और समय: 2 सितंबर 1972
जीवनसाथी
राजीव राय (1991-2016 तलाकशुदा)
बच्चे
1
रिश्तेदार
रज़ा मुराद (चाचा)
मुराद (दादा)
सनोबर कबीर (चचेरे भाई)

सोनम का नाम उनके माता-पिता (मुशीर खान-पिता और तलत खान-मां) ने "बख्तावर" रखा था। 
"सोनम" उनका स्क्रीन-नाम है, जिसे यश चोपड़ा ने भारतीय फिल्म उद्योग में अधिक विपणन योग्य बनाने का सुझाव दिया था। उनकी पहली रिलीज 1987 में रमेश बाबू के साथ तेलुगु भाषा की फिल्म सम्राट थी। उन्होंने 1988 में ऋषि कपूर के साथ फिल्म विजय में यश चोपड़ा द्वारा लॉन्च किए जाने के बाद बॉलीवुड उद्योग में अपनी शुरुआत की ।
1989 में उनकी नौ फिल्में रिलीज हुईं और उस साल उन्हें फिल्म त्रिदेव से प्रसिद्धि मिली , जहां लोकप्रिय गाना ओए ओए...तिरछी टोपी वाले उन पर फिल्माया गया और उन्हें एक सेक्स सिंबल के रूप में स्थापित किया गया । उन्हें मिट्टी और सोना में आलोचनात्मक प्रशंसा मिली, जहां उन्होंने एक कॉलेज छात्रा की जटिल दोहरी भूमिका निभाई, जिसे अपनी आजीविका बनाए रखने के लिए अजीब काम करना पड़ता है।

1990 में सोनम की दस फिल्में रिलीज़ हुईं, जिनमें बॉक्स ऑफिस पर हिट क्रोध और उनकी एकमात्र बंगाली भाषा की फिल्म मंदिरा भी शामिल थी । वह तेलुगु भाषा की सुपरहिट फिल्म कोडमा सिम्हम में चिरंजीवी के साथ भी नजर आई थीं ।

1991 में उनकी पहली रिलीज़ अमिताभ बच्चन , डिंपल कपाड़िया और ऋषि कपूर के साथ मल्टी-स्टारर अजूबा थी । यह अपने समय की सबसे महंगी फिल्मों में से एक थी। उस वर्ष उनकी सात अन्य फ़िल्में रिलीज़ हुईं, जिनमें से संजय दत्त के साथ फतेह ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया।

1992 में, उन्होंने तीसरी और आखिरी बार नसीरुद्दीन शाह के साथ बड़े बजट की विश्वात्मा में काम किया , जिसने नाटकीय रूप से अच्छा प्रदर्शन किया। अपनी शादी के बाद, वह चुनिंदा रूप से दिखाई दीं और गोविंदा के साथ बाज़ (1992) , चंकी पांडे के साथ पुलिस वाला (1993) और संजय दत्त के साथ इंसाफ अपने लहू से (1994) जैसी फिल्मों में अभिनय किया ।
1991 में, सोनम ने निर्देशक राजीव राय से शादी की , जिन्होंने उन्हें दो बेहद सफल फिल्मों, त्रिदेव और विश्वात्मा में निर्देशित किया था । राजीव त्रिमूर्ति फिल्म्स बैनर के संस्थापक, सफल फिल्म निर्माता गुलशन राय के बेटे थे ।  जहां सोनम मुस्लिम थीं, वहीं राजीव और उनका परिवार पंजाब के हिंदू थे। शादी के बाद सोनम ने एक्टिंग छोड़ दी और खुद को अपने परिवार के लिए समर्पित कर दिया। दंपति को जल्द ही एक बेटा गौरव राय हुआ। हालाँकि बाद में उनका तलाक हो गया।

उस दौर में जब बॉलीवुड अंडरवर्ल्ड माफिया की चपेट में था, सोनम गैंगस्टर अबू सलेम के दबाव में आ गईं , जिसका पहले उनके साथ कुछ लेन-देन था।1997 में, संगठित अपराध नेता अबू सलेम के लिए काम करने वाले बंदूकधारियों द्वारा उनके पति के जीवन पर हमला किए जाने के बाद उन्हें अपने पति और बेटे के साथ भारत छोड़ना पड़ा ।यह जोड़ा शुरू में लॉस एंजिल्स चला गया और फिर लगभग दो दशकों तक स्विट्जरलैंड में बस गया। हालाँकि, अंडरवर्ल्ड से मिल रही परेशानियों और भारत में अपना-अपना करियर नहीं बना पाने के कारण दोनों को पेशेवर निराशाओं का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उनकी शादी ख़राब हो गई। 2016 में, 15 साल के अलगाव के बाद, सोनम और राजीव राय ने आखिरकार तलाक ले लिया
📽️
1988 विजय निशा मेहरा हिंदी
आखिरी अदालत निशा शर्मा हिंदी
मुग्गुरू कोडुकुलु शोभा रानी तेलुगू
1989 आख़िरी ग़ुलाम सोनम हिंदी
आखिरी बाजी सपना हिंदी
त्रिदेव रेणुका हिंदी
मिट्टी और सोना अनुपमा/नीलिमा हिंदी
सच्चाई की ताक़त रेखा हिंदी
ना-इंसाफी रीता हिंदी
आसमां से ऊंचा सोनम हिंदी
गोला बारूद हिंदी
हम भी इंसान हैं सोनी हिंदी
1990 क्रोध सोनू हिंदी
प्यार का कर्ज़ मोना हिंदी
जीने दो सुजाता हिंदी
नाकाबंदी सोनिया हिंदी
मंदिरा मंदिरा बंगाली
चोर पे मोर बसंती हिंदी
आज के शहंशाह बरखा हिंदी
कोडामा सिम्हाम तेलुगू
अपमान की आग मोना हिंदी
शेरा शमशेरा दुर्गा हिंदी
1991 रईसजादा हिंदी
स्वर्ग जैसा घर आशा हिंदी
अजूबा शहजादी हिना हिंदी
दुश्मन देवता गंगा हिंदी
फतेह साहिरा हिंदी
अजूबा कुदरत का हिंदी
कोहराम धन्नो हिंदी
मतवाले करो सोनू हिंदी
1992 विश्वात्मा रेणुका हिंदी
बाज़ हिंदी
1993 पुलिस वाला मीनाक्षी हिंदी
1994 फंटूश करो निम्मो हिंदी
इन्साफ अपने लहू से निशा हिंदी
इंसानियत राधा हिंदी

शुक्रवार, 1 सितंबर 2023

इष्मित सिंह

इश्मित सिंह सोढी
जन्म
🎂02 सितम्बर 1988
Ludhiana, Punjab, India
निधन
⚰️29 जुलाई 2008 (उम्र 19)
Chaaya Island Dhonveli, Maldives
विधायें
Playback singing, Indian classical music
पेशा
गायक
इश्मित सिंह भारत के सबसे प्रतिभाशाली नवोदित गायकों में से एक थे। स्टार प्लस के रियलिटी शो वॉयस ऑफ इंडिया के वर्ष 2007 के विजेता गायक लुधियाना के इश्मित सिंह 24 नवंबर 2007 को लखनऊ के हर्षित सक्सेना को हराकर हिंदुस्तान की आवाज बने थे। वे इस प्रतियोगिता में विजयी होने के बाद महज 18 साल की उम्र में अपनी दिलकश आवाज के जरिए लाखों दिलों की धड़कन बन गए थे। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने इश्मित को स्वयं अपने हाथों से विजेता का खिताब सौंपा था।
इश्मीत का पहला एल्बम 'सतगुर तुमेरे काज सवार' नाम का एक धार्मिक गुरबानी था । Star Voice Of India में इश्मीत सिंगर अभिजीत और अल्का याग्निक के फेवरेट थे। सिंह ने गुरुनानक पब्लिक स्कूल, सराभा नगर, लुधियाना से अपनी स्कूलिंग की। स्नातक की डिग्री लेने के बाद वो मुंबई में एम.एन.सी कॉलेज से पढ़ाई कर रहे थे । 
इश्मीत ने अपनी मां से वादा किया था कि वो सीए लेवल की पढ़ाई पूरी करेंगे । इश्मीत को गायकी की शिक्षा अपने परिवार से मिली थी । 17 साल की उम्र में उन्होंने शो में हिस्सा लिया था । उनके गाने का स्टाइल शान से मिलता-जुलता था । इश्मीत बहुत शांत स्वभाव के थे ।  ये शो जीतने के बाद इश्मीत का सिंगिंग करियर अच्छा चल रहा था । लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था ।
शो जीतने के एक साल बाद ही उनका निधन हो गया । इश्मीत एक परफॉर्मेंस के सिलसिले में मालदीव गए थे। यहां उनके प्रोग्राम से दो दिन पहले स्विमिंग पूल में उनकी लाश मिली थी। सवाल उठने लगे कि आखिर इश्मीत की मौत कैसे हुई । हालांकि पुलिस का कहना था कि इश्मीत पूल में नहाने के लिए उतरे थे । जहां उनके सिर पर चोट लगी और वो डूब गए । इश्मीत को स्विमिंग नहीं आती थी । 
इश्मीत के पैरेंट्स ने पुलिस से छानबीन करने की मांग की थी । उनका कहना था हो सकता है जब वो डूब रहा हो तो लोग तमाशा देख रहे हों, या इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ठीक से ईवेंट ऑर्गनाइज ना कर पाई हो । पंजाब सरकार ने पुलिस को छानबीन के आदेश भी दिए थे । बाद में हॉस्पिटल ने बताया था कि इश्मीत के माथे पर कट का निशान था ।
🎂02 सितम्बर 1988
Ludhiana, Punjab, India

⚰️29 जुलाई 2008 (उम्र 19)

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